एनिवर्सरी पर पत्नी ने किया कांड, पति को ही बालकनी से गिराया

प्रेमिका सोफिया के लिए डिसिल्वा अपनी पैसे वाली पत्नी मैरी को जिस तरह मारना चाहता था, ठीक उसी तरह मैरी ने उसे ही ठिकाने लगा कर शिकारी को ही शिकार बना डाला सुबह नहाधो कर मैरी बाथरूम से निकली तो उस की दमकती काया देख कर डिसिल्वा खुद को रोक नहीं पाया और लपक कर उसे बांहों में भर कर बेतहाशा चूमने लगा. मैरी ने मोहब्बत भरी अदा के साथ खुद को उस के बंधन से आजाद किया और कमर मटकाते हुए किचन की ओर बढ़ गई. उस के होंठों पर शोख मुसमान थी. थोड़ी देर में वह किचन से बाहर आई तो उस के हाथों में कौफी से भरे 2 मग थे. एक मग डिसिल्वा को थमा कर वह उस के सामने पड़े सोफे पर बैठ गई

डिसिल्वा कौफी का आनंद लेते हुए अखबार पढ़ने लगा. उस की नजर अखबार में छपी हत्या की एक खबर पर पढ़ी तो तुरंत उस के दिमाग यह बात कौंधी कि वह अपनी बीवी मैरी की हत्या किस तरह करे कि कानून उस का कुछ बिगाड़ सके. वह ऐसा क्या करे कि मैरी मर जाए और वह साफ बच जाए. वह उस कहावत के हिसाब से यह काम करना चाहता था कि सांप भी मर जाए और लाठी भी टूटे. डिसिल्वा ने 2 साल पहले ही मैरी से प्रेमविवाह किया था. अब उसे लगने लगा था कि मैरी ने उस पर जो दौलत खर्च की है, उस के बदले उस ने उस से अपने एकएक पाई की कीमत वसूल कर ली है. अब उसे अपनी सारी दौलत उस के लिए छोड़ कर मर जाना चाहिए, क्योंकि उस की प्रेमिका सोफिया अब उस का और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती. वह खुद भी उस से ज्यादा दिनों तक दूर नहीं रह सकता.

लेकिन यह कमबख्त मैरी रास्ते का रोड़ा बनी हुई है. इस रोड़े को हटाए बगैर सोफिया उस की कभी नहीं हो सकेगी. लेकिन इस रोड़े को हटाया कैसे जाए? डिसिल्वा मैरी को ठिकाने लगाने के बारे में सोचते हुए इस तरह डूब गया कि कौफी पीना ही भूल गया. डिसिल्वा को सोच में डूबा देख कर मैरी बोली, ‘‘तुम कहां खोए हो कि कौफी पीना भी भूल गए. तुम्हारी कौफी ठंडी हो रही है. और हां, हमारी बालकनी के एकदम नीचे एक गुलाब खिल रहा है. जरा देखो तो सही, कितना खूबसूरत और दिलकश लग रहा है. शाम तक वह पूरी तरह खिल जाएगा. सोच रही हूं, आज शाम की पार्टी में उसे ही अपने बालों में लगाऊं. डार्लिंग, आज हमारी मैरिज एनवरसरी है, तुम्हें याद है ना?’’

‘‘बिलकुल याद है. और हां, गुलाब कहां खिल रहा है?’’ डिसिल्वा ने मैरी की आंखों में शरारत से झांकते हुए हैरानी से पूछा.

‘‘बालकनी के ठीक नीचे जो गमला रखा है, उसी में खिल रहा है.’’ मैरी ने कहा.

बालकनी के ठीक नीचे गुलाब खिलने की बात सुन कर डिसिल्वा के दिमाग में तुरंत मैरी को खत्म करने की योजना गई. उस ने सोचा, शाम को वह गुलाब दिखाने के बहाने मैरी को बालकनी तक ले जाएगा और उसे नीचे खिले गुलाब को देखने के लिए कहेगा. मैरी जैसे ही झुकेगी, वह जोर से धक्का देगा. बस, सब कुछ खत्म. मैरी बालकनी से नीचे गमलों और रंगीन छतरियों के बीच गठरी बनी पड़ी होगी. इस के बाद वह एक जवान गमजदा पति की तरह रोरो कर कहेगा, ‘हाय, मेरी प्यारी बीवी, बालकनी से इस खूबसूरत गुलाब को देखने के लिए झुकी होगी और खुद को संभाल पाने की वजह से नीचे गई.’

अपनी इस योजना पर डिसिल्वा मन ही मन मुसकराया. उसे पता था कि शक उसी पर किया जाएगा, क्योंकि बीवी की इस अकूत दौलत का वही अकेला वारिस होगा. लेकिन उसे अपनी बीवी का धकेलते हुए कोई देख नहीं सकेगा, इसलिए यह शक बेबुनियाद साबित होगा. सड़क से दिखाई नहीं देगा कि हुआ क्या था? जब कोई गवाह ही नहीं होगा तो वह कानून की गिरफ्त में कतई नहीं सकेगा. इस के बाद पीठ पीछे कौन क्या सोचता है, क्या कहता है, उसे कोई परवाह नहीं है. डिसिल्वा इस बात को ले कर काफी परेशान रहता था कि सोफिया एक सस्ते रिहाइशी इलाके में रहती थी. वैसे तो उस की बीवी मैरी बहुत ही खुले दिल की थी. वह उस की सभी जरूरतें बिना किसी रोकटोक के पूरी करती थी. तोहफे देने के मामले में भी वह कंजूस नहीं थी, लेकिन जेब खर्च देने में जरूर आनाकानी करती थी. इसीलिए वह अपनी प्रेमिका सोफिया पर खुले दिल से खर्च नहीं कर पाता था

सोफिया का नाम दिमाग में आते ही उसे याद आया कि 11 बजे सोफिया से मिलने जाना है. उस ने वादा किया था, इसलिए वह उस का इंतजार कर रही होगी. अब उसे जाना चाहिए, लेकिन घर से बाहर निकलने के लिए वह मैरी से बहाना क्या करे? बहाना तो कोई भी किया जा सकता है, हेयर ड्रेसर के यहां जाना है या शौपिंग के लिए जाना है. वैसे शौपिंग का बहाना ज्यादा ठीक रहेगा. आज उस की शादी की सालगिरह भी है. इस मौके पर उसे मैरी को कोई तोहफा भी देना होगा. वह मैरी से यही बात कहने वाला था कि मैरी खुद ही बोल पड़ी, ‘‘इस समय अगर तुम्हें कहीं जाना है तो आराम से जा सकते हो, क्योंकि मैं होटल डाआर डांसिंग क्लास में जा रही हूं. आज मैं लंच में भी नहीं सकूंगी, क्योंकि आज डांस का क्लास देर तक चलेगा.’’

‘‘तुम और यह तुम्हारी डांसिंग क्लासमुझे सब पता है.’’ डिसिल्वा ने मैरी को छेड़ते हुए कहा, ‘‘मुझे लगता है, तुम उस खूबसूरत डांसर पैरी से प्यार करने लगी हो, आजकल तुम उसी के साथ डांस करती हो ?’’

‘‘डियर, मैं तो तुम्हारे साथ डांस करती थी और तुम्हारे साथ डांस करना मुझे पसंद भी था. लेकिन शादी के बाद तो तुम ने डांस करना ही छोड़ दिया.’’ मैरी ने कहा.

‘‘आह! वे भी क्या दिन थे.’’ आह भरते हुए डिसिल्वा ने छत की ओर देखा. फिर मैरी की आंखों में आंखें डाल कर पूछा, ‘‘तुम्हें जुआन के यहां वाली वह रात याद है , जब हम ने ब्लू डेनूब की धुन पर एक साथ डांस किया था?’’ 

