उर्वशी रौतेला ने खोया 24 कैरेट सोने का आईफोन, लोगों ने किया ट्रोल

बीते शनिवार सभी की निगाहें टीवी पर टिकी हुई थीं. भारतपाकिस्तान का मैच जो था. यह मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया था, जहां कई सेलिब्रटी भी मैच देखने पहुंचे थे, जिन में बौलीवुड की एक्ट्रेस उर्वशी रौतले भी शामिल थी.

ब्लू कलर की खूबसूरत ड्रेस में उर्वशी रौतेला इंडिया को सपोर्ट करने के लिए शामिल हुई थीं. लेकिन उन्हें मैच देखना भारी पड़ गया. दरअसल, एक्ट्रेस ने मैच देखने के दौरान असली सोने का आईफोन खो दिया, जिसे ले कर लोग अब उन्हें ट्रोल करते दिख रहे हैं.


उर्वशी रौतला का 24 कैरेट सोने का आईफोन था, जिसे ले कर वे स्टेडियम पहुंची थीं. लेकिन वहां उन से फोन गुम हो गया. एक्ट्रेस ने ट्वीट कर के इस बात की जानकारी दी और लोगों से अपील की वे उन का गुम हुआ फोन वापस ढूंढ़ने में मदद कर दें.

उर्वशी रौतेला ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मेरा 24 कैरेट के रियल गोल्ड वाला आईफोन खो गया है. अगर किसी को मिले तो मदद करे. जितनी जल्दी हो मुझसे संपर्क कीजिए.’

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Urvashi Rautela (@urvashirautela)


उर्वशी ने अपनी इस पोस्ट में अहमदाबाद पुलिस और नरेंद्र मोदी स्टेडियम को टैग भी किया, जिस पर अहमदाबाद की पुलिस ने रिप्लाई करते हुए लिखा कि फोन की डिटेल शेयर करें.

ट्रोलर्स ने किया ट्रोल

उर्वशी के पोस्ट पर ढेरों फैंस ने सांत्वना दिखाई. वहीं कई लोग उन से मजे लेते हुए दिखाई दिए. एक यूजर ने लिखा कि ‘इस से मेरा क्या फायदा होगा, मुझे क्या मिल रहा है’.

दूसरे यूजर ने लिखा कि ‘किस ने बोला था वहां जाने कि लिए’. एक फैन ने लिखा कि ‘आज सुबह ही झाडू लगाते हुए मिला है मुझे. अपना पर्सनल नंबर डीएम कर दीजिए’.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Urvashi Rautela (@urvashirautela)


किसी और यूजर ने लिखा कि ‘दीदी, अंटेशन पाने के लिए कुछ भी करती है’. एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा कि ‘देखना कही पंत न ले गया हो’.

बताते चलें कि मैच वाले दिन कई फैंस ने सोशल मीडिया पर अपनी वीडियो और फोटोज शेयर की थीं. ऐसे में उर्वशी ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर की थी, जिस में वे ‘चक दे इंडिया’ गाने पर डांस करती हुई नजर आ रही थीं.

प्रियंका चौपड़ा की बुआ की बेटी Mannara chopra ने ‘बिग बौस’ के घर में मचाया तहलका

सलमान खान शो बिग बॉस 17 अब शुरु हो चुका है जिससे जुड़ी खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होन लग गई है, शो इस बार बिलकुल हटके है. जिसमें नए-नए कंटेस्टेंट भी नजर आए है. ऐसा ही एक नाम बिग बॉस17 में गूंज रहा है वो है मन्नारा चोपड़ा. जी हां, तेलगू फिल्में, टीवी शोज और म्यूजिक वीडियोज में काम कर चुकी मन्नारा ने बिग बॉस में एंट्री ली है. जो कि बॉलीवुड की एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और परिणीति की बहन है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Mannara❤️ (@memannara)


बता दें, कि मन्नारा चोपड़ा वही है जिनका रातों-रात एक डायरेक्टर के साथ किसिंग सीन वायरल हुआ था. जिसके बाद वह सुर्खियों में आ गई थीं. वही, अब बिग बॉस में मन्नारा तहलका मचा रही है. पहले दिन ही उन्हे बिग बॉस की फेवरेट कंटेस्टेंट घोषित किया गया है. जहां उन्हे अपनी पसंद का बेडरुम और घर चुनने का मौका दिया गया है. बिग बॉस हाउस में एंट्री मारने वाली मन्नारा ने बताया कि उन्होंने सलमान खान के साथ एक एड फिल्म में काम कर चुकी है. जब सलमान खान ने उन्हे एक बच्ची की तरह ट्रीट किया था. 32 साल की मन्नारा जिद, सीता और हाई फाइव जैसी फिल्मों में काम कर चुकी है.

कौन हैं मन्नारा चोपड़ा

आप को बता दें कि मन्नारा चोपड़ा एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा और प्रियंका चोपड़ा की बुआ की बेटी हैं. उन्होंने साउथ की कई फिल्मों में काम किया है. लेकिन हिंदी सिनेमा में पैर जमाने अभी बाकी है. हालांकि हिंदी सिनेमा में उन्होंने ‘जिद’ फिल्म से शुरुआत की थी. यही उन की एकलौती हिंदी फिल्म रही है.

बता दें कि मन्नारा चोपड़ा हरियाणा की रहने वाली हैं. उन्होंने बिग बौस हाउस में जाने से पहले सलमान खान के साथ जम कर मस्ती की. पहले उन्होंने सलमान खान के साथ गोलगप्पे खाए, फिर स्टेज पर पर परफॉर्म किया.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Mannara❤️ (@memannara)


पहले मन्नारा को ‘बिग बौस, में दूसरे कंटेस्टेंट के लिए घर और बेडरूम चुनने का मौका दिया, लेकिन मन्नारा ने कहा कि उन्हे फेवरेटिज्म पसंद नहीं है तो बिग बौस ने उन से यह पावर छीन ली और बाकि घर वालों को खुद अपने लिए बेडरूम चुनने का अधिकार दिया गया.

मेरी गर्लफ्रैंड शादी नहीं करना चाहती है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं अपनी गर्लफ्रैंड से बहुत प्यार करता हूं. वह भी मुझे बहुत चाहती तो है लेकिन मुझ से शादी नहीं कर सकती. जबकि मैं शादी कर के लाइफ में सैटल होना चाहता हूं. मैं उस के बगैर जिंदगी नहीं गुजार सकता. कुछ समझ नहीं आ रहा, क्या करूं. कोई निर्णय नहीं ले पा रहा. आप ही कुछ सुझाएं.

जवाब

आप ने यह नहीं लिखा कि लड़की आप से शादी क्यों नहीं कर सकती. खैर, वजह जो भी हो, यह साफ है कि आप की ख्वाहिश गर्लफ्रैंड के साथ पूरी नहीं हो सकती.

आप को यह समझना होगा कि हर लवस्टोरी का दि एंड शादी नहीं होता और न ही हर लवस्टोरी हैप्पी एंडिग वाली होती है. कभीकभी इतने ज्यादा अप्स एंड डाउंस आते हैं कि ऐसा लगता है मानो अब सब खत्म हो गया है लेकिन ‘द शो मस्ट गो औन.’  किसी के आने या जाने से कभी जिंदगी न रुकी है न कभी रुकेगी. जीना तो हर हाल में पड़ता है तो क्यों न मुसकरा कर जिया जाए.

आप लाइफ में सैटल होना चाहते हैं तो इस रिलेशनशिप पर स्टौप लगा दें. आप दोनों का अलग होना ही ठीक है. कोई और लाइफपार्टनर ढूंढ़िए और लाइफ में आगे बढ़िए. जीने का यही सही तरीका है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

पोर्न के साइड इफैक्ट्स : हैं भी या नहीं?

24 साल की नेहा मल्टीनैशनल कंपनी में काम करती है. उसे काम के सिलसिले में विदेश जाना पड़ता है. वह अभी अविवाहित है. पोर्नोग्राफी के बारे में पूछे गए सवाल पर वह कहती है, ‘‘दूसरी लड़कियों का तो मुझे पता नहीं लेकिन मेरा जब मूड होता है, पोर्न मूवी देखती हूं. कई बार हम पार्टी भी करते हैं. नाइट पार्टी में अगर बौयज हैं तो कुछ न कुछ हो सकता है. ऐसे में मैं पार्टी से पहले पोर्न देखती हूं. मुझे इस में कोई बुराई नजर नहीं आती. यह मेरे जीवन का निजी हिस्सा है. मैं कभी किसी के साथ इस विषय पर कोई बात नहीं करती, अपनी सहेलियों से भी नहीं.’’

पोर्न आज के दौर में एक बड़ी इंडस्ट्री बन गया है, जिस का सालाना टर्नओवर अरबों डौलर का है. विश्व के अधिकतर लोगों ने कभी न कभी पोर्न फिल्में देखी होंगी. भारत में युवाओं में पोर्न देखने का चलन बढ़ता जा रहा है. इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत पिछले 2-3 वर्षों में सब से ज्यादा पोर्न देखने वाले देशों में 10वें से तीसरे स्थान पर आ गया है.

