Hindi Story : क्या क्या ख्वाब दिखाए: मेरी पत्नी छंदा

Hindi Story. ख्वाब दिखाना तो महिलाओं का शगल होता है. मेरी पत्नी छंदा को भी सपने दिखाने का शौक है. मैं ने एक दिन छंदा से कहा, ‘‘तुम प्लीज मुझे सपने मत दिखाया करो. यह सब काम तो प्रेमिका का होता है.’’

वह गार्डन में मिलती है. मुसकराती है, जूड़े में लगे फूल को संवारती है, फिर धीरे से कहती है, ‘‘हमारी शादी हो जाएगी न हैंडसम, तब मैं डैड से कह कर दफ्तर में पीए बनवा दूंगी. कार दिलवा दूंगी फिर हम हनीमून के लिए बैंकाक, सिंगापुर जाएंगे. बड़ा मजा आएगा न.’’

प्रेमी ख्वाब के समुद्र में गोता लगाने लगता है. बाद में पता चलता है कि ऐसे ख्वाब के चक्कर उस ने कई पे्रमियों के साथ चलाए हैं. सब को पतंग समझ कर सपनों के आसमान पर जी भर कर उड़ाया है. अपनी जमीन छोड़ चुके प्रेमी हवा में उड़ते रहे और वे अब जमीन के रहे न आसमान के, त्रिशंकु बन कर अधर में लटकते रहे.

मैं ने कहा, ‘‘क्षमा करना देवी, मैं शादीशुदा हूं, घर में सपने दिखाने के लिए पत्नी है. वह रातदिन सपने दिखाती रहती है.’’

प्रेमिका ठहाका मार कर हंसते हुए बोली, ‘‘पत्नी व सपने? अच्छा मजाक कर लेते हो. सपने दिखाना प्रेमिका को ही शोभा देता है. पत्नी तो बेचारी चूल्हाचौका,  झाड़ूपोंछा, बर्तनों की सफाई में, बच्चों की चिल्लपों में उलझी रहती है. उस के पास न तो सोने की फुरसत होती है न सपने देखने का समय बचता है. एक पल पति से बात करने के लिए तरस जाती है बेचारी. घरगृहस्थी का चक्कर होता ही ऐसा है. पत्नी तो ब्लाटिंगपेपर बन कर रह जाती है जहां सारे सपने एकएक कर सोख लिए जाते हैं.’’

इस के बाद प्रेमिका की खिल- खिलाहट काफी देर तक मेरे कान में गूंजती रही. मैं मन ही मन एक फिल्मी गीत गुनगुनाने लगा, ‘‘रात ने क्याक्या ख्वाब दिखाए…’’

सात फेरों के समय पत्नी का हर फेरा किसी रंगीन ख्वाब से कम नहीं होता. पहले फेरे में छंदा ने ख्वाब का पहला फंदा डालते हुए कहा था, ‘‘डार्लिंग, मैं वचन देती हूं कि मेरी ओर से तुम्हें किसी प्रकार की शिकायत नहीं होगी.’’

मैं ने कहा था, ‘‘थैंक्स…’’

दूसरा फेरा लेते हुए वह बोली थी, ‘‘मैं तुम्हें वह सब सुख दूंगी जो हर पति चाहता है.’’

मैं ने प्रसन्न मुद्रा में कहा, ‘‘ख्वाब अच्छा है. बुनती जाओ.’’

वह तुरंत बोली, ‘‘हम अपने बच्चों को जापान पढ़ने भेजेंगे.’’

ख्वाबों के आकाश से वह तारे तोड़ने लगी. तब मेरा पति धर्म जाग गया.

मैं ने पूछा, ‘‘ठंडा पीओगी? सपने बुनने में तुम्हें राहत मिलेगी.’’

‘‘आप ऐसा कैसे बोल रहे हैं. मैं तो अपनी गृहस्थी की नींव मजबूत करने के लिए अपनी कोमल भावनाएं जाहिर कर रही थी. तुम्हारी पत्नी बन रही हूं. खाना बनाऊंगी भी और पेट भर तुम्हें खिलाऊंगी भी. तुम तो जानते ही होगे कि पत्नी अपने पति के दिल पर शासन करने के लिए उस के पेट से ही रास्ता बनाती है.’’

छंदा नारी रहस्य बताती जा रही थी.

‘‘मतलब?’’ मैं ने पूछा.

‘‘जो पत्नी स्वादिष्ठ भोजन बनाना जानती है उस का पति हमेशा उस के आसपास मंडराता रहता है, फुदकता रहता है. उन के बीच सदैव प्रेम बना रहता है. प्यार कभी मुरझाता नहीं.’’

छंदा सप्तपदी की एकएक शपथ में ख्वाबों का उल्लेख करती रही, जिस में कम खर्च, सहनशीलता, आपसी सहयोग ‘…सुख मेरा ले ले मैं दुख तेरा ले लूं’ टाइप के फिल्मी गीत के मुखड़े शामिल थे.

ऐसी बातें कर जो सपने छंदा ने मुझे दिखाए तब मैं ने अपने भाग्य को सराहा था. अपने को दुनिया का सब से भाग्यशाली पति समझा था, जिसे ऐसी सुशील, दूरदर्शी पत्नी मिली थी.

 

गृहस्थी के विषय में मैं निश्ंिचत था. ख्वाबगाह में आराम से लेटेलेटे चैन की बांसुरी बजाता रहा. तब मुझे क्या पता था कि छंदा ने अभी तो सिर्फ मेरी उंगली पकड़ी है, वह धीरेधीरे पहुंचा पकड़ने की गुप्त तैयारी कर रही है.

छंदा ने कहा, ‘‘सुनो, मिसेज चोपड़ा ने बसंत विहार में 45 लाख का फ्लैट लिया है. क्यों न हम भी एक फ्लैट वहां बुक करा लें. आप का ख्वाब पूरा हो जाएगा.’’

मेरे कान खड़े हो गए. एक पल को मुझे लगा कि मेरा ख्वाब टूटने से कहीं मेरा ब्लडप्रेशर न बढ़ जाए. गंभीर हो कर मैं ने कहा, ‘‘प्रिय छंदा, मध्यवर्गीय परिवार के सपने भी छोटेछोटे होते हैं. बड़ेबड़े सपने देखना हमें शोभा नहीं देता. इन के टूटने पर हम डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं. ख्वाब तो शुद्ध घी की तरह होता है जिसे हर कोई पचा नहीं पाता. अपना यह छोटा सा मकान क्या बुरा है. सिर पर बस, छत होनी चाहिए. रातोंरात तुम्हारे लखपति बनने के ख्वाब ने ही हमें शेयरमार्केट के आकाश से पटक कर जमीन दिखला दी. तब तुम ने इस हादसे को सहजता से लिया था.’’

‘‘ऐसी करवटें तो शेयर बाजार का ऊंट बदलता रहता है. आज घाटे में हैं कल फिर लाभ में आ जाएंगे. सब दिन एक जैसे नहीं होते,’’ कहते हुए वह मुझे फिर से अच्छे दिन आने के ख्वाब दिखाने लगी.

मैं जानता हूं कि बीवी के ख्वाब के पीछे उस की महत्त्वाकांक्षी भावनाएं ही हैं. मैं ने विवाह के समय ली गई शपथ याद दिलाते हुए कहा, ‘‘तुम सभी सुख मुझे दोगी जो हर पति चाहता है.’’ मेरे द्विअर्थी संवाद सुन कर वह ‘धत’ कहते हुए शरमा गई.

मेरी स्थिति ‘खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता है’ की तरह हो गई. मैं भी पत्नी के साथ रहतेरहते रातदिन ख्वाब देखने लगा हूं. हम शाम को साथसाथ ख्वाब बुनते हैं. ख्वाब देखना आज देश की पहली जरूरत है. ख्वाब ही तो हमें आगे बढ़ाते हैं. पहले जब मैं ख्वाब नहीं देखता था तब रक्तचाप, मधुमेह बीमारी का शिकार था. अब ख्वाब साकार करने के लिए नईनई योजनाएं बना रहे हैं. इसी अनुसार अर्थात चादर के अनुसार पैर पसार रहे हैं. आशा का संचार मन में हो रहा है. छंदा अब पत्नी के रूप में प्रेमिका नजर आने लगी है. नएनए ख्वाबों की जननी है वह, उसे मैं अब ख्वाबों की मलिका कहने लगा हूं. Hindi Story

Love Crime : प्रेमी ने ही प्रेमिका को उतारा मौत के घाट

Love Crime : गुरुवार 10 फरवरी, 2022 का दिन ढल चुका था. शाम के यही कोई 6 बजे का वक्त था. मध्य प्रदेश के जिला भिंड के सिटी कोतवाली स्थित थाने के ड्यूटी अफसर थाने पहुंचे ही थे कि एक युवक बदहवास हालत में थाना परिसर में दाखिल हुआ. उस के बाल बिखरे हुए थे. कपड़ों पर भी खून के ताजा दाग लगे हुए थे.

पहरा ड्यूटी पर मुस्तैदी के साथ तैनात संतरी ने उसे रोकने की भरसक कोशिश की, लेकिन वह सीधे ड्यूटी अफसर के सामने जा खड़ा हुआ और फिर हाथ जोड़ कर नमस्कार कर अपना परिचय देते हुए कहा, ‘‘सर, मेरा नाम रितेश शाक्य है. मैं भिंड जिला अस्पताल में वार्डबौय के पद पर नौकरी करता हूं और गांधीनगर में अपनी पत्नी और 2 बच्चों के साथ रहता हूं.

कुछ देर पहले मैं ने स्टाफ नर्स के पद पर काम करने वाली अपनी प्रेमिका नेहा की गोली मार कर हत्या कर दी है. उस की लाश नवीन आईसीयू वार्ड के स्टोर रूम में पड़ी हुई है. सर, क्योंकि मैं ने अपनी प्रेमिका की हत्या कर के बड़ा अपराध किया है, अत: मुझे गिरफ्तार कर लीजिए.

युवक की बातें सुन कर ड्यूटी पर तैनात सुरजीत तोमर सन्न रह गए. वह आंखें फाड़े उस युवक को देखने लगे कि कहीं यह नशेड़ी या सनकी तो नहीं है जो इस तरह की बात कर रहा है.

हालांकि थाने में आ कर कोई इस तरह का मजाक करने का साहस तो नहीं कर सकता, इसलिए जब उन्होंने उस युवक को गौर से देखा तो मासूम सा दिखने वाला वह युवक काफी संजीदा लगा. इस का मतलब साफ था कि वह जो कुछ कह रहा है, सच है.

तोमर ने इस बात की जानकारी कार्यवाहक थानाप्रभारी सुरजीत यादव को दी तो उन्होंने तुरंत उस युवक को हिरासत में लेने के निर्देश दिए. तोमर ने तुरंत युवक को हिरासत में ले लिया. थानाप्रभारी उस समय क्षेत्र में थे. सूचना पा कर वह तुरंत थाने पहुंच गए.

सुरजीत यादव ने आरोपी रितेश से पूछताछ करने के बाद अस्पताल परिसर में स्थित पुलिस चौकी पर तैनात कांस्टेबल नागेंद्र राजावत से बात की तो उन्होंने भी घटना की पुष्टि कर दी.

साथ ही यह भी बताया कि घटना के विरोध में अस्पताल की नर्सें और अन्य कर्मचारी अस्पताल में धरने पर बैठ गए हैं. धरने को ले कर लोगों में काफी आक्रोश है.

थानाप्रभारी ने यह जानकारी एसपी शैलेंद्र सिंह को दी. इस के बाद एसपी के आदेश पर जिले के कई थानों की पुलिस जिला अस्पताल पहुंच गई. पुलिस ने सब से पहले अस्पताल के स्टोर रूम में पहुंच कर स्टाफ नर्स नेहा की लाश अपने कब्जे में ली. वह वहां खून से लथपथ पड़ी थी.

उस की कनपटी के बाईं ओर गोली मारी गई थी. वह सलवारसूट के ऊपर सफेद रंग का एप्रिन पहने हुए थी, जो खून से भीगा हुआ था.

घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद वहां मौजूद नर्सों से पूछताछ करने पर यह मालूम हुआ कि मृतका आज ड्यूटी खत्म होने के बाद छुट्टी की एप्लीकेशन दे कर एक सप्ताह के लिए अपने मातापिता के पास अपना जन्मदिन मनाने के लिए मंडला जाने वाली थी. इस से पहले कि नेहा अवकाश पर मंडला के लिए रवाना हो पाती, यह घटना घट गई.

नेहा का जन्मदिन 14 फरवरी, 2022 को उस के गृहनगर मंडला में धूमधाम से मनाया जाने वाला था. स्टाफ नर्स की हत्या के बाद दिए जा रहे धरने से स्वास्थ्य सेवा लड़खड़ा जाने और वहां से तनावपूर्ण हालात के बारे में सूचना पा कर एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान एसपी (सिटी) आनंद राय, एसडीएम उदय सिंह सिकरवार फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर आ गए थे.

फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए. फोरैंसिक टीम का काम खत्म होते ही एसपी ने सीएमओ डा. अजीत मिश्रा, सिविल सर्जन डा. अनिल गोयल सहित जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. देवेश शर्मा की मौजूदगी में घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण तो किया ही, साथ ही जिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ से पूछताछ कर नेहा के अतीत के बारे में जानकारी एकत्र की.

इस से पता चला कि जिला अस्पताल में वार्डबौय के पद पर कार्यरत रितेश नेहा से प्रेम करता था और उस से मिलने उस के धर्मपुरी स्थित कमरे पर भी आताजाता रहता था. लेकिन आज उन दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ, किसी को पता नहीं था.

इस के बाद पुलिस ने नेहा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और उस के परिजनों को भी इस घटनाक्रम से अवगत कराते हुए शीघ्र भिंड आने के लिए कहा.

वहीं इस हत्याकांड की विवेचना का दायित्व सीएसपी आनंद राय को सौंप दिया. इस से पहले जिला अस्पताल पुलिस चौकी में तैनात कांस्टेबल नागेंद्र राजावत की तहरीर पर भादंवि की धारा 302 तथा आर्म्स एक्ट 25, 27, 54, 59 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया.

जिला अस्पताल की नर्स नेहा चंदेला की हत्या के विरोध में नर्सों का दूसरे दिन भी धरना जारी रहा. इस से जिला अस्पताल के अंदर वार्डों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह लड़खड़ा गई थी. तमाम लोग अपने मरीज की वक्त पर देखभाल न होने की वजह से मरीज को बिना छुट्टी के ही बेहतर उपचार के लिए वहां से ग्वालियर ले कर रवाना हो गए.

हड़ताली नर्सों को समझाने के लिए एसडीएम उदय सिंह सिकरवार, सीएमओ डा. अजीत मिश्रा, सिविल सर्जन डा. अनिल गोयल ने काफी जतन किया, लेकिन जब वे इस में सफल नहीं हुए तो उन्हें थकहार कर नर्सेज एसोसिएशन की प्रांतीय अध्यक्ष रेखा पवार को ग्वालियर वाहन भेज कर बुलाना पड़ा, जिस के बाद उन की समझाइश पर आक्रोशित नर्सें शाम 4 बजे काम पर लौटने के लिए राजी हुईं.

हालांकि इस से पहले जिला अस्पताल के द्वार पर ताला जड़े रहने से उपचार के अभाव में नयापुरा निवासी फिरोज खान की बेगम नाजिया की मृत्यु हो गई थी.

रोज की तरह 10 फरवरी, 2022 को भी नेहा चंदेला अपनी ड्यूटी पर पहुंच कर अपने कामकाज में जुट गई थी. शाम के कोई 5 बजे के करीब उस के मोबाइल फोन की घंटी बजी तो उसे हैरानी हुई कि ड्यूटी समाप्त होने को है इस वक्त कौन फोन कर रहा है.