डिसिल्वा ने यह बात मैरी से उसे जज्बाती होने के लिए कही थी. क्योंकि उस ने तय कर लिया था कि अब वह उस के साथ ज्यादा वक्त रहने वाली नहीं है. इसलिए थोड़ा जज्बाती होने में उसे कोई हर्ज नहीं लग रहा था.

‘‘मैं वह रात कैसे भूल सकती हूं. मुझे यह भी याद है कि उस रात तुम ने अपना इनाम लेने से मना कर दिया था. तुम ने कहा था, ‘हम अपने बीच रुपए की कौन कहे, उस का ख्याल भी बरदाश्त नहीं कर सकते.’ तुम्हारी इस बात पर खुश हो कर मैं ने तुम्हारा वह घाटा पूरा करने के लिए तुम्हें सोने की एक घड़ी दी थी, याद है तुम्हें?’’

‘‘इतना बड़ा तोहफा भला कोई कैसे भूल सकता है.’’ डिसिल्वा ने कहा. इस के बाद डिसिल्वा सोफिया से मिलने चला गया तो मैरी अपने डांस क्लास में चली गई. डिसिल्वा सोफिया के यहां पहुंचा. चाय पीने के बाद आराम कुर्सी पर सोफिया को गोद में बिठा कर डिसिल्वा ने उसे अपनी योजना बताई. सोफिया ने उस के गालों पर एक चुंबन जड़ते हुए कहा, ‘‘डार्लिंग, आप का भी जवाब नहीं. बस आज भर की बात है, कल से हम एक साथ रहेंगे.’’

दूसरी ओर होटल डाआर में मैरी पैरी की बांहों में सिमटी मस्ती में झूम रही थी. वह अपने पीले रंग के बालों वाले सिर को म्यूजिक के साथ हिलाते हुए बेढं़गे सुरों में पैरी के कानों में गुनगुना रही थी. पैरी ने उस की कमर को अपनी बांहों में कस कर कहा, ‘‘शरीफ बच्ची, इधरउधर के बजाए अपना ध्यान कदमों पर रखो. म्यूजिक की परवाह करने के बजाए बस अपने पैरों के स्टेप के बारे में सोचो.’’

‘‘मैं तुम्हारे साथ डांस कर रही होऊं तो तुम मुझ से इस तरह की उम्मीद कैसे कर सकते हो? फिर यह क्या मूर्खता है, तुम मुझे बच्ची क्यों कह रहे हो?’’

‘‘बच्ची नहीं तो और क्या हो तुम?’’ पैरी ने कहा, ‘‘एक छोटी सी शरीफ, चंचल लड़की, जो अपने अभ्यास पर ध्यान देने के बजाए कहीं और ही खोई रहती है. अच्छा आओ, अब बैठ कर यह बताओ कि रात की बात का तुम ने बुरा तो नहीं माना? रात को मैं ने तुम्हारे पैसे लेने से मना कर दिया था ना. इस की वजह यह थी कि मैं इस खयाल से भी नफरत करता हूं कि हमारी दोस्ती के बीच पैसा आए.’’

‘‘मैं ने बिलकुल बुरा नहीं माना. उसी कसर को पूरा करने के लिए मैं तुम्हारे लिए यह प्लैटिनम की घड़ी लाई हूं, साथ में चुंबनों की बौछार…’’ कह कर मैरी पैरी के चेहरे को अपने चेहरे से ढक कर चुंबनों की बौछार करने लगी. डिसिल्वा ने मैरी को तोहफे में देने के लिए हीरे की एक खूबसूरत, मगर सेकेंड हैंड क्लिप खरीदी थी. उस के लिए इतने पैसे खर्च करना मुश्किल था, लेकिन उस ने हिम्मत कर ही डाली थी. क्योंकि बीवी के लिए उस का यह आखिरी तोहफा था. फिर मैरी की मौत के बाद यह तोहफा सोफिया को मिलने वाला था. जो आदमी अपनी बीवी की शादी की सालगिरह पर इतना कीमती तोहफा दे सकता है, उस  पर अपनी बीवी को कत्ल करने का शक भला कौन करेगा?

डिसिल्वा ने हीरे की क्लिप मैरी को दी तो वाकई वह बहुत खुश हुई. वह  नीचे पार्टी में जाने को तैयार थी. उस ने डिसिल्वा का हाथ पकड कर बालकनी की ओर ले जाते हुए कहा, ‘‘आओ डार्लिंग, तुम भी देखो वह गुलाब कितना खूबसूरत लग रहा है. ऐसा लग रहा है, कुदरत ने उसे इसीलिए खिलाया है कि मैं उसे अपने बालों में सजा कर सालगिरह की पार्टी में शिरकत करूं.’’ डिसिल्वा के दिल की धड़कन बढ़ गई. उसे लगा, कुदरत आज उस पर पूरी तरह मेहरबान है. मैरी खुद ही उसे बालकनी की ओर ले जा रही है. सब कुछ उस की योजना के मुताबिक हो रहा है. किसी की हत्या करना वाकई दुनिया का सब से आसान काम है.

डिसिल्वा मैरी के साथ बालकनी पर पहुंचा. उस ने झुक कर नीचे देखा. उसे झटका सा लगा. उस के मुंह से चीख निकली. वह हवा में गोते लगा रहा था. तभी एक भयानक चीख के साथ सब कुछ  खत्म. वह नीचे छोटीछोटी छतरियों के बीच गठरी सा पड़ा था. उस के आसपास भीड़ लग गई थी. लोग आपस में कह रहे थे, ‘‘ओह माई गौड, कितना भयानक हादसा है. पुलिस को सूचित करो, ऐंबुलेंस मंगाओ. लाश के ऊपर कोई कपड़ा डाल दो.’’ थोड़ी देर में पुलिस गई.

दूसरी ओर फ्लैट के अंदर सोफे पर हैरानपरेशान उलझे बालों और भींची मुट्ठियां लिए, तेजी से आंसू बहाते हुए मैरी आसपास जमा भीड़ को देख रही थी. लोगों ने उसे दिलासा देते हुए इस खौफनाक हादसे के बारे में पूछा तो मैरी ने रोते हुए कहा, ‘‘मेरे खयाल से वह गुलाब देखने के लिए बालकनी से झुके होंगे, तभी…’’ कह कर मैरी फफक फफक कर रोने लगी.

 

पति से छुटकारा पाने के लिए पत्नी ने छिपकली डालकर दिया खाना

बबली परिवार के बजाए शारीरिक जरूरतों को ज्यादा महत्त्व देती थी तभी तो 3 बच्चों की मां बनने के बावजूद कई युवकों से उस के अवैध संबंध हो गए थे. अपने एक प्रेमी के साथ हमेशा के लिए रहने को उस ने ऐसी चाल चली कि… 

खुशबू और अंशिका रोज की तरह 5 दिसंबर, 2013 को भी स्कूल गई थीं. वैसे वे दोपहर 2 बजे तब स्कूल से घर लौट आती थीं लेकिन जब ढाई बजे तक घर नहीं पहुंचीं तो मां बबली बेचैन हो गई. उस के बच्चों की क्लास में मोहल्ले के कुछ और बच्चे भी पढ़ते थे. उस ने उन बच्चों के घर पहुंच कर अपने बच्चों के बारे में पूछा तो बच्चों ने बताया कि खुशबू और अंशिका आज स्कूल आई ही नहीं थीं. बच्चों की बात सुन कर बबली हैरान रह गई क्योंकि उस ने दोनों बेटियों को स्कूल भेजा था तो वे कहां चली गईं. बदहवास बबली ने अपने पिता गुलाबचंद और भाइयों को सारी बात बताते हुए जल्दी से बेटियों का पता लगाने को कह कर रोनेबिलखने लगी.