अति तो किसी भी चीज की बुरी होती है. पोर्न की लत किसी नशे की तरह है, जो आसानी से पीछा नहीं छोड़ती. पोर्न देखने में उतनी बुराई नहीं पर पोर्न का एडिक्शन होना बुरा होता है. यह सामाजिक, शारीरिक और मानसिक हर रूप में जीवन पर बुरा प्रभाव डालता है. एक रिसर्च में पाया गया कि जो व्यक्ति ज्यादा पोर्न फिल्में देखते हैं, उन का दिमाग सिकुड़ जाता है.

यदि व्यक्ति के दिमाग का स्ट्रेटम छोटा है तो उसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. इसी अध्ययन में यह भी पता चला है कि पोर्न फिल्में देखने वाला व्यक्ति अपनी निजी जिंदगी में भी उसी तरह सैक्स करना चाहता है, लेकिन अकसर ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि पोर्न फिल्मों को जानबूझ कर ज्यादा भड़काऊ और आकर्षक बनाया जाता है. वैसा करना आम आदमी के बस की बात नहीं. इस का नुकसान यह होता है कि व्यक्ति को कभी संतुष्टि नहीं मिल पाती. व्यक्ति के स्वभाव में क्रूरता और उग्रता आ जाती है जिस से वह चिड़चिड़ा हो जाता है.

पोर्न से दूर होते दोस्त और परिवार

नेहा ने बताया कि हम दोस्तों से भले ही हर बात शेयर करते हों पर यह नहीं बताते कि हम पोर्न देखते हैं. असल में पोर्न के शिकार युवा दोस्तों से दूरी बनाने लगते हैं. वे हमेशा नया पोर्न देखने का लिए प्रयासरत रहते हैं.

पोर्न न देखने का कारण बताते हुए शिविका कहती है, ‘‘पोर्न देखने से सैक्स की जानकारी होती है क्योंकि जिंदगी में सैक्स का काफी महत्त्व है. हमारे समाज में सैक्स पर खुल कर बात नहीं होती है. सैक्स में सावधानी और संयम की बहुत जरूरत है. पोर्न देखने वाले युवा एकाकी स्वभाव के होते हैं.’’

ऐसे युवा परिवार में भी अलगथलग रहने की कोशिश करते हैं. वे अपने पेरैंट्स से दूर होते जाते हैं. धीरेधीरे वे अपने भाईबहन से भी दूर होने लगते हैं. वे हमेशा एकांत की तलाश में रहते हैं. अब मोबाइल, लैपटौप और कंप्यूटर पर इस की सुविधा होने से पोर्न देखना आसान हो गया है. आज मोबाइल पर सब से ज्यादा पोर्न देखा जाता है. युवा अपने मोबाइल इसी कारण दूसरों से दूर रखते हैं. कई बार किसी को दूसरी फिल्में या फोटो भेजने की जगह पर पोर्न फिल्में गलती से चली जाती हैं जिस से इमेज खराब होती है.

सेहत और पढ़ाई पर प्रभाव   

युवावस्था कैरियर बनाने के लिहाज से सब से अहम होती है. इस दौरान युवाओं का पोर्न की तरफ आकर्षित होना कैरियर पर बुरा प्रभाव डालता है. मनोविज्ञानी बताते हैं कि इसे देखने वाले युवाओं का मन भटक  जाता है. वे हमेशा इस के प्रभाव में रहते हैं. ऐसे में उन का कैरियर खराब हो जाता है. आमिर खान की फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में यह दिखाया गया है कि साथी अपने ही दोस्तों का ध्यान पढ़ाई से हटाने के लिए होस्टल में उन्हें पोर्न किताबें दे देते थे जिस से साथी के नंबर कम आएं या वह फेल हो जाए.

पोर्न देखने वाले ज्यादातर युवा अप्राकृतिक सैक्स के आदी हो जाते हैं. वैसे मैडिकली यह बुरा नहीं है पर अगर सही तरह और हाईजीन का ध्यान रख कर नहीं किया जाएगा तो यह हैल्थ की नजर से खराब होता है.

सैक्स जीवन पर असर

लगातार पोर्न देखने से व्यक्ति अपने पार्टनर से वैसी ही उम्मीद रखने लगता है जैसा पोर्न फिल्मों में दिखाया जाता है लेकिन इसे हकीकत में उतारना मुमकिन नहीं होता. इस का नुकसान यह होता है कि व्यक्ति का अपने पार्टनर के प्रति अलगाव पैदा होने लगता है. जब लड़कियां ऐसे पोर्न देखती हैं और शादी के बाद उन्हें ऐसे हालात नहीं मिलते तो उन का वैवाहिक जीवन खराब होने लगता है.

पोर्न देखने से सैक्स को ले कर विकृत नजरिया बन जाता है. शादी के बाद तमाम लड़कियों को यह शिकायत होती है कि उन के पति ने अप्राकृतिक सैक्स की डिमांड की या जोरजबरदस्ती की. औक्सिटौसिन दिमाग में पाया जाने वाला एक शक्तिशाली हार्मोन है जिसे ‘लव हार्मोन’ भी कहा जाता है. यह हार्मोन पुरुष और महिलाओं दोनों को बंधन में बांधने में मदद करता है. अगर सैक्स पोर्न फिल्मों की तरह किया जाए तो यह हार्मोन काम नहीं करता जिस का असर रिश्तों पर पड़ता है.

सैक्स को पोर्न फिल्मों की तरह करने वाले व्यक्ति फोरप्ले ठीक ढंग से नहीं कर पाते. फोरप्ले के दौरान जोड़े चरम सुख लेते हैं जिस से उन में काफी निकटता आती है पर पोर्न वाली मानसिकता के कारण यह कहीं खो जाती है.

कुछ लोग उत्तेजित होने के लिए पोर्न का सहारा लेने लगते हैं और धीरेधीरे यह उन की आदत बन जाती है. इस का नुकसान यह होता है कि व्यक्ति प्राकृतिक तौर पर उत्तेजित होने में नाकाम होने लगता है जिस का आगे चल कर नुकसान होता है. अवैध संबंधों के लिए पोर्न काफी हद तक जिम्मेदार है. ज्यादा पोर्न देखने वाले लोग अकसर किसी के साथ अवैध संबंध बनाने के बारे में सोचते रहते हैं जो समाज के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो रहा है और कई बार मर्यादा तारतार होने की भी आशंका रहती है. पोर्न देखने का यह सब से बड़ा नुकसान है.

प्यार में हद पार करने का खतरनाक नतीजा

अगस्त, 2016 की सुबह मध्य प्रदेश के जिला ग्वालियर के थाना पुरानी छावनी के खेरिया गांव के अटल गेट के पास खेत में 24-25 साल के एक युवक की लाश पड़ी होने की सूचना गांव वालों ने पुलिस को दी तो अधिकारियों को सूचना दे कर थानाप्रभारी प्रीति भार्गव पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गईं. वह घटनास्थल और लाश का निरीक्षण कर रही थीं कि एसपी हरिनारायण चारी मिश्र और एएसपी दिनेश कौशल भी घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल पर गांव वालों की भीड़ लगी थी.

थानाप्रभारी प्रीति भार्गव ने लाश और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त करानी चाही, लेकिन कोई भी मृतक को पहचान नहीं सका. इस से साफ हो गया कि मृतक वहां का रहने वाला नहीं था. मृतक की जेबों की तलाशी ली गई तो उस की पैंट की जेब से मोटरसाइकिल की चाबी मिली. लाश से थोड़ी दूरी पर एक मोटरसाइकिल खड़ी थी. पुलिस ने मृतक की जेब से मिली चाबी उस मोटरसाइकिल में लगाई तो वह स्टार्ट हो गई. इस से पुलिस को लगा कि इस मोटरसाइकिल से मृतक की शिनाख्त हो सकती है.

पुलिस ने मोटरसाइकिल जब्त कर अन्य तमाम काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. लेकिन जब पुलिस ने आरटीओ औफिस से मोटरसाइकिल के बारे में पता किया तो पता चला कि वह मोटरसाइकिल विनयनगर, सेक्टर 3, पत्रकार कालोनी के रहने वाले संतोष किरार की थी.

पुलिस ने उस के घर जा कर पता किया तो घरवालों ने बताया कि संतोष एक अगस्त की सुबह अपनी मोटरसाइकिल से निकला है तो अब तक घर लौट कर नहीं आया है. इस से पुलिस को लगा कि खेत में पड़ी लाश संतोष की हो सकती है. लेकिन जब पुलिस ने वह लाश उस के पिता रामकिशोर को दिखाई तो उन्होंने बताया कि यह लाश उन के बेटे संतोष की नहीं है. इस के बाद पुलिस को लगा कि इस हत्याकांड में संतोष की कोई न कोई भूमिका जरूर है.

