सूनी होने से बची सोनी की गोद

4 जून, 2017 को आधी रात तक उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर ज्यादातर लोग सो गए थे. सिर्फ वही जाग रहे थे, जिन की गाड़ियां आने वाली थीं. स्टेशन के वेटिंग रूम में सोने वाले यात्रियों में सोनी और राम सिंह चौहान भी थे. ये मध्य प्रदेश के जिला सीधी के रहने वाले थे. इन्हें पंजाब के अमृतसर जाना था.

उन की गाड़ी सुबह की थी, इसलिए पतिपत्नी वेटिंग रूम में जा कर साथ लाया बिस्तर लगा कर अपने 5 महीने के बेटे कुलदीप उर्फ हर्ष के साथ सो गए थे. सुबह 3, साढ़े 3 बजे सोनी की आंखें खुली तो उस ने बगल में सो रहे बेटे को टटोला. बेटे को अपनी जगह न पा कर वह एकदम से हकबका कर उठी और इधरउधर देखने लगी. उसे लगा कि बेटा खिसक गया होगा. लेकिन बेटा कहीं दिखाई नहीं दिया. उस ने झकझोर कर बगल में सो रहे पति को जगाया, ‘‘हर्ष कहां है?’’

आंखें मलते हुए राम सिंह ने भी इधरउधर देखा. बेटा कहीं नहीं दिखाई दिया तो उसे समझते देर नहीं लगी कि उस के बेटे को कोई उठा ले गया है. जैसे ही उस ने यह बात सोनी से कही, वह रोनेचीखने लगी. फिर तो जरा सी देर में उन के पास भीड़ लग गई. लोग तरहतरह की बातें कर रहे थे, जबकि सोनी का रोरो कर बुरा हाल था. राम सिंह भी सकते में था कि अब वह क्या करे, बेटे को कहां खोजे?

थोड़ी ही देर में मासूम बच्चे की चोरी की बात पूरे रेलवे स्टेशन में फैल गई, जिस से वेटिंग रूम में खासी भीड़ लग गई थी. बच्चे के मांबाप की हालत देख कर सभी दुखी थे. लोग उन पर तरस तो खा रहे थे, लेकिन कुछ करने की स्थिति में नहीं थे. बच्चा चोरी की सूचना स्टेशन पर स्थित थाना जीआरपी को मिली तो जीआरपी की टीम बच्चे की खोजबीन में लग गई. लेकिन काफी मेहनत के बाद कोई सफलता नहीं मिली.

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सुबह जीआरपी थानाप्रभारी मनोज सिंह ने चोरी गए बच्चे के पिता राम सिंह से तहरीर ले कर अज्ञात के खिलाफ बच्चे की चोरी का मुकदमा दर्ज कर बच्चा चोरी की जानकारी एसपी रेलवे इलाहाबाद दीपक भट्ट को दे दी. सूचना मिलते ही दीपक भट्ट स्टेशन पर पहुंचे और इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाई.

सीसीटीवी फुटेज देखी गई तो उस में काले रंग की एक महिला सोनी और राम सिंह के बेटे कुलदीप उर्फ हर्ष को चुरा कर ले जाती साफ दिखाई दी. वह औरत बच्चे को ले कर सिविल लाइंस की ओर स्टेशन से बाहर निकली और पैदल ही अंधेरे में गायब हो गई थी. इस तरह पुलिस को बच्चा चुराने वाली औरत का फोटो मिल गया था.

इस के बाद दीपक भट्ट के आदेश पर थानाप्रभारी मनोज सिंह ने सीसीटीवी फुटेज से उस औरत का फोटो निकलवा कर पोस्टर छपवाए और पूरे शहर में सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा करवा दिए. पोस्टर में पुलिस वालों के फोन नंबर के साथ बच्चे के बारे में सूचना देने वाले के लिए इनाम की भी घोषणा की गई थी.

इसी के साथ बच्चे की तलाश और उसे चुराने वाली औरत की गिरफ्तारी के लिए एक टीम गठित की गई, जिस में जीआरपी थानाप्रभारी मनोज सिंह, एसएसआई कैलाशपति सिंह, एसआई अंजनी सिंह, विनोद कुमार मौर्य, सर्विलांस प्रभारी सुबोध कुमार सिंह, एसआई मनोज कुमार और उदयशंकर कुशवाह को शामिल किया गया था.

पुलिस ने शहर के दारागंज रेलवे स्टेशन पर भी बच्चा चुराने वाली उस औरत के फोटो वाला पोस्टर चस्पा कराया था. स्टेशन पर ही चायपकौड़ा की दुकान लगाने वाले रामखेलावन (बदला हुआ नाम) ने वह पोस्टर देखा तो जीआरपी द्वारा पोस्टर में दिए गए फोन नंबर पर उस ने फोन किया. थानाप्रभारी मनोज सिंह ने फोन उठाया तो उस ने कहा, ‘‘साहब, आप लोगों को बच्चा चुराने वाली जिस महिला की तलाश है, वह बच्चे को ले कर मेरी दुकान पर आई थी.’’

‘‘तुम ऐसा करो, तुरंत इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर स्थित जीआरपी थाने आ जाओ.’’ मनोज सिंह ने कुछ पूछने के बजाय सीधे कहा, ‘‘तुम्हें थाने आने में कोई परेशानी तो नहीं होगी?’’

‘‘नहीं साहब, अगर मेरी वजह से किसी का बच्चा मिल जाता है तो मुझे बड़ी खुशी होगी.’’ रामखेलावन ने कहा.

थोड़ी देर में रामखेलावन जीआरपी थाना पहुंच गया. पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया कि बच्चा चुराने वाली महिला सुबह मुंह अंधेरे उस की दुकान पर आई थी. उस के पास पैसे नहीं थे. उस ने कुछ खाने को मांगा तो उस की हालत पर तरस खा कर उस ने उसे पकौड़ा भी खिलाया था और चाय भी पिलाई थी. उस समय उस की गोद में एक बच्चा था, जिसे वह साड़ी के पल्लू से ढके थी.

रामखेलावन की सहानुभूति पा कर उस ने उसे एक मोबाइल नंबर दे कर कहा था, ‘‘भइया, आप ने मुझ पर इतनी मेहरबानी की है तो एक मेहरबानी और कर दीजिए.’’

‘‘बताओ और क्या चाहिए?’’ रामखेलावन ने पूछा.

इस के बाद उस महिला ने एक पर्ची देते हुए कहा, ‘‘इस कागज पर लिखे नंबर पर फोन कर के मेरी बात करा दीजिए. यह नंबर मेरे दामाद का है. आप मेरा इतना काम और कर दीजिए, आप की बड़ी मेहरबानी होगी.’’

रामखेलावन ने पर्ची पर लिखा फोन नंबर मिला कर फोन महिला को दे दिया था. उस ने क्या बात की, यह रामखेलावन नहीं जान सका था, क्योंकि वह अपनी दुकानदारी में लग गया था. फिर उसे क्या पता था कि वह औरत बच्चा चुरा कर ले जा रही है.

‘‘उस महिला ने जो मोबाइल नंबर तुम्हें दिया था, वह नंबर तो तुम्हारे मोबाइल में होगा?’’ मनोज सिंह ने पूछा.

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‘‘जी साहब, वह नंबर अभी भी मेरे मोबाइल में है?’’ रामखेलावन ने कहा.

इस के बाद रामखेलान ने वह नंबर निकाल कर थानाप्रभारी को दे दिया. उन्होंने वह नंबर डायरी में नोट किया और रामखेलावन का आभार व्यक्त कर के उसे विदा कर दिया.

थानाप्रभारी ने यह सारी जानकारी एसपी दीपक भट्ट को दी तो उन्होंने तुरंत रामखेलावन से मिले मोबाइन नंबर को सर्विलांस पर लगवा दिया. चूंकि वह नंबर चल रहा था, इसलिए उस नंबर की लोकेशन मिल गई. वह नंबर जिला जौनपुर के गांव सुरेरी में चल रहा था.

रामखेलावन ने मनोज सिंह को यह भी बताया था कि महिला ने कहा था कि वह ज्ञानपुर रेलवे स्टेशन पर उतर कर अपने गांव जाएगी. किस गांव जाएगी, यह उस ने नहीं बताया था. पुलिस के लिए यह एक अहम सुराग था. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो पता चला कि वह सुरेरी गांव के सिपाही के नाम है.

