छुआछूत के शिकार दलित, नहीं काटे जाते बाल

मोबाइल फोन, टैक्नोलौजी और इंटरनैट से बहुतकुछ बदला है, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वह है पिछड़ी जातियों व दलितों से भेदभाव की सोच. यों तो दलितों से भेदभाव की खबरें देशभर में होती रही हैं, लेकिन एक बड़ी हकीकत चौंकाती है. एक गांव ऐसा भी है, जहां गांव के हज्जाम दलितों के बाल नहीं काटते. यह किस्सा साल 2 साल का नहीं, बल्कि पीढि़यों से चली आ रही एक शर्मनाक परंपरा का है.

यह किस्सा दुनिया के सब से बड़े लोकतंत्र की राजधानी दिल्ली से तकरीबन सवा सौ किलोमीटर दूर नैशनल हाईवे नंबर 58 के नजदीक की वह कड़वी सचाई है, जिस से लोग रूबरू हो रहे हैं. यह उन सरकारी योजनाओं, सोच और बड़ी बयानबाजियों पर भी चोट है, जिन के जरीए समान अधिकारों से ले कर भेदभाव का जड़ समेत उखाड़ने की ताल छोटेबड़े मंचों पर ठोंकी जाती है. उत्तर प्रदेश राज्य के मुजफ्फरनगर जिले की खतौली तहसील के इस गांव का नाम है भूपखेड़ी. गांव की आबादी तकरीबन 4 हजार है, जिन में ज्यादातर अगड़ी जातियां हैं. इन में दलितों की तादाद 3 सौ के आसपास है. गांव के दलितों को हज्जाम के यहां बाल कटाने या हजामत बनवाने की इजाजत नहीं है. अगर कभीकभार वे कोशिश भी करते हैं, तो उन्हे बेइज्जत कर के भगा दिया जाता है.

दरअसल, गांव में अछूत होने के डर से बाल न काटने का सिलसिला सालों पुराना है. इस गांव के दलित दूसरे गांवों में बाल कटवाने के लिए जाते हैं. ठाकुर जाति की नई ग्राम प्रधान अनीता देवी ने इस भेदभाव को खत्म करने की ठानी. उन्होंने अपने पति मान सिंह को भी आगे किया और गांव में हज्जाम की दुकान चलाने वाले से बात की, तो उस ने दलितों के बाल काटने से इनकार कर दिया. उस का कहना था कि दूसरे ठाकुर इस के लिए मना करते हैं. उस के पिता या दादा ने भी कभी दलितों के बाल नहीं काटे, तो फिर वह ऐसा क्यों करे?

कुछ दलित इकट्ठा हो कर बाल काटने पहुंचे, तो उन के साथ गालीगलौज की गई. साथ मिलने से दलितों को हौसला बढ़ा, तो उन्होंने बाकायदा इस की लिखित शिकायत थाना रतनपुरी में की, लेकिन पुलिस का रवैया निराशाजनक रहा. उस ने कोई कार्यवाही करने के बजाय तहरीर ले कर रख ली. नतीजतन, गांव में दोनों बिरादरियों में तनाव हो गया. दलितों ने कलक्टर को भी ज्ञापन दिया. पुलिस प्रशासन ने इस भेदभावपूर्ण परंपरा को तोड़ने की कोशिशों में जुटे दलितों को सहारा देने या ठोस हल निकालने के बजाय कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसलिए गांव में पुलिस को तैनात कर दिया. हज्जाम पर दलितों ने दबाव बनाया, तो उस ने दलितों के बाल काटने के बजाय दुकान बंद करना बेहतर समझा. उस ने साफ कर दिया कि कई ठाकुर ऐसा नहीं चाहते. ऐसी परंपरा पर पुलिस वाले भी हैरानी जताते हैं. गांव के दलितों को यह भेदभाव लंबे अरसे से कचोटता रहा है, लेकिन गांव में ठाकुर बिरादरी के लोग ज्यादा हैं, इसलिए कोई विरोध नहीं कर पाता. अछूत होने का डर भले ही हो, लेकिन गांव के दलित ठाकुरों के खेतों में मजदूरी भी करते हैं. दलितों की यह मजदूरी व छोटीमोटी नौकरी ही कमाई का जरीया है.

