हैदराबाद, अपने कड़वे बोलों के लिए बदनाम एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘फादर औफ इंडिया’ बताए जाने पर कहा कि डोनाल्ड ट्रंप एक जाहिल आदमी हैं और पढ़ेलिखे भी ज्यादा नहीं हैं. न तो उन को हिंदुस्तान के बारे में कुछ मालूम है और न ही उन को महात्मा गांधी के बारे में कुछ पता है. ट्रंप को दुनिया के बारे में भी कुछ मालूम नहीं है.

असदुद्दीन ओवैसी ने 25 सितंबर को कहा, ‘‘अगर ट्रंप को मालूम होता तो इस तरह की जुमलेबाजी नहीं करते. महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का खिताब इसलिए मिला, क्योंकि लोगों ने उन की कुरबानी को देख कर उन्हें यह उपाधि दी थी. इस तरह के खिताब दिए नहीं जाते, हासिल किए जाते हैं.’’

हाईकोर्ट हुआ सख्त

अहमदाबाद. हाईकोर्ट ने सरकारी जमीनों को धार्मिक संप्रदायों को दान देने पर बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए 25 सितंबर को कहा कि गुजरात सरकार किसी शख्स या किसी खास धार्मिक संप्रदाय को सार्वजनिक इस्तेमाल की जमीन को दान न दे. जब पूरा देश धर्मस्थलों से भरा पड़ा है, तो राज्य सरकार को किसी खास संप्रदाय पर दरियादिली नहीं दिखानी चाहिए.

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हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी 3 पक्ष वाले एक जमीन के  झगड़े में की जिस में राजकोर्ट नगरनिगम, एक कोऔपरेटिव सोसाइटी और एक धार्मिक ट्रस्ट शामिल हैं. नगरनिगम एक जमीन को धार्मिक ट्रस्ट को बेचना चाहता है लेकिन कोऔपरेटिव सोसाइटी का दावा है कि यह उस की जमीन है.

संजय सिंह को मिली कमान

दिल्ली. अपनी तेजतर्रार इमेज और बेबाक राय के लिए मशहूर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को आगामी विधानसभा के लिए प्रभारी बनाया गया है.

इस के साथ ही 26 सितंबर को ‘आप’ की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ‘पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव अपनी सरकार के ऐतिहासिक कामकाज के आधार पर लड़ेगी जिस ने चहुंमुखी विकास से राष्ट्रीय राजधानी की तसवीर बदल दी है. हमारे स्वयंसेवी स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और जलापूर्ति क्षेत्र में दिल्ली सरकार के कामकाज की जानकारी घरघर तक पहुंचाएंगे.’

पिछले कुछ समय से आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपनी इमेज बनाने में ज्यादा कामयाब हुई है. अब संजय सिंह को देखते हैं कि वे चुनाव में वोटरों को अपने पक्ष में कैसे लाएंगे.

मांझी का तीर

कटिहार. बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके और हिंदुस्तानी अवाम मोरचा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मां झी ने 26 सितंबर को राजद नेता तेजस्वी यादव पर आरोप लगाया कि भाजपा के प्रति उन के दिल में ‘सौफ्ट कौर्नर’ है. बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के बाद से ही उन के लक्षण सही नहीं हैं.

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यह चिनगारी छोड़ने के साथ ही अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के नेता के चेहरे के सवाल पर जीतनराम मां झी ने कहा कि निजी तौर पर तेजस्वी उन्हें पसंद हैं, लेकिन इस का आखिरी फैसला महागठबंधन को करना है.

फट गए बादल

चंडीगढ़. भाजपा के करीबी रहे शिरोमणि अकाली दल के अब तेवर बदल गए हैं. उस के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने हरियाणा में अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक के भाजपा में शामिल होने को गलत बताया.

कलांवली के विधायक बलकौर सिंह 26 सितंबर को नई दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गए. उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की राज्य को ‘ईमानदारी’ सरकार देने के लिए तारीफ की.