लेकिन जब मोबाइल फोन की स्क्रीन पर चिरपरिचित नंबर देखा तो वह चौंकी भी और परेशान भी हुई कि रितेश कैसा बेशरम शख्स है जो उस के मना करने के बावजूद भी हाथ धो कर पीछे पड़ गया है.

फोन रिसीव न करना शिष्टाचारवश उसे उचित नहीं लगा, क्योंकि वह इस बात को भलीभांति जानती थी कि रितेश तब तक काल करता रहेगा, जब तक कि वह उस की काल रिसीव नहीं कर लेगी.

लिहाजा नेहा ने मन मार कर रितेश का फोन रिसीव कर लिया तो रितेश ने उस से अनुरोध किया, ‘‘आज शाम छुट्टी खत्म करने के बाद मंडला जाने से पहले प्लीज एक मर्तबा तुम मुझ से अकेले में मुलाकात कर लो. इस के बाद मुझे कभी भी तुम से बात करने का मौका नहीं मिलेगा.’’

नेहा असमंजस में पड़ गई कि क्या करे क्या न करे. रितेश शाक्य नेहा का बौयफ्रैंड था. वह भी उसी अस्पताल में वार्डबौय था.

6 दिसंबर को नेहा की सगाई गौरव पटेल के साथ तय हो जाने के बाद उस ने रितेश से न सिर्फ बातचीत करनी बंद कर दी थी, बल्कि मेलमुलाकात करनी भी लगभग बंद कर दी थी. नेहा ने रितेश से साफतौर पर कह दिया था कि मेरी सगाई हो जाने के बाद मैं अब तुम से किसी भी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहती.

नेहा का रिश्ता तय होने से खार खाए बैठे रितेश ने नेहा से मोबाइल पर गिड़गिड़ाते हुए कहा था कि आज मिलने के बाद आइंदा वह न तो कभी फोन करेगा और न कभी मिलने की कोशिश करेगा, यह उस का वायदा है.

जिस दिन से नेहा ने रितेश से बात करनी और अकेले में मेलमुलाकात का सिलसिला बंद किया था, उसी दिन से रितेश काफी तनाव में रहने लगा था. रितेश के अनुरोध पर नेहा ने ड्यूटी खत्म होने के बाद स्टोररूम में सिर्फ अंतिम बार बात करने के लिए इस शर्त के साथ अनुमति दे दी थी कि वह अपनी बात मनवाने के लिए किसी तरह की हठ नहीं करेगा.

ड्यूटी समाप्त होने से कुछ समय पहले शाम 5 बज कर 10 मिनट पर रितेश कमर में देशी पिस्टल लगा कर स्टोररूम में दाखिल हुआ. रितेश को देख कर नेहा ने रूखी आवाज में कहा, ‘‘जो भी बात करनी है जल्दी करो, मुझे छुट्टी का एप्लीकेशन दे कर मंडला के लिए निकलना भी है.’’

वार्डबौय रितेश को इतनी तो समझ थी ही कि जिस नम्रता के साथ अपनी प्रेमिका से अंतिम बार मिलने के बहाने स्टोररूम में दाखिल हुआ है, उसी का आश्रय ले कर वह अपनी बात मनवाने के लिए नेहा पर दबाव बनाने का प्रयास करेगा.

बातचीत की शुरुआत में ऐसा हुआ भी. उस ने नेहा से एक बार फिर गुजारिश की कि वह उस का ज्यादा वक्त नहीं लेगा, सिर्फ 10 मिनट ही इत्मीनान के साथ बातचीत करेगा.

नेहा चूंकि जिला अस्पताल में ड्यूटी पर थी, इसलिए उसे किसी तरह का खतरा रितेश से महसूस नहीं हुआ. नेहा का सोचना था कि रितेश अंतिम बार उस से इत्मीनान के साथ बातचीत कर अपनी भड़ास निकाल लेगा तो उस की शादी करने वाली हठ खत्म हो जाएगी.

इस के बाद हमेशा के लिए उस का रितेश से पीछा छूट जाएगा. यही सब सोच कर उस ने रितेश को बातचीत करने के लिए अपनी सहमति दी थी. उस वक्त उसे इस बात का कतई अंदेशा नहीं था कि आज रितेश के सिर पर हैवानियत सवार है. और वह उसे चिरनिद्रा में सुलाने की मंशा से आ रहा है.

बातचीत का दौर शुरू करने से पहले जैसे ही रितेश ने कमर में लगा देसी पिस्टल निकाल कर मेज पर रखा तो नेहा को यह समझते जरा भी देर नहीं लगी कि उस ने रितेश को बातचीत के लिए बुला कर बहुत बड़ी मुसीबत मोल ले ली है.

नेहा के साथ बातचीत का दौर शुरू होते ही रितेश ने नेहा से दोटूक शब्दों में कहा, ‘‘तुम सिर्फ मेरी हो, मेरी ही रहोगी. मैं हरगिज किसी भी सूरत में तुम्हारी शादी गौरव पटेल के साथ नहीं होने दूंगा. बोलो, मेरे से शादी करोगी या नहीं?’’

नेहा ने रितेश से कहा, ‘‘तुम पहले से ही शादीशुदा ही नहीं 2 बच्चों के बाप भी हो. इसलिए मैं तुम से शादी नहीं कर सकती. मेरे मांबाप ने जिस लड़के से मेरा रिश्ता तय किया है, मैं उसी के साथ शादी करूंगी.’’

इतना सुनते ही रितेश बुरी तरह बौखला गया. उस ने तत्काल मेज पर रखी देसी पिस्टल उठा कर उस की नाल का रुख नेहा की बाएं कनपटी की ओर कर के ट्रिगर दबा दिया. गोली लगते ही नेहा कुरसी पर बैठे ही बैठे चिरनिद्रा में डूब गई.

गोली चलने की आवाज सुनते ही अस्पताल का स्टाफ स्टोर रूम की ओर गया तो नेहा को कुरसी पर लहूलुहान देख कर सभी के जैसे होश उड़ गए. वार्डबौय रितेश के हाथ में तमंचा देख कर उन्हें वाकया समझने में देर नहीं लगी. रितेश सभी को धमकाते हुए अस्पताल से निकल कर सिटी कोतवाली थाने में चला गया और आत्मसमर्पण कर दिया.

कार्यवाहक थानाप्रभारी सुरजीत यादव ने मृतका के मातापिता का पता ले कर उस के घर वालों को मंडला फोन कर के घटना की सूचना दे दी. सूचना पा कर नेहा का बड़ा भाई करीबी रिश्तेदारों को ले कर दूसरे दिन भिंड पहुंच गया.

पुलिस ने रितेश के पिता को भी थाने बुला कर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि रितेश का नेहा नाम की नर्स से प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिस की वजह से रितेश की अपनी पत्नी से भी अनबन चल रही थी. वह नेहा से शादी करना चाह रहा था, लेकिन उन्हें इस बात की कतई जानकारी नहीं थी कि वह उक्त नर्स की हत्या कर देगा.

पूछताछ के बाद रितेश के पिता को घर जाने की अनुमति दे दी गई. पोस्टमार्टम के बाद नेहा का शव उस के घर वाले अंतिम संस्कार के लिए मंडला ले आए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नेहा की मौत गोली लगने से हुई थी.

जांच में पुलिस को पता चला कि नेहा और रितेश के इश्क की नींव वर्ष 2018 में उस वक्त रखी गई, जब वह मंडला से भिंड जिला अस्पताल में बतौर स्टाफ नर्स की नौकरी करने आई थी.

उन दोनों की पहली मुलाकात अस्पताल परिसर में बनी चाय की गुमटी पर हुई थी. उस समय नेहा चाय पीने वहां आई थी, संयोग से तभी रितेश भी वहां पर चाय पीने आया हुआ था. चूंकि रितेश भी जिला अस्पताल में वार्डबौय के पद पर कार्यरत था.

दरअसल, वह नेहा से काफी सीनियर था इसलिए नौकरी के साथ शुरुआती दौर में नर्स के कार्य के गुर सिखाने में उस ने नेहा की काफी मदद की थी.

नेहा उस के इस उपकार से काफी प्रभावित हुई थी. दोनों की जान पहचान होने के बाद उन के बीच मोबाइल पर बातचीत होनी शुरू हो गई. हालांकि रितेश की नौकरी 2009 में संविदा वार्डबौय के तौर पर भिंड के जिला अस्पताल में लगी थी. लेकिन उसे इस बात की उम्मीद थी कि निकट भविष्य में वह स्थाई हो जाएगा. नेहा से मोबाइल पर होने वाली लंबी बातचीत से उस की दोस्ती गहरी होती गई और मित्रता कब इश्क में बदल गई पता नहीं चला.

कहते हैं कि इश्क अंधा होता है वह जातपात के भेद को नहीं मानता. नेहा और रितेश अलगअलग जाति के थे, इस के बावजूद भी रितेश ने तय कर रखा था कि वे ताउम्र साथ रहेंगे और दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें जुदा नहीं कर सकेगी.

नेहा से रोज मुलाकात कर के वह अपने भावी जीवन के सुनहरे सपने देखने लगा था. कहते हैं कि इश्क को कितना भी छिपाने का जतन किया जाए, वह छिपता नहीं है.

नेहा के साथ काम करने वाले स्टाफ से ले कर रितेश के घर वालों को पता चल गया था कि ड्यूटी खत्म होने के बाद रितेश नेहा को बाइक पर ले कर खुल्लम खुल्ला घूमता फिरता है.

रितेश नेहा के प्यार में इतना दीवाना हो गया था कि वह अपनी पत्नी प्रीति की भी उपेक्षा करने लगा था. इस बारे में प्रीति ने रितेश से बात की तो उस ने झिड़कते हुए साफतौर पर कह दिया था कि वह नेहा से सिर्फ प्यार ही नहीं करता है, बल्कि उसे अपने दिल की रानी बना चुका है. निकट भविष्य में वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाने वाला है.

पति का यह फैसला सुनने के बाद प्रीति भी परेशान रहने लगी कि आखिर वह पति को कैसे समझाए. इस बात को ले कर उन दोनों का आपस में झगड़ा भी रहता था.

रितेश से विस्तार से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया. इस के बाद उसे भिंड जिला अदालत में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

रितेश ने नासमझी और मूर्खतापूर्ण कदम उठा कर न सिर्फ नेहा को असमय मौत की नींद सुला दिया, बल्कि अपने सुनहरे भविष्य पर भी कालिख पोत ली. रितेश के जेल जाने के बाद उस के दोनों मासूम बच्चों सहित पत्नी के भविष्य पर भी ग्रहण लग गया है.

—पंकज द्विवेदी

Rape Case: दलित लड़की का गैंगरेप कर सोशल मीडियो पर अप्लोड की वीडियो

Rape Case: इनसान को अपनी इनसानियत खोने में पलभर भी नहीं लगता. हालात ऐसे हो गए हैं कि कभीकभार जानवर पर भरोसा किया जा सकता है कि वह नुकसान नहीं करेगा, लेकिन इनसान से कब कैसी हैवानियत सामने आ जाए, कोई नहीं जानता. आज कुछ लोगों की सोच इतनी गिर चुकी है कि वे अपनी कुछ देर की हवस या गंदी हरकत से पहले यह तक नहीं सोचते कि उस के बाद पीड़ित और उस का परिवार कितनी पीड़ा और अपमान झेलने को मजबूर होगा.

ऐसा ही कुछ हुआ मैनपुरी के एक गांव में जहां एक दलित लड़की के साथ 2 अधेड़ उम्र के आदमियों ने गैंगरेप किया और उस के बाद लड़की का वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर अप्लोड भी कर दिया. लड़की की मां ने आरोपियों के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करवाया कि उस की 14 साल की बेटी जब सुबह 11 बजे गांव के पास ही खेत में घास काटने गई, तभी 50 साल के महावीर यादव और 40 साल के नवीनचंद्र यादव अचानक वहां जा पहुंचे और लड़की को डराधमका कर खेत में ले जा कर उस के साथ गैंगरेप कर दिया. फिलहल दोनों आरोपी फरार हैं, लेकिन पुलिस का कहना कि वह आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ लेगी. Rape Case

Love Crime: इश्क का जुनून – मां ने कराई खुद के बेटे की हत्या

Love Crime: पति की मौत के बाद आरफा बेगम की जिंदगी पटरी पर लौटने लगी थी. शादीशुदा बेटे मोहम्मद नदीम (30 वर्ष) ने भी पूरी तरह अब्बू का बिजनैस संभाल लिया था. लेकिन इसी दौरान ऐसा क्या हुआ कि आरफा बेगम अपने इकलौते बेटे नदीम की कातिल बन गई? उस ने 25 लाख की सुपारी दे कर आंखों के तारे, राजदुलारे की क्रूरता से हत्या करा दी.

सचमुच कुएं में पानी पर एक लाश उतरा रही थी. इस के बाद तो जिस ने भी यह बात सुनी, वह मंदिर के पास स्थित उस कुएं की तरफ चल दिया. कुछ ही देर में सैकड़ों की भीड़ वहां जमा हो गई. इसी बीच किसी व्यक्ति ने फोन के जरिए कुएं में लाश पड़ी होने की सूचना थाना अजगैन पुलिस को दे दी. यह बात 5 जून, 2024 की सुबह की थी.

सूचना पाते ही एसएचओ अवनीश कुमार सिंह पुलिस बल के साथ घटना स्थल की तरफ रवाना हो गए. रवाना होने से पूर्व उन्होने प्राप्त सूचना से पुलिस अधिकारियों को भी अवगत करा दिया था. कुछ देर बाद ही अवनीश कुमार सिंह घटनास्थल पहुंच गए. वह भीड़ को परे हटाते कुएं के पास पहुंचे और झांक कर देखा तो सच में कुएं में किसी युवक की लाश उतरा रही थी. कुएं के पास खून फैला था और एक बाइक खड़ी थी. एसएचओ ने अनुमान लगाया कि बाइक या तो मृतक की है या फिर कातिल की होगी.

चूंकि बाइक के नंबरों से उस के मालिक का पता चल सकता था. अत: उन्होंने आरटीओ औफिस से उस नंबर के संबंध में जानकारी जुटाई. इस जांच में पता चला कि उक्त बाइक का रजिस्ट्रैशन मोहम्मद नदीम निवासी अलहम्द रेजीडेंसी इफ्तखाराबाद थाना अनवरगंज, कानपुर नगर के नाम है. रजिस्ट्रैशन से बाइक के बारे में तो पता च ल गया, लेकिन कुएं में उतराती लाश नदीम की है या किसी और की, बिना शिनाख्त के कहना मुश्किल था. 

इस के बाद पुलिस ने कुएं से लाश बाहर निकलवाई. वहां मौजूद उस युवक की लाश की कोई शिनाख्त नहीं कर सका. पुलिस ने शिनाख्त के लिए नदीम के घर वालों को बुलवा लिया. शव देख कर एक अधेड़ उम्र की महिला फूटफूट कर रोने लगी. उस ने अपना नाम आरफा बेगम बताया और कहा कि यह लाश उस के इकलौते बेटे मोहम्मद नदीम की है. घर वालों ने बताया कि कुछ दिनों पहले ही आरफा बेगम के पति की मृत्यु हुई और अब इकलौता बेटा भी चला गया.

इस के बाद एसएचओ अवनीश सिंह ने शव का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र 30 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या चाकू से गोद कर की गई थी. उस के सिर व गरदन पर गहरे जख्म थे. उस का मोबाइल फोन व पर्स गायब था. यह सामान या तो कुएं में गिर गया था या फिर कातिल अपने साथ ले गए.