बच्चे की खोज के लिए गठित टीम 14 जून को जौनपुर के गांव सुरेरी पहुंच गई. पुलिस ने बच्चा चुराने वाली महिला का पोस्टर गांव वालों को दिखाया तो गांव का कोई आदमी उसे पहचान नहीं सका. पुलिस ने सिपाही के बारे में पता किया तो उस गांव में सिपाही नाम के कई लोग थे. लेकिन वह सिपाही नहीं मिला, जिस से महिला ने बात की थी.

जीआरपी टीम उसे फोन कर सकती थी, लेकिन पुलिस ने उसे इसलिए फोन नहीं किया था कि कहीं सिपाही भी इस खेल में शामिल न हो, उसे शक हो गया हो वह बच्चे को ले कर भाग सकता है. लेकिन जब उस सिपाही का पता नहीं चला, जिस से उस औरत ने बात की थी तो मजबूर हो कर पुलिस ने उसे फोन किया. वह गलत आदमी नहीं था, इसलिए उस ने पुलिस से बात ही नहीं की, बल्कि पुलिस टीम से मिलने भी आ पहुंचा.

जीआरपी ने जब उसे वह पोस्टर दिखाया तो उस ने बताया कि इस औरत का नाम करुणा है और यह उस की चाचिया सास है. यह भदोही के ज्ञानपुर में रहती है. लेकिन यह ज्यादातर मुंबई में रहती है, क्योंकि यह वहां किसी फैक्ट्री में नौकरी करती है.

इस के बाद जीआरपी टीम सिपाही को साथ ले कर उस की ससुराल पहुंची, जहां करुणा बच्चे के साथ मिल गई. लेकिन जैसे ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार करना चाहा, उस ने शोर मचा कर पूरा गांव इकट्ठा कर लिया.

उस का कहना था कि यह बच्चा उस का है और उस के बेटे को किसी और का बता कर पुलिस उस से छीन रही है. उस ने धमकी दी कि इस बात की शिकायत वह पुलिस अधिकारियों से करेगी. लेकिन जब पुलिस ने अपना पुलिसिया हथकंडा दिखाया तो वह शांत हो गई. इस की एक वजह यह भी थी कि गांव वालों की कौन कहे, उस की ससुराल वालों ने भी उस का साथ नहीं दिया था.

इस की वजह यह थी कि सभी को लगता था कि यह बच्चा उस का नहीं हो सकता. क्योंकि करुणा जहां गहरे रंग की थी, वहीं बच्चा काफी सुंदर था. जिस से लोगों को संदेह हो रहा था कि करुणा यह बच्चा कहीं से चोरी कर के लाई है.

करुणा की ससुराल वालों की मदद से पुलिस ने बच्चे को कब्जे में ले कर उसे गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद पुलिस टीम उसे ले कर इलाहाबाद आ गई. बच्चे को उस के मांबाप राम सिंह और सोनी को सौंप कर करुणा से पूछताछ की गई तो उस ने बच्चा चोरी का अपना अपराध स्वीकार कर के जो कहानी सुनाई, वह पूरी कहानी इस प्रकार थी—

मुंबई के उपनगर ठाणे की रहने वाली करुणा का विवाह वहीं के विजय के साथ 8 साल पहले हुआ था. विजय से उसे एक बेटा भी हुआ. लेकिन बेटा पैदा होने के बाद ऐसा न जाने क्या हुआ कि बेटे को अपने पास रख कर विजय ने उसे घर से भगा दिया. पति के घर से भगाए जाने के बाद करुणा अलग रह कर एक कपड़ा फैक्ट्री में नौकरी करने लगी, जिस से उस का गुजरबसर आराम से होने लगा.

करुणा जिस फैक्ट्री में नौकरी करती थी, उसी में उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर का रहने वाला पिंटू भी नौकरी करता था. एक साथ काम करने की वजह से पहले दोनों में परिचय हुआ, उस के दोनों में प्यार हो गया. दोनों में शारीरिक संबंध बन गए तो आपसी रजामंदी से उन्होंने शादी कर ली.

पिंटू से विवाह के बाद करुणा को एक बेटी पैदा हुई, जो इस समय 7 साल की है. लेकिन उस की सास को बेटा चाहिए था. करीब 3 साल पहले पिंटू मुंबई से घर आ गया तो करुणा भी उस के साथ आ गई. लेकिन पिछले साल वह गर्भवती हुई तो अपने मायके ठाणे चली गई, जहां उस ने 4 महीने पहले बेटे को जन्म दिया. दुर्भाग्य से 2 महीने बाद ही उस के बेटे की मौत हो गई.

बेटा पैदा होने की बात तो उस ने पति और सास को बता दी थी, लेकिन उस की मौत की बात उस ने छिपा ली थी. उस की सास बारबार फोन कर के पोते को ले कर गांव आने को कह रही थी. पर करुणा के पास बेटा होता तब तो वह उसे ले कर आती. वह कोई न कोई बहाना बना कर टालती रही. अंत में उस की सास ने कहा, ‘‘तुम जब भी आना, मेरे पोते को ले कर आना, वरना मेरे यहां मत आना. तुम अपने मायके में ही रहना, यहां आने की जरूरत नहीं है.’’

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सास की इस धमकी से करुणा परेशान हो उठी. वह सोचने लगी कि अब क्या करे? बिना बच्चे के वह ससुराल आ नहीं सकती थी. काफी सोचविचार कर उस ने कहीं से 4 महीने का बच्चा चुराने की योजना बनाई. जिसे ले जा कर वह ससुराल में जगह पा सके.

यही सोच कर करुणा 27 मई को मुंबई से चली तो अगले दिन इलाहाबाद आ गई. स्टेशन पर इधरउधर भटकते हुए वह 4 महीने के बच्चे की तलाश में लग गई. चूंकि वह शक्लसूरत और पहनावे से भिखारिन जैसी लगती थी, इसलिए उस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. क्योंकि स्टेशन पर इस तरह के लोग पड़े ही रहते हैं. फिर वह सचमुच भीख मांग कर अपना पेट भर रही थी.

आखिर 4 जून, 2017 को उस की तलाश पूरी हुई. सोनी और राम सिंह के 4 महीने के बेटे पर उस की नजर पड़ी तो वह उसे ले कर चंपत हो गई.

पूछताछ के बाद मनोज सिंह ने करुणा के खिलाफ अपराध संख्या 448/2017 पर आईपीसी की धारा 363, 365 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. सोनी बेटे को पा कर बहुत खुश थी. वह बेटे को सीने से लगा कर बारबार पुलिस वालों को दुआएं देते हुए बेटे को दुलार रही थी.

सार्वजनिक वितरण योजना के अंतर्गत अपराध

सरकारी कानून किस तरह जानलेवा से होते हैं इस का एक मजेदार उदाहरण है सार्वजनिक वितरण योजना के अंतर्गत कानून में अपराध. इस योजना में मिट्टी का तेल राशन कार्ड पर दिया जाता है और दुकानदार को उस का लेखाजोखा रखना पड़ता है कि कितना तेल उसे अलौट हुआ, कितना बाकी है, कितना बेचा. इस कानून में भी ज्यादा तेल रखने पर जुरमाने और सजा का प्रावधान है. दुकानदार सजा के डर के बावजूद पैसे कमाने के लिए काम करते ही हैं.

इस में कुछ राशन कार्ड वालों को कम तेल दे कर या न दे कर बाकी ज्यादा दाम पर बेच दिया जाता है. यह गुनाह है पर केवल आर्थिक, कोई अनैतिक नहीं. पर सरकारी इंस्पैक्टर आतंक तो गब्बर सिंह का आतंक है.

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक दुकानदार के यहां इंस्पैक्टर ने कुछ ज्यादा कैरोसिन पकड़ लिया और मुकदमा जड़ दिया. यदि तभी लेदे कर फैसला कर लिया जाता तो बात दूसरी होती पर लगता है दुकानदार ने केस लड़ने का फैसला किया. यह कब हुआ? 2 सितंबर, 1988 को. इस का अंतिम निर्णय कब हुआ? जनवरी 2018 में.

