Live-in Relationship का खौफनाक अंजाम

Live-in Relationship, लेखक – महेश कांत शिवा

27 जून, 2025 को हरियाणा के पानीपत में एक औरत की उस के लिवइन पार्टनर ने गला काट कर हत्या कर दी और फरार हो गया. दरअसल, उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के गांव केलई की रहने वाली उषा के पति की काफी दिनों पहले मौत हो गई थी. गांव में रोजगार न होने के चलते वह कामधंधे की तलाश में पानीपत चली आई.

उषा पानीपत की गंगाराम कालोनी में किराए के कमरे में रहने लगी. यहां पर उस की मुलाकात उत्तर प्रदेश के बदायूं के रहने वाले महेंद्र नामक एक नौजवान से हुई. पहले उन दोनों में दोस्ती हुई और फिर बाद में उन्होंने लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला कर लिया.

बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से उषा और महेंद्र में किसी बात को ले कर झगड़ा चल रहा था. 24 जून, 2025 को महेंद्र्र ने चाकू से उषा का गला काट कर उस की हत्या कर दी और फरार हो गया. हालांकि, पुलिस ने महेंद्र को 2 दिन बाद ही गिरफ्तार कर लिया.

महेंद्र ने पुलिस को बताया कि उषा उस से बातबात पर झगड़ा करने लगी थी. उसे शक था कि वह किसी दूसरे मर्द से फोन पर बात करने लगी थी. उस की इसी हरकत से तंग आ कर उस ने उषा की हत्या कर दी.

इसी तरह पश्चिम बंगाल की रहने वाली 24 साल की ब्यूटी खातून तकरीबन 6 महीने पहले अपने परिवार वालों को बिना बताए पानीपत आई थी. यहां वह पुराना औद्योगिक क्षेत्र के कुलदीप नगर में किराए पर रहने लगी और एक फैक्टरी में काम करने लगी.

इसी दौरान ब्यूटी खातून की जानपहचान सूरज पठान नाम के एक नौजवान से हुई. दोनों में पहले दोस्ती हुई और कुछ ही दिनों में दोस्ती प्यार में बदल गई. इस के बाद वे लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे.

हालांकि, ब्यूटी खातून ने अपनी बहन नेहा खातून को फोन कर के बता दिया था कि वह पानीपत में है और एक लड़के से प्यार करती है और वे दोनों एकसाथ रहते हैं. पर 19 जून, 2025 को सूरज पठान ने ब्यूटी खातून की हत्या कर दी.

गिरफ्तारी के बाद सूरज पठान ने बताया कि ब्यूटी खातून उस के अलावा किसी दूसरे लड़के से भी बात करती थी. उस ने अनेक बार ब्यूटी खातून को सम?ाया कि वह किसी दूसरे से बात न करे, लेकिन वह नहीं मानी.

इसी के चलते सूरज पठान ने 19 जून, 2025 को ईंट से ब्यूटी खातून के सिर पर वार किया, जिस से उस की मौत हो गई.

14 जून, 2025 को पानीपत से सटे करनाल शहर में 35 साल की पूजा नामक औरत की हत्या भी उस के लिवइन पार्टनर ने कर दी थी.

पूजा मूल रूप से कंबोपुरा गांव की रहने वाली थी और उस की शादी गांव बढ़ेडा में हुई थी. वह 3 बच्चों की मां थी. वह अपने पति को छोड़ कर करनाल की दीवान कालोनी में एक आदमी के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी थी.

उन दोनों में किसी बात को ले कर झगड़ा हुआ और पूजा के लिवइन पार्टनर ने उस की गला दबा कर हत्या कर दी और लाश को एक एंबुलैंस में घर के बाहर छोड़ कर फरार हो गया.

हरियाणा के पलवल के गांव नांगल ब्राह्मण का रहने वाला योगेश फरीदाबाद में प्राइवेट नौकरी करता था, जहां उस की जानपहचान उत्तर प्रदेश के अयोध्या की रहने वाली एक लड़की से हुई. दोनों में मुलाकात हुई और प्यार हो गया. इस के बाद योगेश ने साल 2017 में उस लड़की से लवमैरिज की थी.

शादी के बाद योगेश के 2 बच्चे हुए, जिन में 6 साल की बेटी और 10 महीने का बेटा था. इस के बाद उस की अपनी पत्नी से अनबन रहने लगी, तो योगेश की पत्नी उसे छोड़ कर बच्चों समेत अपने मायके चली गई और वहीं रहने लगी.

पत्नी के मायके जाने के बाद योगेश फरीदाबाद की नौकरी छोड़ कर हरियाणा के रेवाड़ी आ गया और यहां के धारूहेड़ा इलाके में एक अस्पताल में ओटी असिस्टैंट की नौकरी करने लगा.

नौकरी के दौरान योगेश की मुलाकात करनाल के वकीलपुरा सदर बाजार की रहने वाली प्रिया से हुई. दोनों में दोस्ती हुई और फिर प्यार हो गया, जिस के बाद उन दोनों ने लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया.

बाद में प्रिया भी अपने 3 बच्चों को ले कर आ गई और वे धारूहेड़ा के सैक्टर 6 में एक किराए के मकान में रहने लगे. प्रिया ने अपने तीनों बच्चों का दाखिला गुरुकुलम स्कूल में करा दिया.

बताया जाता है कि उन दोनों के बीच कुछ समय से किसी बात को ले कर अनबन चल रही थी. इसी बीच स्कूल की छुट्टी पड़ने के चलते प्रिया ने अपने तीनों बच्चों को अपनी बहन के पास भेज दिया. अब मकान में योगेश और प्रिया ही रह रहे थे.

जानकारी के मुताबिक, 2 से 6 जून, 2025 के बीच योगेश ने अपनी लिवइन पार्टनर प्रिया की गला घोंट कर हत्या कर दी और लाश को बैड में छिपाने के बाद खुद भी फांसी का फंदा लगा कर खुदकुशी कर ली.