गांव के एक 90 साला दलित बुजुर्ग भिखारीदास से जब पूछा गया कि उन्हें याद है कि उन्होंने आखिरी बार गांव में बाल कब कटवाए, तो उन्होंने बताया कि जब पहली बार ही यहां बाल नहीं कटे, तो आखिरी बार कैसे कटेंगे. उन की बूढ़ी आंखों में बेबसी के साथ वह उम्मीद भी नजर आती है, जिस से दलितों को भेदभाव से छुटकारा मिल जाए. इसी गांव के दलित ऋषिपाल और उस की पत्नी शारदा कहते हैं कि उन्होंने अपने बच्चों के बाल कटवाने की कोशिश भी की, लेकिन अछूत होने का डर उन में भी था. शारदा जब कभी अपने बच्चों को हज्जाम की दुकान पर ले कर गई, तो खरीखोटी सुना कर चलता कर दिया गया. 45 साल के सलेख की 6 बेटियां और 2 बेटे हैं. न कभी उस के बाल गांव में कटे हैं और न उस के बच्चों के. बुजुर्ग मंगली को ऊंचा सुनाई देता है, लेकिन हर हलचल से वे वाकिफ हैं. इशारों और बातों में वे हमउम्र लोगों से इस पर चर्चा भी करते हैं. उन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. वे कहते हैं कि पता नहीं, हज्जाम उन के बाल क्यों नहीं काटता? बाल कटाने की कोशिश करने पर मिली झिड़कियां उन्हें भी याद हैं.

दलित सुनील मजदूरी करता है. वह कहता है कि जब वह मजदूरी के लिए किसी दूसरी जगह जाता है, तो वहीं बालों की कटिंग करा लेता है. गांव में बाकी लोगों का हाल देख कर उस ने कभी कोशिश भी नहीं की. 70 साला जहरू और 55 साला सोमबीर भी ऐसे ही किस्से बयां करते हैं. साथ ही, वे सवाल भी करते हैं कि आखिर उन का गुनाह क्या है? उन्हें भी बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए. गांव का संजीव नामक नौजवान बीडीसी मैंबर है. वह गलत परंपरा को तोड़ना चाहता है, लेकिन कामयाब नहीं हो पा रहा है. गांव के नितिन वालिया, अभिषेक, प्रियांशु, प्रकाश, राजीव, प्रवेश, अवनीश, सुशील व रामभूल सभी इस परंपरा के खिलाफ हैं. वे इसे तोड़ना भी चाहते हैं. भेदभाव उन्हें हर वक्त कचोटता है.

ऐसा नहीं है कि आसपास के नेताओं को दलितों के इस भेदभाव की खबर नहीं है, बल्कि दलित उन के लिए महज वोटों का जरीया हैं. लोग बताते हैं कि चुनाव के समय नेता उन के महल्ले में आते हैं, तब वे बहुत अपनापन दिखाते हैं. बस, उसी वक्त लगता है कि गांव में कोई भेदभाव या ऊंचनीच की दीवार नहीं है. प्रधानपति मान सिंह का कहना है कि वे इस भेदभाव को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें खुद ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है. इस पूरे मामले में प्रशासनिक रवैया ढुलमुल है. सवाल है कि सालों से चली आ रही बुराई से दलितों को नजात कैसे मिले? उस के लिए क्या कोशिश की जाए?

मौत का सामान बेचते फिल्मी सितारे

दानेदाने में केसर का दम : अजय देवगन.

इसे खाओ और थोड़ा करीब आ जाओ : शाहरुख खान.

यह पहचान है कामयाबी की : सैफ अली खान.

आप जैसे शौकीनों के लिए मेरा नजराना : मनोज बाजपेयी.

शानोशौकत का नया अंदाज : गोविंदा.

जो भी खाए दीवाना बन जाए : असरानी.

