Short Story.
‘‘है लो राधा...’’ ‘‘हां राजेश, कैसे हो?’’
‘‘अगला पीरियड खाली है. चलो कैंटीन में चल कर कुछ खाते हैं,’’ राजेश ने कहा. ‘‘तुम चल कर बैठो. मैं सुनीता को किताब दे कर अभी आई.’’
‘‘राधा, मुझे तुम्हारा दूसरे लड़कों के साथ इस तरह घुलनामिलना अच्छा नहीं लगता. बस, तुम मेरी हो,’’ राजेश ने अपने प्यार का इजहार करते हुए शिकायती अंदाज में कहा.
‘‘हां बाबा, मैं तुम्हारी हूं, पर दोस्तों से ‘हैलो’ करने से क्या जाता है?’’ राधा और राजेश का प्यार अमरबेल की तरह बढ़ता जा रहा था.
एक दिन राधा की मां ने अचानक उस के सामने शादी की बात की, ‘‘देख बेटी, मैं ने एक अमीर घर में तेरी शादी की बात पक्की कर दी है.
‘‘तू तो जानती है... बिना बाप की औलाद, उस पर तेरी ये आदतें. लड़का भी ऐसा ढूंढ़ा है, जो तेरे किसी काम में रुकावट नहीं डालेगा,’’ कह कर मां ने शरारत से एक आंख दबा दी, ‘‘जहां तक मैं मर्दों को पहचानती हूं, राकेश बहुत ही सीधा और नेक लड़का है.’’
‘‘ठीक है मां, तुम मेरे लिए जो भी करोगी, बहुत सोचसमझ कर ही करोगी,’’ राधा ने कहा.
दूसरे दिन कालेज में राधा ने कहा, ‘‘राजेश, मां ने मेरी शादी कहीं और पक्की कर दी है.’’ ‘‘पर... तुम तो मुझ से प्यार करती हो,’’ राजेश रोंआसा हो कर बोला.
‘‘मैं कब इनकार कर रही हूं, मगर मेरी मजबूरी है.’’ ‘‘मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता,’’ राजेश ने बेचैन हो कर कहा.
‘‘तो तुम मुझ से मिलने ससुराल आ जाया करना,’’ राधा इठलाते हुए बोली.
कुछ समय बाद राधा की शादी मनोज से हो गई. वह राधा की खूबसूरती देख कर अपनेआप को दुनिया का सब से सुखी आदमी समझ रहा था.
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