Inter Caste Love Story. नेहा खेतों में गाय चरा रही थी. साथ में उस की सहेली अनुराधा भी थी. नेहा और अनुराधा अपनी बातों में मगन थीं कि एक जानीपहचानी आवाज ने उन का ध्यान खींचा. दोनों ने आवाज की दिशा में नजर घुमाई.
यह थानेदार अशोक सिंह का बेटा आकाश था, जो नेहा से शादी करने की सोच रहा था.
नेहा ने आकाश को देख कर बुरा सा मुंह बना लिया. वह अनुराधा से बोली, ‘‘इस से कह दो कि यहां से चला जाए.’’
‘‘तुम शांत रहो. पहले सुन तो लो कि यह क्या कह रहा है.’’
‘‘जो कहता आया है, वही कहेगा.’’ ‘‘अच्छा, अब तुम शांत हो जाओ, आकाश नजदीक आ गया है.’’
आकाश उन दोनों के पास आ कर खड़ा हो गया. अनुराधा के होंठों पर हलकी मुसकान बिखर गई. वह गंभीर होने की ऐक्टिंग करते हुए बोली, ‘‘यहां क्यों आए हो?’’
‘‘मैं नेहा से मिलने आया हूं.’’ ‘‘मगर क्यों?’’
‘‘उस से कुछ कहना है.’’ ‘‘ठीक है, कहो,’’ बोल कर अनुराधा नेहा के न चाहते हुए भी वहां से कुछ कदम दूर चली गई.
नेहा ने थोड़ा कठोर बनते हुए आकाश से कहा, ‘‘मैं जानती हूं कि तुम क्या कहोगे. मुझे कुछ नहीं सुनना है. तुम यहां से चले जाओ.’’
आकाश ने प्यार भरे लहजे में कहा, ‘‘नेहा, ऐसा मत बोलो. मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं और तुम से शादी करना चाहता हूं.’’
‘‘मैं तुम से कितनी बार कह चुकी हूं कि यह मुमकिन नहीं है. तुम ऊंची जाति के हो… उस पर भी थानेदार के बेटे.’’
‘‘थानेदार मेरे पापा हैं, मैं तो नहीं. वैसे भी इस में बुराई क्या है?’’
‘‘बुराई यह है कि तुम्हारे पापा हमेशा अमीर लोगों की बात सुनते हैं. वे रिश्वत ले कर सच को झूठ और झूठ को सच बना देते हैं,’’ नेहा ने कहा.
‘‘ऐसा वे करते हैं, पर मैं नहीं.’’ ‘‘बेटे तो उन्हीं के हो, असर तो पड़ेगा ही.’’
‘‘ऐसा नहीं है नेहा. मैं तुम्हें दिखा दूंगा कि मैं क्या हूं. बस, तुम थोड़ा साथ दे दो.’’
‘‘देखो, मुझ में और तुम में बहुत फर्क है. मैं छोटी जाति की हूं. तुम्हारे पापा यह बरदाश्त नहीं कर पाएंगे, इसलिए अच्छा यही होगा कि मेरा पीछा करना छोड़ दो.’’
आकाश ने कहा, ‘‘मैं जातपांत को नहीं मानता. तुम मुझ पर भरोसा करो.’’
नेहा आकाश को तिरछी निगाहों से देखने लगी.
आकाश ने आगे कहना शुरू किया, ‘‘नेहा, तुम मानो या न मानो, मैं तुम्हें अपना समझता हूं. एक दिन ऐसा आएगा कि तुम पिघल जाओगी और मेरे सच्चे प्यार के आगे झुक जाओगी.’’
इतना कह कर आकाश तेजी से चला गया. अनुराधा नेहा के पास आती हुई बोली, ‘‘तुम उस की बात क्यों नहीं मान लेती हो?’’
‘‘कैसे मान लूं, तुम तो…’’
अनुराधा ने उस की बात बीच में ही काट दी, ‘‘नेहा, मुझे लगता है कि आकाश का प्यार सच्चा है और वह तुम्हें खुश रखेगा.’’
नेहा सोच में पड़ गई.
अनुराधा ने नेहा से फिर कहा, ‘‘वैसे, यह तुम्हारी मरजी है. तुम जैसा ठीक समझे , वही करो.’’
नेहा ने कहा, ‘‘अच्छा, मैं इस पर सोचूंगी. फिलहाल यहां से चलते हैं.’’
नेहा ने अपनी गाय संभाली और अनुराधा के साथ घर की राह ली.
नेहा का इस दुनिया में मां के सिवा कोई न था. जब वह 8 साल की थी, तभी पिता का साया उस के सिर से उठ चुका था. उन की थोड़ी सी जमीन थी, जिस में खेती कर के उस की मां कुछ अनाज उपजा लेती थीं.
नेहा 10वीं पास कर चुकी थी. आगे की पढ़ाई के लिए मां ने मना कर दिया, पर वह और पढ़ना चाहती थी.
नेहा ने खुरपी उठाई और मां से कहा, ‘‘मां, अनुराधा आए तो उसे भेज देना.’’ ‘‘ठीक है, मैं भेज दूंगी.’’
नेहा गांव से बाहर कुछ दूर आ गई, जहां आम का एक बगीचा था. वहां सन्नाटा पसरा था. दूरदूर तक किसी का घर नहीं था. नेहा उसी बगीचे के सामने घास छीलने लगी.
महेंद्र सिंह इस गांव का सब से अमीर आदमी था. गांव में दूरदूर तक उसी की जमीन थी. उस का लड़का अमर सिंह बड़ा घमंडी था. बातबात पर लड़नाझगड़ना, तकरार करना उस की आदत में शामिल था. वह कुछ लड़कियों की तो इज्जत से भी खेल चुका था.