किस ने की नदीम की हत्या

कुछ ही देर में एडिशनल एसपी उन्नाव (दक्षिणी) प्रेमचंद्र तथा सीओ (हसनगंज) संतोष कुमार सिंह भी आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. फोरैंसिक टीम ने जहां साक्ष्य जुटाए, वहीं पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. एडिशनल एसपी प्रेमचंद्र ने मौके पर मौजूद मृतक की मां आरफा बेगम व मामा ताहिर से पूछताछ की. आरफा बेगम ने बताया कि मोहम्मद नदीम घर से दुकान जाने के लिए कल 2 बजे बाइक से निकला था. जब वह रात 10 बजे तक घर नहीं पहुंचा तो उस ने उस के मोबाइल फोन पर काल की, लेकिन उस का फोन बंद था. आज उस की लाश मिल गई.

पूछताछ में पता चला कि नदीम रेडीमेड कपड़ों का कारोबारी था. अनवरगंज में उस की अपनी दुकान है. वह बेहद सीधा था. किसी से लड़ताझगड़ता नहीं था. उस की न तो किसी से दुश्मनी थी और न ही लेनदेन का झगड़ा था. पूछताछ के बाद पुलिस ने नदीम के शव को पोस्टमार्टम हेतु उन्नाव के जिला अस्पताल भेज दिया. वापस थाने आ कर मृतक के मामा ताहिर की तहरीर पर अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. एडिशनल एसपी प्रेमचंद्र के निर्देश पर एसएचओ अवनीश कुमार सिंह ने इस ब्लाइंड मर्डर की जांच बड़ी बारीकी से शुरू की. उन्होंने सब से पहले एक बार फिर घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया. इस के बाद उन्होंने मृतक नदीम की मां आरफा बेगम व मामा ताहिर से पूछताछ कर उन के बयान दर्ज किए.

लाश उन्नाव जिले के गांव दरबारी खेड़ा के पास मिली थी, इसलिए एसएचओ अवनीश कुमार सिंह ने दरबारी खेड़ा व उसके आसपास के गांवों के कई अपराधी किस्म के लोगों को हिरासत में लिया तथा उन से सख्ती से पूछताछ की, लेकिन नदीम की हत्या का सुराग न लगा. इस के अलावा मुखबिर भी कोई खास जानकारी नहीं जुटा पा रहे थे. अब तक एक महीना से ज्यादा का समय गुजर गया था, लेकिन वह नदीम के हत्यारों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था. पुलिस अधिकारी भी जांच टीम पर दबाव बना रहे थे. नदीम की मां आरफा बेगम व मामा ताहिर भी जबतब थाने आ जाते और जवाबसवाल करते.

एक रोज एसएचओ अवनीश कुमार सिंह अपने सहयोगियों के साथ नदीम की हत्या के संबंध में विचारविमर्श कर रहे थे, तभी एक युवती ने उन के कक्ष में प्रवेश किया. वह मुसलिम समुदाय की लग रही थी. एसएचओ अवनीश कुमार सिंह ने सहयोगियों को बाहर जाने का इशारा करने के बाद उस युवती को कुरसी पर बैठने को कहा. वह फिर बोले, ”मोहतरमा, आप अपने बारे में बता कर अपनी समस्या बताएं, ताकि हम आप का सहयोग कर सकें.’’

उस युवती ने दाएंबाएं नजर घुमाई फिर बोली, ”हुजूर, मेरा नाम जीनत फातिमा है. मैं मरहूम नदीम की बीवी हूं. छिपतेछिपाते किसी तरह थाने आई हूं. मैं आप को एक ऐसा राज बताने आई हूं, जिस पर शायद आप को यकीन ही न हो.’’

”कैसा राज?’’ इंसपेक्टर अवनीश ने पूछा.

”यही कि मेरे शौहर की हत्या का राज मेरी सास आरफा बेगम के पेट में छिपा है. मुझे शक है कि उन्होंने ही कोई योजना बना कर मेरे शौहर को मरवाया है.’’

इंसपेक्टर अवनीश कुमार सिंह ने एक सरसरी निगाह जीनत फातिमा पर डाली, फिर बोले, ”न जानें क्यों मुझे तुम्हारी बातों पर यकीन नहीं हो रहा है. भला एक मां अपने एकलौते बेटे का कत्ल क्यों कराएगी? फिर भी मैं तुम्हारे शक का कारण जानना चाहता हूं.’’

हुजूर, शक का पहला कारण यह है कि आरफा बेगम मकान व दुकान बेचना चाहती थी, लेकिन मेरे पति इस का विरोध कर रहे थे. इस को ले कर मांबेटे में तकरार होती थी. शक का दूसरा कारण आरफा बेगम की यारी. यानी उस के नाजायज संबंध अजमेर निवासी एक रिश्तेदार से हैं. वह मकानदुकान बेच कर उस के साथ रहना चाहती थी. लेकिन मेरे पति विरोध करते थे. मुझे शक है कि इसी विरोध के चलते सासू अम्मी ने उन का काम तमाम करा दिया.’’

इंसपेक्टर अवनीश कुमार सिंह सोच में पड़ गए, ”क्या एक मां इतनी बेरहम हो सकती है कि देहसुख के लिए जवान बेटे का कत्ल करा दे?’’

इस के बाद अवनीश कुमार सिंह ने एडिशनल एसपी प्रेमचंद्र से मुलाकात की और उन्हें पूरी बात बताई. शक के आधार पर उन्होंने इस ब्लाइंड मर्डर को खोलने का आदेश दिया. यही नहीं उन्होंने एक पुलिस टीम का गठन भी कर दिया. इस टीम में इंसपेक्टर अवनीश कुमार सिंह, इंसपेक्टर (क्राइम ब्रांच) राम नारायण, हैडकांस्टेबल राधेश्याम, कांस्टेबल पवन, अर्पित, सूरजपाल, अरुण कुमार, तथा महिला कांस्टेबल विमल को शामिल किया गया. टीम की बागडोर सीओ (हसनगंज) संतोष कुमार सिंह को सौंपी गई. 

पुलिस टीम ने शक के आधार पर मृतक की मां मोहम्मद आरफा बेगम की निगरानी शुरू कर दी. यही नहीं, आरफा बेगम व मृतक नदीम के मोबाइल फोन नंबरों की काल डिटेल्स रिपोर्ट निकलवाई. आरफा बेगम की काल डिटेल्स में कोई संदिग्ध नंबर नहीं मिला. वह किसी बाहरी व्यक्ति से बात नहीं करती थी. घटना वाले दिन भी उस ने किसी से बात नहीं की थी. रात 10 बजे उस ने नदीम को फोन किया था. 

लेकिन नदीम के मोबाइल फोन नंबर की काल डिटेल्स में टीम को एक संदिग्ध नंबर मिला. इस नंबर पर नदीम ने 4 जून, 2024 को बात की थी. इस संदिग्ध नंबर की पुलिस टीम ने जानकारी जुटाई तो पता चला यह नंबर सलीम पुत्र सिद्ïदीकी निवासी गली न 15 नवल नगर मोहल्ला लौंगिया थाना गंज, जिला अजमेर (राजस्थान) के नाम दर्ज है. संदिग्ध व्यक्ति सलीम पुलिस की रडार पर आया तो टीम उस की टोह में अजमेर जा पहुंची. टीम ने लौंगिया बस्ती में सलीम के घर दबिश दी, लेकिन वह घर से फरार था. पता चला कि वह किसी काम से उत्तर प्रदेश गया है. 

पुलिस टीम तब हाथ मलते हुए वापस लौट आई, लेकिन टीम हाथ पर हाथ रख कर नहीं बैठी. टीम ने खबरियों का जाल बिछा दिया और स्वयं भी टोह में लग गई. टीम ने उन्नाव के बस अड्ïडा व रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ा दी. 

सुपारी किलर ऐसे आया गिरफ्त में

19 जुलाई, 2024 को एसएचओ अवनीश कुमार सिंह को एक मुखबिर से पता चला कि सलीम उन्नाव स्टेशन पर मौजूद है. चूंकि सूचना अतिमहत्त्वपूर्ण थी, इसलिए अवनीश कुमार सिंह पुलिस टीम के साथ उन्नाव स्टेशन पहुंचे और मुखबिर की निशानदेही पर टीम ने सलीम को दबोच लिया. उस समय वह स्टेशन के बाहर किसी व्यक्ति के आने का इंतजार कर रहा था. सलीम को थाना अजगैन लाया गया. यहां पुलिस टीम ने उस से नदीम की हत्या के बारे में पूछताछ की तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब उस से सख्ती की गई तो उस ने नदीम की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. 

उस ने बताया कि कानपुर निवासी कपड़ा कारोबारी मोहम्मद नदीम की हत्या उस ने ही पैसों के लालच में चाकू से गोद कर की थी तथा शव को कुएं में फेंक दिया था. उस ने यह भी बताया कि हत्या की साजिश नदीम की मां आरफा बेगम व उस के आशिक हासम अली निवासी कोडरा पसन नगर, थाना किशनगंज जिला अजमेर (राजस्थान) ने रची थी. उन्होंने ही नदीम की हत्या की सुपारी 25 लाख रुपए में उसे दी थी. 15 लाख रुपए उसे नकद दिया था. शेष रुपए काम तमाम होने के बाद देने का वादा किया था. शेष रुपए ही वह लेने आया था, लेकिन पकड़ा गया. इस के बाद सलीम ने हत्या में प्रयुक्त आलाकत्ल (चाकू) भी बरामद करा दिया, जिसे उस ने मांस तिराहे के पास पन्नी में लपेट कर छिपा दिया था.

सलीम को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस टीम ने नाटकीय ढंग से आरफा बेगम व उस के आशिक हासम अली को भी गिरफ्तार कर लिया. उन दोनों ने जब सलीम को हवालात में देखा तो समझ गए कि अब झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं. अत: उन दोनों ने भी सहज में ही नदीम की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. इंसपेक्टर अवनीश कुमार सिंह ने नदीम की हत्या का परदाफाश करने तथा कातिलों को पकडऩे की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एडिशनल एसपी प्रेमचंद्र ने पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता कर नदीम की हत्या का खुलासा किया. 

पुलिस ने भादंवि की धारा 302/201/120बी के तहत सलीम, हासम अली तथा आरफा बेगम को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में एक ऐसी मां की कहानी सामने आई, जिस ने देहसुख के लिए अपने जवान बेटे को ही सुपारी दे कर कफन में लपेट दिया. कानपुर महानगर के अनवरगंज थाने के अंतर्गत एक मोहल्ला है-इफ्तखाराबाद. मुसलिम बाहुल्य इस मोहल्ले में ज्यादातर लोग व्यापार करते हैं. कोई कपड़े का व्यापार तो कोई लकड़ी का. कोई चमड़े का तो कोई मांसमछली का व्यापार करता है. घनी आबादी वाले इसी मोहल्ले में मोहम्मद नईम सपरिवार रहते थे. 

अलहम्द रेजीडेंसी में उन का निजी मकान था. उन के परिवार में पत्नी आरफा बेगम के अलावा एक बेटी आलिया तथा बेटा मोहम्मद नदीम था. मोहम्मद नईम रेडीमेड कपड़ा कारोबारी थे. अनवरगंज में उन की दुकान थी. बड़ी बेटी आलिया का वह निकाह कर चुके थे. मोहम्मद नदीम उन का इकलौता बेटा था. इसलिए वह सभी का दुलारा था. नदीम बचपन से ही तेज दिमाग था. वह जिद्ïदी व हठी भी था. उस के जिद्ïदी स्वभाव के कारण उस की अम्मी आरफा बेगम परेशान रहती थी. वह शौहर को उलाहना भी देती कि उन्होंने नदीम को बिगाड़ दिया है. 

नदीम का मन पढ़ाई में कम और गिल्लीडंडा खेलने में ज्यादा लगा रहता था. इस से नईम चिंतित रहते थे. जैसेतैसे नदीम ने 10वीं तक पढ़ाई की. फिर उस का मन पढ़ाई से उचट गया. नदीम कहीं गलत संगत में न पड़ जाए, इसलिए नईम ने उसे अपने कपड़ा व्यवसाय में लगा लिया. नदीम अब अब्बू के साथ कपड़े की दुकान पर जाता और दुकानदारी के गुर सीखता. मोहम्मद नदीम अब तक जवान हो चुका था और दुकान भी संभालने लगा था. इसलिए मोहम्मद नईम ने जुलाई, 2020 में उस का विवाह जीनत फातिमा नाम की लड़की से कर दिया.

जीनत फातिमा के अब्बू मोहम्मद कासिम बाकरगंज (बाबूपुरवा) कानपुर में रहते थे. बाकरगंज बाजार में उन की भी कपड़े की दुकान थी. अच्छा घरवर पा कर जीनत फातिमा भी खुश थी. घर में किसी चीज की कमी न थी और बेहद चाहने वाला शौहर मिला था. हंसीखुशी से दिन बीतते अभी एक साल ही बीता था कि नईम ऐसे बीमार पड़े कि उन्होंने खाट पकड़ ली. नदीम ने उन का कई डाक्टरों से इलाज कराया, लेकिन वह बच न पाए. आखिर उन्होंने दम तोड़ ही दिया. 

शौहर की मौत पर आरफा बेगम ने खूब आंसू बहाए. किसी तरह नदीम ने मां को संभाला. ताहिर ने भी बहन को समााया. तब कहीं जाकर वह सामान्य हुई. अब्बू के जाने का नदीम को भी बड़ा सदमा पहुंचा. उस ने अब्बू के गुजर जाने के बाद नदीम ने दुकान और घर चलाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली. बीवी ने भी उस का साथ दिया.

आरफा बेगम की तन्हाइयां कैसे हुईं दूर

कहते हैं वक्त बड़े से बड़ा घाव भर देता है. आरफा बेगम भी पति की मौत का गम भूल चुकी थी. बेटाबहू अपनी जिंदगी जी रहे थे और वह तन्हाइयों में जी रही थी. अकेलापन उसे बहुत खलता था. उन्हीं दिनों एक रोज हासम अली आरफा बेगम के घर आया. वह उस के मरहूम शौहर नईम का दोस्त व रिश्तेदार था. पहले भी वह घर आ चुका था. हासम अली, अजमेर (राजस्थान) शहर के कोडरा पसन नगर का रहने वाला था. वह कपड़ा व्यापारी था. दोनों में जानपहचान पहले से थी. इसलिए आरफा बेगम ने उस की खूब मेहमाननवाजी की. हासम अली ने दोस्त के गुजर जाने का दुख जताया और आरफा बेगम को धैर्य बंधाया. इस के बाद उस का वहां आनाजाना बढ़ गया.

आरफा बेगम के घर आतेजाते दोनों के बीच नजदीकियां बढऩे लगीं. उन के बीच छेड़छाड़ और हंसीमजाक भी होने लगी. दोनों तन्हा जिंदगी जी रहे थे. इसलिए दोनों को ही साथी चाहिए था. सो एक रात जब बेटाबहू सो गए, तब हासम अली आरफा बेगम के कमरे में पहुंचा और उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया. आरफा बेगम भी फिसल गई. फिर दोनों ने ही अपनी हसरतें पूरी कीं. उन के बीच नाजायज रिश्ता बना तो उस का दायरा बढ़ता ही गया. अधेड़ उम्र की बेवा आरफा बेगम के जीवन में अब बहार आ गई थी. वह हासम अली पर दिलोजान से फिदा हो गई थी. हासम भी उस का दीवाना था. हासम अली अब होटल में भी रुकने लगा था. आरफा को वह होटल में ही बुला लेता था.

