किसी का भी दोष निकालने से पहले अपनी कमियों को जरूर देखना चाहिए. अव्यवस्था सिर्फ एक आदमी या संस्था या सरकार के चलते नहीं फैलती. हम सब कहीं न कहीं इस में भागीदारी निभाते हैं.