Funny Story In Hindi: अंगूठे से सोचने का जमाना

Funny Story In Hindi: अब तो कैमरे के सामने रोना भी कंटैंट है और हंसना भी रील. अब यूट्यूबर सोचता है कि थंबनेल में अधनंगी लड़की का फोटो डालूं या लाल घेरे में चुडै़ल दिखाऊं? इस नए जमाने का नारा है ‘अंगूठा ही दिमाग’ है. पहले अखबार की हैडलाइन का खौफ हुआ करता था, पर अब तो थंबनेल ऐसे चीखते हैं मानो न्यूक्लियर बटन दब गया हो.

सोशल मीडिया ज्ञान का सागर नहीं, बल्कि गलतफहमियों और धोखेबाजी का महासागर बनता जा रहा है. थंबनेल व क्लिकबेट की दुनिया में ईमानदारी पुराने जमाने का रिकौर्ड प्लेयर है, जिसे अब कोई नहीं चलाता.

थंबनेल गुरुओं के यूट्यूब चैनल अब बेईमानी व झूठ के कोचिंग चैनल जैसे हो गए हैं. बस, थोड़ा चेहरा खींचिए, लाल तीर लगाइए, मुफ्त में झूठ की गुगली फेंकिए. थंबनेल अब नए दौर की ठग कला है. थंबनेल यानी किसी वीडियो या लेख की एक झलक ध्यान खींचने के लिए, जबकि क्लिकबेट एक धोखा देने वाला टाइटिल या थंबनेल, जो आप से वीडियो क्लिक करवा लेता है.

‘मोदीजी का संसद में जोरदार भाषण’ एक थंबनेल. ‘मोदीजी फफकफफक कर रो पडे़’ एक क्लिकबेट. कैसे कंटैंटवीर लोगों को लुभा व झूठ परोस कर उन के समय व डाटा को खा रहे हैं.

बेक्रिंग ‘अभीअभी परमाणु युद्ध शुरू हो गया’ पर वीडियो खोलने पर एक महाशय अपने कुत्ते को नहलाते दिख रहे हैं. इन के कंटैंट में किसी को मूव करने का दम नहीं, तो कैमरा मूव कर कर लोगों को दिखाते हैं.

थंबनेल आज का वह सिक्सर है जो जीरो रन पर आउट होने जैसा है. वहीं क्लिकबेट वह चाय है, जिस में पत्ती नहीं पर उबाल जरूर दिखता है. इस में रसगुल्ला दिखाया जाता है, पर निकलती सूखी मठरी है. खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली हालत.

थंबनेल अब दरवाजे पर रखी एक खूबसूरत जूती की तरह है, पर अंदर जाओ तो असलियत नंगे पांव मिलती है. ये लोग कैमरे से नहीं कनपटी पर क्लिकबेट रख कर वीडियो बनाने में माहिर हैं. इस में कुछ नहीं को सबकुछ की तरह बेचा जाता है.

‘देखिए, मोदीजी की आंखों में आंसू’ और पता चला कि जिस सभा में वे भाषण दे रहे थे, उस इलाके में धूलभरी आंधी चल गई थी. क्लिकबेट यानी जितना बड़ा दावा उतनी छोटी बात. दर्शक गालियां भी देते हैं, पर वीडियो देखना नहीं छोड़ते.

आजकल मुद्दे नहीं मुंह के भाव बिकते हैं. जितना टेढ़ा मुंह उतना वायरल. थंबनेल का दिमागी दीवालियापन देखिए कि फोटो भगत सिंह का लगा है और प्रचवन कोई बाबाजी दे रहे हैं. दोनों हाथों से केला खाने वाली लड़की के वीडियो का टाइटिल होगा ‘इस ने वह कर दिया जो आज तक कोई नहीं, जी हां, कोई नहीं कर पाया’.

ये आज के टैलेंटेड लोग हैं, जो बिना कंटैंट के 20 मिनट का वीडियो थंबनेल व क्लिकबेट के दम पर पेल कर लोगों के समय व चैन से खेल रहे हैं. थंबनेल और पान में कैचअप डालना एकजैसे अपराध हैं.

दूल्हे की महज फोटो देख कर रिश्ता तय करने जैसा ही है अब थंबनेल खोल कर वीडियो को देखना. अब हर वीडियो ब्रेकिंग होता है. ये ब्रेक असल में वीडियो देखने वाले को इस के सडि़यल कैंटेंट के कारण ब्रेक ही कर देते हैं. आज जो सब को पता है उसे गला फाड़फाड़ कर ऐक्सक्लूसिव कहने का चलन है.

ऐक्सपायर्ड चीजें अनूठी बना दी जाती हैं.

अब ज्यादा मेहनत पहले चेहरा बिगाड़ के डर फैलाने के काम में होती है. कंटैंट बनाने का काम बाद में बिना मेहनत के चुटकियों में कर लिया जाता है. अब लोग वीडियो से ज्यादा रिऐक्शन पर रिऐक्शन करते हैं.

जहां बिना शादी के सासबहू के बीच झगडे़ जैसी हालत है.

‘वीडियो को आखिर तक देखिए… आखिरी में होगा बड़ा खुलासा…’ खुलासे तो वह बीचबीच में किसी ब्रांड के प्रमोशन का करता ही रहता है कि यह एक अनूठा औफर आज महज एक पिज्जा की कीमत पर 2 पिज्जा… केवल पहले 50 सब्सक्राइबर्स के लिए.

आखिरी तक पहुंचने तक तो आप का डाटा भी हांफने हुए दम तोड़ देता है. ये नए जमाने के डाटा खाऊ कंटैंट भाऊ हैं. इन वीडियोज रूपी चाय में कंटैंट की चीनी खोजते रह जाओगे.

