14 अगस्त, 2019 को अदालत का फैसला आया, जिस में सभी आरोपी बरी हो गए.

मतलब साफ है कि सिस्टम ठीक से पैरवी नहीं करता और अदालतें इंसाफ नहीं करती हैं. यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि देश में खुली आजादी के लाखों फैसले ऐसे आए हैं जिन की बदौलत सिस्टम के प्रति नागरिकों में नफरत पैदा हुई है. देश की व्यवस्था से विश्वास डगमगाया है और अलगाववादी सोच पनपी है.

इस देश का सिस्टम और अदालतें बगावत के बीज बोती हैं. अराजकता की बुनियाद ही देश का सिस्टम है. ऐसे फैसलों के चलते ही देश आतंकवाद का शिकार है.

जोधपुर की सैशन कोर्ट ने काले हिरण के शिकार के मामले में फंसे सलमान खान को ले कर भी इसी तरह का फैसला दिया था और देशभर में अदालत के फैसले को ले कर मजाक का माहौल बना था.

ये भी पढ़ें- जिंदा इंसान पर भारी मरा जानवर

ये मामले देखने और सुनने में तो सरसरीतौर पर मजाक लगते हैं, मगर इंसाफ की उम्मीदों को अंदर तक नोच डालते हैं. सत्ता, सिस्टम व अदालतों को नागरिकों के खिलाफ खड़ा कर देते हैं.

पहलू खान पर आए फैसले को हिंदूमुसलिम नजरिए से मत देखिए. भारत का एक नागरिक सड़क पर मारा गया. वीडियो के जरीए सब ने देखा भी. काश, पुलिस और अदालत उस वीडियो को देख कर अनजान न बनतीं.

अगर एक नागरिक की मौत पर यही इंसाफ है तो यह मान लेना चाहिए कि आंखों पर पट्टी बांधे हाथ में इंसाफ का तराजू ले कर खड़ी इंसाफ की देवी ही आतंकवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद, देशद्रोह और गद्दारी की सरगना है.

हमें यह मानने में बिलकुल गुरेज नहीं करना चाहिए कि पहलू खान की मौत सिर्फ एक इनसान की मौत नहीं, बल्कि इस देश के सिस्टम, सत्ता, सियासत और अदालत को बेमौत मार गई.

‘एक था पहलू खान’ नाम से फिल्में बनेंगी. देश में नए सिरे से चर्चाओं का दौर चलेगा और एक मरा हुआ इनसान इस देश की व्यवस्था को नंगा करेगा, जिस से लोगों का इंसाफ के तराजू से भरोसा उठेगा.

ये भी पढ़ें- राज्य में चौटाला राजनीति का सूर्योदय, 11 महीने में बदल दी हरियाणा की राजनीति

पहलू खान की हत्या

पहलू खान की हत्या के मामले में अलवर जिला अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है. अदालत ने मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया है.

बता दें कि साल 2017 में इस भीड़ ने गौतस्करी के शक में पहलू खान की पीटपीट कर हत्या कर दी थी. कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है.

1 अप्रैल, 2017 को हरियाणा के मेवात जिले के बाशिंदे पहलू खान जयपुर से 2 गाय खरीद कर अपने घर ले जा रहे थे. शाम के तकरीबन 7 बजे बहरोड़ पुलिया से आगे निकलने पर भीड़ ने उन की पिकअप गाड़ी को रुकवा कर पहलू खान और उस के बेटों के साथ मारपीट की थी. इलाज के दौरान पहलू खान की अस्पताल में मौत हो गई थी.

पहलू खान की हत्या के मामले में 8 आरोपी पकड़े गए थे, जिन में 2 नाबालिग थे. अलवर कोर्ट में 6 आरोपियों पर फैसला सुनाया गया, 2 नाबालिग आरोपियों की सुनवाई जुवैनाइल कोर्ट में हो रही है.

होगी एसआईटी जांच

राजस्थान सरकार ने पहलू खान की पीटपीट कर हत्या किए जाने के मामले की जांच एसआईटी से कराने का फैसला लिया है.