बौलीवुड के कई बड़े कलाकार मीडिया में इश्तिहारों के जरीए स्वाद का बखान कर लोगों को पान मसाले का शौक फरमाने का औफर दे रहे हैं. देश की सब से बड़ी अदालत द्वारा गुटका (तंबाकू और कई जहरीली चीजों से बने मिश्रण) पर रोक लगाए जाने के बाद पान मसाला बनाने वाली कंपनियों के कारोबार धीमे पड़ने लगे थे. ऐसे में इन कंपनियों ने एक बड़े पैकेट में पान मसाला और उस के साथ में छोटे पैकेट में तंबाकू बेचना शुरू कर दिया. पान मसाला बेचने वाली कंपनियों ने और ज्यादा नोट बटोरने के लिए बौलीवुड के बड़ेबड़े सितारों को अपनी कंपनी का ब्रांड अंबैसडर बना कर उन से अपना प्रचार कराना शुरू कर दिया. देश के ज्यादातर नौजवान बौलीवुड के कलाकारों को अपना रोल मौडल मानते हैं. ऐसे में सितारों द्वारा पान मसाले के इश्तिहार को देख कर वे पान मसाले की ओर भी तेजी से खिंचने लगे हैं. एक हैल्थ सर्वे के मुताबिक, देश की 35 फीसदी आबादी पान मसाले का सेवन करती है. आज पान मसाले का कारोबार 10 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा का है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तरह से पान मसाला खाने वालों की तादाद बढ़ी है, उसी तरह देश में मुंह के कैंसर में भी तेजी से इजाफा हुआ है. जानकारों के मुताबिक, मुंह के कैंसर की सब से बड़ी वजह पान मसाले का ज्यादा सेवन मानी गई है. भारत में मुंह का कैंसर बड़ी नाजुक हालत में पहुंच चुका है. अंदाजा यह लगाया जा रहा है कि अगर इसी तरह से मुंह के कैंसर से पीडि़तों की तादाद बढ़ती रही, तो आने वाले दिनों में भारत में मुंह के कैंसर के मरीजों की तादाद सब से ज्यादा होगी.

दिलचस्प बात यह है कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तंबाकू से होने वाले बुरे नतीजों के बारे में जानकारी देने के लिए जनजागृति मुहिम चलाई जाती है, जिस में हर साल करोड़ों रुपए खर्च होते हैं. वहीं दूसरी ओर सरकार इस पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए कदम नहीं उठा रही है. पान मसाले के इश्तिहार किसी मशहूर व ग्लैमरस हस्ती से जोड़ कर तैयार किए जाते हैं. कोई नौजवान जब रंगीन चमकीली पन्नी में भरे पान मसाले को निकाल कर बड़े स्टाइल से हथेली पर डालता है, उस वक्त उस के दिमाग में पूरी तरह से बौलीवुड के बड़े कलाकारों की इमेज छाई होती है. वह इस से होने वाले खतरनाक नतीजों को भूल कर उस का सेवन करता रहता है. पान मसाले का सेवन करने वाले कुछ नौजवानों से पूछा गया कि वे पान मसाला क्यों खाते हैं? इस के जवाब में ज्यादातर नौजवानों का यही कहना था कि जब सुपरस्टार इन्हें खा सकते हैं, तो वे क्यों नहीं?

समाजशास्त्री और मनोवैज्ञानिक युवराज दुबे का कहना है, ‘‘आज की नौजवान पीढ़ी बौलीवुड के कलाकारों को अपना रोल मौडल मानती है. अपने रोल मौडल द्वारा जिस किसी चीज का गुणगान किया जाता है, वह उन्हें भाने लगता है. वह उन चीजों को खरीदने लगता है. ऐसे में रोल मौडल द्वारा पान मसाले का गुणगान भी उन्हें भाता है. वे अपने रोल मौडल की पसंद को अपनी पसंद बनाने लगते हैं. ‘‘ऐसे इश्तिहारों पर रोक लगनी चाहिए, जिस में बौलीवुड के कलाकार पान मसालों की खूबियां बताते नजर आते हैं. इस वजह से नौजवान इस के प्रति ज्यादा खिंचते हैं, जिस का नतीजा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है.’’

युवा छात्र नेता विनोद सिंह का कहना है, ‘‘बड़े फिल्म कलाकारों द्वारा इश्तिहारों में पान मसालों का गुणगान करते देख मेरे दिमाग में यह बात आती है कि जब शाहरुख खान और अजय देवगन भी पान मसाला खा सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं खा सकता?’’

सामाजिक कार्यकर्ता डा. एम. कुमार का कहना है, ‘‘फिल्मी कलाकारों द्वारा पान मसाले का इश्तिहार करने की वजह से नौजवान तेजी से इस ओर खिंचता है. बौलीवुड के कलाकारों को सामाजिक जिम्मेदारी पर भी ध्यान देना चाहिए. उन्हें ऐसे इश्तिहारों से दूर रहना चाहिए.’’

