चढ़ती हुई बेल… कैसी दीवानी होती है… नयानया जोबन, अल्हड़पन, बदहवास सी, बस अपनी मस्ती में सरसराती हुई छुईमुई सी हिलोरें लेती है… जिस का सहारा मिल गया, उसी से लिपट जाती है.ऐसा ही तो नव्या के साथ हो रहा था. अभीअभी जवानी की दहलीज पर कदम रखा था मानो एक नशा सा चढ़ने लगा था. एक खुमारी सी…
आईने में खुद को कईकई बार देखना, उभरते अंगों को देख कर मुसकराना और अकेले में उभारों को हलके से छूना और मस्त हो जाना. नहीं संभाल पा रही थी वह अपनी भावनाओं को, अब तो बस वह समा जाना चाहती थी किसी की मजबूत बांहों में, जहां उस के हर अंग पर पा सके वह किसी का चुंबन और सैक्स की गहराई का मजा ले सके.‘‘नव्या, यह क्या तू हर समय आईने के सामने खड़ी रहती है… स्कूल नहीं जाना है क्या? इम्तिहान सिर पर हैं…’’
अचानक तनुजा की आवाज से नव्या चौंक गई.‘‘अरे मम्मी, जा रही हूं न. चोटी कर रही थी…’’ नव्या ने कहा और आईने में अपने उभारों को देख कर मुसकराती हुई यूनिफार्म की कमीज ठीक करने लगी.‘‘चल, जल्दी कर. तेरी फ्रैंड बुला रही है,’’ तनुजा ने लंच बौक्स उस के स्कूल बैग में रखते हुए कहा.‘‘ओके, बाय मम्मी. लव यू…’’ तनुजा को गाल पर किस करते हुए नव्या ने कहा और बैग उठा कर बाहर भाग गई.‘‘यह लड़की भी न, घोड़े पर सवार रहती है,’’ तनुजा बोली और काम में लग गई.
‘‘वाह यार, आज तो तू झकास लग रही है… फेशियल किया है क्या?’’ नव्या की फ्रैंड सुहानी ने उस के दमकते हुए चेहरे को देखते हुए कहा.‘‘नहीं तो, यह तो नैचुरल ग्लो है,’’ नव्या ने इतराते हुए कहा.‘‘आज तो देखना कि विपुल सर तुझे ही ताड़ेंगे. नजरें नहीं हटेंगी उन की तुझ पर से. क्या इरादा है नव्या मैडम…’’ सुहानी ने आंख मारते हुए कहा.‘‘अरे यार, अपने ऐसे नसीब कहां…
मैं तो कब से उन्हें लाइन दे रही हूं, लेकिन वे तो भाव ही नहीं देते. काश, एक बार नजरें इनायत कर लें इस बंदी पर तो लाइफ बन जाए यार,’’ नव्या ने आह भरते हुए कहा और दोनों हंस पड़ीं.‘‘अरे, देख तो यह सिम्मी किस के साथ आई है… चलचल देखते हैं कौन है यह बंदा…’’ स्कूल के सामने एक क्लासमेट को किसी लड़के की बाइक से उतरते देख कर सुहानी बोली.‘‘इस की तो…
चल देखते हैं,’’ नव्या ने खीजते हुए कहा.‘हाय सिम्मी…’ दोनों ने पास पहुंच कर एकसाथ कहा.‘‘हाय फ्रैंड्स, यह है मेरा कजिन वासु. और वासु, ये मेरी फ्रैंड्स हैं नव्या और सुहानी,’’ सिम्मी ने उन्हें आपस में मिलवाया.‘‘हैलो, प्रिटी गर्ल्स,’’ वासु ने सनग्लासेस को बालों पर चढ़ाते हुए कहा.‘‘हैलो,’’ नव्या ने कहा और दावत देती हुई निगाहों से उस की आंखों में देखा, जवाब में वासु ने भी पलकें झपका कर मानो उस का आमंत्रण कबूल किया.‘‘चलोचलो, क्लास शुरू हो जाएगी.
ओके वासु, बायबाय… ऐंड थैंक्यू, तुम नहीं आते तो आज मैं लेट हो जाती,’’ सिम्मी ने कहा.‘‘ओके, बायबाय,’’ वासु ने बाइक स्टार्ट करते हुए कहा और चला गया.नव्या उसे जाते हुए देख रही थी कि सुहानी उस को खींचते हुए स्कूल के अंदर ले गई.क्लास चल रही थी. सभी लड़कियां नोट्स लिखने में मगन थीं, लेकिन नव्या की आंखों के सामने वासु का चेहरा घूम रहा था.‘‘नव्या चौधरी…’’ तभी टीचर की आवाज से वह सहम गई. उसे लगा कि उस की चोरी पकड़ी गई है.‘‘जी मैडम,’’
नव्या अपनी जगह पर खड़े होते हुए बोली.‘‘ध्यान कहां है तुम्हारा? बताओ, क्या पढ़ा रही हूं मैं?’’ टीचर ने गुस्से से तमतमा कर कहा.‘‘मैडम… वह… ये… आप…’’ नव्या कुछ बता नहीं पाई.‘‘चुप रहो, मुझे पता है कि तुम्हारा ध्यान नहीं था. एग्जाम टाइम में यह हाल है, बैठो और अब फोकस करो,’’ टीचर ने हिदायत दी.‘‘जी मैडम,’’ कह कर नव्या बैठ गई. अगला पीरियड विपुल सर का था.
वे बिजनैस एडमिनिस्ट्रेशन पढ़ाते थे. नव्या अब उन के आने का बेसब्री से इंतजार करने लगी.‘‘नव्या, विपुल सर आने वाले हैं,’’ सुहानी ने चुटकी ली.‘‘हां यार, मुझे पता है,’’ बालों को झटकते हुए नव्या बोली.‘‘गुड मौर्निंग गर्ल्स…’’ विपुल सर की आवाज सुनते ही नव्या के कानों में सीटियां बजने लगीं. शरीर को एकदम टाइट कर के, पैर पर पैर चढ़ा कर वह ऐसे बैठी, जिस से स्कर्ट से उस की दूधिया और मांसल जांघें साफ नजर आ रही थीं.विपुल सर की निगाहें एक बार उन्हीं पर जा टिकीं, लेकिन जल्दी ही उन्होंने खुद पर काबू करते हुए पढ़ाना शुरू कर दिया.नव्या का बारबार पहलू बदलना, जांघों को हाईलाइट करना, विपुल सर को खुला आमंत्रण लगा. उन्होंने भी क्लास खत्म होने के बाद नव्या को बुलाया.
नव्या की तो धड़कनें आपे से बाहर हो गईं. वह सर के पास पहुंच कर बोली, ‘‘जी सर?’’‘‘नव्या, तुम्हें कोई प्रौब्लम तो नहीं आ रही है न? अगर कोई कंफ्यूजन हो तो तुम मेरे घर आ सकती हो. मैं तुम्हारे सारे डाउट क्लियर कर दूंगा. अगर तुम चाहो तो…’’ सर ने न्योता देने के अंदाज में कहा. नव्या तो यही चाहती थी. उस ने तपाक से कहा, ‘‘सर, मैं कब आप के घर आ सकती हूं?’’
‘‘आज शाम को ही, स्कूल के बाद.’’‘‘सर, आज तो मुश्किल होगी, क्योंकि मम्मी को बता कर नहीं आई हूं. कल शाम को आऊं क्या?’’ नव्या ने पूछा.‘‘देखो नव्या, ऐसा है कि डाउट जितनी जल्दी क्लियर हो जाए तो अच्छा है. आज मेरी वाइफ भी घर पर नहीं रहेगी तो अकेले में मैं तुम्हें बहुत अच्छे से समझा पाऊंगा. समझ गई न तुम…’’ विपुल सर ने उस के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा.
विपुल सर का हाथ लगते ही नव्या के तनबदन में जैसे चिनगारियां फूटने लगीं, सांसें तेज और गरम हो गईं, गाल दहकने लगे. अब तो जैसे उस का खुद पर काबू पाना मुश्किल हो गया.नव्या ने मन ही मन सोचा, ‘मम्मी को तो कुछ भी बहाना सुना दूंगी, लेकिन आज का यह मौका हाथ से नहीं जाने दूंगी.’वह बोली, ‘‘ठीक है सर, मैं आज ही आती हूं आप के घर. सुहानी से बोल दूंगी कि वह मेरी मम्मी से कह दे कि वीक स्टूडैंट्स की ऐक्स्ट्रा क्लास है.’’‘‘तो तुम मेरे साथ ही चलना.
मैं गाड़ी से अकेले ही तो जाता हूं,’’ विपुल सर ने कहा.‘‘ओके सर,’’ नव्या बोली.‘‘तो शाम को स्कूल के गेट से निकल कर जो पीसीओ है, वहां से मैं तुम्हें पिक करूंगा. ठीक है?’’ विपुल सर ने फिर नव्या का कंधा दबाया और हाथ को पीठ पर फेरते हुए कहा.नव्या का शरीर कड़क हो गया. मुंह से बस इतना ही निकला, ‘‘ओके सर.’’नव्या जल्दी से सुहानी के पास पहुंची और बोली, ‘‘सुन, विपुल सर ने आज मुझे डाउट क्लियर करने के लिए घर बुलाया है. तू मेरी मम्मी को बता देना कि वीक स्टूडैंट्स की ऐक्स्ट्रा क्लास है, तो मैं 2 घंटे लेट हो जाऊंगी.’’



