मिस वर्ल्ड को लौंच करना चाहते हैं दबंग खान

हरियाणा की रहने वाली मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड 2017 का खिताब जीतकर पूरे देश को गर्व करने का मौका दिया है. उन्होंने अपनी खूबसूरती, हंसी, नम्रता और सादगी से हर किसी को अपना दीवाना बना लिया है. आम लोग ही नहीं बल्कि बौलीवुड पूरी इंडस्ट्री भी उन पर फिदा है.

सूत्रों से पता चला है कि मानुषी के मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के बाद कई फिल्ममेकर्स उनके बारे में जानने की इच्छा रख रहे हैं. प्रतियोगिता के वक्त की उनकी जर्नी और तस्वीरों को देखकर कई फिल्म निर्माता उनके साथ काम करना चाहते हैं.

हमें मिली एक खबर के मुताबिक बौलीवुड के दबंग खान भी मानुषी से बेहद प्रभावित हैं. मानुषी की खूबसूरती और सादगी ने उन्हें इतना लुभाया है कि उन्होंने उन्हें बौलीवुड डेब्यु देने तक की बात की है. सलमान मानुषी को अपने अगले प्रोजेक्ट में लेने के लिए काभी उत्सुक हैं. सलमान हमेशा से ही नए और युवा कलाकारों को लांच करने के लिए जाने जाते हैं. उनकी इस लिस्ट में सोनाक्षी सिन्हा, अथिया शेट्टी, डेजी शाह, जरीन खान, स्नेहा उल्लाल का नाम भी आता है. अब खबरें आ रही हैं कि सलमान मिस वर्ल्ड को एसआरएफ प्रोडक्शंस या अपनी ही किसी फिल्म में लांच कर सकते हैं.

हालांकि जब मानुषी से बौलिवुड को लेकर उनकी योजनाओं के बारें में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो अभिनेत्री बनना चाहती हैं, लेकिन कुछ समय बाद. फिलहाल ‘अभी उनके दिमाग में बौलिवुड नहीं है. उनकी प्राथमिकताएं अलग हैं. अभी वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रही हैं और वह एक हार्ट स्पेशियलिस्ट बनना चाहती हैं.

राहुल गांधी के धर्म पर हाय हाय क्यों

जो हुआ उसकी उम्मीद और इंतजार हर किसी को था कि गुजरात विधानसभा चुनाव कैसे बगैर धार्मिक हाय हाय के सम्पन्न हुये जा रहे हैं. भाजपा गुजरात में किस बदहाली से जूझ रही है और गुजरात विकास मौडल की असलियत क्या है, यह राहुल गांधी के धर्म पर छाती पीटने से समझ भी आ रहा है कि यूं ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने ही गृह राज्य में जरूरत से ज्यादा केलोरी नहीं खर्च करनी पड़ रही है.

राहुल गांधी सोमनाथ के मंदिर क्या गए मानो शिव का तीसरा नेत्र  खुल गया, छोटे आकार की ही सही, एक प्रलय आ गई, क्योंकि सोमनाथ के एंट्री रजिस्टर में राहुल गांधी का धर्म गैर हिंदुओं वाले खाने में दर्ज किया गया था. साबित यह हुआ कि भगवान के दरबार में भी भेदभाव है, वहां भी धर्म और जाति बताना पड़ती है.

सोमनाथ मंदिर के बाहर लगे एक बोर्ड पर साफ साफ लिखा है कि यह एक हिन्दू मंदिर है और गैर हिन्दू इसमे अनुमति लेने के बाद ही प्रवेश कर सकते हैं. अव्वल तो इस निर्देश में ही विकट का विरोधाभास है क्योंकि मंदिर अपवाद स्वरूप जैन और बौद्ध धर्म को छोड़ दें तो हिन्दू धर्म के ही होते हैं और इतने होते हैं कि उनकी गिनती सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद राज्य सरकारें भी नहीं कर पा रहीं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह है कि अवैध रूप से बने नाजायज धर्मस्थलों जिनमे मंदिर भी शामिल हैं को हटाया जाये.

दूसरे निश्चित ही यह बोर्ड किसी भगवान ने नहीं बल्कि हिन्दू धर्म के ठेकेदारों ने लगाया होगा, जिनके मकसद कुछ और ही हमेशा से रहे हैं. राहुल गांधी के धर्म के विवाद से परे यह पूछा या सोचा जाये कि अगर हिंदुओं सा दिखने वाला कोई गैर हिन्दू एंट्री रजिस्टर में खुद का धर्म हिन्दू लिखाकर दर्शन कर आए तो क्या होगा. क्या शंकर मूर्ति उसे इस पाप के एवज में दंड स्वरूप भस्म करने की सामर्थ रखती है, यदि हां तो उसने महमूद गजनवी को क्यों भस्म नहीं किया था और अगर इस तरह फ्रौड करते कोई पकड़ा जाये तो कानून की किस धारा के तहत उसे किस सजा का प्रावधान है और अब तक कितनों को यह सजा दी गई है.

इन बातों में शायद हिंदुवादियों को दम नजर नहीं आएगा, न ही मुफ्त का मजा मिलेगा, इसलिए हाय हाय वाला ही संदर्भ प्रसंग ठीक है. सोमनाथ के एंट्री रजिस्टर से उजागर हुआ कि राहुल गांधी हिन्दू नहीं, बल्कि ईसाई या पारसी हैं, इससे शंकर मूर्ति को तो कोई फर्क नहीं पड़ा और न ही कोई आकाशवाणी हुई, पर नीचे वाले भक्तों के चेहरे कमल से खिल उठे कि देखो ये राहुल गांधी गुजरात चुनाव प्रचार में मंदिर मंदिर तिलक टीका लगवाते और कलाई में कलेवा बंधवाते घूम रहे हैं, यह हिंदुओं के साथ छल है, अब इस धोखे का जबाब देने की बारी मतदाता की है कि वह बता दे कि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही विश्व गुरु बनने जा रहे महान भारत देश में मंदिरों मे प्रवेश को लेकर हम कितने संकुचित या उदार हैं.