पान मसाला कंपनी के इश्तिहार बनाने वालों का मानना है कि आज की जनता बेवकूफ नहीं है. वह काफी समझदार है. उसे अच्छी और बुरी चीजों के बारे में सबकुछ पता है. पहली बात तो यह है कि उन के इश्तिहार बौलीवुड के बडे़ कलाकार पान मसालों की पब्लिसिटी कर रहे हैं, न कि गुटका या तंबाकू की. पान मसाला एक तरह का माउथ फ्रैशनर है. भारत में खाना खाने के बाद इस का इस्तेमाल किया जाता रहा है. जबकि सच यही है कि इश्तिहार कंपनियों द्वारा उपभोक्ता कानून के साथ खिलवाड़ कर बेहद चालाकी के साथ पान मसालों के इश्तिहार तैयार कर नौजवानों को भरमाया जा रहा है. इस में बौलीवुड इंडस्ट्री के कलाकारों द्वारा भरपूर साथ दिया जा रहा है.

श्मशानघाट का सौंदर्यीकरण : यही से होते हैं टेक औफ

पहले अर्थी को कंधा देना नेक कार्य माना जाता था पर अब औपचारिकता हो गई है. अब तो घर से मुक्तिवाहन तक और श्मशान घाट के प्रवेशद्वार से चितास्थल तक सांकेतिक कंधे देना प्रचलन में आ गया है. अधिकांश मुक्तिवाहन नगरनिगम के ‘राइटअप’ हो चुके ट्रकों का परिमार्जित संस्करण होते हैं. शहरों के बेतरतीब विकास को देख कर लगता है कि इन का विकास श्मशान घाट यानी कब्रिस्तान को केंद्र मान कर किया गया है. आदमी कहीं जाए या न जाए, पर यहां तो सभी को आना है. जैसे शासन की नीति है कि स्कूल सभी को जाना है, वैसे ही आदमी की नियति है कि अंत में सभी को यहीं आना है. जिस प्रकार 2 किलोमीटर के दायरे में प्राइमरी स्कूल का शासकीय प्रावधान है, जिस से बच्चों को अधिक न चलना पड़े, वैसे ही 5 किलोमीटर के दायरे में श्मशान केंद्र होना चाहिए, जिस से ले जाने वालों को आत्मिक शांति मिल सके, जाने वाला तो चिरशांति को प्राप्त हो ही जाता है.

ऐसे ही, मुक्तिधाम की यात्रा पर दिवंगत पिताजी की अर्थी को ले कर मुक्तिवाहन से मंत्रीजी रवाना हुए. अभी कुछ ही आगे बढ़े थे कि अर्थी हिली, एक चमचा प्रकार का प्राणी बोला, ‘‘माननीय पिताजी लौट आए.’’ सभी अर्थी को देखने लगे, मंत्रीजी ने माथा छुआ, ठंडा था, नाक के आगे उंगली की, श्वास नदारद. वे गमगीन हो गए. इतने में अर्थी के साथसाथ वाहन में सवार अन्य लोग भी हिले, फिर तो हिलनेडुलने का सिलसिला चल निकला. किसी ने पंडितजी से पूछा, ‘‘पंडितजी, पिताजी स्वर्ग ही गए हैं न?’’ पंडितजी बोले, ‘‘सौ प्रतिशत, कनागत में प्राण छोड़े हैं, स्वर्ग के दरवाजे खुले मिलेंगे.’’

‘‘पर, स्वर्ग का रास्ता बहुत खराब है,’’ मंत्रीजी धीरेधीरे बोले. ‘‘आप के हाथ में है श्रीमान. आप वसुधा के इंद्र हैं, यहां पर स्वर्गमार्ग का निर्माण कर सकते हैं. इहलोक के साथसाथ परलोक में भी आप की कीर्तिपताका फहरेगी,’’ पंडितजी ने प्रशस्तिवाचन किया.

