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दोस्त और लड़की में से जब भी किसी एक का चयन करना हो, तो एक लड़का किसे चुनेगा? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए फिल्मकार लव रंजन रोमांटिक कौमेडी फिल्म ‘‘सोनू के टीटू की स्वीटी’’ लेकर आए हैं, जो कि प्रभावित नहीं करती.
फिल्म ‘‘सोनू के टीटू की स्वीटी’’ की कहानी शुरू होती है टीटू (सनी सिंह) द्वारा शादी के लिए स्वीटी (नुसरत भरूचा) को देखने जाने से. टीटू के साथ उसका भाई समान दोस्त सोनू (कार्तिक आर्यन), उसके माता पिता, दादा घसीटे (आलोकनाथ) दादी व आदि भी जाते हैं. उससे पहले टीटू और सोनू में बहस होती है कि टीटू क्यों शादी करना चाहता है. सोनू, स्वीटी को पसंद नहीं करता.
मगर स्वीटी को टीटू पसंद कर लेता है. सगाई के दिन स्वीटी, सोनू से कह देती है कि वह बहुत बुरी है, वह विलेन है और उसकी शादी के बाद सोनू की इस घर से हमेशा के लिए विदाई हो जाएगी. उसके बाद सोनू अपनी तरफ से स्वीटी को गलत और स्वीटी हर बार खुद को एक नेक भली लड़की साबित करने में जुट जाते हैं.
कहानी आगे बढ़ती है तो टीटू की पूर्व प्रेमिका पिहू भी आ जाती है. अंततः एक दिन स्वीटी खुलेआम सोनू को चैलेंज करती है कि उसकी शादी होकर रहेगी. क्योंकि जब एक लड़के को दोस्त और लड़की में से किसी एक को चुनना होता है, तो वह लड़की को ही चुनता है. कई घटनाएं तेजी से घटित होती हैं. शादी के लिए बारात पहुंच जाती है. स्वीटी, टीटू के गले में माला डाल देती है. पर फिर क्या होता है, इसके लिए फिल्म देखनी ही पड़ेगी.
लव रंजन इससे पहले ‘‘प्यार का पंचनामा’’ और ‘‘प्यार का पंचनामा 2’’ बना चुके हैं. अब यह उनकी तीसरी फिल्म है. पर यह फिल्म मनोरंजन करने की बनिस्बत बोर करती है. इसकी मूल वजह यह रही कि लव रंजन ने लोगों को हंसाने के लिए सिर्फ ‘सेक्स’ को हथियार के रूप में उपयोग किया. सेक्स कौमेडी जौनर पर बेहतर फिल्म बनाना आसान तो नहीं होता. पर बेसिर पैर की कहानी व बेसिर पैर के फूहड़ हास्य घटनाक्रमों को देखकर दर्शक सोचने लगता है कि वह फिल्म देख रहा है या सेक्सी फिल्मों से उठाए गए दृश्यों से बना चूंचूं का मोरब्बा.
पटकथा के स्तर पर यह फिल्म काफी घटिया है. लव रंजन ने स्वीटी को विलेन के रूप में पेश जरुर किया है, पर स्वीटी के किरदार को सही ढंग से गढ़ा ही नहीं गया. आखिर टीटू से स्वीटी शादी क्यों करना चाहती है? वह किस बात का बदला टीटू के परिवार से लेना चाहती है? उसकी सोनू से क्या दुश्मनी है, इस तरह के कई सवाल उठते हैं, जिनका जवाब नहीं मिलता. शायद फिल्मकार लव रंजन ने इस फिल्म को लिखते व बनाते समय मान लिया था कि दर्शकों के पास दिमाग व लाजिक नहीं होते, उन्हे कुछ भी परोस दो.
फिल्म में द्विअर्थी, फूहड़ व घटिया जोक्स से द्वारा दर्शकों को जबरन हंसाने का प्रयास किया गया है. भला हो सेंसर बोर्ड का जिसने कई गालियों पर ‘बीप’ की आवाज लगवा दी. प्यार या रोमांस भी उभरकर नहीं आता. प्यार की बजाय ‘सेक्स‘ शब्द ज्यादा सुनाई देते हैं. इतना ही नहीं फिल्म इतनी अत्याधुनिक है कि फिल्म के किरदार अपने माता पिता व बड़ों की इज्जत ही नहीं करते. फिल्म केवल एक प्रतिशत भारतीयों का ही प्रतिनिधित्व करती है?
इन दिनों हर फिल्मकार ‘नारी उत्थान’ की बात अपनी फिल्मों में कर रहा है और लव रंजन की इस फिल्म की नायिका कहती है-‘‘मैं हीरोईन नहीं, विलेन हूं, विलेन..’’ यह किस तरह का नारी उत्थान है, लव रंजन ही बेहतर बता सकते हैं.
जहां तक अभिनय का सवाल है तो टीटू के किरदार में सनी सिंह प्रभावित नहीं करते. उन्हे अपने अंदर की अभिनय प्रतिभा को निखारने के लिए काफी मेहनत करने की जरुरत है. कार्तिक आर्यन का अभिनय काफी दमदार है. नुसरत भरूचा ने ठीक ठाक अभिनय किया है, पर उनके पास अपनी प्रतिभा को दिखाने का बहुत अच्छा अवसर था. उनके अंदर इससे बेहतर काम करने की क्षमता भी है. मगर दूसरे भाव पेश करने की बजाय वह सिर्फ आंखों तक ही सीमित होकर रह गयीं. आलोकनाथ व वीरेंद्र सक्सेना भी अपने किरदारों में ठीक ठाक हैं. फिल्म का गीत संगीत भी प्रभावित नहीं करता.