उधर नदीम की बीवी जीनत फातिमा ने अनुभव किया कि जब से हासम अली घर आने लगा, तब से सासू मां की चालढाल में बदलाव आ गया है. क्योंकि अब वह सजसंवर कर रहने लगी थी और चेहरा खिलाखिला सा रहने लगा था. एक रात जीनत फातिमा बाथरूम जाने को उठी तो उस ने सासू आरफा बेगम के कमरे से अजीब सी आवाजें सुनीं. वह कमरे के अंदर तो नहीं गई, लेकिन समझ गई कि सासूमां हासम अली के साथ मौजमस्ती में डूबी हुई है. अब वह सासू की चालढाल व संजनेसंवरने का मकसद समझ चुकी थी.

सुबह नाश्ते के समय जीनत फातिमा ने नाजायज रिश्तों की बात शौहर नदीम को बताई तो वह नाराज होते हुए बोला, ”जीनत, तुम उन दोनों की उम्र का लिहाज करो. हमारी मां को बदनाम करोगी तो मैं सहन नहीं करूंगा. तुम अपनी गलती सुधारो.’’ नदीम ने बीवी की बातों पर यकीन नहीं किया और उसे फटकार लगाई तो वह रूठ कर मायके चली गई. कुछ दिन बाद मिन्नतें कर नदीम उसे वापस घर लाया. उस के बाद उस ने चुप्पी साध ली. 

इधर आरफा बेगम हासम अली की मोहब्बत में इतनी अंधी हो गई थी कि उस ने दुकानमकान बेच कर हासम अली के साथ रहने का फैसला कर लिया. उस ने इस बाबत हासम अली से बात की तो वह उसे अपने साथ अजमेर ले जाने को राजी हो गया. वह तो चाहता ही था कि आरफा बेगम सदैव उस के साथ रहे.
इकलौते बेटे को मरवाने का क्यों आया विचार

एक रोज आरफा बेगम ने दुकानमकान बेचने की चर्चा बेटे नदीम से की तो वह मां पर भड़क उठा. उस ने साफ कह दिया कि वह पैतृक संपत्ति बेच कर दूसरे शहर बसने नहीं जाएगा. उस ने यह भी कहा कि वह किसी के बहकावे में न आए, वरना कुछ भी हो सकता है. इस के बाद तो आए दिन मांबेटे के बीच संपत्ति बेचने को ले कर झगड़ा होने लगा. कभीकभी तो झगड़ा इतना बड़ जाता कि नदीम घर के बजाय दुकान पर सोने चला जाता. 

आरफा बेगम जब समझ गई कि नदीम दुकानमकान नहीं बेचने देगा और वह उस के प्यार में भी बाधा बन सकता है तो उस ने उसे अपने आशिक हासम अली के साथ मिल कर इकलौते बेटे को ही रास्ते से हटाने का निश्चय किया. आरफा बेगम ने इस बाबत हासम से बात की तो वह राजी हो गया. उस ने आरफा से कहा, ”तुम रकम तैयार करो. हम सुपारी किलर को सुपारी दे कर नदीम को रास्ते से हटवा देंगे. इस की किसी को कानोकान खबर भी न होगी.’’

हासम अली की जानपहचान सुपारी किलर मोहम्मद सलीम से थी. वह अजमेर नवल नगर मोहल्ला लौंगिया का रहने वाला था. हासम अली ने सलीम से बात की और नदीम की हत्या की सुपारी 25 लाख में दे दी. सुपारी देने की बात हासम अली ने आरफा बेगम को बताई. आरफा बेगम ने तब अपने इकलौते बेटे को मरवाने के लिए 25 लाख रुपया हासम अली को दे दिए. इस रकम में से 15 लाख रुपया हासम अली ने सलीम को दे दिए. शेष काम होने के बाद देने को कहा.

रकम मिलने के बाद सलीम 3 जून, 2024 को कानपुर शहर आ गया. वह परेड के एक साधारण होटल में रुका. सुपारी किलर के पहुंचने की जानकारी तथा उस का मोबाइल नंबर हासम अली ने आरफा बेगम को बता दिया. 4 जून, 2024 की दोपहर आरफा बेगम ने बेटे नदीम से कहा कि एक रिश्तेदार बाहर से आए हैं. वह परेड पर हैं. उन्हें शहर घुमा दो. नदीम ने पहले तो नानुकुर की फिर मान गया. उस की बीवी जीनत फातिमा एक सप्ताह से मायके में थी, सो वह निश्चिंत था. नदीम तैयार हुआ फिर अपनी बाइक से परेड के लिए निकल पड़ा. जाने से पहले उस ने मां से रिश्तेदार का फोन नंबर ले लिया था. वह कोई रिश्तेदार नहीं, बल्कि उस की मौत बन कर आया सलीम था.

परेड चौराहा पर पहुंच कर उस ने रिश्तेदार को काल की तो वह चौराहे पर ही मिल गया. दोनों में बातचीत हुई फिर सलीम ने कहा, ”मुझे देवा शरीफ ले चलो. वहां जाने की बड़ी इच्छा है. तुम पेट्रोल की चिंता मत करो.’’ इस के बाद लखनऊ होते हुए शाम को वह देवा शरीफ पहुंच गए. वहां दोनों घूमेफिरे, फिर वापस कानपुर को चल पड़े.  लखनऊ पहुंचने तक रात के 10 बज गए थे. यहां दोनों ने खाना खाया. फिर कानपुर की ओर निकल पड़े. इस बीच दोनों खूब हिल मिल गए थे. रात 11 बजे के लगभग सलीम व नदीम दरबारी खेड़ा गांव पहुंचे. यह गांव उन्नाव जिले के अजगैन थाना अंतर्गत आता है. हाइवे रोड किनारे एक वीरान मंदिर था. मंदिर के पास ही एक कुआं था.

समीप सलीम ने बाथरूम (पेशाब) के बहाने बाइक रुकवा दी. सलीम बाथरूम करने चला गया और नदीम बाइक की सीट पर बैठ कर मोबाइल देखने लगा. उचित मौका देख कर सलीम ने चाकू निकाला और पीछे से नदीम के सिर पर चाकू से 2 प्रहार किए. नदीम जख्मी हो कर जमीन पर गिर पड़ा. इस के बाद सलीम ने उस के गले व गरदन पर चाकू के प्रहार कर उसे मौत के घाट उतार दिया. इस के बाद शव कुएं में फेंक दिया. फिर बाइक कुएं पर ही छोड़ कर फरार हो गया. चाकू को उस ने फरार होते समय मांस फैक्ट्री तिराहे के पास फेंक दिया था. 

इधर सुबह दरबारी खेड़ा के कुछ लोग खेतों की तरफ गए तो उन्होंने कुएं में उतराती लाश देखी. उन्होंने थाना अजगैन पुलिस को सूचना दी. 21 जुलाई, 2024 को पुलिस ने आरोपी आरफा बेगम, मोहम्मद सलीम व हासम अली को उन्नाव कोर्ट में पेश किया, जहां से उन को जिला जेल भेज दिया गया. 

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, Love Crime

Feature Story: दो बहनों सी सगी आम्रपाली और अक्षरा की दोस्ती में दरार, पावर स्टार पवन सिंह बने वजह

Feature Story: अक्षरा और आम्रपाली दुबे बहुत ही अच्छी सहेलिया थीं, बिल्कुल सगी बहनों जैसी, पर अब इनके रिश्ते में खटास आ गई. यह सब हुआ पवन सिंह की शादी के कारण. दरअसल, पवन सिंह और अक्षरा सिंह रिलेशनशिप में थे. पर पवन सिंह ने अक्षरा के साथ रिश्ते में रहते हुए किसी और से शादी करने का फैसला किया और उनकी शादी अचानक हुई. सबको अचानक पता चला कि पवन बलिया जा रहे हैं और शादी कर रहे हैं. यह सुनकर अक्षरा बहुत टूट गई थीं.

आम्रपाली दुबे ने मीडिया को बताया जब मुझे पता चला कि पवन सिंह शादी कर रहे हैं तो मैंने तुरंत अक्षरा को फोन करना शुरू कर दिया. मैं उससे पूछना चाहती थी कि क्या हुआ था. एक दिन उसने मेरा फोन उठाया और मुझे बताया कि पवनजी की शादी हो रही है और उनकी हालत बिल्कुल ठीक नहीं थी.

मैंने पवन को फोन किया. मैंने उनसे पूछा कि आप जो कर रहे हैं वह सही है? आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?

आम्रपाली ने बताया कि वे काफी देर तक पवन को डांटती रहीं, उन्हें किसी और से शादी करने से रोकने की कोशिश की क्योंकि अक्षरा उनसे बेहद प्यार करती थीं. लेकिन वे चुपचाप उनकी बात सुनते रहे और बाद में उन्हें बताया कि वे किसी और से शादी क्यों कर रहे हैं.

पवन सिंह ने कहा मेरे लिए मेरी मां की खुशी से बढ़कर कुछ नहीं है. मेरी मां की इज्जत से बढ़कर कुछ नहीं है. वो जो कहेंगी, मैं वही करूंगा. पवन सिंह ने वही करने का फैसला किया जो उनकी मां चाहती थीं.

दूसरी तरफ अक्षरा सिंह ने मीडिया में कहा कि मुश्किल समय में फिल्म जगत से कोई मेरे साथ नहीं था, किसी ने मेरे साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ कुछ नहीं कहा तो आम्रपाली दुबे को बहुत बुरा लगा, क्योंकि उन्होंने अक्षरा सिंह का साथ दिया था. वे उन्हें बाहर ले जाती थीं, घूमाती थीं जिससे उनका मन बहला रहे. अक्षरा की बातों से उनका दिल टुटा जिससे उन दोनो के रिश्तों में दूरी आ गई. भले ही कोई सीधी लड़ाई नहीं हुई लेकिन रिश्ते में खटास आ गई. कभी-कभी शूटिंग के दौरान मिलने पर मुस्कुरा देती हैं, लेकिन रिश्ता पहले जैसा नहीं है.Feature Story

Superstitious Crime: जानलेवा बना खाली लोटा

Superstitious Crime: मध्य प्रदेश में जबलपुर जिले के कुम्ही सतधारा के पास ददरा टोला सहदरा गांव में 9 मई, 2025 की सुबह के तकरीबन 7 बजे कसा नदी से नहा कर घर लौट रही 57 साल की एक औरत तितरी बाई बरकड़े ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उस का सगा भतीजा ही उस की जान ले लेगा.

आदिवासी अंचल में रहने वाली तितरी बाई की गलती केवल इतनी थी कि नदी से नहाने के बाद वह खाली लोटा ले कर घर जा रही थी. वह एक हाथ में गीले कपड़े और एक हाथ में लोटा ले कर नदी का घाट चढ़ रही थी, तभी उस का 47 साल का भतीजा मत्तू सिंह बरकड़े मिल गया. चाची के हाथ में खाली लोटा देख कर वह गालीगलौज करने लगा. विरोध जताने पर वह चाची के साथ मारपीट पर उतर आया.

तितरी बाई ने उस से बचने के लिए भागने की कोशिश की तो वह गिर गई, तभी मत्तू ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उस के सिर पर मार दिया, जिस के चलते उस की मौत हो गई.

इस वारदात की खबर छोटे से गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई. मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटों में हत्यारे मत्तू सिंह बरकड़े को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस की पूछताछ में मत्तू ने चाची को मारने की जो वजह बताई, उसे सुन कर पुलिस के भी होश उड़ गए.
मत्तू ने बताया कि रास्ता काटना और खाली बरतन दिखना अपशकुन होता है. इसी अंधविश्वास के चलते उस ने चाची की जान ले ली.

पुलिस ने मत्तू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर लिया.

अंधविश्वास के चलते घटी यह वारदात साबित करती है कि आज भी गांवदेहात के इलाकों में अंधविश्वास किस कदर फैला हुआ है.

दिसंबर, 2021 की एक वारदात मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले की है, जब एक पिता पर अंधविश्वास इस कदर हावी हो गया कि उस ने अपने 5 साल के मासूम बेटे की कुल्हाड़ी से काट कर उस की बेरहमी से हत्या कर दी.

पिता के मुताबिक, उसे गुरुमाता ने कहा था कि बेटा उस के घर के लिए अपशकुन है. फिर अंधविश्वास पर भरोसा कर पिता ने ऐसा कदम उठाया जिस की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. हत्या के बाद बाप ने बच्चे को कई टुकड़ों में काटा और खेत में दफना दिया.

अलीराजपुर जिले के खरखादी गांव में एक पिता दिनेश दावर ने अपने ही 5 साल के मासूम बेटे की अंधविश्वास के चलते कुल्हाड़ी से काट कर हत्या कर दी. पिता को इस बात का शक था उस के बेटे पर भूतप्रेत का साया है.

पिता को लगता था कि उस के बेटे में कोई बुरी आत्मा का वास है, जिस के चलते उस के घर में परेशानियां और अशांति रहती है. परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए उस ने अपने ही जिगर के टुकड़े को मार डाला.

अंधविश्वास के चलते हुई ये घटनाएं यह साबित करती हैं कि अंधविश्वास हमारे आसपास चारों ओर बिखरा पड़ा है. इन में बिल्ली का रास्ता काटना, रास्ते में खाली घड़ा दिखाई देना, शुभ काम के दौरान विधवा या बांझ का दिख जाना, पूजापाठ के दौरान दीपक का बुझ जाना, घाव में कीड़े पड़ना, कुत्ते का रोना,

दरवाजे पर नीबूमिर्च, काला कंगन, लाल रिबन या काला पुतला टांगना, दूल्हे को लोहा पकड़ाना, खाट या चप्पलों का उलटा पड़ा होना, बरतनों का टकराना, दूध का फटना, टूटे हुए आईने में शक्ल देखना, कछुआ या कछुए की मूर्ति घर में रखना भी अंधविश्वास की श्रेणी में आते हैं. इन का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

देश में सरकारी तंत्र अंधविश्वास को रोकने की बजाय फैलाने में अहम भूमिका निभा रहा है. पांढुरना का गोटमार मेला हो या हिंगोट युद्ध सभी में पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बन कर इन दकियानूसी रिवाजों को खादपानी देने का काम कर रहा है. कोविड 19 वायरस को भगाने के लिए जब दीपक जला कर, ताली और घंटेघडि़याल बजाने का टोटका देश के प्रधानमंत्री खुद ही जनता को बताते हों, उस देश में वैज्ञानिक सोच भला कैसे विकसित होगी.

देश के नागरिकों की बुनियादी जरूरत शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजलीपानी और सड़क की है. इस के लिए सरकार को इंजीनियरिंग और मैडिकल कालेज खोलने के साथसाथ साफ पानी और भरपूर बिजली के साथ कहीं भी आनेजाने के लिए अच्छी सड़कें मुहैया कराने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, मगर सरकार इन सब को छोड़ कर बड़ीबड़ी मूर्तियां और मंदिर बनाने पर तुली हुई है.

धार्मिक रंग में पूरी तरह रंगी सरकार की सोच यह है कि देश के पढ़ेलिखे नौजवानों को नौकरी की बजाय धार्मिक रैली, जुलूस, कांवड़ यात्रा, भंडारे और आरती में उलझ कर उन्हें तार्किक न बनने दिया जाए. यही वजह है कि आज भी देश में अंधविश्वास और दकियानूसी रिवाजों का बोलबाला है. Superstitious Crime

Hindi Family Story: अपना अपना वनवास – क्या थी अकेलेपन की समस्या

Hindi Family Story: एक बड़े महानगर से दूसरे महानगर में स्थानांतरण होने के बाद मैं अपने कमरे में सामान जमा रही थी कि दरवाजे की घंटी बजी.

‘‘कौन है?’’ यह सवाल पूछते हुए मैं ने दरवाजा खोला तो सामने एक अल्ट्रा माडर्न महिला खड़ी थी. मुझे देख कर उस ने मुसकरा कर कहा, ‘‘गुड आफ्टर नून.’’

‘‘कहिए?’’ मैं ने दरवाजे पर खड़ेखड़े ही उस से पूछा.