गोया कि इस तरह हिंदुओं को छलने का अधिकार सिर्फ भगवा खेमे को ही है और आजकल ये कॉपी राइट नरेंद्र मोदी को ब्राह्मणो ने दे रखे हैं. एक राहुल गांधी के सोमनाथ में दाखिल हो जाने भर से हिन्दुत्व खतरे में पड़ गया है, यह उसकी कमजोरी है या ताकत यह तो 18 दिसंबर को पता चलेगा, लेकिन भाजपा के साथ साथ खुद कांग्रेस की पोल भी खुल गई है जो हिन्दू वोटरों को रिझाने राहुल गांधी को बाकायदा जनेऊ धारी हिन्दू कह रही है और भाजपाई उन्हे क्रिश्चियन करार दे रहे हैं.

इस बकवास मसले से गुजरात के विकास का कोई लेना देना नहीं है. नेहरू गांधी खानदान को कोसने मजबूर हो चले नरेंद्र मोदी का यह कहना भी अर्थ पूर्ण है कि जवाहरलाल नेहरू नहीं चाहते थे कि सोमनाथ में मंदिर बने. बात सच है क्योंकि नेहरू का झुकाव तब बांधों और कारखानों के निर्माण पर ज्यादा था, इससे वे भी अपना कट्टरवादी चेहरा ढक लेते थे, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी का रुमाल मोदी का चेहरा नहीं ढक पा रहा है तो वे अपनी आदत और हिंदुवादी संस्कारों के मुताबिक सीधे धर्म के आंगन में कूद पड़े हैं, इसलिए भी राहुल गांधी के धर्म पर हाय हाय मुनाफे का सौदा उन्हें लग रहा है, वैसे भी अनुभव बताता है कि मंदिरों के चलते भाजपा को कभी नुकसान नहीं उठाना पड़ा, नुकसान उठाने आम जनता जो है.

अपनी खस्ता हालत सुधारने का यह मौका भाजपा चूक नहीं रही, जो उसे महंगा भी पड़ सकता है. अब यह जनता पर निर्भर है कि वह राहुल गांधी के हिन्दू न होने को अपने अच्छे दिन मानती है या नहीं. सोशल मीडिया के भक्तगण तो मान चुके हैं कि और क्या चाहिए कि कोई अब मस्जिद और दरगाहों की बात नहीं कर रहा, इस लिहाज और पैमाने से तो भाजपा गुजरात जीत चुकी है इसलिए अब राहुल गांधी को मंदिरों की ड्रामेबाजी छोड़ देनी चाहिए.

बंदिशें टूट रही हैं : सनी सिंह

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से ताल्लुक रखने वाली सनी सिंह के लिए भोजपुरी फिल्मों में जाना और वहां अपना कैरियर बनाना आसान नहीं था. सनी सिंह के माता पिता आजमगढ़ से भले ही मुंबई आ गए थे, पर उन की जड़ें वहां से जुड़ी रहीं.

सनी सिंह की पढ़ाई मुंबई में हुई. कालेज में दाखिला लेने के बाद उन के दोस्तों ने उन्हें फिल्मों में काम करने का सुझाव दिया. पहले तो सनी सिंह ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, पर जब कुछ इश्तिहार शूट करने वालों ने भी यही कहा, तो उन्होंने अपने माता पिता से बात की.

शुरुआत में सनी सिंह की बात माता पिता को समझ में नहीं आई. लिहाजा, बड़ी मशक्कत के बाद वे उन्हें समझाने में कामयाब हुईं.

अब भोजपुरी फिल्मों में सनी सिंह को सब से हौट हीरोइन माना जा रहा है. उनकी तुलना लोग सनी लियोनी से करने लगे हैं. पेश हैं, सनी सिंह से हुई बातचीत के अंश.

कुछ ही दिनों में आप भोजपुरी फिल्मों की सनी लियोनी बन गई हैं. कैसा रहा है अभी तक का यह सफर?

मैंने फिल्मों में बहुत मेहनत की है. मैंने अपना पहला रोल कैरेक्टर आर्टिस्ट का किया था. लोगों का कहना था कि कैरेक्टर रोल करने के बाद एक टैग लग जाएगा, फिर कभी हीरोइन के रोल नहीं मिलेंगे. मुझे इस बात को गलत साबित करना था.

कैरेक्टर आर्टिस्ट का किरदार निभाने के बाद मैंने आइटम डांस भी किया. यहां से मेरी पहचान बनने लगी. फिर मुझे सेकेंड लीड में हीरोइन के रोल मिलने लगा.

मैंने मेहनत से जी नहीं चुराया और काम करती रही. अब मेरी फिल्म ‘किसमें कितना है दम’ आ रही है, जिसमें मैंने बतौर हीरोइन काम किया है. मैं अब तक के अपने सफर से बहुत संतुष्ट हूं.

किसी हीरोइन की कामयाबी में किसका हाथ होता है?

सब से बड़ा हाथ हीरोइन द्वारा की गई फिल्मों का होता है. फिल्म में जो रोल हीरोइन करती है, उस को फिल्म का डायरैक्टर बहुत असरदार बनाता है. फिल्मकार, डांस डायरैक्टर, सिनेमा फोटोग्राफर और हीरो सब की मदद से ही हौसला मिलता है.

हीरोइन कितना भी अच्छा काम कर ले, पर अगर फिल्म नहीं चली, तो उस को कोई फायदा नहीं मिलता है. इस के साथ हीरोइन की अपनी भी काबिलीयत होती है.

आप ने अपना नाम पल्लवी से सनी क्यों बदला?

मैंने जब पल्लवी नाम से फिल्मों में काम करना शुरू किया, तो कई हौट सीन और आइटम डांस भी किए. उसी समय हिंदी फिल्मों में सनी लियोनी की कई फिल्में आ रही थीं. मेरे कई साथी फिल्मकार कहने लगे कि मैं सनी लियोनी की तरह ही दिखती हूं. मेरे फिगर को ले कर सब ने ऐसा ही कहना शुरू किया. तब मुझे लगा कि अगर मुझे लोग सनी कह ही रहे हैं, तो क्यों न मैं अपना नाम सनी रख लूं. इस तरह मैं पल्लवी से सनी बन गई.

सनी लियोनी विदेशों में ब्लू फिल्मों में काम कर चुकी हैं. आप को यह नाम रखते हुए किसी तरह का खतरा नहीं लगा?