इस बात का पता तब चला जब 6 जून, 2025 को लोगों को योगेश के मकान से बदबू आई, जिस के बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़ा तो योगेश फांसी पर लटका हुआ मिला.

रेवाड़ी पुलिस ने भी रूटीन वर्क की तरह योगेश की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आगे की जांच में जुट गई. उस वक्त योगेश के परिवार वालों सुसाइड करने की वजह पत्नी से अनबन होना बताई थी.

बेटे की मौत के बाद योगेश के पिता गिरीराज 19 जून को अपने बेटे का सामान लेने के लिए धारूहेड़ा पहुंचे. जब वे कमरे से बैड को उठाने लगे, तो वह काफी भारी लगा.

जैसे ही बैड खोला गया, तो उस में कपड़ों के बीच में एक औरत हाथ दिखाई दिया. वह योगेश की लिवइन पार्टनर प्रिया की लाश थी.

इसी तरह मूल रूप से उत्तराखंड के नानकमत्ता की रहने वाली 2 बच्चों की मां पूजा गुरुग्राम के थाना सैक्टर 5 में उत्तराखंड के ही सितारगंज गौरीखेड़ा के मूल बाशिंदे 25 साल के मुश्ताक अहमद के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहती थी.

पूजा एक स्पा सैंटर में काम करती थी, जबकि मुश्ताक टैक्सी चलाता था. कुछ दिनों पहले मुश्ताक पूजा को घुमाने के बहाने उत्तराखंड ले गया और वहां पर गरदन धड़ से अलग कर उस की हत्या कर दी.

हत्या के बाद मुश्ताक ने लाश के सिर को एक प्लास्टिक के थैले में डाल कर नाले में बहा दिया, जबकि धड़ को चादर में लपेट कर दूसरे नाले में फेंक दिया और छिपने के लिए कर्नाटक भाग गया.

उधर, जब काफी दिनों से पूजा नहीं मिली, तो उस की बहन ने उस की थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई. पूजा की बहन ने पुलिस को बताया था कि उस की बहन मुश्ताक के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहती थी.

गुरुग्राम सैक्टर 5 थाना पुलिस ने पहले तो गुरुग्राम में ही पूजा की तलाश की, लेकिन जब वह नहीं मिली, तो उत्तराखंड में स्थानीय पुलिस के सहयोग से मुश्ताक को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई.

मुश्ताक ने पुलिस को बताया कि उस की पूजा से मुलाकात रुद्र्रपुर बसस्टैंड पर हुई थी. वे दोनों बस से गुरुग्राम आ रहे थे. चूंकि दोनों एक ही राज्य के रहने वाले थे, तो दोनों में आसानी से दोस्ती हो गई. दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ऐक्सचेंज किया.

इसी बीच पूजा की बहन की तबीयत खराब हो गई, तो मुश्ताक उसे अपनी टैक्सी में ले कर उस की बहन के घर भी गया, जिस से दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई और उन्होंने लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला किया. तब से पूजा मुश्ताक को अपना पति मानने लगी थी.

इस बीच मुश्ताक अपने घर उत्तराखंड गया तो उस के परिवार वालों ने उस पर दबाव बना कर अपनी रिश्तेदारी की ही एक लड़की से शादी करा दी. जब पूजा को इस बात का पता चला तो वह मुश्ताक के घर पहुंच गई और मुश्ताक को अपना पति बताते हुए हंगामा किया. परिवार और रिश्तेदारों ने विवाद को आगे न बढ़ाते हुए पूजा और मुश्ताक को घर से बाहर निकाल दिया.

कुछ दिनों बाद मुश्ताक पूजा को धूमाने के बहाने उत्तराखंड ले गया और गरदन काट कर उस की हत्या कर दी.

बढ़ती जरूरतें और इच्छाएं

दरअसल, लिवइन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों की समय बढ़ने के साथसाथ जरूरतें और इच्छाएं भी बढ़ने लगती हैं. लिवइन रिलेशनशिप में आने से पहले दोनों के बीच भले ही यह सहमति बने कि वे दोनों एकदूसरे पर निर्भर नहीं रहेंगे, दोनों एकदूसरे पर पैसे से जुड़ा दबाव या सामाजिक बंधन का दबाव नहीं डालेंगे.

लेकिन जैसेजैसे समय गुजरता है और दोनों के बीच रिश्ता गहरा होता चला जाता है, वैसे ही उन की जरूरतें बढ़नी शुरू हो जाती हैं. दोनों में कहीं न कहीं वे भावनाएं भी पैदा होने लगती हैं, जो पतिपत्नी के रिश्ते के बीच होती हैं.

लिवइन रिलेशनशिप टूटने की दूसरी बड़ी वजहें

* दोनों के साथ रहने के चलते उन के खर्चे भी बढ़ते चले जाते हैं, फिर खर्चे उठाएगा कौन, यह सम?ा नहीं आता.

* लड़की या लड़के द्वारा शादी का दबाव बनाना.

* रसोईघर का खर्च और मकान का किराया कौन भरेगा, यह बड़ी समस्या.

* अगर दोनों के पहले से बच्चे हैं, तो उन की स्कूल फीस और दूसरे खर्च कौन उठाएगा.

* दोनों के घूमनेफिरने पर होने वाला खर्च किस की जेब से जाएगा.

* आपसी संबंध बनने के बाद महिला का पेट से हो जाना.

* परिवार द्वारा लड़के या लड़की की शादी दूसरी जगह तय कर दिया जाना. Live-in Relationship

Live-In Relationship बम है या बर्फ

Live-In Relationship : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अपनी एक खास टिप्पणी में कहा है कि समाज में ‘लिवइन’ संबंधों को मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन नौजवान पीढ़ी इन संबंधों की ओर खिंच रही है. अदालत के मुताबिक, अब समय आ गया है कि समाज में नैतिक मूल्यों को बचाने के लिए हमें कुछ रूपरेखा तैयार करनी चाहिए और समाधान निकालना चाहिए.