‘‘मेरा नाम बसंती है. मैं यहां ठेकेदारी का काम करती हूं,’’ उस ने मुझे बताया. लेकिन ठेकेदार से मेरा क्या रिश्ता…यहां क्यों आई है? ऐसे कई सवाल मेरे दिमाग में आ रहे थे. मैं कुछ पूछती उस के पहले ही उस ने कहना जारी रखते हुए बताया, ‘‘आप को किसी काम वाली महिला की जरूरत हो तो मैं उसे भेज सकती हूं.’’

मैं ने सोचा चलो, अच्छा हुआ, बिना खोजे मुझे घर बैठे काम वाली मिल रही है.

मैं ने कहा, ‘‘जरूरत तो है…’’ पर मेरा वाक्य पूरा भी नहीं हुआ था कि वह कहने लगी, ‘‘बर्तन साफ करने के लिए, झाडू़ पोंछा करने के लिए, खाना बनाने के लिए, बच्चे संभालने के लिए…आप का जैसा काम होगा वैसी ही उस की पगार रहेगी.’’

मैं कुछ कहती उस से पहले ही उस ने फिर बोलना शुरू किया, ‘‘उस की पगार पर मेरा 2 प्रतिशत कमीशन रहेगा.’’

‘‘तुम्हारा कमीशन क्यों?’’ मैं ने पूछा.

‘‘हमारा रजिस्टे्रेशन है न मैडम, जिस काम वाली को हम आप के पास भेज रहे हैं उस के द्वारा कभी कोई नुकसान होगा या कोई घटनादुर्घटना होगी तो उस की जिम्मेदारी हमारी होगी,’’ उस ने मुझे 2 प्रतिशत कमीशन का स्पष्टीकरण देते हुए बताया.

‘‘यहां तो काम…’’

‘‘बर्तन मांजने का होगा, आप यही कह रही हैं न,’’ उस ने मेरी बात सुने बिना पहले ही कह दिया, ‘‘मैडम, कितने लोगों के बर्तन साफ करने होंगे, बता दीजिए ताकि ऐसी काम वाली को मैं भेज सकूं.’’

‘‘तुम ने अपना नाम बसंती बताया था न?’’

‘‘जी, मैडम.’’

‘‘तो सुनो बसंती, मेरे घर पर बर्तन मांजने, पोंछने वाली मशीन है.’’

‘‘सौरी मैडम, कपड़े साफ करने होंगे? तो कितने लोगों के कपड़े होंगे? मुझे पता चले तो मैं वैसी ही काम वाली जल्दी से आप के लिए ले कर आऊं.’’

‘‘बसंती, तुम गजब करती हो. मुझे मेरी बात तो पूरी करने दो,’’ मैं ने कहा.

‘‘कहिए, मैडमजी.’’

‘‘मेरे घर पर वाशिंग मशीन है.’’

‘‘फिर आप को झाड़ ूपोंछा करने वाली बाई चाहिए…है न?’’

‘‘बिलकुल नहीं.’’

उस ने यह सुना तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ. कहने लगी, ‘‘कपड़े धोने वाली नहीं, बर्तन मांजने वाली नहीं,

झाड़ू पोंछे वाली नहीं, तो फिर मैडमजी…’’

‘‘क्योंकि मेरे घर पर वेक्यूम क्लीनर है, बसंती.’’

‘‘फिर खाना बनाने के लिए?’’ उस ने हताशा से अंतिम आशा का तीर छोड़ते हुए पूछा.

‘‘नो, बसंती. खाना बनाने के लिए भी नहीं, क्योंकि मैं पैक फूड लेती हूं और आटा गूंथने से ले कर रोटी बनाने की मेरे पास मशीन है,’’ मैं ने विजयी मुसकान के साथ कहा.

उस के चेहरे पर परेशानी झलकने लगी थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर इस नए घर से उसे 2 प्रतिशत की आमदनी होने वाली थी उस का क्या होगा.

उस ने हताशा भरे स्वर में कहा, ‘‘मैडमजी, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि जब सबकुछ की मशीन आप के पास है तो आखिर आप को काम वाली महिला क्यों चाहिए? उस का तो कोई उपयोग है ही नहीं.’’

मुझे भी हंसी आ गई थी. मुझे हंसता देख कर उस की उत्सुकता और बढ़ गई. उस ने बडे़ आदर के साथ पूछा, ‘‘मैडमजी, बताएं तो फिर वह यहां क्या काम करेगी?’’

कुछ देर चुप रही मैं. उस ने अंतिम उत्तर खोज कर फिर कहा, ‘‘समझ गई.’’

‘‘क्या समझीं?’’

‘‘घर की रखवाली के लिए चाहिए?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘बच्चों की देखरेख के लिए?’’

‘‘नो, बसंती. मैं ने अभी शादी भी नहीं की है.’’

‘‘तो मैडमजी, फिर आप ही बता दें, आप को काम वाली क्यों चाहिए?’’

अब मैं ने उसे बताना उचित समझा. मैं ने कहा, ‘‘बसंती, पिछले दिनों मैं दिल्ली में थी और आज नौकरी के चक्कर में बंगलौर में हूं. मुझे अच्छी पगार मिलती है. मेरा दिन सुबह 5 बजे से शुरू होता है और रात को 11 बजे तक चलता रहता है. मेरी सहेली कंप्यूटर है. मेरे रिश्तेदार सर्वे, डाटा, प्रोजेक्ट रिपोर्ट हैं. सब सिर्फ काम ही काम है. मेरे घर में सब मशीनें हैं. मुझे एक महिला की जरूरत है जो मेरे खाली समय में मुझ से बातचीत कर सके. मुझे इस बात का एहसास कराती रहे कि मैं भी इनसान हूं. मैं भी जिंदा हूं. मैं मशीन नहीं… समाज का अंग हूं.’’

मैं ने उसे विस्तार से अपनी पीड़ा बताई. मेरी बात सुन कर वह ठगी सी रह गई. उस ने आगे बढ़ कर मुझ से कहा, ‘‘मैडमजी, आप को ऐसी काम करने वाली महिला मैं भी नहीं दिला पाऊंगी,’’ कह कर वह कमरे से निकल गई.

मुझे लगा कि सब को अपनेअपने एकांत का वनवास खुद ही भोगना होता है. मैं फिर अपने कमरे का सामान जमाने में लग गई. Hindi Family Story

Hindi Crime Story: खून से रंगी रिश्तेदारी – जीजा और साले बने कातिल

Hindi Crime Story: ‘‘संजू, मेरी समझ में यह नहीं आ रहा कि तुम ने मुझ पर ऐसा कौन सा जादू कर दिया है, जो मेरा किसी भी काम में मन नहीं लगता. अब तो तुम्हारे बिना न दिन को चैन आता है और न रातों को नींद.’’ प्रीति ने प्रेमी संजू से कहा.

‘‘यह कोई जादू नहीं है बल्कि इसी को प्यार कहते हैं. सच कहूं, प्रीति ऐसा ही तो हाल मेरा है. तुम सामने होती हो तो सब कुछ सतरंगी सा लगता है और तुम से जुदा होते ही चारों ओर वीरानी नजर आती है. प्रीति, कभीकभी तो मैं यह सोच कर ही डरता हूं कि कहीं हमारे प्यार को किसी की नजर न लग जाए. क्योंकि मैं तुम्हारे बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता.’’ प्रीति का हाथ अपने हाथों में लेते हुए संजू बोला.

‘‘संजू, जुदाई की सोचते ही मेरी तो रूह कांप जाती है. मैं यही सोच कर परेशान हूं कि कहीं मेरे घरवालों को हम दोनों के प्यार के बारे में पता चल गया तो उन का मेरे प्रति व्यवहार कैसा होगा. क्योंकि हम दोनों नदी के दो किनारों की तरह हैं, जो कभी आपस में मिल नहीं सकते. बताओ, ऐसे में हमारे प्यार को मंजिल कैसे मिलेगी?’’ यह कहते ही प्रीति के चेहरे पर गंभीरता छा गई. वह एक पल के लिए रुकी और फिर बोली, ‘‘मेरी एक बात मानोगे, संजू? क्यों न हम यहां से कहीं दूर जा कर अपने प्यार की नई दुनिया बसा लें, जहां हमें किसी का डर न हो. जब हम एकदूजे के हो जाएंगे तो उस के बाद किसी में इतनी ताकत नहीं होगी कि कोई हमें अलग कर पाए.’’

प्रीति ने कहा तो संजू भी सोच में डूब गया. उसे भी महसूस हुआ कि प्रीति की सोच अपनी जगह ठीक है. प्यार के एक नहीं, लाखों दुश्मन होते हैं. फिर प्रीति ने उस से जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया है. उसे अपना बनाने के लिए अगर हिम्मत कर के यह कदम उठा भी ले तो कौन सी बुराई है. जिला शाहजहांपुर के सिधौली थाना के गांव रामपुर में रहता था 35 वर्षीय संजू मंसूरी. वह ईरिक्शा चालक था. उस के पिता का नाम शेर मोहम्मद और मां का नाम रजिया था. पिता खेतीकिसानी करते थे. संजू की 2 बड़ी बहनें व एक छोटा भाई इस्लामुद्दीन था. दोनों बहनों का निकाह हो चुका था. इसी गांव में रामविलास परिवार सहित रहता था. परिवार में पत्नी सुधा और एक बेटा गुड्डू और 2 बेटियां प्रिया और प्रीति थीं.

रामविलास खेती करता था, जिस से होने वाली आमदनी से घर का खर्च चलता था. उस के सभी बच्चों ने गांव के सरकारी स्कूल से 8वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की थी. प्रिया का विवाह हो चुका था. प्रीति अभी अविवाहित थी. स्वभाव से वह काफी चंचल थी. घर के कामों में उस का मन नहीं रमता था. प्रीति हमेशा बनठन कर रहती और टीवी से ही चिपकी रहती. मां की डांट के बावजूद प्रीति टीवी पर आने वाली फिल्में देखे बगैर नहीं रहती थी. टीवी पर फिल्मों और फिल्मी गानों का इतना प्रभाव प्रीति पर पड़ा था कि वह अपने आप को फिल्मी हीरोइन से कम नहीं समझती थी.

चूंकि फिल्मों में प्यारमोहब्बत का हमेशा महिमामंडित किया जाता है, इसलिए प्रीति को भी ऐसे युवक की तलाश थी, जो फिल्मी हीरो की तरह उस के सामने प्यारमोहब्बत का प्रस्ताव रखे. उसे चाहे और उसे सराहे. उस के हुस्न की तारीफ करे और उस की याद में तड़प सके. दूसरी ओर संजू अधिक पढ़लिख नहीं सका था, लेकिन वह अपने पहनावे से पढ़ालिखा और हैंडसम युवक नजर आता था. अपने शरीर पर वह विशेष ध्यान देता था. वह हमेशा आधुनिक फैशनेबल कपड़े पहनता था. संजू को भी फिल्में देखने का शौक पागलपन इस हद तक था कि उस का बात करने और चलने का स्टाइल भी फिल्मी हो गया था.

संजू अपनी उम्र के उस मोड़ पर था, जहां आशिकी स्वभाव में अपने आप आ कर शामिल हो जाती है. संजू भी इस का अपवाद नहीं था. लव स्टोरी वाली फिल्में देखदेख कर संजू का मिजाज भी आशिकाना हो गया था. वह मोहल्ले की लड़कियों पर अकसर नजर रखने की कोशिश किया करता था. लेकिन कोई लड़की उस की तरफ आकर्षित नहीं हुई थी. संजू की दोस्ती रामविलास के बेटे गुड्डू से थी. इस वजह से उस का उस के घर आनाजाना था. आनेजाने में गुड्डू की बहन प्रीति से उस की मुलाकात हो जाती. प्रीति की सुंदरता संजू के मन को भा गई. बारबार आनेजाने से उन के बीच बातचीत भी होने लगी. प्रीति संजू की निगाहों को भांप कर उस के दिल का हाल जान चुकी थी. उसे संजू पसंद आया था, इसलिए वह भी संजू से बात करने में गुरेज नहीं करती थी.

दोनों एक ही शौक के शिकार थे. उन के बीच फिल्मों को ले कर ही अधिक बातचीत होती थी. इस तरह दोनों एकदूसरे के साथ काफी समय बिताते थे. इस के लिए वे घर के बाहर भी मिलते थे. क्योंकि ज्यादा देर तक वह घर में एक साथ बैठ कर बात नहीं कर सकते थे. ऐसा करने पर घर वाले उन पर शक करने लगते. समय के साथसाथ दोनों को एकदूसरे का संग खूब भाने लगा. दोनों साथ में मोबाइल पर रोमांटिक मूवी भी देखते. फिर फिल्म के कलाकारों की नकल करते हुए दोनों उन के डायलौग बोलते और उसी अंदाज में एकदूसरे के पास आ कर बांहों में भर कर आंखों में आंखें डाल कर उसी तरह बात करते जैसे कलाकार फिल्म में करते थे. इस से दोनों एकदूसरे के काफी नजदीक आते चले गए.

वे दोनों दिल की धड़कनों की आवाज और सांसों की सरगम को भी बखूबी महसूस करते थे. ये नजदीकियां दोनों को अच्छी लगने लगी थीं. जब वे नजदीक होते तो अलग होने की बात दिमाग में लाने ही नहीं देते थे. लेकिन मजबूर हो कर उन को एकदूसरे से अलग होना ही पड़ता. फिल्मी कलाकारों के लव सीन की एक्टिंग करतेकरते वे दोनों भी एकदूसरे से प्यार कर बैठे. अब प्यार का इजहार करना बाकी था. एक दिन लव सीन की एक्टिंग करतेकरते संजू ने प्रीति को अपनी बांहों में लिया तो फिल्म के डायलौग न बोल कर उस ने अपने दिल की बात कहनी शुरू कर दी, ‘‘प्रीति, देखता तो मैं तुम्हें बचपन से आया हूं. लेकिन जब से हम एक्टिंग के जरिए एकदूसरे के नजदीक आए हैं, तब से मैं ने तुम्हें बेहद करीब से देखा तब से ये नजरें तुम्हारे सिवा कुछ और देखना ही नहीं चाहतीं.

तुम्हारी झील सी आंखों की गहराइयों में डूब कर तुम्हारे दिल का हाल जाना तो यही लगा कि तुम्हारा दिल भी मेरे पास आना चाहता है. इस बात की गवाही तुम्हारे दिल की धड़कनें देती हैं. मैं तो तुम्हें दिलोजान से चाहता हूं. मुझे अपने प्यार पर भी पूरा भरोसा है कि वह भी मुझे बेइंतहा चाहता है, बस देर है तो उसे तुम्हारे द्वारा जुबां से कुबूल करने की.’’

प्रीति तो जैसे उस के पे्रम से सराबोर हो गई और उस की आंखों में देखती हुई फिल्मी स्टाइल में बेसाख्ता बोली, ‘‘कुबूल है…कुबूल है…कुबूल है मेरे महबूब.’’

यह सुनते ही संजू की खुशी का ठिकाना न रहा. उस ने प्रीति को अपने सीने से लगा लिया और बोल उठा, ‘‘आई लव यू…आई लव यू प्रीति.’’

उस के प्यार भरे शब्द प्रीति के कानों में रस घोल रहे थे. उसे एक मीठा सुखद एहसास हुआ तो उस ने अपनी आंखें बंद कर लीं और संजू के कंधे पर अपना सिर रख दिया. काफी देर तक वे दोनों उसी स्थिति में रहे. उस के बाद जब दोनों अलग हुए तो उन के चेहरे खिले हुए थे. इस के बाद तो प्रीति और संजू की तूफानी मोहब्बत बड़ी तेजी के साथ अपनी बुलंदियों की तरफ बढ़ने लगी. अब तो रोज ज्यादा से ज्यादा वह एकदूसरे के पास रहने की कोशिश करते. कभी घर पर, कभी खेत पर. इस चक्कर में संजू अपने काम से जी चुराने लगा था. उसे रोज घर में डांट खाने को मिलती थी. लेकिन संजू पर तो प्रीति की मोहब्बत का भूत सवार हो गया था. वह प्रीति के लिए हर किसी से बगावत करने को तैयार था.