सनी लियोनी पहले भले ही ब्लू फिल्मों में काम करती रही हों, पर अब उन्हें हिंदी सिनेमा, यहां के दर्शकों और बाकी लोगों ने पसंद किया है. आज वे टैलीविजन पर भी काम कर रही हैं. तमाम विज्ञापनों में लोग उन को स्वीकार कर रहे हैं. सच कहें, तो उन्होंने कभी कुछ छिपाया नहीं. यह उन की ईमानदारी थी, जिसे मैं भी पसंद करती हूं, इसलिए मुझे अपना नाम सनी रखने में कोई खतरा नहीं लगा.

आज की लड़कियों के बारे में आप क्या कहेंगी?

लड़कियों के सामने पहले की तरह बंदिशें नहीं रह गई हैं. अब काफीकुछ अपने मन से करने को मिलता है, जिस वजह से वे समाज में अलग पहचान बनाने में कामयाब हो रही हैं.

जीएसटी पर नरेंद्र मोदी ने तेवर किए ढीले

राहुल गांधी की गब्बर सिंह टैक्स धमकी ने जीएसटी की हालत पतली कर दी है और नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली की अकड़ और तेवर को ढीला कर दिया है. जीएसटी में काफी बदलाव 10 नवंबर की काउंसिल की बैठक में किए गए, हालांकि ये काफी नहीं हैं. पर यह साबित करते हैं कि न तो भारतीय जनता पार्टी का हिंदुत्व कार्ड मजबूत है और न राहुल गांधी की कांग्रेस का अभी अंतिम संस्कार हुआ है.

राहुल गांधी ने गुजरात चुनावों को देशभर के व्यापारियों, किसानों, मजदूरों, कारखानेदारों की मुसीबतों का चुनाव बना कर भगवा पार्टी को सकते में डाल दिया है. जहां पहले राममंदिर, गौ, पाकिस्तान, कश्मीर, ट्रिपल तलाक जैसे बेहूदा, बेमतलब और बेबुनियाद के मसलों को ले कर ही चुनाव लड़े जाते रहे हैं, इस बार कामकाज को ले कर चुनाव लड़ा जा रहा है.

चुनाव अब मंदिरों के अहातों से नहीं असल में उन गलियों से लड़ा जा रहा है, जहां व्यापारी माल बेचते हैं और जहां वे किसानों और छोटे कारखानेदारों से तैयार सामान खरीदते हैं. पिछले कई चुनावों में ये लोग सिर्फ घृणा के निशाना बनते थे.

ये चुनावों में पैसा देते थे, ये चुनावों के लिए नेताओं को पालते थे, पर इन को गालियां दी जाती थीं. नरेंद्र मोदी जिन्हें कालाबाजारी कहकह कर सुबहशाम गाली देते हैं, वे उन्हीं सर्राफा बाजारों व होलसेल मार्केटों में, मंडियों में काम करते हैं, जिन को कर चोर बताया जा रहा है. वे ही घरघर सामान पहुंचाते हैं, वे ही सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक दुकानों को चलाते हैं, वे ही देश के एक कोने से दूसरे कोने तक कच्चा व तैयार सामान पहुंचाते हैं.

इन को देश का दुश्मन बताना सब से बड़ा गुनाह है पर भगवा जमात इन्हें हमेशा से पापों की गठरी कहती रही है. इन्हें कहा जाता है कि पैसा तो पाप की निशानी है. पैसा कमाओ और ब्राह्मणों को दान कर दो. अब ये ही ब्राह्मणवादी सरकार में जा पहुंचे हैं. राहुल गांधी ने यह पलटा है, चुनावी इतिहास में पहली बार. पहली बार व्यापार संगठनों में चुनावों का प्रचार किया जा रहा है. पहली बार व्यापारियों की दिक्कतों को सुना जा रहा है.

किसानों और मजदूरों की हालत तभी सुधरेगी जब इन व्यापारियों को काम करने की छूट मिलेगी, इन्हें सिरआंखों पर रखा जाएगा, इन का मानसम्मान किया जाएगा और इन्हें बैल समझ कर खसी कर बैलगाडि़यों और हलों में जोत कर मारने लायक ही नहीं समझा जाएगा. यह बदलाव सुखद है. भगवा जमात को समझना चाहिए कि संस्कृति, पूजापाठ, इतिहास, मंत्र, योग आदि से नहीं, मेहनत से देश बदलेगा और ये नहीं समझे तो या तो देश नष्ट हो जाएगा या इन्हें तूफान बहा ले जाएगा.

आखिर खुल ही गया ललिता का राज

30 जनवरी, 2017 की बात है. भगवानदास कुशवाह आंगन में बैठे चाय पी रहे थे. तभी उन की नजर भतीजे रामरतन के कमरे की तरफ गई. मांबाप की मौत के बाद रामरतन उन के साथ ही रह रहा था. करीब 10 महीने पहले भगवानदास ने ही रामरतन की शादी ललिता से कराई थी. उस समय उस की बीवी मायके गई हुई थी. रोजाना रामरतन सूरज निकलने से पहले ही सो कर उठ जाता था लेकिन उस दिन सुबह के करीब साढ़े 8 बज गए. तब भी रामरतन के कमरे का दरवाजा नहीं खुला था.

भगवानदास ने आंगन से ही रामरतन को कई आवाजें लगाईं पर उस के कमरे से कोई आवाज नहीं आई. तब वह चाय का प्याला एक तरफ रख कर दरवाजा खोल कर उस के कमरे में पहुंचे. रामरतन अपनी चारपाई पर था. उन्होंने उसे फिर कई आवाज दीं पर वह नहीं उठा.

तब उन्होंने आवाज देते हुए उसे झकझोरा. झकझोरते समय उन्हें कुछ शक हुआ तो उस की नब्ज टटोली. नब्ज गायब मिली और उस का शरीर भी एकदम ठंडा था. लग रहा था जैसे उस की मौत हो चुकी है.

भगवानदास घबराते हुए बाहर गए और पड़ोसियों को बुला लाए. सभी ने कमरे में पहुंच कर रामरतन की धड़कनों आदि को देखा तो पाया कि उस की मौत हो चुकी है. वह रात को खाना खा कर ठीकठाक सोया था तो यह अचानक हो क्या गया. भगवानदास समझ नहीं पाए.