इस बात से नाराज सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि हर रिश्ते की एक मर्यादा होती है और अकाली दल के मौजूदा विधायक को अपने खेमे में शामिल करने से उन के गठबंधन की मर्यादा टूट रही है.

भाजपा हर जगह मर्यादा की दुहाई देती है, लेकिन किसी दूसरी पार्टी के नेता को अपनी तरफ मिलाने से भी नहीं चूकती है.

परेड की डिमांड

भोपाल. यह किसी सेना की परेड की बात नहीं हो रही है, बल्कि मध्य प्रदेश के हाई प्रोफाइल हनी ट्रैप स्कैंडल में कई नेताओं और अफसरों के शामिल होने पर वहां के एक मंत्री गोविंद सिंह ने कहा है कि अपराधियों के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए. पुलिस को आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए और उन की पब्लिक में परेड करानी चाहिए.

27 सितंबर को मध्य प्रदेश कांग्रेस दफ्तर के बाहर एक बड़ा बिलबोर्ड लगाया गया जिस में लिखा था कि ‘चाल चरित्र चेहरे’ का दावा करने वाले शिवराज सिंह चौहान अपनी पार्टी के नेताओं के नाम हनी ट्रैप में आने के बाद भी चुप क्यों हैं? इस से पता चलता है कि कुछ तो गड़बड़ है.

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जोड़ीदारों का बंटवारा

मुंबई. एकजैसी विचारधारा के हिमायती रहे भाजपाइयों और शिव सेना वालों में काफी उठापटक के बाद सीटों का बंटवारा तकरीबन हो गया है. भारतीय जनता पार्टी राज्य में 144 सीटों पर और शिव सेना 126 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. दूसरे सहयोगी दलों के लिए 18 सीटें रखी गई हैं.

यही नहीं, भाजपा की तरफ से शिव सेना को उपमुख्यमंत्री पद भी दिया जा सकता है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद कई बार कह चुके हैं कि वे आदित्य ठाकरे को उपमुख्यमंत्री बना सकते हैं.

सवाल उठता है कि अगर पिछले कुछ सालों में भाजपा ताकतवर हुई है तो उसे ऐसे गठबंधन की जरूरत ही क्यों पड़ती है?

प्रधानमंत्री की उम्मीद

चेन्नई. काफी दिनों के बाद भारत लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 सितंबर को कहा कि दुनिया की भारत से ‘बहुत उम्मीदें’ हैं और उन की सरकार देश को ‘महानता’ के उस रास्ते पर ले जाएगी जहां वह पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद साबित होगा. इस के साथ ही उन्होंने एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के खिलाफ अपनी मुहिम को दोहराया.

लेकिन प्रधानमंत्री ने यह नहीं बताया कि देश में धर्म, जाति, इलाके के नाम पर जिस तरह लोगों को बांटा जा रहा है, उन में जहर भरा जा रहा, उस से कैसे छुटकारा मिलेगा?

बढ़ी सियासी रार

कोलकाता. भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ममता सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि बंगाल में जंगलराज है. इस पर तृणमूल वाले बिदक गए और उन्होंने 28 सितंबर को कहा कि जेपी नड्डा राज्य में विकास नहीं देख सकते, क्योंकि वे खुद जंगल से आए हैं.

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तृणमूल के नेता फरहाद हकीम ने कोसते हुए कहा कि नड्डा को केंद्र में ‘जंगलराज’ क्यों नहीं दिखा, क्योंकि भाजपा की दोष से भरी नीतियों के चलते अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है और पूरे देश में नौकरियां गई हैं.

जितेंद्र सिंह के बोल बचन

जम्मू. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह 29 सितंबर को कटरा में नवरात्रि उत्सव का उद्घाटन करने गए थे. वहां उन्होंने लोगों से कहा कि वे माता वैष्णो देवी का धन्यवाद करें कि जम्मूकश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया गया है.

याद रहे कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म कर दिया था और राज्य को 2 केंद्रशासित क्षेत्रों जम्मूकश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था.

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