रूपाली का घिनौना रूप, कौन बना उस का शिकार

Crime News in Hindi: 13 जून, 2017 को पुलिस कंट्रोलरूप (Control Room) द्वारा उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर (Jaunpur) की कोतवाली मड़िया हूं पुलिस को गांव सुभाषपुर में एक युवक की लाश पड़ी होने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी इंसपेक्टर नरेंद्र कुमार सिंह पुलिस बल के साथ सुभाषपुर गांव (Subhashpur Village) स्थित उस जगह पहुंच गए, जहां लाश पड़ी होने की सूचना मिली थी. घटनास्थल केडीएस स्कूल के पीछे था. अब तक वहां गांव वालों की काफी भीड़ जमा हो चुकी थी. लेकिन पुलिस को देखते ही लोग एक किनारे हो गए थे. नरेंद्र कुमार सिंह ने लाश का निरीक्षण शुरू किया. मृतक की हत्या किसी धारदार हथियार से बड़ी बेरहमी से की गई थी. उस की उम्र यही कोई 27-28 साल थी. देखने से ही वह गांव का रहने वाला लग रहा था.

पुलिस कंट्रोलरूम से इस घटना की सूचना पुलिस अधिकारियों को भी मिल गई थी. उसी सूचना के आधार पर एसपी भौलेंद्र कुमार पांडेय भी घटनास्थल पर आ गए थे. उन्होंने भी घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया. काफी प्रयास के बाद भी लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी थी. मृतक के कपड़ों की तलाशी में भी कोई ऐसी चीज नहीं मिली थी, जिस से उस की शिनाख्त हो सकती.

पुलिस लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की तैयारी कर रही थी, तभी कोतवाली प्रभारी नरेंद्र कुमार सिंह एक बार फिर घटनास्थल का निरीक्षण बारीकी से करने लगे. इस का नतीजा यह निकला कि लाश से कुछ दूरी पर उन्हें एक टूटा हुआ सिम मिला. इस से जांच में मदद मिल सकती थी, इसलिए उन्होंने उसे सुरक्षित रख लिया.

एसपी भौलेंद्र कुमार पांडेय मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने का आदेश दे कर चले गए थे. इस के बाद नरेंद्र कुमार सिंह भी लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर थाने आ गए. थाने में उन्होंने अपराध संख्या 461/2017 पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने के लिए एसपी भौलेंद्र कुमार पांडेय ने थाना पुलिस की मदद के लिए क्राइम ब्रांच के अलावा सर्विलांस टीम को भी लगा दिया था. जांच को आगे बढ़ाते हुए नरेंद्र कुमार सिंह ने घटनास्थल से मिले सिमकार्ड पर लिखे नंबर के आधार पर संबंधित कंपनी से पता किया तो जानकारी मिली कि वह सिम महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली के थाना देशाई के गांव तुलसी के रहने वाले पंकज का था. वह सिम महाराष्ट्र से खरीदा गया था.

इस का मतलब यह हुआ कि मृतक का आसपास के रहने वाले किसी से कोई संबंध था या फिर वह यहां घूमने आया था. उस का किस से क्या संबंध था, यह पता करने के लिए पुलिस ने नंबर पता कर के उस की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस नंबर से अंतिम नंबर पर जिस से बात हुई थी, उस का नाम सत्यम था.

13 जून को सत्यम की पंकज से कई बार बात हुई थी. यही नहीं, उस के नंबर की लोकेशन भी 13 जून को घटनास्थल की पाई गई थी. अब शक की कोई गुंजाइश नहीं रही. नरेंद्र कुमार सिंह ने सत्यम के नंबर को सर्विलांस पर लगवा कर उस की लोकेशन पता कराई, क्योंकि फोन करने पर उसे शक हो जाता और फरार हो सकता था.

सर्विलांस के आधार पर ही उन्होंने 24 जुलाई, 2017 की सुबह इटाए बाजार के आगे नहर की पुलिया के पास से सत्यम और उस के साथ एक युवक तथा एक युवती को गिरफ्तार कर लिया. तीनों एक मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे. बाद में पूछताछ में पता चला कि तीनों कहीं दूर भाग जाना चाहते थे, जिस से पुलिस उन्हें पकड़ न सके.

तीनों को थाने ला कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम सत्यम उर्फ छोटू गौड़, सचिन गौड़ उर्फ चिंटू और रूपाली बताए. इन में सत्यम और सचिन वाराणसी के थाना फूलपुर के गांव करियांव के रहने वाले थे. युवती का नाम रूपाली था. वह मृतक पंकज उर्फ प्रेम उर्फ बबलू की पत्नी थी. वह महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली के थाना देशाई के गांव तुलसी की रहने वाली थी.

पुलिस ने तीनों से पूछताछ शुरू की तो थोड़ी हीलाहवाली के बाद उन्होंने पंकज की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पुलिस ने उन की मोटरसाइकिल संख्या यूपी65बी क्यू 7062 जब्त कर ली थी. इस के बाद इन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, दस्ताने भी बरामद कर लिए गए थे. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में तीनों ने पंकज की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

महाराष्ट्र के जिला गढ़चिरौली के थाना देशाई के गांव तुलसी का रहने वाला 28 साल का पंकज उर्फ प्रेम उर्फ बबलू उत्तर प्रदेश के जिला वाराणसी के थाना फूलपुर के गांव करियांव में आ कर रह रहा था. वह यहां शादीविवाहों या किसी अन्य कार्यक्रमों में डांस करता था. इसी से होने वाली आमदनी से उस का और उस के परिवार वालों का भरणपोषण हो रहा था. वह डांस कर के इतना कमा लेता था कि उस का और उस के परिवार का गुजारा आराम से हो रहा था.

करियांव में ही सत्यम उर्फ छोटू गौड़ भी रहता था. पंकज से उस की दोस्ती हो गई तो वह उस के घर भी आनेजाने लगा, घर आनेजाने से उन की दोस्ती तो गहरी हुई ही, पंकज की पत्नी रूपाली से भी उस की अच्छी पटने लगी. वह उसे भाभी कहता था. चूंकि सत्यम की शादी नहीं हुई थी, इसलिए जल्दी ही रूपाली पर उस का दिल आ गया. इस के बाद वह पंकज की अनुपस्थिति में भी उस के घर जाने लगा, क्योंकि उस के सामने वह दिल की बात नहीं कह सकता था.

आखिर एक दिन पंकज की अनुपस्थिति में सत्यम ने रूपाली से दिल की बात कह ही नहीं दी, बल्कि दिल की मुराद भी पूरी कर ली. एक बार मर्यादा भंग हुई तो सिलसिला चल निकला. दोनों को जब भी मौका मिलता, इच्छा पूरी कर लेते. पंकज इस सब से अंजान था. जिस पत्नी को ले कर वह अपने घरपरिवार से इतनी दूर आ गया था, उसी पत्नी ने उस से बेवफाई करने में जरा भी संकोच नहीं किया था.

पंकज की गैरमौजूदगी में सत्यम का आनाजाना कुछ ज्यादा बढ़ गया तो लोगों की नजरों में यह बात खटकने लगी. लोगों ने इस बात पर ध्यान दिया तो उन्हें मामला गड़बढ़ लगा. लोग इस बात को ले कर चर्चा करने लगे तो यह बात पंकज के कानों तक पहुंची. पहले तो उस ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब लोगों ने टोकाटाकी शुरू की तो उस ने सच्चाई का पता करना चाहा. इस के लिए उस ने एक योजना बनाई.

एक दिन वह रूपाली से कार्यक्रम में जाने की बात कह कर घर से निकला जरूर, लेकिन थोड़ी देर बाद अचानक वापस आ गया. अचानक पंकज को देख कर रूपाली घबरा गई. इस की वजह यह थी कि उस समय सत्यम उस के घर में ही मौजूद था. पंकज को देख कर सत्यम तो पिछवाड़े से भाग निकला, लेकिन रूपाली पकड़ी गई. उस की हालत ने सच्चाई उजागर कर दी. पंकज ने उसे खरीखोटी तो सुनाई ही, इतने से मन नहीं माना तो पिटाई भी कर दी.

रूपाली ने उस समय वादा किया कि अब वह फिर कभी ऐसी गलती नहीं करेगी. पंकज ने भी उस की बात पर विश्वास कर लिया. माफ करना उस की मजबूरी भी थी. आखिर उसे भी तो अपना घर बचाना था. उसे लगा कि गलती सभी से हो जाती है, रूपाली से भी हो गई. अब संभल जाएगी.

लेकिन रूपाली संभली नहीं, कुछ दिनों तक तो वह सत्यम से बिलकुल नहीं मिली. लेकिन धीरेधीरे दोनों लोगों की नजरें बचा कर फिर चोरीचुपके मिलने लगे. रूपाली पंकज से ऊब चुकी थी. वह पूरी तरह से सत्यम की हो कर रहना चाहती थी, इसलिए वह जब भी सत्यम से मिलती, एक ही बात कहती, ‘‘सत्यम, अब मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकती. इस तरह छिपछिप कर मिलना मुझे अच्छा नहीं लगता. मैं पूरी तरह तुम्हारी हो कर रहना चाहती हूं. चलो, हम कहीं भाग चलते हैं.’’

‘‘मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता रूपाली, लेकिन थोड़ा शांति से काम लो. देखो, मैं कोई उपाय करता हूं.’’ जवाब में सत्यम कहता.

सत्यम उपाय सोचने लगा. उस ने जो उपाय सोचा, उस के बारे में एक दिन रूपाली से कहा, ‘‘रूपाली, क्यों न हम पंकज को हमेशाहमेशा के लिए रास्ते से हटा दें. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.’’

रूपाली पहले तो थोड़ा हिचकिचाई, लेकिन उस के बाद धीरे से बोली, ‘‘कहीं हम पकड़े न जाएं?’’

‘‘इस की चिंता तुम बिलकुल मत करो. उसे तो मैं ऐसा निपटा दूंगा कि किसी को कानोकान खबर नहीं होगी.’’ सत्यम ने कहा.

इस के बाद सत्यम ऐसा मौका ढूंढने लगा, जब वह अपना काम कर सके. 12 जून, 2017 को पंकज को कार्यक्रम में डांस करने के लिए थाना मडि़याहूं के गांव सुभाषपुर जाना था. वह अपनी पार्टी के साथ निकल भी गया.