रामरतन के गले पर कुछ निशानों को देख कर भगवानदास को शक हो गया कि उस की मौत स्वाभाविक नहीं हुई है बल्कि किसी ने उस की हत्या की है. इसलिए वह कुछ लोगों के साथ तिघरा थाने पहुंच गए. थानाप्रभारी आर.पी. मिश्रा को उन्होंने रामरतन की मौत की बात बता दी.

थानाप्रभारी आर.पी. मिश्रा ने भगवानदास की बात को काफी गंभीरता से लिया और तत्काल फोर्स ले कर उन के साथ गांव तालपुरा के लिए रवाना हो गए. थाने से तालपुरा महज 4 किलोमीटर दूर था, इसलिए थानाप्रभारी 10-15 मिनट में ही घटनास्थल पर पहुंच गए.

तब तक भगवानदास के घर के बाहर गांव के काफी लोग जमा हो चुके थे. थानाप्रभारी ने लाश का बड़ी बारीकी से निरीक्षण किया तो मृतक की गरदन पर उन्हें कुछ निशान दिखाई दिए. गौर से देखने पर लग रहा था जैसे किसी ने उस का गला घोंटा हो.

मरने वाले की उम्र यही कोई 33 साल थी. तलाशी के दौरान मृतक की पैंट की जेब से कुछ रुपए और एक डायरी मिली. डायरी में नातेरिश्तेदारों के मोबाइल नंबर लिखे हुए थे. कमरे का सारा सामान अपनीअपनी जगह रखा था. कमरे का मुआयना करने के बाद नहीं लग रहा था कि वहां कोई लूट की वारदात हुई है. लग रहा था कि हत्या लूट के लिए नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से की गई है.

थानाप्रभारी के पूछने पर भगवानदास ने बताया कि रामरतन की पत्नी ललिता इन दिनों अपने मायके कुलैथ गई हुई है. उस के मायके वालों को इस घटना की सूचना भिजवा दी है. वे लोग आपस में बातें कर ही रहे थे कि इतने में ललिता दहाड़ मारती हुई उस कमरे में आ गई, जहां उस के पति की लाश पड़ी थी.

कुछ देर बाद थानाप्रभारी ने ललिता से पूछा, ‘‘क्या तुम बता सकती हो कि तुम्हारे पति की हत्या किस ने की होगी?’’

‘‘साहब, मैं तो अपने मायके में थी. मोए का मालूम किस ने मेरा सुहाग उजाड़ दयो.’’ इतना कह कर वह फिर सुबकने लगी.

थानाप्रभारी की सूचना पर फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट ब्यूरो का स्टाफ भी वहां पहुंच गया. उन का काम निपट जाने के बाद पुलिस ने जरूरी काररवाई की और लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. इस के बाद थाने पहुंच कर भगवानदास की तहरीर पर अज्ञात हत्यारे के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर लिया.

थानाप्रभारी ने भगवानदास से बात की तो उन्होंने बताया कि ललिता के लाखन के साथ नजदीकी संबंध थे. रामरतन ललिता से कहता था कि वह लाखन से न मिला करे, पर वह नहीं मानी. उन्होंने ललिता पर ही रामरतन की हत्या का आरोप लगाया.

थानाप्रभारी जब उस दिन घटनास्थल पर गए थे तो उन्हें ललिता के हावभाव देख कर शक भी हो रहा था. उन्होंने भगवानदास से ललिता का फोन नंबर लेने के बाद उस की काल डिटेल्स निकलवाई.

काल डिटेल्स का अध्ययन करने पर पता चला कि ललिता एक फोन नंबर पर सब से ज्यादा बातें किया करती थी. उस फोन नंबर की जांच हुई तो वह ललिता के चचेरे देवर लाखन का निकला. लाखन के बारे में जांच की तो पता चला कि उस के ललिता के साथ नाजायज संबंध थे. यह जानकारी मिलते ही थानाप्रभारी समझ गए कि रामरतन अपनी पत्नी ललिता और लाखन के अवैध संबंधों की भेंट चढ़ा है.

पुलिस ने एक बार फिर ललिता से पूछताछ की. उस ने बिना डरे बड़ी सफाई से सभी सवालों के जवाब दिए. पति से खटपट की बात तो उस ने स्वीकार की लेकिन उस की हत्या करने की बात को नकार दिया.

पुलिस के पास काल डिटेल्स के अलावा ललिता के खिलाफ ऐसा कोई ठोस अहम सबूत नहीं था जिस के आधार पर उसे गिरफ्तार किया जा सके.

अब पुलिस लाखन से पूछताछ करना चाहती थी. लेकिन वह घर से फरार हो चुका था. कई संभावित जगहों पर उसे तलाशा पर वह नहीं मिला. उस की फरारी ने थानाप्रभारी का शक और मजबूत कर दिया. लाखन से पूछताछ से पहले पुलिस ने ललिता को थाने बुलाना उचित नहीं समझा.

थानाप्रभारी ने गांव के मुखबिर को ललिता की निगरानी के लिए लगा दिया. करीब पौने 3 महीने बाद लाखन पुलिस के हत्थे चढ़ गया. पुलिस ने जब उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने रामरतन की हत्या करने की बात स्वीकार ली. उस ने उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह अवैध संबंधों की बुनियाद पर रची निकली.

रामरतन और ललिता की शादी करीब 10 महीने पहले एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में हुई थी. दोनों की उम्र में 13 साल का अंतर था. यानी 20 साल की ललिता की अपनी उम्र से 13 साल बड़े रामरतन से शादी तो हो गई थी, पर वह उस के साथ खुश नहीं थी.

इस का नतीजा यह हुआ कि शादी के एक पखवाड़े बाद ही पतिपत्नी में खटपट शुरू हो गई. वैसे भी रामरतन सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर के शाम को थकामांदा घर लौटता. वह पत्नी की जरूरतों का खयाल किए बिना ही सो जाता था.