असली सक्सैस मंत्र ‘जितना झूठ उतने व्यूज’. महंगाई, बेरोजगारी, जीडीपी पर कोई बात नहीं. बात तो सैलेब्रिटी के कुत्ते ने आज क्या खाया या फलां हीरो के बेटे आज कितने साल के हो गए या इन मोहतरमा ने आज 10 लाख की ड्रैस पहनी जैसी बातें ज्यादा होती हैं. झोंपड़ी की आग की वीडियो को संसद की आग कह कर देखने का लालच दिया जाता है.

सोशल मीडिया की यह यात्रा ‘फौलो फोर फैक्ट’ से ‘फौलो फोर फाल्सहुड’ तक ले आई है. कंटैंटमेकर सम झदारी से वैसे ही दूर होता जा रहा जैसे महंगाई के सरपट भागते घोडे़ की लगाम सरकार की पकड़ से, बेरोजगारी की समस्या और उस के समाधान से दूर होती जा रही है.

थंबनेल व क्लिकबेट की दुनिया में सब से तेज भाग रहा भी पहुंचता कहीं नहीं है. अब पुराने हाथ की सफाई मुहावरे की जगह अंगूठे की सफाई कहना चाहिए .

तो दोस्तो, अगली बार जब कोई कहे कि देखिए इस वीडियो ने सब को हिला दिया, तो मान कर चलिए कि आप का पूरा डाटा हिलने वाला है. अब तो अगला वीडियो नहीं, बल्कि अगला थंबनेल देखिए, ऐसा कहना चाहिए. Funny Story In Hindi

Crime Story In Hindi: एक मौत ऐसी भी

Crime Story In Hindi: रेशमा एक गरीब परिवार की खूबसूरत लड़की थी, पर उस की चाहत हमेशा अमीरों वाली थी. महंगे मोबइल, महंगी ड्रैस और बड़ी गाडि़यों में घूमने के सपने के चक्कर में वह इतनी अंधी हो गई कि उस ने अपने इस खूबसूरत बदन को ही अमीर बनने का रास्ता बनाने का इरादा कर लिया.

रेशमा मुंबई के गोवंडी इलाके में अपने अम्मीअब्बा के साथ रहती थी. उस का बाप आटोरिकशा चला कर अपने परिवार का पेट पालता था. उस ने कड़ी मेहनत कर के रेशमा को खूब पढ़ाने का सपना संजो रखा था, इसलिए उस ने अपनी बेटी को एक अच्छे इंगलिश स्कूल में दाखिला दिलवा दिया था.

रेशमा पढ़ाईलिखाई में काफी होशियार थी. यही वजह थी कि वह हर क्लास में अव्वल आती थी.

पढ़ाईलिखाई के साथसाथ रेशमा के सपने भी बड़े ऊंचे थे. वह किसी भी कीमत पर अमीर होना चाहती थी, क्योंकि उस के स्कूल में ज्यादातर अमीर मांबाप के बच्चे पढ़ते थे, जिन्हें देख कर रेशमा के मन में भी अमीर बनने का सपना जन्म लेने लगा. वह रातदिन सोचती रहती कि आखिर पैसा कैसे कमाया जाए.

एक दिन रेशमा जब बाथरूम से नहा कर बाहर निकली और उस की नजर अपने उठे हुए उभारों पर पड़ी, तो उसे अपनेआप पर हंसी आ गई. वह यह सोचने लगी कि अमीरजादों को फंसाने वाली उस की ये ऊंची छातियां आखिर कब काम आएंगी. यही तो वह चीज है, जिस के हमेशा से सब दीवाने हैं.

रेशमा के दिमाग में फौरन एक प्लान ने जन्म लिया. उस ने टाइट टीशर्ट पहनी और स्कूल गई. स्कूल छूटने के बाद उस ने कुछ अमीर लड़को के सामने ऐसी अंगड़ाई भरी कि वे उस की तरफ देखने को मजबूर हो गए.

उन अमीर लड़कों में रिजवान भी शामिल था, जो एक बिल्डर का बेटा था.

रेशमा थी भी कमाल की. अच्छी कदकाठी और खूबसूरत गदराए बदन की मलिका होने के साथसाथ सुर्ख गाल, गुलाबी होंठ और ऊंची उठी हुई छातियां किसी को भी अपना दीवाना बनाने के लिए काफी थीं.

जब रिजवान से रहा न गया तो वह छूटते ही बोला, ‘‘क्या बात… आप तो आज कयामत ढा रही हो.’’

रेशमा ने रिजवान की इस बात का हंस कर जवाब दिया, ‘‘आप को कोई एतराज…’’

रिजवान बोला, ‘‘हमें क्या एतराज… हम तो आप के साथ एक कौफी पीने के तलबगार हैं. अगर आप की इजाजत हो तो चलें?’’

रेशमा ने कहा, ‘‘सोच लो… मेरे साथ कौफी पीने में कहीं आप की शान कम न हो जाए.’’

‘‘हमारी शान कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ जाएगी,’’ रिजवान ने रेशमा की तारीफ करते हुए कहा.

‘‘ठीक है, तो चलो फिर कहीं चलते हैं,’’ रेशमा ने कार में बैठते हुए कहा.

रिजवान रेशमा को एक महंगे कैफे में ले गया, जहां दोनों ने प्यारभरी बातें कीं और कौफी पी कर वापस आ गए. बातों ही बातों में दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर भी ले लिया.

अब वे दोनों मोबाइल पर एकदूसरे से खूब देर तक बातें करते, मिलने का वादा करते, शौपिंग करते और होटलों में खातेपीते.

रेशमा अपने हुस्न की अदाओं के बल पर रिजवान को लूट रही थी, उसे क्या मालूम था कि एक दिन वह उस के प्यार में खुद पागल हो जाएगी.

2 दिन बाद रेशमा का बर्थडे था. वह रिजवान से पूछ रही थी, ‘‘तुम मेरे बर्थडे पर क्या गिफ्ट देने वाले हो?’’

रिजवान बोला, ‘‘तुम्हें जो चाहिए मैं वह गिफ्ट दूंगा, लेकिन तुम्हें मेरी एक बात माननी पड़ेगी.’’

रेशमा बोली, ‘‘मैं तो तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूं, बोलो तो सही.’’

‘‘मैं तुम्हारा बर्थडे तुम्हारे साथ अकेले किसी तनहा जगह पर मनाना चाहता हूं,’’ रिजवान ने मन की बात कही.

‘‘तो इस में इतना घबराने की क्या बात है. आप मु झे जहां ले चलोगे, मैं तैयार रहूंगी,’’ रेशमा ने अंगड़ाई लेते हुए कहा.

रेशमा के बर्थडे पर रिजवान ने एक आलीशान होटल में कमरा बुक किया और उसे अच्छी तरह सजवा दिया. इस के बाद रिजवान ने रेशमा को फोन किया और उसे बताए हुए पते पर आने को कहा.

कुछ ही देर में रेशमा वहां आ गई. रिजवान ने उसे अपनी गाड़ी में बैठाया और कुछ ही देर में वे दोनों उस होटल के कमरे में पहुंच गए, जो रिजवान ने पहले ही बुक किया हुआ था.

रेशमा जब उस कमरे में पहुंची तो वहां की सजावट देख कर वह दंग रह गई. रिजवान ने एक खूबसूरत और कीमती केक का इंतजाम पहले ही कर रखा था, जिसे देख कर रेशमा खुशी के मारे पागल हो गई.

तभी रेशमा बोली, ‘‘चलो, केक काटते हैं, मु झे घर भी जाना है.’’

‘‘केक काटने से पहले तुम्हें मेरी एक हसरत पूरी करनी पड़ेगी,’’ रिजवान ने कहा.

‘‘कैसी हसरत, मैं सम झी नहीं? और हां, मेरा गिफ्ट कहां है?’’ रेशमा ने पूछा.

रिजवान ने एक महंगा मोबाइल रेशमा को दिखाते हुए कहा, ‘‘यह है गिफ्ट, लेकिन केक काटने के बाद ही तुम्हें मिलेगा.’’

रेशमा बोली, ‘‘तो ठीक है, मैं जल्दी से केक काट देती हूं.’’

‘‘लेकिन केक काटने से पहले तुम्हें मेरी हसरत पूरी करनी पड़ेगी,’’ रिजवान ने दोबारा कहा.

‘‘अच्छा, बताओ कि तुम क्या चाहते हो?’’ रेशमा ने पूछा.

रिजवान ने एक गिफ्ट रेशमा की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘पहले तुम इसे पहन कर दिखाओ.’’

रेशमा बोली, ‘‘अरे, इस में ऐसा क्या है, जो तुम इतने उतावले हो रहे हो?’’

रेशमा ने जैसे ही वह गिफ्ट खोला, तो उस में एक गुलाबी रंग की खूबसूरत नाइटी देख कर वह खुशी से झूम उठी और बोली, ‘‘इसे देते हुए तुम इतना घबरा क्यों रहे थे… मैं अभी इसे पहन कर आती हूं.’’

रिजवान बोला, ‘‘तुम्हें यह मेरे सामने ही पहननी पड़ेगी.’’

‘‘अरे बाबा नहीं, मु झे शर्म आती है. भला मैं अभी तुम्हारे सामने अपने कपड़े कैसे उतार सकती हूं,’’ रेशमा बोली.

रिजवान ने रूठते हुए कहा, ‘‘बस, यही प्यार है तुम्हारा… तुम मेरे सामने इसे नहीं पहन सकती…’’

रेशमा बोली, ‘‘ठीक है, नाराज मत होना. बस, तुम लाइट बंद कर दो.’’

रिजवान ने फौरन लाइट बंद कर दी.

लाइट बंद होते ही रेशमा ने अपने कपड़े उतारे. जैसे ही उस के बदन से कपड़े हटे, उस का गोरा
बदन उस अंधेरे में रोशनी की तरह चमक उठा.

रिजवान रेशमा के गोरे बदन की झलक देख कर रोमांटिक हो उठा. तभी रेशमा बोली, ‘‘लाइट जला दो, पर नाइट बल्ब.’’

लाल रंग की धीमी लाइट में भी रेशमा का गदराया बदन कयामत ढा रहा था.

उस की ऊंची उठी छातियां नाइटी से बाहर निकलने के लिए बेताब हो रही थीं.

तभी रेशमा बोली, ‘‘जल्दी से केक काटते हैं, वरना देर हो जाएगी.’’ रिजवान बोला, ‘‘ठीक है.’’

रेशमा ने केक काटा. रिजवान ने उसे बर्थडे विश किया और अपने हाथ से केक खिलाने लगा.

रेशमा ने जैसे ही रिजवान को अपने हाथ से केक खिलाया, उस ने उस की नाजुक उंगलियां प्यार से चूम लीं.

रेशमा शरमाते हुए बोली, ‘‘यह क्या कर रहे हो.’’

रिजवान ने रेशमा को अपनी बांहों में भरते हुए कहा, ‘‘मैं कितना खुशनसीब हूं, जो तुम्हारे इस गदराए बदन को छू पा रहा हूं.’’

रेशमा रिजवान की कैद से आजाद होने की झूठी कोशिश करते हुए बोली, ‘‘बस करो, मु झे छोड़ो.’’

पर रिजवान ने फौरन अपने होंठ रेशमा की गरदन पर रख दिए और चूमने लगा.

रेशमा कसमसाने लगी. तभी रिजवान उस की उठी हुई छातियों को बेतहाशा चूमने लगा.

कुछ ही देर में रेशमा पूरी तरह कामुक हो उठी और रिजवान को अपने ऊपर खींचने लगी.

रिजवान सम झ गया कि लोहा गरम है, बस अब चोट करने की जरूरत है. वह उसे बिस्तर पर ले गया और फिर दोनों की गरम सांसें और कामुक आवाजें कमरे में गूंजने लगीं. फिर वे निढाल हो कर बिस्तर पर ही पड़े रहे.

कुछ देर बाद वे दोनों उठे और अपनेअपने कपड़े पहन कर घर की ओर चल दिए.

रेशमा जैसे ही घर पहुंची, उस के अब्बा ने पूछा, ‘‘कहां थी इतनी रात तक?’’

रेशमा बोली, ‘‘अब्बा, 2 दिन बाद इम्तिहान हैं. उसी की तैयारी के लिए अपनी एक दोस्त के घर पढ़ाई कर
रही थी.’’

इधर रेशमा के अब्बा ने सब सच मान लिया, उधर रिजवान और रेशमा के बीच एक बार जिस्मानी रिश्ते बने तो फिर बनते ही चले गए. उन दोनों को जब भी मौका मिलता, तब वे अपनी जिस्मानी ख्वाहिश किसी होटल में जा कर पूरी कर लेते.

एक दिन रेशमा को पता चला कि उस की कोख में रिजवान का बच्चा पल रहा है. फिर क्या था, रेशमा ने रिजवान से शादी करने की जिद शुरू कर दी.

रिजवान एक अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद था, भला वह रेशमा से शादी कैसे कर सकता था. वह तो बस उस के बदन के मजे लूटने के इरादे से उस पर पैसा खर्च कर रहा था और प्यार का नाटक कर के उसे अपने जाल में फंसाए रखना चाहता था.

वैसे तो रेशमा भी पहले अपने खूबसूरत जिस्म और ऊंची उठी छातियों से रिजवान से पैसा लूटना चाहती थी, पर जब वे दोनों मिलने लगे, तो रेशमा रिजवान से प्यार भी करने लगी.

कई महीनों तक रेशमा के जिस्म के मजे लूटने के बाद अब रिजवान का मन उस से ऊब गया था और उस ने उस से मिलनाजुलना भी कम कर दिया था. रेशमा के पेट से होने की खबर सुन कर वह हमेशा के लिए उस से छुटकारा पा लेना चाहता था.

इस के लिए रिजवान ने एक ऐसा प्लान बना डाला, जिस ने रेशमा की जिंदगी तबाह कर दी.

हुआ यों था कि एक रात रिजवान ने रेशमा से बहुत प्यारीप्यारी बातें कीं और उसे कुर्ला में कोहिनूर बिल्डिंग के सामने बन रही नई बिल्डिंग में मिलने के लिए बुलाया.

उस नई बनने वाली बिल्डिंग की छत पर रिजवान ने रेशमा को देखते ही अपने गले से लगाया और उसके होंठों को चूमते हुए एकएक कर के उस के कपड़े उतारने लगा.

जब रेशमा बिना कपड़ों के हो गई, तो वहां पहले से ही मौजूद रिजवान के 2 दोस्त उस्मान और फरमान भी अचानक रेशमा के सामने आ गए.

रेशमा उन्हें देखते हुए अपने बदन को छिपाने की कोशिश करने लगी.

लेकिन तभी फरमान बोला, ‘‘क्या बात भाभी, रिजवान को ही मजे देती रहोगी या फिर कुछ मजा अपने इन देवरों के लिए भी बचा कर रखोगी.’’

रेशमा घबराते हुए बोली, ‘‘क्या बकवास कर रहे हो… तुम्हे शर्म नहीं आती…’’

‘‘भाभी, आप को कौन सी शर्म आती है… देर रात इस सुनसान बिल्डिंग की छत पर आप बेशर्मी का ही काम कर रही हो न. कुछ मजे हमें भी लूटने दो,’’ कहते हुए उन दोनों ने रेशमा को अपनी बांहों में भर लिया.

रिजवान चुपचाप खड़ा यह तमाशा देख रहा था, तो रेशमा उस से बोली, ‘‘मु झे अपने इन बेशर्म दोस्तों
से बचाओ.’’

लेकिन रिजवान ने कहा, ‘‘रेशमा डार्लिंग, कुछ मजे इन्हें भी लेने दो. ये बेचारे भी तुम्हारे इस मखमली जिस्म के दीवाने हैं.’’

रेशमा चिल्लाई, ‘‘तुम्हें शर्म नहीं आती… मैं तुम्हारी होने वाली बीवी हूं और मेरे पेट में तुम्हारा होने वाला बच्चा पल रहा है.’’

रिजवान ने कहा, ‘‘यह सब तुम्हारी उसी धमकी का तो नतीजा है कि आज मेरे दोस्त तुम्हारे इस खूबसूरत बदन को नोंचने वाले हैं.’’

कुछ ही देर में उस्मान और फरमान रेशमा पर टूट पड़े. वह चीखतीचिल्लाती रही, पर उस सुनसान बिल्डिंग में उस की चीखें सुनने वाला कोई मौजूद न था.

उन दोनों ने रेशमा के गदराए बदन को भूखे कुत्ते की तरह नोंचना शुरू कर दिया और उस का रेप करने के बाद मार डाला. फिर उस के मोबाइल से सिमकार्ड निकाल कर अपनेअपने रास्ते चले गए.

उधर रेशमा जब देर रात बाद भी घर न पहुंची, तो उस के अब्बा को उस की चिंता सताने लगी. सुबह होते ही उन्होंने गोवंडी पुलिस स्टेशन में रेशमा की गुमशुदगी की जानकारी दी.

पुलिस ने कई जगह नाकाबंदी कर के रेशमा की तलाश जारी रखी, पर कोई सुराग हाथ नहीं लगा.

रेशमा के अब्बा का रोरो कर बुरा हाल हो गया.

कुछ दिन बाद पुलिस को खबर लगी कि कोहिनूर सिटी में नई बन रही एक बिल्डिंग में एक लड़की की लाश मिली है. लाश की हालत इस तरह खराब हो चुकी थी कि किसी के लिए उसे पहचानना आसान नहीं था.

पुलिस ने लाश को अपने कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम की लिए भेज दिया और कातिल का सुराग ढूंढ़ने में वहां का अच्छी तरह मुआयना करने लगी. काफी मशक्कत के बाद वहां एक टूटा हुआ सिमकार्ड मिल गया.

उस सिमकार्ड से पुलिस को यह पता चल गया कि यह सिमकार्ड रेशमा नाम की एक लड़की का है, जो गोवंडी में रहती है. यह भी पता चल गया कि 8 दिन पहले रेशमा नाम की एक लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई गई थी.

पुलिस को अब यह सम झते देर न लगी कि यह लाश रेशमा की है. पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी और सिमकार्ड से पता चल गया कि आखिरी फोन रिजवान को किया गया था.

पुलिस सम झ गई कि अब इस जांच को आगे बढ़ाने में रिजवान ही काम आएगा.

तब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई, जिस से यह पता चल गया कि हत्या से पहले रेशमा के साथ कई लोगों ने रेप किया था और बाद में गला घोंट कर उस की हत्या कर दी गई.

पुलिस को हैरानी तब हुई जब उसे यह पता चला कि रेशमा के पेट में 3 महीना का बच्चा भी पल रहा था.

यह बात पुलिस को हजम नहीं हो रही थी कि रेशमा के साथ रेप कर के उसे मार दिया गया तो वह 3 महीने के पेट से कैसे हो गई, जबकि अभी तक उस की शादी भी नहीं हुई थी.

अब पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाते हुए रिजवान के फोन की डिटेल निकाली और जब रेशमा की हत्या हुई उस समय की उस की लोकेशन का पता किया. पुलिस को रिजवान की लोकेशन उसी बिल्डिंग की मिली, जहां रेशमा की हत्या की गई थी. यह भी पता चल गया कि रेशमा अकसर रिजवान से फोन पर बात करती रहती थी.

पुलिस को अब यह सम झते देर न लगी कि रेशमा के पेट में रिजवान का ही बच्चा था और उस की हत्या को भी इसी ने अंजाम दिया है.

अब पुलिस को यह पता लगाना था कि वे और कौन लोग थे, जिन्होंने इस हत्या को रिजवान के साथ मिल
कर अंजाम दिया और उस के साथ रेप किया.

पुलिस ने रिजवान को अपनी हिरासत में ले लिया और उस से सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी, तो पहले यह पता चल गया कि इस हत्या में उस्मान और फरमान उस के भागीदार थे, जिन्होंने रेशमा की हत्या करने से पहले उस के साथ रेप किया था.

पुलिस की एक टीम ने कुर्ला के भारतीय नगर इलाके से उस्मान को गिरफ्तार कर लिया, पर फरमान अभी तक उन की गिरफ्त में नहीं आ पाया.

पुलिस ने जब रिजवान से हत्या की सख्ती से पूछताछ की तो रिजवान ने जो कहानी उन्हें सुनाई, उस ने सब के रोंगटे खड़े कर दिए.

रिजवान ने पुलिस को बताया कि रेशमा ने अपने हुस्न की वजह से जल्द अमीर बनने का जो सपना देख कर उसे अपने प्यार के जाल में फंसाया था, वह खुद उसी जाल में फंस गई.

रिजवान ने अपने पैसे के बलबूते पर रेशमा को महंगेमहंगे गिफ्ट दे कर उस से नाजायज रिश्ता बना लिया और उस के जिस्म के मजे लेने लगा. धीरेधीरे रेशमा उस से हकीकत में प्यार कर बैठी और अपने शरीर को रिजवान के हवाले करने लगी.

इसी बीच वह पेट से हो गई और शादी की धमकी देने लगी.

रिजवान केवल रेशमा के जिस्म को भोगना चाहता था, पर जब उस ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया, तो मजबूर हो कर रिजवान को अपने दोस्तों की साथ मिल कर उस की हत्या की साजिश रचनी पड़ी.

इस तरह यह एक ऐसा अनोखा कत्ल हुआ, जिस ने रेशमा की जान ले ली.

फरमान अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर था.

रेशमा के अब्बा का रोरो कर बुरा हाल था. उन्हें क्या मालूम था कि उन की एकलौती बेटी की इस तरह हत्या की जाएगी.

रिजवान और उस्मान पर हत्या और रेप जैसे अपराध का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया और फरमान की तलाश जारी थी. Crime Story In Hindi

Family Story In Hindi: बदला जमाना

Family Story In Hindi: गांव में एक पेड़ के नीचे बैठे हरिया, गोपाल, सोमनाथ और बदरी ताश खेल रहे थे. उन के बीच दारू की खाली बोतल लुढ़की पड़ी थी.

बदरी पत्ता फेंकते हुए बोला, ‘‘हरिया, इस बार तो मैं बाजी जीतूंगा.’’

इस से पहले कि हरिया कुछ बोलता, गोपाल ने कहा, ‘‘उस्ताद, वह देख तेरी मंगेतर, सामने सिर पर पानी का घड़ा उठाए…’’

नशे की हालत में सब की नजरें उधर उठीं. रमिया सिर पर पानी का घड़ा उठाए बढ़ी चली आ रही थी.

हरिया का जवान जिस्म एक मीठी आग से जलने लगा था. अपने सूखे होंठों पर जीभ फिराते हुए वह रमिया के सांचे में ढले जिस्म को इस तरह देख रहा था, जैसे कोई बच्चा मिठाई को देखता है.

हरिया ने अचानक एक पत्थर का टुकड़ा उठाया. फिर… ‘धड़ाक’ की आवाज के साथ रमिया के सिर पर रखा घड़ा फूट गया और उस के कपड़े गीले हो गए.

गुस्से से बेकाबू होते हुए रमिया हरिया और उस के दोस्तों के पास पहुंची, जो उस की हालत पर ठहाके लगा रहे थे.

अचानक रमिया का दायां हाथ घूमा और ‘चटाक’ की आवाज के साथ हरिया का बायां गाल झनझना गया.

‘‘तेरी यह हिम्मत. तू… तू… मुझ पर हाथ उठाती है, अपने होने वाले पति पर… तू…’’ कहते हुए हरिया ने रमिया की बांह मरोड़ दी.

रमिया दर्द के मारे कराह उठी. आंखों में आंसू छलछला आए. अपनी बांह छुड़ाने की कोशिश में वह नाकाम रही. उस की मजबूरी पर हंसते हुए हरिया बोला, ‘‘हाथ थामा है तेरा… इतनी आसानी से यह नहीं छूटने वाला.’’

‘‘मैं तुझे अपना पति बनाऊंगी? कभी आईने में अपनी शक्ल देखी है तू ने. तुझ जैसे शराबी, जुआरी से शादी करने की बजाय मैं मरना पसंद करूंगी,’’ रमिया गुस्से से बोली.

‘‘शादी तो तेरी मुझ से ही होगी. लड़कपन में ही तेरी शादी मुझ से करा दी गई थी. बस, अब तो बरात ले कर आने की बात है. तू मेरी होगी. तेरी यह जवानी मेरी बांहों में…’’ नशे में बड़बड़ा उठा हरिया.

‘‘तुझ से शादी कर के मैं अपनी जिंदगी खराब नहीं करूंगी. मेरी जूती भी तुझ से शादी नहीं करेगी.’’

बेइज्जती की आग में हरिया झुलस उठा था. अपने साथियों के बीच उस की मंगेतर कोरा जवाब दे, इस बात ने उस के गुस्से को और भड़का दिया था, ‘‘देख लेना रमिया, तेरी शादी तो मुझ से ही होगी. आज ही बापू को तेरे घर भेजता हूं. देखता हूं, कब तक बचेगी मुझ से. तेरे सारे कसबल न निकाले तो मेरा नाम हरिया नहीं… समझी?’’

‘‘हुं…’’ रमिया पैर पटकते हुए वहां से चली गई.

रमिया बनवारी लाल की एकलौती बेटी थी. पिता ने रमिया का रिश्ता बचपन में ही अपने दोस्त किशन लाल के बेटे हरिया से कर दिया था. बनवारी ने रमिया को हायर सैकेंडरी पास करवा दी थी.

उधर हरिया पढ़लिख न सका था. बुरे दोस्तों की सोहबत और बाप के लाड़दुलार ने उसे जिद्दी, आवारा व शराबी, जुआरी बना दिया था. गांव की बहूबेटियों को छेड़ना उस के लिए मामूली सी बात थी, गांव वाले कभीकभार किशन लाल को टोकते, शिकायतें करते तो वह कहता, ‘‘जवानी का जोश है न बस, शादी हो जाएगी तो वह खुद ही सुधर जाएगा.’’

पर क्या कुत्ते की दुम कभी सीधी हुई है? सभी सोचते, हरिया नहीं सुधर सकता. पर कहने की हिम्मत किसी में नहीं थी. सभी हरिया और उस की चांडाल चौकड़ी से डरते थे. वे सोचते कि इस से जो ब्याह करेगी, उस की तो जिंदगी ही बरबाद हो जाएगी.

इस बात को बनवारी भी जानता था, पर अपने पैरों पर वह खुद ही कुल्हाड़ी मार चुका था. वह रमिया का बाल विवाह कर चुका था, वह भी अपने दोस्त के बेटे से. चाह कर भी वह इस रिश्ते को तोड़ नहीं सकता था.

शाम का वक्त था. किशन लाल बनवारी के पास आया. बनवारी चेहरे पर खुशामदी मुसकान लिए बोला, ‘‘कैसे आना हुआ किशन लाल?’’

‘‘बताता हूं… बताता हूं… पहले लस्सी तो पिला.’’

बनवारी समझ गया कि आज कुछ खास बात है. उस ने रमिया को लस्सी और मिठाई लाने को कहा.

‘‘यार, तुम्हारे लिए खुशखबरी है. अब तुम्हारी सारी चिंता दूर हो जाएगी,’’ पहेली सी बुझाते हुए किशन लाल के चेहरे पर एक खास चमक थी.

‘‘कैसी चिंता? मैं समझा नहीं… जरा खुल कर बताओ कि क्या बात है?’’ बनवारी जल्दीजल्दी बोला, जबकि वह समझ गया था कि किशन लाल क्या कहना चाहता है.

‘‘अरे, बुद्धू है यार तू भी… हरिया शादी के लिए मान गया है. मैं तारीख ले कर आया हूं. बेटी की जिम्मेदारियों से अब तू बेफिक्र हो जाएगा.’’

बनवारी का चेहरा बुझ गया. हरिया की हरकतों से वह अनजान नहीं था. क्या कहे, समझ ही नहीं पा रहा था. उस के बुझे चेहरे को देख कर किशन लाल बोला, ‘‘क्या बात है, तुम्हें खुशी नहीं हुई?’’

‘‘नहींनहीं, ऐसी बात नहीं है,’’ बनवारी लाल धीरे से बोला, ‘‘सोच रहा था कि रमिया इस रिश्ते के लिए…’’

किशन लाल के माथे पर बल पड़ गए, ‘‘रमिया की आड़ में कहीं तुम अपनी राय तो नहीं बता रहे?’’

बनवारी लाल किशन लाल की नाराजगी को भांप गया था. वह संभलते हुए बोला, ‘‘नहींनहीं, तुम मुझे गलत समझ रहे हो. मैं…’’ इस से आगे वह कुछ बोलता कि रमिया एक हाथ में लस्सी का बड़ा गिलास और एक हाथ में मिठाई की प्लेट ले कर आ गई.

‘‘नमस्ते चाचाजी,’’ रमिया ने कहा.

‘‘जीती रहो बेटी, कैसी हो?’’ आवाज को मुलायम रखते हुए किशन लाल बोला.

‘‘ठीक हूं चाचाजी.’’

‘‘लो बनवारी, बिटिया भी यहीं है… अब इसी से पूछ लेते हैं कि…?’’

बनवारी लाल अचानक घबरा गया और बोला, ‘‘क्या बेटी से यह सब पूछना अच्छा लगेगा?’’

‘‘क्यों, तुम्हीं तो कह रहे थे कि पता नहीं रमिया को यह रिश्ता पसंद है या नहीं?’’ किशन लाल ने चालाकी से बनवारी लाल की बात कह दी थी.

रमिया पलभर में ही सबकुछ समझ गई. वह अपने पिता के झुके चेहरे को देखती रह गई. फिर सोचते हुए बोली, ‘‘चाचाजी, मैं जानती हूं कि मुझे बड़ों के बीच नहीं बोलना चाहिए… पर जहां मेरी जिंदगी का फैसला होने जा रहा हो, तो मेरी राय को भी जानना चाहिए.’’

किशन लाल बोला, ‘‘तुम कहना क्या चाहती हो?’’

‘‘चाचाजी, शादी गुड्डेगुडि़यों का खेल नहीं हैं और बाल विवाह तो एकदम बेवकूफी है, ढकोसला है. आप मेरी शादी अपने बेटे से करना चाहते हैं, बाल विवाह की आड़ ले कर. मैं उस शराबी, जुआरी से शादी करने की बजाय मर जाना या कुंआरी रहना ज्यादा पसंद करूंगी.’’

‘‘अरे, तू चार जमात क्या पढ़ गई, खुद को अफलातून समझने लगी है. मानता हूं कि मेरा बेटा शराबी है, जुआरी है, पर बेटी, शादी के बाद वह सुधर भी तो सकता है.’’

‘‘और अगर वह न सुधरा तो?’’ रमिया उलट कर बोली.

‘‘तो… तो…?’’ किशन लाल को कुछ न सूझा. वह बगलें झांकने लगा.

‘‘तो आप के बेटे के साथसाथ मेरी जिंदगी भी खराब हो जाएगी,’’ रमिया बोली.

‘‘पर तुम्हारा बाल विवाह हुआ है, तुम अपने बाप के घर मेरे बेटे की अमानत हो,’’ किशन लाल ने आखिरी तीर चलाया.

‘‘बाल विवाह… हुं… एक घिसापिटा रिवाज. मैं ऐसे रिवाजों को नहीं मानती,’’ रमिया गुस्से से बोली.

‘‘देख बनवारी, अपनी बेटी को समझा, वरना बहुत बुरा होगा,’’ किशन लाल ने नीचता पर उतरते हुए धमकी दे डाली.

‘‘किशन लाल, हम वादे को निभाने के लिए पुराने रीतिरिवाजों की खातिर रमिया की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं करेंगे,’’ बनवारी लाल बोला.

‘‘बनवारी,’’ किशन लाल चीख उठा, ‘‘देख लूंगा तुम दोनों को. अगर बिरादरी से मैं ने तुम्हारा हुक्कापानी बंद न करवा दिया, तो मेरा नाम किशन लाल नहीं. देख लेना, कल पंचायत बुलाऊंगा मैं. तुम ने मेरी दोस्ती देखी है, अब दुश्मनी देखना,’’ किसी भी तरह अपनी दाल न गलते देख किशन लाल नीचता पर उतर आया था.

फिर वही हुआ, जिस का बनवारी लाल को डर था. किशन लाल ने पंचायत बुलाई.

पंचायत ने अपना फैसला किशन लाल के हक में देते हुए कहा, ‘‘बनवारी लाल को अपनी बेटी रमिया की शादी हरिया से करनी होगी. अगर वह ऐसा नहीं करता तो उस का गांव में हुक्कापानी बंद. उसे अपना फैसला 24 घंटों में पंचायत को सुनाना होगा.’’

पंचायत उठ गई थी. पर बनवारी लाल का दिल बैठ गया. ठगा सा सोचता रह गया कि क्या करे और क्या न करे?

रमिया जानती थी, पंचायत का फैसला. लेकिन अभी पंचायत को उस के फैसले का पता नहीं था. पूरा गांव नींद की आगोश में डूबा था. बाहर घना अंधेरा फैला था. ऐसे में रमिया एक छोटी सी अटैची उठाए गांव से हमेशाहमेशा के लिए दूर जा रही थी. वह अपने पिता को घुटघुट कर मरते नहीं देख सकती थी. वह यह भी जानती थी कि उस के पिता कभी यह गांव नहीं?छोड़ेंगे, इसलिए उस ने गांव छोड़ कर खुद शहर जाने का फैसला कर लिया था.

जैसतैसे रमिया स्टेशन पहुंच गई. पर कहां जाए? कुछ सूझा नहीं. जैसे ही गाड़ी आई, वह सामने वाले डब्बे में चढ़ गई. वह पहले दर्जे का डब्बा था.

एक केबिन में घुस कर रमिया एक खाली सीट पर बैठ गई. अटैची उस ने एक तरफ रखी. खुली खिड़की से बाहर फैले अंधेरे को देखने लगी. गाड़ी चल पड़ी थी. गांव पीछे छूटता जा रहा था और वह अनजानी मंजिल की ओर चल पड़ी थी. पिता के बारे में सोच कर उस की आंखों में आंसू छलक आए थे.

रमिया को याद आया कि जब मां मरी थी तो पिताजी बहुत रोए थे. नन्ही रमिया को सीने से लगाए वह अकसर मां की बातें करते थे. बेटी की खातिर ही उन्होंने दूसरी शादी नहीं की थी. आज उन्हीं पिता को वह गांव में छोड़ आई थी, अकेला और बेसहारा.

सरला देवी उसी डब्बे में सफर कर रहीं थीं. जब से रमिया गाड़ी में चढ़ी थी, वह एकटक उस की हरकतें देख रही थीं. उन की आंखों से यह छिपा नहीं था कि लड़की घर से भागी है. काफी देर सोचने के बाद उन्होंने रमिया से पूछा, ‘‘क्या बात है बेटी, तुम रो क्यों रही हो?’’

भीगी पलकें ऊपर उठीं थीं. रमिया ने सरला देवी को पहली बार देखा. चेहरे पर तेज व चमक लिए एक अधेड़ औरत उस से अपनेपन से पूछ रही थी, ‘‘घर से भागी हो क्या?’’

रमिया चुप रही. सिर झुकाए, कुछ सोचती रही.

‘‘देखो बेटी, मुझे गलत मत समझना. मेरा नाम सरला है. ‘नारी मुक्ति संगठन,’ दिल्ली की मुखिया हूं. अगर तुम्हें कोई परेशानी है तो मुझे बताओ. कहीं तुम हीरोइन बनने के चक्कर में…?’’

‘‘नहींनहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं तो… मैं…’’ और फिर अंदर की दुखभरी कहानी आंसुओं के संग बहती चली गई. अपनी हर बात उस ने बताई.

‘‘तुम ने ठीक किया बेटी, औरत को अपनी मरजी से फैसले लेने का हक मिलना ही चाहिए. मैं तुम्हारी मदद करूंगी. क्या तुम बालिग हो?’’ सरला देवी ने पूछा.

‘‘जी हां, मैं 19वें साल में हूं.’’

‘‘देखो बेटी, तुम्हारी अभी कोई मंजिल नहीं है. तुम हायर सैकेंडरी पास हो… तुम मेरे पास रह कर कंप्यूटर वगैरह सीख सकती हो. नर्स का कोर्स भी कर सकती हो… आगे अपनी पढ़ाई भी जारी रख सकती हो.’’

सरला देवी के शब्दों ने रमिया को राहत पहुंचाई. उसे लगा कि घर से भाग कर उस ने कोई गलती नहीं की.
सरला देवी की छत्रछाया में 5 साल पंख लगा कर कब उड़ गए, पता ही नहीं चला. इस दौरान रमिया, ‘रमा’ बन चुकी थी. उस ने बीए पास कर लिया था और नर्स का कोर्स भी कर लिया था.

इस दौरान वह अपने पिता को खो चुकी थी. बनवारी लाल ने खुदकुशी कर ली थी. यह सुन कर वह बेहद दुखी हुई थी. पर समय ने उस के इन घावों पर मरहम लगा दिया था.

अब रमा सरकारी अस्पताल में नर्स का काम करती थी. उस के साथ डाक्टर थे, प्रभाकर, बेहद सुलझे हुए, सुंदर और लायक आदमी. वह रमा को चाहने लगे थे. पर अपने प्यार की बात वह होंठों तक न ला पाए थे. इस बात को रमा भी जानती थी.

एक दिन प्रभाकर ने अपनी दिल की बात रमा को कह देने का फैसला कर लिया था. वह बोले, ‘‘रमा, शाम को क्या कर रही हो?’’

‘‘कुछ खास नहीं.’’

‘‘ठीक है, आज घूमने चलेंगे.’’

‘‘ठीक है,’’ रमा ने हौले से कहा.

शाम को डाक्टर प्रभाकर अपनी कार में रमा के साथ घूमने निकल पड़े. एक बाग में वे काफी देर तक चहलकदमी करते रहे कि अचानक प्रभाकर बोले, ‘‘रमा, मैं तुम से शादी करना चाहता हूं.’’

रमा एकदम चौंक उठी, ‘‘डाक्टर साहब, आप… आप क्या कह रहे हैं? कहां आप और कहां मैं… एक मामूली सी नर्स.’’

‘‘मैं किसी नर्स से नहीं, तुम से शादी की बात कर रहा हूं,’’ मुसकरा कर प्रभाकर बोले.

‘‘लेकिन… आप मेरे बारे में कुछ भी नहीं जानते. मैं कौन हूं… किस जात की हूं?’’

‘‘मैं तुम्हारे बारे में कुछ नहीं जानना चाहता. तुम एक सुंदर और सुशील लड़की हो. मेरे लिए इतना ही बहुत है. हां, यह बात और है कि शायद तुम मुझे पसंद न करती हो?’’

‘‘नहीं डाक्टर साहब, आप से जो भी लड़की शादी करेगी, उस की जिंदगी तो खुशहाल हो जाएगी.’’

‘‘तो वह लड़की तुम क्यों नहीं बन जाती?’’ प्रभाकर बोले.

‘‘एक शर्त पर… आप को मेरे बारे में जानना होगा?’’ रमा ने कहा.

‘‘ठीक है आओ, होटल में चलते हैं. तुम जो बताना चाहो, वहां बता देना. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा,’’ प्रभाकर हंस कर बोले, मानो उन्हें मंजिल मिल गई हो.

होटल में रमा ने अपनी जिंदगी की किताब प्रभाकर के सामने खोल कर रख दी.

प्रभाकर चुपचाप सुनते रहे, फिर वे बोले, ‘‘बस, तुम ने बहुत अच्छा किया. लड़कपन में की गई शादी तो एक बेहूदा रिवाज है. तुम ने जो कदम उठाया, मैं उस की कद्र करता हूं.

‘‘आज जमाना बदल चुका है. पता नहीं लोग अब भी क्यों उन्हीं घिसेपिटे, मरे, सड़े सांपों को रीतिरिवाजों का नाम दे कर गले से लिपटाए हैं… तुम ने बहुत अच्छा किया रमा. अपने लिए खुद रास्ता तलाश किया.

अब तो दुनिया की कोई ताकत मुझे तुम से शादी करने से नहीं रोक सकती, क्योंकि अब तो तुम ही मेरी दुनिया हो, मेरी जिंदगी हो.’’

जब वे होटल से बाहर निकल रहे थे, तो दोनों के हाथ एकदूसरे के हाथों में थे. Family Story In Hindi

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