Hindi Short Story. ‘उल्लू का पट्ठा…’ पूरी क्लास में यह गाली ऐसे गूंजी, जैसे कोई धमाका हुआ हो. इस गाली को बोलने वाला कोई बड़ा बच्चा नहीं, बल्कि पहली जमात में पढ़ने वाला 6 साल का सोनू था.
बच्चों की कौपियां जांच रही टीचर यह सुन कर हैरान रह गईं. उन्होंने सख्त चेहरा बना कर सोनू को अपने पास बुलाया और प्यार से पूछा, ‘‘बेटा, आप ने यह गाली कहां से सीखी? कौन बोलता है ऐसे?’’
‘‘मेरे पापा,’’ सोनू ने कहा.
‘‘आप के पापा और कौनकौन सी गालियां देते हैं?’’
‘‘बेटी के… बहिन के… मां के…’’
यह सुन कर टीचर का मुंह हैरानी से खुला का खुला रह गया.
‘‘बेटे, आप के पापा ये गालियां कब देते हैं?’’
‘‘फोन पर और मम्मी से लड़ाई करते समय,’’ सोनू ने मासूमियत से कहा.
अगले हफ्ते ही स्कूल में टीचरों और मातापिता की मीटिंग थी. गाली देने वाले बच्चे सोनू के साथ उस की मां आई थीं. उन के बैठते ही टीचर ने सोनू के मुंह से निकली गालियों की लिस्ट उन के हाथ में थमा दी. साथ ही, टीचर ने उन्हें कई हिदायतें भी दे डालीं.
सोनू की मां पर जैसे घड़ों पानी पड़ गया. उन्होंने घर पहुंचने तक किसी तरह अपने पर काबू किया, लेकिन घर में घुसते ही उन की आंखों से आंसू बह चले.
सोनू के पापा ने जब यह देखा, तो वे चिल्लाए, ‘‘क्या हुआ? किस मां के… की इतनी हिम्मत…’’
सोनू की मां रोती रहीं.
‘‘अरे, किस ने क्या कह दिया? कुछ बताओगी भी या ऐसे ही रोती रहोगी.’’
वे फिर भी रोती रहीं.
‘‘अरे, कौन मिल गया था? कुछ बताओगी भी…’’ सोनू के पिता ने फिर दोहराया.
यह सुन कर सोनू की मां अचानक फट पड़ीं, ‘‘वही उल्लू की पट्ठी… बहिन… सोनू की टीचर… और कौन.’’
सोनू के पिता को गाल पर चांटा सा लगता महसूस हुआ.
‘‘क्या हुआ? ऐसा कैसे बोल रही हो?’’ सोनू के पिता ने पूछा.
‘‘नालायक… गधे की औलाद…’’
यह सब सुन कर अपनी मां के बगल में खड़ा सोनू हंसने लगा.
इस घटना के बाद सोनू के पिता ने कभी घर में गाली नहीं दी. Hindi Short Story