अमर सिंह अपने खेतों को देखता हुआ नेहा के पास पहुंच गया. उस को अचानक अपने सामने देख नेहा डर गई.
वह बोला, ‘‘घबराओ मत. मैं शेर नहीं हूं, जो तुम्हें खा जाऊंगा. मैं सिर्फ मजा लूंगा…’’
नेहा घबराते हुए बोली, ‘‘तुम यहां से चले जाओ. मैं यहां घास लेने आई हूं.’’
‘‘तुम्हारी फूल सी जवानी को छोड़ कर मैं कैसे चला जाऊं. यह कभी नहीं होगा. बस, आ जाओ. थोड़े समय की तो बात है. आओ, मेरी बांहों में…’’ कह कर अमर नेहा की ओर बढ़ने लगा.
नेहा धीरेधीरे पीछे हटने लगी, लेकिन अगले ही पल अमर सिंह ने पूरी ताकत से उसे दबोच लिया और जमीन पर पटक कर उस पर छा गया.
नेहा पूरी ताकत से उस के चंगुल से छूटने की कोशिश करने लगी, पर कहां अमर सिंह का कठोर हाथ और कहां उस का कोमल बदन. कुछ ही देर में उस का सबकुछ लुट गया.
अमर सिंह अपना काम खत्म कर तेजी से वहां से चल दिया. नेहा वहीं कुछ देर तक बेसुध सी हालत में रही, फिर धीरे से उठने की कोशिश करने लगी कि तभी अनुराधा वहां आ गई. उस ने सहारा दे कर नेहा को उठाते हुए पूछा, ‘‘क्या हुआ?’’
नेहा के मुंह से कुछ नहीं निकला. वह उस से लिपट कर बुरी तरह रो पड़ी.
अनुराधा ने नेहा की पीठ सहलाई और प्यार से पूछा, ‘‘क्या हुआ नेहा? बोलो तो सही?’’
नेहा ने सारी घटना रोरो कर कह दी.
अनुराधा गुस्से में कांपते हुए बोली, ‘‘घबराओ नहीं. हम अभी थाने चलेंगे, उस अमर सिंह को नहीं छोड़ेंगे.
इस घटना से नेहा की मां को गहरा धक्का लगा. अनुराधा ने उन्हें शांत किया, फिर वह उन दोनों को ले कर थाने चल पड़ी.
नेहा की मां और अनुराधा ने थानेदार अशोक सिंह को सारी घटना बताई, तो वह उलटे उन्हीं पर बिगड़ गया.
‘‘ऐसे इज्जतदार आदमी के बेटे के ऊपर लांछन लगाते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती. निकलो यहां से, नहीं तो हवालात में बंद कर दूंगा.’’
यह सुन कर अनुराधा को बहुत गुस्सा आया.
अनुराधा नेहा की मां से बोली, ‘‘चलिए, चाची यहां से.’’
यह चर्चा पूरे गांव में फैल गई. आकाश को जब इस के बारे में पता चला, तो वह फौरन नेहा के घर पहुंचा.
नेहा आकाश को देख कर रोने लगी. आकाश ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘नेहा, रोओ नहीं. मैं तुम्हारे साथ हूं.’’
नेहा की मां ने रोते हुए आकाश से कहा, ‘‘मैं ने सोचा था कि इस की शादी धूमधाम से करूंगी. अब कैसे होगी मेरी नेहा की शादी? कौन करेगा इस से ब्याह?’’
‘‘मैं करूंगा नेहा से शादी. मैं ने तो कब से इसे अपना मान लिया है,’’ आकाश बोला.
आकाश की यह बात सुन कर वहां खामोशी छा गई.
कुछ देर बाद आकाश ने नेहा से पूछा, ‘‘नेहा, क्या तुम मुझ से शादी करोगी?’’
जवाब में नेहा का सिर झुक गया.
नेहा की मां को मालूम था कि आकाश नेहा को पसंद करता है, इसलिए वे भी मना नहीं कर सकीं.
अनुराधा ने आकाश को उस के पिता थानेदार अशोक सिंह के किए गए गलत बरताव की बात बताई.
आकाश ने कहा, ‘‘मेरे पापा की महेंद्र सिंह से दोस्ती है, लेकिन कोई बात नहीं. मैं अमर सिंह से उस की इस करतूत का बदला जरूर ले कर रहूंगा.
‘‘मुझे कुछ दिनों के लिए नेहा को यहां दूर ले कर जाना होगा, तभी मैं इस से शादी कर पाऊंगा. मैं पैसों का इंतजाम कर लेता हूं.’’
कुछ दिनों बाद सारा इंतजाम कर के आकाश नेहा के घर पहुंचा. वह पहले से तैयार थी.
आकाश ने नेहा की मां के पैर छुए और कहा, ‘‘मैं इस के साथ शादी कर के जल्दी ही लौट आऊंगा. शादी के बाद मेरे पापा चाह कर भी कुछ नहीं कर सकेंगे. आप नेहा को रेलवे स्टेशन ले कर चलिए, मैं पीछेपीछे आता हूं.’’
अगले दिन पूरे गांव में खबर फैल गई कि आकाश नेहा को ले कर भाग गया है.
थानेदार अशोक सिंह ने अपना सिर पीट लिया. वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता था. उस का सारा घमंड चूरचूर हो गया था. Inter Caste Love Story
-दिनेश प्रसाद गुप्ता