पंकज के घर से निकलते ही रूपाली ने सत्यम को बता दिया. चूंकि वाराणसी और जौनपुर की सीमा सटी हुई है और मडि़याहूं तथा फूलपुर के बीच की दूरी तकरीबन 40 किलोमीटर है, इसलिए सत्यम रूपाली के सूचना देते ही अपने साथी सचिन के साथ सुभाषपुर गांव के लिए निकल पड़ा.

आधी रात के बाद लोगों की नजरें बचा कर सत्यम ने बहाने से पंकज को गांव के बाहर केडीएस स्कूल के पीछे बुलाया और सचिन की मदद से चाकू से उस की हत्या कर दी. इस के बाद पंकज के मोबाइल से उस का सिम निकाल कर तोड़ कर झाडि़यों में फेंक दिया और मोबाइल ले कर चला गया.

पंकज के अचानक गायब होने से उस के साथियों ने सोचा, शायद किसी बात से नाराज हो कर वह घर चला गया होगा और अपना मोबाइल भी बंद कर लिया होगा. पति के इस तरह गायब होने से रूपाली रोनेधोने का नाटक करती रही. काफी दिन बीत जाने के बाद भी जब पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंची तो उचित मौका देख कर उस ने सत्यम के साथ भाग जाने की योजना बना डाली.

संयोग से पुलिस ने उन्हें उसी दिन पकड़ लिया, जिस दिन सत्यम और रूपाली भाग रहे थे. मामले का त्या कर रूपाली और सत्यम को मिला क्या? पंकज तो जान से गया, लेकिन अब उन दोनों की जिंदगी भी अबखुलासा होने के बाद पुलिस ने अज्ञात की जगह सत्यम, सचिन और रूपाली को नामजद कर तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया. सोचने वाली बात तो यह है कि पंकज की ह जेल में ही कटेगी?

खूबसूरत औरत को प्रैग्नैंट करो, लाखों कमाओ, पर जरा संभल कर जनाब

Crime News in Hindi: आज सोशल मीडिया (Social Media) हमारी जिंदगी पर इतना ज्यादा हावी हो गया है कि हम उस पर आंख मूंद कर भरोसा (Trust) करने लगे हैं, फिर भले हमें ही चूना क्यों न लग जाए. लेकिन अगर किसी खूबसूरत औरत को प्रैग्नैंट (Pregnant) कर के लाखों कमाने की बात आए, तो बांके नौजवानों की तो यह सुन कर ही बांछें खिल जाएंगी. पर अगर आप को भी यह ललचाता औफर आया है, तो सावधान हो जाएं. अगर यकीन नहीं होता तो चलो आप को बताते हैं एक ऐसा ही मामला जहां ठगों ने लोगों के सामने एक ऐसा जोरदार आइटम पेश किया है कि कहने ही क्या. हद तो यह है कि ऐसे शातिरों ने ठगी के इस नएनवेले कांड को एक और्गेनाइजेशन का नाम दिया हुआ था.

क्या है पूरा मामला

दरअसल, बिहार में एक ऐसा स्कैम चल रहा है कि किसी खूबसूरत औरत को प्रैग्नैंट करो और उस के बदले में लाखों रुपए कमाओ. मामला बेशक बिहार का लग रहा है, पर इस गिरोह का जाल पूरे देश में फैला है.

एक जानकारी के मुताबिक, बिहार में नवादा पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की है. पुलिस ने जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में छापेमारी की और 8 साइबर ठगों को गिरफ्तार कर लिया. उन के पास से 9 मोबाइल फोन और एक प्रिंटर मिला.

इस मामले पर पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी ‘आल इंडिया प्रैग्नैंट जौब (बेबी बर्थ सर्विस)’ के नाम पर पैसों का लालच देते थे और लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे.

शातिरों का यह ग्रुप लोगों को फंसाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहा था. ठगों ने मर्दों को इस लच्छेदार स्कीम के बारे में बता कर उन्हें फंसाया, इस के बाद उन से रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे वसूले.

इन ठगों ने मर्दों से कहा कि ‘बेबी बर्थ सर्विस’ में आप को बेऔलाद औरतों को प्रैग्नैंट करना होगा, जिस के लिए आप को बड़ी रकम मिलेगी. झांसे में आए मर्दों से शुरू में 799 रुपए लिए गए. इस के बाद उन से बतौर सिक्योरिटी मनी 5,000 से 20,00 रुपए मांगे जाते थे.

नवादा पुलिस की एसआईटी ने मुन्ना कुमार नाम के शख्स के यहां छापा मारा. पुलिस के मुताबिक, मुन्ना कुमार ही इस पूरे गिरोह का सरगना है. दरअसल, आज से तकरीबन 5 साल पहले नवादा के गांव गुरम्हा का रहने वाला मुन्ना कुमार नौकरी के लिए राजस्थान के मेवाड़ में गया था. वहां उस की मुलाकात जामताड़ा जैसे कुछ गिरोहबाजों से हुई, जहां उस ने बाकायदा साइबर ठगी की ट्रेनिंग ली थी.

गांव लौट कर मुन्ना कुमार ने अपना दफ्तर खोला. इसी बीच उस ने गांव के 20-30 लड़कों को चुपचाप से ट्रेनिंग दी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उस ने कंपनी शुरू की और सोशल मीडिया की मदद से ‘आल इंडिया प्रैग्नैंट जौब’ के इश्तिहार जारी किए, जिन में लिखा होता था कि कुछ ऐसी औरतें हैं, जो शादी के बरसों बाद भी मां नहीं बन पा रही हैं. वे मां बनना चाहती हैं.

हमारी संस्था ऐसी औरतों के लिए काम करती है. यह सारा काम कानूनी होता है. जो भी इच्छुक हैं, वे ऐसी औरतों को प्रैग्नैंट कर उन्हें मां बनने का सुख दे सकते हैं. इस के लिए उन्हें बाकायदा पैसे भी मिलेंगे. यह रकम 10 से 13 लाख की होगी. अगर औरत प्रैग्नैंट नहीं हो पाती, तो भी 5 लाख रुपए तो मिलेंगे ही.

क्यों फंसते हैं नौजवान

आज देश में बेरोजगारी का आलम यह है कि नौजवान किसी भी खबर पर बिना सोचेसमझे यकीन कर लेते हैं और अगर उन्हें किसी खूबसूरत औरत से मजे ले कर उसे मां बनाने का औफर मिले तो वे लार टपकाने लगते हैं. उन्हें लगता है कि यह तो पैसे कमाने का गरमागरम तरीका है. फिर सरकार भी तो किसी को रोजगार नहीं दे पा रही है, यहीं पर ही अपनी भड़ास निकाल लेते हैं.

ठग बेरोजगार लोगों की इसी दुखती नस पर हाथ रखते हैं और रोजगार देना तो दूर, उन्हें ही अपना शिकार बना लेते हैं. इस तरह उन्हें न तो देह सुख मिलता है और न ही वे पैसा कमा पाते हैं. लुट भले ही जाते हैं.

शादी जो मौत बन कर आई, कौन लाया यह तबाही

Crime News in Hindi: किसी परिवार में विवाह की तैयारियां चल रही हों तो खुशियां देखते ही बनती है. लियाकत का परिवार भी ऐसी ही खुशियों से सराबोर था. क्योंकि उस ने अपने बेटे आदिल का रिश्ता न सिर्फ पक्का कर दिया था, बल्कि चंद रोज बाद वह बारात ले कर भी जाने वाला था. लियाकत उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सहारनपुर जिले के कस्बा मिर्जापुर (Mirzapur) में परिवार के साथ रहता था. उस के पास गुजारे लायक खेती की जमीन थी. बेटे आदिल की शादी उत्तराखंड (Uttrakhand) के देहरादून (Dehradun) के थाना विकासनगर (Vikas Nagar) के गांव कुंजाग्रांट की हिना से तय हुई थी.

14 मार्च, 2017 को उन के निकाह की तारीख भी तय कर दी गई थी. 19 फरवरी को हिना के लिए शादी का जोड़ा भी जाना था. इन खुशियों से हर कोई खुश था, लेकिन खुशियां किसी की मोहताज नहीं होतीं. वक्त कब कौन सी करवट ले ले, इस बात को कोई नहीं जानता. दुलहन के जोड़ा खुलने की रश्म पूरी हो पाती उस से पहले ही लियाकत का परिवार एक नाउम्मीद मुसीबत में फंस गया.

18 फरवरी की शाम आदिल अचानक लापता हो गया. वह शाम को घर से कुछ देर में आने की बात कह कर गया था, लेकिन वापस नहीं आ सका. उस का मोबाइल फोन भी स्विच औफ आ रहा था. वह इस तरह अचानक कहां लापता हो गया, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रहा थी.

घर वालों ने अपने स्तर से उसे बहुत खोजा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. थकहार कर उन्होंने इस की सूचना थाना मिर्जापुर को दे दी. थानाप्रभारी पंकज त्यागी ने उस के बारे में पूरी जानकारी ले कर पूछा, ‘‘किसी से कोई झगड़ा या रंजिश तो नहीं थी?’’

‘‘नहीं साहब, हम सीधेसादे लोग हैं. आदिल का स्वभाव भी ऐसा नहीं था.’’ जवाब में लियाकत ने कहा.

‘‘कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस लड़की से तुम आदिल की शादी कर रहे हो, वह लड़की उसे पसंद न हो.’’ थानाप्रभारी ने अगला सवाल किया.

‘‘बिलकुल नहीं साहब. उस ने ऐसा कभी जाहिर नहीं किया. वह तो बहुत खुश था. वह खुद भी शादी का जोड़ा खुलने की रस्म की तैयारियों में लगा था.’’ लियाकत ने कहा.

‘‘फिर तुम लोगों को क्या लगता है?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब, लगता है, हमारे बेटे का अपहरण किया गया है.’’ लियाकत ने आशंका जताई.

‘‘यह अंदाजा किस बात से लगाया?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब, हमें कुछ लोगों ने बताया है कि आदिल को 2 लोगों के साथ मोटरसाइकिल पर जाते देखा गया है.’’

‘‘कौन थे वे लोग?’’

‘‘यह पता नहीं साहब.’’ लियाकत ने कहा.