उस के पिता और भाई भी नहीं समझ पा रहे थे कि जब दोनों बहनें स्कूल गई थीं तो वे स्कूल पहुंच कर कहां चली गईं? बबली को सांत्वना दे कर वे सब अपने स्तर से दोनों बच्चियों को ढूंढ़ने में जुट गए. काफी खोजबीन के बाद भी उन का पता नहीं लग सका. दोनों बच्चे रहस्यमय तरीके से कहां लापता हो गए, इस बात से पूरा परिवार परेशान था. मोहल्ले के कुछ लोग कहने लगे कि कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने फिरौती के लिए बच्चों का अपहरण कर लिया हो. लेकिन इस की उम्मीद कम थी क्योंकि बबली या उस के घर वालों की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे कोई फिरौती दे सकें. बबली की अपने पति जितेंद्र से कुछ अनबन चल रही थी, तभी तो वह तीनों बेटियों के साथ मायके में रह रही थी. घर वालों को इसी बात का शक हो रहा था कि बच्चियों को उन का पिता जितेंद्र या फिर दादा बृजनारायण पांडेय ही फुसला कर अपने साथ ले गए होंगे.

संभावित स्थानों पर तलाश के बाद जब खुशबू और अंशिका के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो उन के नाना गुलाबचंद थाना नगरा पहुंचे और थानाप्रभारी एस.पी. चौधरी से मिल कर बच्चियों के गायब होने की बात बताई. उन्होंने अपने दामाद जितेंद्र और समधी बृजनारायण पर बच्चियों को गायब करने का अंदेशा जाहिर किया. गुलाबचंद की तहरीर पर 5 दिसंबर, 2013 को अपहरण का मुकदमा दर्ज करवा कर मामले की विवेचना सबइंसपेक्टर उमेशचंद्र यादव को करने के निर्देश दिए. साथ ही उन्होंने दोनों बच्चियों के गायब होने की सूचना से अपर पुलिस अधीक्षक के.सी. गोस्वामी और पुलिस अधीक्षक अरविंद सेन को अवगत करा दिया.

सबइंसपेक्टर उमेशचंद्र यादव मामले की छानबीन करने में जुट गए. चूंकि गुलाबचंद ने अपने दामाद और समधी पर बच्चियों को गायब करने का शक जाहिर किया था. लिहाजा पुलिस बलिया के सिकंदरपुर थाने के गांव उचवार में रहने वाले जितेंद्र के घर पहुंच गई और वहां से उसे उस के 80 वर्षीय बुजुर्ग पिता बृजनारायण पांडेय को पूछताछ के लिए थाने ले आई. उन्होंने दोनों से अलगअलग तरीके से पूछताछ की. उन की बातों से जांच अधिकारी को लगा कि बच्चों के गायब होने में उन का कोई हाथ नहीं है. बल्कि अपने दोनों बच्चों के गायब होने की जानकारी पाकर जितेंद्र परेशान हो गया था.

इन दोनों से पूछताछ के दौरान उन्हें यह पता चल गया था कि बबली एक बदचलन औरत है. एसआई उमेशचंद्र यादव के लिए यह जानकारी महत्त्वपूर्ण थी. उन्होंने जितेंद्र और उस के पिता को घर भेज दिया और खुद गोपनीय रूप से यह पता लगाने में जुट गए कि बबली के संबंध किन लोगों से हैं. इस काम में उन्हें सफलता मिल गई और पता चला कि उस के संबंध औरैया जिले के हीरनगर गांव के रहने वाले कुलदीप से हैं और वह दिल्ली में नौकरी करता है. एसआई उमेशचंद्र ने इस जानकारी से थानाप्रभारी को अवगत करा दिया. इस के बाद उन्होंने कुलदीप की तलाश शुरू कर दी और उस का पता लगाने के लिए मुखबिरों को भी लगा दिया

उधर खुद पर बच्चों के अपहरण का आरोप लगने पर जितेंद्र को बहुत दुख हुआ. उस ने अपहरण के आरोप लगाए जाने पर अपने बचने के लिए एसपी अरविंद सेन को तहरीर दे कर कहा कि उसे और उस के पिता को झूठा फंसाया जा रहा है. न्याय की गुहार लगाते हुए उस ने बच्चों को जल्द तलाशने की मांग की. 13 दिसंबर, 2013 की शाम को एसआई उमेशचंद्र को मुखबिर ने एक खास सूचना दी. जानकारी मिलते ही वह महिला कांस्टेबल निकुंबला, कांस्टेबल रामबहादुर यादव आदि के साथ बिल्थरा रोड रेलवे स्टेशन पहुंच गए. अपने साथ वह जितेंद्र को भी ले गए थे ताकि वह अपनी बेटियों को पहचान सके. मुखबिर ने जिस व्यक्ति के बारे में उन्हें सूचना दी थी वह उसे इधरउधर तलाशने लगे. कुछ देर बाद उन्हें प्लेटफार्म पर एक युवक आता दिखाई दिया. उस के साथ 2 बच्चियां भी थीं.

जितेंद्र ने बच्चियों को पहचानते हुए कहा, ‘‘सर, यही मेरी बेटियां हैं.’’ उधर उस युवक ने स्टेशन पर पुलिस को देखा तो वह तेज कदमों से दूसरी ओर चल दिया. लेकिन पुलिस ने दौड़ कर उसे पकड़ लिया और बच्चियों को भी अपने कब्जे में ले लिया. बच्चियों को सकुशल बरामद कर पुलिस खुश थी. जिस युवक को पुलिस ने हिरासत में लिया था उस ने अपना नाम कुलदीप बताया. उसे हिरासत में ले कर पुलिस थाने गई.

पूछताछ करने पर उस ने बताया कि वह बबली से प्यार करता है और बच्चों का अपहरण उस ने उसी के कहने पर ही किया था. उस की बात सुन कर पुलिस भी चौंक गई कि क्या एक मां ही अपने बच्चों का अपहरण करा सकती है. लेकिन कुलदीप ने खुशबू और अंशिका के अपहरण के पीछे की जो कहानी बताई, सभी को चौंका देने वाली निकली. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित और बिहार प्रांत से सटा एक जिला है बलिया. इस जिले के नगरा थाना क्षेत्र के देवरहीं गांव के रहने वाले गुलाबचंद के परिवार में पत्नी के अलावा 3 बेटियां और 3 बेटे थे. बबली उन की दूसरे नंबर की बेटी थी. वह बहुत खूबसूरत थी. लेकिन जब उस ने लड़कपन के पड़ाव को पार कर जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो उस की सुंदरता में और भी निखार गया.

वह जवान हुई तो घर वालों को उस की शादी की चिंता सताने लगी. वे उस के लिए सही लड़का तलाशने लगे. जल्द ही उन की मेहनत रंग लाई और बलिया जिले के ही सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के उचवार गांव में रहने वाले बृजनारायण पांडेय के बेटे जितेंद्र से उस की शादी तय कर दी और सामाजिक रीतिरिवाज से 2003 में दोनों का विवाह हो गया. बबली जब अपनी ससुराल पहुंची तो अपने व्यवहार और काम से उस ने सभी का दिल जीत लिया. ससुराल में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. परिवार भी बड़ा नहीं था. इसलिए गृहस्थी की गाड़ी ठीक तरह से चल पड़ी. शादी के साल भर बाद बबली ने एक बेटी को जन्म दिया. उस का नाम रखा गया खुशबू.