जस्टिस नलिन कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “हम बदलते समाज में रहते हैं जहां परिवार, समाज या कार्यस्थल पर युवा पीढ़ी का नैतिक मूल्य और सामान्य आचरण बदल रहा है.”

अदालत ने इस टिप्पणी के साथ वाराणसी जिले के आकाश केशरी को जमानत दे दी.

आकाश केशरी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सारनाथ थाने में मामला दर्ज किया गया था.

अदालत ने कहा कि जहां तक ‘लिवइन संबंध’ का सवाल है, इसे कोई सामाजिक मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन नौजवान लोग ऐसे संबंधों की ओर खिंचते हैं, क्योंकि वे अपने साथी के प्रति अपनी जिम्मेदारी से आसानी से बच सकते हैं.

लिवइन रिलेशनशिप एक तरह का ऐसा संबंध है, जहां 2 लोग एकसाथ रहते हैं और एक दूसरे के साथ भावनात्मक और शारीरिक संबंध बनाते हैं, लेकिन वे शादीशुदा नहीं होते हैं या उन में किसी भी तरह के औपचारिक संबंध में नहीं होते हैं. वे अपने संबंध को अपने तरीके से चलाते हैं और अपने फैसले लेते हैं.

लिवइन रिलेशनशिप के फायदे

-यह दोनों लोगों को अपने संबंध को अपने तरीके से चलाने की आजादी देता है.

-यह दोनों लोगों को एकदूसरे के साथ समय बिताने और एकदूसरे के साथ भावनात्मक और शारीरिक संबंध बनाने का मौका देता है.

-यह दोनों लोगों को अपने संबंध को अपने तरीके से खत्म करने की आजादी देता है.

लिवइन रिलेशनशिप के नुकसान

-यह दोनों लोगों को समाज में अलगथलग महसूस करा सकता है.

-यह दोनों लोगों को अपने संबंध को औपचारिक रूप से मंजूरी नहीं दिला सकता है.

आइए देखिए और समझिए कई चर्चित लोगों की लिवइन रिलेशनशिप :

सैफ अली खान और रोसा कैटरीना ने साल 2011 में लिवइन रिलेशनशिप में रहना शुरू किया था, लेकिन बाद में वे दोनों अलग हो गए.

करीना कपूर और सैफ अली खान ने साल 2007 में लिवइन रिलेशनशिप में रहना शुरू किया था और साल 2012 में शादी कर ली थी.

कोंकणा सेन शर्मा और रणवीर शौरी ने साल 2007 में लिवइन रिलेशनशिप में रहना शुरू किया था और साल 2010 में शादी कर ली थी. साल 2020 में उन का तलाक हो गया था.

नेहा धूपिया और रोहन रोशन ने साल 2008 में लिवइन रिलेशनशिप में रहना शुरू किया था, लेकिन बाद में वे दोनों अलग हो गए थे.

अनुराग कश्यप और कल्कि कोचलिन ने साल 2011 में लिवइन रिलेशनशिप में रहना शुरू किया था, फिर शादी की और साल 2015 में तलाक ले लिया था.

दरअसल, यह जानकारी सार्वजनिक रूप से मुहैया है और इन लोगों ने अपने रिश्तों के बारे में खुल कर बात की है.

लिव इन रिलेशन : बंधन में बंधने से पहले जानें ये जरूरी बातें

लिव इन रिलेशनशिप आज के समय में तेजी से बढ़ रहा है. एक समय ऐसा था जब ऐसे संबंध होने पर लोग खुल कर बात करना पसंद नहीं करते थे. लेकिन आजकल लोग खुल कर इस रिलेशनशिप में रहते हैं खासकर युवा इस रिश्ते को अपनाने में सहजता का अनुभव करते हैं, क्योंकि इस में दायित्व कम होता है.

सेक्स की आजादी

इस बारे में मुंबई की सोशल ऐक्टिविस्ट नीलम गोरहे कहती हैं, ‘‘यह रिश्ता तब तक ठीक रहता है जब तक महिलाओं को कोई समस्या नहीं आती. महिलाएं मेरे पास तब आती हैं जब उन का बौयफ्रैंड उन्हें छोड़ कर चला गया हो या चोरीछिपे शादी कर ली हो. ऐसे में हरेक महिला यही चाहती है कि रिश्ते को मैं ठीक कर दूं. उस लड़के से कहूं कि उसे अपना ले.

‘‘असल में इस रिश्ते के लिए अधिकतर लड़के ही आगे आते हैं, क्योंकि प्यार से अधिक इस में सेक्स की आजादी होती है. यह रिश्ता जितनी आजादी देता है, उतना ही खतरनाक भी होता है. मेरे पास एक मातापिता ऐसे आए जिन की लड़की का मर्डर हो चुका था पर कोई पू्रफ नहीं था. उसे मारने वाला उस का बौयफ्रैंड ही था.

3-4 साल से वह लड़की उस लड़के के साथ लिव इन रिलेशनशिप में थी, जिस का पता उस के मातापिता को नहीं था. जब पता चला तो मातापिता ने लड़की से उस से शादी करने के लिए कहा. लेकिन वह लड़का तब आनाकानी करने लगा, जिसे देख लड़की ने उस रिश्ते से बाहर निकलना चाहा. यह बात लड़के को जब पता चली तो उस ने उस का मर्डर कर दिया. उस का शव बाथरूम में मिला.

‘‘दरअसल, लड़के को यह लगा था कि अलग होने के बाद लड़की कोर्ट जा सकती है, क्योंकि वह पढ़ीलिखी थी. प्रूफ के अभाव में लड़का अभी बाहर है.’’

लिव इन रिलेशनशिप के अधिकतर मामले महानगरों में पाए जाते हैं, जहां काम या पढ़ाई के लिए युवा घर से दूर रहते हैं. उन के बीच अकसर इस तरह के रिश्ते हो जाते हैं. दरअसल, फ्लैट कल्चर में घर शेयर करने यानी साथ रहने में इन्हें फायदा भी नजर आता है.