आदिल के दोस्तों आदि के बारे में जानकारी ले कर थानाप्रभारी ने लियाकत को जरूरी काररवाई का आश्वासन दे कर घर भेज दिया.

लियाकत की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि फिरौती के लिए आदिल का अपहरण करता. जांच में पता चला कि आदिल जिस मोटरसाइकिल पर गया था, उस पर स्पोर्ट्स लिखा था. गांव वालों से पूछा गया तो लोगों ने बताया कि पूरे गांव में किसी के पास ऐसी मोटरसाइकिल नहीं है.

आदिल के लापता होने से लोगों में आक्रोश बढ़ने लगा था. एसएसपी लव कुमार को इस की जानकारी हुई तो उन्होंने केस के खुलासे के लिए अपराध शाखा की टीम को भी थाना पुलिस के साथ लगा दिया.

पुलिस ने आदिल के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स और लोकेशन हासिल कर ली थी. उस की अंतिम लोकेशन नजदीकी गांव सोफीपुर की पाई गई थी. इस के बाद उस का मोबाइल औन नहीं हुआ था.

आदिल की काल डिटेल्स में कोई संदिग्ध नंबर नहीं मिला था. पुलिस अभी माथापच्ची कर ही रही थी कि सी ने बताया कि स्पोर्ट्स लिखी मोटरसाइकिल गांव के एक व्यक्ति के रिश्तेदार अफरोज की थी, जो देहरादून के पास स्थित गांव कुंजाग्रांट में रहता था. वह गांव आताजाता भी रहता था. कुंजाग्रांट की ही हिना से आदिल की शादी होने वाली थी.

अब पुलिस को यह मामला प्रेमप्रसंग से जुड़ा लगने लगा. पुलिस ने किसी तरह अफरोज का मोबाइल नंबर हासिल कर के काल डिटेल्स निकलवा ली. जिस दिन आदिल लापता हुआ था, उस दिन अफरोज की 2 नंबरों पर बातें हुई थीं. खास बात यह थी कि वे दोनों नंबर अफरोज के ही गांव के शाकिर और मारुफ के थे. इतना ही नहीं, उन की लोकेशन भी उस शाम मिर्जापुर गांव की पाई गई.

सुराग और सबूत पुख्ता होते ही अगले दिन यानी 20 फरवरी, 2017 को एक पुलिस टीम कुंजा ग्रांट के लिए रवाना हो गई और अफरोज, शाकिर तथा मारुफ को शक के आधार पर हिरासत में ले कर थाने आ गई. उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि 18 फरवरी को वे मिर्जापुर आए ही नहीं थे.

पुलिस के पास उन के फोन नंबरों की लोकेशन और डिटेल्स थी. इस से साफ था कि वे झूठ बोल रहे थे. पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया तो अफरोज टूट गया. उस ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर पुलिस हैरान रह गई. क्योंकि वे तीनों आदिल के खून से अपने हाथ रंग चुके थे.

तीनों ने आदिल की हत्या कर के उस के शव को सफीपुरा गांव के जंगल के एक गड्ढे में छिपा दिया था. पुलिस ने उन की निशानदेही पर आदिल का शव बरामद कर लिया. उस के सिर व चेहरे पर घावों के निशान थे. शव के नजदीक ही खून से सने पत्थर पड़े थे. पुलिस ने बतौर सबूत उन्हें कब्जे में ले लिया.

आदिल की मौत की खबर से उस के घर में कोहराम मच गया. पुलिस ने उस के शव का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया, साथ ही तीनों आरोपियों के खिलाफ भादंवि की धाराओं 302, 201 व 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

पुलिस ने हत्यारोपियों से विस्तार से पूछताछ की तो एक ऐसे प्रेमी की कहानी निकल कर सामने आई, जो नहीं चाहता था कि उस की प्रेमिका किसी और के नाम का शादी का जोड़ा पहने. उस की प्रेमिका भी मौत के इस षडयंत्र में शामिल थी.

करीब 2 साल पहले अफरोज और हिना की आंखें चार हुईं तो दोनों एकदूसरे के दिल में उतर गए. दोनों ने प्यार के खुशनुमा सफर की शुरुआत कर दी और किसी को खबर भी नहीं लगी. जब कोई इंसान किसी को प्यार करे तो उस के लिए ढेरों सुनहरे ख्वाब सजाता है. उन्होंने भी ख्वाबों का एक महल बना लिया था.

जवानी के जोश में दोनों ने मर्यादा की दीवार भी गिरा दी और हमेशा एक होने का फैसला भी कर लिया. दोनों ही अक्सर एकदूसरे का हमसफर होने की कसमें खाते थे. एक दिन दोनों मिले तो अफरोज ने हिना से पूछा, ‘‘हिना यह बताओ कि तुम कभी मेरा सथ तो नहीं छोड़ दोगी?’’

‘‘कैसी बात करते हो अफरोज, तुम तो मेरी सांसों में बसे हो. मैं कभी बुरे ख्वाबों में भी ऐसा नहीं सोच सकती. एक दिन मुझे पूरी तरह तुम्हारी होना है.’’ हिना ने कहा.

‘‘लेकिन पता नहीं क्यों, मुझे डर लगता है कि वक्त आने पर तुम बदल न जाओ.’’ अफरोज ने कहा.

‘‘ऐसा कभी नहीं होगा. मैं तुम से सच्चा प्यार करती हूं.’’ हिना ने उस की आंखों में हसरतों से देखते हुए जवाब दिया तो अफरोज बेहद खुश हुआ.

जनवरी, 2017 में हिना का रिश्ता सहारनपुर के कस्बा मिर्जापुर के आदिल के साथ तय हो गया. घर वालों से वह इस रिश्ते का विरोध करने का साहस नहीं कर सकी. उस की मरजी के खिलाफ रिश्ता तो पक्का हो गया, पर वह दिल से इस रिश्ते के लिए खुश नहीं थी.

रिश्ता तय होने पर हिना और अफरोज दोनों ही परेशान थे. अब अफरोज को अपने ख्वाब टूटते नजर आने लगे. वह परेशान रहने लगा. हिना के घर वालों के सामने हकीकत बयां करने की हिम्मत उस में भी नहीं थी. बावजूद इस के वह किसी भी सूरत में हिना को खोना नहीं चाहता था. इस मुद्दे पर एक दिन उस ने हिना से बात की, ‘‘यह सब क्या हो गया हिना? हम दोनों ने तो साथ जीनेमरने की कसमें खाई थीं.’’

‘‘मैं खुद भी परेशान हूं अफरोज. समझ में नहीं आ रहा कि क्या करूं?’’ हिना बोली, ‘‘कुछ तो करना ही पड़ेगा. कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हारे दिल में अपने मंगेतर के लिए जगह बन गई हो?’’ अफरोज ने मायूसी के साथ कहा.

‘‘ऐसा क्यों कह रहे हो, क्या तुम मेरे प्यार का इम्तिहान ले रहे हो?’’ हिना ने नाराजगी जाहिर की.

उधर रिश्ता तय हो जाने पर आदिल हिना के ख्वाब देखने लगा था. वह बेहद खुश था और अक्सर हिना से फोन पर बातें किया करता था. हिना के दिल में अफरोज की तसवीर थी. वह नाखुशी से आदिल से बात करती थी. उस ने आदिल को जरा भी शक नहीं होने दिया था कि वह उस के बजाय किसी और से प्यार करती है.

जैसे जैसे समय बीत रहा था, अफरोज और हिना की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. अफरोज के कई दिन इसी उधेड़बुन में बीत गए कि वह इस रिश्ते को कैसे तुड़वाए. उसे सीधा कोई रास्ता नजर नहीं आया तो मन ही मन उस ने खतरनाक निर्णय ले लिया.

एक दिन उस ने अपने दिल की बात हिना से भी जाहिर कर दी, ‘‘हिना मैं ने सोच लिया है कि अब क्या करना है?’’

‘‘क्या?’’ वह चौंकी.

‘‘मैं आदिल को रास्ते से हटा दूंगा.’’

‘‘इस में खतरा हो सकता है?’’ हिना ने आशंका जाहिर की.

‘‘ऐसा कुछ नहीं होगा. मैं काम पूरी प्लानिंग से करूंगा.’’ अफरोज ने आत्मविश्वास से कहा.

हिना इस कदर बहक चुकी थी कि उसे अंदाजा भी नहीं था कि किस खतरनाक षडयंत्र का हिस्सा बन रही है और बाद में उसे इस की क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है. शायद इसी वजह से एक दिन उस ने अफरोज से कहा, ‘‘अफरोज, मुझे नहीं लगता कि अब हम कभी एक हो पाएंगे.’’

‘‘क्यों?’’ अफरोज ने पूछा.

‘‘देखो, चंद दिनों बाद 20 तारीख को मेरी  शादी का जोड़ा खुलने की रश्म होने जा रही है.’’ हिना मायूस हो कर बोली.

यह सुन कर अफरोज आगबबूला हो गया. उस ने तिलमिला कर कहा, ‘‘तुम चिंता मत करो, मैं जल्दी ही कुछ करता हूं. मेरा तुम से वादा है कि मैं तुम्हें किसी और के नाम का शादी का जोड़ा नहीं पहनने दूंगा.’’

अफरोज आदिल को रास्ते से हटाने का फैसला तो कर चुका था, लेकिन यह काम उस के अकेले के वश का नहीं था. गांव में ही उस के रिश्ते का मामा शाकिर और दोस्त मारुफ रहते थे. उस ने उन दोनों को अपना इरादा बता कर उन से आदिल को रास्ते से हटाने में मदद मांगी. वे उस का साथ देने को तैयार हो गए.

अफरोज की आदिल के गांव में रिश्तेदारी थी. वह वहां अपनी मोटरसाइकिल से आताजाता रहता था. इस नाते उस की आदिल से भी अच्छी जानपहचान थी. कई बार ऐसा भी हुआ था कि दोनों ने साथ बैठ कर शराब भी पी थी. फरवरी के दूसरे सप्ताह में वह मिर्जापुर गया तो रास्ते में उस की मुलाकात आदिल से हो गई. वह उस से काफी खुशमिजाज अंदाज में मिला, ‘‘मुबारक हो आदिल भाई, तुम्हारा निकाह हमारे ही गांव में होने जा रहा है.’’

‘‘शुक्रिया भाईजान.’’ आदिल मुसकरा दिया.