ललिता ने इधरउधर नजरें दौड़ाईं तो उसे चचेरा देवर लाखन जंच गया. वह अविवाहित था. ललिता ने उसे अपने जाल में फांस लिया. जब घर में कोई नहीं होता तो वह उसे बुला लेती थी. इस तरह उन दोनों के बीच अवैध संबंध कायम हो गए.

धीरेधीरे उन का प्यार परवान चढ़ने लगा. रामरतन निर्धारित समय पर रोजाना अपनी नौकरी पर निकल जाता था, उसी मौके का फायदा उठा कर ललिता लाखन को फोन कर घर पर बुला लेती थी. फिर दोनों अपनी हसरतें पूरी करते.

इस तरह के संबंधों को कोई लाख छिपाने की कोशिश करे, पर वह ज्यादा दिनों तक छिपे नहीं रहते. एक न एक दिन उजागर हो ही जाते हैं. लाखन का जब रामरतन की गैरमौजूदगी में उस के घर ज्यादा आनाजाना होने लगा तो लोगों का शक भी बढ़ गया.

आखिरकार एक दिन रामरतन के एक पड़ोसी ने उस से कह ही दिया, ‘‘भैया, नौकरी तो तुम पूरी मुस्तैदी के साथ करते हो, मगर घरवाली का भी खयाल रखा करो.’’

‘‘मैं समझा नहीं, तुम क्या कहना चाह रहे हो?’’ रामरतन ने कहा.

‘‘आजकल लाखन तुम्हारे घर के खूब चक्कर लगा रहा है.’’ पड़ोसी बोला.

उस पड़ोसी की बात सुन कर रामरतन हक्काबक्का रह गया. उस ने ललिता से पूछा, ‘‘मेरी गैरमौजूदगी में लाखन आता है क्या?’’

‘‘आप से किस ने कहा कि आप की गैरमौजूदगी में लाखन आता है?’’ ललिता ने उलटे उस से सवाल किया.

‘‘किस ने कहा है, इस से मतलब मत रख, पर इतना समझ ले कि अब लाखन घर आए तो उसे कमरे में कतई नहीं आने देना. उसे ले कर समूचे तालपुरा में तरहतरह की चर्चाएं हो रही हैं. मैं कतई नहीं चाहता कि उस की वजह से हमारी गांव में बदनामी हो.’’ रामरतन बोला.

ललिता ने कोई जवाब नहीं दिया. रामरतन इस बात को ले कर काफी परेशान था. वह भी कुछ दिनों से महसूस कर रहा था कि ललिता का व्यवहार उस के प्रति उपेक्षापूर्ण रहने लगा है. उस से उसे लगा कि कहीं ललिता सही में मर्यादा की दीवार तो नहीं लांघ गई

उधर ललिता ने लाखन को फोन कर के बता दिया था कि पति को हम दोनों पर शक हो गया है इसलिए कुछ दिनों वह घर न आए. ललिता के कहने के बाद लाखन ने ऐहतियात बरती. उस दौरान वे केवल फोन पर ही बात कर लेते. पर खाली बातों से काम चलने वाला नहीं था. वे फिर से मिलने का उपाय खोजने लगे.

रामरतन अपनी नौकरी पर निकल जाता और भगवानदास अपने खेतों पर, इसी का फायदा उठा कर ललिता लाखन को फोन कर के कमरे पर बुला लेती.

इत्तफाक से एक दिन दोपहर में रामरतन की तबीयत अचानक खराब हो गई तो वह काम से घर लौट आया. संयोग से लाखन उस वक्त ललिता से मिलने उस के घर आया हुआ था. रामरतन को क्या पता था कि उस के पीछे घर में क्या हो रहा है. रामरतन आया और सीधा अपने कमरे में दाखिल हो गया. पर सामने का दृश्य देख कर वह भौचक्का रह गया. उस की पत्नी अपने चचेरे देवर लाखन की बांहों में समाई हुई थी.

यह देख कर गुस्से से रामरतन का खून खौल उठा. रामरतन को अचानक आया देख लाखन वहां से भाग गया. तब उस ने ललिता की जम कर पिटाई की.

गुस्सा शांत हो जाने के बाद रामरतन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह चरित्रहीन पत्नी का क्या करे. यदि वह उसे मायके भेज देगा तो समस्या यह थी कि रोटी कौन बनाएगा और नौकरी छोड़ कर पत्नी की रखवाली कर नहीं सकता था.

उधर ललिता का लाखन से इतना लगाव हो गया था कि वह उसे छोड़ना नहीं चाहती थी. इस के साथसाथ वह पति से भी नाता नहीं तोड़ना चाहती थी. क्योंकि जो सुखसुविधा रामरतन उसे दे रहा था, वह लाखन फिलहाल नहीं दे सकता था. क्योंकि वह तो बेरोजगार था. यही सब सोच कर ललिता ने पति से माफी मांगते हुए वादा किया कि आइंदा वह लाखन से नहीं मिलेगी. रामरतन को लगा कि ललिता को शायद अपनी गलती का अहसास हो गया है तो उस ने पत्नी को माफ कर दिया.

दूसरी ओर लाखन अब ललिता से मेलजोल बनाए रखने का साहस नहीं जुटा पा रहा था. क्योंकि उस दिन रामरतन ने उसे रंगेहाथों जो पकड़ लिया था. वह ललिता से कन्नी काटने लगा. मगर ललिता उस का पीछा कहां छोड़ने वाली थी. उस ने एक दिन लाखन से कह भी दिया कि वह उस के बिना नहीं रह सकेगी. अपनी चिकनीचुपड़ी बातों से उस ने लाखन को मना लिया. लिहाजा पहले की तरह उन की रासलीला चलने लगी.

इस तरह रामरतन के पीठ पीछे वह अपनी हसरतें पूरी करते रहे. गांव वालों से रामरतन को पुन: पता चल गया कि लाखन अब भी उस के घर आता है.

लाखन और ललिता इश्क की राह में इतने दूर आ चुके थे कि अब वे किसी भी कीमत में वापस नहीं लौटना चाहते थे. इश्क का जुनून दोनों के सिर चढ़ कर बोल रहा था. आखिर एक दिन रामरतन ने उन दोनों को फिर रंगेहाथ पकड़ लिया. इस बार रामरतन ने ललिता की पिटाई करने के बजाय खरीखोटी सुनाई. बाद में उस ने पत्नी को समझाने की भरसक कोशिश की. लाखन उस दिन भी भाग गया था. रामरतन को लगा कि ललिता सुधरने वाली नहीं है इसलिए उस ने उसी दिन अपने मामा हरिज्ञान सिंह को बुला कर ललिता को उस के मायके कुलैथ भिजवा दिया.