इन रिश्तों को लड़के ही अधिकतर तोड़ते हैं, लेकिन रिश्ता टूटने पर भावनात्मक से सहज हो जाना कई बार लड़कियों के लिए मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इस में लड़की के परिवार की भूमिका न के बराबर होती है.

नीलम कहती हैं, ‘‘इस तरह के रिश्ते को बढ़ावा देने में धर्म भी कम नहीं. अधिकतर लोग विपरीत धर्म या जाति में शादी करने के लिए इजाजत नहीं देते, इसलिए रिश्ते को छिपाना पड़ता है. कई बार तो लोग दोहरी जिंदगी भी जीते हैं, जो डिप्रैशन, मर्डर, आत्महत्या जैसी कई घटनाओं को जन्म देती है.

‘‘इस रिश्ते को शादी का नाम देने के लिए मातापिता, परिवार व समाज के सहयोग की आवश्यकता होती है, जो आमतौर पर नहीं मिलता. इस रिश्ते में बड़ी समस्या तब आती है जब दोनों के बीच में बच्चा आ जाता है. बच्चा जब स्कूल जाने लगता है तब उत्तरदायित्व समझ में आता है. हालांकि आजकल डी.एन.ए. टैस्ट का प्रावधान हो चुका है, जिस से महिला को काफी राहत मिल रही है.

‘‘शादी करना आजकल काफी खर्चीला भी होता है. इस के लिए समय और संसाधन की भी जरूरत होती है. वहीं अगर शादी असफल हो जाए तो तलाक के लिए कानूनी झंझट से गुजरना पड़ता है. लिव इन रिलेशन दरअसल शादी का प्रिव्यू है जिस से व्यक्ति यह अंदाजा लगा सकता है कि शादी सफल होगी या नहीं.

ठगी की शिकार महिलाएं

सीनियर ऐडवोकेट आभा सिंह कहती हैं कि लिव इन रिलेशनशिप बड़े शहरों में अधिक है और इसे सामाजिक कलंक अभी भी हमारे समाज में माना जाता है. बहुत कम महिलाएं हिम्मत कर अपना कानूनी अधिकार पाती हैं, क्योंकि कोर्ट, वकील की बातें बहुत कठोर होती हैं. उन्हें सह पाना आसान नहीं होता.

बहुत सारी ऐसी घटनाएं हैं जिस में महिलाएं ठगी गईं पर उन्होंने रिपोर्ट नहीं लिखवाई. बौलीवुड के सुपरस्टार राजेश खन्ना की मौत के बाद उन के बंगले का विवाद सामने आया. उन के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली अनिता आडवाणी को परिवार के लोगों ने धक्के मार कर घर से बाहर निकाल दिया. जबकि वे 8 साल से राजेश खन्ना के साथ रह रही थीं. जब वे मेरे पास आईं, तो मैं ने पहली बात यही पूछी कि आप इतने दिनों तक कहां थीं? पहले क्यों नहीं आईं जब राजेश खन्ना जीवित थे? दरअसल, उन के पास ऐसा कोई प्रूफ यानी सुबूत नहीं था कि वे उन के साथ रह रही थीं, ऐसे केस में प्रूफ के लिए निम्न जगहों पर साथ रहने वाली का नाम होना चाहिए:

– जौइंट अकाउंट में.

– बिजली या मोबाइल बिल में.

– राशन कार्ड में.

ऐसा होने पर ही आप सिद्ध कर सकती हैं कि आप उस व्यक्ति से कुछ पाने की हकदार हैं.

अनिता आडवाणी को 200 करोड़ की प्रौपर्टी में से कुछ भी नहीं मिला. हाई कोर्ट में भी उन की अर्जी खारिज कर दी गई. अब वे सुप्रीम कोर्ट जा रही हैं.

इन शर्तों को जानें

गुजारा भत्ता पाने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि लिव इन रिलेशन में निम्न 4 शर्तें पूरी होना जरूरी हैं:

– ऐसे युगल समाज के सामने पतिपत्नी के तौर पर आएं.

– वे शादी की कानूनी उम्र पूरी कर चुके हों.

– उन के रिश्ते कानूनी रूप से शादी करने के लिए वर्जित न हों.

– दोनों स्वेच्छा से लंबे वक्त तक यानी कम से कम 6 साल साथ रहे हों.

रिश्ता खराब नहीं

26 नवंबर 2013 को एक अदालती आदेश में रिलेशनशिप को क्राइम नहीं माना गया. इस से इस रिश्ते को अपनाने वाले युवाओं को काफी राहत मिली. मैरिज काउंसलर संजय मुखर्जी कहते हैं कि ऐसे केसेज में दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है. यह रिश्ता खराब नहीं है. कई बार शादी के बाद पतिपत्नी में अनबन हो जाती है, इसलिए बहुत से यूथ इसे अपनाते हैं. अधिकतर आत्मनिर्भर महिलाएं ही इस रिश्ते को पसंद करती हैं, क्योंकि इस में सासससुर, ननद, देवर आदि का झंझट नहीं रहता.

यह रिश्ता एक तरह से ऐक्सपैरिमैंटल होता है, जिस में 3-4 महीने तो ठीक ही चल जाते हैं. समस्या 1 साल बाद आती है. मेरे हिसाब से 1 साल तक इस रिश्ते में रहने के बाद महिलाओं को शादी करने के बारे में सोचना चाहिए. इस के अलावा कुछ बातों पर उन्हें खास ध्यान देना चाहिए:

– अगर लड़का शादी न करना चाहे, तो वजह पता करें.

– दोनों अपनी कमाई जौइंट अकाउंट में साथसाथ डालें और दोनों उसी से खर्च करें.

– अगर शादी नहीं करनी है, तो पहले ही वकील से परामर्श कर स्टैंप पेपर पर अपने हिस्से को सुनिश्चित करवा लें.

इस के अलावा संजय कहते हैं कि लिव इन रिलेशन में बच्चे की प्लानिंग न करें ताकि आगे चल कर आने वाले बच्चे को अपराधबोध न हो.