‘‘चलो अच्छा है इस बहाने मुलाकात होती रहेगी. किसी दिन फुरसत में आऊंगा तो साथ बैठ कर दावत करेंगे.’’ अफरोज ने कहा तो वह खुश हो गया.

यह अफरोज की योजना का एक हिस्सा था. वह नहीं चाहता था कि अचानक साथ बैठने में आदिल उस पर शक करे. योजना के मुताबिक 18 फरवरी की शाम ढले अफरोज शाकिर और मारुफ अलगअलग मोटरसाइकिलों से मिर्जापुर पहुंच गए. इत्तेफाक से उन्हें सड़क पर ही आदिल मिल गया. शराब की दावत के बहाने उन्होंने उसे अपने साथ ले लिया.

आदिल आसानी से उन के झांसे में आ गया. ठेके से उन्होंने शराब तथा दुकान से सोडे की बोतल आदि सामान लिया और सफीपुर गांव के जंगल में पहुंच गए. वहां सभी ने बैठ कर शराब पी. उन्होंने जानबूझ कर आदिल को ज्यादा शराब पिलाई थी. उसे पता नहीं था कि जिन्हें वह अपना दोस्त समझ रहा है, वास्तव में वे उस के दुश्मन हैं.

अधिक शराब पीने से वह नशे में हो गया. अफरोज बहाने से उठा और एक पत्थर उठा कर आदिल के सिर पर पीछे से दे मारा. अचानक हुए हमले से आदिल चीख कर  लुढ़क गया. इस के बाद बाकी ने भी उस के सिर व मुंह पर पत्थरों से प्रहार किए.

आदिल लहूलुहान हो गया. वह जिंदा न बच सके, इस के लिए उन्होंने उस का गला भी दबा दिया. कुछ ही देर में आदिल की सांसों की डोर टूट गई. जब उन्हें विश्वास हो गया कि उस की मौत हो चुकी है तो उन्होंने उस के शव को गड्डे में ठिकाने लगा दिया. उस का मोबाइल भी स्विच औफ कर के फेंक दिया.

इस के बाद तीनों देहरादून चले गए. अफरोज ने सोचा था कि उस की राह का कांटा आदिल हमेशा के लिए हट गया. मामला शांत होने के बाद वह मौका देख कर हिना के परिवार वालों से अपने रिश्ते की बात कर के अपने प्यार की दुनिया आबाद करेगा. उस की सोच थी कि वह कभी पकड़ा नहीं जाएगा.

लेकिन पुलिस के पहुंचते ही उस की यह गलतफहमी दूर हो गई. पुलिस ने पूछताछ के बाद उस की प्रेमिका हिना को भी गिरफ्तार कर लिया. अपने प्यार को पाने की गरज में अफरोज का कदम सरासर गलत था. प्यार को पाने का यह कोई तरीका नहीं था. जबकि आदिल तो हर हकीकत से पूरी तरह अंजान था. न उस का कोई गुनाह था न कोई अफरोज से सीधी रंजिश.

अफरोज के गलत निर्णय से न सिर्फ एक घर का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया, बल्कि खुद उस का और हिना का भविष्य भी खराब हो गया. दोनों भविष्य में एक हो भी जाएं तो भी यह कसक दिलों से कहां जाएगी कि उन के हाथ किसी निर्दोष के खून से रंगे हैं.

विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक किसी की भी जमानत नहीं हो सकी थी. आदिल के परिवार वाले उन्हें सख्त सजा दिलाए जाने की मांग कर रहे थे.

हिजड़ों की गुंडागीरी, हो जाएं सावधान

हिजड़ा समाज सभी जगह अपनी मनमानी करने के लिए बहुत बदनाम है. अंधश्रद्धा में डूबा हमारा समाज भी न जाने क्यों इन से इतना डरता है कि जानेअनजाने में ही इन की हर बात चुपचाप सहन कर लेता है. शायद लोगों को डर रहता है कि कहीं इन का दिया हुआ शाप लग गया, तो जिंदगी ही बरबाद हो जाएगी. यही वजह है कि हिजड़े भी इसी बात का भरपूर फायदा उठाने लगे हैं.

ये हर जगह दादागीरी करते दिखाई देते हैं. ये कभी सिगनल पर पैसा मांगते खड़े मिल जाते हैं, कभी बसों में, तो कभी ट्रेन में. कभीकभी तो ये घरों में घुस कर तीजत्योहार पर पैसा मांगने चले आते हैं.

अगर इन को न कह दिया जाए, तो ये गालीगलौज पर उतर आते हैं. रास्ते में ये उलटीसीधी व बेहूदा हरकतें करने लगते हैं और लोग डर के मारे इन की बात मान कर खिसकने में ही अपनी भलाई समझते हैं.

जवानी में तो हर तरह की दादागीरी से हर हिजड़े का काम हो जाता है, लेकिन ढलती उम्र में जिंदगी दोजख सी हो जाती है. अपने गुजारे के लिए तो इन्हें भीख मांगने तक की नौबत आ जाती है. अपने ही समाज से ये दुत्कार दिए जाते हैं. इन्हें नौजवान हिजड़ों की दया पर जीना पड़ता है.

इस के नतीजे में इन के द्वारा सैक्स, चोरी, लूटपाट, अपहरण जैसे किस्से ज्यादा बढ़ने लगे हैं.

हाल ही में भावनगर के तलाजा तालुका के सोसिया और कठवा गांव में हिजड़ों ने 2 नौजवानों को बहलाफुसला कर उन का अपहरण कर लिया. बाद में उन्हें भुज ले जा कर प्राइवेट अस्पताल में हिजड़ा बना दिया.

पूरे भावनगर इलाके में चर्चा का मुद्दा बनी इस वारदात में सोसिया गांव के 18 साला लालजी बाबूभाई वेगड और कठवा गांव के 18 साला मुकेश भगवानभाई सरवैया को रामदेवपीर व्याख्यान मंडल के सदस्य जतीन चीथरभाई गोहिल ने रामदेवपीर के आख्यान के बहाने भुज चलने को कहा. साथ में भावनगर से फिरोज और कड़ला नाम के 2 और हिजड़ों को भी ले लिया.

भुज ले जा कर उन्हें कैद में रखा. वहां से सानिया नाम के एक दूसरे हिजड़े की मदद से किसी प्राइवेट अस्पताल में डाक्टर से उन को हिजड़ा बनवा दिया. बाद में जोरजबरदस्ती से सौ रुपए के स्टांप पेपर पर उन दोनों से लिखवा लिया कि वे खुद अपनी मरजी से हिजड़े बने हैं.

15 दिनों तक उन की कैद में बंद दोनों नौजवान जैसेतैसे इन के चंगुल से भाग कर भावनगर लौट आए. परिवार के लोग इन दोनों को इलाज के लिए भावनगर के सर टी. अस्पताल ले कर गए, तब जा कर बात का भांड़ा फूटा.

भावनगर की पुलिस गुनाहगारों को पकड़ने में नाकाम रही, तब जा कर केस भुज ट्रांसफर किया गया.

भुज पुलिस ने सानिया हिजड़े को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले की तहकीकात अभी चल रही है. पुलिस को इस मामले में और लोगों के भी शामिल होने का शक है. पुलिस जानना चाहती है कि इन लोगों के अंगों को कहां रखा गया है? अस्पताल और डाक्टर के बारे में भी पता लगाना बाकी है.

यह समाज में किसी भी शख्स का दिल दहला देने वाली घटना है. पुलिस की लापरवाही और ढीली कार्यवाही से ही ऐसे असामाजिक लोगों को खुली छूट मिलती है.

गुजरात में चोरी, बलात्कार, अपहरण, हत्या, गुंडागीरी के किस्से रोजाना बढ़ते जा रहे हैं. केंद्र सरकार को आड़े हाथ लेने वाले मुख्यमंत्री अपने राज्य की तरफ कब देखेंगे?

तंत्रमंत्र से पत्नी की मौत

कई बार कोई जानलेवा बीमारी किसी इनसान को तंत्रमंत्र के रास्ते पर ले जाती है. आज हम भले ही मौडर्न जमाने में जीने की बातें करते हों, फिर भी समाज में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि लोग कई बार इलाज कराने के बदले तंत्रमंत्र के चक्कर में पड़ जाते हैं और आखिर में नतीजा उन की बरबादी के रूप में ही सामने आता है.

एक ऐसे ही मामले में गरीब आटोरिकशा ड्राइवर को पैर की बीमारी से पीडि़त अपनी पत्नी का 6 महीने तक इलाज कराने पर भी जब कोई नतीजा हाथ न लगा, तो उस ने तंत्रमंत्र का सहारा लिया, जो उस की पत्नी के लिए जानलेवा साबित हुआ.

दरअसल, आनंदनगर चार रास्ता के कृष्ण अपार्टमैंट्स में रहने वाले देशराजभाई सरोज की पत्नी खुशियाल

6 महीने से पैर के दर्द से परेशान थी. पहले तो फैमिली डाक्टर से दवा ली, बाद में प्राइवेट अस्पताल मेें इलाज कराया, लेकिन पैर के दर्द से राहत न मिली.

इस से देशराज और खुशियाल बहुत परेशान हो गए. इस दौरान उन को किसी ने बताया कि शायद गठिया का दर्द होगा. उन को पता चला कि जूना वाडज में गठिया की बीमारी का इलाज होता है.

देशराज अपनी पत्नी खुशियाल को रविवार के दिन सुबह जूना वाडज में गठिया के इलाज के लिए ले गया. वहां मिले आदमी ने खुशियाल को शाहपुर में कालू शहीद की दरगाह पर ले जाने की सलाह दी.

देशराज और खुशियाल को तो जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल गया. कालू शहीद की दरगाह पर खुशियाल के ऊपर तंत्रमंत्र का काम शुरू हो गया.

खुशियाल को एक कमरे में ले जाया गया. कमरे का दरवाजा बंद कर दिया गया. बाद में अंदर जलते कोयले में लाल रंग का कोई पाउडर डाल कर इलाज  शुरू हुआ.

इस दौरान खुशियाल बेहोश हो गई. थोड़ी देर बाद उस आदमी ने खुशियाल को घर ले जाने को कहा और यह भी कहा कि वह जल्दी ही ठीक हो जाएगी.

