Self-Confidence Story: ‘‘अरे, इस लड़की को कितना समझाएं कि लड़कियों को अपने अंदर पहनने वाले कपड़ों को छिपा कर सुखाना चाहिए, ताकि किसी मर्द की नजर इन पर न पड़ जाए, पर यह लड़की है कि अपनी समीज हमेशा खुले में ही डाल देती है,’’ माला की मां शांता बड़बड़ाए जा रही थीं और इसी गुस्से में भर कर उन्होंने अपनी बेटी माला को आवाज दी और खरीखोटी सुनाने लगीं.

मां की डांट से माला सहम गई और तार पर सूख रही अपनी समीज को उठा कर कुरते के नीचे कर दिया.

18 साल की माला का शरीर भरा हुआ था, पर इस उम्र में भी वह घर पर सिली हुई सूती कपड़े की समीज ही पहना करती थी, क्योंकि उस की पुराने खयालों की मां का मानना था कि शादी से पहले लड़कियों को समीज ही पहननी चाहिए.

माला की मां दुकान पर जा कर ब्रा खरीदने को बेशर्मी मानती थीं और खुद भी अपने लिए घर पर सिले कपड़े ही पहना करती थीं.

पिछले दिनों ही जब माला को अपने सीने के उभार कुछ ज्यादा उठे हुए से लगने लगे थे, तो उस ने घर की सिलाई मशीन से ही अपनी समीज को खूब टाइट सिल दिया, ताकि वह उस के बदन पर चिपक कर फिट हो, जिस से उस का सीना ज्यादा उभरा न लगे.

उत्तर प्रदेश के बड़े शहर गोरखपुर से तकरीबन 80 किलोमीटर की दूरी पर कप्तानगंज नाम का यह छोटा कसबा था. इसी कसबे में शांता अपने पति और 18 साल की बेटी माला के साथ रहती थीं. शांता बेहद दकियानूसी और पुरानी विचारधारा की थीं और अपनी एकलौती बेटी पर हमेशा सख्ती करती थीं.

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