वैसे हर रिश्ते की अपनी अलग अहमियत होती है. लेकिन जहां शादी एक महिला को सुरक्षित जीवन देती है, वहीं लिव इन रिलेशनशिप में असुरक्षा अधिक रहती है. सही यही होगा कि आप अपने रिश्ते को समझने की कोशिश करें और अपने भविष्य में आने वाली परेशानियों से अपनेआप को बचाएं.

लिव इन रिलेशनशिप: कितना सही कितना गलत

अगर आप भी रहती हैं लिव इन रिलेशनशिप में तो हो जाइए सावधान क्योंकि ये आपकी जिंदगी के लिए गलत और खतरा भी हो सकता हैं क्योंकि आजकल भले ही ये आम बात हो लेकिन आप आगे जाकर पछता सकती हैं क्योंकि ज़माना इतना ज्यादा खराब हो गया है कि आप भी इस जाल में फंस कर खुद की जिंदगी बर्बाद कर लेती हैं…और केवल अपनी जिंदगी ही नहीं बल्कि अपने साथ कई लोगों को जिंदगी भर का गम दे जाती हैं….लेकिन जब तक आपको इस बात का एहसास होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है….आप वो सब कुछ हार चुकी होती हैं जो आपको दुबारा नहीं मिलता कभी……

1. अक्सर लिव इन रिलेशनशिप में लड़कियां लड़कों के साथ रहती हैं माता-पिता तक की बात नहीं सुनती लेकिन लड़का जब उसे छोड़ देता है(क्योंकि ऐसे संबंध टूटने की नौबत ज्यादातर पुरुष की तरफ से ही होती है) तब उसे एहसास होता है कि उसने कितनी बड़ी गलती की अपने मां-बाप की बात न सुनकर लेकिन तब तक आप उन्हें दर्द दे चुकी होती हैं…जिससे वो जिंदगी भर उभर नहीं पाते क्योंकि समाज में वो मुंह दिखाने लायक नहीं रहते हैं….उन्हें बुरा लगता है बाहर निकलने में भी….जिंदगी में घुट-घुट कर जीने लगते हैं उनकी जिंदगी एक बोझ बन जाती है…..और ये सिर्फ लड़की ही नहीं बल्कि लड़के के परिवार के साथ भी होता है…..लेकिन जिंदगी तो एक लड़की की ही बर्बाद होती है.

2. अक्सर लिव इन रिलेशनशिप में बच्चें भी जन्म ले लेते हैं लेकिन जब लड़का इसके लिए रेडी नहीं होता तो एक जिंदगी को दोनों मिलकर इस दुनिया में आने से पहले ही खत्म कर देते हैं जो कहीं से भी सही नहीं होता आखिर क्यों? अपनी गलतियों की सजा उस बेजान को क्यों जो इस दुनिया में अभी आया ही नहीं है.

3. अक्सर बच्चे पैदा भी हो जाते हैं अगर तो चूंकि बिना शादी के दो लोग साथ रहते हैं तो इस बात का डर हमेशा रहता है कि कब न रिश्ता टूट जाए क्योंकि कोई शादी के बंधन में बंधे नहीं होते हैं और ना ही कोई कमिटमेंट होता है और जब रिश्ता टूटता है तो ऐसे में उस बच्चे का भविष्य खराब होता है और कभी-कभी तो ऐसा होता है कि उस बच्चे को लोग अनाथालय में दे देते हैं और खुद उस जिम्मेदीरी से पल्ला झाड़ लेते हैं.भला ये हक आपको किसने दिया कि आप उस बच्चे की जिंदगी खराब करें.

4. बिना शादी के एक साथ रहने पर अक्सर आप एक-दूसरे को छोटे-छोटे ताने मारते हैं आप एक-दूसरे की जिंदगी में ज्यादा दखल नहीं देते…किसी का भी एक-दूसरे पर कोई एहसान नहीं होता है और नाही एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं…छोटी-मोटी बातों पर अक्सर झगड़े होते हैं और फिर एक दिन वो उनका रिश्ता टूट जाता है क्योंकि ऐसे रिश्ते का कोई भविष्य नहीं होता.

5. ऐसे रिश्ते को भले ही कानून ने मंजूरी दी हो कि दो लोग आपस में जब तक चाहे रह सकते हैं क्योंकि वो बालिग है उनका अपना फैसला है लेकिन ऐसे रिश्ते समाज नहीं अपनाता और ये स्वीकृत भी नहीं है….समाज कभी भी इस रिश्ते को वो आदर वो सम्मान नहीं देता जो एक वैवाहिक संबंध से जुड़ने वाले रिश्ते को देता है.क्योंकि ये प्रथा पश्चिमी देशों में ज्यादा चलन में है.विदेशों में होता हैं ऐसा.जिसे अब भारतीयों ने भी अपना लिया है.

लिव इन रिलेशन : कमजोर पड़ रही है डोर

कुछ दिन पहले नोएडा में घटी एक घटना में लिव इन पार्टनर ने अपनी प्रेमिका श्वेता की इमारत की 8वीं मंजिल से फेंक कर हत्या कर दी. प्रेमिका द्वारा बारबार शादी के लिए दबाव बनाने की वजह से आरोपी युवक ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया. दिल्ली के सुल्तानपुरी में रहने वाले सुदामा उर्फ राजेश ने अपनी प्रेमिका मंजू का इसलिए कत्ल कर दिया, क्योंकि वह उस से एक बच्चा चाहता था. दूसरी ओर मंगोलपुरी में एक महिला ने अपने पार्टनर के रोजरोज शराब पी कर मारपीट करने से तंग आ कर खुदकुशी कर ली.

लिव इन रिलेशन में रह रहे पार्टनर की हत्या और खुदकुशी के नएनए मामले रोज सामने आ रहे हैं. ऐसे में इन रिश्तों को ले कर फिर से उंगलियां उठनी शुरू हो गई हैं. अहम सवाल यह है कि पश्चिम की इस परंपरा को तो हम ने स्वीकार कर लिया, लेकिन क्या हम अपनी पारंपरिक और दकियानूसी सोच से बाहर निकल पाए हैं.