देशराज अपनी पत्नी खुशियाल को आटोरिकशा में घर ले जा रहा था, तब रास्ते में ही उस की हालत बिगड़ने लगी.

खुशियाल का इलाज पहले जिस अस्पताल में चल रहा था, उसे वहां ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डाक्टर ने खुशियाल को मरा हुआ बता दिया.

यह सुन कर देशराज की तो मानो दुनिया ही लुट गई. अपनी पत्नी की मौत से दुखी और गुस्साए देशराज ने आनंदनगर पुलिस स्टेशन में तंत्रमंत्र करने वाले शख्स के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई.

देशराज को इंसाफ मिलेगा या नहीं, यह तो बाद की बात है, लेकिन उस ने तंत्रमंत्र के चक्कर में पड़ कर अपनी पत्नी को जरूर खो दिया.

4 साल के बच्चे का कत्ल, कातिल जान कर उड़ जाएंगे होश

Crime News in Hindi: 39 साल की सूचना सेठ 6 जनवरी को गोवा के सोल बनयान ग्रांडे होटल में अपने 4 साल के बेटे के साथ आई थीं. 8 जनवरी को जब उन्होंने होटल से चैकआउट किया, तब उन का बेटा साथ नहीं था. होटल स्टाफ ने बेटे के बारे में पूछा तो सूचना सेठ ने कहा कि वह गोवा के फातोर्डा में एक रिश्तेदार के घर पर है. इस के बाद सूचना सेठ ने रिसैप्शनिस्ट से कहा कि वह उन के लिए बैंगलुरु जाने के लिए कोई टैक्सी बुक करवा दे. रिसैप्शनिस्ट ने कहा कि टैक्सी महंगी पड़ेगी, आप फ्लाइट ले कर चली जाइए, वह सस्ती होगी.

मगर सूचना सेठ ने बाई रोड जाने पर ही जोर दिया तो उन के लिए एक कैब बुक करा दी गई. सूचना सेठ अपना सामान ले कर निकलीं. उधर हाउसकीपिंग स्टाफ जब उन का छोड़ा गया कमरा साफ करने पहुंचा, तो उस को वहां खून के धब्बे मिले.

स्टाफ ने इस की सूचना होटल के मालिक को दी और मालिक ने तुरंत पुलिस को बता दिया. पुलिस ने उस कैब ड्राइवर को फोन लगाया और कोंकणी भाषा में बात करते हुए उस से कहा कि जिन मैडम को वह ले कर जा रहा है उन्हें बताए बिना वह कैब को कर्नाटक के चित्रदुर्ग पुलिस स्टेशन ले जाए.

ड्राइवर ने पुलिस के कहे मुताबिक गाड़ी पुलिस स्टेशन पर ला कर खड़ी कर दी, जहां सूचना सेठ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उन के सामान की तलाशी लेने पर उस के बच्चे की लाश पुलिस को उस के एक बैग में मिली.

सूचना सेठ ने अपने बच्चे की हत्या क्यों की? इस सवाल के जवाब में जो कहानी निकल कर आई वह एक ऐसी औरत को सामने लाती है जो एक तरफ बहुत पढ़ीलिखी, मेहनती और समाज में अपनी हैसियत रखने वाली औरत है, तो वहीं दूसरी तरफ वह सामाजिक और पारिवारिक चक्रव्यूह में फंसी, टूटन, तनाव, गुस्से, बेइज्जती, नफरत, झगड़े, कानूनी पचड़े में घिरी औरत, जिस के अंदर अपने पति से बदला लेने का लावा उबाल मार रहा था, जिस के चलते उन्होंने अपने बेटे को मौत की नींद सुला दिया.

हत्या की वजह जानने से पहले सूचना सेठ की पढ़ाईलिखाई पर एक नजर डालते हैं. वे एक एथिक ऐक्सपर्ट (नैतिकता विशेषज्ञ) और डाटा वैज्ञानिक है, जिन के पास डाटा विज्ञान टीमों को सलाह देने और स्टार्टअप व उद्योग अनुसंधान प्रयोगशालाओं में मशीन लर्निंग समाधानों को स्केल करने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. वे एआई ऐथिक्स लिस्ट में 100 प्रतिभाशाली महिलाओं में से एक हैं. वे डाटा ऐंड सोसाइटी में मोजिला फैलो, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बर्कमैन क्लेन सैंटर में फैलो और रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट में रिसर्च फैलो रही हैं और उन के पास प्राकृतिक भाषा (नैचुरल लैंग्वेज) प्रसंस्करण में पेटेंट भी है. ऐसी प्रतिभाशाली लड़की की शादी साल 2010 में वेंकटरमन से हुई थी, जो एक एआई डैवलपर हैं.

शादी के बाद दोनों में वैसी ही नोकझोंक चलती रही जैसी आमतौर पर भारतीय घरों में होती है. शादी के 9 साल बाद 2019 में सूचना सेठ ने एक बेटे को जन्म दिया. मगर बेटे के जन्म के बाद से पतिपत्नी में झगड़े काफी बढ़ गए. साल 2020 से सूचना सेठ और उस के पति के वेंकटरमन के बीच झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों ने तलाक ले लिया.

कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी सूचना सेठ को दी और आदेश दिया था कि वेंकटरमन अपने बच्चे से हर रविवार को मिल सकते हैं. मगर सूचना अपने पति वेंकटरमन से इतनी नफरत करने लगी थीं कि वे नहीं चाहती थीं कि वेंकटरमन अपने बेटे से मिलने आएं और उन की नजरों के सामने पड़ें.

इस नफरत ने सूचना सेठ की अक्ल बंद कर दी और वे एक ऐसे घिनौने अपराध की तरफ बढ़ गईं, जिस को सुन कर एकदम मुंह से यही निकलता है कि यह कैसी मां है?

न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी कहावत को सच साबित करते हुए सूचना सेठ ने बच्चे को ही खत्म करने का भयावह प्लान बना डाला. उन्होंने अपने बेटे को गोवा घुमाने का लालच दिया. 4 साल का मासूम बच्चा घूमने की बात सुन कर खुश हो उठा.

सूचना सेठ बेटे को साथ ले कर गोवा गईं और वहां होटल के कमरे में उस का कत्ल कर के लाश ठिकाने लगाने के मकसद से बैग में भर कर टैक्सी से बैंगलुरु के लिए रवाना हो गईं. यह तो होटल स्टाफ की तेजतर्रारी काम आ गई और सूचना सेठ को बीच राह में ही पुलिस ने लाश के साथ दबोच लिया.

यह आपराधिक वारदात भारतीय समाज में विवाह संस्था में भर चुकी सड़ांध, इनसान की नैतिक गिरावट और आपसी टकराव को उजागर करती है. ऐसी तमाम बातें भारतीय समाज में बहुत तेजी से बढ़ रही हैं जहां मांबाप के बीच चल रहे झगड़े का खमियाजा उन के मासूम बच्चों को उठाना पड़ रहा है.

मांबाप की रोजरोज की लड़ाइयों का ही असर है कि उन के बच्चे उग्र स्वभाव के और आपराधिक हरकतों से जुड़ जाते हैं. घर के सदस्यों के बीच का तनाव बच्चों को शराब और ड्रग्स की तरफ धकेल रहा है.

फेसबुक फ्रैंड की घर में घुस कर की बेरहमी से हत्या

रोज की तरह 27 सितंबर, 2016 की सुबह भी किरण रावत उठ कर अपने कामकाज में लग गई थीं. कोई 6 बजे उन के मोबाइल फोन की घंटी बजी तो उन्हें हैरानी हुई कि इतने सवेरे किस ने फोन कर दिया. लेकिन जब स्क्रीन पर नंबर देखा तो वह चौंकी भी और परेशान भी हुईं कि कैसा कम्बख्त और बेशर्म लड़का है, जो हाथ धो कर पीछे पड़ गया है. फोन रिसीव न करना और काट देना उन्हें ठीक नहीं लगा, क्योंकि वह जानती थीं कि लड़का दोबारा ही नहीं, न उठाने तक फोन करता रहेगा. लिहाजा मन मार कर उन्होंने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘आंटी, मैं अमित बोल रहा हूं और अभीअभी गूजरखेड़ा से आया हूं. प्लीज एक बार आप मुझे प्रिया से 5 मिनट बातें कर लेने दें, उस के बाद मैं कभी उसे या आप को फोन नहीं करूंगा.’’ किरण पसोपेश में पड़ गईं कि क्या करें? अमित के फोन सुन कर वह खुद भी तंग आ चुकी थीं. हर बार घिसे हुए रिकार्ड की तरह गिड़गिड़ा कर वह एक ही बात की रट लगाए रहता था. अमित के बारे में वह उतना ही जानती थीं, जितना उन की बेटी प्रिया ने उन्हें बताया था.

17 साल की प्रिया होनहार छात्रा थी. इन दिनों वह आईआईटी की तैयारी कर रही थी. उस ने अमित के बारे में मां से कुछ भी नहीं छिपाया था. वह उस का फेसबुक फ्रैंड जरूर था, लेकिन फ्रौड था. उस ने प्रियांशी के नाम से अपना फेसबुक एकाउंट बना कर उसे फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी थी. उस ने अमित को प्रियांशी नाम की लड़की समझ कर उस की फ्रैंड रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट कर ली थी. प्रिया अमित को लड़की समझ कर उस से कुछ महीनों तक चैटिंग भी करती रही. उसी बीच उस ने खुद का और मां का मोबाइल नंबर उसे दे दिया था. लेकिन जब उसे प्रियांशी यानी अमित की हकीकत पता चली तो उस ने उसे ब्लौक कर दिया. ब्लौक किए जाने के बाद अमित उसे मोबाइल पर फोन ही नहीं करने लगा, बल्कि प्यार का इजहार भी कर दिया.

प्रिया के लिए यह परेशानी वाली बात थी. वह इस बात पर खार खाए बैठी थी कि पहले तो अमित ने फेक एकाउंट के माध्यम से उस से दोस्ती गांठी और जब वास्तविकता सामने आई तो फोन पर प्यार का इजहार करने लगा. अमित के इस दुस्साहस से नाराज प्रिया ने उसे जम कर लताड़ा और आइंदा कभी फोन न करने की हिदायत दी. अमित नहीं माना और फोन न उठाने पर मैसेज करने लगा. इस से प्रिया को लगा कि यह सिरफिरा मानने वाला नहीं है, इसलिए उस ने उस पर ध्यान देना बंद कर दिया और पढ़ाई में मन लगाने लगी. जब प्रिया अनदेखी करने लगी तो अमित उस की मां किरण को फोन करने लगा.