परिवार बढ़ा तो घर का खर्च भी बढ़ गया. जितेंद्र अपने बीवीबच्चों की परवरिश में कोई कमी नहीं रखना चाहता था. लिहाजा वह काम की तलाश में दिल्ली चला गया. जल्द ही दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में उस की नौकरी लग गई. उन की जिंदगी की गाड़ी फिर से पटरी पर गई. इस दौरान जितेंद्र साल में 1-2 बार ही बीवीबच्चों से मिलने अपने गांव पाता और कुछ दिन घर रहने के बाद दिल्ली चला जाता था. वक्त यूं ही हंसीखुशी से गुजरता रहा. 3 साल बाद बबली एक और बच्ची की मां बन गई. उस का नाम अंशिका रखा. ज्यादा दिनों तक पति से दूर रहने की कमी बबली को खलने लगी थी. उस ने 1-2 बार पति से कहा भी कि वह हर महीने घर आ जाया करें. यदि हर महीने न भी आ सकेंतो 2 महीने में तो आ ही जाया करें, बच्चे बहुत याद करते हैं. लेकिन कुलदीप ने बारबार आने पर किराए में पैसे खर्च होने की बात बताई. जल्दजल्द घर आने में उस ने असमर्थता जता दी. 

लिहाजा अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बबली ने पड़ोस के एक युवक से नजदीकियां बढ़ा लीं. फिर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए. इस दौरान बबली एक और बेटी की मां बन गई. बबली ने घरवालों और जमाने से अपनी मोहब्बत की कहानी को छिपाने की बहुत कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो सकी और जल्दी ही उन के प्रेमप्रसंग की खबर घर वालों को लग गई. फिर क्या था परिवार में खलबली सी मच गई और बबली को अपने प्रेमी से मिलने पर रोक लगा दी गई. इस के बाद तो उस की हालत पिंजरे में उस बंद पंछी की तरह हो कर रह गई जो सिर्फ फड़फड़ा सकता है लेकिन कोशिश करने पर भी उड़ नहीं सकता.

अपनी आजादी पर घर वालों द्वारा पहरे लगाए जाने से बबली चिढ़ गई. लगभग 2 साल पहले एक दिन अपने पिता की तबीयत खराब होने का बहाना बना कर वह मायके गई. वहीं पड़ोस में एक लड़का रहता था, जो दिल्ली में नौकरी करता था. वह जितेंद्र को जानता था और उसे यह भी पता था कि जितेंद्र कहां रहता है. बबली को पति के बिना सब सूनासूना सा लग रहा था. इसलिए वह उस लड़के के साथ पति के पास दिल्ली चली गई. पत्नी के अचानक दिल्ली जाने पर जितेंद्र चौंक गया. पत्नी के साथ रहना उसे अच्छा तो लग रहा था लेकिन पत्नी और बच्चों के आने पर उस का खर्च बढ़ गया जिस से घर चलाने में परेशानी होने लगी. परेशानी देखते हुए बबली ने भी कोई काम कर घर के खर्चे में हाथ बंटाने की बात कही तो जितेंद्र मान गया.

फिर वह अपने आसपास रहने वाली महिलाओं के सहयोग से काम तलाशने लगी. कुछ दिनों बाद उसे एक प्राइवेट कंपनी में काम मिल गया. जब दोनों ही काम करने लगे तो घर का खर्च ठीक से चलने लगा. बबली खुले विचारों की थी. रूपयौवन से परिपूर्ण बबली की देहयष्टि इतनी आकर्षक थी कि किसी को भी पहली नजर में लुभा लेती थी. फिर अलग काम करने से उसे मनमानी करने का पूरा मौका भी मिल रहा था. इस मौके का लाभ उठा कर बबली ने अपने साथ काम करने वाले कुलदीप से अवैध संबंध बना लिए.मूलरूप से औरैया जिले के फफूंद थाना क्षेत्र के हीरनगर गांव के निवासी रविशंकर का बेटा कुलदीप दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता था. कुलदीप से एक बार संबंध बने तो बबली जैसे उस की दीवानी हो गई.

फिर तो उन का वासना का खेल चलने लगा. लेकिन एक दिन वह कुलदीप के साथ अपने कमरे में आपत्तिजनक स्थिति में थी तभी मकान मालिक की नजर उस पर पड़ी. उस ने उस समय तो उस से कुछ नहीं कहा, लेकिन जितेंद्र को बात बताते हुए उस से कमरा खाली करा लिया. फिर जितेंद्र ने पास में ही दूसरा कमरा किराए पर ले लिया. जितेंद्र बहुत ही शांत स्वभाव का था. पत्नी की करतूत का पता चल जाने के बावजूद भी उस ने उस से कोई सख्ती नहीं की बल्कि समझाने के बाद उस ने पत्नी को चेतावनी दे दी थी. लेकिन बबली ने उस की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया. बबली ने पास में ही रहने वाले एक और युवक से अवैध संबंध बना लिए. दोनों चोरीछिपे रंगरलियां मनाने लगे. उसी समय जितेंद्र ने पत्नी की नौकरी छुड़वा दी.

कुछ समय तक सब कुछ गुपचुप चलता रहा. लेकिन धीरेधीरे लोगों को उन दोनों के संबंधों के बारे में पता चल गया. फिर बात जितेंद्र के कानों तक भी पहुंची. पत्नी को सही रास्ते पर लाने के लिए उस ने उसे डांटा. बबली ने इस का विरोध किया. फिर क्या था इसी बात को ले कर उन के बीच झगड़े शुरू हो गए. एक दिन झगड़ा इतना बढ़ा कि बबली ने पुलिस से शिकायत कर पति को पिटवा दिया. पत्नी के बदले हुए रुख से जितेंद्र डर गया. उस ने तय कर लिया कि पत्नी चाहे कुछ भी करे, उस के काम में वह दखल नहीं करेगा. यानी उस ने एकदम से अपना मुंह बंद कर लिया. फिर तो बबली ने कुलदीप को भी अपने साथ रख लिया और खुल कर उस के साथ रंगरलियां मनाने लगी. सब कुछ देखते हुए भी डर के कारण जितेंद्र चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता था. बल्कि उसे बबली से अपनी जान का भी खतरा महसूस होने लगा था.

इस का कारण यह था कि एक दिन बबली ने जितेंद्र के खाने में छिपकली मार कर डाल दी थी. संयोग से उस दिन जितेंद्र ने लंच कंपनी की कैंटीन में कर लिया था. बाद में जब उस ने लंच में पत्नी द्वारा दी गई आलू की भुजिया देखी तो उस का रंग बदला हुआ था. उसे लगा कि इस में जहर है तो उस ने सब्जी फेंक दी. घर आ कर जब उस ने पत्नी से इस बारे में पूछा तो उस ने बहाना बनाते हुए कह दिया कि खाना बनाते हुए कुछ गिर गया होगा. इस हादसे से जितेंद्र एकदम से डर गया था. जान का खतरा महसूस होने पर जितेंद्र 13 जुलाई, 2013 को बबली और बच्चों को दिल्ली में ही छोड़ कर बलिया चला आया और उस ने वाराणसी में ही काम तलाश लिया. पति के वापस गांव चले जाने पर बबली आजाद हो गई और खुल कर कुलदीप के साथ मौजमस्ती करने लगी. कुलदीप बबली के साथ उस के बच्चों को भी बहुत प्यार करता था. कुल मिला कर दोनों का समय हंसीखुशी बीतने लगा.

इधर बबली के मायके वालों को जब पता चला कि झगड़ा होने के बाद जितेंद्र बबली को दिल्ली में छोड़ कर वापस गया है तो उस के पिता गुलाबचंद दिल्ली पहुंच गए और बबली तथा उस के बच्चों को घर लिवा लाए. तब से वह मायके में रहने लगी. बबली ने भी पिता से कह दिया था कि अब वह जितेंद्र के यहां नहीं जाएगी. तब गुलाबचंद ने बच्चों का नाम गांव के ही स्कूल में लिखवा दिया. ननिहाल में बच्चे तो खुश थे लेकिन बबली का मन अपने आशिक कुलदीप के बिना नहीं लगता था. वह मोबाइल से कुलदीप से बात कर अपना मन बहला लेती थी, लेकिन जब कुलदीप की जुदाई उसे अधिक खलने लगी तो मायके वालों को बिना कुछ बताए वह एक दिन अकेले ही दिल्ली चली गई और कुलदीप के साथ रहने लगी. मायके वालों को जब पता लगा कि वह दिल्ली चली गई है तो उन्हें बहुत बुरा लगा. तब बबली का भाई प्रीतम दिल्ली जा कर उसे वापस ले आया.

वक्त गुजरता रहा. बबली पति जितेंद्र को भूल चुकी थी. उस ने तय कर लिया था कि जीवन भर कुलदीप के साथ ही रहेगी. इसलिए वह कुलदीप को हमेशा के लिए पाने के बारे में सोचने लगी. उसे कुलदीप के बिना एक पल भी गुजार पाना नामुमकिन लगने लगा तो उस ने उस के पास जाने के लिए एक प्लान बनाया. प्लान के अनुसार 4 दिसंबर, 13 को बबली ने दिल्ली फोन कर के कुलदीप को अपने गांव के पास परसिया चट्टी पर बुलाया. तय समय के अनुसार कुलदीप परसिया चट्टी पहुंच गया. इधर रोज की तरह 8 वर्षीय खुशबू और 6 वर्षीय अंशिका स्कूल जाने के लिए घर से निकलीं तो रास्ते में बबली मिली. वह दोनों बच्चों को ले कर परसिया चट्टी पहुंची.

चूंकि कुलदीप उन्हें खूब प्यार करता था इसलिए उसे देख कर दोनों बच्चियां खुश हो गईं. बबली ने खुशबू और अंशिका को यह समझाते हुए उस के साथ दिल्ली भेज दिया कि 10 दिन के अंदर वह भी दिल्ली आ जाएगी. मां के कहने पर दोनों बहनें कुलदीप के साथ दिल्ली चली गईं. इस प्लान के पीछे बबली की यह सोच थी कि जब बेटियों के लापता होने पर घर के लोगों का सारा ध्यान उस ओर चला जाएगा तो वह आसानी से अपनी 3 साल की छोटी बेटी साक्षी को ले कर कुलदीप के पास चली जाएगी. लेकिन उस की यह सोच गलत साबित हुई. कुलदीप से पूछताछ के बाद पुलिस ने इस केस की नायिका बबली को भी गिरफ्तार कर लिया. दोनों अभियुक्तों से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने कुलदीप को अपहरण और बबली को साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर के अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया तथा दोनों बच्चियों को उस के पिता जितेंद्र के संरक्षण में दे दिया गया.

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मेरी शादी करने की उम्र हो गई है पर मेरे घरवाले ध्यान नहीं देते, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 28 साल की एक कुंआरी लड़की हूं. इतनी उम्र हो जाने के बाद भी मेरे घर वाले मेरी शादी नहीं कराना चाहते हैं, क्योंकि मैं घर में एकलौती कमाने वाली हूं. वे मेरी कमाई खाने के इतने ज्यादा आदी हो गए हैं कि अगर कोई मेरे लिए रिश्ता बताता भी है, तो वे उस पर ध्यान नहीं देते हैं. इस बात से मैं बहुत ज्यादा तनाव में रहती हूं. मेरा खुदकुशी करने का मन करता है. मैं क्या करूं?

जवाब

आप जैसी लाखों लड़कियां अपने घर वालों की खुदगर्जी की सजा भुगत रही हैं. घर वाले निकम्मेपन, आलसीपन और मुफ्तखोरी की आदत के चलते लड़की की शादी नहीं होने देते. खुदकुशी का खयाल मन में न आने दें. जिंदगी अपनी मरजी से जिएं और मनपसंद जगह शादी भी करें.

उन घर वालों की फिक्र न करें, जिन्हें आप की जिंदगी और भविष्य से कोई वास्ता नहीं. खाने को नहीं मिलेगा तो भूख लगने पर उन के हाथपैर खुद ब खुद चलने लगेंगे. हां, जब कभी आप को लगे कि उन्हें वाकई जरूरत है, तो छोटीमोटी मदद कर देना. इस से आप को भी सुकून मिलेगा.

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मैं एक तांत्रिक से प्यार करती हूं, क्या करूं?

सवाल

मैं 34 वर्षीय पढ़ीलिखी महिला हूं. पति बिजनैस करते हैं. वे सरल स्वभाव के हैं. ससुराल में कभी किसी चीज की कमी नहीं रही. पर मेरी समस्या थोड़ी अलग है. मेरी शादी 21 साल की उम्र में ही हो गई थी. शादी के 10 सालों तक संतानसुख से वंचित रही थी. दर्जनों डाक्टरों को दिखाया और सासूमां के कहने पर न जाने कहांकहां मन्नतें भी मांगी थीं. अंत में पता चला दोष पति में है.

सासूमां के दबाव में उन के दूर के एक रिश्तेदार, जिन्हें ये लोग गुणी तांत्रिक बताते हैं, से हमारी मुलाकात करवाई गई. तांत्रिक ने बताया कि इन में मां बनने के पर्याप्त अवसर हैं पर ग्रहों की स्थिति सही नहीं है. सासूमां के आग्रह पर तांत्रिक बराबर घर आने लगा. 2-4 दिन रहता फिर चला जाता. इस दौरान मैं तांत्रिक के बहकावे में आ गई और हमारे बीच जिस्मानी संबंध बन गए. धीरेधीरे मुझे खुद भी आनंद आने लगा. तांत्रिक हम उम्र है और जिस्मानी सुख देने में काफी माहिर भी. उस का आनाजाना बेरोकटोक जारी रहा. सासूमां सहित किसी को भी कोई शक नहीं होता. हमारे संबंध और भी मजबूत होते गए. इस बीच मैं गर्भवती हो गई तो ससुराल और मायके वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. सब उस तांत्रिक रिश्तेदार की ही कृपा बताते और उस के गुणगान में लगे रहते. संतानप्राप्ति के कुछ महीनों बाद तांत्रिक ने घर आना कम कर दिया.

मैं बराबर फोन करती रही. उस के सामीप्य के लिए तरसती रही. बारबार बुलाने पर वह 2-3 बार आया तो मन को शांति मिली. हमारे फिर से जिस्मानी संबंध बने. इधर 1-2 सालों से वह हमारे घर नहीं आ रहा. मेरे फोन का जवाब भी नहीं देता. मैं चाहती कि घर से बाहर इस रिश्ते को ताउम्र निभाऊंगी पर उस की बेरुखी से मन आहत रहता है. उस ने सिर्फ इतना कहा कि तुम अब अपनी जिंदगी जीओ. इस राज को मैं कभी जाहिर नहीं करूंगा.

मैं पति को नहीं छोड़ सकती, क्योंकि वे मुझे बेहद प्यार करते हैं. उन्होंने कभी मुझ पर शक नहीं किया. पर डरती हूं कि जब बेटा बड़ा होगा और यह राज अगर पति जान लेंगे तो फिर मैं क्या करूंगी? बड़ी उलझन में हूं. क्या पति को सबकुछ सचसच बता दूं? कृपया सलाह दें?

जवाब

शादी के बाद पति से संतान न होना एक बड़ी समस्या है पर आप के पास संतानसुख के लिए और भी बेहतर विकल्प थे. आजकल विज्ञान की तरक्की के चलते तकनीक द्वारा बांझता का दंश झेलने वाली औरतें भी मांएं बन रही हैं.

आप किसी बेसहारे बच्चे को गोद ले कर भी संतानसुख प्राप्त कर सकती थीं. बेहतर होता कि आप खुद व अपनी सासूमां को अंधविश्वास से दूर रखतीं. क्योंकि इस तरह के संबंधों में रिस्क बहुत होता है. वह तांत्रिक आप को कभी भी ब्लैकमेल कर सकता है.

खैर जो होना था वह हो गया. जरूरत है इस गलती के लिए आप को महसूस हो कि आप ने गलती की है और भविष्य में दोबारा ऐसी नादानी नहीं करेंगी. फिलहाल तो उचित यही होगा कि इस राज से परदा न उठने दें.

पति और ससुराल वालों की नजरों में कोई ऐब नहीं है तो दांपत्य को बचाने के लिए इस राज को आप अपने अंदर ही दफन रहने दें. हो सकता है वे इस बारे में जानते हों पर बात मुंह पर न लाते हों पर कुछ को तो यह राज मालूम होगा और कभी भी लीक कर सकता है.

दोषी आप ही नहीं आप की सासूमां और ससुराल के लोग भी हैं जिन्होंने 21वीं सदी में भी अंधविश्वास का लबादा ओढ़े रखा है. उन की सोच आदिम जमाने की है तभी तो वैज्ञानिक युग में भी पूजापाठ, तंत्रमंत्र पर यकीन करते हैं.

यह अच्छी बात है कि तांत्रिक आप की ससुराल वालों का दूर का रिश्तेदार है. शायद इसीलिए वह इस रिश्ते को उजागर नहीं करना चाहता होगा या फिर उस की दुकानदारी बंद न हो जाए, यह सोच कर वह नहीं चाहता होगा कि उस की बदनामी हो. अन्यथा ऐसे धोखेबाज पाखंडी ब्लैकमेल तक करने से गुरेज नहीं करते. आप को दिल पर पत्थर रख कर इस बात को अब हमेशा के लिए दफन करना चाहिए.

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बिन बोले हर पत्नी अपने पति से चाहती हैं ये 5 चीजें, आप भी जान लें

पति पत्नी का रिश्ता बहुत ही मजबूत माना जाता है. जिसकी नींव होती है केवल विश्वास, जहां दोनों के बीच विश्वास कायम है तो दोनों को रिश्ता उतना ही मजबूत बनेंगा, लेकिन ये रिश्ता बेहद नाजुक भी होता है, इस रिश्ते पत्नियां अपने पति से कई तरह की अपेक्षाएं रखती है जो कि समय रहते पति को जरुर पूरी करनी होती है. अगर ऐसा नहीं होता है तो कहीं न कहीं आपका रिश्ता बिगड़ने लगता है वो विश्वास और मजबूती खत्म होने लगती है. तो इसलिए जरुरी है कि आप अपनी पत्नी की उन बातों को पूरा करें. जिससे वे आपके ओर करीब आने लगें और आपसे ज्यादा जुड़ सकें.

पतियों को ये समझना जरूरी है कि महिलाएं उनसे क्या चाहती है. उनकी जरूरतों को समझना और उन्हें पूरा करना बहुत जरूरी होता है. कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें हर पति को एक खुशहाल और सफल विवाहित जीवन जीने के लिए ध्यान में रखना चाहिए. इसलिए आज हम आपको ऐसे 5 जरूरी बिंदुओं के बारे में बताएंगे, जिन्हें पूरा कर कोई भी पति अपनी पत्नी को खुस रख सकता है और अपने रिश्ते में एक मजबूत डोर कायम कर सकता है.

बेहद जरुरी है प्यार और सपोर्ट

पति पत्नी के रिश्तें में सबसे पहले और सबसे ज्यादा जरुरी है कि उनमें प्यार और एक दूसरे को लेकर सपोर्ट हो. महिलाओं के केस में ये सबसे ज्यादा मायने रखता है कि उनका पति उन्हे भरपूर प्यार करें और सपोर्ट करें. उनके हर कदम पर उनका जीवनसाथी साथ निभाएं. प्यार का इजहार करना भी उन्हें खुशी देता है और वो रिश्ते के गहरे बॉन्ड को बेहतर तरीके से महसूस कर पाती हैं. ये चीज शादीशुदा जीवन में नयापन बरकरार रखने में भी मदद करता है.

पति करे पत्नी की केयर

पति पत्नी के रिश्ते में ये जरुरी है कि पति अपनी पत्नी की केयर करें, क्योकि प्यार जताने का ये एक तरीका है जिससे आप दिखा सकते है कि आप उनसे कितना प्यार करते है. अगर पत्नी घर का काम करती है तो पति को उसमें हाथ बटाना चाहिए, मूड खराब हो तो उनके चेहरे पर मुस्कान लाने के सभी तरीकें पता हों. उनकी पसंद का खाना बनाकर खिलाएं या या ऑर्डर करके खिलाएं. ये छोटी छोटी बातें आपके रिश्ते को मजबूत बना सकती हैं.

पत्नी को दें पूरा सम्मान

हर लड़की या पत्नी की सबसे पहली इच्छा अपने पार्टनर से यही होती है कि वे उसका पार्टनर उसे पूरा सम्मान दें. प्यार से पहले वो उसे सम्मान दें. क्योकि किसी भी रिश्ते की नींव सम्मान पर टिकी होती है. पति अगर उन्हे बराबरी का दर्जा देता है, तो पत्नियां महसूस कर पाती हैं कि उनका बेटर हाफ उनका कितना सम्मान करता है.

रिश्ते में हो सच्चाई

ये जरुरी है कि पति पत्नी आपस में हर मुद्दे पर खुलकर बात करें. पत्नी चाहती है कि उनके पति उनसे हर बात शेयर करें, और उनकी बातों को भी बिना जज किए ध्यान से सुनें. रिश्ते में सच्चाई और एक-दूसरे पर विश्वास होना बेहद जरूरी है.

पति जो समझे दिल की बात

पति-पत्नी के रिश्ते में आपसी समझ सबसे ज्यादा जरूरी होती है. ज्यादातर महिलाओं को अपने पति से इस बात की शिकायत रहती है कि वो उन्हें समझते नहीं हैं या समझना नहीं चाहते हैं. ऐसे में पति को अपनी पत्नी को उनकी पसंद और रुचियों को जानने की कोशिश करना चाहिए.

मेरा बौयफ्रेंड फ्लर्टी टाइप का है, क्या उससे शादी करना ठीक रहेगा?

सवाल

मैं 21 साल की होने वाली हूं. मेरा बौयफ्रैंड जिस की उम्र 25 साल है, मुझे बहुत प्यार करता है. वह मुझ से शादी के लिए भी तैयार है पर वह बहुत फ्लर्टी किस्म का है. हर लड़की को इंप्रैस करता है और हर बात मुझे बताता भी है. एक तरह से मुझे यह जताता है कि उस पर कई लड़कियां मरती हैं. लेकिन वह किसी को भाव नहीं देता, सिर्फ और सिर्फ मैं ही उस की जिंदगी में हूं. मेरे अलावा वह किसी और से प्यार नहीं करता. शादी के बाद भी उस का रवैया ऐसा ही रहा तो क्या मेरा उस से शादी करना ठीक रहेगा. आप ही मुझे रास्ता सुझाएं?