दो घंटे 18 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘सोनू के टीटू की स्वीटी’’ का निर्माण भूषण कुमार, किशन कुमार, लव रंजन व अनुज गर्ग ने किया है. लेखक व निर्देशक लव रंजन, कैमरामैन सुधीर के चौधरी तथा कलाकार हैं – सनी सिंह, कार्तिक आर्यन, नुसरत भरूचा, आलोकनाथ, वीरेंद्र सक्सेना, दीपिका अमीन, आएशा रजा मिश्रा, राजेश जाएस, सोनू कौर व अन्य.
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सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर ए आर रहमान ने अब एक नया रिकौर्ड बनाया है. ए आर रहमान अपनी सिंगिंग स्किल्स और नई तकनीक के अलावा औफ बीट ऐप के लिए भी जाने जाते हैं. इस बार ए आर रहमान की एक आम सी सेल्फी चर्चा का विषय बनी हुई है. इतना ही नहीं ए आर रहमान की इस सेल्फी के चर्चे दुनिया भर में हो रहे हैं. यह तस्वीर ब्लैक एंड व्हाइट है. दरअसल, ए आर रहमान की ये तस्वीर अब आईफोन के ऐड में दिखेगी. आपको बता दें, यह पहली बार है जब कोई भारतीय Apple कंपनी के प्रचार के लिए चुना गया है.
ए आर रहमान एक महान सिंगर और कंपोजर होने के साथ-साथ बेहतरीन फोटोग्राफर भी हैं. अपने इंस्टाग्राम में उन्होंने कुछ ऐसी तस्वीरें भी शेयर की हैं जिससे उनकी इस कलाकारी के बारे में पता चलता है. ए आर रहमान को सेल्फी लेना बहुत पसंद है. वह जहां भी जाते हैं वहां ज्यादातर सेल्फीज लेते हैं.
ये सेल्फी Apple आईफोनX से ली गई है. इस तस्वीर को ए आर रहमान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर भी शेयर किया है. इस तस्वीर को कैप्शन देते हुए रहमान लिखते हैं – स्माइल ‘SMILE! #ShotoniPhoneX #PortraitMode’
वहीं ए आर रहमान की इस तस्वीर को बेस्ट तस्वीरों में से एक चुना गया है. एक खबर के मुताबिक ए आर रहमान का कहना है कि आईफोन से ऐसी तस्वीर लेना वाकई बहुत आसान है. रहमान आगे कहते हैं, ‘जो आप चाहते हैं कि दूसरे लोग फील करें, इसमें वो होता है. मुझे इसकी सबसे अच्छी बात यह लगती है कि यह स्टूडियो क्वौलिटी देता है. तस्वीर को बारीकी से खूबसूरत बनाता है.’
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मलयालम एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर ने अपनी फिल्म के गाने ‘माणिक्य मलाराया पूवी…’ को लेकर खूब सुर्खियां बटोरीं. जहां एक तरफ लोग इस लोग इस गाने और वीडियो को काफी पसंद कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ इस गाने को लेकर विवाद शुरू हो गया. इतना ही नहीं विवाद इतना बढ़ गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. इस गाने के चलते प्रिया प्रकाश के खिलाफ FIR भी दर्ज काराने की बात की गई. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने प्रिया प्रकाश के मामले में सख्त रवैया न आपनाते हुए उन्हें राहत दी है. जी हां, कोर्ट ने मलयालम एक्ट्रेस के खिलाफ सभी FIR पर रोक लगा दी है.
कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में कोई भी राज्य FIR नहीं करेगा. जिसने भी FIR दर्ज कराई है उन्हें कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. बता दें, प्रिया प्रकाश मलयालम फिल्म ‘ओरु अदार लव’ के गाने में नजर आ रही हैं. वेलेंटाइन डे के मौके पर यह गाना सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. लोगों ने उनके आंख मारने की अदाओ और प्यार के इजहार करने के तरिके को काफी पसंद किया. देखते ही देखते यह वीडियो पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
लेकिन इस बीच इस गाने को लेकर कुछ लोगों ने अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई. इन लोगों का कहना था कि ‘माणिक्य मलाराया पूवी’ गाना केरल के मालाबार क्षेत्र का एक पारंपरिक मुस्लिम गीत है. इस गाने में पैगम्बर मोहम्मद और उनकी पहली पत्नी के बीच प्रेम का वर्णन किया गया है. बता दें कि इस गाने के सोशल मीडिया पर आने के बाद तेलंगाना, रजा अकादमी और जन जागरण समिति ने एक्ट्रेस के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी. इन्होंने आरोप लगाया था कि इस गाने के चलते मुस्लिम भावनाओं को चोट पहुंची है. कोर्ट में दी गई याचिका में कहा गया था कि इस गाने की गलत व्याख्या की गई है. वहीं इस गाने के मेकर्स ने अपनी याचिका में कहा कि इस गाने को 1978 में पीएमए जब्बार द्वारा लिखा गया था. यह केरल का एक पुराना लोक गीत है. इस गाने को पहली दफा थलासेरी रफीक ने पैगम्बर और उनकी पत्नी खदीजा की तारीफ करते हुए गाया था.
चूल्हेचौके तक सिमटी रहने वाली देश की तमाम महिला प्रधानों को एक बार लखनऊ के लतीफपुर गांव जरूर जाना चाहिए. शहरी माहौल में पलीबढ़ी श्वेता सिंह ने 2 सालों में ही वहां प्रधानी के वे हुनर दिखा दिए हैं, जो पिछले 200 सालों में नहीं दिखाई दिए थे. लाठीगोली के लिए सुर्खियों में रहने वाली यह पंचायत अब तरक्की के लिए वाहवाही बटोर रही है.
जब श्वेता सिंह प्रधान चुनी गई थीं, तब सभी को लगा था कि वे भी दूसरी महिला प्रधानों की तरह रबड़ स्टैंप साबित होंगी. लेकिन पिछले 2 सालों में ही यह गांव लखनऊ का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का सब से तरक्कीशुदा गांव बन गया है. इस का पूरा क्रेडिट श्वेता सिंह को जाता है.
पेश हैं, श्वेता सिंह के साथ हुई बातचीत के खास अंश:
यह बदलाव कैसे मुमकिन हुआ?