उन से उस ने अपनी मनोस्थिति बताई कि जब से प्रिया ने उस से फोन पर बात करना बंद कर दिया है, तब से वह काफी तनाव में रहता है. उस तनाव में उस का सिर फटने लगता है. अगर वह एक बार आमनेसामने बैठा कर प्रिया से बात करा दें तो शायद उस की परेशानी दूर हो जाए. शुरूशुरू में तो सख्ती दिखाते हुए किरण ने बात कराने से मना कर दिया था, पर जब अमित के फोन बारबार आने लगे तो उन्हें लगा कि यह लड़का एकतरफा प्यार और गलतफहमी का शिकार हो गया है. ऐसे में अगर उस की इच्छा या जिद पूरी नहीं की गई तो वह इसी तरह प्रिया को ही नहीं, उन्हें भी परेशान करता रहेगा. 27 सितंबर, 2016 की सुबह जब अमित का फोन आया तो किरण ने सोचा कि आखिर इस अमित नाम की गले पड़ी मुसीबत से एक बार बात करने में हर्ज ही क्या है? लिहाजा उन्होंने उसे घर आने की इजाजत इस शर्त के साथ दे दी कि उसे जो भी बात करनी है, वह खिड़की से होगी. अमित इस पर भी तैयार हो गया और ठीक साढ़े 10 बजे उन के घर पहुंच गया.

किरण पेशे से ब्यूटीशियन हैं और उन के पति श्यामबिहारी एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में काम करते हैं. प्रिया इन दोनों की एकलौती बेटी थी. वह काफी होशियार और समझदार थी. उस का पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई और कैरियर पर रहता था. इंजीनियर बनने की अपनी तमन्ना पूरी करने के लिए वह एलेन कोचिंग इंस्टीट्यूट से कोचिंग भी ले रही थी. गीतानगर इंदौर का रिहायशी इलाका है. इस के कृष्णानगर अपार्टमेंट के थर्ड फ्लोर पर 3 सदस्यों वाला यह रावत परिवार सुकून से रह रहा था. हंसमुख और सुंदर प्रिया का ज्यादातर समय पढ़ाई में बीतता था. दिन में कुछ वक्त वह सोशल मीडिया, उस में भी फेसबुक पर बिता लेती थी.

फेसबुक इस्तेमाल करते समय क्याक्या सावधानियां रखी जानी चाहिए, उन्हें वह जानती थी. इसलिए अंजान लोगों और लड़कों से वह दोस्ती नहीं करती थी. पर वह अमित को प्रियांशी समझने की भूल कर बैठी, जिसे समय रहते उस ने अपने हिसाब से सुधार भी लिया था. लेकिन अमित से चैटिंग के दौरान प्रिया ने कुछ अंतरंग बातें कर ली थीं, जो स्वाभाविक भी थीं, क्योंकि वह तो उसे प्रियांशी नाम की लड़की और सहेली समझ रही थी. साढ़े 10 बजे कालबैल बजी तो किरण को समझते देर नहीं लगी कि अमित आ गया है. उन्होंने दरवाजा खोला और उसे देख कर रूखी आवाज में कहा, ‘‘जो भी बात करनी है, बाहर से और जल्दी करो.’’ पेशे से सौफ्टवेयर इंजीनियर 24 साल के अमित को इतना तो पता था कि जिस विनम्रता से वह अपनी प्रेमिका के घर के दरवाजे तक आ पहुंचा है, उसी का सहारा ले कर वह अंदर भी जा सकता है और ऐसा हुआ भी. उस ने गिड़गिड़ाते हुए गुजारिश की कि ज्यादा नहीं, वह सिर्फ 5 मिनट लेगा, इसलिए उसे अंदर आ कर इत्मीनान से बात कर लेने दें तो ज्यादा अच्छा रहेगा.

किरण चूंकि अपने घर में थीं, इसलिए उन्हें किसी तरह का खतरा अमित से महसूस नहीं हुआ. क्योंकि वह देखने में ठीकठाक यानी शरीफ लग रहा था. उन का सोचना था कि एक बार यह प्रिया से बात कर लेगा तो इस की गलतफहमी या जिज्ञासा, जो भी है, खत्म हो जाएगी, इस के बाद हमेशा के लिए उस का इस बला से पिंड छूट जाएगा. यही सोच कर उन्होंने अमित को अंदर आने दिया. तब उन्हें कतई इस बात का अहसास नहीं था कि इस मासूम से चेहरे के पीछे हैवानियत और वहशीपन छिपा है. वह उन का घर उजाड़ने की मंशा से आया है. उस की मंशा कुछ और है. अंदर आ कर खुद को बेचैन दिखाते हुए अमित ने बाथरूम जाने की बात कही तो भी किरण को उस के खतरनाक मंसूबे का पता नहीं चला कि उन्होंने महज शिष्टाचार निभाते हुए कितनी बड़ी आफत मोल ले ली. इजाजत पा कर अमित बाथरूम की तरफ लगभग भागा तो वह ड्राइंगरूम में उस के वापस आने का इंतजार करने लगीं कि वह आए और अपनी बात कह कर जाए.

फ्लैट के भूगोल से अंजान अमित जाने कैसे प्रिया के कमरे तक पहुंच गया. उस समय वह स्कूल जाने के लिए अपना बैग तैयार कर रही थी. वह दबे पांव प्रिया के पीछे पहुंचा और साथ लाया चाकू निकाल कर उस के ऊपर हमला कर दिया. अचानक हुए हमले से प्रिया चीखी तो उस की चीख सुन कर किसी अनहोनी की आशंका से घबराईं किरण उस के कमरे की तरफ भागीं. अंदर अमित प्रिया पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर रहा था. उस हालत में यह सोचने का समय नहीं था कि क्या किया जाए, इसलिए बगैर समय गंवाए किरण ने बेटी को बचाने की कोशिश की तो अमित ने उन पर भी हमला कर दिया. मां के आने पर मौका मिला तो प्रिया खुद को बचाने के लिए बाथरूम में घुस गई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.

किरण और प्रिया की चीखें सुन कर अपार्टमेंट के लोग उन के फ्लैट की तरफ भागे तो उन्होंने देखा कि एक लड़का हाथ में चाकू लिए भाग रहा है. अमित अभी सैकेंड फ्लोर तक ही आ पाया था कि उसे नीचे से भी लोग आते दिखे. उसे लगा कि लोगों ने उसे देख लिया है. अगर वह भीड़ के हत्थे चढ़ गया तो खासी धुनाई होगी. लिहाजा बचने की गरज से उस ने दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी. पड़ोसी जब किरण के फ्लैट पर पहुंचे तो जल्द ही वहां की स्थिति उन की समझ में आ गई. किरण के इशारे पर वे बाथरूम की तरफ भागे और दरवाजा तोड़ा तो प्रिया मरणासन्न हालत में पड़ी थी. उस के शरीर का काफी खून बह गया था. लोग उसे कार में डाल कर अस्पताल के लिए भागे. इसी बीच किसी ने फोन से इस घटना की खबर पुलिस को कर दी थी. इंदौर के सुयश अस्पताल में प्रिया का इलाज शुरू हुआ. लेकिन इलाज के दौरान ही उस ने दम तोड़ दिया. अमित ने उस की पीठ, पेट, आंख, कान, गले और सीने पर लगभग दर्जन भर वार किए थे. श्यामबिहारी को जब एकलौती बेटी की हत्या की सूचना मिली तो वह बेहोश हो गए.

अमित दूसरी मंजिल से कूदा तो फिर उठ नहीं सका. उस के हाथपैर में फ्रैक्चर हो गया. उसे गिरफ्तार कर के एम.वाय. अस्पताल में इलाज के लिए भरती कराया गया. वह पूरे होश में था. उस के चेहरे पर डर या पछतावा जैसी कोई चीज नहीं थी. लगता था, वह यही करना चाहता था. प्रिया की हत्या ही उस का मकसद था. गूजरखेड़ा गांव के रहने वाले अमित की फ्रैंडसर्किल कोई बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन सोशल मीडिया की उस की दुनिया काफी बड़ी थी. वह दिनरात स्मार्टफोन से चिपके हुए चैटिंग करता रहता था. लड़कियों से दोस्ती करने की गरज से उस ने प्रियांशी के नाम से एकाउंट बना कर तमाम लड़कियों से दोस्ती कर ली थी. प्रिया से दोस्ती की जगह प्यार हो गया तो उस ने उस से दिल की बात कह डाली. लेकिन प्रिया ने उस धोखेबाज को झिड़क दिया तो एकतरफा प्यार की गिरफ्त में आए इस सिरफिरे ने उसे दुनिया से ही विदा कर दिया.

पूछताछ में अपने बचाव के मकसद से अमित गोलमोल जवाब देता रहा. वह अपने पिता सुनील यादव से झूठ बोल कर निकला था कि इंटरव्यू देने जा रहा है. वह पुलिस से यह कह कर उसे भ्रमित करने की कोशिश कर रहा था कि जब वह प्रिया के कमरे में पहुंचा तो वह उस पर ज्यादती का आरोप लगाने लगी. जबकि फोरैंसिक रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि प्रिया ने खुद पर कोई वार नहीं किया था. अमित का कहना था कि प्रिया ने उस का चाकू छीन कर खुद पर वार किए थे. एक दूसरा बयान उस ने यह भी दिया था कि उसे आशंका थी कि प्रिया के घर जाने पर उस के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती है, इसलिए उस ने ही खुद पुलिस को 100 नंबर पर फोन कर के बुलाया था.

किरण पर हमले की बात से मुकरते हुए उस ने कहा कि भागते हुए जब वह बीच में आ गईं तो हाथ में पकड़े चाकू से उन्हें जख्म हो गया. जबकि हकीकत यह थी कि अमित प्रिया से एकतरफा प्यार करने लगा था और उस के मना करने पर जलभुन गया था. फेसबुक की दोस्ती पर ऐसे अपराध अब आम हो चले हैं, जिन का शिकार प्रिया जैसी लड़कियां हो रही हैं. ऐसे में उन्हें और संभल कर रहने की जरूरत है. प्रिया उस का पहला प्यार था और उस के ठुकरा देने से वह उस से नफरत करने लगा था, जिस की वजह से उस ने एक हंसताखेलता घर उजाड़ दिया.