दरअसल ग्रामीण परिवेश में प्यारमोहब्बत के मामले अधिक दिनों तक छिप नहीं पाते हैं. प्रीति और संजू की मोहब्बत के साथ भी यही हुआ. उन दोनों की अपनी दीवानगी की वजह से ही पूरा गांव इस प्रेम प्रकरण के बारे में जान गया था. उधर उन दोनों प्रेमियों की हालत ऐसी हो गई थी कि उन्हें एकदूसरे को देखे बिना करार नहीं आता था. लोगों को पता लग जाने के बाद दोनों हर समय चोरीछिपे की मुलाकातों का जुगाड़ बैठाने की जुगत में लगे रहते थे. गांव के बाहर एक खंडहरनुमा मकान उन की मिलनस्थली बन गया था. इसी दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए.

एक दिन गांव में रह रहे बिरादरी के कुछ लोगों ने प्रीति के पिता रामविलास को बताया कि उस की लड़की गलत रास्ते पर जा रही है. यह सब सुन कर रामविलास आगबबूला हो उठा. उस ने अपनी पत्नी सुधा को हड़काया कि वह प्रीति को खेतों और बाजार में न जाने दे. इसी दौरान सुधा ने अपनी आंखों से एक ऐसा नजारा देखा, जिसे देखने के बाद उस ने प्रीति की खूब पिटाई की. दरअसल, संजू प्रीति के घर के सामने से निकल रहा था तो प्रीति दरवाजे पर खड़ी थी. संजू के देखने पर प्रीति उसे बारबार फ्लाइंग किस देने लगी. संजू उस किस को अपने हाथ में लेने का प्रयत्न करता दिखाई दे रहा था. यह सब होते हुए सुधा ने अपनी आंखों से देख लिया था. यह देख कर ही सुधा ने प्रीति की पिटाई की थी.

इस दृश्य को देखने के बाद सुधा ने अपने पति रामविलास से स्पष्ट शब्दों में कह दिया था कि वह अपनी लाडली के हाथ पीले कर दें, वरना वह किसी दिन वह इस परिवार की नाक कटवा कर रहेगी. रामविलास सचमुच इस मामले में गंभीर हो उठा था. उस ने उसी रोज से प्रीति के लिए बिरादरी में कोई लड़का ढूंढना शुरू कर दिया. अंतत: उस की मेहनत रंग लाई. उसे शाहजहांपुर के ही जसनपुर गांव निवासी रामवीर का बेटा आकाश प्रीति के लिए उपयुक्त लगा. वह खेती करता था. आकाश देखने में सुंदर और अच्छी कदकाठी का था और खेती भी अच्छीखासी थी. सब कुछ देखजान कर रामविलास ने रिश्ते की बात चलाई तो जल्द ही बात बन गई.

प्रीति ने विरोध करना चाहा, लेकिन पिता का गुस्सा देख कर वह कुछ न कर पाई. उसे धमकी भी मिली थी कि अगर वह शादी के लिए तैयार न हुई तो उसे वह जिंदा मार देंगे. प्रीति बेबस हो गई. वह तो संजू के साथ भाग जाने की सोच रही थी, लेकिन पिता को संबंधों का पता चलने के बाद मारने की धमकी देने पर वह कुछ न कर पाई. एक साल पहले प्रीति का विवाह आकाश से हो गया. वह मायके से ससुराल आ गई. यहां आ कर वह किसी तरह संजू को भूलने की कोशिश करने लगी, लेकिन वह जितना उसे भूलने की कोशिश करती, उतना ही वह ज्यादा उसे याद आता. आकाश ने उसे अपनी तरफ से भरपूर प्यार दिया, उस का खयाल रखा.

दूसरी ओर संजू अपने आप को प्रीति से दूर होने के बाद संभाल नहीं पा रहा था. रहरह कर उठतेबैठते उस के खयालों में प्रीति ही छाई रहती थी. जब बरदाश्त की हद पार हुई तो वह एक दिन प्रीति की ससुराल पहुंच गया. प्रीति उस की हिम्मत देख कर चौंक गई. लेकिन काफी अरसे बाद उसे देख कर उस के दिल को सुकून भी पहुंचा. उस से मिलने के बाद फोन पर बात करने की बात कह कर वापस आ गया. इस के बाद उन दोनों की चोरीछिपे फोन पर बातें होने लगीं. जब भी प्रीति मायके आती तो संजू के साथ खूब समय बिताती. एक दिन आकाश ने अपनी पत्नी प्रीति को संजू से बातें करते पकड़ लिया. आकाश ने प्रीति को जम कर पीटा. उस के बाद वह प्रीति पर नजर रखने लगा.

16 नवंबर, 2020 की रात संजू ने खाना खाया. उस के बाद वह घर से निकल गया. काफी देर तक नहीं लौटा तो उसे तलाशा गया लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. 17 नवंबर की सुबह फिर संजू की तलाश शुरू हुई तो गांव के बाहर सेठपाल के खेत में पराली के ढेर के पास संजू की चप्पलें पड़ी मिलीं. पराली हटाने पर उस के नीचे संजू की लाश मिली. लाश मिलते ही कोहराम मच गया. घरवाले वहां पहुंच कर रोनेपीटने लगे. संजू के भाई इस्लामुद्दीन को गांव के लोगों से पता चला कि रात में उन लोगों ने संजू को गुड्डू के साथ जाते देखा था. संजू की लाश मिलने पर गुड्डू वहां नहीं पहुंचा, न ही वह घर पर था, इसलिए पूरा शक गुड्डू  पर गया.

स्थानीय सिधौली थाने की पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई. थाने के इंसपेक्टर जगनारायण पांडेय सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए. मृतक के गले पर गहरे निशान थे.  शरीर पर और किसी प्रकार के निशान नहीं थे. संभवत: गला दबा कर हत्या की गई थी. इस के बाद इंसपेक्टर पांडेय ने इस्लामुद्दीन से आवश्यक पूछताछ की. इसी बीच एसपी (ग्रामीण) अपर्णा गौतम भी मौके पर पहुंच गईं. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर के पूछताछ की फिर आवश्यक दिशानिर्देश दे कर चली गईं. चूंकि मामला 2 संप्रदायों से जुड़ा था. इस वजह से उपजे तनाव को देखते हुए गांव में पीएसी तैनात कर दी गई. लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजने के बाद इंसपेक्टर जगनारायण पांडेय इस्लामुद्दीन को साथ ले कर थाने आ गए.

इस्लामुद्दीन की तहरीर पर इंसपेक्टर पांडेय ने गुड्डू, सेठपाल, विमल, अंगद और एक अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 147/302/201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. इस्लामुद्दीन ने इन लोगों पर संजू के मोबाइल और 80 हजार रुपए के लालच में हत्या करने का आरोप लगाया था. 21 नवंबर, 2020 को सुबह 10 बजे इंसपेक्टर पांडेय ने गुड्डू और उस के बहनोई आकाश को नियामतपुर मोड़ से गिरफ्तार कर लिया. उन के पास से संजू का वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी बरामद हो गया. थाने ला कर जब दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और हत्या की वजह बता दी.

उन्होंने बताया कि प्रीति संजू से बात करना बंद नहीं कर रही थी. इस वजह से आकाश और उस के बीच विवाद हो जाता था. आकाश अपनी पत्नी की चरित्रहीनता बरदाश्त नहीं कर पा रहा था. इसी साल भैयादूज पर वह प्रीति को ले कर उस के मायके आया. प्रीति के भाई गुड्डू से कहा कि उस की बहन प्रीति का चरित्र ठीक नहीं है. उस के संजू से अवैध संबंध हैं. अब वह प्रीति को अपने साथ नहीं रखेगा, उस से तलाक ले लेगा. इस पर गुड्डू ने उसे समझाया कि ऐसा कुछ करने की जरूरत ही नहीं पडे़गी. हम लोग संजू को ही ठिकाने लगा देते हैं. आकाश ने भी आवेश में उस की हां में हां मिला दी.

16 नवंबर की शाम को संजू खाना खा कर घर से निकला तो उसे निकलता देख कर गुड्डू उस के पास आ गया और बातोंबातों में उसे गांव के बाहर सेठपाल के खेत पर ले गया. वहां आकाश पहले से मौजूद था. दोनों ने मिल कर संजू को दबोच लिया और हाथों से गला दबा कर उस की हत्या कर दी. गुड्डू ने संजू के पैंट की जेब से उस का मोबाइल निकाल लिया. फिर संजू की लाश को पराली के ढेर में दबा दिया. लेकिन दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ ही गए. आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों हत्याभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Madhya Pradesh Crime: पत्नी की साजिश – प्रेमी संग मिलकर पति की बेरहमी से हत्या

Madhya Pradesh Crime: मध्य प्रदेश की संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर का उपनगरीय इलाका रांझी रक्षा मंत्रालय की फैक्ट्रियों के लिए जाना जाता है. यहां पर गन कैरेज, आर्डिनैंस, व्हीकल और ग्रे आयरन फाउंडी में सेना के उपयोग में आने वाले गोलाबारूद, टैंक और भारी वाहन बनाए जाते हैं. ग्रे आयरन फाउंडी के गेट नंबर 2 के पास ही रांझी के रिछाई अखाड़ा मोहल्ले में 40 साल का सोनू ठाकुर अपनी 28 साल की पत्नी नीतू और 2 बेटियों के साथ रहता था. मूलरूप से दामोह जिले के हिनौता गांव का रहने वाला सोनू परिवार में 4 भाईबहनों में सब से बड़ा था. शादी के पहले सोनू अपने खर्च के लिए अपने मातापिता की कमाई पर आश्रित था. लेकिन शादी होते ही उसे अहसास हो गया था कि उसे जल्द ही कोई कामधंधा शुरू कर देना चाहिए.

अपनी और पत्नी की जरूरतों को पूरा करने के लिए वह गांव में मेहनतमजदूरी का काम करने लगा, मगर गांव में मिलने वाले मेहनताने से वह पत्नी को खुश नहीं रख पा रहा था. गांव में एक छोटे से घर में उस का पूरा परिवार रहता था. जहां पर वे एकदूसरे से ढंग से बात भी नहीं कर पाते थे. रात को एक छोटी सी कोठरी में सोते समय दोनों अपने मन की बातें एकदूजे से नहीं कर पाते थे. यह बात नीतू को बहुत अखरती थी. रात को जब घर के सभी लोग सो जाते, तब उन्हें एकदूसरे का साथ मिलता था. इस बात का उलाहना दे कर अकसर ही नीतू सोनू से कहती थी कि वह कहीं अलग घर ले कर क्यों नहीं रहते. तब सोनू उसे समझा देता कि अभी हमारी नईनई शादी हुई है. अभी परिवार से अलग रहेंगे तो घर वालों को अच्छा नहीं लगेगा. कुछ महीनों के बाद वह अपना कामधंधा जमा कर अलग रहने लगेगा. जब शादी को साल भर का समय हो गया तो एक रात नीतू ने ही सोनू को सलाह देते हुए कहा, ‘‘क्यों न हम लोग गांव से दूर शहर जा कर कुछ कामधंधा कर लें.’’

सोनू को पत्नी की सलाह पसंद आई. सोनू भी सोचने लगा कि घर के लोगों की कमाई से कब तक अपना और बीवी का पेट भरेगा. जबलपुर शहर में हिनौता गांव के कुछ लड़के काम करते थे. सोनू ने उन के घर वालों से मोबाइल नंबर ले कर बातचीत की तो उन्होंने बताया कि उसे भी जबलपुर में आसानी से काम मिल जाएगा. शादी होने के साल भर बाद ही सोनू बीवी के साथ काम की तलाश में जबलपुर आ गया था. रांझी के अखाड़ा मोहल्ले में वे एक किराए की कोठरी में रहने लगे. नीतू सिलाईकढ़ाई का काम करने लगी और सोनू को यहां के बड़ा फुहारा में घमंडी चौक पर एक कपड़े की दुकान में सेल्समैन का काम मिल गया. जबलपुर आए हुए सोनू को करीब 5 साल हो गए थे. उन्होंने धीरेधीरे तिनकातिनका जोड़ कर एक छोटा सा घर बना लिया था.

इन सालों में नीतू 2 बेटियों की मां बन चुकी थी. सोनू और नीतू की गृहस्थी की गाड़ी हंसीखुशी पटरी पर चल रही थी, मगर एक रौंग नंबर की काल ने उन के जीवन में जहर घोल दिया. 2020 के जनवरी महीने की बात है. दोपहर का वक्त था. घर के कामकाज से फुरसत पा कर नीतू मोबाइल फोन में यूट्यूब पर वीडियो देख रही थी. तभी उस के मोबाइल फोन की रिंग बज उठी. नीतू ने जैसे ही काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘हैलो, मैं राजू बोल रहा हूं.’’

‘‘कौन राजू? मैं ने आप को पहचाना नहीं.’’

‘‘जी, मैं गाजीपुर से राजू राजभर बोल रहा हूं. कंप्यूटर ट्रेडिंग का काम करता हूं. क्या मेरी बात निशा वर्मा से हो रही है?’’

‘‘जी नहीं, आप ने गलत नंबर लगाया है.’’ नीतू ने बेतकल्लुफी से जबाब देते हुए कहा.

‘‘जी सौरी, मुझे निशा वर्मा के घर प्रिंटर भिजवाना था. गलती से आप का नंबर लग गया. वैसे आप कहां से बोल रही हैं?’’ राजू ने विनम्रता के साथ पूछा.

‘‘मैं तो जबलपुर से बोल रही हूं.’’

‘‘आप की आवाज तो बड़ी प्यारी है. क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं?’’ वह बोला.

‘‘मेरा नाम नीतू ठाकुर है.’’ नीतू ने कहा.

‘‘नीतूजी, आप से बात कर के बहुत अच्छा लगा.’’

‘‘जी शुक्रिया.’’

इतना कह कर नीतू ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया, मगर नीतू को भी राजू नाम के इस लड़के का इस तरह से बात करना अच्छा लगा. कुछ ही दिनों के बाद राजू नीतू के मोबाइल पर काल करने लगा. रौंग नंबर से शुरू हुआ बातचीत का सिललिला धीरेधीरे दोस्ती में बदल गया. अब तो नीतू भी हर दिन राजू के फोन आने का इंतजार करने लगी. एकदूसरे को वीडियो काल कर के घंटों उन की बातचीत होने लगी. तीखे नैननक्श वाली नीतू ने हायर सेकेंडरी तक पढ़ाई की थी. घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने का उसे बड़ा शौक था. उस ने शादी के पहले जो रंगीन ख्वाब देखे थे, वे सोनू से शादी कर के बिखर चुके थे. थोड़ी सी पगार में घरगृहस्थी चलाने वाला उस का पति सोनू दिन भर काम में लगा रहता और नीतू घर की चारदीवारी में कैद हो कर रह गई थी.

यही वजह रही कि नीतू हर समय मोबाइल फोन की दुनिया में अपने सपनों की उड़ान भरती रहती. पति के काम पर जाने के बाद अकसर वह खाली समय में मोबाइल में सोशल मीडिया साइट पर व्यस्त रहती थी. मोबाइल फोन के जरिए राजू और नीतू का प्यार जब परवान चढ़ने लगा तो वे दोनों एकदूसरे से मिलने को बेताब रहने लगे. नीतू राजू के प्यार में इस कदर खो चुकी थी कि बारबार राजू से जबलपुर आ कर मिलने की बात करती. प्यार की आग राजू के सीने में भी धधक रही थी. राजू नीतू को भरोसा दिलाता कि वह जल्द ही जबलपुर आ कर उस से मिलेगा. इसी बीच मार्च महीने में कोरोना महामारी के कारण 25 मार्च को लौकडाउन लग गया. लौकडाउन में भी मोबाइल फोन पर नीतू और राजू की बातें होती रहीं.