हम ने शुरुआत में ही गांव की तरक्की पर काम करना शुरू कर दिया था. मुझे पूरा भरोसा था कि एक बार तरक्की की बात शुरू होने से बाकी परेशानियां पीछे छूट जाएंगी.
अब लतीफपुर को हंसतेखेलते लोगों का गांव बनाया जा रहा है. ऐसा गांव जहां फिटनैस के लिए जिम के इंतजाम किए जा रहे हैं. खेलने के लिए आधा स्टेडियम बन कर तैयार है. खेतीबारी करने वालों को काम पर लगाने के लिए हरा चारा उत्पादन केंद्र बनाया जा रहा है.
आप अपने बारे में कुछ बताएं?
मेरा जन्म एक अफसर पिता के घर में हुआ. मेरा मूल गांव वाराणसी के करीब सकलडीहा में है. पिता के तबादलों के चलते कभी हरदोई, कभी खटीमा तो कभी किसी दूसरे शहर में मेरा बचपन बीता. लखनऊ के आईटी कालेज से ग्रेजुएशन करने के बाद मैं ने कंम्यूटर में ग्रेजुएशन तक तालीम हासिल की.
कंप्यूटर में एमसीए की पढ़ाई चल ही रही थी कि मैं ने टैलीकौम सैक्टर की एक बड़ी कंपनी में उपभोक्ता मामलों का काम संभाल लिया था. मैं साल 2008 में एक किसान की बहू क्या बनी, शहरी चकाचौंध से मेरा वास्ता टूटता चला गया.
विदा हो कर पहली बार मैं जिस रास्ते से लग्जरी कार में बैठ कर लतीफपुर आई थी, बरसात में वह सड़क नाले में तबदील हो गई. गंदे पानी में घुटने तक डूब कर रास्ता तय करने की गांव वालों की दुश्वारियां देख कर मैं दुखी हो उठी. ये वे पल थे जिन्होंने लतीफपुर की समस्याओं के खिलाफ मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया था.
आप ने ग्राम प्रधानी का चुनाव कैसे लड़ा?
कुछ ही समय में मैं वहां के रहनसहन को मोटेतौर पर जान चुकी थी. गीतसंगीत को हथियार बना कर मैं औरतों की सेना तैयार कर चुकी थी.
साल 2015 में लतीफपुर प्रधान का पद महिला के लिए रिजर्व्ड किया गया था. मैं ने परचा भरा और निकल पड़ी वोट मांगने.
यह वह मौका था जब मैं गांव की तमाम मुसीबतों से रूबरू हो रही थी. ऊबड़खाबड़ सड़कें, सड़कों पर बहता नालियों का गंदा पानी और शाम होते ही छा जाने वाला घना अंधेरा. गांव के बहुत से मर्दों में शराब पीने की लत, बदहाल पढ़ाईलिखाई, औरतों के साथ होती घरेलू हिंसा ने मुझे झकझोर दिया था.
वोटर लिस्ट में 165 फर्जी नामों की फेहरिस्त भी कम बड़ी चुनौती नहीं थी. ब्लौक से ले कर इलैक्शन कमीशन तक दस्तक दे कर लिस्ट में बदलाव तो करा दिया, पर इस बात से प्रशासन चिढ़ गया. गुंडों को शह दे कर मुसीबतें पैदा की जाने लगीं, पर सरकारी पुलिस से ज्यादा हमारी औरतों की सेना कारगर रही.
चुनाव जीतने के बाद गांव की तरक्की कैसे शुरू हुई?
गांव की कुल 58 गलियों में से 49 गलियां पक्की बन चुकी हैं. बिजली के खंभों की तादाद 71 से बढ़ कर 83 हो गई है. झुके खंभे सीधे खड़े हैं और लटकते तार बाकायदा सीना तान चुके हैं. 40 से ज्यादा सोलर स्ट्रीट लाइटें सड़कों को रोशन कर रही हैं. शाम होते ही खुद जल जाने वाली ये लाइटें सुबह सूरज की रोशनी आते ही अपनेआप बुझ जाती हैं. गांव वालों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं है.
सोलर लाइट से चलने वाला आरओ सिस्टम हर घंटे 500 लिटर मिनरल वाटर मुहैया करा रहा है. मवेशियों को साफ पानी के लिए चरही बनाने का काम जारी है. कम्यूनिटी किचन के साथ कम्यूनिटी टौयलेट को बनाने का काम भी किया जा रहा है.
ग्राम पंचायत की आमदनी के लिए जापान की बुद्धा निपुन कंपनी के साथ मैंगो हनी प्रोडक्शन सैंटर बनाया गया है. लतीफपुर में बनाए जाने वाले शहद का चसका जापानियों को लगता जा रहा है.
ट्रैक्टर, ट्रौली, रोटावेटर, लैवलर, वाटर टैंकर, रोड़ी मिक्सर और वाइब्रेटर जैसे उपकरणों से पंचायत को अच्छाखासा किराया भी मिल रहा है. प्लास्टिक की कुरसियां और सोलर जनरेटर सब के काम आ रहे हैं.
मुझे प्रदेश सरकार द्वारा ‘रानी लक्ष्मीबाई वीरता अवार्ड’ समेत कई गैरसरकारी अवार्ड भी मिल चुके हैं.
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उत्तर प्रदेश की सरकार पूरी तरह से धार्मिक कर्मकांडों के कामों में लगी है. हालांकि हवन और यज्ञ का कोई प्रभाव उत्तर प्रदेश के हालात सुधार नहीं पा रहा है. हत्या, लूट और अपराध के हालात जस के तस हैं. विकास की हालत पहले जैसी नगण्य है. यज्ञ, हवन और कर्मकांड से प्रदेश के हालात भले ही न सुधरे हों पर सरकार वोट हासिल करने में सफल हो रही है. इस की सब से बड़ी वजह यह है कि प्रदेश में जातीयता को धर्म से जोड़ दिया गया है.