रामरतन ने ललिता को भले ही उस के मायके भिजवा दिया पर उस ने खुद को नहीं बदला. कुछ दिनों बाद वह लाखन को फोन कर के एकांत में मिलने के लिए अपने मायके कुलैथ बुला लेती.

ललिता भले ही अपने मायके वालों की नजरों से बच कर लाखन के साथ रंगरलियां मना रही थी, लेकिन कुलैथ के लोगों की नजरों को वह कैसे चकमा दे सकती थी. यानी मायके में भी ललिता और लाखन के अवैध संबंधों को ले कर चर्चाएं होने लगीं. इस से ललिता के मांबाप और भाईभाभी की बदनामी होने लगी.

इस के बावजूद भी ललिता अपने प्रेमी लाखन को नहीं भूल पाई. एक दिन वह लाखन से बोली, ‘‘लाखन, मैं तेरे बिना अब जी नहीं सकती. अब मुझे हमेशाहमेशा के लिए तेरा साथ चाहिए. रामरतन के रहते यह संभव नहीं है क्योंकि वह हम दोनों के मिलन में रोड़ा बना हुआ है. इस रोड़े को अब हर हाल में हटाना होगा.’’

अपनी लच्छेदार बातों से ललिता ने लाखन से पति को रास्ते से हटाने के लिए रजामंद कर लिया. लाखन यह काम करने के लिए तैयार हो गया.

29 जनवरी, 2017 को ललिता के मातापिता और भाई रिश्तेदारी में शादी के कार्यक्रम में शरीक होने के लिए गए थे. घर पर सिर्फ ललिता और उस की भाभी ही थी. मौका देख कर आधी रात को ललिता ने लाखन को फोन कर के कुलैथ बुला लिया.  इस के बाद ललिता लाखन की मोटरसाइकिल पर बैठ कर तालपुरा के लिए निकल गई. रास्ते में स्थित पुलिया पर कुछ देर बैठ कर दोनों ने यह तय कर लिया कि आज रामरतन को हर हाल में रास्ते से हटाना है.

कुलैथ से तालपुरा पहुंच कर दोनों घर के पिछवाड़े की दीवार फांद कर दबे पांव रामरतन के कमरे में पहुंच गए. रामरतन उस समय गहरी नींद में सो रहा था. उस के चाचा भगवानदास दूसरे कमरे में थे. ललिता और लाखन ने रामरतन को दबोच लिया.

ललिता ने उस के हाथ पकड़े और लाखन छाती पर सवार हो गया. फिर दोनों हाथों से उस का गला दबाने लगा. रामरतन ने जान बचाने के लिए हाथपैर पटके तो ललिता ने उस के पैर कस कर पकड़ लिए.

कुछ ही देर में रामरतन की सांसें थम गईं. वह बेदम हो गया तो उसे उसी हालत में छोड़ कर दोनों दीवार फांद कर निकल गए. लाखन रात के अंतिम पहर में ही ललिता को उस के मायके कुलैथ छोड़ आया. जहां ललिता रात में ही नहाई. इतनी रात में नहाने पर उस की भाभी ने टोका तो ललिता ने बहाना बना दिया.

लाखन से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस की प्रेमिका ललिता को भी गिरफ्तार कर लिया. थाने में उस से पूछताछ की गई तो उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

ललिता को क्या पता था कि पति की ढाई बीघा जमीन पर लाखन के साथ मौज करने के बजाय वह जेल चली जाएगी. पुलिस ने गिरफ्तार लाखन और ललिता को 22 मार्च को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक दोनों की जमानत नहीं हुई थी.

लेखक : मुकेश तिवारी/रणजीत सुर्वे

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

बौबी देओल कर रहे हैं अपने दमदार लुक पर काम

बौलीवुड एक्टर बौबी देओल बहुत ही जल्द अपने लुक से सबको हैरान करने वाले हैं. वह अपनी आगामी फिल्म ‘रेस-3’ के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और बता दें, इस फिल्म में उनका लुक ऐसा होगा जैसा हमने पहले कभी देखा नहीं होगा. वह इस फिल्म में नेगेटिव रोल करते दिखाई देंगे. इसके लिए वह लगातार अपने किरदार के लिए फिटनेस पर ध्यान दे रहे हैं.

हालांकि बौलीवुड़ में अब अपने किरदार को लेकर अपना बहतरीन अभिनय देने की जैसे होड़ लग लई हो, कई फिल्मों में हमने कई सारे अभिनेताओं को देखा जिन्होंने अपने आपको शारीरिक रुप से बदल कर रख लिया था और खुद को इस कदर बदलने के कारण लोगों को उन्हें पहचान पाना मुश्किल हो गया था. आज हम उन एक्टर्स के बारे में जानेंगे जिन्होंने अपने आपको कुछ इस कदर बदला था.

रणदीप हुड्डा

रणदीप हुड्डा को बेहतरीन एक्टिंग के लिए जाना जाता है. वह अपने किरदारों के लिए काफी मेहनत करते हैं. रणदीप ने पिछले साल रिलीज हुई फिल्म ‘सरबजीत’ में अपने किरदार के लिए करीब 35 किलो वजन कम किया था. सरबजीत के आने के के कुछ वक्त पहले ही रणदीप हुड्डा की एक फिल्म ‘दो लफ्जो की कहानी’ आई थी जिसमें वो एक किक बौक्सर की भूमिका में थें.

राजकुमार राव

राजकुमार राव की जिन्हें बौलीवुड में शानदार एक्टिंग के लिए पहचाना जाने लगा है. उन्होंने इस साल रिलीज हुई फिल्म ‘राब्ता’ और ‘ट्रैप्ड’ के लिए अपने लुक में काफी बदलाव किया था. जहां राब्ता में वह 324 वर्षीय आदमी के किरदार में थे तो वहीं ट्रैप्ड में एक ऐसे लड़के के रोल में थे, जो अपने फ्लैट में कुछ दिन के लिए बंद हो जाता है. इस रोल के लिए राजुकमार राव ने अपना काफी वजन कम किया था.

