Hindi Story. जब 51 साल का कुंदन पहाड़ से 21 साल की हसीन गदूली को शादी कर के लाया, तो आसपास के सभी लोग दांतों तले उंगली दबा कर रह गए.
सभी एकदूसरे से पूछ रहे थे कि आखिर कुंदन जैसे खूसट चपरासी के साथ किस बेरहम मांबाप ने अपनी बेटी को बरबाद होने के लिए ब्याह दिया.
कुंदन महज 5वीं जमात तक पढ़ा था. वह देहरादून के करणपुर महल्ले में एक रईस की कोठी के आउटहाउस में किराए पर रहता था.
मांबाप के गुजर जाने के बाद कुंदन अकेला हो गया था. जवानी में उसे कभी अपनी शादी करने की ख्वाहिश नहीं हुई, लेकिन ढलती उम्र में उस को एक साथी की जरूरत महसूस होने लगी, तो उस ने पहाड़ से एक औरत ब्याह कर लाने का मन बना लिया.
कुंदन ने अपने खिचड़ी बालों में खिजाब भी लगवा लिया. मूंछें मुंड़वा दीं. एक सस्ता सा सफारी सूट पहना. हाथ में घड़ी वगैरह भी.
छलकपट वाला वेश अपनाते हुए वह काफी कम उम्र का छैला बना और जा पहुंचा अपने एक जानपहचान वाले के पहाड़ी गांव में. वहां उस ने अपने को क्लर्क बताया और एक गरीब अकेली विधवा मां से उस की बेटी गदूली का हाथ मांगा.
गदूली की मां ने लोगों के घरों और खेतों में काम कर के उसे हाई स्कूल पास करा दिया था. अपनी गरीबी से मजबूर गदूली भी दुलहन बनने को तैयार हो गई, ताकि उस की बूढ़ी होती मां के सीने से जवान बेटी का बो?ा उतर जाए.
एक पुरोहित ने गांव के मंदिर में मामूली रस्मअदायगी कर के कुंदन और गदूली की शादी करा दी. वे दोनों मां से विदा ले कर देहरादून आ गए.
2-3 दिनों तक वे दोनों गृहस्थी बसाने के कामों में लगे रहे. बाद में जब भी गदूली कुंदन से प्यार करने की कोशिश करती, तो वह किसी न किसी बहाने कन्नी काटता इधरउधर हो लेता.
एक बार गदूली ने कुंदन को बिस्तर मेें अपनी बांहों में जकड़ना भी चाहा, लेकिन वह कोई पहल किए बिना मुंह छिपाए और दफ्तर में ज्यादा काम से थका होने के चलते गहरी नींद आने की बात कह कर पलटी मारते ही खर्राटे भरने लगा.
मिलन की चाह में उफनती गदूली तब अचानक उबलते दूध पर पानी के छींटें पड़ जाने की तरह मन मसोस कर देर तक रोतीसिसकती रही. वह भांप गई कि कुंदन एक उम्रदराज अधेड़ है और साथ ही नामर्द भी. बस, तभी से रंगीन सपनों से भरा उस का दिल टूट गया और जिंदगी के आगे आने वाले दिन किसी तरह कटने लगे.
एक दिन अचानक कोठी के गेट पर उसी अहाते में रहने वाले 24 साल के नौजवान मोहन से कुंदन का सामना हो गया.
‘‘नमस्ते भैया. ठीक हैं न आप?’’ कहने के बाद मोहन के मुंह से निकल पड़ा, ‘‘भाभीजी कैसी हैं?’’
‘‘ठीक ही हैं,’’ जवाब देने के साथ ही कुंदन चौंक पड़ा था. उस को यह शक हो गया कि जरूर मोहन उस की गैरहाजिरी में गदूली से मिलता होगा.
दिन गुजरते गए. शादी के चौथे महीने जब एक सुबह कुंदन अपने दफ्तर जाने वाला था, उसी समय उस ने देखा कि गदूली नाली के पास बैठी उबकाई कर रही थी.
कुंदन सोच में पड़ गया, ‘मैं तो कभी भी गदूली के साथ हमबिस्तरी नहीं कर सका, फिर उस के पेट में कहीं उसी मोहन का बच्चा तो नहीं पल रहा है?’
शाम को कुंदन दफ्तर से सीधे घंटाघर चौराहे के छोर पर पंडित मेघदूतानंद के पास जा पहुंचा और बोला, ‘‘नमस्ते पंडितजी.’’
‘‘पधारो जजमान, बेहिचक अपनी समस्या बताओ,’’ खुश हो कर पंडित बोला.
‘‘क्या कहूं पंडितजी, कहते हुए भी शर्म आ रही है. बात ही कुछ ऐसी है,’’ कुंदन हकलाता हुआ बोला.
‘‘देखो जजमान, डाक्टर और पंडित से कुछ भी छिपाने से नुकसान ही रहता है, इसलिए मु?ो पूरी बात बताओ,’’ मेघदूतानंद ने कहा.
‘‘पंडितजी, मेरी बीवी पेट से हो गई है. आज सुबह ही मैं ने उसे उबकाई करते खुद देखा, पर वह बच्चा मेरा नहीं है, क्योंकि पिछले 4 महीने में वह कभी भी मेरे साथ हमबिस्तर नहीं हुई…’’ कुंदन ने कहा, ‘‘आप ज्योतिष विद्या से पता लगा दीजिए कि वह बच्चा किस का हो सकता है.’’
मेघदूतानंद सम?ा गया कि कुंदन बेवकूफ है. कुछ मंत्र सा बड़बड़ाने के बाद स्लेट पर खडि़या से 4-5 आड़ीतिरछी रेखाएं खींच कर उस ने कुंदन को किसी एक रेखा पर अपनी उंगली छुआने को कहा.