इन तमाम मामलों पर गौर करें तो यही बात सामने आती है कि हम इस नए मौडल के साथ खुद को एडजस्ट करने में नाकाम साबित हुए हैं. यहां हम लिव इन सिस्टम पर कोई सवाल खड़े नहीं कर रहे हैं. इस की अपनी खूबियां और खामियां हैं, लेकिन जो भी मामले सामने आ रहे हैं उस से यही पता चलता है कि या तो हम पूरी तरह से इस सिस्टम को समझ ही नहीं पाए हैं या फिर इस के हिसाब से खुद को ढाल नहीं पाए हैं.

बढ़ रहा है रिश्ते का ग्राफ

एक स्त्री और पुरुष का बिना विवाह किए आपसी रजामंदी से एकसाथ रहने के रिश्ते को लिव इन रिलेशन कहते हैं. इस में एकसाथ रहने की कोई सामाजिक या आर्थिक मजबूरी नहीं होती और न ही कोई दबाव.

युवकयुवतियां सोचसमझ कर साथसाथ रहते हैं और जब चाहें अलग हो सकते हैं. कुछ समय पहले तक सोसायटी के लिए यह एक बड़ा सवाल था, लेकिन आज एक तरह से इस रिश्ते को कुछ हद तक शहरी समाज स्वीकार कर चुका है. महानगरों में यूथ ने लिव इन कल्चर को तेजी से अपना लिया है.

युवाओं ने अपनी सहूलत को ध्यान में रख ऐसे रिश्तों की ओर तेजी से कदम बढ़ाया. इस तेज रफ्तार जिंदगी में संतुलन बनाए रखने और कैरियर में आगे बढ़ने के लिए युवाओं को लिव इन रिलेशनशिप बिना बंधन के आसान रास्ता नजर आता है. यही वजह है कि ऐसे रिश्तों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है.

चौराहे पर रिश्ता

आएदिन पार्टनर की हत्या और खुदकुशी के मामलों ने इस रिश्ते को चौराहे पर ला कर खड़ा कर दिया है. जिस स्वतंत्रता की चाहत में युवकयुवती एकदूसरे के करीब आए थे, वहां अब एक नए तरह का बंधन उन्हें नजर आने लगा है.

नोएडा में हुई ब्यूटीशियन श्वेता की मौत ने तरक्की पसंद शहरों में बदलते रिश्ते को ले कर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पति और ससुराल वालों के अत्याचार से परेशान श्वेता ने बागपत से नोएडा आ कर अपना काम शुरू किया था.

करीब डेढ़ साल पहले उस की जिंदगी में मुकेश आया. वह उस का बचपन का साथी था. दोनों आपसी रजामंदी के साथ रहने लगे. श्वेता की इतनी ही ख्वाहिश थी कि मुकेश उस से शादी कर ले, लेकिन शादी के इसी दबाव ने उस की जान ले ली. आरोप है कि मुकेश ने बिल्डिंग की 8वीं मंजिल से उसे नीचे फेंक दिया, जिस के कारण उस की मौत हो गई. पुलिस ने श्वेता की 10 साल की बेटी के बयान पर आरोपी मुकेश को गिरफ्तार कर लिया.

दिल्ली के सुल्तानपुरी में भी कुछ दिन पहले ऐसी ही कहानी दोहराई गई, लेकिन यहां मामला कुछ अलग था. यहां एक महिला मंजू के साथ सुदामा उर्फ राजेश लिव इन रिलेशन में रहता था.

करीब 11 साल पहले दोनों के बीच दोस्ती हुई थी. दोनों 7 साल से एकसाथ रह रहे थे. राजेश को कई साल से बच्चे की चाह थी, लेकिन मंजू इस के लिए तैयार नहीं थी. इसी बात को ले कर दोनों के बीच अकसर लड़ाई होती थी. मंजू का कहना था कि जब बच्चे की चाह थी तो शादी करनी चाहिए थी, फिर लिव इन रिलेशन में रहने का इतने सालों तक बहाना क्यों बनाया. मंजू की यह बात राजेश को नागवार गुजरी और आखिर इसी बात को ले कर उस ने मंजू की हत्या कर दी.

नहीं बदली है सोच

दरअसल, पश्चिम की इस परंपरा को हम ने अपनी सुविधा के हिसाब से आत्मसात तो कर लिया, लेकिन हमारी सोच वैसी ही पुरातनपंथी बनी हुई है. सवाल यह है कि जब इस रिलेशनशिप में कोई भी पार्टनर कभी भी अलग हो सकता है तो यहां दबाव बनाने जैसी कोई बात होनी ही नहीं चाहिए थी.

राजेश को यह सोचना चाहिए था कि मंजू उस की पत्नी नहीं थी, इसलिए उस पर बच्चे के लिए दबाव बनाना सरासर गलत था. वहीं श्वेता का मुकेश पर शादी के लिए दबाव बनाना लिव इन रिलेशनशिप की कसौटी पर खरा नहीं कहा जा सकता है.

इस रिलेशन में अलग होने की सुविधा है. यह पारंपरिक शादी की तरह जटिल बंधन नहीं है. अलग होने के लिए लोगों को किसी की सहमति की जरूरत नहीं होती.

लिव इन रिलेशनशिप में अगर पार्टनर के साथ संबंध ठीक है, तो ठीक, नहीं तो उस रिलेशनशिप को वहीं पर खत्म कर दिया जाना चाहिए. इसे आगे बढ़ाने का मतलब है मौत को दावत देना. इस रिलेशनशिप में कंप्रोमाइज के लिए कोई जगह नहीं होती. वैस्टर्न कल्चर में यह ‘वाकइन, वाकआउट’ रिलेशनशिप मानी जाती है.