तीन दिन तक तीन युवकों ने लड़की के साथ किया लगातार बलात्कार

पंजाब के फतेहपुर थाना क्षेत्र की युवती को रेलवे स्टेशन से अगवा कर तीन युवकों ने तीन दिन तक बंधक बनाकर गैंगरेप किया, विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की. पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. पंजाब के फतेहपुर थाना क्षेत्र निवासी एक युवती तीन दिन पूर्व ट्रेन से कहीं जा रही थी.

सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकने के बाद वह कुछ खरीदने के लिए उतरी, तभी ट्रेन चल दी और वह ट्रेन नहीं पकड़ सकी. काफी देर तक वह रेलवे स्टेशन पर घूमती रही. आरोप है कि इसी दौरान तीन युवक उसके पास आए और उसे बस में बैठाने के बहाने अपने साथ ले गए.

आरोप है कि थाना जनकपुरी क्षेत्र के एक मोहल्ले में ले जाकर उसे एक कमरे में बंद कर दिया और तीन दिन तक उसके साथ दुष्कर्म किया. किसी प्रकार वह उनके चंगुल से छूटकर थाना पहुंची और मामले की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी.

सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर दबिश देकर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है. एसपी सिटी पीपी सिंह का कहना है कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है. अभी आरोपी से पूछताछ की जा रही है. युवती को कहां बंधक बनाकर रखा गया और युवती इनके साथ क्यों गई इसकी भी जानकारी की जा रही है.

भ्रष्ट पटवारी सब पर भारी

इस सामूहिक हत्याकांड ने एक नई बहस खड़ी कर दी है कि क्या इनसान के जान की कीमत जमीन के टुकड़े से भी कम है? लेकिन इस से बड़ा एक सवाल यह है कि गांवदेहात में जमीन से जुड़े विवाद पैदा ही क्यों होते हैं?

इन विवादों के पीछे ज्यादातर जमीनों का हिसाबकिताब रखने वाला वह मुलाजिम होता है जिसे अलगअलग जगहों पर लेखपाल या पटवारी के नाम से जाना जाता है. ये पटवारी चंद रुपयों के लालच में दबंगों और पहुंच वालों के साथ मिल कर किसी भी जमीन को विवादित बना देते हैं. एक बार जमीन के विवादित होने की दशा में किसान की कोर्ट के चक्कर लगातेलगाते चप्पलें घिस जाती हैं. पटवारियों द्वारा विवादित की गई जमीन के चक्कर में पीढि़यां दर पीढि़यां मुकदमे झेलने को मजबूर होती हैं. कई बार तो बेकुसूरों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है.

चंद रुपयों के लिए पटवारी किसी भी जमीन को कैसे विवादित बना देते हैं, इस की बानगी हम सिद्धार्थनगर के डंडवा पांडेय गांव की 2 बहनों के मामले में देख सकते हैं.

अनीता और सरिता नाम की इन 2 बहनों के मांबाप की मौत पहले ही हो चुकी थी. एक भाई था जिस की मौत भी बाद में गंभीर बीमारी के चलते हो गई. ऐसे में कानूनी रूप से मांबाप की सारी जायदाद इन दोनों बहनों को मिलनी थी, लेकिन जो काम आसानी से होना था उसे यहां के 2 पटवारियों ने पैसों के लालच में विवादित बना दिया.

छोटी बहन अनीता के ससुर रवींद्रनाथ तिवारी ने जब पटवारी से दोनों बहनों के नाम उन जमीनों को करने की बात कही तो पटवारी अजय कुमार गुप्ता ने इस के एवज में पैसे की मांग की. लेकिन इन दोनों बहनों की तरफ से पैसे नहीं मिलने की दशा में उस ने पड़ोसियों से पैसे ले कर जमीन उन के नाम करने का लालच दिया और जमीन को विवादित बना दिया.

ससुर रवींद्रनाथ तिवारी ने बताया कि पटवारी अजय कुमार गुप्ता ने उन से एक लाख रुपए की मांग की थी लेकिन उतने पैसे न होने के चलते उस ने जमीन को विवादित बना दिया. अब उन्हें आएदिन कोर्ट और तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

दूसरे पटवारी रत्नाकर को इन लड़कियों के नाम घर करना था. उस ने इन से 2,000 रुपए वरासत के ले लिए. उस के बावजूद उस पटवारी द्वारा वरासत नहीं की गई, जबकि मांबाप की मौत के बाद कानूनन यह जमीन इन दोनों लड़कियों को मिलनी है.

नहीं रहता डर

जमीनों का हिसाबकिताब रखने वाले पटवारियों को अपने से बड़े अफसरों का भी डर नहीं होता है. ये उन के आदेश को भी ठेंगा दिखा देते हैं. जब कभी बड़े अफसर इन पटवारियों पर कार्यवाही करने की हिम्मत जुटाते भी हैं तो पटवारियों की यूनियन धरने पर बैठ जाती है, इसलिए कामकाज ठप होने के चलते बड़े अफसर भी कार्यवाही करने से बचते हैं.

सरिता और अनीता ने जब सभी जरूरी कागजात के आधार पर वरासत न होने पर स्थानीय एसडीएम से मिल कर शिकायत की तो एसडीएम ने वरासत किए जाने का आदेश भी दिया लेकिन पटवारी अजय कुमार गुप्ता ने एसडीएम के आदेश को भी ठेंगा दिखा दिया.

मजबूत है गठजोड़

अनीता और सरिता का मामला बानगीभर है. पटवारियों द्वारा रिश्वत के लालच में भोलेभाले लोगों को परेशान करना अब आम बात होती जा रही है. ये पटवारी किसी भी आम इनसान की जमीन के भूमाफिया से गठजोड़ कर मोटी रिश्वत के लालच में फर्जी कागजात तैयार कर डालते हैं और फिर उन कागजात के दम पर भूमाफिया दूसरे की जमीनों पर कब्जा कर बैठते हैं.

रिश्वतखोरी बिना काम नहीं

किसी का फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाना हो, जमीन से जुड़े कागजात लेने हों, जमीन की पैमाइश करानी हो तो लेखपाल यानी पटवारी बिना रिश्वत के कोई भी काम नहीं करते हैं. ऐसे कई मामले हैं जिन में नियमकानून को ताक पर रख कर रिश्वत के दम पर काम किया जाता है.

ऐसा ही एक मामला बस्ती जिले की हरैया तहसील के पटवारी घनश्याम चौधरी द्वारा किया गया, जिस ने शासनादेश की आड़ में 3 अनुसूचित जाति के और 2 पिछड़ी जातियों के लोगों को अनुसूचित जनजाति के होने की फर्जी रिपोर्ट लगा कर तहसील में भेज दी.

पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर आंख मूंद कर जिम्मेदारों ने अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया. इस मामले की जानकारी जन सूचना अधिकार कानून से मिली.

इसी तरह पटवारी रानी वर्मा द्वारा किसान सम्मान निधि योजना की पत्रावली बनाने के नाम पर हरैया तहसील के ही अमारी बाजार के किसानों से खुलेआम पैसा वसूले जाने के मामले का वीडियो वायरल हुआ. इस की जांच की गई तो मामला सही पाया गया. इस के बाद पटवारी रानी वर्मा को निलंबित कर दिया गया.

जिंदा को बना दें मुरदा

अगर किसी जिंदा को मुरदा साबित करना हो तो पटवारी से बढि़या उदाहरण कोई नहीं हो सकता है. ऐसा ही एक मामला बस्ती जिले के गौर ब्लौक के बुढ़ौवा गांव का है. यहां के रहने वाले छोटेलाल कई महीने से अफसरों की चौखट पर सिर पटक रहे हैं. इस का कारण बस इतना है कि उन्हें उसी गांव के पटवारी ने मरा दिखा कर उन की गाटा संख्या 47 की तकरीबन 40 बीघा जमीन गांव के ही रविंद्र कुमार, विधाराम यादव व सीतापति के नाम कर दी.

यही नहीं, इस जमीन का दाखिल और खारिज भी 22 अक्तूबर, 2018 में हो चुका है. इस मामले की जानकारी छोटेलाल को उस समय लगी जब वे खतौनी लेने पहुंचे. जमीन किसी दूसरे के नाम दर्ज होने पर उन के पैरों तले की जमीन खिसक गई. तकरीबन 8 महीने से जमीन वापस अपने नाम कराने और खुद को जिंदा साबित करने के लिए वे पटवारी से ले कर तहसील तक के चक्कर लगा रहे हैं.

बिना रिश्वत नहीं काम रिपोर्ट

गांवदेहात लैवल पर अगर किसी किसान की किसी आपदा से मौत हो जाए, आपदा से माली नुकसान हो, शादीब्याह का अनुदान हो, इन सभी मामलों में जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी पटवारी की होती है. उस की रिपोर्ट के आधार पर ही तय किया जाता है कि जिसे सरकारी सहायता यानी अनुदान दिया जाना है, वह शख्स सरकारी सहायता हासिल करने की श्रेणी में है भी या नहीं.

लेकिन पटवारी सरकारी सहायता हासिल करने योग्य पात्र लोगों से भी बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करते हैं. ऐसे में जो लोग पटवारियों को रिश्वत देने में सक्षम नहीं होते हैं, वे पात्र होते हुए भी सरकारी सहायता हासिल नहीं कर पाते हैं.

पीड़ितों की सुनें

डाक्टर एसके सिंह ने बताया कि बस्ती जिले की रुधौली तहसील में एक पटवारी अंजनी नंदन, जो तकरीबन 13 साल से तहसील में जमा हुआ है, उसे अभी तक रिलीव नहीं किया गया है जबकि उस का ट्रांसफर दूसरी जगह किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि भूमाफिया को अवैधानिक कब्जा कराने के आरोपी व विवादित चल रहे पटवारी के साथ ही तहसीलदार की भूमिका भी संदिग्ध है.

अंजनी नंदन नाम के इस पटवारी के ऊपर कई गंभीर आरोप भी हैं, जिन में भूमाफिया की मिलीभगत से जमीनों के नक्शे में फेरबदल करने से ले कर अवैध कब्जा कराने तक की कई लिखित शिकायतें शामिल हैं.