हिंदुत्व के नाम पर छोटीबड़ी जातियां धर्म के झंडे के तले खड़ी नजर आ रही हैं. यही वजह है कि नोटबंदी, जीएसटी, महंगाई, अपराध और बेरोजगारी से परेशानी होने के बाद भी जनता के वोटों से चुनाव दर चुनाव भाजपा को जीत हासिल हो रही है.
सरकार अपने हर काम में धर्म का तड़का लगाने में लगी है. शहरों को बस सेवा के जरिए आपस में जोड़ने तक का काम धर्म के नाम पर किया जा रहा है. सरकार यह दावा कर रही है कि धार्मिक शहरों को आपस में जोड़ने का काम किया जा रहा है जिस से लोगों को तीर्थयात्रा करने में सरलता रहे.
धार्मिक यात्राओं पर पिछली अखिलेश सरकार ने भी जोर दिया था. शायद समाजवादी पार्टी को पिछड़े वर्ग में बढ़ रही धार्मिक सोच का एहसास हो गया हो. लोगों को एक समय के बाद धर्म की बातों से रिझाना संभव नहीं होगा. धर्म से लोगों को कुछ हासिल नहीं हो रहा है.
पूजापाठ और धर्म के बढ़ते प्रयोग के बाद भी उत्तर प्रदेश में न अपराध कम हो रहे हैं और न भ्रष्टाचार. अखिलेश सरकार की ही तरह योगी सरकार भी अपने कामों का केवल प्रचार कर रही है. धरातल पर उस के प्रभाव को देख नहीं पा रही है. अगर पूजापाठ से ही सरकार चलनी होती या धर्म से हालात सुधरने होते तो लोग परेशान नहीं होते. प्रदेश के लोगों को धर्म के प्रभाव में रखने के लिए सरकार मथुरा और अयोध्या को किसी न किसी बहाने चर्चा में रखना चाहती है.
मथुरा में होली खेलेगी योगी सरकार
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या और नैमिषारण्य के बाद मथुरा में होली खेलने का प्लान तैयार किया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में दीवाली के अवसर पर भव्य दीवाली पूजन का आयोजन किया था. अपने धार्मिक एजेंडे के तहत अयोध्या के बाद सीतापुर जिले के नैमिषारण्य के परिक्रमा स्थल का विकास करने के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट भी पास कर दिया. योगी ने कहा कि अयोध्या में सरयू आरती की तरह ही नैमिषारण्य में भी गोमती आरती शुरू हो, सरकार इस में हरसंभव मदद करेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों का प्रदूषण रोकने के लिए भीतर से इन के प्रति श्रद्घा का भाव आना चाहिए. नदियां अगर नहीं बचेंगी तो न हम बचेंगे और न ही हमारी संस्कृति. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना भेदभाव के सभी तीर्थस्थलों का विकास हमारा लक्ष्य है.
सवाल उठता है कि जिस देश में गंगा को सब से पवित्र नदी का दरजा हासिल हो वह नदी इतनी प्रदूषित क्यों है? कई शहरों में गंगा आरती होती है. हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी इन में प्रमुख हैं. इस के बाद भी गंगा इन शहरों में सब से अधिक प्रदूषित नदी है.
राजधानी लखनऊ में गोमती नदी की आरती होती है. आरती जहां होती है उस से कुछ ही दूरी पर गोमती नदी की गंदगी को देखा जा सकता है. नदियों की आरती के जरिए कैसे नदियां प्रदूषणमुक्त हो सकेंगी यह समझा जा सकता है.
उत्तर प्रदेश सरकार केवल धर्म के एजेंडे पर काम कर रही है. मंदिर, नदियां और धार्मिक त्योहारों के बहाने सरकार किसी न किसी तरह से चर्चा में रहना चाहती है. दीवाली और कांवड़ यात्रा के बावजूद अब योगी सरकार धूमधाम से होली मनाने जा रही है.
मथुरा से सरकार के जुड़ने की 2 खास वजहें हैं. पहली वजह, अयोध्या और वाराणसी की ही तरह से मथुरा में मंदिरमसजिद का विवाद है. यहां होली मना कर सरकार जनमानस को यह संकेत देना चाहती है कि वह मथुरा को भी अपने एजेंडे में रखे हुए है. उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन जिन शहरों में होता है उन में मथुरा प्रमुख है. होली एक ऐसा त्योहार है जिस से जनमानस जुड़ा है. इस से सरकार के लिए लोगों को खुद से जोड़ना सरल हो जाएगा.
अयोध्या में दीवाली मनाने और राम की भव्य मूर्ति लगवाने के ऐलान के बाद समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश ने कृष्ण की मूर्ति लगवाने की बात कही थी. योगी सरकार धर्म को ले कर किसी और पार्टी के हाथ में कोई मुद्दा नहीं देना चाहती. गुजरात चुनावों में जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंदिर गए तो उन को नकली हिंदू साबित किया जाने लगा. समाजवादी पार्टी कृष्ण को ले कर कोई कदम उठाए उस से पहले भाजपा इस पर अपना हक साबित कर देना चाहती है.
उत्तर प्रदेश में सरकार जिस तरह से धार्मिक प्रपंच का सहारा ले रही है उस से बुनियादी मुद्दे पूरी तरह से हाशिए पर हैं. अयोध्या में दीवाली पूजन, चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की आरती, आगरा में ताजमहल का विवाद, कांवड़ यात्रा पर फूलवर्षा, धार्मिक शहरों को प्रमुख पर्यटन क्षेत्र के रूप में प्रचार करना और मुख्यमंत्री के सरकारी आवास को गंगा जल से पवित्र कराना कुछ ऐसे प्रपंच हैं जिन का प्रचार ज्यादा हो रहा है. सरकार इन मुद्दों पर भी केवल बातें ही कर रही हैं. वहां विकास की योजना को ले कर मूलभूत काम नहीं कर रही है.