नीतू का पति सोनू घर के बाहर गली में जब भी टहलने जाता, नीतू राजू को काल कर लेती. जैसेजैसे लौकडाउन में ढील मिल रही थी, राजू जबलपुर जाने की प्लानिंग करने लगा था. राजू जिस कंपनी के लिए कंप्यूटर ट्रेडिंग का काम करता था, उस का कारोबार जबलपुर शहर में भी था. किसी तरह कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर से बात कर के उस ने जबलपुर की कंपनी में काम करने का जुगाड़ कर लिया. जैसे ही कंपनी की तरफ से उसे जबलपुर में काम करने का मौका मिला तो उस के मन की मुराद पूरी हो गई. एक ही शहर में कामधंधा और प्यार उसे आम के आम और गुठलियों के दाम जैसे लगा. इसी हसरत में 25 साल का कुंवारा राजू नीतू की चाहत में सितंबर 2020 में अपने गांव जफरपुर, गाजीपुर से जबलपुर आ गया .

जिस दिन राजू जबलपुर आ कर नीतू से मिला तो नीतू की खुशी का ठिकाना न रहा. राजू ने जैसे ही नीतू को करीब से देखा तो बस देखता ही रह गया.

‘‘वाकई तुम बहुत खूबसूरत हो,’’ जैसे ही राजू ने नीतू से कहा तो वह शरमा कर बोली, ‘‘मेरी तारीफ बाद में करना. मैं चाय बना कर लाती हूं.’’

इतना कह कर नीतू राजू के लिए चाय बनाने जैसे ही किचन में गई, राजू अपने आप को रोक नहीं सका. पीछे से वह भी किचन में पहुंच गया और नीतू को अपनी बांहों में भर लिया. उस के गालों पर चुंबन देते हुए बोला, ‘‘तुम्हें पाने को कितना इंतजार करना पड़ा.’’

नीतू ने अपने आप को छुड़ाते हुए नखरे दिखा कर कहा, ‘‘थोड़ा सब्र और करो, धीरज का फल मीठा होता है.’’

नीतू राजू को चाय का कप पकड़ा कर बाहर आ गई. उस ने बाहर आ कर देखा उस की दोनों बेटियां आंगन में किसी खेल में मस्त थीं. इसी मौके का फायदा उठा कर नीतू ने राजू के पास जा कर कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और राजू के सीने से लग गई. राजू ने नीतू की कमर में हाथ डाला और उसे बिस्तर पर ले गया. 8 महीने से मोबाइल पर चल रहे उन के प्यार के हसीन ख्वाब साकार हो रहे थे. उस दिन दिल खोल कर दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं. नीतू ने उस की खूब खातिरदारी कर ढेर सारी बातें कीं. राजू ने जब उसे बताया कि उस ने अपना ट्रांसफर जबलपुर करा लिया है. इसलिए अब यहीं रहेगा. तब नीतू बड़ी खुश हुई.

इतना ही नहीं, उस ने राजू को अपना रिश्तेदार बताते हुए अपने मोहल्ले में रहने वाले एक मकान मालिक के खाली कमरे को भाड़े पर उसे दिला दिया. उस के खानेपीने की जिम्मेदारी वह खुद ही करने लगी. नीतू ने राजू से मिलने का एक तरीका खोज लिया था. उस ने पति सोनू से बात कर उसे इस बात के लिए राजी कर लिया था कि ढाई हजार रुपए महीने में राजू को दोनों टाइम खाना बना कर देगी. सोनू ने यह सोच कर हामी भर दी कि थोड़ी सी मेहनत से बैठे ठाले ढाई हजार रुपए महीने की आमदनी बढ़ जाएगी, जो उस की बेटियों की पढ़ाईलिखाई के काम आएगी. सोनू का यही निर्णय उस के लिए घातक साबित हुआ. नीतू को तो बस अपने प्रेमी से मिलने का बहाना चाहिए था. अब वह बेरोकटोक राजू के लिए खाने का टिफिन देने के बहाने उस से मिलनेजुलने लगी थी.

सोनू सुबह 9 बजे ही घर से निकल जाता और दिन भर कपड़े की दुकान में काम कर के थकाहारा रात 9 बजे के बाद ही अपने घर पहुंचता था. नीतू और उस के पति सोनू की उम्र में 12 साल का फासला था. शायद यही वजह थी कि नीतू की शारीरिक जरूरतों को वह पूरा नहीं कर पाता था. इसी का फायदा उठाते हुए नीतू अपने से कम उम्र के गठीले नौजवान राजू के प्यार में पागल हो गई. दोनों का प्यार जिस्मानी तौर पर भी एकदूसरे की जरूरतों को पूरा करने लगा था. सोनू की गैरमौजूदगी में राजू नीतू को घुमानेफिराने, रेस्टोरेंट ले जा कर खूब पैसा लुटाता था. जब भी राजू को मौका मिलता वह नीतू के घर भी आ धमकता. नीतू भी अपनी बेटियों तनु और गुड्डी को काम के बहाने घर से बाहर भेज देती और दोनों जी भर कर अपनी हसरतें पूरी करते.

पति के होते गैरमर्द से संबंध बनाने वाली नीतू को न तो अपनी बेटियों और पति की सुध थी और न ही समाज का डर. प्यार और वासना का यह खेल रोज ही खेला जाने लगा था. कभी राजू के घर तो कभी नीतू के घर. 29 नवंबर, 2020 की सुबह के साढ़े 7 बजे का समय था. जबलपुर के रांझी थाने में फोन पर सूचना मिली कि ग्रे आयरन फाउंडी जीआईएफ के गेट नंबर 2 के पास की नाली में कंबल में लिपटी एक लाश पड़ी है. खबर मिलते ही टीआई आर.के. मालवीय ने पुलिस के आला अधिकारियों को सूचना दी और वह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. घटनास्थल पर आसपास के लोगों की भीड़ मौजूद थी. लोगों ने लाश की शिनाख्त कर बताया कि यह पास में ही रहने वाले सोनू ठाकुर की है.

सोनू की गरदन और बाएं हाथ की नस कटी हुई थी. घटनास्थल के पास ही सोनू की पत्नी अपनी दोनों बेटियों को सीने से चिपकाए चीखचीख कर रो रही थी. जब पुलिस ने सोनू के बारे में नीतू से पूछताछ की तो उस ने बताया कि रात को साढ़े 10 बजे यह घर से घूमने की बात कह कर निकले थे. जब देर रात तक नहीं लौटे तो इन्हें फोन किया. फोन स्विच्ड औफ बता रहा था. नीतू से प्रारंभिक पूछताछ करने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भेज दी और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर मामले की जांच शुरू कर दी. जांच के दौरान पुलिस टीम के ट्रेनी आईपीएस सिटी अमित कुमार, टीआई आर.के. मालवीय और फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और पाया कि जीआईएफ गेट नंबर 2 के पास की जिस नाली में सोनू की लाश मिली थी, वहां खून के धब्बों के निशान थे.

सड़क पर मिले खून के निशान का मुआयना करतेकरते पुलिस नाले से ले कर सोनू के घर तक पहुंच गई. जांच टीम को सोनू के घर में भी खून के धब्बे मिले. जबकि नीतू सोनू के रात साढ़े 10 बजे घर से बाहर जाने की बात कर रही थी. पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि नीतू के मोहल्ले में रहने वाले एक युवक राजू से संबंध थे. पुलिस के इसी संदेह की सुई नीतू की तरफ घूमी तो पुलिस ने नीतू को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ की. पहले नीतू पुलिस को गोलमोल जबाब दे कर पल्ला झाड़ती रही. लेकिन जब पुलिस टीम की महिला आरक्षक ने उस से सख्ती के साथ पूछताछ की तो जल्द ही उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया.

नीतू के बयान के आधार पर रांझी पुलिस ने राजू को भी हिरासत में ले कर पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में नीतू और राजू ने पुलिस को जो कहानी बताई, वह नाजायज संबंधों की ऐसी कहानी निकली जो दोनों को गुनाह के रास्ते पर ले जाने को मजबूर कर गई. कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते. रौंग नंबर फोन काल से शुरू हुए नीतू और राजू के प्रेम संबंधों की जानकारी धीरेधीरे पूरे मोहल्ले में चर्चा का विषय बन चुकी थी. नीतू के द्वारा फोन पर की जाने वाली लंबी बातें सोनू के मन में शक की जड़ें जमा चुकी थीं. मगर उसे यह उम्मीद नहीं थी कि जिस्मानी भूख मिटाने के लिए उस की बीवी नीतू किसी गैरमर्द से नाजायज संबधों की कहानी लिख रही थी.

शक होने पर सोनू नीतू पर नजर रखने लगा. एक दिन सोनू ने नीतू को मोबाइल फोन पर किसी से अमर्यादित बातें करते हुए देख लिया तो इस बात को ले कर दोनों में विवाद हो गया. अपनी कमजोरी छिपाने के लिए अकसर नीतू रोनेधोने का नाटक करने लगती और सोनू से कहती कि वह उस के चरित्र पर शक कर रहा है. कहते हैं कि चालाक औरतों के आंसू भी किसी हथियार से कम नहीं होते. सोनू नीतू के आंसुओं के आगे हार मान जाता था. राजू नीतू को रोजरोज पैसे और तोहफे ला कर देता और सोनू की गैरमौजूदगी में उसे और उस की बच्चियों को घुमाने ले जाता. नीतू और राजू के नाजायज संबंधों का यह खेल ज्यादा दिनों तक समाज की नजरों से छिप नहीं सका.

दोनों के प्रेम संबंधों की चर्चा मोहल्ले में खुलेआम होने लगी थी. मोहल्ले के कुछ लोगों ने भी सोनू को बताया कि उस की गैरमौजूदगी में राजू अकसर उस के घर आताजाता है. सोनू को अब इस बात का पक्का यकीन हो गया था कि पत्नी उस के साथ बेवफाई कर रही है. इस बात से सोनू मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था. पतिपत्नी के रिश्ते में विश्वासरूपी डोर टूट जाए तो जिंदगी नरक बन जाती है. एक दिन सोनू को अपनी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी. इसलिए अपने सेठ से बोल कर वह दोपहर के वक्त अपने घर आ गया. उस की बेटियां खिलौनों के साथ खेल रही थीं. उस ने कमरे के पास जा कर धीरे से जैसे ही दरवाजा खोला, अंदर का दृश्य देखते ही उस के होश उड़ गए. बिस्तर पर नीतू अपने प्रेमी के साथ रंगरलियां मना रही थी.

यह देखते ही उस की आंखों में खून सवार हो गया. वह जोर से पत्नी पर चीखा, ‘‘हरामजादी, मेरी गैरमौजूदगी में आशिक के साथ ये गुल खिला रही है.’’

सोनू की चीख सुन कर दोनों हड़बड़ा कर कर अलग हो गए. राजू अपने कपड़े समेट कर भाग खड़ा हुआ और नीतू अपराधबोध से नजरें नीची किए खड़ी थी. उस ने पति से माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का वादा किया. सोनू ने भी उसे माफ कर दिया. नीतू कुछ दिन तो ठीक रही, लेकिन उस से प्रेमी की जुदाई बरदाश्त नहीं हो रही थी. इसलिए वह उस से फिर मिलनेजुलने लगी. कहा जाता है कि आंखों देखी मक्खी खाई नहीं जाती मगर सोनू सब कुछ जान कर भी पत्नी की वेवफाई को बरदाश्त कर रहा था. कई बार उस के मन में विचार आता कि वेवफा पत्नी को हमेशाहमेशा के लिए छोड़ कर कहीं चला जाए, परंतु अपनी मासूम बेटियों के भविष्य की खातिर वह चुप हो कर बैठ जाता.

नीतू भी अपने पति की चुप्पी और मजबूरियों का जम कर फायदा उठा रही थी. सोनू नीतू को जितना समझाता, उतना ही वह राजू से दूरियां बनाने की बजाय नजदीकियां बढ़ा रही थी. इस बात को ले कर पतिपत्नी के बीच रोज ही विवाद होने लगा था. रोजरोज पत्नी से विवाद होने पर सोनू को कुछ नहीं सूझ रहा था. वैसे तो सोनू ने जीआईएफ गेट नंबर 2 के सामने खुद का घर बना लिया था. मगर नीतू के बहके कदमों को रोकने के लिए सोनू ने बहुत सोचविचार के बाद यह फैसला कर लिया था कि इसी रविवार कुछ दिनों के लिए वह बीवीबच्चों को ले कर अपने गांव चला जाएगा और गांव में ही कुछ कामधंधा करेगा. उसे भरोसा था कि कुछ दिन नीतू राजू से दूर रहेगी तो प्यार का यह रोग भी दूर हो जाएगा. और नीतू अपनी बेटियों की परवरिश में सब कुछ भूल कर सही रास्ते पर आ जाएगी. वापस गांव लौटने के अपने इस फैसले की जानकारी उस ने नीतू को भी दे दी थी.

इधर नीतू सोनू के गांव लौटने के फैसले से परेशान रहने लगी थी. नीतू को लगने लगा था कि यदि गांव चले गए तो फिर अपने प्रेमी राजू से मिलने को तरस जाएगी. जब नीतू ने राजू से परिवार सहित गांव वापस लौटने की बात कही तो राजू के माथे पर भी चिंता की लकीरें उभर आईं. उसे लगा कि जिस नीतू की खातिर वह अपने गांव से इतनी दूर आ गया, वही अब उस की नजरों से दूर चली जाएगी. राजू की प्लानिंग नीतू के साथ शादी कर के घर बसाने की थी और राजू के इस निर्णय में नीतू की भी सहमति थी. पहले दोनों के मन में विचार आया कि घर से भाग कर शादी कर लें और सुकून से अपनी जिंदगी गुजारें, मगर अपनी मासूम बेटियों की खातिर नीतू कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई.

राजू का भी जबलपुर शहर में कामधंधा ठीकठाक चल रहा था. उसे पता था कि नई जगह कामधंधा जमाने में कितनी मुश्किल होती है. वह अपने गांव भी नहीं लौटना चाहता था, क्योंकि उसे पता था घर वाले बालबच्चों वाली विवाहिता नीतू को इतनी आसानी से नहीं अपनाएंगे. जैसेजैसे रविवार का दिन नजदीक आ रहा था, नीतू और राजू की चिंता बढ़ती जा रही थी. राजू को पता था कि रविवार के पहले यदि इस समस्या का कोई हल नहीं निकला तो सोनू नीतू को ले कर अपने गांव चला जाएगा. राजू नीतू को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था. सोनू उन के प्यार के रास्ते में कांटा बन कर चुभ रहा था. इसी ऊहापोह में दोनों ने सोनू को अपने प्यार की राह से दूर करने का निर्णय ले लिया था.

एकदूसरे के लिए मर मिटने की कसमें खाने वाला यह प्रेमी जोड़ा जुदा होने से बचने के लिए कुछ भी कर गुजरने पर आमादा हो गया था. वासना के इस घिनौने खेल में अंधे हो चुके ये प्रेमी अपने प्यार को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बड़ी से बड़ी कुरबानी देने का मन बना चुके थे. आखिरकार उन्होंने तय कर लिया कि अपनी राह के कांटे को वे निकाल फेंकेंगे. राजू और नीतू ने सोनू को हमेशा के लिए उन की जिंदगी से दूर करने का खौफनाक प्लान तैयार कर लिया था. उन्होंने सोच लिया लिया था कि किसी भी तरह सोनू को जान से मार कर सदासदा के लिए एकदूसरे के हो जाएंगे. घटना के दिन सोनू दिन भर घर से बाहर नहीं निकला. वह सोनू की हत्या कर लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाता रहा.