आमिर खान

बौलीवुड के ऐसे कई सितोरें हैं जिन्होंने अपने किरदार के लिए कड़ी मेहनत की और उनमें सफलता भी हासिल की, जिसमें अगर सबसे पहला नाम आमिर खान का लिया जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि आमिर अपनी फिल्मों के लिए हमेशा नया लुक अपने फैन्स के लिए लेकर आते रहे हैं, जिसके लिए उन्हें बहुत परिश्रम भी करती पड़ी. उनकी लेटेस्ट फिल्म ‘दंगल’ की बात करें, तो इसके लिए उन्होंने पहले तो बहुत ज्यादा अपना वजन बढ़ाया और फिर उसे घटाया.

फरहान अख्तर

फरहान अख्तर ने 2013 में आई फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ में मिल्खा सिंह का किरदार निभाया था. इस फिल्म के लिए फरहान ने जमकर वर्कआउट कर सिक्स पैक बनाए थे. फरहान ने इस कदर खुद के उपर काम किया था कि वो बिल्कुल देखने में मिल्खा सिंह की तरह लगने लगे थे.

संजय दत्त

संजय दत्त ने साल 2012 में आई फिल्म ‘अग्निपथ’ में कांचा नामक व्यक्ति की भूमिका में थे. संजू बाबा ने अपने इस लुक से हम सभी को हैरान कर दिया था. लोगो ने जब उन्हे उनके लुक में देखा तो लोगो का यकिन करना मुश्किल हो गया था कि क्या ये सच में संजय दत्त हैं.

शिल्पा शिंदे के साथ शो में छेड़खानी और किस करते दिखे आकाश ददलानी

‘बिग बौस 11’ के रैपर आकाश ददलानी पिछले कुछ दिनों से शो में सदस्यों पर काफी प्यार बरसाते नजर आ रहे हैं. इन दिनों उनकी हरकतों में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है. आकाश इस शो में जिसे अपनी मां कहते हैं उन्ही के साथ किस करते दिखाई दे रहे हैं. जी हां, आकाश अपनी को-कंटेस्टेंट शिल्पा शिंदे को शो में अपनी मां बताते आ रहे हैं. शिल्पा भी उन्हें बेटा-बेटा कहकर बुलाती हैं. लेकिन हाल ही में उनका एक अनसीन वीडियो सामने आया है, जिसमें वे शिल्पा को लगातार छेड़ते और किस करते नजर आ रहे हैं. वीडियो में करीब 10 बार अलग-अलग समय पर आकाश शिल्पा को किस कर रहे हैं.

इस वीडियो में पहले आकाश सपना चौधरी को छेड़ते हैं और बाद में वे शिल्पा के साथ गार्डन एरिया में लगे शेड में जाते हैं, तभी अर्शी शिल्पा को आवाज देकर बुलाती हैं और वे जाने के लिए पलटती हैं. लेकिन तभी अचानक से आकाश उन्हें कस कर पकड़ लेते हैं और जबरदस्ती रोकने की कोशिश करते हैं. आकाश की हरकतें देख शिल्पा उनका विरोध करती हैं और कहती हैं कि वे उनकी मां हैं. लेकिन आकाश हैं कि वह शिल्पा की सुनते ही नहीं और उन्हें जबरदस्ती दूसरी ओर ले जाते हैं.

कुछ दूरी पर जाकर आकाश जबरदस्ती शिल्पा को किस करने लगते हैं इसपर शिल्पा उन्हें धमकाते हुए कहती हैं कि उनके नेफ्यू उन्हें छोड़ेंगे नहीं. हालांकि, बाद में आकाश के कहने पर वह भी उन्हें किस कर देती हैं. बाद में दोनों मस्ती करते हुए वाशिंग एरिया में पहुंच जाते हैं. जहां अर्शी कपड़े निकाल रही हैं. इस दौरान आकाश पहले शिल्पा की गोद में आकर बैठ जाते हैं और फिर उन्हें किस करने लगते हैं.

इसके बाद जब शिल्पा और अर्शी दोनों गार्डन एरिया में जाकर बैठती हैं, तब आकाश फिर से वहां भी पहुंच जाते हैं. वे पहले शिल्पा को छेड़ते हैं उन्हें स्मूच करते हैं और फिर अर्शी को अपने गोद में बिठाकर गाना ‘क्या करूं ओ लेडीज… मैं हूं आदत से मजबूर’ गाने लगते हैं.

इतना ही नहीं, शो में देर रात जब सभी सोने के लिए जाते हैं और शिल्पा अपनी रजाई में होती हैं. तब आकाश शिल्पा के पास जाकर उन्हें जबरदस्ती तीन बार किस करते हैं.

इस एक्टर के साथ काम करने के लिये मनीषा कोइराला को करना पड़ा लंबा इंतजार

बौलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला 90 के दशक की बेहतरीन अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं. इन्होंने अपने करियर के दौरान कई हिट फिल्में दीं हैं. वह हिंदी फिल्मों के अलावा नेपाली, तमिल, तेलगु, मलयालम फिल्मों में भी काम करती रही हैं. मनीषा कोइराला भरतनाट्यम और मणिपुरी नृत्य में भी पूर्ण रूप से पारंगत हैं. मनीषा कोइराला जिस वक्त बौलीवुड इंडस्ट्री में काफी मशहूर एक्ट्रेस हो चुकी थीं उस वक्त भी उनकी तमन्ना थी कि उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ एक फिल्म मिल जाए. मनीषा कोइराला को करीब 8 साल बाद अमिताभ बच्चन के साथ पहली फिल्म की थी.

मनीषा कोइराला ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1991 में रिलीज हुई फिल्म सौदागर से की थी. इस फिल्म में उनके साथ बी-टाउन के दो लीजेंड राज कुमार और दिलीप कुमार भी थे. मनीषा की यह पहली फिल्म साल की ब्लौकबस्टर हिट फिल्म साबित हुई थी. पहली ही फिल्म से मनीषा रातों-रात स्टार बन गई थीं.