किसी भी शहर में सड़क, बिजली व पानी का इंतजाम करना ही वहां का विकास करना नहीं होता. लोगों को रोजगार मिले, बेरोजगारी कम हो लोग कामधंधे में लगें इस से ही समाज में अमनचैन आता है. सड़कें कितनी ही अच्छी बन जाएं अगर रोजगार नहीं होगा तो लोग अपराध करेंगे. अयोध्या का सच दीवाली के दिन नहीं दिखा. आयोजन की भव्य चकाचौंध में वह सच कहीं खो गया था.
भाजपा संस्थापक रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अंतोदय की परिकल्पना में भी समाज का वही अंतिम आदमी था. वह उस को ही खुशहाल बनाने की काम कर रहे थे. आजादी के बाद से हर सरकार हर बात में गरीबों के उद्धार की ही बात करती है, बावजूद इस के भारत का गरीब दीयों से तेल एकत्र करता दिखता है. गरीब इसलिए गरीब है क्योंकि उस के पास काम नहीं है. देश में भीख मांगने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. हर जगह ऐसे लोग रोटी के एकएक टुकड़े के लिए संघर्ष करते देखे जा सकते हैं.
अगर धार्मिक प्रपंच को छोड़ कर सरकारों ने बुनियादी सुविधाओं और रोजगार की दिशा में काम किया होता तो गरीबी रेखा से नीचे गुजरबसर करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती नहीं. सरकारी नीतियों से गरीबी रेखा के ऊपर और नीचे के लोग ही नहीं मध्यवर्गीय परिवार भी गरीबी रेखा के करीब पहुंच गए हैं. बच्चे पढ़ रहे हैं लेकिन उन के पास कोई काम नहीं है. सरकारें दिखाने के लिए उन को ट्रेनिंग देने का काम करती हैं. इस से कितने युवाओं को रोजगार मिला यह देखने वाली बात है.
आंकड़़े नहीं दिखाते विकास
कौशल विकास को ले कर पूरे देश में बड़े जोरशोर से काम हो रहा है. कौशल विकास प्रशिक्षण पाए लोगों में से कितनों को रोजगार से जोड़ा जा सका, इस का सच सामने रखना चाहिए. सरकारी आंकड़े पूरा सच नहीं दिखाते. ऐसे में सरकार को सामाजिक आंकड़ों को भी देखना चाहिए.
जिस अध्योध्या के विकास के लिए पूरी तरह से सरकार एकजुट है, कम से कम वहां तो रामराज कायम दिखना चाहिए. राम को आदर्श मानने वाले नेता क्या कभी रात में अपनी पहचान बदल कर अयोध्या की गलियों का सच देखने गए हैं. मंत्री के लिए अफसर रैड कारपेट बिछा कर सबकुछ ठीक होने का दावा हमेशा करते हैं. नेता की जिम्मेदारी होती है कि रैड कारपेट को हटा कर नीचे छिपे सच को देखे.
कागज में धर्म की नगरी को पर्यटन का दरजा देने से वहां का भला नहीं होने वाला. अखिलेश सरकार के समय भी नैमिषारण्य और मिश्रिख को पर्यटन का दरजा दिया गया था. सड़कें बनीं, बसें चलीं, विज्ञापन छपे, इस के बाद भी यहां के हालात नहीं बदले. आज भी यहां के लोगों के पास कोई रोजगार नहीं है.
कांवड़ यात्रा के दौरान सरकार की तमाम सुविधाओं के बाद भी कांवड़ यात्रा करने वाले रास्ते भर परेशान और लोगों से मदद मांगते दिखे. सरकार ने कांवड़ मार्ग पर पुष्प वर्षा का वादा किया पर यह पुष्प कांवड़ यात्रा करने वालों के सफर को सुखद नहीं बना पाए.
धर्म के नाम पर जनता को बहुत समय तक मुद्दों से दूर नहीं रखा जा सकता है. जरूरत इस बात की है कि बेरोजगारों के लिए काम के अवसर बढ़ाए जाएं. जब तक लोगों के लिए रोजगार नहीं होगा भुखमरी बनी रहेगी. न मजदूर खुश होगा न किसान. वह ऐसे ही दीयों के बचे तेल से अपने घर की सब्जी छौंकने के इंतजाम करता रहेगा. सरकार कितने भी किसानों के लोन माफ कर दे कुछ ही दिनों में फिर से वही हालात बन जाएंगे.
धार्मिक प्रपंच में जुटे लोग इस तथ्य को समझ लें कि इसी देश में कहा गया है कि ‘भूखे भजन न होय गोपाला’ इस का अर्थ है कि अगर कोई भूखा है तो वह किसी भी तरह से न तो धार्मिक प्रवचन कर सकता है और न ही सुन सकता है.
जिस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दीप जला कर अयोध्या में खुशियों की दीवाली मना रहे थे उस दौरान भूखे पेट रहने वालों की नजर उन दीयों पर रही होगी. वह सोच रहे होंगे कि दीये कितनी जल्दी बुझ जाएं जिस से दीयों का तेल उन के लिए बचा रहे. उन की असल खुशी दीयों के जलने से नहीं दीयों के बुझने से थी. उन की भूख जलने वाले दीयों से नहीं बुझे दीयों से बुझी जिन से उन को सब्जी बनाने के लिए तेल मिल सका. अयोध्या की ऐसी दीवाली के सच को समझ कर समाज के अंतिम आदमी की खुशहाली से समाज में बदलाव होगा. भूखे पेट तो धर्म की चर्चा भी नहीं होती.
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मेरे नाना रिटायरमैंट के बाद सपरिवार कोलकाता में बस गए थे. उन का कोलकाता के बाहर बसी एक नामचीन डैवलपर की टाउनशिप में बड़ा सा फ्लैट था.
मेरी नानी पश्चिम बंगाल के मिदनापुर की थीं. वे अच्छीखासी पढ़ीलिखी थीं. वे महिला कालेज में प्रिंसिपल के पद पर थीं. नाना ने उन की इच्छा के मुताबिक कोलकाता में बसने का फैसला लिया था.