नीतू पूरे दिन सब्जी काटने वाले चाकू की धार तेज करने में लगी रही. नीतू ने तेज धार वाले चाकू को अपने तकिए के नीचे छिपा कर रख लिया था. 28 नवंबर, 2020 की रात रोज की तरह सोनू अपने घर आया तो उस ने दूसरे दिन बस से अपने गांव वापस लौटने की चर्चा नीतू से की तो नीतू ने भी हामी भर दी. यह देख कर सोनू खुश हो गया. उसे लगा कि नीतू को अपने किए पर पछतावा है और गांव चल कर उन की जिंदगी फिर से खुशहाल हो जाएगी. खाना खाने के बाद कुछ समय वह अपने बेटियों को दुलारता रहा और उस के बाद टहलने के लिए घर से बाहर आ गया. साढ़े 10 बजे वापस आ कर वह बिस्तर पर लेटेलेटे नीतू से प्यारभरी बातें करता रहा.

अपनी दोनों बेटियों को सुलाने के बाद नीतू भी सोनू के बिस्तर पर आ कर प्यार का नाटक करने लगी. दोनों एकदूसरे के आगोश में समा गए और जैसे ही सोनू निढाल हो कर सो गया नीतू आगे की योजना बनाने में लग गई. नीतू की आंखों से उस रात नींद कोसों दूर थी. उस के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. उस ने रात करीब एक बजे राजू को फोन कर के अपने घर बुला लिया. राजू के आते ही योजना के मुताबिक नीतू ने गहरी नींद सो रहे सोनू के दोनों पैर पकड़ लिए और राजू ने उस की छाती पर बैठ कर चाकू से उस का गला रेत दिया और एक हाथ की कलाई भी काट दी. कुछ देर छटपटाने के बाद सोनू निढाल हो कर एक तरफ लुढ़क गया. अब दोनों ही सोनू की लाश को ठिकाने लगाने की सोचने लगे. उन्होंने बिस्तर पर गिरे खून के दागधब्बों को पोंछा. फिर लाश एक कंबल में लपेट ली.

इसी बीच नीतू ने घर का दरवाजा खोल कर बाहर का मुआयना किया और मौका देखते ही वे दोनों लाश को ग्रे आयरन फाउंडी के गेट नंबर 2 के पास बनी नाली में फेंक आए. लाश को ठिकाने लगाने के बाद दोनों अपनेअपने घर चले गए और अपने कपड़ों पर लगे खून के दाग साफ करते रहे. दूसरे दिन सुबह नीतू ने घर पर रोनापीटना शुरू कर दिया. चीखपुकार सुन कर मोहल्ले के लोग उस के घर जमा होने लगे तो नीतू ने बताया कि उस के पति रात से घर नहीं लौटे हैं और उन का मोबाइल भी बंद है. सोनू के गायब होने की बात सुन कर मोहल्ले के लोग उस की खोज में लगे हुए थे, तभी किसी ने आ कर बताया कि ग्रे आयरन फाउंडी गेट नंबर 2 के पास सोनू की लाश एक कंबल में लिपटी पड़ी है.

मोहल्ले के लोगों के साथ नीतू भी नाले के पास पहुंच गई. सोनू की लाश देख कर चीखचीख कर घडि़याली आंसू बहाने लगी थी. सोनू की लाश मिलने की खबर से नीतू का प्रेमी राजू भी वहां आ गया था. सोनू की मौत को लेकर मोहल्ले के लोग नीतू के प्रेमी राजू पर भी शक कर रहे थे. इसी बीच वहां पर रांझी थाने की पुलिस ने आ कर कुछ ही घंटों में हत्या की गुत्थी सुलझा दी. रांझी थाना पुलिस ने 24 घंटे में ही सेल्समैन सोनू सिंह हत्याकांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा और ट्रेनी आईपीएस अमित कुमार ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर मामले का खुलासा किया. दोनों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, खून से सने कपड़े, मृतक सोनू और आरोपी नीतू और राजू के 3 मोबाइल, एटीएम कार्ड आदि जब्त कर लिए गए.

मृतक सोनू के घर वालों के जबलपुर पहुंचने से पहले नीतू हवालात के अंदर थी, इस वजह से दोनों बेटियों तनु और गुड्डी को पड़ोसियों की देखरेख में रखवाया गया. बाद में गांव से उस के परिजनों के आते ही उन के सुपुर्द किया गया. कथा लिखे जाने तक नीतू और उस का प्रेमी राजू जेल में थे. अपने पति से वेवफाई कर मौजमस्ती की खातिर बनाए गए नाजायज संबंधों की वजह से नीतू ने अपनी जिंदगी के साथ मासूम बेटियों की जिंदगी भी बेनूर कर दी. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story: जुआ, जिस्म और कत्ल

Crime Story, लेखक – महेश कांत शिवा

उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के कांधला कसबे के रहने वाले 26 साला असलम, पिता का नाम आबिद, की बहन की शादी बागपत जनपद के गांव फतेहपुर कुट्ठी धनौरा में हुई थी.

बहन की शादी के बाद असलम का वहां आनाजाना हुआ तो उस की मुलाकात वहीं की ही रहने वाली 24 साल की आसमीन से हो गई. आसमीन असलम की बहन के पास आतीजाती रहती थी. इसी से असलम और आसमीन के बीच इश्क की आंखमिचौली शुरू हो गई.

9 साल पहले दोनों में दोस्ती हुई और कुछ ही समय में यह दोस्ती प्यार में बदल गई. दोनों परिवार वालों से छिपछिपा कर मिलने भी लगे.

एक दिन आसमीन ने असलम से कह ही दिया, ‘‘मैं तुम्हारे बिना अब एकपल भी जिंदा नहीं रह सकती. न जाने तुम ने मुझ पर क्या जादू कर दिया है, हरपल तुम ही तुम नजर आते हो.’’

‘‘ऐसा ही कुछ हाल मेरा भी है जानू. मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता. मैं अपने घर वालों को मना लूंगा, तुम भी अपने घर वालों से बात कर के देखो,’’ असलम ने जवाब दिया.

‘‘ठीक है, मैं आज अम्मी से बात कर के देखती हूं. उम्मीद है कि वे मान जाएंगी,’’ आसमीन ने कहा.

उसी दिन आसमीन ने अपने दिल की बात अपनी अम्मी से कह दी, लेकिन उस की अम्मी ने उस के अब्बू से बात करने की बात की.

आसमीन के अब्बू जब काम से वापस लौटे तो अम्मी ने आसमीन और असलम के बीच चल रहे संबंधों की जानकारी दी.

‘‘नहीं, यह हरगिज नहीं हो सकता. अगर ऐसा हुआ तो मैं असलम को मार दूंगा,’’ अचानक से वहां पहुंचे आसमीन के भाई हारून ने भड़कते हुए कहा.

इस के बाद अपने परिवार की नाराजगी की सारी बात आसमीन ने असलम को बता दी.

‘‘अब तो एक ही रास्ता निकलता है कि हम दोनों घर से भाग कर निकाह कर लें. तुम्हारी क्या राय है?’’ असलम ने आसमीन से पूछा.

‘‘जो भी करना है, जल्दी करो. हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है. मेरा निकाह कहीं और कर दिया जाएगा. तुम बस देखते रह जाओगे,’’ आसमीन ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा.

साल 2016 में एक दिन असलम और आसमीन अपनाअपना घर छोड़ कर भाग गए. दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली और कांधला कसबे से बाहर किराए का कमरा ले कर रहने लगे.

दोनों के बीच प्यारभरे संबंध बने तो आसमीन ने असलम की गोद में एक नन्हा सा बच्चा डाल दिया. दोनों हंसीखुशी से रहने लगे.

असलम को जो भी काम मिल जाता, वह उसे कर लेता था. रात को जब असलम काम से वापस लौटता तो अपने बच्चे और आसमीन को देख कर उस की दिनभर की सारी थकान दूर हो जाती थी.

दोनों की जिंदगी हंसीखुशी से बीत रही थी कि 5 साल पहले उन की जिंदगी में एक मोड़ आया. असलम और आसमीन कांधला लौट आए.

कांधला लौटने पर असलम ने अपने घर से दूर महल्ला रायजादगान में एक मकान किराए पर लिया और वहां पर रहने लगा. वहां पर रहतेरहते आसमीन 3 बच्चों की मां बनी. अब वह कुल 4 बच्चों की मां थी, जिन में 2 बेटे और 2 बेटियां थीं.

असलम ने कांधला में ही एक होटल पर नौकरी करना शुरू कर दी. जैसेजैसे परिवार बढ़ा और बच्चे बड़े होने लगे, तो असलम की जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं. घर और बच्चों के स्कूल की फीस का खर्च भी बढ़ रहा था.

होटल से असलम को थोड़ीबहुत ही तनख्वाह मिलती थी, जिस से गुजारा होना मुश्किल हो रहा था. घरखर्च चलाने के लिए उस ने जुआ खेलना शुरू कर दिया. जुए में पैसा हारने की वजह से वह लोगों का कर्जदार भी होता चला गया.

एक फाइनैंसर से असलम ने 20-30 हजार रुपए का कर्ज लिया, लेकिन समय से कर्ज की किस्तें अदा नहीं कर पा रहा था, जिस के चलते फाइनैंसर और उस के आदमी घर आ कर रुपयों का तकादा करने लगे.

रोजाना फाइनैंसर के घर आने से आसमीन भी परेशान हो गई.

असलम के पड़ोस में इंतजार नामक आटोरिकशा ड्राइवर भी रहता था. इंतजार की पत्नी की डेढ़ साल पहले मौत हो चुकी थी. तकरीबन 6 महीने पहले इंतजार और आसमीन के बीच मुलाकात हुई और प्यार हो गया. इंतजार ने असलम के घर में आनाजाना शुरू कर दिया.

उन दोनों के बीच मोबाइल पर दिनरात घंटों प्यारभरी बातें होने लगीं. ह्वाट्सएप पर भी वे दोनों खूब चैटिंग करने लगे.

असलम के होटल पर जाने के बाद इंतजार अकसर उस के घर पहुंच जाता था. आसमीन और इंतजार में संबंध भी बन गए थे.

इस बात का जब असलम को पता चला तो उस ने एतराज जताया, लेकिन आसमीन नहीं मानी और उस ने इंतजार से बने रिश्ते को जारी रखा.

‘‘आसमीन, जो तुम कर रही हो, वह ठीक नहीं है. मैं ने इंतजार को भी समझाया है, पर वह नहीं मान रहा. कम से कम तुम तो मान जाओ. रोजाना उस का हमारे घर आना, तुम्हारे साथ बैठ कर खाना खाना… क्या कहेंगे महल्ले वाले…’’

आसमीन कुछ नहीं बोली, बस चुपचाप असलम की बातें सुनती रही. वह अब इंतजार के साथ एक नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहती थी, लेकिन असलम इस राह में रोड़ा बन रहा था.

आसमीन के दिमाग में आया कि असलम को बीच रास्ते से हटाना होगा, तभी जा कर वह इंतजार के साथ नई जिंदगी की शुरुआत कर सकती है.

आसमीन ने इंतजार से मिलना जारी रखा. एक दिन उस ने अपने भाई हारून को अपने और इंतजार के रिश्ते के बारे में सारी बात बता दी. यह जानकारी पा कर हारून भी उस के घर पहुंच गया. इंतजार को भी बुला लिया गया.

आसमीन ने अपने भाई से सारे हालात की जानकारी दी, ‘‘असलम जुआ खेलता है. उस ने लोगों का कर्जा सिर पर चढ़ा रखा है. घर के बाहर कोई न कोई अपने पैसे मांगने वाला खड़ा ही रहता है. मैं तो तंग आ गई हूं. वह जो कमाता है, उसे जुए में उड़ा देता है. इस से अच्छा है कि उसे मार ही दो.’’

‘‘असलम तुम्हें ले कर घर से भागा था, जिस से रिश्तेदारों और बिरादरी में हमारी नाक कट गई,’’ हारून ने अपनी बहन से नाराजगी भरे लहजे में कहा.

‘‘मेरी भूल थी भाई. मुझे क्या पता था कि निकाह के बाद वह नकारा हो जाएगा, जुआ खेलने लगेगा,’’ आसमीन ने मायूसी भरे लहजे में कहा.

‘‘ठीक है, कुछ करते हैं,’’ हारून ने आसमीन को दिलासा देते हुए कहा.

9 अगस्त, 2025. शनिवार की शाम को हारून ने असलम को फोन कर के कहा, ‘‘चलो, आज घूमने कैराना चलते हैं, आसमीन भी साथ रहेगी.’’

असलम को शक नहीं हुआ. बीवी साथ थी तो सब सामान्य लगा. वे तीनों कांधला से कैराना की तरफ निकल पड़े. शराब के ठेके से शराब की बोतल ली. रास्ते में एक जगह पर बैठ कर उन दोनों ने शराब पी.

हारून ने कम शराब पी, जबकि असलम को ज्यादा शराब पिला दी, जिस से उसे कुछ होश न रहा.

थोड़ी देर के बाद असलम पूरी तरह से बेहोश हो चुका था. इस के बाद इंतजार अपना आटोरिकशा ले कर वहां पहुंच गया. उन तीनों ने मिल कर असलम को आटोरिकशा में डाला और एक सुनसान जगह ले जा कर मीट काटने वाले चाकू से असलम का गला रेत कर हत्या कर दी.

इस के बाद उन तीनों ने असलम की लाश को कैराना में कांधला रोड पर हाशिम के आम के बाग में फेंक दिया और फरार हो गए.

10 अगस्त, 2025, रविवार की सुबह तकरीबन सवा 9 बजे कैराना कोतवाली पुलिस को आम के बाग में एक लाश पड़ी होने की सूचना मिली. फोरैंसिक टीम को मौके पर बुला कर सुबूत जुटाए गए.

असलम की जेब से मिले आधारकार्ड से उस की पहचान हुई तो पुलिस ने असलम के पिता को भी मौके पर बुला लिया.

एसपी शामली रामसेवक गौतम ने हत्या के खुलासे के लिए एक टीम बनाई और कांधला से ले कर कैराना तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. सीसीटीवी में एक हरे रंग के आटोरिकशा में आसमीन, हारून और इंतजार असलम को ले जाते हुए नजर आए.

कैराना कोतवाली पुलिस ने बिना देरी किए आटोरिकशा ड्राइवर इंतजार को हिरासत में ले लिया. उस के और आसमीन के फोन की काल डिटेल खंगाली गई. मोबाइल में दोनों की ह्वाट्सएप चैटिंग भी मिली.

इस पर पुलिस का शक गहरा गया. वह अब पूरी तरह से यह मान चुकी थी कि असलम की पत्नी ने ही नाजायज संबंधों के चलते उस की हत्या कराई है.

पुलिस ने आसमीन और उस के भाई हारून को भी गिरफ्तार कर लिया. आसमीन ने पुलिस को बताया कि वह इंतजार से दूसरा निकाह करना चाहती थी, लेकिन असलम राह का रोड़ा बन रहा था.

बाद में आसमीन ने अपना बयान बदलते हुए पुलिस का बताया कि उस ने ऐसे ही कहा दिया था कि असलम को मार डालो, लेकिन इन दोनों (हारून और इंतजार) ने तो सच में ही उस के शौहर को मार डाला.

पुलिस ने 12 घंटे के भीतर वारदात का खुलासा किया और आसमीन, हारून और इंतजार को गिरफ्तार कर लिया. तीनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया. Crime Story

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