इसके बाद उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया. इसके बावजूद उनके जहन में सिर्फ एक मलाल रहता था अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका ना मिलना. इसी बीच साल 1996 में रिलीज हुई फिल्म ‘खामोशी’ ने उन्हें टौप लीडिंग एक्ट्रेस बना दिया. इस फिल्म में उनके साथ नाना पाटेकर और सलमान खान नजर आए थे. अब मनीषा अपनी फिल्में काफी सोच समझकर चुनने लगी थीं लेकिन जैसे ही उन्हें अमिताभ बच्चन स्टारर फिल्म में काम करने का मौका मिला तो उन्होंने बिना देर किए फिल्म में काम करने के लिए हां कर दी थी.

बौलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के फेमस डायरेक्ट के.सी बोकाड़िया ने मनीषा को मार्च 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘लाल बादशाह’ में काम करने के लिए पूछा. मनीषा को जैसे ही पता चला कि फिल्म में अमिताभ बच्चन हैं तो उन्होंने बिना स्क्रिप्ट पढ़े फिल्म करने के लिए हां कर दिया था. हालांकि उस वक्त तक मनीषा करीब 22 फिल्में कर चुकी थीं.

सनी लियोनी ने पति डेनियल के साथ कराया न्यूड फोटोशूट

वैसे तो सनी लियोनी अक्सर ही अपने पति डेनियल के साथ किसी न किसी वजह से सोशल मीडिया पर छायी रहती हैं, लेकिन हाल ही में उनकी और उनके पति की जो न्यूड तस्वीरें सामने आई हैं उसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. दरअसल, हाल ही में सनी लियोनी ने अपने पति के साथ पेटा (PETA) के प्रमोशन के लिए न्यूड फोटोशूट कराया है. ये फोटोशूट ‘एनिमल फ्री फैशन’ कैंपेन के लिए कराया गया है. आपको बता दें कि ये कैंपेन फैशन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जानवरों की खाल के खिलाफ है.

मालूम हो कि पेटा जानवरों का ध्यान रखने वाली एक संस्था है. इस कैंपेन से अभी कई बौलीवुड स्टार्स जुड़ चुके हैं. इस कैंपेन के अनुसार कहा जा रहा है कि अपनी त्वचा के साथ आराम से रहें और जानवरों को भी ऐसा ही करने दें.

सनी लियोनी और डेनियल के फोटोशूट की बात करें तो इसमें वो दोनों ही न्यूड नजर आ रहे हैं. तस्वीर में सनी ने डेनियल को पीछे से पकड़ रखा है. गौर करने वाली बात ये है कि इस तस्वीर में डेनियल के शरीर पर कई सारे टैटू साफ दिखाई दे रहे हैं.

फैशन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जानवरों की खाल के खिलाफ चलाए जा रहे पेटा के इस कैंपन के बारे में मीडिया से बातचीत के दौरान सनी लियोनी ने कहा, ”हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जिसमें शाकाहारी सामग्री और जीवन व्यतीत करने के लिए कई विकल्पों मौजूद है और लगातार इनकी अद्भुत प्रगति हो रही है. किसी को भी किसी भी रूप में क्रूरता का समर्थन नहीं करना चाहिए. जानवरों को साथ दुर्व्यवहार करने के बजाय हमारे पास सिंथेटिक चमड़ा, नकली मगरमच्छ, और यहां तक ​​कि अशुद्ध फर के कई महान विकल्प हैं.”

डेनियल वीवर का कहना है, ”हमें जानवरों के लिए अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए और समझना भी चाहिए कि बिना जानवरों के हम भी धरती पर नहीं रह पाएंगे, इसलिए हमें साथ में शांति से रहना चाहिए और एक दूसरे की इज्जत करनी चाहिए.”

फिल्म के प्रोमोशन के लिए रिक्शा पर पोस्टर चिपकाते थे मिस्टर परफेक्शनिस्ट

बौलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान हिट फिल्में करने के मास्टर कार्ड बन चुके हैं. आमिर भले ही साल में एक फिल्म करते हैं लेकिन वो एक फिल्म ही बाकी कई फिल्मों को टक्कर दे देती है. बात आमिर खान की हो रही है तो एक रोचक किस्सा याद आता है जब आमिर खान मुंबई की सड़कों पर औटो रिक्शा के पीछे पोस्टर चिपकाते नजर आते थे. यह वाकया उन दिनों का है जब आमिर को स्टारडम नहीं मिला था बल्कि कोई पहचानता भी नहीं था. हालांकि तब तक आमिर 2 फिल्मों में काम भी कर चुके थे. आइए बताते हैं आखिर क्या था पूरा मामला.

यह वाकया उन दिनों को है जब आमिर खान साल 1988 में आई फिल्म ‘कयामत से कयामत’ में काम किया था. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उस वक्त इतना बजट नहीं था कि इस फिल्म का वैसा प्रोमोशन किया जाए जैसे आज किया जाता है. इसलिए आमिर खान खुद मुंबई की सड़कों पर औटो रिक्शा के पीछे फिल्म के पोस्टर चिपकाते थे. साथ ही आमिर औटो चालकों को यह भी बताते थे कि वह इस फिल्म के हीरो हैं.

कहा जाता है कि औटो रिक्शा पर पोस्टर चिपकाने से एक औटो चालक उनपर भड़क भी गया था. बाद में आमिर ने उसे आराम से समझाया था. शायद उस वक्त औटो चालक को भी अदांजा नहीं होगा कि वह जिस शख्स से उलझ रहा है वह कभी बौलीवुड का सुपरस्टार बन जाएगा.

आमिर खान कई बार इंटरव्यू में बता चुके हैं कि उनके पिता नहीं चाहते थे कि वह फिल्मों में काम करें. उनके पिता चाहते थे कि आमिर डौक्टर या इंजीनियर बनें लेकिन बेटे की जिद के चलते उन्होंने भाई नासिर हुसैन के साथ काम करने की इजाजत दे दी थी.

आमिर पहली बार बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट फिल्म यादों की बारात (1973) में नजर आए थे. इसके बाद उन्होंने 17-18 साल की उम्र में फिल्म होली (1984) में काम किया था लेकिन उन्हें पहचान साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म ‘कयामत से कयामत’ से मिली थी.

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