प्रीति भार्गव लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश कर रही थीं कि शाम को थाना हजीरा के रहने वाले तुलसीराम पिछली शाम से गायब अपने बेटे की तलाश करतेकरते उन के पास आ पहुंचे. दरअसल, पिछली शाम को घर से निकला उन का बेटा शीतल न लौट कर आया था और न उस का फोन मिला था, तब परेशान हो कर वह थाना हजीरा में उस की गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंच गए थे.

वहां से जब उन्हें बताया गया कि थाना पुरानी छावनी पुलिस ने एक लड़के की लाश बरामद की है तो वह थाना पुरानी छावनी पहुंच गए थे. थाना पुरानी छावनी पुलिस ने तुलसीराम को बरामद लाश दिखाई तो वह फफकफफक कर रोने लगे. इस के बाद उन्होंने खेतों में मिली लाश की शिनाख्त अपने बेटे शीतल की लाश के रूप में कर दी थी.

प्रीति भार्गव ने हत्यारे का पता लगाने के लिए तुलसीराम से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन की किसी से ऐसी दुश्मनी नहीं थी कि उन के बेटे की इस तरह हत्या कर दी जाती. उन से पत्रकार कालोनी के रहने वाले संतोष के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उस के बारे में जानने से मना कर दिया. तुलसीराम के बताए अनुसार, उन की किराने की दुकान थी. दोपहर को दुकान पर उन का बेटा शीतल बैठता था. इस तरह वह पिता के कारोबार में हाथ बंटाता था.

पुलिस ने हत्याकांड के खुलासे के लिए जितने भी लोगों से पूछताछ की, उन में से कोई भी ऐसी बात नहीं बता सका, जिस से वह हत्यारे तक पहुंच पाती. प्रीति भार्गव की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर शीतल खेरिया गांव क्यों गया? अगर वह संतोष के साथ वहां गया था तो उन के बीच ऐसा क्या हुआ कि संतोष ने उसे मौत के घाट उतार दिया? यह सब जानने के लिए पुलिस को संतोष की तलाश थी. आखिर आठवें दिन काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस पूछताछ में वह असलियत छिपा नहीं सका और उस ने शीतल की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उस ने शीतल की हत्या की जो कहानी सुनाई वह हैरान करने वाली तो थी ही, साथ ही आज के युवाओं में स्त्रीसुख की जो लालसा उपजी है, उस की हकीकत बयां करने वाली थी. पत्रकार कालोनी का रहने वाला इलेक्ट्रिशियन संतोष 31 जुलाई, 2016 की शाम घर लौट रहा था तो रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क पर खड़े एक युवक ने उसे हाथ दे कर रोक कर कहा, ‘‘भाई साहब, मैं यहां काफी देर से किसी सवारी का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन कोई सवारी मिल नहीं रही है. अगर आप मुझे अपनी मोटरसाइकिल से लिफ्ट दे दें तो बड़ी मेहरबानी होगी.’’

संतोष ने उसे मोटरसाइकिल पर बैठा लिया. इस के बाद उस युवक ने अपना नाम शीतल बताते हुए कहा, ‘‘हजीरा के इंद्रनगर में मेरे पिता की किराने की दुकान है. मैं उसी पर बैठता हूं. लेकिन अब मेरा मन दुकान पर बैठने को नहीं होता, इसलिए मैं नौकरी खोज रहा हूं. इंटरव्यू देने ही मैं झांसी जा रहा था, लेकिन दुर्भाग्य से मेरी ट्रेन छूट गई.’’

‘‘कोई बात नहीं, यार, मैं तुम्हारी नौकरी यहीं लगवा दूंगा.’’ संतोष ने कहा. विजयनगर पहुंचतेपहुंचते दोनों में ऐसी दोस्ती हो गई कि उन्होंने पीनेपिलाने का प्रोग्राम बना डाला. फिर इस नई दोस्ती के नाम पर दोनों में एकदूसरे को शराब पिलाने की होड़ लग गई, जिस में करीब 500 रुपए खर्च हो गए. शराब के नशे ने अपना असर दिखाया तो संतोष ने जाने कितनी बार शीतल को भरोसा दिलाया कि जल्द ही वह उस की नौकरी ग्वालियर में लगवा देगा. उसे यह शहर छोड़ कर कहीं दूसरी जगह जाना नहीं पड़ेगा.

संतोष शीतल से बातें कर रहा था, तभी उस की प्रेमिका रेखा (बदला हुआ नाम) का उस के मोबाइल पर फोन आ गया. शीतल से उस की दोस्ती हो ही चुकी थी, इसलिए उस से बिना कुछ छिपाए वह रेखा से अश्लील यानी शारीरिक संबंधों की बातें करने लगा. संतोष रेखा से जो बातें कर रहा था, उन्हें सुनसुन कर शीतल उत्तेजित हो उठा. तब उस ने बिना किसी संकोच के संतोष से कहा, ‘‘कल तुम अपनी प्रेमिका से मिलने जा रहे हो न, मुझे भी कल उस से मिलवा दो.’’

‘‘तुम उस से मिल कर क्या करोगे?’’ संतोष ने कहा तो जरा भी झिझके बिना शीतल ने कहा, ‘‘जो तुम करोगे, वही मैं भी करूंगा.’’

इस पर संतोष नाराज होते हुए बोला, ‘‘रेखा ऐसी लड़की नहीं है. वह केवल मुझ से ही बातें करती है और केवल मुझ से उस के शारीरिक संबंध हैं.’’ उस समय तो संतोष ने शीतल को समझाबुझा कर उस के घर भेज दिया. लेकिन सुबह होते ही शीतल संतोष को फोन कर के कहने लगा कि वही उस का सच्चा दोस्त है. सिर्फ एक बार वह अपनी प्रेमिका से उसे भी मौजमजा ले लेने दे. यही नहीं, उस ने यहां तक पूछ लिया कि वह कितनी देर में रेखा को उस के पास भिजवा रहा है.

नए दोस्त के मुंह से सुबहसुबह प्रेमिका के बारे में ऐसी बातें सुन कर संतोष को गुस्सा आ गया. किसी तरह अपने गुस्से पर काबू पाते हुए उस ने कहा, ‘‘एक घंटे के भीतर तू मेरे घर आ जा, आज मैं तुझे रेखा से मिलवा ही देता हूं. तू भी याद करेगा कि कोई दोस्त मिला था.’’ शीतल के आने से पहले संतोष ने तय कर लिया था कि प्रेमिका पर बुरी नजर रखने वाले शीतल को अब वह जिंदा नहीं छोड़ेगा. जैसे ही शीतल उस के घर पहुंचा, वह उसे ले कर निकल पड़ा.

संतोष ने ठेके से शराब की 2 बोतलें खरीदीं और मोटरसाइकिल से शीतल को ले कर पुरानी छावनी की ओर चल पड़ा. वहां एक पेड़ के नीचे बैठ कर दोनों ने शराब पी. अपनी योजना के अनुसार संतोष ने शीतल को कुछ ज्यादा शराब पिला दी थी. शीतल को जैसे ही शराब का नशा चढ़ा, उस ने कहा, ‘‘चलो बुलाओ रेखा को. तुम ने उस के साथ बहुत मजा लिया है, आज मैं उस के साथ ऐसा मजा लूंगा कि वह भी याद करेगी.’’

संतोष रात से ही शीतल की इन बातों से जलाभुना बैठा था. उस ने पैंट की जेब में रखा चाकू निकाला और एक ही झटके में शीतल का गला रेत कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद उस ने शराब की बोतल उठा कर एक ही सांस में पूरी शराब पी ली और शीतल की लाश को वहीं अटल गेट के पास एक खेत में छोड़ कर चला आया. मोटरसाइकिल वह इसलिए नहीं ला सका, क्योंकि उस की मोटरसाइकिल रास्ते में शीतल ने चलाने के लिए ले ली थी और उस की चाबी उस ने अपनी जेब में रख ली थी.

इसलिए शीतल की हत्या करने के बाद जब संतोष ने अपनी जेब में मोटरसाइकिल की चाबी देखी. चाबी न पा कर नशे में होने की वजह से उसे लगा कि चाबी कहीं गिर गई है. हड़बड़ाहट में वह गाड़ी वहीं छोड़ कर घर चला और घर से कानपुर चला गया. उसे उम्मीद थी कि पुलिस उस तक कभी नहीं पहुंच पाएगी. एक सप्ताह तक वह निश्चिंत हो कर कानपुर में रहा. लेकिन शायद उसे पता नहीं था कि अपराध चाहे कितनी भी चालाकी से क्यों न किया जाए, एक न एक दिन उस का राज खुल ही जाता है. पैसे खत्म होने के बाद संतोष पैसे लेने के लिए जैसे ही घर आया, थानाप्रभारी प्रीति भार्गव ने उसे पकड़ लिया. संतोष से पूछताछ में पता चला कि उस ने शीतल की हत्या जिस खेत में की थी, लाश वहां नहीं मिली थी.