पहले कोर्ट और अपील कोर्ट ने इस दुकानदार को 3 माह की सजा दे डाली, महज 187 लिटर अतिरिक्त तेल रखने पर. जिस देश में हत्यारे और बलात्कारी गलीगली घूमते हैं, जहां बाबास्वामी लूटते हैं और भगवा दल निहत्थों को धमकाते हैं, वहां 187 लिटर मिट्टी का तेल अतिरिक्त रखने का मामला सुप्रीम कोर्ट में 30 साल तक चला. तब तक दुकानदार 89 वर्ष का हो गया.

सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर राहत दी पर गुनाह से नहीं. वह 89 वर्ष का है. अत: 3 माह की जेल काटना गलत होगा. एक लोकतांत्रिक देश की न्यायपालिका इस तरह आतंकवादी इंस्पैक्टरों का साथ दे सकती है और निरर्थक, अनावश्यक व रिश्वत के कुएं खोदने वाले कानूनों का समर्थन कर सकती है यह आश्चर्य की बात है. तेल की कालाबाजारी न हो यह सही है पर इस में उस दुकानदार का लाइसैंस कैंसल करना काफी होगा ताकि वह और लूट न मचा सके. उसे जबरन वर्षों बाद जेल भेजने की पेशकश करना और सरकार का अपीलों में अपने वकील खड़ा करना एक नागरिक के जीने के अधिकार को छीनना है.

मिट्टी का तेल न सोना है न शराब या अफीम कि उस से समाज में जहर फैलता हो. व्यापार की ऊंचनीच पर इस तरह का संगीन अपराध लगना जनता के साथ खिलवाड़ है.

बाबा ब्लैकशिप : कमजोर पटकथा, अच्छा अभिनय

भ्रष्ट राजनेता की करतूतों के साथ प्रेम कहानी को पेश करने वाली फिल्म ‘‘बाबा ब्लैकशिप’’ कहीं से भी दर्शकों को अपनी तरफ नहीं खींचती है.

फिल्म ‘‘बाबा ब्लैकशिप’’ की कहानी गोवा में रहने वाले बाबा (मनीष पौल) से शुरू होती है. जो कि एक आर्ट शिक्षक से आर्ट डीलर बने ब्रायन मोरिस उर्फ सांता (अन्नु कपूर) की बेटी एंजिला मोरिस (मंजरी फड़नवीस) से प्यार करता है. दोनों शादी करना चाहते हैं, मगर सांता ऐसा नहीं होने देना चाहते. उनकी नजर में एक काजू बेचने वाले की कमाई कुछ नहीं हो सकती. बाबा इस बात से अनजान है कि एंजिला के पिता मशहूर पेटिंग चुराकर, उनकी नकल वाली पेटिंग बनाकर मौलिक पेटिंग के रूप में बेचकर लोगों को ठगते रहते हैं.

उधर बाबा अब तक अपने पिता चारूदत्त शर्मा (अनुपम खेर) को अपनी मां की डांट खाते ही देखते आए हैं. शर्मा जी घर पर बर्तन धोते व बुनाई करते नजर आते हैं. लेकिन बाबा का पच्चीसवां जन्मदिन उनकी जिंदगी में उथल पुथल मचा कर रख देता है. अपने 25वें जन्मदिन पर बाबा को उसके पिता बताते हैं कि वह सर्वाधिक चर्चित हिटमैन यानी कि हत्याएं करनेमें माहिर चार्ल्स हैं. इतना ही नही शर्मा बताते हैं कि पैसा लेकर हत्या करने का यह धंधा उनका काफी पुश्तैनी धंधा है. इस धंधे में वह 12 पीढ़ी के नुमाइंदे हैं और अब तेरहवीं पीढ़ी यानी कि बाबा भी यही धंधा करेगा. पर बाबा इंकार कर देता है, वह कहता है कि वह तो काजू की दुकान पर ही बैठेगा, क्योंकि उसे एंजिला मोरिस से शादी करनी है.bollywood

चारूदत्त शर्मा पैसे का सौदा होने पर आधा पैसा एडवांस में लेकर हत्या करते हैं, बाकी पैसा हत्या होने के बाद लेते हैं. लेकिन वह सामने वाले से कहते हैं कि वह पैसा वह रेलवे स्टेशन पर बने लाकर में रख दे. लाकर कुछ इस तरह से है कि उस लाकर का पिछले दरवाजे के लाकर का नंबर अलग है, तो पीछे वाले दरवाजे पर चाभी लगाकर वह पैसा निकालते रहते हैं. इस तरह वह लोगों के सामने नहीं आते हैं.

उधर राज्य के भ्रष्ट गृहमंत्री उप्पल (मनीष वाधवा) वास्तव में सबसे बडे़ खिलाड़ी हैं. वह हैं राज्य के गृहमंत्री, मगर ड्रग्स का अवैध कारोबार वही चला रहे हैं, जिसका मैनेजर उन्होंनेकमाल (बी.शांतनु) को बना रखा है. गृहमंत्री की पत्नी लड़कियों की तस्करी से जुड़ी हुई हैं. कमाल, गृहमंत्री उप्पल का इशारा पाते ही अपने छोटे भाई जमाल से सामने वाली की हत्या करवा देता है. उप्पल इस बात से परेशन रहते हैं कि आने वाले चुनाव के लिए फंड कैसे आए, तथा वह ईमानदार एसीपी शिवराज (के के मेनन) से भी परेशान हैं.

उप्पल का आदमी जब ड्रग्स की बडी खेप लेकर गोवा एयरपोर्ट पर उतरता है, तो एसीपी शिवराज उसके पीछे पड़ जाता है, पर वह किसी तरह से बचकर अपने घर पहुंच जाता है. अब गृहमंत्री उप्पल, कमाल से कहते हैं कि किसी मंजे हुए हिटमैन को ठेका देकर उस ड्रग्स को लाने वाले की हत्या करवा दें. चारूदत्त शर्मा को यह ठेका मिलता है. चारूदत्त अपने बेटे बाबा को अपने साथ लेकर जाते हैं और उप्पल के आदमी के घर में बम फिट कर देते  हैं.

इधर, एसीपी शिवराज, कमाल व जमाल का पीछा करते हुए गृहमंत्री उप्पल के घर पहुंच जाता है. वह कमाल व जमाल को ड्रग्स के अवैध कारोबार से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार करना चाहता है. एसीपी कहता है  कि वह गिरफ्तारी की जगह उप्पल का घर नहीं दिखाएगा. पर उप्पल कहते हैं कि उन्हे अपनी सैलरी चाहिए, तो सैल्यूट करके वापस चला जाए.

इधर हर बार चुनाव से पहले उप्पल को चुनावी फंड के रूप में धन राशि देने वाले उद्योगपति डैनियल ने उन्हे आंख दिखाना शुरू कर दिया है. वह चाहता है कि पहले उप्प्ल उसकी एक फाइल को पास कर दे, तब वह पैसा दे. अब उप्पल एक चाल चलता है. वह कमाल से कहकर चारूदत्त शर्मा को डैनियल र् आर्ट डीलर मोरिस की हत्या करने की सुपारी दिलवाता है,और एसीपी शिवराज के हाथों चारूदत्त उर्फ चार्ल्स को गिरफ्तार करवाकर खुद को लोगों की नजर में अच्छा साबित करना चाहता है. मगर बाबा की समझदारी से बाबा, मोरिस,चारूदत्त शर्मा व एसीपी शिवराज मिलकर नई चाल चलते हैं, जिसमें कमाल व डैनियल के साथ ही गृहमंत्री उप्पल भी मारे जाते हैं.bollywood

विश्वास पंड्या की निर्देशकीय कमजोरी और कमजोर पटकथा, बेसिर पैर की कहानी के चलते बेहतरीन व प्रतिभाशाली कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय के बावजूद फिल्म ऐसी नहीं है कि दर्शक अपनी गाढ़ी कमाई इसे देखने के लिए खर्च करे. निर्देशक ने ज्वलंत व बेहतरीन विषय की ऐसी की तैसी कर डाली. कहानी में इतने सारे ट्रैक हैं, कि दर्शक भी पूरी तरह से कन्फ्यूज हो जाता है. फिल्म का क्लायमेक्स भी बड़ा अजीब सा है. फिल्म को एडीटिंग टेबल पर भी कसने की जरुरत थी. कुछ सीन तो सीरियल का अहसास कराते हैं.

