Love Story in Hindi. बरसों बाद उस दिन आसमान साफ था. हलकी धूप खेतों पर बिखरी हुई थी. दूर तक सरसों के पीले फूल हवा के साथ झूम रहे थे. गांव के बाहर वही पुराना बरगद खड़ा था, जिस की जड़ों ने आधी जमीन को अपनी बांहों में ले रखा था.
बरगद के नीचे पत्थर की एक पुरानी बैंच थी. सुधीर धीरेधीरे चल कर वहीं आ कर बैठ गया. सिर के बाल अब लगभग सफेद हो चुके थे. आंखों पर चश्मा था और चाल में उम्र की थकान साफ दिखती थी.
सुधीर ने अपनी जेब से एक पुरानी डायरी निकाली. पन्ने पीले पड़ चुके थे. बीच में दबा हुआ गुलमोहर का सूखा फूल अब भी वैसा ही था.
सुधीर उसे देर तक देखता रहा. हवा के झोंके से बरगद की पत्तियां सरसराईं. उसी समय पीछे से कदमों की आहट आई... ‘‘सुधीर.’’ आवाज धीमी थी, पर पहचान में आने में एक पल भी नहीं लगा.
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सुधीर ने मुड़कर देखा. सीमा खड़ी थी. 30 साल बाद. हलकी सी सूती साड़ी, माथे पर छोटी सी बिंदी, बालों में कुछ चांदी की लटें मगर चेहरा अब भी वैसा ही शांत था जैसा कभी कालेज के दिनों में हुआ करता था.
दोनों कुछ देर तक बस एकदूसरे को देखते रहे. सीमा ने हलकी मुसकान के साथ पूछा, ‘‘तुम अभी भी यहां आते हो?’’
सुधीर ने बैंच की तरफ देखते हुए कहा, ‘‘कभीकभी जब यादें बहुत परेशान करने लगती हैं.’’
सीमा भी धीरे से आ कर पास बैठ गई. बरगद की पत्तियों के बीच से धूप छन कर जमीन पर गिर रही थी. दूर खेतों में काम करते किसानों की हलकी आवाजें आ रही थीं. हवा में मिट्टी और सरसों के फूलों की मिलीजुली खुशबू थी.
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