ऐसा होने के बाद पंडित बोला, ‘‘तुम्हारे अगलबगल पड़ोस में जरूर कोई नौजवान है, जिसे तुम्हारी बीवी ने अपना सबकुछ सौंप दिया और वह पेट से हो गई है. जरा सख्ती से पूछना, तो तुम्हारी मनचली बीवी जरूर सबकुछ उगल देगी.’’
‘‘समझ गया पंडितजी,’’ कहते हुए कुंदन ने 21 रुपए मेघदूतानंद के आसन पर बतौर दक्षिणा रख दिए.
घर पहुंचते ही कुंदन गुस्से से कमरे में घुसा और खाट पर आराम कर रही गदूली को ?ाक?ोरते हुए बोला, ‘‘सवेरे मैं ने तुम्हें उलटी करते देख लिया था. अब सचसच बता दे कि मु?ा से दगा कर के तू ने किस यार से अपना सबकुछ लुटवाया है.’’
‘‘मैं तुम्हारी बंदर घुड़कियों से नहीं डरने वाली,’’ गदूली कुंदन की पकड़ से छिटक कर दूर होते हुए बोली, ‘‘अब कान खोल कर सुन ले. दगा मैं ने नहीं, तुम ने मु?ा से की है. नकली जवानी का ढोंग रचा कर तुम ने मु?ा को छलकपट से अपनी बीवी बनाया है. फिर भी मैं तुम से प्यार करने लगी थी.
‘‘लेकिन जिंदगी का असली धोखा जो तुम ने मेरे साथ किया, उस का तो मु?ो तभी पता चला, जब मैं ब्याहता होते हुए भी तुम्हारी एक कुंआरी नौकरानी बन कर रह गई.
‘‘अब तुम चाहे लाख कोशिश कर के देख लो, मैं तुम्हें कुछ भी नहीं बताने वाली कि मेरे पेट में पल रहे इस बच्चे का बाप कौन है.’’
‘‘अच्छा, तो फिर ठीक है…’’ कुंदन बौखलाते हुए बोला, ‘‘मैं तु?ो धक्के मार कर घर से निकाल दूंगा. जब दरदर फिरती भीख मांगती रहेगी, तब तेरी इज्जत लूटने वाला तेरा यार भी तु?ो पनाह नहीं देगा… सम?ा?’’
‘‘अरे, पनाह मांगते तो अब तुम ही भटकने वाले हो,’’ गदूली बोली, ‘‘2-3 दिनों में ही अदालत से तुम को पेशी पर बुलाए जाने का हुक्म मिलेगा. मेरी तरफ से तुम पर नामर्द होते हुए भी धोखाधड़ी से मेरे साथ शादी करने के जुर्म की वजह से अदालत में तुम से तलाक चाहने बाबत केस दाखिल हो चुका है.
‘‘तुम से तलाक हो जाने और तुम्हारे जेल चले जाने के बाद मैं अपने होने वाले बच्चे के बाप के साथ शादी कर लूंगी.’’
यह सुन कर कुंदन की हालत ‘काटो तो खून नहीं’ जैसी हो गई. तभी वह गिड़गिड़ाता हुआ बोला, ‘‘गदूली, मुझ से भारी पाप हो गया. मैं हर हाल में तुम्हारा गुनाहगार हूं और अपने किए की माफी मांगता हूं. तुम अदालत वाली कार्यवाही मत कराओ.
‘‘तुम चाहो तो मैं खुद ही तुम को तुम्हारे होने वाले बच्चे के बाप से ब्याह करने के लिए खुशी से आजाद कर दूंगा.
‘‘बस, तुम इतना बता दो कि वह कौन भला मर्द है, जिस ने तुम्हें सच्चा प्यार दिया और तुम से शादी करना चाहता है?’’
गदूली का दिल भर आया. वह बोली, ‘‘जब हम पहाड़ से आए थे, तभी कोठी से लगी बिल्डिंग में किराएदार खुफिया इंस्पैक्टर वेणुगोपाल को शक हुआ कि कहीं तुम मु?ा को बहलाफुसला कर तो नहीं लाए हो?
‘‘दूसरे ही दिन तुम्हारी गैरहाजिरी में उन्होंने मु?ा को बुला कर पूछताछ की. पहली मुलाकात में ही हम एकदूसरे को दिल दे बैठे. बाद में हमारे जिस्मानी संबंध न बना सकने वाली बात भी मैं ने वेणुगोपाल को बता दी. उन्होंने तुम पर मेरी तरफ से अदालत में केस चलाने की ठान ली.
‘‘उसी दरमियान एक बार तुम्हारे दफ्तर चले जाने के बाद मैं खुद उन के पास चली गई और तभी से उन का प्यार मेरे पेट में पल रहा है.’’
इंस्पैक्टर वेणुगोपाल की मदद से पहली ही सुनवाई में अदालत से गदूली को कुंदन से तलाक मिल गया. धोखे से शादी करने व असलियत को छिपाने के अपराध के लिए कुंदन को 18 महीने की कैद और 2 हजार रुपए का जुर्माना बतौर सजा सुनाए गए.
वेणुगोपाल ने कुंदन की गरीबी पर तरस खाते हुए रुपए अदालत में जमा करा दिए थे.
कुछ दिनों बाद इंस्पैक्टर वेणुगोपाल ने गदूली से अदालत में शादी कर ली और उसे अपने घर ले जाने की तैयारी करने लगा. Hindi Story