पुलिस ने खेत की रखवाली करने वाले सोनू कुशवाह से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस ने लाश पड़ी देखी तो डर के मारे उस ने अपने रिश्तेदार सैकी कुशवाह की मदद से लाश ले जा कर खेरिया मोड़ पर अटल गेट के पास रमेश शर्मा के खेत में फेंक दी थी. पुलिस ने सोनू और सैकी को हिरासत में ले लिया. इन का दोष यह था कि इन्होंने लाश पड़ी होने की सूचना पुलिस को नहीं दी थी, इस के अलावा सबूत नष्ट किए थे. पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भिजवा दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सहयोग : रंजीत सुर्वे

पहले मिलन को कुछ इस तरह से बनाएं यादगार : 8 रोमांटिक नुस्खे

अगर आप अपने जीवनसाथी के साथ पहले मिलन को यादगार बनाना चाहती हैं तो आप को न केवल कुछ तैयारी करनी होंगी, बल्कि साथ ही रखना होगा कुछ बातों का भी ध्यान. तभी आप का पहला मिलन आप के जीवन का यादगार लमहा बन पाएगा.

  1. करें खास तैयारी: पहले मिलन पर एकदूसरे को पूरी तरह खुश करने की करें खास तैयारी ताकि एकदूसरे को इंप्रैस किया जा सके.

2. माहौल हो खास: वह जगह जहां आप पहली बार एकदूसरे से शारीरिक रूप से मिलने वाले हैं, वहां का माहौल ऐसा होना चाहिए कि आप अपने संबंध को पूरी तरह ऐंजौय कर सकें.

कमरे में विशेष प्रकार के रंग और खुशबू का प्रयोग कीजिए. आप चाहें तो कमरे में ऐरोमैटिक फ्लोरिंग कैंडल्स से रोमानी माहौल बना सकती हैं. इस के अलावा कमरे में दोनों की पसंद का संगीत और धीमी रोशनी भी माहौल को खुशगवार बनाने में मदद करेगी. कमरे को आप रैड हार्टशेप्ड बैलूंस और रैड हार्टशेप्ड कुशंस से सजाएं. चाहें तो कमरे में सैक्सी पैंटिंग भी लगा सकती हैं.

फूलों से भी कमरे को सजा सकती हैं. इस सारी तैयारी से सैक्स हारमोन के स्राव को बढ़ाने में मदद मिलेगी और आप का पहला मिलन हमेशा के लिए आप की यादों में बस जाएगा.

3. खुद को रखें साफसुथरा : पहले मिलन का दिन निश्चित हो जाने के बाद आप खुद की ग्रूमिंग पर भी ध्यान दें. खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करें. इस से न केवल आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि आप स्ट्रैस फ्री हो कर बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगी. पहले मिलन से पहले पर्सनल हाइजीन को भी महत्त्व दें ताकि आप को संबंध बनाते समय झिझक न हो और आप पहले मिलन को पूरी तरह ऐंजौय कर सकें.

4. प्यार भरा उपहार: पहले मिलन को यादगार बनाने के लिए आप एकदूसरे के लिए गिफ्ट भी खरीद सकते हैं. जो आप दोनों का पर्सनलाइज्ड फोटो फ्रेम, की रिंग या सैक्सी इनरवियर भी हो सकता है. ऐसा कर के आप माहौल को रोमांटिक और उत्तेजक बना सकती हैं.

6. खुल कर बात करें: पहले मिलन को रोमांचक और यादगार बनाने के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार करें. अपने पार्टनर से इस बारे में खुल कर बात करें. अपने मन में उठ रहे सवालों के हल पूछें. एकदूसरे की पसंदनापसंद पूछें. जितना हो सके पौजिटिव रहने की कोशिश करें.

7. सैक्स सुरक्षा: संबंध बनाने से पहले सैक्सुअल सुरक्षा की पूरी तैयारी कीजिए. सैक्सुअल प्लेजर को ऐंजौय करने से पहले सैक्स प्रीकौशंस पर ध्यान दें. आप का जीवनसाथी कंडोम का प्रयोग कर सकता है. इस से अनचाही प्रैगनैंसी का डर भी नहीं रहेगा और आप यौन रोगों से भी बच जाएंगी.

8. सैक्स के दौरान

 – सैक्सी पलों की शुरुआत सैक्सी फूड जैसे स्ट्राबैरी, अंगूर या चौकलेट से करें.

– ज्यादा इंतजार न कराएं.

– मिलन के दौरान कोई भी ऐसी बात न करें जो एकदूसरे का मूड खराब करे या एकदूसरे को आहत करे. इस दौरान वर्जिनिटी या पुरानी गर्लफ्रैंड या बौयफ्रैंड के बारे में कोई बात न करें.

– संबंध के दौरान कल्पनाओं को एक तरफ रख दें. पोर्न मूवी की तुलना खुद से या पार्टनर से न करें और वास्तविकता के धरातल पर एकदूसरे को खुश करने की कोशिश करें.

– बैडरूम में बैड पर जाने से पहले अगर आप घर में या होटल के रूम में अकेली हों तो थोड़ी सी मस्ती, थोड़ी सी शरारत आप काउच पर भी कर सकती हैं. ऐसी शरारतों से पहले सैक्स का रोमांच और बढ़ जाएगा.

– सैक्स संबंध के दौरान उंगलियों से छेड़खानी करें. पार्टनर के शरीर के उत्तेजित करने वाले अंगों को सहलाएं और मिलन को चरमसीमा पर ले जा कर पहले मिलन को यादगार बनाएं.

– मिलन से पहले फोरप्ले करें. पार्टनर को किस करें. उस के खास अंगों पर आप की प्यार भरी छुअन सैक्स प्लेजर को बढ़ाने में मदद करेगी.

– सैक्स के दौरान सैक्सी टौक करें. चाहें तो सैक्सुअल फैंटेसीज का सहारा ले सकती हैं. ऐसा करने से आप दोनों सैक्स को ज्यादा ऐंजौय कर पाएंगे. लेकिन ध्यान रहे सैक्सुअल फैंटेसीज को पूरा के लिए पार्टनर पर दबाव न डालें.

– संयम रखें. यह पहले मिलन के दौरान सब से ज्यादा ध्यान रखने वाली बात है, क्योंकि पहले मिलन में किसी भी तरह की जल्दबाजी न केवल आप के लिए नुकसानदेह होगी, बल्कि आप की पहली सैक्स नाइट को भी खराब कर सकती है.

सैक्स के दौरान बातें करते हुए सहज रह कर संबंध बनाएं. तभी आप पहले मिलन को यादगार बना पाएंगे. संबंध के दौरान एकदूसरे के साथ आई कौंटैक्ट बनाएं. ऐसा करने से पार्टनर को लगेगा कि आप संबंध को ऐंजौय कर रहे हैं.

वायरल हुआ रवि किशन का बोल्ड वीडियो, रिंकू घोष संग किया रोमांस

रवि किशन एक ऐसा नाम है जिनके चर्चे सिर्फ भोजपुरी फिल्मों में ही नहीं होते बल्कि बॉलीवुड में भी इनका नाम कायम है हाल ही में उन्होंने अक्षय कुमार की फिल्म ‘मिशन रानीगंज’ में नजर आए थे. इससे पहले भी वो बॉलीवुड को कई फिल्में दे चुके है हालांकि, भोजपुरी में भी उनके कई चर्चे होते है. अब हाल ही में उनका एक भोजपुरी वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वो एक्ट्रेस संग बोल्ड सीन करते नजर आ रहे है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Ravi Kishan (@ravikishann)


रवि किशन का एक पुराना वीडियो सामने आया है, जो कि इंटरनेट वर्ल्ड में ताबड़तोड़ वायरल हो रहा है. इस वीडियो में उनके साथ एक्ट्रेस रिंकू घोष नजर आ रही है यह एक पुराना गाना है. जिसका नाम है ‘सकेत होता राजा’. ये इन दिनों इंटरनेट पर वायरल हो रहा है इसमें दोनों एक्टर काफी बोल्ड सीन प्ले करते दिख रहे है लोग इस वीडियो पर खूब प्यार बरसा रहे है. देखते ही देखते ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.

रवि किशन और रिंकू घोष की केमिस्ट्री लोगों को काफी पसंद आ रही है. यही वजह है कि इस गाने को अबतक 50 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. इससे पहले भी रवि किशन और रिंकू घोष ने कई गानों में धमाल मचाया हैं. दोनों की जोड़ी को फैंस काफी प्यार देते है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Rinku Ghosh (@rinkughosh_official)

बताते चलें कि भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन की फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है. इस मामले में वो पवन सिंह से लेकर खेसारी लाल यादव तक को टक्कर देते हैं. इतना ही नहीं रवि किशन कई बॉलीवुड स्टार्स से ज्यादा मशहूर हैं. इसके अलावा रवि किशन राजनीति में भी एक्टिव हैं. रवि किशन 2019 की लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की गोरखपुर सीट से सांसद चुने गए थे. मालूम हो कि रवि किशन ने भोजपुरी, टीवी और बॉलीवुड फिल्मों में काम किया हैं. उनकी एक्टिंग को लोग काफी पसंद करते हैं.

 

प्यार का खौफनाक पहलू

उत्तर प्रदेश जिला रायबरेली के थाना बछरावां का एक गांव है गजियापुर. इसी गजियापुर का छोटा सा मजरा है शेखपुरा समोधा. पुत्तीलाल लोध अपने परिवार के साथ इसी मजरे में रहता था. उस के परिवार में पत्नी सुशीला के अलावा 2 बेटियां आशा व माया और एक बेटा था उमेश. पुत्तीलाल कास्तकार था और खेतीकिसानी से अपने परिवार का भरणपोषण करता था. वह सीधासादा सरल स्वभाव का व्यक्ति था.

पुत्तीलाल की 3 संतानों में आशा सब से बड़ी थी. वह खूबसूरत तो थी ही 16वां बसंत आतेआते उस की खूबसूरती और भी निखर गई थी. उस का अंगअंग फूलों की तरह महक उठा था. उस की पतली कमर, नैननक्श और गोरा रंग किसी को भी आंखों में चाहत जगा देने के लिए काफी थे.

खूबसूरत होने के साथ आशा पढ़ाई-लिखाई में भी तेज थी. प्रथम श्रेणी में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर के बीए में एडमिशन ले लिया था. आशा की खूबसूरती ने कई युवकों को उस का दीवाना बना दिया था. लड़के उस के आगेपीछे घूमते थे. इन लड़कों में बृजेंद्र कुमार भी था.

बृजेंद्र शेखपुरा समोधा का ही रहने वाला था. उस का घर आशा के घर से कुछ दूरी पर था. बृजेंद्र के पिता जागेश्वर दबंग किसान थे. उन की आर्थिक व पारिवारिक स्थिति भी मजबूत थी. बृजेंद्र कुमार हृष्ट-पुष्ट सजीला नौजवान था. रहता भी बनसंवर कर था. वह पढ़ने में भी वह अच्छा था. बीए पास करने के बाद उस का चयन बीटीसी में हो गया था. वह अध्यापक बनने का इच्छुक था.

बृजेंद्र और आशा बचपन से एकदूसरे को जानते थे. कालेज आतेजाते दोनों की मुलाकातें होती रहती थीं. दोनों एकदूसरे को चाहत भरी नजरों से देखते और फिर मुसकरा देते थे. बृजेंद्र आशा को चाहने लगा था. आशा भी उस की आंखों की भाषा समझती थी. उसे अपने लिए बृजेंद्र की आंखों में प्यार का सागर हिलोरे मारता लगता था. धीरेधीरे उस के मन में भी बृजेंद्र के प्रति आकर्षण पैदा हो गया.

जब बृजेंद्र को आभास हुआ कि आशा उस की ओर आकर्षित है तो वह दिल की बात दिल में नहीं रख सका. एक दिन आशा कालेज से अकेली घर लौट रही थी. बृजेंद्र ने उसे रास्ते में रोक लिया. आशा भले ही अकेली थी, लेकिन रास्ता सुनसान हीं था. इसलिए वहां दिल की बात नहीं कहीं जा सकती थी. मिनट 2 मिनट बात करने पर भले ही कोई संदेह न करता, लेकिन दिल की बात कहने के लिए समय चाहिए था, क्योंकि इजहारे इश्क करते के लिए भूमिका बांधने में ही समय लग जाता है.

यही वजह थी कि उस समय दिल की बात कहने के बजाए बृजेंद्र ने सिर्फ इतना ही कहा, ‘‘आशा, क्या आज शाम 7 बजे तुम मुझ से मिलने गांव के बाहर बगीचे में आ सकती हो?’’

आशा कुछ कहती उस के पहले ही बृजेंद्र ने एक बार फिर कहा, ‘‘मैं बेसब्री से तुम्हारा वहीं इंतजार करूंगा.’’

आशा का जवाब सुने बगैर बृजेंद्र चला गया. आशा हैरानी से तब तक उसे जाते देखती रही जब तक वह उस की आंखों से ओझल नहीं हो गया. वह जानती थी कि बृजेंद्र ने उसे क्यों बुलाया है? सवाल यह था कि वह उस से मिलने जाए या न जाए. यही सोचते हुए वह घर पहुंच गई.

दोनों की पहली मुलाकात
आशा घर जरूर पहुंच गई, लेकिन उस का मन बेचैन था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि जाए या न जाए. वह भले ही कितनी भी बेचैन रही. लेकिन शाम को बृजेंद्र से मिलने जाने से खुद को रोक नहीं सकी.

सहेली के घर जाने का बहाना बना कर वह बगीचे में पहुंची तो बृजेंद्र वहीं बैठा उस का इंतजार कर रहा था. उसे देख कर बृजेंद्र मुसकराते हुए बोला, ‘‘मुझे पूरा विश्वास था कि तुम जरूर आओगी.’’

‘‘चलो यह अच्छी बात है कि तुम्हारा विश्वास नहीं टूटा. बताओ मुझे क्यों बुलाया है?’’

‘‘पहली बात तो यह कि तुम्हें पता है कि मैं ने तुम्हें क्यों बुलाया है. फिर भी बता दूं कि मैं ने तुम्हें यह बताने के लिए बुलाया है कि मैं तुम से प्यार करने लगा हूं.’’

बृजेंद्र की इस बात पर आशा को कोई हैरानी नहीं हुई. क्योंकि उसे पहले से ही पता था कि बृजेंद्र ने यही कहने के लिए बुलाया है. फिर भी बनावटी हैरानी व्यक्त करते हुए उस ने कहा, ‘‘तुम यह क्या कह रहे हो?’’

‘‘आशा मेरे दिल में जो था, मैं ने कह दिया. बाकी तुम जानो. यह बात सच है कि मैं तुम्हें दिल से चाहता हूं.’’ बृजेंद्र की इन बातों से आशा के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. बृजेंद्र उसे अच्छा लगता ही था. वह उसे चाहने भी लगी थी. इसलिए उस ने बृजेंद्र को चाहत भरी नजरों से देखते हुए बड़ी ही धीमी आवाज में कहा,

‘प्यार तो मैं भी तुम से करती हूं, लेकिन डर लगता है.’’

बृजेंद्र ने आशा का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘डर किस बात का आशा, मैं हूं न तुम्हारे साथ.’’

‘‘फिर तो मैं तुम्हारा साथ आखिरी सांस तक निभाऊंगी.’’ आशा ने अपना दूसरा हाथ बृजेंद्र के हाथ पर रखते हुए कहा.

इस तरह प्यार का इजहार हो गया तो आशा और बृजेंद्र की दुनिया ही बदल गई. आशा कालेज जाने के बहाने घर से निकलती और पहुंच जाती बृजेंद्र के पास. बृजेंद्र उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाता, फिर दोनों बछरावां, रायबरेली घूमने निकल जाते. कभीकभी एकांत में बैठ कर दोनों भविष्य के सपने बुनते. जबकि उन्हें पता था कि वे जो सोच रहे हैं, वह इतना आसान नहीं है.

मुलाकातों का सिलसिला आगे बढ़ा तो साथसाथ जीनेमरने की कसमें खाई जाने लगीं. हालांकि दोनों परिवारों में समानता नहीं थी. इसलिए यह इतना आसान नहीं था. फिर भी दोनों ने तय कर लिया था कि कुछ भी हो जाए वे अपनी दुनिया बसा कर रहेंगे.

प्यारमोहब्बत ज्यादा दिनों तक छिपने वाली चीज नहीं होती. कुछ दिनों बाद पुत्तीलाल को भी शुभचिंतकों से पता चल गया कि बेटी गलत राह पर चल पड़ी है. पतिपत्नी ने बेटी को डांटाफटकारा भी और प्यार से समझाया भी. इस के बावजूद भी उन्हें बेटी पर विश्वास नहीं हुआ. उन्हें लगा कि जवानी के जोश में आशा गलत कदम उठा सकती है. इसलिए उन्होंने उस की शादी करने का फैसला कर लिया.

पुत्तीलाल और सुशीला ने अब आशा पर निगाह रखनी शुरू कर दी, जिस से दोनों के मिलन में बाधा पड़ने लगी. फिर भी आशा को जब मौका मिलता वह बृजेंद्र से बतिया लेती थी. बृजेंद्र उसे सांत्वना देता कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा.

एक रात सुशीला ने आशा को बृजेंद्र से मोबाइल पर बात करते पकड़ लिया. उस ने उसी समय आशा को डांटा, ‘‘देखो, आशा इज्जतआबरू और मानमर्यादा औरत के गहने हैं और तू इन गहनों पर दग लगा रही है. तुझे तो अपनी इज्जत की परवाह है नहीं, कम से कम हम लोगों की इज्जत का तो खयाल रख. तू पढ़ीलिखी है, समझदार है, फिर भी मना करने के बावजूद तू बृजेंद्र से संबंध बनाए हुए है.’’

सुशीला ने गुस्से में आशा को डांटा भी और उस के सिर पर हाथ रख कर प्यार से समझाया भी, ‘‘बेटी, औरत की इज्जत सफेद चादर की तरह होती है. भूल से भी उस पर दाग लग जाए तो वह दाग जीवन भर नहीं धुल पाता. अब भी समय है. तू बृजेंद्र को भूल जा. मैं जल्दी ही तेरा रिश्ता अच्छा घरवर देख कर कर दूंगी.’’

बदल गया आशा का मन…
मां की बात आशा के दिल को छू गई. उस ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि वह बृजेंद्र को भुलाने की पूरी कोशिश करेगी. मांबाप उस का रिश्ता, जहां भी जैसा भी करेंगे वह स्वीकार कर लेगी. उस ने मां को अपने फैसले के बारे में बता भी दिया. बेटी के चेहरे पर विश्वास देख कर मां खुश हुई.

पुत्तीलाल आशा के लिए योग्य वर की खोज में जुट गया. थोड़ी मेहनतमशक्कत के बाद उसे एक रिश्तेदार के माध्यम से उन्नाव जिले के सोहरामऊ थाने अंतर्गत कुशहारी गांव निवासी बच्चूलाल लोध के 25 वर्षीय बेटे साजन के बारे में पता चला तो वह उस के घर पहुंचे. साजन उन्हें पसंद आ गया. साजन बीए पास कर चुका था और कंप्टीशन की तैयारी में जुटा था. कई प्रतियोगी परीक्षाओं में वह शामिल भी हो चुका था.

साजन के पिता बच्चूलाल के पास 10 बीघा उपजाऊ जमीन थी. जिस में अच्छी पैदावार होती थी. उस के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. बच्चूलाल, पुत्तीलाल का दूर का रिश्तेदार भी था. इसलिए घरपरिवार जाना समझा था. घरवर पसंद आया तो पुत्तीलाल ने अपनी बेटी आशा की शादी साजन के साथ तय कर दी. चूंकि लड़का और लड़की दोनों पढ़ेलिखे थे, अत: तय हुआ कि जब लड़कालड़की एकदूसरे को देख लें और पसंद कर लेंगे, तभी शादी की तारीख फाइनल कर दी जाएगी.

कुछ दिन बाद साजन अपने मातापिता व बहनों के साथ आशा को देखने आया. दोनों ने एकदूसरे को देखा और बातचीत भी की. उस के बाद दोनों ने अपनी रजामंदी दे दी. इस के बाद सगाई की रस्म भी पूरी हो गई. शादी की तारीख तय हुई 12 मार्च, 2019.

इधर बृजेंद्र को आशा की शादी तय हो जाने की खबर लगी तो उसे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ. उसे अपना सपना बिखरता नजर आया. आशा की बेवफाई की बात सुन कर बृजेंद्र विचलित हो उठा. वह उस दिन किसी तरह आशा से मिला और गुस्से में उस की आंखों में झांकते हुए शादी की सच्चाई के बारे में पूछा.

आशा को बृजेंद्र की आंखों में क्रोध की ज्वाला नजर आ रही थी. सच कहने में ही उसे भलाई नजर आई. उस ने कहा, ‘‘हां, बृजेंद्र, तुम ने जो सुना है, वह सच है. मेरे मातापिता ने मेरी शादी तय कर दी है. अब तुम मुझे भूल जाओ.’’

‘‘कैसे भूल जाऊं तुम्हें? मैं ने तुम से प्यार किया है, सपना संजोया था कि तुम मेरी दुलहन बनोगी. लेकिन तुम तो बेवफा निकली.’’

‘‘मैं बेवफा नहीं हूं, बृजेंद्र. मेरी मजबूरी समझो.’’ आशा ने बृजेंद्र को समझाने की कोशिश की.

‘‘तुम बेवफा नहीं तो और क्या हो? जब तुम्हें दूसरी जगह ही ब्याह रचाना था तो मुझे सपने क्यों दिखाए, क्यों मेरी दुलहन बनने का वादा किया. अब भी समय है आशा, तुम शादी के लिए मना कर दो और मांबाप के विरुद्ध खड़ी हो जाओ. मैं तुम्हारा साथ दूंगा.’’

‘‘नहीं बृजेंद्र, मैं ऐसा नहीं कर सकती. मुझ में इतनी हिम्मत नहीं है कि मांबाप के फैसले के खिलाफ कुछ कर सकूं.’’

‘‘यह तुम्हारा आखिरी फैसला है?’’

‘‘हां, यह मेरा आखिरी फैसला है,” आशा ने दो टूक जवाब दिया और घर वापस चली गई.

बृजेंद्र नहीं छोड़ना चाहता था आशा को
आशा और बृजेंद्र के प्यार की डोर भले ही टूट गई थी, लेकिन इस सब के बावजूद दोनों की कभीकभी फोन पर बातें होती रहती थीं. इस बातचीत में बृजेंद्र अकसर आशा से कहता था कि वह रिश्ता तोड़ कर उस के साथ भाग चले. लेकिन आशा इस के लिए तैयार नहीं थी. उस का कहना था कि वह घर से भाग कर मांबाप के मुंह पर कालिख नहीं पोतना चाहती.

लेकिन बृजेंद्र के दिलोदिमाग पर आशा कुछ इस तरह छाई थी कि उस के मना करने के बावजूद वह उसे भुला नहीं पा रहा था. कभी उसे आशा की बेवफाई पर गुस्सा आता तो कभी उस की मजबूरी पर तरस. आशा की वजह से उस की जिंदगी निराशा में बदल गई थी. अब उस का मन किसी भी काम में नहीं लगता था.

बृजेंद्र का एक दोस्त अजय बछरांवा कस्बे में रहता था. कस्बे में ढाबे के पास उस की मोबाइल शौप थी. बृजेंद्र हमेशा उसी की दुकान से मोबाइल रिचार्ज कराता था. इसी वजह से दोनों के बीच अच्छा परिचय हो गया था. बाद में धीरेधीरे यह परिचय दोस्ती में बदल गया था.

बृजेंद्र को जब भी मोबाइल रिचार्ज कराने की जरूरत होती थी उसे फोन कर लेता था. अजय उस का मोबाइल फोन रिचार्ज कर देता था. बृजेंद्र अपनी प्रेमिका आशा का मोबाइल फोन भी उसी से रिचार्ज कराता था. दोनों के प्रगाढ़ संबंधों की उसे जानकारी थी. बृजेंद्र स्वयं भी उस से हर बात शेयर करता था.

इधर कुछ समय से बृजेंद्र गुमसुम रहने लगा था. उस में आए बदलाव को देख कर अजय ने कारण पूछा तो उस ने अपने दिल की बात उसे बता दी.

अजय चूंकि बृजेंद्र का दोस्त था, इसलिए उस ने बृजेंद्र को सलाह दी कि वह आशा को भुला दे. क्योंकि अब वह किसी और की अमानत बनने जा रही है. आशा की खुशी के लिए उसे अपने सीने पर पत्थर रखना ही होगा.

बृजेंद्र ने दोस्त की सलाह पर कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन उस की बात स्वीकार भी नहीं की. आशा के प्यार में आकंठ डूबे बृजेंद्र ने एक शाम आशा के मोबाइल पर फोन कर के प्यार की दुहाई दी और उसे गांव के बाहर उसी बगीचे में बुलाया, जहां उन की पहली मुलाकात हुई थी.

उस ने कहा था कि एक हफ्ते बाद 12 मार्च को वह किसी और की हो जाएगी. इसलिए सिर्फ इस बार उस से मिल ले. बृजेंद्र की इस विनती को आशा ठुकरा नहीं सकी और उस से मिलने बगीचे में जा पहुंची.
आशा जैसे ही वहां पहुंची बृजेंद्र उसे अपनी बांहों में भर कर बोला, ‘‘आशा, तुम तो जानती हो कि मैं तुम्हें जान से ज्यादा चाहता हूं. मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता. मैं तुम्हें अपनी दुलहन बनाना चाहता हूं, जबकि तुम पीछे हट रही हो.’’

खुद को बृजेंद्र की बांहों में आजाद कर के आशा ने कहा, ‘‘मैं ने तुम से पहले ही कह दिया था कि मैं अपने मांबाप की मरजी के खिलाफ कोई भी कदम नहीं उठा सकती. मेरी वजह से मांबाप की इज्जत पर दाग लगे, मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगी.’’