मैं अपनी मम्मी के साथ दुर्गा पूजा में कोलकाता गया था. मैं ने रांची से एमबीए की पढ़ाई की थी. कैंपस से ही मेरा एक मल्टीनैशनल कंपनी में सैलेक्शन हो चुका था. औफर लैटर मिलने में अभी थोड़ी देरी थी.
मिट्ठी से मेरी मुलाकात कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान हुई. कौंप्लैक्स के मेन गेट पर वह सिक्योरिटी गार्डों से उलझ गई थी.
शाम के समय पास की झुग्गी बस्ती से कुछ बच्चियां दुर्गा पूजा देखने आई थीं. चिथड़ों में लिपटी बच्चियों को सिक्योरिटी गार्ड ने रोक दिया था.
टाउनशिप के बनने के दौरान मजदूरों ने वहां सालों अपना पसीना बहाया था. ये उन्हीं की बच्चियां थीं.
मिट्ठी वहां अकसर जाती थी. वह उन की चहेती दीदी थी. वह बच्चों के टीकाकरण में मदद करती थी. स्कूलों में उन को दाखिला दिलाती थी. बच्चियों को पूजा पंडाल तक ले जाने और प्रसाद दिलाने में मिट्ठी को तमाम विरोध का सामना करना पड़ा था.
मिट्ठी विजयादशमी के दिन भी दिखाई दी थी. लाल बौर्डर की साड़ी में वह बेहद खूबसूरत दिख रही थी. मिट्ठी मुझे भा गई थी.
मम्मी जल्दी मेरे फेरे कराना चाहती थीं. उन्होंने रांची शहर के कई रिश्ते भी देखे थे. नानी से सलाहमशवरा करनेके लिए मम्मी मुझे कोलकाता ले कर आई थीं.
‘‘अमोल खुद अपना ‘जीवनसाथी’ चुनेगा… मेरा पोता अपने लिए बैस्ट साथी चुनेगा… एकदम हीरा…’’ नानी मेरी अपनी पसंद की बहू के हक में थीं.
‘‘गोरीचिट्टी, देशी मेम बहू बनेगी…’’ मम्मी की यही सोच थी. सुंदर, सुशील, घर के कामों में माहिर बहू उन की पसंद थी.
‘‘भाभी, हमारी बहू तो फर्राटेदार अंगरेजी में बतियाने वाली सांवलीसलोनी और स्मार्ट होगी…’’ छोटी मामी ने भी अपनी पसंद जताई थी.
‘‘मुझे मिट्ठी पसंद है…’’ मैं ने छोटी मामी को अपनी पसंद बताई.
मिट्ठी कौंप्लैक्स में ही रहती थी. मेरी मम्मी समेत परिवार के सभी लोग मिट्ठी की हरकतों से अनजान नहीं थे.
‘‘कौंप्लैक्स में मिट्ठी की इमेज ज्यादा अच्छी नहीं है. वह तेजतर्रार है… अमीरजादों के साथ आवारागर्दी करती है… मोटरसाइकिल से स्टंट करती है… बेहद बिंदास है… शौर्ट्स पहन कर घूमती है…’’ छोटी मामी ने मुझे जानकारी दी.
‘‘मुझे बोल्ड लड़कियां पसंद हैं…’’
‘‘उम्र में भी बड़ी है…’’
मैं ने उम्र की बात को भी नकार दिया.
‘‘मिट्ठी कैंपस के लड़कों के साथ टैनिस… क्रिकेट… बास्केटबाल खेलती है… मौडलिंग करती है… कंडोम की मौडलिंग… उस के मम्मीपापा ने कितनी आजादी दे रखी है…’’ मेरी बात से छोटी मामी शायद नाराज हो गई थीं.
‘‘मैं क्या सुन रही हूं…? मेरी रजामंदी बिलकुल नहीं है… नहीं… मैं मिट्ठी को बहू नहीं बना सकती…’’ मम्मी बेहद नाराज थीं. उन्होंने मुझ से दूरी बना ली थी.
मैं मिट्ठी को अपना मान चुका था. शीतयुद्ध का अंत हुआ. नानी को भनक लगी. उन्होंने सब को अपने कमरे में बुलाया. सब की बातों को बड़े ही ध्यान से सुना.
‘‘अमोल ने जिद पकड़ ली है… बदनाम लड़की से रिश्ता करने पर तुले हैं…’’ छोटी मामी ने नानी को बताया.
‘‘यह बदनाम लड़की कौन है…? कहां की है…?’’ नानी ने सवाल किया.
‘‘अपने कौंप्लैक्स की ही है… अपनी मिट्ठी… आवारागर्दी, गुंडागर्दी करती है… पूजा के पंडाल में हंगामा भी किया था… आप ने सुना होगा…’’ छोटी मामी ने मिट्ठी की खूबियों का बखान किया.
‘‘मिट्ठी तो अच्छी बच्ची है… कई बार मंदिर में मिली है… मेरे पैर छुए हैं… मैं ने आशीर्वाद दिया है… वह बदनाम कैसे हो सकती है,’’ नानी छोटी मामी से सहमत नहीं थीं.
‘‘क्या अच्छे परिवार की बच्चियां पराए जवान लड़कों के साथ क्रिकेट… बास्केटबाल और टैनिस खेलती हैं? कंडोम की मौडलिंग करती हैं? छोटे कपड़े पहनती हैं? मुंहफट और बेशर्म होती हैं?’’ मम्मी ने एकसाथ कई बातें बताईं और सवाल उठाए.