जवाब

एक तरफ वह आप से प्रेम व शादी की बात करता है जबकि दूसरी लड़कियों को इंप्रैस करता फिरता है. उस की ऐसी हरकत कई बातों की ओर इशारा करती है. एक, हो सकता है वह आप के साथ टाइम पास कर रहा हो. दूसरी, वह आप को यह जताना चाहता है कि आप उस के लिए इंपौर्टेंट हैं, कई लड़कियों के होते हुए भी वह सिर्फ आप को चाहता है, शादी करना चाहता है.

तीसरी बात, यह हो सकती है कि वह अपनी वैल्यू आप की नजर में बढ़ाना चाहता है ताकि आप उसे ज्यादा से ज्यादा तवज्जुह दें, उस के ऊपर ज्यादा फोकस करें क्योंकि वह आप को दिखाता है कि उस के पास तो लड़कियों की कमी नहीं है.

रही बात आप से सभी बातें शेयर करने की, तो वह सिर्फ आप को विश्वास में लेने के लिए ऐसा करता है. आप को तो हम यही सलाह देते हैं कि शादी के बारे में अभी मत सोचिए. अपने ब्रौयफ्रैंड को जरा और देखिएपरखिए. उस की फितरत के बारे में पहले पूरी तरह से श्योर हो जाएं, तभी शादी की सोचिए. वैसे भी आप की उम्र अभी ज्यादा नहीं है. बौयफ्रैंड 25 साल का है, उसे अपना कैरियर सैट करने दीजिए तब शादी का फैसला करना उचित रहेगा.

मेरी पत्नी मां बनना चाहती है लेकिन मुझे बच्चा नहीं चाहिए, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 28 साल का नौजवान हूं. मेरी शादी को 2 साल हो गए हैं. मेरी पत्नी बच्चा चाहती है, पर मैं अभी बच्चे की परवरिश का बोझ नहीं उठाना चाहता हूं, लेकिन वह मुझे ऐसा करने के लिए  मजबूर करती है. इस मुद्दे पर कभीकभार हम दोनों की बहस हो जाती है और कलह की वजह बनती है. मैं अपनी पत्नी के इस ‘बच्चा राग’ से परेशान हो गया हूं. मैं क्या करूं?

जवाब

मां बनना किसी भी औरत की ख्वाहिश और हक होता है, जिसे कोई  पति अपनी पत्नी से छीन नहीं सकता. लगता है कि आप पत्नी को ढंग से सम झा नहीं पा रहे हैं. उसे बताएं कि आज के महंगाई के दौर में बच्चे की परवरिश करना बेहद खर्चीला काम हो चला है, लिहाजा यह जिम्मेदारी तभी  ली जाए जब ठीकठाक पैसा या आमदनी हो जाए.

हो सकता है कि घर में या बाहर की औरतें आप की पत्नी को ताना मारने लगी हों, इसलिए उस का बच्चा राग तेजी से बजने लगता हो. आप पत्नी को भी किसी काम से या नौकरी पर लगा दें. इस से वह बिजी भी रहेगी और घर की आमदनी भी बढ़ेगी.

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उम्र में पत्नी से छोटे पति

Society News in Hindi: साल 1998 में अरबाज खान से शादी कर साल 2017 में तलाक लेने वाली 45 साला बौलीवुड की मशहूर ‘आइटम गर्ल’ मलाइका अरोड़ा अब अपने से 12 साल छोटे अर्जुन कपूर के साथ रिलेशनशिप में हैं. वे दोनों अब पब्लिकली नजर आने लगे हैं. उन की शादी होगी, ऐसी खबरें भी उड़ने लगी हैं. दोनों के डिनर डेट की तसवीरें वायरल हो रही हैं. 43 साल की सुष्मिता सेन पिछले कुछ दिनों से अचानक अपने अफेयर को ले कर फिर से चर्चा में हैं. इस बार वे खुद से 15 साल छोटे रोहमन शौल के साथ रिलेशनशिप को ले कर खबरों में हैं. वे दोनों कई पार्टियों में साथ भी नजर आए हैं.

खबरों में यह भी है कि रोहमन शौल ने सुष्मिता सेन को शादी के लिए प्रपोज किया है. वे दोनों तकरीबन 2-3 महीने पहले एक फैशन इवैंट में मिले थे और अब एकदूसरे को डेट कर रहे हैं.

प्रियंका चोपड़ा भी अपनी शादी से पहले पिछले दिनों न्यूयौर्क में प्रीब्राइडल सैरेमनी के बाद अपनी गर्लगैंग के साथ बैचलर पार्टी के लिए एमस्टरडम रवाना हुई थीं. उस के बाद वे अपने से 11 साल छोटे निक जोनस के साथ शादी कर चुकी हैं.

कुछ समय पहले अपने से 7 साल छोटे हर्ष से शादी कर कौमेडियन भारती ने भी सब को अचरज में डाल दिया था. इस से पहले 41 साल की उम्र में प्रीति जिंटा ने अपने से 10 साल छोटे फाइनैंशियल एनालिस्ट जीन गुडइनफ से शादी कर ली थी तो उर्मिला मातोंडकर ने भी 9 साल छोटे मोहसिन से शादी कर सब को हैरत में डाल दिया था.

जाहिर है कि पढ़ाईलिखाई, नौकरी और अपने पैरों पर खड़े होने के बाद अब औरतें रिलेशनशिप और शादी को ले कर भी खुल रही हैं.

पहले जब औरतें घर से बाहर नहीं निकलती थीं तब उन्हें आदमी के पैर की जूती माना जाता था. उन के पास कोई हक नहीं था. पति की बात मानना, उस के मुताबिक खुद को ढालना और पति जब कहे समर्पण के लिए तैयार रहना, यही आदर्श पत्नी की खासीयतें थीं.

मगर अब माहौल बदल रहा है. आज औरतें पढ़लिख कर आगे बढ़ रही हैं. वे काबिल बन रही हैं. वे भरपूर नाम, पैसा और रुतबा हासिल कर रही हैं. ऐसे में वे पति का दबदबा क्यों सहें?

इस सिलसिले में मनोवैज्ञानिक और सोशल ऐक्टिविस्ट अनुजा कपूर कहती हैं कि अगर मर्द कम उम्र की लड़की से शादी कर सकता है, 15 साल की लड़की 45 साल के अधेड़ की बीवी बन सकती है, तो औरतें खुद से छोटे लड़कों को पति क्यों नहीं बना सकतीं?

आज औरतें कामयाब हैं. अपने पैरों पर खड़ी हैं. उन्हें अपने हक और कानून मालूम हैं. वे आदमी के बिना भी रह सकती हैं. वे घर के काम आराम से कर सकती हैं और बाहर के काम भी, इसलिए उन की जिंदगी में मर्द की अहमियत अब उतनी नहीं रही है.

पहले औरतों की शादी ज्यादा उम्र के शख्स से की जाती थी ताकि वे पति के कंट्रोल में रहें. उन की हर बात माने. ज्यादा उम्र के मर्दों के पास पैसा, तजरबा और रुतबा सबकुछ होता था. आज औरतें खुद ही इतनी काबिल, पढ़ीलिखी और कमाऊ हैं तो वे किसी का रोब क्यों सहें? वे अपने से कम उम्र के मर्द से शादी कर उस पर दबदबा बना कर रख सकती हैं. इसे एकदम से गलत भी नहीं माना जा सकता है, क्योंकि जो ज्यादा काबिल और रुतबेदार होगा वही दूसरे पर हावी रहेगा. यही समाज का नियम है.

सवाल उठता है कि मर्द क्यों अपने से ज्यादा उम्र की लड़की या औरत से शादी करते हैं? इस की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे:

समझदार और अनुभवी

बड़ी उम्र की पत्नी स्वभाव से गंभीर होती है. उन के साथ रिलेशनशिप में कम उम्र वाले ड्रामों और बचपने की गुंजाइश नहीं रहती, बल्कि आपसी समझ बनी रहती है. उन्हें हर मामले में ज्यादा तजरबा रहता है.

रुपएपैसे से मदद

बड़ी उम्र की कमाऊ पत्नी पैसे के लिहाज से भी मजबूत होती है. अपने पति के कैरियर को आगे बढ़ाने में और सैटल होने में भी मददगार रहती है. वह हर मामले में बेहतर सलाह दे सकती है और अपने संपर्कों से पति को फायदे में पहुंचा सकती है.

ये औरतें कम उम्र की ऐसी हाउस वाइफ से बेहतर होती हैं जो पैसों की अहमियत नहीं समझती हैं, बेमतलब का खर्च करने की आदी होती हैं और पूरी तरह पति पर निर्भर होती हैं.

सब्र और परवाह वाली

बड़ी उम्र की बीवी कम मांग करती है और ज्यादा देखभाल करती है. वह पूरा प्यार देना जानती है. फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में ऐश्वर्या राय बच्चन का किरदार कुछ ऐसा ही था. वे रणबीर कपूर के साथ ऐसे ही एक रिश्ते में थीं जहां वे फेमस शायर थीं तो वहीं रणबीर कपूर टौय बौय की तरह उन के साथ जुड़े थे.

जहां तक बात साथ जिंदगी जीने की है तो क्या ऐसे रिश्ते कामयाब होते हैं? क्या हैल्थ और सैक्सुअल समस्याएं आ सकती हैं?

इस बारे में सैक्सुएलिटी पर काफी काम कर चुके अल्फ्रैड विनसे के मुताबिक, मर्दों में सैक्सुअल हार्मोन

18 साल की उम्र में हद पर होते हैं, जबकि औरतों में 30 साल की उम्र के बाद यह समय होता है. हैल्थ के नजरिए से भी औरतें 5 साल ज्यादा जीती हैं. ऐसा होने की वजह लाइफस्टाइल या बायोलौजी नहीं है.

एक विधुर के अनुपात में उसी उम्र की 4 विधवाएं जिंदा रहती हैं यानी अपने से ज्यादा उम्र की लड़की के साथ शादी करने वाले मर्द पत्नी के साथ ही बूढ़े होते हैं.

वैसे भी प्यार में उम्र का फर्क माने नहीं रखता. जिंदगी किस के साथ और किस तरह बीती, यह अहम होता है.

मेरी पत्नी अक्सर अपने बॉयफ्रेंड से मिलती है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 28 साल का हूं और फौज में काम करता हूं. शादी को 3 साल हो गए. 2 बेटियां भी हैं. बीवी मेरे घर से 600 किलोमीटर दूर अपने मायके में रहती है. अपनी छोटी बहन के दोस्त से उस के नाजायज संबंध भी हैं. वह कहती है कि मुझे छोड़ देगी, लेकिन उस नाजायज आदमी को नहीं छोड़ेगी. जरा सी बात पर हाथपैर तुड़वाने की धमकी देती है. वह न तो तलाक देती है और न ही मेरे पास आती है. मैं क्या करूं?

जवाब

फौज में होते हुए भी आप घर के मोरचे पर मुसीबतों से घिरे हुए हैं. आमतौर पर पतिपत्नी के बीच सुलह होना ही अच्छा होता है, पर हालात देखते हुए इस के आसार नहीं लगते. आप किसी रिश्तेदार के जरीए एक बार समझौते की कोशिश कर सकते हैं. पत्नी को समझाएं कि अपनी बेटियों और आने वाले वक्त की बेहतरी के लिए आवारगी छोड़ कर घर लौट आए. दूसरा रास्ता है किसी काबिल वकील के जरीए तलाक की कोशिश करना. वैसे, पति को तलाक आसानी से नहीं मिलता.

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मेरी पत्नी सैक्स के लिए काफी एक्साइटेड रहती है लेकिन मैं उसे समय नहीं दे पाता, क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 33 वर्ष है. अच्छी प्राइवेट जौब में हूं. काफी बिजी शैड्यूल है मेरा पूरे दिन का. शादी हुए एक साल हो गया है. घर की सारी जिम्मेदारी पत्नी संभालती है. मेरी समस्या यह है कि औफिस से घर रोज डेढ़ घंटे की ड्राइव कर के पहुंचता हूं. काफी थक जाता हूं. जी करता है बस सो जाऊं. दूसरी तरफ पत्नी रात को सैक्स के लिए काफी एक्साइटेड रहती है.

यही नहीं, वह चाहती है कि पहले हम फोरप्ले करें. उस के बाद इंटरकोर्स. जबकि, थकावट के कारण मैं फोरप्ले न कर इंटरकोर्स कर के सो जाता हूं. अब देख रहा हूं कि पत्नी कुछ मायूस सी रहती है. मुझ से कोई शिकायत तो नहीं करती पर कहती है कि सो जाओ, थक गए हो. मुझे उस का ऐसा कहना अच्छा नहीं लगता. उसे मेरी प्रौब्लम समझनी चाहिए. फोरप्ले करना ऐसा क्या जरूरी है, सैक्स तो हम करते ही हैं न. उस का यों मुंह फुला कर रहना मुझे अच्छा नहीं लगता क्योंकि रूठनामनाना मुझे पसंद नहीं. अभी तो शादी हुए महज एक ही साल हुआ है, पता नहीं आगे की लाइफ कैसे कटेगी?

जवाब

आप ने अपने लिए प्रौब्लम खुद ही खड़ी की है. आप कह रहे हैं कि आप की पत्नी को आप की प्रौब्लम समझनी चाहिए तो वह समझ रही है, तभी तो आप से कोई शिकायत नहीं कर रही है. मायूस और मुंह फुला कर इसलिए रह रही है क्योंकि आप उसे सम झने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. उसे आप के थोड़े से टाइम की जरूरत है जो आप से नहीं मिल पा रहा. लेकिन आप की अपनी मजबूरी है जो पत्नी भी समझती है.

दूसरी बात, आप का यह कहना कि फोरप्ले उस के लिए ऐसा क्या जरूरी है, बिलकुल गलत है. चाहे आदमी हो या औरत, सैक्स एंजौय करना इंटिमैसी के लिए बहुत जरूरी है. लेकिन कई बार आदमियों के लिए सैक्स का मतलब सिर्फ पेनिट्रेशन होता है लेकिन डायरैक्ट पेनिट्रेशन औरतों के लिए पेनफुल साबित हो सकता है. इसलिए बेहतर सैक्स के लिए बहुत जरूरी होता है फोरप्ले यानी सैक्स करने से पहले एकदूसरे को उत्तेजित करने वाली क्रियाएं. ऐसा देखा गया है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में देर से उत्तेजित होती हैं, इसलिए सैक्स से पहले उन के पार्टनर की जिम्मेदारी है कि फोरप्ले जरूर करें ताकि उन्हें अच्छा महसूस हो.

आप के रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए सैक्स जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी फोरप्ले भी है. जब आप और आप के पार्टनर एकदूसरे को छेड़ते हैं, चूमते हैं तो आप दोनों एकदूसरे के प्रति ज्यादा आकर्षित महसूस करने लगते हैं. कई बार ऐसा कहा जाता है कि सैक्स से ज्यादा जरूरी फोरप्ले होता है.

इसलिए अपने बिजी शैडयूल से, कैसे भी हो, अपनी पत्नी के लिए समय निकालिए. पतिपत्नी के बीच ये दूरियां ही कभीकभी रिश्ते को समाप्ति के कगार पर ले आती हैं. आप यह गलती न करें. इस समस्या का समाधान आप के हाथों में ही है. इस बारे में आप ज्यादा मत सोचिए और आज से ही इस की शुरुआत करें.

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