ये भी पढ़ें- पौलिटिकल राउंडअप: ओवैसी ने लताड़ा

सरकार ने यह फैसला तब लिया, जब कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने अलवर की निचली अदालत के फैसले को चौंकाने वाला बताया. कांग्रेस सरकार मामले की जांच फिर से कराने के लिए एसआईटी गठित करेगी.

लिंचिंग संरक्षण विधेयक

राज्य विधानसभा में 30 जुलाई को राजस्थान लिंचिंग संरक्षण विधेयक 2019 और प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा के लिए लाया गया विधेयक पास हो गया.

प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा के लिए लाए गए विधेयक को ‘राजस्थान सम्मान और परंपरा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक 2019’ का नाम दिया गया है. 30 जुलाई को इन दोनों विधेयकों को सदन में पेश किया गया था.

इन दोनों विधेयकों के कानून का रूप लेने के बाद राज्य सरकार जहां एक ओर प्रेमी जोड़ों को सुरक्षा दे सकेगी, वहीं दूसरी ओर लिंचिंग से जुड़े अपराधों की रोकथाम के लिए भी सख्त कदम उठा सकेगी.

क्या है मौब लिंचिंग

नए विधेयक में धर्म, जाति, भाषा, राजनीतिक विचारधारा, समुदाय और जन्मस्थान के नाम पर भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा को मौब लिंचिंग माना है. इस में 2 या 2 से ज्यादा लोगों को मौब की परिभाषा में शामिल किया गया है.

लिंचिंग की घटना में पीडि़त की मौत हो जाने पर दोषियों को आजीवन कठोर कारावास के साथ 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाने का प्रावधान है, वहीं गंभीर रूप से घायल होने पर कुसूरवारों पर 10 साल का कठोर कारावास और 3 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है. मारपीट पर 7 साल के कठोर कारावास व एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है.

अगर कोई शख्स इलैक्ट्रौनिक माध्यम से समाज में नफरत बढ़ाने वाले संदेश भेजता है, तो ऐसे मामले में भी 5 साल तक का कारावास भुगतना पड़ेगा और एक लाख रुपए का जुर्माना भी देना होगा.

ये भी पढ़ें- विधानसभा चुनाव सब में अकेले लड़ने की छटपटाहट

इंस्पैक्टर रैंक का अफसर ही लिंचिंग से जुड़े मामलों की जांच करेगा. प्रदेश में आईजी रैंक व जिलों में डीएसपी रैंक का अफसर ही इस की मौनिटरिंग करेगा. तुरंत सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की सलाह पर स्पैशल जज नियुक्त कर सकेंगे. सैशन लैवल के जज ही ऐसे मामलों की सुनवाई कर सकेंगे.

इस बिल में प्रावधान किया गया है कि पीडि़त को राजस्थान विक्टिम कंपनसैशन स्कीम के तहत मदद दी जाएगी और दोषियों से जो जुर्माना वसूला जाएगा, उसे पीडि़त को दिया जाएगा.

औनर किलिंग

जाति, समुदाय और परिवार के नाम पर वैवाहिक या प्रेमी जोड़े में से किसी को भी जान से मारने पर आरोपियों को फांसी या आजीवन कारावास की सजा दी जा सकेगी. ऐसे मामले गैरजमानती होंगे.

5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगेगा.

वैवाहिक जोड़े पर प्राणघातक हमला करने वालों को 10 साल से ले कर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है. अगर हमला प्राणघातक

नहीं है, तब भी आरोपियों की 3 साल से 5 साल तक की कठोर सजा का प्रावधान है, जो साजिश में शामिल होगा, उस के लिए भी सजा के यही प्रावधान होंगे.

ये भी पढ़ें- बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सियासी जंग

शादी से रोके जाने पर पीडि़त जोड़े एसडीएम और डीएम के यहां अपील कर सकेंगे. इस में एसडीएम और मजिस्ट्रेट संबंधित लोगों को पाबंद कर सकेंगे. जो भी मामले दर्ज होंगे, उन का ट्रायल सैशन कोर्ट में होगा.

Tags:
COMMENT