फिल्म का गीत संगीत आकर्षित नहीं करता. फिल्म गोवा की पृष्ठभूमि पर है, पर एक गाना 90 के दशक का पंजाबी गीत रखा गया है. यह बड़ा अजीब सा लगता है.

फिल्म को हास्य व प्रेम कहानी वाली फिल्म के रूप में प्रचारित किया गया, मगर रोमांस भी ठीक से उभर नहीं पाता. एक रोमांटिक गाना है, वह भी जबरन ठूंसा हुआ लगता है.

मनीष पौल पहली बार बेहतरीन अभिनय करते हुए नजर आए, उनकी कौमिक टाइमिंग भी जबरदस्त है. मगर उनका किरदार भी सही ढंग से उभरता नहीं है. अन्नू कपूर, अनुपम खेर,मनीष वाधवा व के के मेनन अपनी बेहतरीन अदाकारी से भी इस फिल्म को तहस नहस होने से नहीं बचा पाते हैं. क्योंकि पटकथा के स्तर पर इन कलाकारों को कोई मदद नहीं मिलती है. मंजरी फड़नवीस के किरदार के साथ भी न्याय नहीं हुआ है. बी.शांतनु अपनी छोटी भूमिका में भी प्रभाव डालने में सफल रहते हैं.

एक घंटे 51 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘बाबा ब्लैकशिप’’ के लेखक निर्देशक विश्वास पंड्या, लेखक संजीव पुरी, संगीतकार रोशन बालू व गौरव दास गुप्ता, कलाकार हैं – मनीष पौल, मंजरी फड़नवीस, के के मेनेन, अन्नू कपूर, अनुपम खेर, मनीष वाधवा, बी.शांतनु व अन्य.

फेसबुक पर ढूंढ़ रहे हैं गर्लफ्रैंड तो ये गलतियां न करें

‘‘यार, बहुत ट्राई कर लिया, लेकिन एक भी फ्रैंड नहीं मिली. यार, इधर तो सब फेक हैं, जो मिलती हैं वे खेलीखाई हैं, क्या ये असली  युवतियां हैं. उस ने पहले फ्रैंड रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट की, फिर ब्लौक कर दिया. यार, इंटरनैट पर जितनी जल्दी रिश्ते बनते हैं उतनी ही जल्दी वे टूट भी जाते हैं,’’ ये बातें अकसर युवक या पुरुष एकदूसरे से साझा करते सुनाई पड़ते हैं.

दरअसल, सोशल मीडिया सर्च तकनीक बेहद सटीक है. जिस की हमें तलाश हो वह हमें मिल जाता है, लेकिन अकसर लोग धोखा खा जाते हैं. कई बार कुछ गड़बड़ होने से लोगों को सोशल मीडिया पर निराशा हाथ लगती है. भारत में ज्यादातर लोग साथी ढूंढ़ने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं.

फेसबुक के मुताबिक भारत में प्रतिदिन 6.90 करोड़ लोग फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं जो देश में इस्तेमाल की जाने वाली साइट्स का 90 फीसदी है, यानी आप इन लोगों में से अपनी गर्लफ्रैंड जरूर ढूंढ़ सकते हैं, कोई कमी नहीं है बशर्ते आप यहां दिए सुझावों पर अमल करें. :

अनजान लोगों को फ्रैंड रिक्वैस्ट न भेजें

फेसबुक उन लोगों को ही रिक्वैस्ट भेजने की इजाजत देता है जिन को आप जानते हों, लेकिन अगर आप किसी अनजान महिला से फ्रैंडशिप का आग्रह कर रहे हैं और उस ने किसी की भी रिक्वैस्ट स्वीकार करने की गुंजाइश खुली रखी है तो आप उसे अपनी रिक्वैस्ट भेज सकते हैं. बशर्ते उसे आप पसंद आएं और आप दोनों के बीच बातचीत शुरू हो.

अपनी सर्च का दायरा सीमित रखें

फेसबुक पर सर्च का औप्शन होता है, जहां आप किसी का भी नाम और उस के शहर को खोज सकते हैं. उदाहरण के लिए अगर आप दिल्ली में किसी मधुरिमा को ढूंढ़ना चाहते हैं तो मधुरिमा और दिल्ली लिख कर सर्च करें. अगर आप लाखों मधुरिमाओं की भीड़ से बचना चाहते हैं तो आप मधुरिमा के साथ उन का उपनाम (सरनेम) भी टाइप कर दें तो परिणाम और सटीक होंगे.

फेसबुक रिक्वैस्ट न भेजने दे तो क्या करें

फेसबुक किसी अनजान को रिक्वैस्ट न भेजने दे तो ऐसी दशा में आप उसे एक मैसेज भेज सकते हैं. अंगरेजी में ‘हाय लैट अस बी फ्रैंड्स’ या हिंदी में ‘क्या हम दोस्त बन सकते हैं’ संदेश के साथ एक फूल या गुलदस्ता भी भेज सकते हैं.

वह स्वीकार कर ले तो न करें ये बातें

अगर आप की रिक्वैस्ट स्वीकार कर ली गई है तो इस का मतलब यह नहीं कि आप जबरन किसी के पीछे पड़ जाएं और उस पर मैसेज की बरसात कर दें. इस का मतलब यह भी नहीं कि वह आप के लिए उपलब्ध है और आप जब मरजी उसे डेट पर ले जा सकते हैं. फ्रैंड का अर्थ सैक्स नहीं, न ही उस की स्वीकारोक्ति है. अगर आप ने किसी को बारबार मैसेज किए तो वह आप को ब्लौक या अनफ्रैंड भी कर सकती है.

तमीज से पेश आएं जल्दबाजी न करें

अगर आप फेसबुक फ्रैंड के साथ तमीज से पेश आते हैं और उस को समझ कर वक्त देते हैं तो आप एक अच्छे दोस्त बन सकते हैं. आप तहजीब से बात करें. उस की पसंद व नापसंद का पता करें. उस की तारीफ करें. हो सकता है कि वह आप को सिर्फ अपने अच्छे दोस्तों की ही श्रेणी में रखे. अकसर देखा गया है कि भारत के कई युवकों ने विदेशी फेसबुक फ्रैंड्स से पहले दोस्ती की, 1-2 साल दोस्ती कायम रखी और फिर बाद में शादी कर ली.

मोबाइल रीचार्ज और पैसे मांगने वाली युवतियों से सावधान

इंटरनैट पर ठगों की कमी नहीं, वे लोगों को तरहतरह से ठगते हैं. कुछ चालाक युवतियां युवकों को मीठीमीठी बातों में फंसा कर उन से अपना मोबाइल रीचार्ज करवाती हैं और कई बार उन से पैसे भी उधार मांग लेती हैं. कुछ तो सीधेसीधे धंधे में भी उतर आती हैं और पैसों के लिए सबकुछ करने के लिए तैयार हो जाती हैं. ऐसी युवतियों से सावधान रहें.

अगर फेसबुक फ्रैंड मिलने आ जाए

यदि कोईर् फेसबुक फ्रैंड आप के आग्रह पर आप पर भरोसा कर के मिलने पहुंच जाए तो इसे न तो सैक्स का निमंत्रण समझें और न ही उस की स्वीकारोक्ति. फेसबुक फ्रैंड से मिलने से पहले युवतियों को बारबार सोचना चाहिए, क्योंकि हरियाणा के गुड़गांव, हिसार और पंजाब के मोहाली सहित कई स्थानों पर कई  भोलीभाली फेसबुक फ्रैंड्स का बलात्कार तक किया जा चुका है. इसलिए यदि वह आप से मिलने आ गई तो आप बाइज्जत उसे उस के घर पहुंचा दें. छोटी सी गलती एक ओर जहां दोस्ती तोड़ सकती है, वहीं बड़ी गलती आप को कानून के शिकंजे में फंसा सकती है.

रिलेशनशिप स्टेटस को ले कर गलतफहमी न पालें

अकसर युवक किन्हीं युवतियों का रिलेशनशिप स्टेटस पा कर उन के प्रति गलतफहमी पाल लेते हैं. मसलन, अगर किसी युवती ने खुद को विधवा, तलाकशुदा, सेपरेटेड या फिर कौंप्लिकेटेड लिखा है तो लोग मानते हैं कि वह आसानी से उपलब्ध है. अकसर ऐसे स्टेटस वाली युवतियों के पास फ्रैंड रिक्वैस्ट बहुत आती हैं जिस वजह से उन्हें अपना फेसबुक एकाउंट या तो डीऐक्टिवेट करना पड़ता है या फिर वे फ्रैंड रिक्वैस्ट की संभावना ही खत्म कर देती हैं.

साइबर स्टौकिंग से सावधान

यदि आप की फ्रैंड रिक्वैस्ट या मैसेज का कोई जवाब नहीं मिलता है तो समझिए वह आप से दोस्ती करने की इच्छुक नहीं है. उस को बारबार मेसैज न करें, क्योंकि ऐसा करना अपराध है. कानून की भाषा में इसे साइबर स्टौकिंग यानी इंटरनैट पर किसी का पीछा करना कहा जाता है और कोई चाहे तो आप के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर सकता है.

फेसबुक सोशल नैटवर्किंग का साधन है, इसलिए इसे दूसरों को परेशान करने का जरिया न बनाएं. साफसुथरी दोस्ती किसी भी रिश्ते का रूप ले सकती है. आप एक अच्छे दोस्त के रूप में किसी का जीवन संवार सकते हैं. इंटरनैट सिर्फ सैक्स या महिलाओं के करीब आने का जरिया नहीं है. आप चाहें तो इंटरनैट का सही इस्तेमाल कर न केवल अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं बल्कि अपना ज्ञान भी बढ़ा सकते हैं.

बाइक से हैरतअंगेज करतब

युवाओं की खास पसंद है बाइक. कुछ उत्साही और दुस्साहसी युवक मोटरसाइकिल से ऐसे हैरतअंगेज कारनामे करते हैं कि देखने वाला आश्चर्यचकित रह जाए.

सेना की डेयर डेविल्स मोटरसाइकिल प्रदर्शन टीम ने ऐसे हैरतअंगेज कारनामों के लिए अनेक बार गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है. इस टीम ने अपना पहला रिकौर्ड 1991 में ग्वालियर में तब बनाया था जब 7 मोटरसाइकिलों पर 40 जवानों ने सवार हो कर 400 मीटर का फासला तय किया था. सेना की ही सिग्नल कोर टीम ने 11 मोटरसाइकिलों पर 251 जवानों को बैठा कर 11 जून, 2009 को जबलपुर में 240 मीटर चलने का रिकौर्ड बनाया था.

अक्तूबर 2014 में मध्य प्रदेश की जबलपुर डेयर डेविल्स टीम ने करतब दिखाते हुए 3 नए विश्व रिकौर्ड बनाए. पहला रिकौर्ड 70 सैकंड में 3 मोटरसाइकिलों पर 15 जवानों ने 1 किलोमीटर के वर्गाकार क्षेत्र में मानव मोटरसाइकिल पिरामिड बना कर बनाया. नायक दिलीप कुमार बोहरा के पेट के ऊपर से 1,200 बार बौक्स को निकाला गया. यह स्टंट जवानों ने 13 मिनट में पूरा किया. तीसरा रिकौर्ड हवलदार दिपायन चौधरी व ईश्वर रावटी ने वर्गाकार ट्रैक पर 218 किलोमीटर की रिवर्स राइडिंग की. उन्होंने पिछला रिकौर्ड तोड़ते हुए 4 घंटे 21 मिनट और 8 सैकंड में यह कीर्तिमान रचा.

1976 में ब्राजीलियन आर्मी पुलिस के 40 जवान एक ही मोटरसाइकिल पर सवार हो कर 1.6 किलोमीटर की दूरी तक गए थे.

मोटरसाइकिल द्वारा सब से लंबी छलांक का रिकौर्ड 69,60 मीटर का है. 6 फरवरी, 1977 को फ्रांस के एलो ज्यां प्रीयू ने पैरिस के निकट मौटलेहरी में छलांग लगा कर 16 बसों को पार कर के यह रिकौर्ड बनाया था.

22 जून को लौडन, न्यू हैंपशायर में डोग डैंजर ने 1991 होंडा सी आर 500 पर मोटरसाइकिल द्वारा लंबी छलांग में 251 फुट की सब से लंबी दूरी तय की.

रोमांचक प्रदर्शन

नई दिल्ली में हर वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में मोटरसाइकिल के रोमांचक प्रदर्शन भारतीय सेना के जवानों द्वारा किए जाते हैं, जिन्हें देख दर्शक दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं. 26 जनवरी, 1992 को भारतीय थलसेना की मोटरसाइकिल प्रदर्शन टीम ने 42 पुरुषों और 8 मोटरसाइकिलों ने पिरामिड बनाने का रिकौर्ड बनाया था. जिस ने बिना किसी बाहरी सहायता के 600 मीटर की दूरी तय की थी. इस टीम ने 6 जून, 1992 को अपना रिकौर्ड सुधारते हुए 8 मोटरसाइकिलों पर 45 पुरुषों का पिरामिड बना कर 800 मीटर की दूरी तय की थी.

सेना की डेयर डेविल्स के नाम 2 रिकौर्ड और भी हैं, 21 दिसंबर, 2013 को उस ने चलती मोटरसाइकिल पर प्रदर्शन किया. इसी दिन उस ने जमीन पर लेटे हुए 50 जवानों के ऊपर से मोटरसाइकिल जंप करा कर लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया था.

मोटरसाइकिल से हैरतअंगेज प्रदर्शन करने वालों की कमी नहीं है. 30 नवंबर, 1988 को 10 फुट की सीढ़ी के ऊपर से पीछे की तरफ मुंह कर के लगातार 90 मिनट के लिए सिग्नलमैन डेबी जोंस, रौयल सिग्नल व्हाइट हैलमेट्स ने 23 किलोमीटर की दूरी केटरिक एयरफील्ड, न्यूयौर्क में तय की थी.

अटलांटा जौर्जिया के ग्रगेरीड ने स्ट्रीटलीगल मोटरसाइकिल प्रदर्शित की जो 15 फुट 6 इंच लंबी और 253 किलोग्राम भारी है.

क्या आप ने 25 फुट लंबी मोटरसाइकिल को चलते देखा है? जरमनी के एसेन मोटर शो में प्रदर्शित इस मोटरसाइकिल को बनाया है स्टीव हौपकिंस ने. इस पर 10 व्यक्ति आराम से बैठ सकते हैं.

लाजवाब कारनामे

ब्रिटेन के कोलिन फुर्ज ने तो कमाल ही कर दिखाया. उन्होंने 72 फुट लंबी मोटरसाइकिल प्रदर्शित की. लंबाई अधिक होने के कारण इसे सीधे चलना पड़ता है. इस पर 25 व्यक्ति आराम से बैठ सकते हैं. गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स के लिए इसे एक मील तक चला कर दिखाया गया. इस की रफ्तार 35 किलोमीटर प्रतिघंटा है.

क्या आप 7.5 फुट ऊंची मोटरसाइकिल की कल्पना कर सकते हैं? यह ‘विगटो’ है जोकि स्वीडन के टौम बीवर्ग ने बनाई है. जगुआर के 12 पावर के इंजन वाली यह मोटरसाइकिल 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल सकती है.

फ्रांस के कलाकार जूलियन डूपौंट ने मैक्सिको में बाइक पर सांसें रोक देने वाले कारनामे को अंजाम दिया है. इस साहसी कलाकार ने अपने जीवन का सब से हैरतअंगेज प्रदर्शन करते हुए मैक्सिको सिटी के मोंटाना रूसा रोलर कौस्टर ट्रैक पर बाइक चलाई. 33 मीटर ऊंचा यानी 108 फुट वुडन कौस्टर बिना बिजली के चलने वाली ट्रेन के लिए तैयार किया गया था जो गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत पर काम करता है.

सड़क पर बाइक सवार प्रदर्शन करते हुए तो अकसर देखे जाते हैं लेकिन आसमान में पैराग्लाइडिंग से बाइक पर प्रदर्शन करना लोहे के चने चबाने से कम नहीं है. ऐसा ही कारनामा किया स्टंटमैन स्टीव मेयर ने. उन्होंने साल्ट लेक सिटी से 50 मील दूर उटाह में हार्ले डैविडसन से पैराग्लाइडर की तरह माउंट टिंपानोगास के चारों ओर चक्कर लगाया.

उम्र 56 साल की लेकिन जज्बा युवाओं जैसा. मिलिटरी एमसीटीई के ड्राइवर सुरेश चौधरी ने फरवरी 2014 में बगैर हैंडल पकड़े 221 किलोमीटर तक बाइक चलाने का कारनामा किया. उन्होंने मध्य प्रदेश के महू से जुलवानिया तक बाइक चला कर इस कारनामे को अंजाम दिया.

उन्होंने यह सफर 3 घंटे में पूरा किया. वे 10 साल के कड़े अभ्यास के बाद यह मुकाम हासिल कर पाए. उन का सपना हाथ छोड़ कर बाइक चलाने वाले 213 किलोमीटर के रिकौर्ड को तोड़ना था. वे अपने इस कारनामे को गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स में दर्ज कराने का दावा करेंगे.

ठगों की सम्यक दृष्टि

हमारी सभ्यता और संस्कृति में ठगी को विद्या और कला की मान्यता बेवजह नहीं मिली है. ठगी दुष्कर काम है जिस में आत्मविश्वास, ज्ञान और अभिनय सहित ढेरों गुणों व जानकारियां अनिवार्य होती हैं. यों ठगी सर्वव्यापी है. हर कोई किसी न किसी को ठग रहा है. व्यापारी ग्राहकों को, डाक्टर मरीजों को, बैंक उपभोक्ताओं को और नेता जनता को ठग रहे हैं.

यह मामला थोड़ा अलग है जिस में ठगों ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को ही चूना लगा डाला. यह बात खुद उन्होंने सदन में स्वीकारी कि उपराष्ट्रपति बनने के बाद वजन घटाने वाली एक दवाई का इश्तिहार उन्होंने देखा और दवा और्डर कर दी. 1 हजार रुपए लेने के बाद दवा कंपनी ने फिर हजार रुपए मांगे तो वेंकैया का माथा ठनका पर तब तक वे आम लोगों की तरह ठगे जा चुके थे.

अब उम्मीद की जानी चाहिए कि इन ठगों की बाबत कोई कठोर कानून बनेगा जो लोगों की कमजोरियों का फायदा तरहतरह के विज्ञापन दे कर खुलेआम उठाते हैं. बेहतर तो यह होगा कि मोटे लोग वजन कम करने वाले चमत्कारी विज्ञापनों के चक्कर में पड़़ने के बजाय व्यायाम और खानपान पर ध्यान दें.

खुल कर बोलो देश सुधारो

गोवा के टाउन ऐंड कंट्री प्लानिंग मिनिस्टर विजय सरदेसाई ने कहा है कि उत्तर भारतीय पर्यटक गोवा आ कर उसे गुरुग्राम जैसा गंदा बनाने की पूरी कोशिश करते हैं. वे सड़क पर कूड़ा फेंकते हैं, समुद्री तटों को गंदा करते हैं, बस में खड़े हो कर पेशाब तक कर डालते हैं.

16 लाख की आबादी वाले गोवा में 65 लाख यात्री सैर करने आते हैं. ये यात्री पूरी तरह से बिगड़ैल और असभ्य ही होते हैं और इन्हें गोवा को दूसरे राज्यों की तरह गंदा करने से कोई परहेज नहीं है.

नरेंद्र मोदी की 4 साल की स्वच्छ भारत कैंपेन को इस से अच्छा सर्टिफिकेट मिलना कठिन है, जब उन की ही पार्टी का एक मंत्री उन्हीं के नारों को खोखला बनाए. दरअसल, हमारे पूरे देश में सिविक सैंस की भारी कमी है और उस का कारण यह है कि हमारे नीतिनिर्धारक, शिक्षित, अमीर, सभ्य साफ कालोनियों में रहने वाले दूसरों को जानवर और गंवार समझते हैं.

हमारे यहां सफाई की जिम्मेदारी हमेशा दूसरों की रही है. सफाई की हजार चीजें उपलब्ध हों पर यहां बिकती झाड़ुएं ही हैं, क्योंकि अगर महंगी मशीनें अनपढ़ों को दे भी दी जाएं तो वे 4 दिन में ही खराब हो जाएंगी. चूंकि पढ़ेलिखों को झाड़ू नहीं चलानी आती, इसलिए बहुत थोड़े से घरों में वैक्यूम क्लीनर दिखेंगे.

सफाई का एक कल्चर होता है पर हमारे यहां तो कल्चर यह है कि सफाई करने वाला खुद गंदा रहे. अच्छे वेतन वाले सफाई कर्मचारी को साफसुथरा देख कर हमारे यहां आंखें चौड़ी कर ली जाती हैं. हमारे यहां सफाई रखना वर्ग विशेष का काम है, बाइयों का काम है. इसीलिए सारा देश गंदा रहता है. हम खुद साफ न करेंगे तो इस की महत्ता समझ न पाएंगे.

गोवा कई दशकों तक पुर्तगाली शासन में रहा जहां उन्होंने हरेक को बराबर का समझा और नतीजा यह है कि वहां की प्रति व्यक्ति आय भी अच्छी है और सफाई के प्रति हर जने की अवधारणा भी. और इलाकों से आने वाले भारतीय पर्यटक यह समझ नहीं पाते.

साफसफाई उत्पादकता बढ़ाती है, यह भेदभाव कम करती है, बीमारियां कम करती है, पर हमारे यहां घरों से ले कर नौर्थ ब्लौक (जहां केंद्र सरकार के कार्यालय हैं) तक सभी एकसमान गंदे हैं. डिगरी का फर्क हो सकता है पर मूलतया सफाई की जिम्मेदारी हमेशा किसी और की होती है.

गोवा के मंत्री का गुस्सा वाजिब है. उन के बयान पर थोड़ा हल्ला मचा है पर जब तक लोग खुल कर न बोलेंगे, देश सुधर नहीं सकता.

वीडियो : नोरा फतेही ने स्टेज पर लगाई आग

‘बाहुबली’ फेम नोरा फतेही बेहतरीन बैली डांसर हैं. वह ‘बिग बौस 9’ में भी अपनी अदाओं के जलवे दिखा चुकी हैं. इस बार नोरा का एक और हौट और सिजलिंग डांस वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में नोरा स्टेज पर अकेले बैली डांस करती नजर आ रही हैं. इस वीडियो के जरिये उन्होंने दिखा दिया है कि बैली डांस में उन्होंने महारत हासिल कर रखी है.

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बता दें ये वीडियो बेंगलुरु में हुए मिस इंडिया फेमिना दीवा अवार्ड्स 2018 का है. इस दौरान उन्हें एक ग्रुप परफौर्मेंस देना था, लेकिन तभी उन्हें सोलो परफौर्म करने के लिए कह दिया गया. दिलचस्प बात यह है कि इस सोलो परफौर्मेंस के लिए उन्होंने कोई प्रैक्टिस नहीं की थी. पर जब उन्होंने स्टेज पर बैली डांस करना शुरू किया तो हर कोई उन्हें बस देखता ही रह गया.

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नोरा अक्सर ही अपने सिजलिंग डांस की वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. उन्होंने खुद अपने इस डांस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया और कैप्शन में लिखा, ‘मैं इस सोलो परफौर्मेंस के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी. मैं बस संगीत को महसूस कर रही थी. मैं संगीत सुनती गईं और पूरी परफौर्मेंस दे डाली.

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26 वर्षीय नोरा फतेही को असली पौपुलैरिटी फिल्म ‘बाहुबली (2015)’ के मनोहारी.. गाने में दी अपनी बेहतरीन परफौर्मेंस से मिली. इस गाने पर उन्होंने जबरदस्त डांस किया था और प्रभास के साथ इस गाने में उनकी कैमेस्ट्री काफी जमी भी थी. यही नहीं, बिग बौस के घर में भी उन्होंने शानदार मूव्ज दिखाए थे. बता दें कि नोरा हाल ही में पंजाबी सिंगर हार्डी संधू के गाने ‘ना’ में नजर आईं थी. हार्डी के इस नए गाने में नोरा उनकी महबूबा के रोल में दिखी थीं.

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बता दें नोरा फतेही इंडो-कैनेडियन हैं. फतेही इंग्लिश, हिंदी, फ्रेंच और अरेबिक भाषाएं बोल लेती हैं. उन्होंने बौलीवुड फिल्म ‘रोरः टाइगर्स औफ द सुंदरबंस’ से अपने करियर की शुरुआत की थी. उसके बाद वे ‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’ में भी नजर आ चुकी हैं. तेलुगु फिल्म ‘टेंपर’, ‘बाहुबली’ और ‘किक-2’ में उनके सौन्ग ने उन्हें पौपुलर बनाने का काम किया. वे मलयालम फिल्म ‘डबल बैरल’ में भी नजर आ चुकी हैं. लेकिन फिल्मों से ज्यादा सुर्खियां उन्होंने आइटम सौन्ग के जरिये बटोरी है.

बैड पर ये है शाहिद की पत्नी की पसंदीदा पोजिशन

बौलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर और मीरा राजपूत की जोड़ी अक्सर चर्चा में बनी रहती हैं. मीरा और शाहिद ने रैंपवौक कर भी सुर्खियां बटोरी थीं. हाल ही में यह दोनों नेहा धूपिया के टौक शो ‘बीएफएफ विद वोग्स’ का हिस्सा बने थें. शो में मीरा ने अपनी लव-लाइफ से भी जुड़ी कई बातें शेयर की. शो के स्केयरी स्पाइस सेगमेंट में जब शो की होस्ट नेहा धूपिया ने मीरा से सवाल किया कि बैड पर उनकी पसंदीदा पोजिशन क्या है?

तो शाहिद ने जवाब दिए बिना ही आगे बढ़ने की सलाह पर मीरा ने कहा, “मुझे लगता है कि शाहिद कंट्रोल फ्रीक हैं.” हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब मीरा ने अपनी लव लाइफ के बारे में खुलकर बात की इसके पहले वह करण जौहर के शो कौफी विद करण में भी खुलासा किया था कि मीरा एक नेचुरल किसर हैं.

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मीरा और शाहिद की वजह से शो के होस्ट करण जौहर भी असहज महसूस करने लगे थे और कहा, आपको फ्लर्टिंग का मौका हम बाद में देंगे. करण ने अपने शो में मीरा से शाहिद की एक्स गर्लफ्रेंड्स के बारे में भी बात की थी. करण ने शाहिद से कहा, तुम चौथी बार भी लकी निकले.

जिस पर शाहिद ने कहा, ”यह आपकी गिनती है.” जिसके बाद मीरा ने पति शाहिद का पक्ष लेते हुए कहा, ”हम एक-दूसरे के बारे में सब कुछ जानते हैं.” जिसके बाद नेहा ने सवाल किया, किस बौलीवुड सेलिब्रिटी को नए स्टाइलिस्ट की जरुरत है जिस पर मीरा ने विद्या बालन का नाम लिया. नेहा ने दूसरा सवाल किया, बौलीवुड पार्टीज में सबसे बोरिंग सेलिब्रिटी कौन है मीरा ने शाहिद कपूर का नाम लिया हालांकि बाद में मीरा ने कहा, वह मजाक कर रही हैं.

एक इंटरव्यू के दौरान मीरा ने कहा, ”मैं मीशा के साथ केवल एक घंटे बीताने के बाद काम पर नहीं जा सकती. मीशा कोई पपी नहीं है. मुझे उसके लिए हर समय रहना चाहती हूं.” जिस पर बहुत लोगों को लगा कि मीरा शाहिद की एक्स गर्लफ्रेंड करीना कपूर खान पर तंज कस रही हैं क्योंकि वह प्रेगनेंसी के साथ ही काम करने की खबरों को लेकर चर्चा में थीं. जिस पर करीना ने मीडिया से बातचीत में कहा, ”मैं किस तरह की मां हूं, वह समय के साथ लोगों को पता चलेगा. मुझे लोगों को चिल्लाकर बताने की जरुरत नहीं है कि मैं तैमूर को प्यार करती हूं. हर मां और बच्चे का 9 महीने का सफर अलग होता है.”

मैं 22 वर्षीय युवती हूं. एक युवक से प्यार करती हूं. वह अकसर मुझ से सैक्स की मांग करता है. मैं क्या करूं.

सवाल
मैं 22 वर्षीय युवती हूं. पिछले एक वर्ष से एक युवक से प्यार करती हूं. वह भी मुझे काफी प्यार करता है. हम अकसर कौफी हाउस, रैस्टोरैंट वगैरा में भी साथ समय बिताते हैं. वह अकसर मुझ से सैक्स की मांग करता है, लेकिन मैं मना कर देती हूं. साथ ही जब भी मैं शादी की बात करती हूं तो वह टाल जाता है, जबकि वह अपने पैरों  पर भी खड़ा है. मैं भी जौब कर रही हूं. इधर मेरे लिए रिश्ते भी आ रहे हैं. मैं क्या करूं?

जवाब
आप जिस युवक से प्यार करती हैं उसे समझने की कोशिश करें. आखिर क्या कारण है कि वह आप से सैक्स की इच्छा तो रखता है पर शादी टाल रहा है. उस से कहें कि मेरे लिए रिश्ते आ रहे हैं. अगर वह सीरियस होगा तो अपने घर बात कर आप के पेरैंट्स के पास अपने पेरैंट्स को भेजेगा वरना समझ लीजिए कि वह टाइम पास कर रहा है.

भूल कर भी उस से सैक्स संबंध न बनाएं. जब वह संबंध बनाने की इच्छा जाहिर करे तो कहें कि पहले शादी कर ले सैक्स तो शादी के बाद ही सही रहता है. इस पर यदि वह नाराज हो तो परवा न करें वरना खुद के पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार बैठेंगी.

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सैक्स फैंटेसीज : बदल रही है लोगों की सोच

कौमेडी सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ की कहानी कई बार सैक्स फैंटेसीज दिखाने की कोशिश करती है. इस सीरियल में अनिता और विभू मिश्रा नामक पतिपत्नी एक रोमांटिक कपल है. अनीता के करैक्टर में वह कई बार समाज की सैक्स फैंटेसीज को दिखाने की कोशिश भी करती है. अनीता जब बहुत रोमांटिक मूड में होती है, तो पति विभू से कहती है कि वह किसी दूसरे रूप में प्यार करना चाहती है. कभी वह उसे प्लंबर बनने को कहती है, कभी इलैक्ट्रीशियन तो कभीकभी गुंडामवाली तक बनने को कहती है. पति विभू उसी गैटअप में आता है. वह पत्नी से उसी अंदाज में बात करता है. इस से पत्नी अनीता को बहुत खुशी महसूस होती है. वह दोगुनी ऐनर्जी से प्यार करती है. यह कौमेडी सीरियल भले ही हो, पर इस में पतिपत्नी संबंधों को बहुत ही नाटकीय ढंग से दिखाया जा रहा है.

सैक्स को ले कर महिलाओं पर रूढिवादी सोच हमेशा हावी रही है. लेकिन अब समय के साथ यह टूटने लगी है. अब पुरुषों की ही तरह महिलाएं भी सैक्स को पूरी तरह ऐंजौय करना चाहती हैं. इसे ले कर उन के मन में कई तरह के सपने भी होते हैं. अब ये बातें भी पुरानी हो गई हैं कि कौमार्य पति की धरोहर है. अब शादी के पहले ही नहीं शादी के बाद भी सैक्स की वर्जनाएं टूटने लगी हैं. शादी के बाद पतिपत्नी खुद भी ऐसे अवसरों की तलाश में रहते हैं जहां वे खुल कर अपनी हसरतें पूरी कर सकें.

परेशानियों से बचाव

सैक्स के बाद आने वाली परेशानियों से बचाव के लिए भी महिलाएं तैयार रहती हैं. प्लास्टिक सर्जन डाक्टर रिचा सिंह बताती हैं, ‘‘शादी से कुछ समय पहले लड़कियां हमारे पास आती हैं, तो उन का एक ही सवाल होता है कि उन्होंने शादी के पहले सैक्स किया है. इस बात का पता उन के होने वाले पति को न चले, इस के लिए वे क्या करें? लड़कियों को जब इस बारे में सही राय दी जाती है तो भी वे मौका लगते ही सैक्स को ऐंजौय करने से नहीं चूकतीं. शादी के कई साल बाद महिलाएं हमारे पास इस इच्छा से आती हैं कि वे शारीरिक रूप से कुंआरी सी हो जाएं.’’

विदेशों में तो सैक्स को ले कर तमाम तरह के सर्वे होते रहते हैं पर अपने देश में ऐसे सर्वे कम ही होते हैं. कई बार ऐसे सैंपल सर्वों में महिलाएं अपने मन की पूरी बात सामने रखती हैं. इस से पता चलता है कि सैक्स को ले कर उन में नई सोच जन्म ले रही है. डाक्टर रिचा कहती हैं कि शादी से पहले आई एक लड़की की समस्या को एक बार सुलझाया गया तो कुछ दिनों बाद वह दोबारा आ गई और बोली कि मैडम एक बार फिर गलती हो गई.

सैक्स रोगों की डाक्टर प्रभा राय बताती हैं कि हमारे पास ऐसी कई महिलाएं आती हैं, जो जानना चाहती हैं कि इमरजैंसी पिल्स को कितनी बार खाया जा सकता है. कई महिलाएं तो बिना डाक्टर की सलाह के इस तरह की गोलियों का प्रयोग करती हैं. कुछ महिलाएं तो गर्भ ठहर जाने के बाद खुद ही मैडिकल स्टोर से गर्भपात की दवा ले कर खा लेती हैं. मैडिकल स्टोर वालों से बात करने पर पता चलता है कि बिना डाक्टर की सलाह के इस तरह की दवा का प्रयोग करने वाले पतिपत्नी नहीं होते हैं.

बदल रही सोच

सैक्स अब ऐंजौय का तरीका बन गया है. शादीशुदा जोड़े भी खुद को अलगअलग तरह की सैक्स क्रियाओं के साथ जोड़ना चाहते हैं. इंटरनैट के जरीए सैक्स की फैंटेसीज अब चुपचाप बैडरूम तक पहुंच गई है, जहां केवल दूसरे मर्दों के साथ ही नहीं पतिपत्नी भी आपस में तमाम तरह की सैक्स फैंटेसीज करने का प्रयास करते हैं. इंटरनैट के जरीए सैक्स की हसरतें चुपचाप पूरी होती रहती हैं. सोशल मीडिया ग्रुप फेसबुक और व्हाट्सऐप इस में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. फेसबुक पर महिलाएं और पुरुष दोनों ही अपने निक नेम से फेसबुक अकाउंट खोलते हैं और मनचाही चैटिंग करते हैं. इस में कई बार महिलाएं अपना नाम पुरुषों का रखती हैं ताकि उन की पहचान न हो सके. वे चैटिंग करते समय इस बात का खास खयाल रखती हैं कि उन की सचाई किसी को पता न चल सके. यह बातचीत चैटिंग तक ही सीमित रहती है. बोर होने पर फ्रैंड को अनफ्रैंड कर नए फ्रैंड को जोड़ने का विकल्प हमेशा खुला रहता है.

इस तरह की सैक्स चैटिंग बिना किसी दबाव के होती है. ऐसी ही एक सैक्स चैटिंग से जुड़ी महिला ने बातचीत में बताया कि वह दिन में खाली रहती है. पहले बोर होती रहती थी. जब से फेसबुक के जरीए सैक्स की बातचीत शुरू की है तब से वह बहुत अच्छा महसूस करने लगी है. वह इस बातचीत के बाद खुद को सैक्स के लिए बहुत सहज अनुभव करती है. पत्रिकाओं में आने वाली सैक्स समस्याओं में इस तरह के बहुत सारे सवाल आते हैं, जिन्हें देख कर लगता है कि सैक्स की फैंटेसी अब फैंटेसी भी नहीं रह गई है. इसे लोग अपने जीवन का अंग बनाने लगे हैं.

समाजशास्त्री डाक्टर मधु राय कहती हैं, ‘‘पहले ऐसी बातचीत को मानसिक रोग माना जाता था. समाज भी इसे सही नहीं मानता था. अब इस तरह की घटनाओं को बदलती सोच के रूप में देखा जा रहा है. हमारे पास सैक्स समस्याओं पर चर्चा करने आए व्यक्ति ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ सैक्स करने में असमर्थ था. उस ने कई डाक्टरों से अपना इलाज भी करवाया, लेकिन कोई लाभ न हुआ. ऐसे में उस की पत्नी ने घर के नौकर के साथ संबंध बना लिए. एक दिन पति ने पत्नी को नौकर के साथ संबंध बनाते देख लिया. मगर उसे गुस्सा आने के बजाय अपने में बदलाव महसूस हुआ. उस दिन उस ने अपनी पत्नी के साथ खुद भी सैक्स संबंध बनाने में सफलता पाई. अब वह खुद को सहज महसूस करने लगा था.’’

तरहतरह के लोग

फेसबुक को देखने, पसंद करने और चैटिंग करने वालों में हर वर्ग के लोग हैं. ज्यादातर लोग गलत जानकारी देते हैं. व्यक्तिगत जानकारी देना पसंद नहीं करते. छिबरामऊ की नेहा पाल की उम्र 20 साल है. वह पढ़ती है. वह लड़के और लड़कियों दोनों से दोस्ती करना चाहती है. 32 साल की गीता दिल्ली में रहती है. वह नौकरी करती है. उस की किसी लड़के के साथ रिलेशनशिप है. वह केवल लड़कियों से सैक्सी चैटिंग पसंद करती है. उस की सब से अच्छी दोस्त रीथा रमेश है, जो केरल की रहने वाली है. वह दुबई में अपने पति के साथ रहती है. अपने पति के साथ शारीरिक संबंधों पर वह खुल कर गीता से बात करती है. ऐसे ही तमाम नामों की लंबी लिस्ट है. इन में से कुछ लड़कियां अपने को खुल कर लैस्बियन मानती हैं और लड़कियों से दोस्ती और सैक्सी बातों की चैटिंग करती हैं. कुछ गृहिणियां भी इस में शामिल हैं, जो अपने खाली समय में चैटिंग कर के मन को बहलाती हैं. कुछ लड़केलड़कियां और मर्द व औरतें भी आपस में सैक्सी बातें और चैटिंग करते हैं.

कई लड़केलड़कियां तो अपने मनपसंद फोटो भी एकदूसरे को भेजते हैं. फेसबुक एकजैसी रुचियां रखने वाले लोगों को आपस में दोस्त बनाने का काम भी करता है. एक दोस्त दूसरे दोस्त को अपनी फ्रैंडशिप रिक्वैस्ट भेजता है. इस के बाद दूसरी ओर से फ्रैंडशिप कन्फर्म होते ही चैटिंग का यह खेल शुरू हो जाता है. हर कोई अपनीअपनी पसंद के अनुसार चैटिंग करता है. कुछ लड़कियां तो ऐसी चैटिंग करने के लिए पैसे तक वसूलने लगी हैं. वाराणसी के रहने वाले राजेश सिंह कहते हैं, ‘‘मुझ से चैटिंग करते समय एक लड़की ने अपना फोन नंबर दिया और कहा इस में क्व500 का रिचार्ज करा दो. मैं ने नहीं किया तो उस ने सैक्सी चैटिंग करना बंद कर दिया.’’

इसी तरह से लखनऊ के रहने वाले रामनाथ बताते हैं, ‘‘मेरी फ्रैंडलिस्ट में 4-5 लड़कियों का एक ग्रुप है, जो मुझे अपने सैक्सी फोटो भेजती हैं. मेरे फोटो देखना भी वे पसंद करती हैं. कभीकभी मैं उन का नैटपैक रिचार्ज करा देता हूं. इन से बात कर मैं बहुत राहत महसूस करता हूं. मुझे यह अच्छा लगता है, इसलिए मैं कुछ रुपए खर्च करने को भी तैयार रहता हूं.’’ फेसबुक के अलावा अब व्हाट्सऐप पर भी इस तरह की चैटिंग होने लगी है.

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