‘‘मैं ने अपने लैवल पर इन बातों की पड़ताल की है… जानकारियां इकट्ठी की हैं… मैं मिट्ठी से मिला हूं. वह मर्दऔरत के समान हक की बात करती है… वह एक समाजसेविका है… उसे कई मर्द दोस्तों का भी साथ मिला है… सब मिल कर काम करते हैं… ऐक्टिव रहने के लिए फिटनैस जरूरी है…
‘‘सामाजिक कामों के लिए रुपएपैसों की जरूरत पड़ती है. कंडोम की मौडलिंग में कोई बुराई नहीं है… बढ़ती आबादी को कंडोम से ही रोका जा सकता है… इन पैसों से बस्ती के गरीब बच्चों के स्कूल की फीस दी जा सकती है…
‘‘मिट्ठी बोल्ड है… गलतसही की पहचान और परख उसे है… वह अपने काम में जुटी है… जानती है कि वह गलत रास्ते पर नहीं है… फुजूल की कानाफूसी और बदनामी की उसे कोई परवाह नहीं है. सब बकवास है…’’ मैं ने नानी की अदालत में मिट्ठी का पक्ष रखा.
‘‘मेरे पोते ने बैस्ट लड़की को चुना है. मिट्ठी ही मेरी बहू बनेगी…’’ नानी ने सहज भाव से अपना फैसला सुनाया. मुझे गले से लगाया… रिश्ते के लिए खुद पहल करने की बात कही.
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कैरियर की शुरुआत में अभिनेत्रियों को ही नहीं, दूसरे बहुत से क्षेत्रों में भी स्मार्ट, सुंदर युवतियों को अपना शरीर सौंपना पड़ता है ताकि उन की राह में पुरुष रोक न लगाएं. हौलीवुड के प्रसिद्ध, अतिसफल निर्देशकनिर्माता हार्वे विंसटीन का भंडाफोड़ पिछले अक्तूबर में एक अभिनेत्री मीरा सैरविनो ने किया था और उस के बाद लगभग 80 युवतियां कह चुकी हैं ‘मी टू’ यानी मैं भी शिकार रही हूं.
गोल्डन ग्लोब अवार्ड कार्यक्रम के दौरान बहुत सारी अभिनेत्रियां, नायिकाएं व फिल्मों व टीवी से जुड़ी अन्य हस्तियों ने यौनशोषण के खिलाफ विरोध करने के लिए काली पोशाकें पहनी थीं.
सफलता के लिए आदमी को लैंगिक मर्दानगी साबित करने की आवश्यकता नहीं होती तो औरतों को क्यों करनी पड़े, यह सवाल स्वाभाविक है. मर्दों को सैकड़ों औरतों के साथ संबंध बनाने की छूट है पर घर से निकली औरत को पहले ही कदम पर यौनअर्पण के लिए मजबूर कर दिया जाता है.
बहुत से क्षेत्रों में, केवल शो बिजनैस में ही नहीं, औरतों को सफलता पाने के लिए अपने को सभी मर्दों की साझी संपत्ति घोषित करना होता है और यह साजिश है कि पत्नी कुंआरी ही हो, ताकि सफल औरतें पत्नी ही न बनें.
औरतों को उन से यौन संबंध बनाने होते हैं जिन से प्यार ही नहीं होता. नतीजा यह होता है कि इन औरतों की प्रेमग्रंथि को पहले ही मसल दिया जाता है. सैकड़ों युवतियों को कुरबानी देनी होती है. ओपरा विनफ्रे जैसा नाम थोड़ी सी महिलाओं को ही को मिलता है.
क्या गोल्डन ग्लोब अवार्ड फंक्शन में इस का खुला विरोध कुछ बदलाव लाएगा? शायद नहीं. 150-200 वर्षों की तार्किक सोच, शिक्षा, औरतों के नए अवसरों के बावजूद अभी तक समाज पुरुष सत्तात्मक ही बना हुआ है और जिस देश में धर्म जितना हावी है वहां उतना ज्यादा अत्याचार होता है. औरतें जीवनभर गाय की तरह गुलाम बनी रहती हैं, दूध देती हैं, बछड़े पैदा करती हैं और खूंटे पर बंधीबंधी मर जाती हैं.
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2 जी स्पैक्ट्रम घोटाले के मामले में सीबीआई के फैसले से एक बात साफ हो गई है कि एक सरकारी संस्था की जांच की रिपोर्ट का मतलब कोई यह न निकाले कि दोषी वास्तव में अपराधी हैं. जयललिता और लालू प्रसाद यादव यदि अदालतों द्वारा अपराधी माने गए तो इसलिए ज्यादा कि उन के वकीलों की सफाई कमजोर थी, न कि मामला वास्तव में गंभीर था.
बिहार-झारखंड के चारा घोटाले में फंसेबंधे और अपराधी घोषित हुए लालू प्रसाद यादव का अपराध अभी पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया से नहीं गुजरा है. सरकारी कामकाज आमतौर पर इस तरह होते हैं कि मंत्री, अफसर और नौकरशाही अपने को बचा कर चलते हैं. अदालतें, खासतौर पर पहली ट्रायल कोर्ट, मामले को किस तरह देखती हैं और अपील में क्या होता है, इस के हजारों नमूने फैसलों की रिपोर्टों में दबे हैं.
सुप्रीम कोर्ट हर साल बीसियों मामलों में ट्रायल कोर्ट द्वारा अपराधी घोषित किए लोगों को अपराधमुक्त करती है क्योंकि बयानों से स्पष्ट हो जाता है कि ट्रायल के समय माहौल कुछ और होता है जब अभियुक्त भी ज्यादा गंभीर नहीं होता. एक बार अपराधी घोषित हो जाने के बाद उसे होश आता है और वह बचाव के उपाय ढूंढ़ता है. लालू प्रसाद यादव का चैप्टर अभी बंद नहीं हुआ है.
लालू प्रसाद यादव दूध के धुले हैं, यह नहीं कहा जा रहा पर यह जरूर है कि देश का सामाजिक गठन इस तरह का है कि अदालतों को जीभर के राजनीतिक स्वार्थ के उपयोग में लाया जाता है.
लालू प्रसाद यादव ने बिहार के विकास में कोई उल्लेखनीय काम किया है, ऐसा नहीं. पर उन के बाद आए नीतीश कुमार अपनी साफसुथरी छवि के बाद भी ढीलेढाले और भाजपा की पैरोकारी करते नजर आ रहे हैं. वे जिन नरेंद्र मोदी से उन्हें हाथ तक मिलाना पसंद नहीं था, उन के सान्निध्य में रहने के बहाने ढूंढ़ने में लगे हैं.
बिहार को अब नई पीढ़ी के नेता चाहिए. लालू और नीतीश दोनों अब निरर्थक हो गए हैं. राजनीति को नए चेहरे चाहिए युवा बिहार के लिए, उसे सदियों की दलदल से निकालने के लिए.
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दंगल में अपने जबरदस्त अभिनय से लोगों का दिल जीतने वाली फातिमा सना शेख इन दिनों फिर से चर्चा में आ गई हैं. फातिमा अपनी आने वाली फिल्म ठग्स औफ हिंदुस्तान के लिए चर्चा में हैं.
फातिमा ने इस फिल्म के लिए कुछ ऐसा किया है जो आज तक किसी भी फिल्म स्टार ने नहीं किया होगा. दरअसल फातिमा ने इस फिल्म के लिए आइब्रो को शेव कराया है. जीं हां, फिल्म के लिए फातिमा ने अपनी दाईं आई ब्रो में एक कट लगवाया है. ये इस फिल्म में किरदार की मांग थी, इसलिए फातिमा यह कट लगवाना पड़ा. इससे पहले उन्होंने ‘दंगल’ के लिए अपने बाल कटवाएं थे.
फातिमा ने अपनी फिल्म से जुड़ी इस तस्वीर को अपने इंस्टा पर शेयर किया है. इन तस्वीरों में उनके साथ बौलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान और अभिनेत्री कैटरीना कैफ भी नजर आ रहे हैं.
फातिमा द्वारा इंस्टा पर शेयर की गई फोटो में फातिमा के आई ब्रो में लगा एक कट साफ नजर आ रहा है. फातिमा आई ब्रो में कट के साथ काफी अलग और हटके नजर आ रही हैं. ये फोटो जबसे सोशल मीडिया में वायरल हुई है तब से लोग फातिमा को काफी अच्छे कमेंट दे रहे हैं.
आमिर खान ने फातिमा के बारे में बोलते हुए कहा कि फिल्म मे फातिमा काफी महत्वपूर्ण रोल निभा रही हैं और इस फिल्म की कहानी उनके ऊपर निर्भर करती है. फातिमा सना शेख इस फिल्म के लिए काफी ज्यादा मेहनत कर रही हैं और इस फिल्म में उनका लुक काफी अलग नजर आ रहा है.
अगर फिल्म के बारे में बात की जाए तो इतना तो तय है यह फिल्म बौक्स औफिस में धमाल करने वाली है क्योंकि फिल्म सुपरस्टार्स से भरी हुई है. फिल्म में आमिर खान, अमिताभ बच्चन और कैटरीना कैफ जैसे एक्टर्स हैं. आमिर को छोड़कर फातिमा पहली बार इन स्टार्स के साथ बड़े पर्दे पर नजर आने वाली हैं. फिल्म की शूटिंग कई देशों में हुई है, जिसमें थाईलैंड और मोरक्को जैसे देश शामिल हैं.
गौरतलब है कि फिल्म ‘ठग्स औफ हिंदोस्तान’ साल 1839 में आई एक नावेल ‘फिलिप मीडोज’ पर आधारित हैं. ये फिल्म ‘गैंग्स औफ ठग्स’ की जिंदगी और क्रियाकलापों के बारे में हैं. ये वो लोग हैं जो 19वीं सदी के शुरुआत में ब्रिटिश साम्राज्य की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहें थे. फिल्म ठग्स औफ हिंदुस्तान 7 नवंबर 2018 को रिलीज होगी.
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बौलीवुड की हिट एंड फिट एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा खान ने हाल ही में अपना रिलेशनशिप स्टेटस जग जाहिर किया है. मलाइका अरोड़ा और अरबाज खान का कुछ वक्त पहले ही तलाक हो चुका है. वहीं अब मलाइका सारा ध्यान खुद पर दे रही हैं. मलाइका अपने खाने-पीने से लेकर फिटनेस तक का पूरा-पूरा ख्याल रखती हैं.
वहीं अपनी लाइफ को और भी दिलचस्प बनाने के लिए एक्ट्रेस विदेश के टूर भी लगाती रहती हैं. मलाइका पिछले साथ अरबाज खान के साथ अपने तलाक को लेकर सुर्खियों में रहीं.
इसके बाद मलाइका को लेकर खबरें आने लगीं कि एक्ट्रेस बौलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर, संदीप और पिंकी फरार को डेट कर रही हैं. दरअसल, मलाइका का अरबाज से तलाक होने का ये भी कारण माना जा रहा था.
रिपोर्ट्स के मुताबिक मीडिया इंटरएक्शन के दौरान अर्जुन और मलाइका ने इस बात को कुबूल किया था कि दोनों एक दूसरे के अच्छे दोस्त हैं. इसके बाद मलाइका का नाम एक मुंबई बिजनेसमैन के साथ भी जुड़ा. कई दफा मलाइका को मुंबई बेस्ड रेस्टोरेंट के मालिक के साथ मेल मिलाप करते हुए देखा गया. अभी हाल ही में मलाइका अरोड़ा नेहा धूपिया के BBF विद वोग शो में पहुंचीं.
मलाइका यहां अपनी बहन अमृता अरोड़ा के साथ पहुंची थीं. शो की एक क्लिप में नेहा मलाइका से पूछती हैं कि वह आखिरी बार सिंगल कब थीं. इस दौरान मलाइका कहती हैं कि ‘करंटली’. वहीं मलाइका ने यह भी कहा कि प्यार के मामले में वह बहुत लकी हैं.
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