इस पटवारी को तहसील प्रशासन व स्थानीय स्तर की राजनीतिक इकाइयां बचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं. पटवारी के ट्रांसफर को रोकने के पीछे का बड़ा मकसद भ्रष्ट अफसर और स्थानीय नेताओं की आमदनी में कमी हो जाना बताया जाता है.

रुधौली तहसील में पटवारी द्वारा जमीनों के अभिलेखों में फेरबदल कर के मोटी रकम की कमाई करने के भी आरोप लग चुके हैं.

रुधौली तहसील क्षेत्र के गांव कैडिहा के गाटा संख्या 38 के नक्शे में संशोधन व बटा कटाने की अवैधानिक प्रक्रिया के तहत व्यापक धांधली कर के भूमाफिया को गैरकानूनी कब्जा कराने का काम भी इसी लेखपाल के समय में हो चुका है, जिस की शिकायत तहसील समाधान दिवस पर की गई थी.

भदोही जिले के रहने वाले रमेश दुबे ने बताया कि जमुनीपुर अठगवां मोढ़, भदोही का पटवारी शुभम ओझा ने मोटी रिश्वत न मिलने के चक्कर में पूरे गांव के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. अभी वह नयानया पटवारी नियुक्त हुआ है, इस के बावजूद उस ने गरीबों का जीना मुश्किल किया हुआ है.

इस मसले में रमेश दुबे ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से ले कर सभी बड़े अफसरों से इस पटवारी की शिकायत की है, जिस के बाद उस पटवारी ने पूरे गांव को सरकारी जमीन पर बसा होने का आरोप लगाते हुए एकतरफा आरसी जारी करा दिया.

जमीनी मामलों में हत्याओं पर अगर नजर डाली जाए तो इस विवाद की शुरुआत पटवारी द्वारा रिश्वत ले कर किए गए जमीनी कागजात में हेरफेर का नतीजा होता है.

सोनभद्र जिले के गांव उभ्भा में जमीन के पीछे हुई 10 हत्याओं में अगर पटवारी ने सही भूमिका निभाई होती तो आज 10 लोग जिंदा होते.

लेखपालों यानी पटवारियों की रिश्वतखोरी व बढ़ते जमीनी विवादों को अगर रोकना है तो सरकार को राजस्व से जुड़े कानूनों में बदलाव करना चाहिए और कुसूरवार पाए जाने वाले पटवारियों को नौकरी से बरखास्त कर उन्हें सख्त सजा देनी चाहिए, तभी आम जनता इन रिश्वतखोरों से नजात पाएगी.

Crime: गुमनामी में मरा अरबपति

ऐसा कर के अपने धन, एकाउंट या महत्त्वपूर्ण चीजों को सुरक्षित तो किया जा सकता है, लेकिन फिजिकली एक्सेस करने वाले के न रहने पर लौक खोलना आसान नहीं होता. इसी चक्कर में कनाडा के अरबपति जेराल्ड की 1359 करोड़ रुपए की करेंसी फंस गई…  शक नाडा की सब से बड़ी क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज कंपनी क्वाड्रिगा सीएक्स के सीईओ जेराल्ड कौटेन की जयपुर के एक निजी अस्पताल में गुमनाम मौत हो गई. इस कंपनी के संस्थापक जेराल्ड 30 साल के थे. बीते 9 दिसंबर को हुई जेराल्ड की मौत का कारण आंत की गंभीर बीमारी बताया जा रहा है. वे भारत में अनाथालय खोलने आए थे और जयपुर में जगह तलाश रहे थे. जेराल्ड की मौत के बाद उन की कंपनी क्वाड्रिगा सीएक्स की 19 करोड़ डौलर यानी करीब 1359 करोड़ रुपए कीमत की करेंसी फंस गई है.

यह क्रिप्टो करेंसी जेराल्ड के लैपटौप में बंद है और उस का पासवर्ड किसी को पता नहीं है. इतने अमीर आदमी की मौत का किसी को पता नहीं चल सका तो इस की वजह यह थी कि जयपुर में उन्हें कोई नहीं जानता था. 31 जनवरी को जेराल्ड की पत्नी जेनिफर रौबर्टसन और कंपनी ने कनाडा की अदालत में क्रेडिट अपील दायर की कि वे जेराल्ड के एनक्रिप्टेड एकाउंट को अनलौक नहीं कर पा रहे हैं. इस के बाद ही दुनिया को जेराल्ड की मौत का पता चला.

जयपुर प्रवास के दौरान जेराल्ड की एक होटल में अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. इस के बाद उन्हें मालवीय नगर स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया. जहां 2 घंटे बाद ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. वह गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे थे. यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में चल रहा है. इसलिए अस्पताल के अधिकारी आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कह रहे हैं. दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने जेराल्ड का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया है.

इस मामले में जवाहर सर्किल थानाप्रभारी अनूप सिंह का कहना है कि विदेशी जेराल्ड की मौत की जानकारी निजी अस्पताल से आई थी. मौत बीमारी के कारण हुई थी, इसलिए केस दर्ज नहीं किया गया.

जेराल्ड की पत्नी जेनिफर की ओर से अदालत में दिए गए हलफनामे के अनुसार, क्वाड्रिगा सीएक्स कंपनी के दुनिया भर में 3 लाख 63 हजार यूजर्स हैं. जेराल्ड के मुख्य कंप्यूटर में क्रिप्टो करेंसी का एक कोल्ड वौलेट था, जिसे केवल फिजिकली एक्सेस किया जा सकता है. यह औनलाइन नहीं है. जेराल्ड ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जिन के पास इस कंपनी के वौलेट के पासवर्ड थे. जेराल्ड के निधन के कारण क्रिप्टो करेंसी लौक हो गई है.

इस बीच कुछ लोग सोशल मीडिया पर जेराल्ड की मौत पर संदेह जता रहे हैं. यह धोखाधड़ी का मामला होने की भी आशंका जताई जा रही है. सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर बीमारी थी तो जेराल्ड भारत क्यों आए? उन्होंने अपना इलाज कनाडा में क्यों नहीं कराया?

हालांकि जेराल्ड की पत्नी जेनिफर ने कहा कि जेराल्ड की मौत स्वाभाविक है. दूसरी ओर कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा है कि जेराड की मौत के कारण हम कंपनी के पास जमा बिटकौइन व अन्य डिजिटल करेंसी को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं.

जेराल्ड का लैपटाप, ईमेल एड्रैस व मैसेजिंग सिस्टम सब कुछ एनक्रिप्टेड है. इसलिए पासवर्ड हासिल कर पाना लगभग असंभव हो रहा है. कंपनी इस वित्तीय संकट से निकलने का रास्ता तलाश रही है. कंपनी ने कहा कि उसे ब्रिटिश कोलंबिया स्थित नोवा स्कोटिया सुप्रीम कोर्ट में क्रेडिटर प्रोटेक्शन मिल गया है. यानी उस के खिलाफ फिलहाल कानूनी काररवाई नहीं की जा सकती.

क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज कंपनी क्वाड्रिगा के पास करीब 7 करोड़ कैनेडियन डौलर यानी करीब 380 करोड़ रुपए का कैश है, लेकिन बैंकिंग मुश्किलों के कारण क्रिप्टो करेंसी के एवज में इसे नहीं दिया जा सकता. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक क्वाड्रिगा के 3 लाख 63 हजार रजिस्टर्ड यूजर में से 92 हजार के एकाउंट में या तो क्रिप्टो करेंसी या फिर कैश के रूप में बैलेंस है.

वैसे जेराल्ड ने 27 नवंबर, 2018 को ही अपनी वसीयत पर दस्तखत किए थे, जिस में उन्होंने अपनी 96 लाख डौलर की कुल संपत्ति का वारिस पत्नी को ही बनाया था. वसीयत होने के 2 सप्ताह बाद ही जेराल्ड की मृत्यु होने पर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है.

जेराल्ड की पत्नी जेनिफर ने कहा कि भारत स्थित कनाडाई उच्चायोग ने जेराल्ड की मौत की पुष्टि की है. मैं पासवर्ड या रिकवरी-की नहीं जानती हूं. घर में भी कई बार तलाशी ली लेकिन पासवर्ड कहीं पर भी लिखा नहीं मिला.

एक्सचेंज ने कई टेक एक्सपर्ट्स को जेराल्ड का लैपटाप हैक करने के लिए हायर किया है. लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली. कंपनी दूसरे एक्सचेंज की मदद से अपने यूजर्स की क्रिप्टो करेंसी को अनलौक करने की कोशिश भी कर रही है.

दरअसल, हैकिंग से बचने के लिए कोल्ड वौलेट में बिटकौइन जैसी मुद्रा को औफलाइन नेटवर्क पर रखा जाता है. इसे क्यूआर कोड से सुरक्षित करते हैं. हाल ही में एक जापानी कंपनी के बिटकौइन चोरी होने के बाद इस का प्रयोग बढ़ गया है. इस का एक्सेस सीमित होता है. कोल्ड वौलेट को यूएसपी ड्राइव में भी सिक्योर किया जा सकता है.

क्रिप्टो करेंसी के जानकारों का कहना है कि यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां कोल्ड वौलेट में इतने यूजर्स की करेंसी को लौक किया गया. वैसे कंपनियां यूजर्स के खाते में ही करेंसी अपलोड करती हैं.

ये भी पढ़ें- कातिल बहन की आशिकी

रोक के बावजूद क्रिप्टो करेंसी में भारतीयों ने करीब 13 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर रखा है. रिजर्व बैंक के अनुसार क्रिप्टो करेंसी के लेनदेन को भारत में मान्यता नहीं दी गई है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में रोजाना करीब ढाई हजार लोग इस में निवेश करते हैं.

क्रिप्टो करेंसी एक तरह की डिजिटल या आभासी मुद्रा होती है, जिस का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता. इस मुद्रा को कई देशों ने मान्यता दे रखी है.

इस तरह की करेंसी को बेहद जटिल कोड से तैयार किया जाता है और इसे बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है. जैसे रुपए, डौलर या पौंड मीडियम औफ ट्रांजैक्शन की तरह इस्तेमाल किए जाते हैं, वैसे ही क्रिप्टो करेंसी को भी इस्तेमाल किया जा सकता है.द्य

 

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें