Father’s Day Special – बेटी के लिए : पिता की इच्छा का संसार

शिवचरण अग्रवाल बाजार से लौटते ही कुरसी पर पसर गए. मलीन चेहरा, शिथिल शरीर देख पत्नी माया ने घबरा कर माथा छुआ, ‘‘क्या हुआ… क्या तबीयत खराब लग रही है. भलेचंगे बाजार गए थे…अचानक से यों…’’

कुछ देर मौन रख वह बोले, ‘‘लौटते हुए अजय की दुकान पर उस का हालचाल पूछने चला गया था. वहां उस ने जो बताया उसे सुन कर मन खट्टा हो गया.’’

‘‘ऐसा क्या बता दिया अजय ने जो आप की यह हालत हो गई?’’ माया ने पंखा झलते हुए पूछा.

‘‘वह बता रहा था कि कुछ दिन पहले उस की दुकान पर समधीजी का एक रिश्तेदार आया था…उसे यह पता नहीं था कि अजय मेरा भांजा है. बातोंबातों में मेरा जिक्र आ गया तो वह कहने लगा, ‘अरे, उन्हें तो मैं जानता हूं…बड़े चालाक और घटिया किस्म के इनसान हैं… दरअसल, मेरे एक दूर के जीजाजी के घर उन की लड़की ब्याही है…जीजाजी बता रहे थे कि शादी में जो तय हुआ था उसे तो दबा ही लिया, साथ ही बाद में लड़की के गहनेकपडे़ भी दाब लेने की पूरी कोशिश की…क्या जमाना आ गया है लड़की वाले भी चालू हो गए…’ रिश्तेदारी का मामला था सो अजय कुछ नहीं बोला मगर वह बेहद दुखी था…उसे तो पता ही है कि मैं ने मीनू की शादी में कैसे दिल खोल कर खर्च किया है, जो कुछ तय था उस से बढ़चढ़ कर ही दिया, फिर भी मीनू के ससुर मेरे बारे में ऐसी बातें उड़ाते फिरते हैं… लानत है….’’

तभी उन की छोटी बेटी मधु कालिज से वापस आ गई. उन की उतरी सूरत देख उस का मूड खराब न हो अत: दोनों ने खुद को संयत कर किसी दूसरे काम में उलझा लिया.

आज का मामला कोई नया नहीं था. साल भर ही हुआ था मीनू की शादी को मगर आएदिन कुछ न कुछ फेरबदल के साथ ऐसे मामले दोहराए जाते पर शिवचरण चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे…इन हालात के लिए वह स्वयं को ही दोषी मानते थे.

आज शिवचरण की आंखों के सामने बारबार वह दृश्य घूम रहा था जब कपूर साहब ने उन से अपने बड़े बेटे के लिए मीनू का हाथ मांगा था.

रजत कपूर उन के नजदीकी दोस्त एवं पड़ोसी दीनदयाल गुप्ता के बिजनेस पार्टनर थे. बेहद सरल, सहृदय और जिंदादिल. दीनदयाल के घर शिवचरण की उन से आएदिन मुलाकातें होती रहीं. जैसे वह थे वैसा ही उन का परिवार था. 2 बेटों में बड़ा बेटा कंप्यूटर इंजीनियर था और छोटा एम.बी.ए. पूरा कर अपने पिता का बिजनेस में हाथ बंटा रहा था. एक ऐसा हंसताखेलता परिवार था जिस में अपनी लड़की दे कर कोई भी पिता अपनी जिंदगी को सफल मानता. ऐसे परिवार से खुद रिश्ता आया था मीनू के लिए.

कपूर साहब भी अपने बड़े बेटे के लिए देखेभाले परिवार की लड़की चाह रहे थे और उन की नजर मीनू पर जा पड़ी. उन्होंने बड़ी विनम्रता से निवेदन किया था, ‘शिवचरण भाईसाहब, बेटी जैसे अब तक आप के घर रह रही है वैसे ही आगे हमारे घर रहेगी. बस, तन के कपड़ों में विदा कर दीजिए, मेरे घर में बेटी नहीं है, उसे ही बेटी समझ कर दुलार करूंगा.’

इतना अपनापन से भरा निवेदन सुन कर शिवचरण गद्गद हो उठे थे. कितनी धुकधुक रहती है पिता के मन में जब वह अपनी प्यारी बेटी को पराए हाथों में सौंपता है. मन आशंकाओं से भरा रहता है. रातदिन यही चिंता लगी रहती है कि पता नहीं बेटी सुखी रहेगी या नहीं, मानसम्मान मिलेगा या नहीं…मगर इस आग्रह में सबकुछ कितना पारदर्शी… शीशे की तरह साफ था.

शिवचरण ने जब इस बात पर अपनी पत्नी के साथ बैठ कर विचार किया तो धीरेधीरे कुछ प्रश्न मुखरित हो उठे. मसलन, ‘परिवार और लड़का तो वाकई लाखों में एक है मगर… हम वैश्य और वह पंजाबी…घर वालों को कैसे राजी करेंगे…’

यह सचमुच एक गंभीर समस्या थी. शिवचरण का भरापूरा कुटुंब था जिस में इस रिश्ते का जिक्र करने का मतलब था सांप की पूंछ पर पैर रखना. वैसे तो सभी तथाकथित पढे़लिखे समकालीन भद्रजन थे मगर जब किसी के शादीब्याह की बात आती तो एकएक पुरातन रीतिरिवाज खोजखोज कर निकाले जाते. मसलन, जाति, गोत्र, जन्मपत्री, मांगलिक-अमांगलिक…और यहां तो बात विजातीय रिश्ते की थी.

बेटी के सुखद भविष्य के लिए शिवचरण ने तो एक बार सब को दरकिनार करने की सोच भी ली थी मगर माया नहीं मानी.

‘शादीब्याह के मसले पर घरपरिवार को साथ ले कर चलना ही पड़ता है. अगर अभी नजरअंदाज कर दिया तो सारी उम्र ताने सुनते रहेंगे…तुम्हें कोई कुछ न बोले मगर मैं तो घर की बड़ी बहू हूं. तुम्हारी अम्मां मुझे नहीं बख्शेंगी.’

और अम्मां से पूछने पर जो कुछ सुनने को मिला वह अप्रत्याशित नहीं था.

‘क्या हमारी बिरादरी में कोई अच्छा लड़का नहीं मिला जो दूसरी बिरादरी का देखने चल दिया.’

‘नहीं, अम्मां, खुद ही रिश्ता आया था. बेहद भले लोग हैं. कोई दानदहेज भी नहीं लेंगे.’

‘तो क्या पैसे बचाने को ब्याह रहा है वहां? तेरे पास न हों तो मुझ से ले लेना…अरे, बेटी के ब्याह पर तो खर्च होता ही है…और मीनू घर की बड़ी लड़की है, अगर उसे वहां ब्याह दिया तो सब यही समझेंगे कि लड़की तेज होगी, खुद से पसंद कर ब्याह कर बैठी. फिर छोटी को कहीं ब्याहना भी मुश्किल हो जाएगा.’

अम्मां ने तिवारीजी को भी बुलवा लिया. लंबा तिलक लगाए वह आए तो अम्मां ने खुद ही उन के पांव नहीं छुए, सब से छुआए. 4 कचौड़ी, 6 पूरी और 2 रसगुल्लों का नाश्ता करने के बाद समस्या पर विचार कर के वह बोले, ‘यजमान, यह आप की मरजी है कि आप विवाह कहां करें पर आप ने जाति के बाहर विवाह किया तो मैं आप के घर में पैर नहीं रखूंगा. आखिर सनातन प्रथा है यह जाति की. आप जैसे नए लोग तोड़ते हैं तभी तो तलाक होते हैं. न कुंडली मिली, न अपनी जाति का, न घर के रीतिरिवाज का पता. आप सोच भी कैसे सकते हैं.’

अम्मां और तिवारीजी के आगे शिवचरण के सभी तर्क विफल हो गए और उन्हें इस रिश्ते को भारी मन से मना करना पड़ा. दीनदयाल ने यह बात विफल होती देख वहां अपनी भतीजी की बात चला दी और आज वह कपूर साहब के घर बेहद सुखी थी.

जब शिवचरण मीनू के लिए सजातीय वर खोजने निकले तो उन्हें एहसास हुआ कि दूल्हामंडी में से एक अदद दूल्हा खरीदना कितना कठिन कार्य था. जो लड़का अच्छा लगता उस के दाम आसमान को छूते और जिस का दाम कम था वह मीनू के लायक नहीं था. कपूर साहब के रिश्ते पर चर्चा के समय जिन सगेसंबंधियों ने मीनू के लिए सुयोग्य वर खोज लाने और हर तरह का सहयोग देने की बात की थी इस

समय वे सभी पल्ला झाड़ कहीं गायब हो गए थे.

भागदौड़ कर के अंत में एक जगह बात पक्की हुई. रिश्ता तय होते समय लड़के के मातापिता का रवैया ऐसा था जैसे लड़की पसंद कर उन्होंने लड़की वालों पर एहसान किया है. उस समय शिवचरण को कपूर साहब का नम्र निवेदन बहुत याद आ रहा था. उस दिन जो उन के कंधे झुके तो आज तक सीधे नहीं हुए थे.

अतीत की यादों में खोए शिवचरण को तब झटका लगा जब पत्नी ने आ कर कहा कि दीनदयाल भाई साहब आए थे और आप के लिए एक निमंत्रण कार्ड दे गए हैं.

उस दिन दीनदयाल के घर एक पारिवारिक समारोह में शिवचरण की मुलाकात उन के बड़े भाई से हो गई जो अब कपूर साहब के समधी थे. उन की बात चलने पर वह गद्गद हो कर बोले, ‘‘बस, क्या कहें, हमारी बिटिया को तो बहुत अच्छा घरवर मिल गया. ऐसे सज्जन लोग कहां मिलते हैं आजकल…उसे हाथों पर उठा कर रखते हैं…बेटी ससुराल में खुश हो, एक बाप को और क्या चाहिए भला…’’ शिवचरण के चेहरे पर एक दर्द भरी मुसकान तैर आई.

घर आ कर मन और अधिक अपराधबोध से ग्रसित हो गया. वह खुद पर बेहद नाराज थे. बारबार स्वयं को कोस रहे थे कि क्यों मैं उस समय जातिवाद की ओछी मानसिकता से उबर नहीं पाया…क्यों सगेसंबंधियों और बिरादरी की कहावत से डर गया…अपनी बेटी का भला देखना मेरी अपनी जिम्मेदारी थी, बिरादरी की नहीं. दीनदयाल भी तो हमारी जाति के ही हैं. उन्हें तो कोई फर्क नहीं पड़ा वहां रिश्ता करने से…उन का मानसम्मान उसी तरह बरकरार है…सच तो यह है कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में किसी के पास इतना समय नहीं कि रुक कर किसी दूसरे के बारे में सोचे…‘लोग क्या कहेंगे’ जैसी बातें पुरानी हो चुकी हैं. जो इन्हें छोड़ आगे नहीं बढ़ते, आगे चल कर वे मेरी ही तरह रोते हैं.

शिवचरण अखबार पढ़ रहे थे तभी दीनदयाल उन से मिलने आए तो बातोंबातों में वह अपनी व्यथा कह बैठे, ‘‘क्या बताऊं भाईजी, कपूर साहब जैसा समधी खोने का दर्द अभी तक दिल में है…एक विचार आया है मन में…अगर उन के छोटे बेटे के लिए मधु का रिश्ता ले कर जाऊं तो…जब वह आए थे तो मैं ने इनकार कर दिया था, न जाने अब मेरे जाने पर कैसा बरताव करेंगे, यही सोच कर दिल घबरा रहा है.’’

‘‘नहीं, भाई साहब, उन्हें मैं अच्छी तरह जानता हूं, दिल में किसी के लिए मैल नहीं रखते…वह तो खुशीखुशी आप का रिश्ता स्वीकारते मगर आप ने यह फैसला लेने में जरा सी देर कर दी. अभी 2 दिन पहले ही उन के छोटे बेटे का रिश्ता तय हुआ है.’’

एक बार फिर शिवचरण खुद को पराजित महसूस कर रहे थे.

वह अपनी गलती का प्रायश्चित्त करना चाह रहे थे मगर उन्हें मौका न मिला. सच ही है, कुछ भूलें ऐसी होती हैं जिन को भुगतना ही पड़ता है.

‘‘फोन की घंटी बज रही थी. शिवचरण ने फोन उठाया, ‘‘हैलो.’’

‘‘नमस्ते, मामाजी,’’ दूसरी ओर से अजय की आवाज आई, ‘‘वह जो आप ने मधु के लिए वैवाहिक विज्ञापन देने को कहा था, उसी का मैटर कनफर्म करने को फोन किया है…पढ़ता हूं…कोई सुधार करना हो तो बताइए :

‘‘अग्रवाल, उच्च शिक्षित, 23, 5 फुट 4 इंच, गृहकार्य दक्ष, संस्कारी कन्या हेतु सजातीय वर चाहिए.’’

‘‘बाकी सब ठीक है, अजय. बस, ‘अग्रवाल’ लिखना जरूरी नहीं और ‘सजातीय’ शब्द की जगह लिखो, ‘जातिधर्म बंधन नहीं.’’’

‘‘मगर मामाजी, क्या आप ने सगेसंबंधियों से इस बारे में…’’

‘‘सगेसंबंधी जाएं भाड़ में….’’ शिवचरण फोन पर चीख पडे़.

‘‘और मामीजी…’’

‘‘तेरी मामी जाए चूल्हे में…अब मैं वही करूंगा जो मेरी बेटी के लिए सही होगा.’’

शिवचरण ने फोन रख दिया…फोन रख कर उन्हें लगा जैसे आज वह खुल कर सांस ले पा रहे हैं और अपने चारों तरफ लिपटे धूल भरे मकड़जाल को उन्होंने उतार फेंक

जाने किस दिन शुरु होगा बिग बॉस OTT 2 , सलमान खान करेंगे होस्ट

रिएलटी शो बिग बॉस एक ऐसा शो है जिसका लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है ऐसे में उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो इस शो के फैंस है. जी हां, सलमान खान का शो बिग बॉस जल्द ही सबसे सामने आने वाला है बिग बॉस ओटीटी2, 17 जून से जियो सिनेमा पर स्ट्रीम किया जाएगा. बिग बॉस ओटीटी 2 का प्रोमो रीलिज किया गया है जिसमें सलमान खान नजर आ रहे है.

जियो सिनेमा के ट्वीटर हैंडल पर इसका वीडियो शेयर किय़ा गया है इसमें सलमान खान नजर आ रहे हैं. प्रोमो वीडियो में सलमान खान कहते हैं, इस बार इतनी लगेगी कि आपकी मदद लगेगी. इसके बाद वह डांस करते नजर आ रहे हैं. प्रोमो वीडियो में बताया गया है ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ 17 जून से जियो सिनेमा पर फ्री में स्ट्रीम किया जाएगा. ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ के प्रोमो वीडियो के साथ कैप्शन लिखा है, सबके फेवरिट सलमान खान तैयार हैं इंडिया का सबसे बड़ा रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी वापस लेकर आने के लिए. और इस बार लगाएंगे भी आप और बचाएंगे भी आप. जुड़े रहिए बिग बॉस ओटीटी के एंथम ड्रॉप के लिए. बताते चलें कि ये पहला मौका होगा जब सलमान खान ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ को होस्ट करते नजर आएंगे. ‘बिग बॉस ओटीटी’ के पहले सीजन को फिल्ममेकर करण जौहर ने होस्ट किया था.

 

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडस्ट्री के कई जाने-माने सितारे ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ का हिस्सा बन सकते हैं. इस लिस्ट में अविनाश सचदेव, पूजा गोर, जिया शंकर, पूनम पांडे, अंजलि अरोड़ा, आवेज दरबार और अनुराग डोभाल का नाम शामिल है. हालांकि, 17 जून को एकदम क्लियर हो जाएगा कि ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में किस-किस स्टार्स की एंट्री हुई है.

फेसबुकिया प्यार के चक्कर में न पड़ जाना

रात को घर के सारे काम निपटा कर रीतू फेसबुक खोल कर चैटिंग करने बैठती तो दूसरी ओर विनोद औनलाइन मिलता, जैसे वह पहले से ही रीतू का इंतजार कर रहा होता. उस से चैटिंग करने में विनोद को भी बड़ा आनंद आता था. रीतू की प्यार भरी बातों से विनोद की दिन भर की थकान दूर हो जाती थी. वह एक प्राइमरी स्कूल में सहायक अध्यापक था. वहां छोटेछोटे बच्चों को पढ़ाने में उस का दिमाग व शरीर थक जाता था, रीतू से चैटिंग कर के वह तरोताजा महसूस करता था.

विनोद की पत्नी मायके गई हुई थी, इसलिए घर की तनहाई उसे काटने दौड़ती थी. ऐसे में उसे रीतू से भरपूर चैटिंग करने का समय मिल जाता था. रीतू भी चैटिंग द्वारा एक हफ्ते में ही विनोद से काफी घुलमिल गई थी. उस दिन भी वह उस से चैटिंग कर रहा था, तभी उस के मोबाइल की घंटी बज उठी. उस ने पूछा, ‘‘हैलो, कौन?’’

‘‘हैलो…विनोदजी, मैं रीतू बोल रही हूं. वही रीतू, जिस से आप चैट कर रहे हो.’’ दूसरी तरफ से कहा गया.

‘‘अरे रीतूजी आप, आप को मेरा नंबर कहां से मिल गया?’’ खुश हो कर विनोद ने पूछा.

‘‘लगन सच्ची हो और दिल में प्यार हो तो सब कुछ मिल जाता है, नंबर क्या चीज है.’’ रीतू ने कहा.