दोनों पार्टनर में से जो भी जब चाहे, इस से बाहर आ सकता है और दूसरे के खिलाफ नैतिक जिम्मेदारी, बदचलनी का आरोप नहीं लगाता है. दरअसल, पश्चिम के इस मौडल को हम ने अपना तो लिया है, लेकिन हमारी सोच जस की तस बनी हुई है. पुरुष लिव इन पार्टनर को अपनी प्रौपर्टी समझने की भूल कर बैठता है. वह अपनी पार्टनर के साथ आम पति की तरह व्यवहार करने लगता है वहीं युवती भी शादी की जिद करने लग जाती है, जोकि सही नहीं है.

एकदूसरे के साथ ज्यादा वक्त गुजारने पर युवक या युवती भावुक होने लगते हैं, जोकि इस रिलेशनशिप के लिए फिट नहीं बैठता. इसलिए कुछ भी गलत होने से पहले ही इस रिश्ते पर विराम लगा देना चाहिए.

भरोसे की कमी

अब मंगोलपुरी की ही वारदात को लीजिए. यहां लिव इन में रह रही युवती ने इसलिए खुदकुशी कर ली, क्योंकि उस का पार्टनर शराब पी कर आएदिन उसे पीटता था.

यहां भी युवक पुरातन पुरुषवादी मानसिकता का शिकार नजर आता है. युवती भी पुरानी फिल्मों की अभिनेत्री की तरह धोखा खाने की हालत में खुदकुशी कर लेती है. वह युवती पुलिस के पास जा सकती थी. उस युवक के खिलाफ केस दर्ज करा सकती थी और उस युवक का साथ छोड़ सकती थी, लेकिन उस ने तंग आ कर खुदकुशी का खतरनाक रास्ता चुन लिया.

कुछ दिन पहले दिल्ली की एक अदालत ने मिजोरम की एक युवती को अपने पार्टनर की हत्या के जुर्म में 7 साल की सजा और 7 लाख रुपए का जुर्माना सुनाया था. इस युवती ने 2008 में अपने नाईजीरियाई पार्टनर विक्टर ओकोन की इसलिए हत्या कर दी थी कि उस ने युवती को बिना बताए उस के अकाउंट से 49 हजार रुपए निकाल लिए थे.

इस से पता चलता है कि साथ रहने के बावजूद पार्टनर के बीच वह विश्वास कायम नहीं हो पाता है जो एक पतिपत्नी के बीच रहता है. अब सवाल यह है कि अगर विक्टर भरोसे के काबिल नहीं था तो वह युवती उस के साथ क्यों रह रही थी? वह उस से अलग हो कर अपने लिए नए पार्टनर की तलाश कर सकती थी, लेकिन बजाय अलग होने के उस ने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया.

चलन बढ़ने की वजह

कैरियर की दौड़ में आज शादी एक बंधन जैसी लगने लगी है. युवा पार्टनर एकदूसरे के करीब तो आते हैं, लेकिन उज्ज्वल भविष्य बनाने की वजह से  वे शादी की जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं होते. वे शादी को एक अड़ंगा मानते हैं लेकिन पार्टनर से वही सब चाहते हैं जो एक शादीशुदा पतिपत्नी का ही अधिकार है.

सैक्स शरीर की नैचुरल डिमांड है. साथ ही एक शख्स अपने इमोशंस को भी शेयर करना चाहता है, ऐसे में लिव इन रिलेशनशिप उन्हें बेहतर औप्शन नजर आता है.

इस दौरान वे पतिपत्नी की तरह एक ही छत के नीचे रहते हैं और फिजिकल रिलेशन भी बनाते हैं. इस से दोनों को न सिर्फ मैंटल सिक्युरिटी मिलती है, बल्कि दोनों का अलगअलग रहने का खर्च भी बच जाता है.

ज्यादातर लिविंग रिलेशन उन युवाओं में पाए गए हैं जो घर से दूर रह रहे हैं. उन के परिवार वालों को ऐसे रिश्ते की कोई खबर नहीं होती. लिविंग रिलेशन में रह रहे युवकयुवतियां अपने मांबाप या घर वालों से अपने रिश्ते को छिपा कर उन्हें अंधेरे में रखते हैं. ऐसे में बिना जवाबदेही के यह रिश्ता युवाओं को शुरुआती दौर में तो खूब रास आता है, लेकिन दिक्कत यह है कि लंबे समय बाद पार्टनर आम पतिपत्नी की तरह व्यवहार करने लग जाते हैं.

शादी और लिव इन रिलेशन

शादी महज एक बालिग युवकयुवती का मेल नहीं है. इस में 2 परिवारों का मिलन होता है. शादी से युवकयुवती को सामाजिक तौर पर एकसूत्र में बंधने की मान्यता हासिल होती है.

शादी से दोनों को सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है, लेकिन इस के उलट लिव इन अपनी जरूरतों के हिसाब से 2 युवाओं का मिलन है. शादी जहां एक तरह का स्थायी संबंध माना जाता है, वहीं लिव इन रिलेशनशिप में दोनों पार्टनर असुरक्षा की भावना के शिकार होते हैं.

दोनों के मन में डर रहता है कि न जाने उस का पार्टनर कब साथ छोड़ कर चला जाए. इस तरह के संबंधों में हमेशा तनाव की स्थिति बनी रहती है. यह रिश्ता समाज के दायरे से हट कर नितांत निजी रिश्ता है.

वहीं शादी इतनी जटिल प्रक्रिया है कि वहां दोनों युवकयुवती का अलग होना इतना आसान नहीं है. समाज उन्हें इस कीइजाजत नहीं देता. इस तरह से दोनों रिश्तों की अपनी खूबियां और खामियां हैं.

दरअसल, सवाल हमारी सोच का है. ग्लोबलाइजेशन के बाद से सभी मुल्कों के बीच परंपराओं का तेजी से आदानप्रदान बढ़ा है, लेकिन कईर् मामलों में हमारी स्थिति दो नावों पर सवारी करने जैसी होती है.

हम नई परंपराओं को स्वीकार तो कर लेते हैं, लेकिन अपनी पारंपरिक सोच नहीं  बदलना चाहते और यही वजह है कि हम उस में पूरी तरह से फिट नहीं हो पाते. लिव इन रिलेशन से जुड़े तमाम मामलों के पीछे यह एक महत्त्वपूर्ण कारण है.