मंत्रीजी विचारमग्न हो गए. उन्हें इस घटना ने अंदर तक हिला दिया. जैसेतैसे अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, तेरहवीं भी धूमधाम से संपन्न हुई. प्रशासन ने मंत्रीजी की भावनाओं के अनुरूप स्वर्गमार्ग के निर्माण की योजना प्रस्तुत की जो शासन द्वारा स्वीकृति को प्राप्त हुई. स्वर्गमार्ग का प्रचार जोरशोर से किया गया- ‘संवेदनशील शासन की पहचान, अब स्वर्ग जाना आसान.’ मार्ग के शुभारंभ हेतु माननीय मंत्रीजी के साथ प्रशासन व सम्माननीय नागरिक श्मशान घाट में उपस्थित थे. यहां की समस्याओं के समाधान हेतु यहीं बैठक आयोजित की गई. वरिष्ठ संघ के अध्यक्ष ने माइक संभाला और बोले, ‘‘राजा हो, रंक हो, सभी को यहां आना है. यह हमारे शासन की, माननीय मंत्रीजी की संवेदनशीलता है कि वे मुर्दों की भी चिंता करते हैं. जिंदा लोग तो अपनी यात्रा कैसे भी पूरी कर लेते हैं, पर मुर्दा बेचारा क्या कर सकता है? न चल सके, न बोल सके? कैसे अपनी व्यथा कहे? उस की व्यथा को शासन ने अनुभूत किया और हमारे आदरणीय मंत्रीजी के सदप्रयासों से यह शुभ घड़ी आई. हम उन्हें हार्दिक धन्यवाद देते हैं कि अब हम निश्ंिचत हो कर मर सकेंगे, धन्यवाद.’’

श्मशान घाट तालियों से गूंज उठा, एक आक्रोशित युवा नागरिक ने माइक पकड़ा और बोला, ‘‘सर, यह तो ठीक है पर हमें यहां की समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए. हम यहां आते हैं, कभीकभी हमें एकदो घंटे इंतजार भी करना पड़ता है. समय ही सोना है, जिन्हें सोना था वे तो हमेशा के लिए सो गए, पर हमें समय का सदुपयोग करना सीखना होगा. श्मशान घाट में एक साइबर कैफे हो, जिस से समय का सदुपयोग हो सके.’’

‘‘अवश्य, तुम्हारा मन नहीं भटकेगा, चैटिंग भी होगी और सैटिंग भी, दुख से प्रभावित नहीं होंगे, अच्छा सुझाव है,’’ नगीना बाबू बोले. ‘‘पुराने लोग, पुरानी बातें,’’ कुछ नवयुवक एकसाथ बोले.

‘‘शांत युवको, शांत. आप तरुण हैं, आप वर्तमान हैं, ये अतीत,’’ मंत्रीजी अब बुजुर्गवार की ओर देखते हुए बोले, ‘‘इन की सुननी पड़ेगी, चाचा, साइबर कैफ का सुझाव अच्छा है. और कोई सुझाव युवको?’’ ‘‘सर, स्वर्ग में एक स्पा भी खुल जाए तो अच्छा रहे, यहीं से फ्रैश हो कर बाहर निकलें,’’ एक आधुनिक युवक बोला.

‘‘स्विमिंग पूल और भी अच्छा रहेगा, नहाने के साथ ऐक्सरसाइज भी हो जाएगी.’’ ‘‘सत्य वचन’’, पंडितजी ने समर्थन किया, फिर बोले, ‘‘श्मशान घाट जाने से व्यक्ति अशुद्ध हो जाता है. पूर्वकाल में घाट पर स्नान करने का विधान था. घाट शब्द इसी का सूचक है, जैसे नर्मदा के घाट, गंगा के घाट वैसे ही श्मशान घाट, यहां मृत शरीर अग्नि स्नान करता है और हम जल स्नान.’’

तभी मंत्रीजी को किसी ने एक पर्ची थमा दी, पढ़ कर वे गंभीर स्वर में बोले, ‘‘भाइयो और बहनो, आवागमन निरंतर प्रक्रिया है, कल हम वहां थे, आज यहां हैं, कल कहां होंगे, कुछ नहीं पता.’’ एक अंतिम यात्रा का जुलूस वहां से गुजरा. मंत्रीजी भावविह्वल हो गए, ‘‘ये जो हमें छोड़ कर जा रहे हैं, हमारे बचपन के मित्र हैं.’’ फिर पर्ची देखते हुए बोले, ‘‘रामदयाल जी, राम की इन पर दया हो गई, अपने पास बुला लिया. हमें अभी और भुगतना है, सो, हम यहां हैं. इन के बेटे, हो सकता है, हमें न जानते हों, पर हम जानते हैं. मैं ने इन्हें बचपन में खिलाया है.’’ ‘प्रभु, आप अंतर्यामी हैं, घटघट वासी हैं,’ नगीना बाबू मन ही मन बोले फिर कहा, ‘‘आप को कौन नहीं जानता, मान्यवर. यहां का एकएक वोटर जानता है. किसी महान आत्मा ने ही यह नश्वर शरीर धारण किया है श्मशान को आबाद करने के लिए.’’