‘‘प्यार करने वाले, इस सब की परवाह नहीं करते. तुम मुझ से प्यार करती हो, यह बात तुम न जाने कितनी बार कह चुकी हो. इसलिए अब तुम्हें मेरा साथ देना चाहिए.’’ बृजेंद्र ने आशा का हाथ पकड़ कर विनती की, ‘‘हम दोनों बालिग हैं. इसलिए हम अपनी मरजी से शादी कर सकते हैं. शादी के बाद कुछ दिनों में घर वालों का गुस्सा शांत हो जाएगा.’’

‘‘तुम कुछ भी कहो, पर मैं तुम्हें साफसाफ बता रही हूं. मैं तुम से कभी प्यार करती थी, लेकिन अब नहीं करती. इसलिए तुम से शादी नहीं कर सकती. भाग कर शादी करने का तो सवाल ही नहीं उठता. आशा ने अपना हाथ छुड़ाते हुए अपना आखिरी फैसला सुना दिया.’’

आशा के प्रति भर गई नफरत
आशा ने बृजेंद्र के प्यार को ठुकराया और शादी से इनकार किया तो उस के मन में आशा के प्रति नफरत और गुस्से की चिंगारी सुलगने लगी. एक रात बृजेंद्र ने मोबाइल फोन पर फिल्म ‘बेवफा सनम’ देखी. फिल्म की कहानी उस की असल जिंदगी की कहानी से मिलतीजुलती थी. आशा भी उस के प्यार को ठुकरा कर दूसरे से शादी रचा रही थी.

यह ‘बेवफा सनम’ फिल्म बृजेंद्र ने अपने मोबाइल फोन पर कई बार देखी. आखिर उस ने निश्चय कर लिया कि फिल्म की तरह वह भी आशा को उस की बेवफाई की सजा देगा.

जैसेजैसे शादी की तारीख नजदीक आती जा रही थी, वैसेवैसे बृजेंद्र की नफरत और गुस्सा बढ़ता जा रहा था. बृजेंद्र के चाचा लोधेश्वर के पास डबल बैरल (दोनाली) बंदूक थी. लोधेश्वर जब शादी तिलक समारोह में जाता था तो बंदूक साथ ले जाता था और शादी समारोह में हर्ष फायरिंग करता था. चूंकि बृजेंद्र भी चाचा के साथ जाता था, सो उस ने भी बंदूक चलानी सीख ली थी. चाचा के साथ वह भी हर्ष फायरिंग करता था.

12 मार्च, 2019 को मंगलवार था. उस दिन पुत्तीलाल की 22 वर्षीय बेटी आशा की शादी होनी थी. बारात उन्नाव जिले के सोहरामऊ थाना अंतर्गत गांव कुशहरी से आनी थी. सुबह से ही पुत्तीलाल के घर पर चहलपहल शुरू हो गई थी. नातेरिश्तेदार आने शुरू हो गए थे. पुत्तीलाल अपने परिवार के लोगों के साथ व्यवस्था में जुटा था. उस की तमन्ना थी कि उस की बेटी की शादी में किसी तरह की कोई कमी न रह जाए.

बृजेंद्र भी शादी में कर रहा था सहयोग
बृजेंद्र के दिल में क्या था, और वह किस उधेड़बुन में लगा था. किसी को पता नहीं था. सुबह से ही वह पुत्तीलाल के घर मौजूद था और उस की हर तरह से मदद कर रहा था. कभी वह व्यंजन तैयार कर रहे हलवाइयों के पास जाता और उन्हें आदेश देता तो कभी डेकोरेशन का काम कर रहे कर्मचारियों को ठीक से डेकोरेशन करने की हिदायत देता. उसे देख कर किसी को नहीं लग रहा था कि उस के दिल में कोई भयंकर तूफान उमड़ रहा है.

घरपरिवार व रिश्तेदार महिलाएं मंगल गीत गाते हुए शादी की पूर्व होने वाली रस्मों को पूरा कर रही थीं. कुछ मंडप के नीचे परछन कर रही थीं तो कुछ गीत गाते हुए आशा को उबटन लगा रही थीं. कुछ ऐसी भी थीं जो चुहलबाजी और हंसीमजाक कर माहौल को खुशनुमा बना रही थीं. पूरा घर आंगन खुशियों से सराबोर था.

शाम ढलतेढलते सारी तैयारियां पूरी हो गईं. पंडाल सज गया और मेहमानों के बैठने के लिए पंडाल में कुरसियां डाल दी गईं. दूल्हादुलहन के लिए पंडाल में भव्य स्टेज सजाया गया. पूरा पंडाल लाइटों से जगमगा रहा था. छोटछोटे बच्चे सजधज कर मस्ती करने लगे थे.

आशा भी अपनी सहेलियों के साथ सजधज कर अपने कमरे में आ गई थी. वह बछरावां स्थित मधु ब्यूटीपार्लर में मेकअप कराने गई थी. सजीधजी आशा आज बेहद खूबसूरत लग रही थी. सखीसहेलियां उस से हंसीमजाक कर रही थीं, जबकि वह अपने भविष्य के सुनहरे सपनों में खोई थी.

रात साढ़े 10 बजे के लगभग बारात गाजेबाजे के साथ पुत्तीलाल के दरवाजे पर पहुंची. पुत्तीलाल ने हर एक बाराती के गले में फूलमाला डाल कर स्वागत किया. फिर दूल्हे साजन को स्टेज पर लाया गया. उस समय रिश्तेदारों, गांव वालों और बारातियों से पूरा पंडाल भरा हुआ था. सजीधजी महिलाओं की रौनक देखते ही बन रही थी. सभी खुशी में डूबे हुए थे.

कुछ देर बाद आशा दुलहन के वेश में स्टेज पर आई. उस के साथ उस की सहेलियां भी थीं. स्टेज पर दूल्हा और दुलहन ने एकदूसरे को देखा और मुसकरा कर सिर झुका लिया. फिर एकदूसरे को जयमाला पहना कर रस्म पूरी की. कई युवकयुवतियां खुशी से स्टेज के सामने नाचने लगे. इस के बाद वरवधू को दोनों पक्षों के लोग आशीर्वाद देने आने लगे. फोटोग्राफर फोटो खींचने में लगा था.

शादी का स्टेज हो गया खून से लाल
जयमाला होने के बाद स्टेज पर दुलहन आशा और उस के दूल्हे साजन का फोटो सेशन चल रहा था. तभी अचानक आशा का पूर्व प्रेमी बृजेंद्र कुमार अपने चाचा लोधेश्वर की दोनाली बंदूक ले कर वहां आ धमका. बृजेंद्र की आंखों में क्रोध की ज्वाला साफ झलक रही थी.

उस के हाथ में बंदूक देख कर आशा सहम गई और उठ कर खड़ी हो गई. उसी समय बृजेंद्र आशा के नजदीक आ कर बोला, ‘‘तुम ने क्या सोचा था कि तुम मेरी दुलहन नहीं बनोगी, तो मैं जीते जी तुम्हें किसी और की दुलहन बन जाने दूंगा. नहीं, ऐसा कभी नहीं हो सकता.’’

इसी के साथ बृजेंद्र ने आशा पर फायर झोंक दिया. गोली उस के पेट में धंसी और वह खून से लथपथ हो कर स्टेज पर ही गिर पड़ी. गांव के 2 साहसी युवक बृजेंद्र के हाथ से बंदूक छीनने उस की ओर लपके लेकिन बृजेंद्र उन दोनों पर भी बंदूक तानते हुए बोला, ‘‘खबरदार, जो मेरे पास आए. अभी हिसाब बराबर नहीं हुआ.’’ कहते हुए बृजेंद्र ने बंदूक की नाल अपने गले पर सटाई और ट्रिगर दबा दिया.

धांय की आवाज के साथ बृजेंद्र भी जमीन पर बिछ गया. कुछ देर छटपटाने के बाद आशा और बृजेंद्र दोनों ने दम तोड़ दिया.

इधर गोली चलने की आवाज सुन कर लोगों में भगदड़ मच गई. दूल्हा साजन तो बेहोश ही हो गया. बच्चूलाल उसे कार में डाल कर अपने गांव की ओर भागा. अन्य बाराती भी भाग लिए. बारातियों को इस बात का संतोष था कि दूल्हा सहीसलामत था और किसी भी बाराती को हानि नहीं पहुंची थी.

डोली की जगह उठी अर्थी
जिस घर में कुछ देर पहले खुशियां छाई थीं. अब वहां मौत की परछाइयों के अलावा कुछ नहीं था. चारों ओर चीखपुकार मची थी. आशा के मातापिता व घर वाले उस के शव के पास विलाप कर रहे थे. वहीं दूसरी ओर बृजेंद्र के मातापिता और परिजन आंसू बहा रहे थे. गांव वाले भी अवाक थे कि जिस घर से सुबह डोली उठनी थी, वहां से अब अर्थी उठेगी.

इसी बीच किसी ने मोबाइल फोन के जरिए इस गंभीर वारदात की सूचना थाना बछरावां को दे दी थी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी रविंद्र सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

थाने से रवाना होते समय उन्होंने वारदात से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी अवगत करा दिया था. शेखपुरा समोधा गांव, बछरावां थाने से मात्र 5 किलोमीटर दूर था. इसलिए पुलिस टीम को वहां पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा.

रात करीब 12 बजे के लगभग एसपी सुनील कुमार सिंह, एएसपी शशि शेखर सिंह तथा सीओ राजेंद्र प्रसाद शाही भी घटनास्थल पर पहुंच गए. थानाप्रभारी रवींद्र सिंह पहले से ही वहां मौजूद थे. पुलिस अधिकारियों ने बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया.

घटनास्थल का दृश्य बड़ा ही भयावह था. स्टेज पर एक युवती की लाश पड़ी थी, जो दुलहन के वेश में थी और स्टेज के नीचे एक युवक की लाश पड़ी थी. पूछताछ से पता चला कि युवती का नाम आशा था और मृतक बृजेंद्र कुमार था.

आशा की उम्र 22 वर्ष के आसपास थी, जबकि बृजेंद्र की उम्र लगभग 25 वर्ष थी. मृतक के पास दोनाली बंदूक पड़ी थी. इसी बंदूक से वारदात को अंजाम दिया था. अत: पुलिस ने जांच हेतु बंदूक अपने पास सुरक्षित रख ली.

घटनास्थल पर मृतका और मृतक के मातापिता व घर वाले मौजूद थे. एसपी सुनील कुमार सिंह व अपर पुलिस अधीक्षक शशिशेखर सिंह ने उन सब से पूछताछ की तो पता चला कि यह सब प्रेम प्रसंग की वजह से हुआ है.

इस मामले में सीओ राजेंद्र प्रसाद शाही ने मौके पर मौजूद गवाह रमेश आदि के बयान दर्ज किए. वहीं थानाप्रभारी रवींद्र सिंह ने मृतका आशा के मातापिता सुशीला और पुत्तीलाल तथा बृजेंद्र के पिता जागेश्वर व उस के भाई लोधेश्वर के बयान दर्ज किए. इस के बाद दोनों शव राजकीय अस्पताल रायबरेली पोस्मार्टम हेतु भेज दिए.

पुलिस अधिकारियों ने दूसरे रोज थाने बुला कर दूल्हे साजन तथा उस के पिता बच्चूलाल से भी पूछताछ की. उन के भी बयान दर्ज किए गए.

इधर थानाप्रभारी रवींद्र सिंह ने मृतका आशा के पिता पुत्तीलाल को वादी बना कर आशा की हत्या के आरोप में भादंवि की धारा 302 के तहत बृजेंद्र कुमार के विरुद्ध रिपोर्ट तो दर्ज की, लेकिन बृजेंद्र द्वारा आत्महत्या कर लेने से इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.

मुझ से लड़कियां पटती नहीं हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं कालेज जाने वाला लड़का हूं. देखने में साधारण हूं. मुझे लड़कियां खास भाव नहीं देतीं, जबकि मेरा भी मन करता है कि लड़कियां मुझ से पट जाएं, बातें करें. जब दूसरे लड़कों को देखता हूं कि वे गर्लफ्रैंड बना कर घूम रहे हैं तो खुद को बहुत छोटा महसूस करता हूं? कैसे अपने को समझाऊं?

जवाब

आप कुछ ज्यादा ही छोटा महसूस कर रहे हैं. कालेज में जा कर कोई गर्लफ्रैंड बन जाए, जरूरी तो नहीं. सबकुछ हालात पर निर्भर करता है. सब से पहले तो अपने मन से यह खयाल निकाल दीजिए कि आप देखने में खास नहीं. पर्सनैलिटी बनाई जा सकती है. वही लोग पसंद किए जाते हैं जो हमेशा खुश रहते हैं, ऊर्जा से भरे होते हैं, खुशमिजाज, हमेशा पौजिटिव और अच्छी बातें करते हैं. इसलिए आप भी पौजिटिव ऊर्जा से भरे रहने की कोशिश करें. चेहरे पर मुसकराहट लाएं. नौजवान हो, जिम जाना शुरू करो.

बौडी बनने से शख्सियत में निखार आता है. गर्लफ्रैंड नहीं तो कोई बात नहीं. दोस्त बनाइए. कालेज ऐक्टिविटी में हिस्सा लीजिए. कालेज में अलगअलग कार्यक्रम होते हैं, सब में आगे रहें. अगर उन कार्यक्रमों में आप लीडर रहें तो आप की कालेज में पहचान बनने लगेगी. शक्लोसूरत के अलावा और भी बहुत सी चीजें होती हैं जिन से लड़कियां प्रभावित होती हैं. अपनी प्रतिभा को उभारो और सब के सामने उसे उजागर करो. कालेज में अपने को जितना ज्यादा ऐक्सप्लोर करोगे, उतना ही ज्यादा पहचान में आओगे. अपनी एक अच्छी पहचान बनाओ. लड़कियां अपनेआप पट जाएंगी, फिक्र मत करो.

सुरक्षित सेक्स के इन खतरों के बारे में भी जानिए

हम सभी की तरह मार्केटिंग प्रोफैशनल प्रिया चौहान को भी पूरा भरोसा था कि कंडोम का इस्तेमाल उन्हें हर तरह की सैक्स से फैलनेवाली बीमारियों (एसटीडीज) से महफूज रखेगा. आखिरकार इस बात को लगभग सभी स्वीकार करने लगे हैं. वे तब अचरज से भर गईं, जब उन्हें वैजाइनल हिस्से में लाली और जलन की वजह से डाक्टर के पास जाना पड़ा.

‘‘डाक्टर ने मुझे बताया कि मुझे सिफलिस का संक्रमण हुआ है, जो एक तरह की एसटीडी है.’’

गायत्री आगे बताती हैं, ‘‘मुझे लगता था कि कंडोम मुझे इस तरह की बीमारियों से सुरक्षित रखता है और जलन की वजह के बारे में मैं सोचती थी कि शायद मैं सही मात्रा में पानी नहीं पी रही हूं.’’

ये चुंबन से भी हो सकता है

गायत्री और उन के बौयफ्रैंड को कुछ ब्लड टैस्ट कराने कहा गया और ऐंटीबायोटिक्स दिए गए, ताकि सिफलिस के वायरस को फैलने से रोका जा सके. ये वह सब से आम एसटीडी है, जिसे रोकने में कंडोम कारगर नहीं है.

सैक्सोलौजिस्ट डा. राजीव आनंद, जो कई जोड़ों को कंडोम और एसटीडीज से जुड़े इस मिथक की सच्चाई बता चुके हैं, कहते हैं, “ज्यादातर लोग कंडोम को एसटीडीज से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका मानते हैं, लेकिन कुछ इंफैक्शंस ऐसे हैं, जो ओरल सैक्स या चुंबन के जरिए भी फैल सकते हैं.

‘‘ये भ्रांति शायद इसलिए है कि एड्स से जुड़ी जानकारी के केंद्र में कंडोम ही है. हालांकि यह एड्स की रोकथाम में कारगर है, लेकिन यह कुछ एसटीडीज की रोकथाम में कारगर नहीं है,’’

वे आगे कहते हैं, ‘‘कंडोम प्रेगनेंसी और कुछ एसटीडीज से बचाव करता है, लेकिन हरपीज वायरस के इंफैक्शन से बचाने में यह कारगर नहीं है. यह एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) और कुछ फंगल इंफैक्शंस, जो त्वचा के उन हिस्सों के संपर्क के कारण फैलते हैं, जो कंडोम से नहीं ढके हैं, से भी बचाव नहीं कर पाता.’’

कंडोम के इस्तेमाल से शारीरिक स्राव का विनिमय तो रुक जाता है, लेकिन हरपीज, एचपीवी और गोनोरिया आदि होने की संभावना बनी रहती है.

इस खतरे को कम करें

अपने साथी को अच्छी तरह जानना तो जरूरी है ही, पर ऐसे लोगों की संख्या को सीमित रखें, जिन से आप सैक्शुअल संबंध रखती हैं, ताकि आप एसटीडीज के खतरे से बच सकें. यदि आप किसी नए साथी के साथ संबंध बना रही हैं तो उस का चैकअप जरूर कराएं.

“यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने साथी से चैकअप कराने को कहें और उस की रिपोर्ट्स देखें. मुझे पता है कि यह थोड़ा अटपटा लगेगा, लेकिन हमें समय के साथ चलना होगा,’’ यह कहती हैं रश्मि बंसल, जो 2 साल तक लिवइन रिश्तों में थीं.

‘‘यदि वह आप को सच में पसंद करता है तो ऐसा करने में उसे कोई समस्या नहीं होगी.’’

इसके अलावा हेपेटाइटिस बी और एचपीवी के लिए वैक्सीन लेना भी अच्छा रहता है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें