इकलौते बच्चे के सुखदुख से जूझती रश्मि किसी तरह अपनी जिंदगी की गाड़ी को गति दे रही थी कि एक दिन पुत्र स्वरूप की छोटी बहन की चाह ने उस के अंतर्मन में उथलपुथल मचा दी. काश, वह स्वरूप की इच्छा पूरी कर पाती.

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