‘‘यह समय महिमामंडन का नहीं, हम श्रद्धांजलि दे कर आते हैं,’’ कहते हुए मंत्रीजी ने मृतशरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की, हाथ जोड़े, आंखें बंद कीं, सिर झुकाया. अभी तक राम नाम सत्य है, के नारे लग रहे थे, एकाएक नारों का स्वर बदला, अब ‘मंत्रीजी जिंदाबाद, रामदयाल अमर रहें. मंत्रीजी संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं, मंत्रीजी अमर रहे,’ के नारे लगने लगे. ‘मंत्रीजी अभी मरे कहां हैं, जो अमर रहेंगे,’ नगीना बाबू सोच रहे थे.

मंत्रीजी नारों से ऊर्जा ग्रहण कर रहे थे. ऊर्जा अश्रुरूप में बह निकली. सभी भावविह्वल हो गए. रामदयाल के पुत्र व सगेसंबंधी अचंभित थे कि पापा की मित्रता मंत्रीजी से थी और उन्होंने बताया भी नहीं, कितने सिद्धांतवादी थे, मित्रता का दुरुपयोग नहीं किया. 2 बेरोजगार बेटे और एक कुंआरी बेटी छोड़ कर गए. किसी से कुछ नहीं मांगा. बेटों के हृदय में आशा की किरण फूटी. संवेदना जागी. मंत्रीजी की ओर देखते हुए वे रो पड़े, ‘‘चाचाजी, पापा तो रहे नहीं, अब आप ही सहारा हैं.’’ ‘‘बिलकुल, कभी भी आ जाना, हम हैं न,’’ मंत्रीजी ने दिलासा दी.

रामदयाल के बड़े भैया गंभीर हो गए. उन्होंने मंत्रीजी की बचपन की शक्ल याद करने की कोशिश की. असफल रहे तो हाथ जोड़ कर बोले, ‘‘भैया रामू तो रहा नहीं, अब तुम्हीं हो, तुम्हारी दोस्ती की चर्चा तो गलीगली में थी, क्या जोड़ी थी सुदामाकृष्ण की. रामू जातेजाते कह गया था, ‘भैया, हर काम का शुभारंभ मंत्रीजी करते हैं. अगर मैं मर जाऊं तो मुझे पहली लकड़ी मेरा दोस्त मंत्री दे, उसे भी याद आ जाएगा रामदयाल नहीं रहा.’ ’’

मंत्रीजी अचकचा गए. फिर बात संभालते हुए बोले, ‘‘हम किसी का अधिकार नहीं छीनते. लकड़ी देने का पहला अधिकार पुत्र को है. वही देंगे. जल्दी करें, विलंब अच्छा नहीं. राम नाम सत्य है.’’ यह कह कर मंत्रीजी ने हाथ जोड़े. वह अंतिम यात्रा आगे बढ़ गई. मंत्रीजी वापस लौट आए, फिर सिर उठा कर बोले, ‘‘सब नियति है, जो होना था, होगा पर शो मस्ट गो औन. हां, आगे कहिए?’’

‘‘सर, साइबर कैफे, स्विमिंग पूल तो ठीक हैं, पर बजट में प्रावधान नहीं है,’’ नगर निगम के अधिकारी बोले. ‘‘सड़क का प्रावधान था क्या? पर बन रही है न. सब हो जाएगा. आप सोचिए मत, सोचने का काम हमारा है. आप आदेशों का पालन करें. हमारे यहां सोचने की बहुत बुरी बीमारी है. चपरासी सोचता है औफिस हम चला रहे हैं. साहिब सोचते हैं हम, समय कहता है सब हम से चलता है,’’ मंत्रीजी ने समझाया.

‘और आप समझते हैं कि देश हम चला रहे हैं. वह तो रामभरोसे चल रहा है,’ अधिकारी मन ही मन कुड़कुड़ाते हुए सोच रहा था, प्रत्यक्ष में बोला, ‘‘सर, ठीक है.’’ ‘‘पंडितजी, आप बताइए, आप तो श्मशान आते ही रहते हैं,’’ मंत्रीजी ने बात आगे बढ़ाई.