युवतियों पर पड़ता है सब से अधिक असर

समाज सेविका आरती सिंह का कहना है कि ज्यादातर मामलों में ऐसे संबंध प्रेम पर नहीं, शारीरिक आकर्षण पर निर्भर होते हैं. शरीर का आकर्षण खत्म होते ही रिश्तों में दरार आनी शुरू हो जाती है. कपल के बीच झगड़े शुरू हो जाते हैं.

ऐसे संबंधों के टूटने का सब से ज्यादा असर युवतियों पर पड़ता है. पुरातन सोच रखने वाला हमारा समाज एक ऐसी युवती को कभी सम्मान नहीं देना चाहता है जो शादी से पहले किसी युवक के साथ एक ही घर में रह चुकी हो.

ऐसे में युवतियों को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आने लगता है. आज भी इस पुरुष प्रधान समाज में पुरुष की गलती को नजरअंदाज किया जाता है. ऐसे में युवतियां अवसाद की शिकार हो जाती हैं और खुदकुशी जैसा खतरनाक कदम उठा लेती हैं.

कुछ दिन पहले पूर्व फ्लाइंग औफिसर अंजली गुप्ता और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की छात्रा मालिनी मुर्मू ने अपने पार्टनर के हाथों धोखा खाने के बाद खुदकुशी कर ली थी. यही हमारे समाज की कड़वी सचाई है. अधिकतर मामलों में युवतियों को ही सब से अधिक नुकसान उठाना पड़ता है.

लिव इन रिलेशनशिप का फंदा

आइए आपको आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का एक लिव इन रिलेशनशिप का मामला परत दर प्रदत दिखाने महसूस करने का एक छोटा सा प्रयास करते हैं शायद इससे लोगों का भविष्य बन जाए और कभी इस अवधारणा के फंदे में न फंसे. दरअसल यह एक अजीब फंडा है जो कब फंदा बन जाता है पता ही नहीं चलता और इंसान इसके मकड़जाल में फंस कर अपना जीवन तबाह कर लेता है दरअसल हुआ यह कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक जोड़ा

एक साल तक लिव इन रिलेशनशिप में रहता हैं. बाद में बात  दोनों के संबंध खराब होते  चले जाते है,  तब युवती युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगा देती है. हद तो तब हो जाती है जब मामला कोर्ट तक पहुंच  जाता है. मगर अब कोर्ट ने युवती को बड़ा  करंट  दिया है. युवती द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप को माननीय न्यायालय ने खारिज कर दिया. कोर्ट में दुष्कर्म का अपराध साबित नहीं होने पर युवक को दोषमुक्त कर दिया गया है. साथ ही सिंदूर भरकरशादी करने का आश्वासन देकर जबरदस्ती दुष्कर्म करने के आरोप को भी संदेहजनक माना है.

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आधुनिक प्यार की कहानी कुछ ऐसी है

आधुनिक प्यार या कहें लव इन रिलेशनशिप की  कहानी दरअसल कुछ ऐसी है- राजधानी रायपुर के मोवा निवासी आशीष होरा के खिलाफ करीब दो साल पहले 31 वर्षीय युवती ने पंडरी थाने में दुष्कर्म, मारपीट और धमकी का अपराध दर्ज कराया था. युवती आशीष के साथ 15 सितंबर 2016 से 23 मई 2017 तक “लिव इन रिलेशनशिप” में रहती रही. दोनों  खुशी खुशी दलदल सिवनी स्थित नेचुरा अपार्टमेंट में आशीष के फ्लैट में रहते थे.  अचानक 24 मई 2017 को पंडरी थाने में युवती ने आशीष के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध दर्ज कराया.

युवती ने आरोप लगाया था कि मांग में सिंदूर भरकर, शादी करने का विश्वास दिलाकर आशीष दुष्कर्म    उससे  करता रहा, फिर एक माह पहले शादी करने से इनकार कर दिया. और हद यह है कि  मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी है . पुलिस ने मामले में जांच पड़ताल की बयान लिए अंत में न्यायालय में चालान पेश किया.

मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट अपर सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल के कोर्ट में विचाराधीन था. इसकी सुनवाई के दौरान युवती पक्ष के वकील धोखा देकर या जबरदस्ती दुष्कर्म करना साबित नहीं कर पाए. एफआईआर में दर्ज कराए गए आरोप भी साबित नहीं हो पाए.

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इसके चलते कोर्ट ने आशीष होरा को दुष्कर्म के अपराध से अंततः दोषमुक्त कर दिया. दरअसल युवती के एक दफे शादी करके तलाक  के चलते उसका केस कमजोर होता चला  गया.  न्यायालय ने आरोपी युवक के पक्ष में निर्णय दिया.

नहीं फंसना, लव इन रिलेशन में

दरअसल भारतीय सभ्यता और समाज की जैसी संरचना है उसको समझ कर आज की युवा पीढ़ी अदर लव इन रिलेशनशिप से बचती है तो उसमें युवा पीढ़ी का भला है  हमारे पुरखों ने सैकड़ों वर्ष पूर्व बहुत अनुभव के पश्चात विवाह की संस्था को जन्म दिया है और यह संस्था लगभग सभी देशों में अलग-अलग स्वरूप में पाई जाती है ऐसे में लव इन रिलेशनशिप एक ऐसा नासूर है जो सिर्फ लोगों को दुख दर्द और दंश ही देता है.

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अधिवक्ता बीके शुक्ला इस संबंध में कहते हैं-” आस-पास दुष्कर्म के कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें पीड़िता अपनी सहमति से संबंध बनाती है. बाद में जबरदस्ती या शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज कराती है. और अंत में युवतियां या फिर युवक न्यायालय से परितोष चाहते हैं जो उन्हें कई महत्वपूर्ण कारणों से नहीं मिल पाता.”

ऐसे में समझदारी यही है कि लव इन रिलेशनशिप के फंदे से आप अपने आप को बचाए रखें.

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