बड़ी मीठी आवाज थी रीतू की. उस से बातें करते हुए विनोद को बहुत अच्छा लग रहा था, इसलिए उस ने चैटिंग बंद कर के पूछा, ‘‘रीतूजी, आप रहती कहां हैं?’’

‘‘वाराणसी में.’’ रीतू ने कहा.

‘‘वाराणसी में आप कहां रहती हैं?’’

‘‘सिगरा में.’’

‘‘रीतूजी, आप करती क्या हैं?’’

‘‘मैं एक नर्सिंगहोम में नर्स हूं.’’

‘‘आप तो नौकरी के साथ समाजसेवा भी कर रही हैं. आप मैरिड हैं या..?’’

‘‘हां, मैं मैरिड हूं और आप..?’’ रीतू ने पूछा.

‘‘शादी तो मेरी भी हो चुकी है, लेकिन…’’

‘‘लेकिन क्या?’’

‘‘कुछ खास नहीं, दरअसल पत्नी मायके गई है, इसलिए घर में उदासी छाई है.’’

‘‘ओह, मैं तो अनहोनी समझ कर घबरा गई थी. विनोदजी, सही बात तो यह है कि मेरी शादी हुई जरूर है, पर पति के होते हुए भी मैं अकेली हूं. मेरी स्थिति तो उस धोबी की तरह है, जो पानी में खड़ा होते हुए भी प्यासा रहता है.’’ कहतेकहते रीतू उदास हो गई.

रीतू की वेदना सुन कर विनोद का भी अंतरमन आहत सा हो गया था. बातचीत के बाद दोनों ने वाट्सऐप से एकदूसरे को अपनेअपने फोटो भेज दिए. रीतू बहुत सुंदर थी. गोलमटोल चेहरे पर बड़ीबड़ी कजरारी आंखें, पतलेपतले होंठ, लंबेघने घुंघराले केश. उस की मोहिनी सूरत पर विनोद मुग्ध हो गया.

अब वह रोजाना रीतू से बातें करने के लिए बेचैन रहने लगा था. मोबाइल पर जो बात वह उस से खुल कर नहीं कह पाता था, उसे फेसबुक पर चैटिंग के दौरान कह देता था. विनोद को रीतू ने बताया था कि उस का पति मनोहरलाल शराबी है.

वह जुआ भी खेलता है और शराबियों के साथ आवारागर्दी करता है. रात को नशे में झूमता हुआ घर आ कर झगड़ा और गालीगलौज कर के सो जाता है.

रीतू को जो वेतन मिलता, उसे भी वह छीन लेता था. न देने पर उसे मारतापीटता था. मार के डर से वह अपना सारा वेतन उसे दे देती थी.

रीतू विनोद से अपनी कोई बात नहीं छिपाती थी. इस तरह विनोद को रीतू से अपनापन सा हो गया था. एक रात विनोद ने फोन कर के पूछा, ‘‘क्या कर रही हो?’’

‘‘तुम्हारी याद में बेचैन हूं और तुम से मिलने के लिए तड़प रही हूं. और तुम..?’’ उस ने भी विनोद से पूछा.

‘‘मेरी भी वही हालत है.’’ विनोद ने कहा.

‘‘जब ऐसी बात है तो मेरे पास आ जाओ न, दोनों का ही अकेलापन दूर हो जाएगा.’’

रीतू की बात सुन कर विनोद के शरीर में तरंग सी उठने लगी. मन की बेचैनी बढ़ गई. उस ने कहा, ‘‘मेरे आने का क्या फायदा, घर पर तुम्हारा पति मनोहर जो है.’’

‘‘तो क्या हुआ, तुम आओ तो सही. मैं कह दूंगी कि तुम मेरे मौसेरे भाई हो. वैसे भी वह कल गांव जा रहा है. गांव से लौटने में उसे 2-4 दिन तो लग ही जाएंगे. परसों इतवार है. तुम कल जरूर आ जाओ. ऐसा मौका जल्दी नहीं मिलेगा. मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी.’’

रीतू का फोन कटा तो विनोद की बेचैनी बढ़ गई. वह रात भर करवटें बदलता रहा. जबकि पत्नी से उस की रोज ही बातें होती थीं. वह भी आने के लिए उसे बारबार फोन कर रही थी. पत्नी की मां सीरियस बीमार न होती तो वह कब की आ गई होती.

विनोद की स्थिति उस चटोरे जैसी हो गई थी, जिसे बाहर के भोजन के सामने घर का भोजन फीका लगता है. फिर रीतू का मदभरा अतृप्त यौवन कहां हमेशा मिलने वाला था. विनोद की यही सोच उसे मदहोश किए जा रही थी. लिहाजा मन बना कर वह रविवार को रीतू से मिलने वाराणसी पहुंच गया. रीतू के बताए पते पर पहुंचने में उसे कोई दिक्कत नहीं हुई. थोड़ीबहुत परेशानी हुई तो उस ने रीतू से फोन कर के रास्ता पूछ लिया.

रीतू के घर आते हुए विनोद के मन में जो डर और झिझक थी, वह उस से मिल कर खत्म हो गई. उस समय उस के मन में एक सवाल यह था कि न जान न पहचान, केवल फेसबुक की दोस्ती ही तो है, कहीं उस के साथ कोई छलकपट न हो. उसी पल उस ने यह भी सोचा कि यदि ऐसा होता तो इस तरह खुल कर रीतू अपनी वेदना उस से न कहती.

इन्हीं सब उलझनों में पड़े विनोद ने जब रीतू के घर की घंटी बजाई तो रीतू न केवल तुरंत बाहर आई, बल्कि स्वागत करती हुई वह उस का हाथ पकड़ कर अंदर ले गई. उस के इस व्यवहार से उस के मन में जो डर था, वह पूरी तरह से दूर हो गया.

दूसरी मंजिल पर जहां रीतू रहती थी, वह 2 कमरों का सैट था. पूरा मकान करीने से सजा हुआ था, जिसे देख कर विनोद का मन खिल उठा. रीतू उस से मिल कर आनंदविभोर हो उठी थी. घर में रीतू को अकेली पा कर उस से आलिंगनबद्ध कर वह निहाल हो गया था. खातिरदारी और उस से लिपट कर बात करतेकरते दिन ढलने लगा तो विनोद ने इशारा करते हुए कहा, ‘‘रीतू, चलो अब बैडरूम में चलते हैं. क्योंकि मुझे वापस भी जाना है.’’

‘‘कहां वापस जाना है. आज रात तुम्हें मेरे साथ रहना होगा. फिर पता नहीं कब मिलना हो?’’ कह कर विनोद को आलिंगनबद्ध किए हुए रीतू उसे बैडरूम में ले गई.

डबलबैड पर दोनों सट कर लेट गए. विनोद उस के अंगों से खेलने लगा. वह उसे निर्वस्त्र करने लगा तो रीतू ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘इतनी भी क्या जल्दी है.’’

कमरा ट्यूबलाइट की दूधिया रौशनी से भरा हुआ था. इस से पहले कि विनोद कुछ और करता, पता नहीं कहां से मनोहर उस कमरे में आ टपका. उसे देखते ही विनोद सकपका गया. वह विनोद को घूरते हुए बोला, ‘‘तू कौन है रे, जो मेरे घर में आ कर मेरी पत्नी के साथ दुष्कर्म कर रहा है.’’

विनोद की तो जैसे सिट्टीपिट्टी बंध गई, उस का सारा रोमांस गायब हो गया. रीतू अपनी साड़ी ओढ़ कर एक कोने में सिमट गई. मनोहर ने पहले तो विनोद को खूब लताड़ा. फिर लातघूंसों से उस की पिटाई करते हुए पुलिस को फोन लगाने लगा.

विनोद उस के पैर पकड़ कर पुलिस न बुलाने की भीख मांगते हुए बोला, ‘‘मनोहरजी, इस में मेरी कोई गलती नहीं है. रीतू ने ही फेसबुक पर मुझ से दोस्ती कर के यहां बुलाया था.’’

‘‘चुप कमीने, मैं कुछ नहीं जानता. फेसबुक पर दोस्ती कर औरतों को प्रेमजाल में फांस कर रंगरलियां मनाने वाले, आज तेरी खैर नहीं है. जब पुलिस का डंडा पड़ेगा, तब सारा नशा उतर जाएगा.’’ कह कर वह फिर फोन मिलाने लगा.

‘‘नहीं मनोहरजी, मुझे छोड़ दो. मेरा भी परिवार है. मेरी सरकारी नौकरी है. मुझे पुलिस के हवाले करोगे तो मैं बरबाद हो जाऊंगा.’’ कह कर वह उस के पैरों पर गिर पड़ा.

विनोद के काफी हाथपैर जोड़ने पर मनोहर ने कहा, ‘‘अपनी इज्जत और नौकरी बचाना चाहता है तो अभी 2 लाख रुपए देने होंगे. नहीं तो मैं तुझे पुलिस के हवाले कर दूंगा.’’

कह कर मनोहर ने कमरे में लगा वीडियो कैमरा हाथ में ले कर उसे दिखाते हुआ कहा, ‘‘तेरी सारी हरकत इस कैमरे में कैद है, इसलिए पैसे जल्द दे दे, नहीं तो…’’

‘‘इतने पैसे मैं अभी कहां से लाऊं. मेरे पास तो अभी केवल 70 हजार रुपए हैं.’’ कह कर 2-2 हजार के 35 नोट पर्स से निकाल कर उस ने मनोहर के सामने रख दिए.

क्रोध से लाल होता हुआ मनोहर बोला, ‘‘70 हजार..? यह भी रख ले. 2 लाख कह दिया तो उतने ही चाहिए. नहीं तो जेल जाने की तैयारी कर ले.’’

विनोद गिड़गिड़ाते हुए बोला, ‘‘आप मुझ पर दया कीजिए भैया, मैं घर जा कर बैंक से पैसे निकाल कर कल आप को दे दूंगा.’’

‘‘बहाना कर के भागना चाहता है तू, मुझे मूर्ख समझता है क्या. अभी मेरे साथ एटीएम चल.’’ कह कर वह पास की मार्केट स्थित एटीएम बूथ पर ले गया और 24 हजार रुपए निकलवा लिए. इस से ज्यादा वह निकाल नहीं सकता था, क्योंकि नोटबंदी के बाद बैंकों ने नियम ही ऐसा बना दिया था.

24 हजार रुपए अपने पास रख कर मनोहर ने विनोद को चेतावनी दी, ‘‘1 लाख 6 हजार रुपए तू जल्द दे जाना, वरना यह वीडियो मेरे पास है. यह तुझे कभी भी जेल पहुंचा सकता है.’’

विनोद वहां से चला गया और अगले दिन अपने दोस्त से 1 लाख 6 हजार रुपए उधार ला कर उस ने मनोहर को दिए, तब मनोहर ने कैमरे से वह वीडियो डिलीट की.

वीडियो डिलीट होने पर विनोद ने राहत की सांस ली. इस फेसबुकिया प्यार ने विनोद को मानसिक रूप से तो परेशान किया ही, साथ ही 2 लाख रुपए भी पल्ले से देने पड़े. इस फेसबुकिया प्यार को वह जिंदगी भर नहीं भुला पाएगा.

मैं शादी के बाद सेक्स को ले कर डरी हुई हूं, क्या महिलाओं में सेक्स संबंधी समस्याएं होती हैं?

सवाल-

मेरी उम्र 21 साल है और जल्द ही शादी होने वाली है. मैं शादी के बाद सेक्स को ले कर डरी हुई हूं. क्या महिलाओं में सेक्स संबंधी समस्याएं होती हैं? क्या इन का उपचार संभव है?

जवाब-

शादी के बाद सेक्स को ले कर आप नाहक डरी हुई हैं. सेक्स संबंध कुदरती प्रक्रिया है. महिलाओं में भी सेक्स समस्याएं हो सकती हैं जैसे सेक्स संबंध के समय योनि में दर्द, चरमसुख का अभाव, उत्तेजना में कमी आदि. मगर पुरुषों की ही तरह महिलाओं की सेक्स समस्याओं का भी निदान संभव है. आप के लिए बेहतर यही है कि इन सब बातों से डरे बगैर खुद को शादी के लिए तैयार करें.

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अधूरी सेक्स नौलेज

प्रेमिका को खुश रखने की युवा हर संभव कोशिश करते हैं, लेकिन जब सेक्स संबंधी समस्या हो तो उसे भी दूर करना होगा. युवा प्रेमियों को लगता है कि सेक्स का अधूरा ज्ञान उन्हें मंझधार में ले जा सकता है. सेक्स संबंधों के दौरान सेक्स क्षमता का बहुत महत्त्व है. सहवास करने की क्षमता ही व्यक्ति को पूर्ण पुरुष के रूप में स्थापित करती है.

कई ऐसे कारण हैं जिन पर हम खुल कर चर्चा नहीं करते न ही उन्हें दूर करने का उपाय खोजते हैं. नतीजतन, सेक्स लाइफ का मजा काफूर हो जाता है. ऐसी  कई समस्याएं हैं जिन्हें दूर कर हम वैवाहिक जिंदगी जी सकते हैं.

झिझक 

सहवास की पूर्ण जानकारी न होना, सेक्स के बारे में झिझक, संबंध बनाने से पहले ही घबराना, यौन दुर्बलता से सेक्स इच्छा की कमी, मानसिकरूप से खुद को सेक्स के प्रति तैयार न कर पाना, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, मोबाइल सेक्स आदि समस्याओं से युवावर्ग पीडित है. सेक्स में मंझधार में न रहें, समस्याओं को समझें व इन्हें दूर करें और सेक्स का भरपूर आनंद उठाएं.

सेक्स इच्छा में मानसिक कारणों को दूर करें

आज की भागदौड़भरी जिंदगी में धनपदयश पाने की उलझन में फंसे युवा एक खास मुकाम तक पहुंचने के चक्कर में सहवास के बारे में अंत में सोचते हैं. वे इस तनाव से ऐसे ग्रस्त हो गए हैं कि उन का वैवाहिक जीवन इस से प्रभावित हुआ है.

सेक्स में डरें नहीं

डर यौनसुख को सब से ज्यादा प्रभावित करता है. इस की वजह से शीघ्र स्खलित होना, कोई देख लेगा, कमरे के बाहर आवाज सुनाई देने का डर, पार्टनर द्वारा उपहास, गर्भ ठहरने का खतरा आदि युवाओं की यौनक्षमता पर प्रश्नचिह्न लगा देते हैं. युवावस्था में यौन इच्छा चरम पर होती है इसलिए सेक्स संबंध जल्दीजल्दी बना लेते हैं, लेकिन धीरेधीरे समय में ठहराव कम हो जाता है, क्योंकि विवाह से पहले प्रेमिका से संबंध बनाना उसे अपराधबोध लगता है और वह शीघ्र स्खलित हो जाता है. इन सभी बातों को नजरअंदाज करते हुए सेक्स संबंध बनाएं.

मोबाइल सेक्स

इंटरनैट के परिवेश में आज का युवा मोबाइल पर सैक्सी फिल्में देखता है और खुद को भी सेक्स में लिप्त कर लेता है. यही कारण है कि वह वास्तविक जीवन में सेक्स का भरपूर आनंद नहीं उठा पाता.

स्वयं पर विश्वास करें

कुछ युवा स्वस्थ होते हुए भी सेक्स के प्रति आत्मविश्वासी नहीं होते. सहवास के दौरान वे धैर्य खो बैठते हैं. ऐसे युवाओं में कोई कुंठा छिपी होती है, जो उन्हें पूर्ण सेक्स करने से रोकती है. खुद पर विश्वास रखें, अन्यथा किसी अच्छे सैक्सोलौजिस्ट एवं मनोचिकित्सक को दिखाएं.

यौनांग पर चोट

किसी ऐक्सिडैंट या अत्यंत तेजी से शारीरिक संबंध बनाते हुए या कष्टप्रद आसनों से यौनांग को चोट पहुंचती है. इस से युवती का सेक्स से मन हटने लगता है. अत: यौनांग पर चोट न पहुंचे, ऐसा प्रयास करें.

शारीरिक कारण

आज युवाओं का सेक्स में सफल न हो पाना दवाओं का दुष्प्रभाव है. बीटा रिसेप्टार्स, प्रोपेनोलोल, मिथाइल डोपा, सिमेटिडिन आदि दवाएं सेक्स इच्छा में कमी लाती हैं. खुद को बीमारी से दूर रखने का प्रयास करें. यौनांग में कसावट होने (फिमोसिस) के फलस्वरूप दर्द, जलन होना, तनाव व स्खलन के कारण सहवास में कमी आ जाती है. अत: शल्यक्रिया द्वारा इसे दूर किया जा सकता है.

गुप्तांग में तनाव न आना

सहवास के दौरान तनाव न आना और यदि  तनाव आता भी है तो कम समय के लिए आता है. युवावस्था में ऐसा होने के कई कारण हैं, जैसे मातापिता का व्यवहार व मानसिक तनाव सेक्स क्रिया में असफलता की मुख्य वजह है.

सीमेन की मात्रा कम होना

कई बार स्खलन का समय सामान्य होता है, लेकिन सीमेन काफी कम मात्रा में निकलने से सेक्स के दौरान पूर्णआनंद नहीं आता. युवा यदि इस समस्या से पीडि़त हों तो चरमोत्कर्ष तक नहीं पहुंच पाते. ऐसे में सैक्सोलौजिस्ट से मिलें. मानसिक रूप से खुद को तैयार कर के सहवास करें, समस्या अवश्य दूर होगी.

इजाक्युलेशन

जब युवा अपने पार्टनर को संतुष्ट किए बिना ही स्खलित हो जाते हैं तो इसे इजाक्यूलेशन कहा जाता है. सैक्सुअल संबंधों के दौरान ऐसा होने से वैवाहिक जीवन में कड़वाहट आती है.

प्रीमैच्योर इजाक्युलेशन

युवाओं में सेक्स में और्गेज्म की अनुभूति इजाक्युलेशन से पूरी होती है. सहवास शुरू करने के 30 सैकंड से 1 मिनट पहले स्खलित होने पर उसे प्रीमैच्योर इजाक्युलेशन कहते हैं. गुप्तांग की कठोरता खत्म हो जाती है और इस वजह से पार्टनर की इच्छा पूरी नहीं हो पाती है. यह वास्तव में समस्या नहीं बल्कि चिंता, संतुष्ट न कर पाने का डर, मानसिक अशांति, मानसिक तनाव, डायबिटीज या यूरोलौजिकल डिसऔर्डर के कारण होता है. इस के लिए ऐंटीडिप्रैंसेट दवाओं का सेवन डाक्टर की सलाह ले कर करें.

ड्राइ इजाक्युलेशन

इस में पुरुषों की ब्लैडर मसल्स ठीक से काम नहीं करतीं, जिस कारण सीमेन बाहर नहीं निकल पाता. इस से फर्टिलिटी प्रभावित होती है, लेकिन आर्गेज्म या सेक्स संतुष्टि पर कोई असर नहीं पड़ता.

पौष्टिक आहार व पर्याप्त नींद लें

संतुलित व पर्याप्त पौष्टिक भोजन के अभाव में शरीर परिपुष्ट नहीं हो पाता. ऐसे में सीमेन का पतलापन और इजाक्युलेशन जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. पर्याप्त नींद और भोजन से शरीर में सेक्स हारमोन का स्तर काफी बढ़ जाता है, जो सफल सहवास के लिए जरूरी है.

तनाव से दूर रहें

तनाव के दौरान कभी भी सेक्स संबंध न बनाएं. तनाव सेक्स प्रक्रिया को पूरी तरह प्रभावित करता है और इंसान को कई बीमारियों से ग्रसित कर देता है. मुंबई की मशहूर मनोचिकित्सक डा. यदुवीर पावसकर का मानना है कि युवाओं के एक बहुत बडे़ वर्ग, जिसे तनाव ने अपने घेरे में ले लिया है, को सेक्स से अरुचि होने लगी है. इस का मुख्य कारण भागदौड़ भरी दिनचर्या है.

फोरप्ले को समझें

शारीरिक संबंध बनाने से पहले पूर्ण शारीरिक स्पर्श, मुखस्पर्श, नख, दंत क्रीड़ा करने के बाद ही सहवास शुरू करें. सेक्स प्रक्रिया का पहला चरण फोरप्ले है. बिना फोरप्ले युवकों को उतनी समस्या नहीं आती लेकिन ज्यादा नोचनेखसोटने से युवती को पीड़ा हो सकती है. उस का सहवास से मन हट सकता है. इसलिए शारीरिक संबंध बनाते समय पार्टनर की भावनाओं की भी कद्र करें और अगर उसे इस दौरान दर्द हो रहा है तो अपने ऐक्शंस पर थोड़ा कंट्रोल करें.

सेक्स ऐंजौय करने के कुछ उपाय

–       पूरी नींद लें.

–       पौष्टिक आहार लें.

–       नियमित व्यायाम करें.

–       शराब या तंबाकू का सेवन न करें.

–       नियमित रूप से हैल्थ चैकअप करवाएं.

–       साल में 1-2 बार किसी हिल स्टेशन पर जाएं.

–       शारीरिक संबंध तभी बनाएं जब पार्टनर भी तैयार हो.

पुरुष भी होते है सेक्सुअल हैरेसमैंट का शिकार

राघवन को समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक उन के 20 वर्षीय बेटे को क्या हो गया है. फर्स्ट ईयर में उस ने टौप किया था. इस सैमेस्टर में अचानक फेल कैसे हो गया? डरासहमा रहता है सो अलग? राघवन समझदार पिता हैं. पहले उन्हें लगा कि शायद बुली का मामला है. कालेज में ऐसा थोड़ाबहुत सब के साथ होता ही है. काउंसलर से कई सैशन काउंसलिंग कराने के बाद मामला खुला तो राघवन भी सकते में आ गए. उन के बेटे रोहित के साथ 2 नाइजीरियन युवकों ने दुष्कर्म किया था. उस के बाद रोहित मन ही मन रोता रहता था. उस ने दोस्तों को भी इस घटना के बारे में नहीं बताया. उस ने गर्लफ्रैंड के फोन उठाने भी बंद कर दिए. पुलिस के पास जाने का तो सवाल ही नहीं था.

राघवन का हैरत और गुस्से के मारे बुरा हाल था. उन्होंने रोहित के लाख मना करने पर भी थाने में एफआईआर दर्ज करा दी. वैसे पुलिस का रवैया भी लचर ही था.

‘‘इतने दिन बाद शिकायत दर्ज कराने का क्या तुक है,’’ थाना इंचार्ज ने रोहित से पूछा तो वह काफी परेशान हो गया और काफी समय बाद सामान्य हो पाया, लेकिन अब वह अच्छीभली नौकरी कर रहा है. लव लाइफ भी ठीकठाक है.

यह किसी भी युवक के साथ हो सकता है. शारीरिक शोषण कितने ही युवकों का उन के परिचितों, रिश्तेदारों सीनियर या किसी पड़ोसी द्वारा भी किया जा सकता है या यों कहें कि आप के आसपास या मित्रों में कोई भी युवक शोषण का शिकार हो सकता है.

यहां तक कि टीचर या प्रोफैसर भी शोषक हो सकते हैं. यदि आप या आप का कोई परिचित किसी न किसी प्रकार से शोषण का शिकार है तो इसे न सहें.

युग 9वीं कक्षा का छात्र है. उस के पीटीआई टीचर ने उस का शारीरिक शोषण करने की कोशिश की, लेकिन बगैर देर किए उस ने इस बारे में अपने दोस्तों को बता दिया. दोस्तों ने आगे अपने सीनियर्स को बताया तथा वहां से फैलते हुए यह बात टीचर्स में फैल गई. परिणाम यह हुआ कि पीटीआई टीचर स्कूल से खुद ही रिजाइन कर के चला गया.

ऐसा ही कुछ रियाज अहमद के साथ भी हुआ. उस के एक बेहद करीबी रिश्तेदार ने उस के साथ गलत हरकत की. इस के बारे में किसी को बताने पर उसे धमकी भी दी कि यदि तुम ने इस बारे में किसी को बताया तो तुम्हारे परिवार के साथ मैं कुछ बुरा कर दूंगा. बेचारा रियाज उस की इस धमकी से डर गया और परेशान रहने लगा. कुछ समय बाद रियाज ने इसे अपनी करनी का फल मान लिया.

आखिर क्या कारण है कि युवकों के शारीरिक शोषण के बारे में काफी कम घटनाएं सामने आ पाती हैं जबकि सचाई इस के एकदम विपरीत है.

युवक सामाजिक रूप से अधिक रफटफ बने रहना चाहते हैं. उन्हें लगता है वे दोस्तों और समाज में हंसी का पात्र बन जाएंगे. कई बार परिवार भी उन्हें सपोर्ट नहीं करता.

क्या करें

– कड़े और स्पष्ट शब्दों में प्रतिरोध करें.

– यदि इस तरह की हरकत किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है जो आप का करीबी है, तो उसे चेतावनी दें.

– अगर आप के प्रतिरोध को धमकी या नुकसान द्वारा दबाया जाता है तो भी न डरें. किसी जिम्मेदार व्यक्ति को पूरी बात बताएं.

– पार्टी में किसी अनजान व्यक्ति द्वारा गलत हरकत करने पर शोर मचाएं और प्रथम प्रयास में ही खुद को सुरक्षित करने पर ध्यान दें.

क्या न करें

– चुपचाप न सहें. याद रखें पहली हार में आप की चुप्पी है.

– खुद को दोषी न ठहराएं.

– हर किसी को इस प्रसंग के बारे में न बताएं.

– अगर आप ने अपने साथ हुए व्यवहार का विरोध किया है और दोस्तों के बीच व परिवार में आप अपनी उपेक्षा महसूस करते हैं, तो खुद पर गर्व करें कि आप ने अपने लिए कदम उठाया.

– ऐसी घटनाएं या तो आप को तोड़ती हैं या फिर मजबूत बनाती हैं.

जरूर करें

– ऐसे समय में अच्छे साहित्यिक व प्रेरणादायक सामग्री का उपयोग अवश्य करें.

– एक सब से आवश्यक बात जो आप को कठिन समय से उबार लेगी, अच्छी तरह से कोई नई स्किल सीखें.

Father’s Day Special- सहारा : उमाकांत के मन से बेटी के लिए शक

अपनी सहेली के विवाह समारोह में भाग लेने के बाद दीप्ति आलोकजी के साथ रात को 11 बजे वापस लौटी. जिस घर में वह पेइंग गेस्ट की तरह रहती थी उस के गेट के सामने अपने मातापिता को खड़े देख वह जोर से चौंक पड़ी क्योंकि वे दोनों बिना किसी पूर्व सूचना के कानपुर से दिल्ली आए थे.

‘‘मम्मी, पापा, आप दोनों ने आने की खबर क्यों नहीं दी?’’ कार से उतर कर बहुत खुश नजर आ रही दीप्ति अपनी मां गायत्री के गले लग गई.

‘‘हम ने सोचा इस बार अचानक पहुंच कर देखा जाए कि यहां तुम अकेली किस हाल में रह रही हो,’’ अपने पिता उमाकांत की आवाज में नाराजगी और रूखेपन के भावों को पढ़ दीप्ति मन ही मन बेचैन हो उठी.

‘‘मैं बहुत मजे में हूं, पापा,’’ उन की नाराजगी को नजरअंदाज करते हुए दीप्ति उमाकांत के भी गले लग गई.

आलोकजी इन दोनों से पहली बार मिल रहे थे. उन्होंने कार से बाहर आ कर अपना परिचय खुद ही दिया.

‘‘रात के 11 बजे कहां से आ रहे हैं आप दोनों?’’ उन से इस सवाल को पूछते हुए उमाकांत ने अपने होंठों पर नकली मुसकराहट सजा ली.

‘‘दीप्ति की पक्की सहेली अंजु की आज शादी थी. वह इस के औफिस में काम करती है. यह परेशान थी कि शादी से घर अकेली कैसे लौटेगी. मैं ने इस की परेशानी देख कर साथ चलने की जिम्मेदारी ले ली. अकेले लौटने का डर मन से दूर होते ही शादी में शामिल होने की इस की खुशी बढ़ गई. मुझे अच्छा लगा,’’ आलोकजी ने सहज भाव से मुसकराते हुए जवाब दिया.

‘‘अकेली लड़की के लिए रात को इतनी ज्यादा देर तक घर से बाहर रहना ठीक नहीं होता है, बेटी,’’ दीप्ति को सलाह देते हुए उमाकांत की आवाज में कुछ सख्ती के भाव उभरे.

दीप्ति के कुछ बोलने से पहले आलोकजी ने कहा, ‘‘उमाकांतजी, देर रात के समय दीप्ति को मैं कहीं अकेले आनेजाने नहीं देता हूं. इस मामले में आप दोनों को फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है.’’

‘‘मांबाप को जवान बेटी की चिंता होती ही है. आजकल किसी पर भी भरोसा करना ठीक नहीं है जनाब. अब मुझे इजाजत दीजिए. गुड नाइट,’’ कुछ रूखे से अंदाज में अपने मन की चिंता व्यक्त करने के बाद उमाकांत मुड़े और गेट की तरफ चलने को तैयार हो गए.

‘‘उमाकांतजी, कल इतवार को आप डिनर हमारे घर कर रहे हैं. मैं ‘न’ बिलकुल नहीं सुनूंगा,’’ आलोकजी ने दोस्ताना अंदाज में उन के कंधे पर हाथ रख कर उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण दिया.

‘‘ओके,’’ बिना मुसकराए उन्होंने आलोकजी का निमंत्रण स्वीकार किया.

दीप्ति ने असहज भाव से मुसकराते हुए उन से विदा ली, ‘‘गुड नाइट, सर. मैं सुबह ठीक 9 बजे पहुंच जाऊंगी.’’

‘‘थैंक यू ऐंड गुड नाइट,’’ आलोकजी ने उस से हाथ मिलाने के बाद गायत्री को हाथ जोड़ कर नमस्ते किया और कार में बैठ गए.

उन्हें अपने घर पहुंचने में 5 मिनट लगे. अपनी पत्नी उषा की नजरों से वे अपने मन की बेचैनी छिपा नहीं पाए थे.

उषा की सवालिया नजरों के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘दीप्ति के मातापिता कानपुर से आए हैं. उन्हें दीप्ति का मेरे साथ इतनी देर से वापस लौटना अच्छा नहीं लगा. मुझे लग रहा है कि वे दोनों इस कारण तरहतरह के सवाल पूछ कर उसे जरूर परेशान करेंगे.’’

‘‘उन्हें अपनी बेटी पर विश्वास करना चाहिए,’’ उषा ने अपनी राय जाहिर की.

‘‘उस के पिता मुझे तेज गुस्से वाले इंसान लगे हैं. मुझे उन का विश्वास जीतने के लिए कुछ और देर उन के साथ रुकना चाहिए था.’’

‘‘हम कल उन्हें घर बुला लेते हैं.’’

‘‘मैं ने दोनों को कल रात डिनर के लिए बुला लिया है.’’

‘‘गुड.’’

‘‘तुम सुबह अनिता और राकेश को भी कल डिनर यहीं करने के लिए फोन कर देना.’’

‘‘ओके.’’

कुछ देर बाद अमेरिका में रह रहे अपने बेटे अमित और बहू वंदना से बात कर के उन का मूड कुछ सही हुआ. वे दोनों अगले महीने घर आ रहे हैं, यह खबर सुन वे खुशी से झूम उठे थे.

कमरदर्द से परेशान उषा नींद की गोली लेने के बाद जल्दी सो गई थी. आलोकजी दीप्ति की फिक्र करते हुए कुछ देर तक करवटें बदलते रहे थे.

सुबह 9 बजे से कुछ मिनट पहले दीप्ति अपनी मां गायत्री के साथ उन के घर पहुंच गई. आलोकजी को इस कारण उस के साथ अकेले में बातें करने का मौका नहीं मिला.

वैसे उन्हें मांबेटी सहज नजर नहीं आ रही थीं. इस बात से उन्होंने अंदाजा लगाया कि बीती रात दीप्ति के साथ उस के मातापिता ने उसे डांटनेसमझाने का काम जरूर किया होगा.

उन तीनों को फिजियोथेरैपिस्ट के यहां से वापस लौटने में डेढ़ घंटा लगा. तब तक आलोकजी ने सब के लिए नाश्ता तैयार कर दिया था. लेकिन गायत्री ने सिर्फ चाय पी और अपने पति के पास जल्दी वापस लौटने के लिए दीप्ति से बारबार आग्रह करने लगी. वह अपनी मां के साथ जाने को उठ कर खड़ी तो जरूर हो गई पर उस के हावभाव साफ बता रहे थे कि उसे गायत्री का यों शोर मचाना अच्छा नहीं लगा था.

पिछली रात वह 2 बजे सो सकी थी. उस के मातापिता ने कल उसे डांटते हुए कहा था :

‘अपनी दौलत और मीठे व्यवहार के बल पर यह आलोक तुम्हें गुमराह कर रहा है. बड़ी उम्र के ऐसे चालाक पुरुषों के जवान लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसाने के किस्से किस ने नहीं सुने हैं.

‘तुम्हें इस इंसान से फौरन सारे संबंध तोड़ने होंगे, नहीं तो हम बोरियाबिस्तर बंधवा कर तुम्हें वापस कानपुर ले जाएंगे,’ उमाकांत ने उसे साफसाफ धमकी दे दी थी.

दीप्ति ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की पर वे दोनों कुछ सुनने को तैयार ही नहीं थे. तब धीरेधीरे उस का गुस्सा भी बढ़ता गया था.

‘बिना सुबूत और बिना मुझ से कुछ पूछे आप दोनों मुझे कैसे चरित्रहीन समझ सकते हैं?’ दीप्ति जब अचानक गुस्से से फट पड़ी तब कहीं जा कर उस के मातापिता ने अपना सुर बदला था.

‘चल, मान लिया कि तू भी ठीक है और यह आलोकजी भी अच्छे इंसान हैं, पर दुनिया वालों की जबान तो कोई नहीं पकड़ सकता है, बेटी. हमारा समाज ऐसे बेमेल रिश्तों को न समझता है, न स्वीकार करता है. तुझे अपनी बेकार की बदनामी से बचना चाहिए,’ उसे यों समझाते हुए जब गायत्री एकाएक रो पड़ीं तो दीप्ति ने उन दोनों को किसी तरह की सफाई देना बंद कर दिया था.

‘कल आप दोनों आलोक सर और उन की पत्नी से मिल कर उन्हें समझने की कोशिश तो करो. अगर बाद में भी आप दोनों के दिलों में उन के प्रति भरोसा नहीं बना तो आप जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करूंगी,’ यह आखिरी बात कह कर दीप्ति ने उन्हें गेस्ट रूम में सोने भेज दिया था.

सुबह जागने के बाद दीप्ति की अपने मातापिता से ज्यादा बातें नहीं हुईं. बस, दोनों पार्टियों के बीच तनाव भरी खामोशी लंबी खिंची थी.

वे तीनों रात को 8 बजे के करीब आलोकजी के घर पहुंचे. उन्होंने अपनी पत्नी के साथसाथ उन का परिचय रितु और शिखा नाम की 2 लड़कियों से भी कराया.

‘‘ये दोनों पहली मंजिल पर रहने वाली हमारी किराएदार हैं. आज इन के हाथ का बना स्वादिष्ठ खाना ही आप दोनों को खाने को मिलेगा,’’ उषा ने रितु और शिखा के हाथ प्यार से थाम कर उन की तारीफ की.

‘‘रितु को नई जौब मिल गई है. वह अगले महीने मुंबई जा रही है. तब दीप्ति ने यहीं मेरे साथ शिफ्ट होने का प्लान बनाया है,’’ यह सूचना दे कर शिखा ने दीप्ति को गले से लगा लिया था.

इस खबर को सुनने के बाद उमाकांत की आंखों में पैदा हुई चिढ़ और नाराजगी के भावों को आलोकजी ने साफ पढ़ा. उमाकांत के मन की टैंशन कम करने के लिए उन्होंने सहज भाव से कहा, ‘‘यह शिखा सोते हुए खर्राटे लेती है. शायद दीप्ति इस के साथ रूम शेयर न करना चाहे.’’

‘‘आलोक सर, मेरा सीक्रेट आप सब को क्यों बता रहे हैं?’’ शिखा ने नाराज होने का अभिनय करते हुए जब किसी छोटे बच्चे की तरह जमीन पर पांव पटके तो उमाकांत को छोड़ सभी जोर से हंस पड़े थे.

उमाकांत ने शुष्क स्वर में शिखा को बताया, ‘‘तुम्हें नई रूममेट ढूंढ़नी पड़ेगी क्योंकि दीप्ति तो बहुत जल्दी वापस कानपुर जा रही है.’’

‘‘अरे, कानपुर जाने का फैसला तुम ने कब किया, दीप्ति?’’ शिखा ने हैरान हो कर दीप्ति से सवाल किया.

‘‘पापा के इस फैसले की मुझे भी कोई जानकारी नहीं है,’’ दीप्ति ने थके से स्वर में उसे बताया और उषाजी का हाथ पकड़ कर रसोई की तरफ चल पड़ी.

‘‘अंकल, आप दीप्ति को कानपुर क्यों ले जा रहे हैं? क्या वहां उसे यहां जैसी अच्छी जौब मिलेगी?’’ उमाकांत के बगल में सोफे पर बैठती हुई शिखा ने सवाल पूछा.

‘‘वह?घर से दूर रहती है, इसलिए उस का कहीं रिश्ता पक्का करने में हमें दिक्कत आ रही है. वह जौब करेगी या नहीं, यह फैसला अब उस की भावी ससुराल वाले करेंगे,’’ उमाकांत अभी भी नाराज नजर आ रहे थे.

‘‘यह क्या बात हुई, अंकल? दीप्ति को तो बड़ी जल्दी प्रोमोशन मिलने वाला है. शादी करने के लिए उस की इतनी अच्छी जौब छुड़ाना गलत होगा,’’ शिखा को उन की बात पसंद नहीं आई थी.

‘‘अंकल, दीप्ति ने बहुत मेहनत कर के खुद को काबिल बनाया है. वह शादी होने के बाद जौब करे या न करे, यह फैसला उसी का होना चाहिए. आप को उस का रिश्ता उस घर में पक्का करना ही नहीं चाहिए जो जबरदस्ती उसे घर बिठाने की बात करें,’’ उमाकांत के सामने बैठती हुई रितु ने जोशीले अंदाज में अपनी राय व्यक्त की.

बहुत जल्दी ही उमाकांत ने खुद को इन दोनों लड़कियों के साथ बहस में उलझा हुआ पाया. दुनिया की ऊंचनीच समझाते हुए वे लड़कियों के लिए कैरियर से ज्यादा शादी को महत्त्वपूर्ण बता रहे थे.

उन्हें रितु और शिखा से यों बहस करने में मजा आ रहा है, यह इस बात से जाहिर था कि घंटे भर का वक्त गुजर जाने का उन्हें बिलकुल पता नहीं चला.

उन दोनों के साथ बातों में उलझे रहने का एक कारण यह भी था कि उन का मन एक तरफ चुपचाप बैठे आलोकजी से बात करने का बिलकुल नहीं कर रहा था.

गायत्री बहुत देर पहले रसोई में चली गई थी. वहां अपनी बेटी दीप्ति को उषा का कुशलता से काम में हाथ बटाते देख उन्हें यह समझ आ गया कि वह अकसर ऐसा करती रहती थी. दीप्ति को अच्छी तरह मालूम था कि वहां कौन सी चीज कहां रखी हुई थी.

उन्हें अपनी बेटी का उषा के साथ हंसनाबोलना अच्छा नहीं लग रहा था. दीप्ति, रितु और शिखा को इन लोगों ने अपने मीठे व्यवहार और दौलत की चमकदमक से फंसा लिया है, यह विचार बारबार उन के मन में उठ कर उन की चिंता बढ़ाए जा रहा था. किसी अनहोनी की आशंका से उन का मन बारबार कांप उठता था.

जब उषाजी ने उन के साथ हंसनेबोलने की कोशिश शुरू की तो और ज्यादा चिढ़ कर गायत्री ड्राइंगरूम में वापस लौट आईं. वे अपने पति की बगल में बैठी ही थीं कि किसी के द्वारा बाहर से बजाई गई घंटी की आवाज घर में गूंज उठी.

कुछ देर बाद आलोकजी एक युवती के साथ वापस लौटे और उमाकांत व गायत्री से उस का परिचय कराया, ‘‘यह मेरी बेटी अनिता है. आप दोनों से मिलाने के लिए मैं ने इसे खास तौर पर बुलाया है.’’

‘‘क्या अकेली आई हो?’’ अनिता के माथे पर लगे सिंदूर को देख कर गायत्री ने उस के नमस्ते का जवाब देने के बाद सवाल पूछा.

‘‘नहीं, राकेश साथ आए हैं. वे कार पार्क कर रहे हैं. दीप्ति तो बिलकुल आप की शक्लसूरत पर गई है, आंटी. इस उम्र में भी आप बड़ी अच्छी लग रही हैं,’’ अनिता के मुंह से अपनी तारीफ सुन गायत्री तो खुश हुईं पर उमाकांत को उस का अपनी पत्नी के साथ यों खुल जाना पसंद नहीं आया था.

‘‘उमाकांतजी, आप मेरे साथ पास की मार्किट तक चलिए. खाने के बाद मुंह मीठा करने के लिए रसमलाई ले आएं. दीप्ति ने बताया था कि आप को रसमलाई बहुत पसंद है,’’ बड़े अपनेपन से आलोकजी ने उमाकांत का हाथ पकड़ा और दरवाजे की तरफ चल पड़े.

उमाकांत को मजबूरन उन के साथ चलना पड़ा. वैसे सचाई तो यह थी कि उन का मन इस घर में बिलकुल नहीं लग रहा था.

घर से बाहर आते ही आलोकजी ने उन का परिचय अंदर प्रवेश कर रहे अपने दामाद से कराया, ‘‘ये मेरे दामाद राकेशजी हैं. शहर के नामी चार्टर्ड अकाउंटैंटों में इन की गिनती होती है. राकेशजी, ये दीप्ति के पिता उमाकांतजी हैं.’’

राकेश का परिचय जान कर उमाकांत को तेज झटका लगा था. उस ने अपने ससुर और उमाकांत दोनों के पैर छुए थे. उम्र में अपने से 8-10 साल छोटे राकेश से अपने पांव छुआना उन को बहुत अजीब लगा. उन्होंने बुदबुदा कर राकेश को आशीर्वाद सा दिया और बहुत बेचैनी महसूस करते हुए आगे बढ़ गए.

घर से कुछ दूर आ कर आलोकजी ने पहले एक गहरी सांस छोड़ी और फिर अशांत लहजे में उमाकांत को बताना शुरू किया, ‘‘अपने दिल पर लगे सब से गहरे जख्म को मैं आप को दिखाने जा रहा हूं. चार्टर्ड अकाउंटैंट बनने का सपना देखने वाली मेरी बेटी अनिता राकेश की फर्म में जौब करने गई थी. उन के बीच दिन पर दिन बढ़ते जा रहे दोस्ताना संबंध तब हमारे लिए भी गहरी चिंता का कारण बने थे, उमाकांतजी.

‘‘जब मेरी बेटी ने अपने से उम्र में 17 साल बड़े विधुर राकेश से शादी करने का फैसला हमें सुनाया तो हमारे पैरों तले से जमीन खिसक गई थी. जिस आक्रोश, डर और चिंता को आप दोनों पतिपत्नी दीप्ति और मेरे बीच बने अच्छे संबंध को देख कर आज महसूस कर रहे हैं, उन्हें उषा और मैं भली प्रकार समझ सकते हैं क्योंकि हम इस राह पर से गुजर चुके हैं.

‘‘जिस पीड़ा को अनिता का बाप होने के कारण मैं झेल चुका हूं, वैसी पीड़ा आप को कभी नहीं भोगनी पड़ेगी, ऐसा वचन मैं आप को इस वक्त दे रहा हूं, उमाकांतजी. आप की बेटी का कैसा भी अहित मेरे हाथों कभी नहीं होगा.

‘‘इस महानगर में अनगिनत युवा पढ़ने और जौब करने आए हुए हैं. उन सब को अपने घर व घर वालों की बहुत याद आना स्वाभाविक ही है. घर से दूर अकेली रह रही लड़कियों के लिए बड़ी उम्र वाले किसी प्रभावशाली पुरुष के बहुत निकट हो जाने को समझना भी आसान है क्योंकि वह लड़की अपने पिता के साथ को परदेस में बहुत ‘मिस’ करती हैं.

‘‘जिन दिनों राकेश ने मेरी बेटी को अपने प्रेमजाल में फंसाया, उन दिनों उषा और मैं भी अपने बेटेबहू के पास रहने अमेरिका गए हुए थे. राकेश आज मेरा दामाद जरूर है लेकिन मेरे मन के एक हिस्से ने उसे भावनात्मक दृष्टि से अपरिपक्व अनिता को गुमराह करने के लिए आज भी पूरी तरह से माफ नहीं किया है.

‘‘मेरी पत्नी कमरदर्द के कारण अपाहिज सी हो गई है. बेटाबहू विदेश में हैं. हम दोनों को दीप्ति, रितु व शिखा का बहुत सहारा है. सुखदुख में ये बहुत काम आती हैं हमारे.

‘‘बदले में हम इन्हें घर के जैसा सुरक्षित व प्यार भरा परिवेश देने का प्रयास दिल से करते हैं. हम सब ने एकदूसरे को परिवार के सदस्यों की तरह से अपना लिया है. सगे रिश्तेदारों और पड़ोसियों से ज्यादा बड़ा सहारा बन गए हैं हम एकदूसरे के.

‘‘दीप्ति मुझ से बहुत प्रभावित है… मुझे अपना मार्गदर्शक मानती है…वह मेरे बहुत करीब है पर इस निकटता का मैं गलत फायदा कभी नहीं उठाऊंगा. दीप्ति की जिंदगी में आप मुझे अपनी जगह समझिए, उमाकांतजी.’’

आलोकजी का बोलतेबोलते गला भर आया था. उमाकांत ने रुक कर उन के दोनों हाथ अपने हाथों में लिए और बहुत भावुक हो कर बोले, ‘‘आलोकजी, मैं ने आप को बहुत गलत समझा है. अपनी नजरों में गिर कर मैं इस वक्त खुद को बहुत शर्मिंदा महसूस कर रहा हूं…मुझे माफ कर दीजिए, प्लीज.’’

वे दोनों एकदूसरे के गले लग गए. उन की आंखों से बह रहे आंसुओं ने सारी गलतफहमी दूर करते हुए आपसी विश्वास की जड़ों को सींच मजबूत कर दिया था.

हूबहू शाहरुख खान की कॉपी है ये जनाब, लोग देखकर हो रहे हैं हैरान

शाहरुख खान ऐसे एक्टर है जिनके लाखों करोड़ों फैन है जो उनकी तरह दिखना चाहते है और उनको कॉपी करते है ऐसा ही एक जनाब सूरज भी है जो सर से लेकर पांव तक शाहरुख खान की तरह नजर आते है अब इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है लोग इन्हे असली शाहरुख खान समझ रहे है.

 

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आपको बता दें, कि इस वीडियो में दिख रहा ये लड़का सूरज कुमार शाहरुख खान की हमशक्ल है, जो देखने वालों को खूब हैरान कर रहा है. इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को छोटा शाहरुख लिखकर शेयर किया गया है. जितना ये दिखने में शाहरुख की तरह लग रहे हैं उससे कहीं अधिक वह एक्टर की कॉपी करने की कोशिश करते दिख रहे हैं. इस वीडियो में शाहरुख की तरह हेयरस्टाइल और उनके शुरुआती लुक्स से मैच होते बैगी पैंट में नजर आ रहे हैं सूरज अब सोशल मीडिया पर शाहरुख की झलक देखकर लोग जमकर कॉमेंट्स करते दिख रहे हैं. काफी लोगों ने तो ये भी लिखा है कि उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो पा रहा है.

लोगों ने ऐसे दिए रिएक्शन

एक यूजर ने लिखा है, ’90 के दशक के शाहरुख खान। एक ने कहा है- आप हूबहू शाहरुख की तरह दिखते हैं. एक अन्य यूजर ने कहा है- जब शाहरुख खान फिल्मों में आए थे तब वो ऐसे ही दिखते थे. एक और शाहरुख फैन ने लिखा है- मुझे एक बार के लिए लगा कि ये शाहरुख खान का पहला वीडियो है, फिर पता लगा कि ये शाहरुख खान के कॉपी हैं. एक यूजर ने ये भी कहा है- इन्हें एक मौका इंडस्ट्री में जरूर मिलना चाहिए.

 

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इनके इंस्टटाग्राम बायो में लिखा है- कोलकाता में पैदा हुआ लेकिन झारखंड में रहता हूं. ये खुद को आर्टिस्ट भी बताते हैं और लिखा है कि वह इवेंट और फंक्शंस में परफॉर्म किया करते हैं. बर्थडे पार्टी, वेडिंग, इवेंट के लिए DM करने की भी बातें कही हैं उन्होंने. सूरज के इंस्टाग्राम पर करीब 1 लाख 60 हजार फॉलोअर्स हैं और अपने फैन्स का वह खूब ध्यान भी रखते हैं. सूरज ने अपने इंस्टाग्राम पर तरह-तरह के वीडियोज़ शेयर कर रखे हैं जिनमें वो हूबहू शाहरुख का अवतार नजर आ रहे हैं.

 

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बताते चलें कि शाहरुख खान का जन्म दिल्ली में हुआ था और उन्होंने 1980 में टीवी शो ‘फौजी’ से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था. शाहरुख खान ने साल 1992 में फिल्म ‘दीवाना’ से बॉलीवुड डेब्यू किया. आखिरी बार वह हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘पठान’ में नजर आए हैं, जो कमाई के मामले में बॉलीवुड की अब तक की नंबर वन फिल्म बन गई है. शाहरुख खान अब एटली की ‘जवान’ में नजर आनेवाले हैं. इसके अलावा उनके पास राजकुमार हीरानी की ‘डंकी’ भी है. यह हीरानी और शाहरुख की पहली फिल्म है जिसमें दोनों साथ नजर आएंगे.इस फिल्म में विक्की कौशल और तापसी पन्नू भी हैं.

46 की उम्र में इस एक्ट्रेस ने न्यूड आउटफिट पहन दिखाया बोल्ड लुक, देखें फोटो

पूजा बत्रा अपने हॉट लुक के लिए जानी जाती है सोशल मीडिया पर भी पूजा बत्रा काफी एक्टिव रहती है हम बात कर रहे है हसीना मान जांएगी जैसी मूवी की हिट हिरोइन पूजा बत्रा की. जिन्होने हाल ही में अपना बोल्ड लुक दिखाया है जिसमें वह बेहद ही हॉट लग रही है न्यूड आउटफिट में एक्ट्रेस ने सबके होश उड़ा दिए है.

आपको बता दें, कि पूजा बत्रा 46 साल की है और बॉलीलुड की कई मूवी में काम कर चुकी है जो कि हिट मूवी में से है. पूजा बत्रा ने हाल ही में स्विमिंग पूल में मस्ती करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है जहां उन्होने व्हाइट एंड ब्लैक कलर का स्विम सूट पहन रखा है. जिस वीडियो में पूजा अलग-अलग पोज देती हुई दिख रही है. इस आउटफिट के साथ पूजा ने अपनी आंखों पर काला चश्मा लगाया हुआ है और साथ ही उन्होंने अपने बालों को बांधा हुआ है. इस आउटफिट में पूजा बेहद ही बोल्ड लग रही हैं. इस वीडियो को शेयर करते हुए एक्ट्रेस ने कैप्शन में लिखा, “नेकड ड्रेस, बॉडी ऑन बॉडी.

 

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लोगों ने दिए ऐसे रिएक्शन

पूजा बत्रा के इस वीडियो पर लोग खूब कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “इसके कपड़ों में कुछ गड़बड़ है या फिर ये मैलफंक्शन है.” तो वहीं एक और दूसरे यूजर ने कहा, “ये क्या अजीब-सा डिजाइन है.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने पूजा बत्रा के इस आउटफिट को देखकर लिखा, “इन्होंने अंदर कुछ नहीं पहना क्या?”

 

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बता दें कि एक्ट्रेस पूजा बत्रा ने अपने करियर की शुरुआत साल 1997 में आई फिल्म ‘विरासत’ से की थी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी. इसके बाद पूजा 1999 में फिल्म ‘हसीना मान जाएगी’ में नजर आईं. गोविंदा और संजय दत्त स्टारर यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. बाद में साल 2001 में पूजा ‘दिल ने फिर याद किया’ फिल्म में नजर आई थीं.

 

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