‘‘देखिए श्रीमान, हम ने अभी तक 15,001 शरीरों का अंतिम संस्कार कराया है.’’ ‘‘फिर तो आप गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स में प्रविष्टि क्यों नहीं भेज देते,’’ नगीना बाबू ने सुझाव दिया.

पंडितजी मुसकराए, ‘‘यह तो हमारा कर्म है, सांसारिक वस्तुओं से हमें क्या? हमारे यजमान हमें जीवित होने पर देते हैं और उन की संतानें मृत्यु पश्चात. श्रीमानजी, आप जैसे पुरुष मिलते कहां हैं? एक सत्यवादी हरिश्चंद्र थे जिन्होंने श्मशान अपनाया और एक आप कलियुग के हरिश्चंद्र. आप धन्य हैं. शास्त्रों में लिखा है, मुत्युपरांत आत्माएं कुछ समय यहीं निवास करती हैं. देखिए कैसा वीरान है यह घाट, हमारे पूर्वजों की आत्माएं कितना कष्ट उठाती होंगी? क्यों न इस के सौंदर्यीकरण की सोची जाए, जिस से आत्माओं को अच्छा वातावरण मिल सके.’’ ‘‘क्यों नहीं, क्यों नहीं? अवश्य, अच्छा सुझाव है. बताइए, कितनी जमीन है, क्या व्यय आएगा?’’ मंत्रीजी ने पूछा.

‘‘सर, 20 एकड़, एक एकड़ में क्रियाकर्म, सभाएं होती हैं, जीवंत हैं, शेष 19 एकड़ अनुपयोगी है, मृतप्राय है,’’ नगरनिगम अधिकारी बोले. ‘‘इस मृतप्राय जमीन का इलाज किया जाए, इस में प्राण फूंके जाएं?’’ मंत्रीजी बोले.

‘‘सर, पैसा? निगम घाटे में है,’’ अधिकारी ने हस्तक्षेप किया. ‘‘आप यहां के हैं नहीं, आप क्या जानें यहां का दर्द, काम में अड़ंगे न लगाएं, पैसे का इंतजाम हम करेंगे,’’ मंत्रीजी तल्ख लहजे में बोले.

तभी एक सूटबूटधारी उठ कर बोला, ‘‘सर, मैं डैवलपमैंट वर्ल्ड का सीनियर कंसल्टैंट, हमारे प्रोजैक्ट रशिया, लेटिन अमेरिका, फ्रांस जैसे 50 देशों में चल रहे हैं. इंडिया में हम ने इंट्रोड्यूज किया है. पीपीपी मोड, यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में यहां डैवलपमैंट किया जा सकता है. जमीन हमारी, डैवलपमैंट उन का, साथ में आय भी, 19 एकड़ लैंड वह भी सिटी के सैंटर में, मौल बन सकता है, औफिस खुल सकते हैं. श्मशान घाट चमन हो जाएगा. ब्यूटीफुल श्मशान. फाउंटेन लग जाएंगे, आत्माएं लोग नहाएंगी, साइलैंट जोन डैवलप करेंगे, जोनल प्लानिंग ठीक रहेगी, क्रिएशन जोन, इंटरटेंमैंट जोन, बिजनैस जोन, मीटिंग जोन, सबकुछ. जब अर्थी श्मशान घाट में प्रवेश करेगी, फूलों की वर्षा होगी. सर, इट्स अ ब्यूटीफुल आइडिया, ग्रेट. यू आर ग्रेट. हाऊ सैंसिबल यू आर. आदेश हो तो प्रोजैक्ट तैयार करें.’’

सभी मंत्रमुग्ध हो कर सुन रहे थे. मंत्रीजी नगरनिगम के अधिकारी को समझाते हुए बोले, ‘‘देखो, जहां चाह, वहां राह, पैसे का भी इंतजाम हो गया. चलिए, टैंडर निकालिए, कुछ सीखें, विजन बढ़ाएं, संसार में क्या हो रहा है, देखें. फाइल के कीड़े न बनें. चलिए, प्रोजैक्ट बनाएं, सब का आभार.’’ और मंत्रीजी उठ गए. ‘यह पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप क्या होती है?’ नगीना बाबू सोच रहे थे.

130 मिस्ड काल का रहस्य

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एक तहसील है मोहनलालगंज, जो लखनऊ से 23 किलोमीटर दूर है. तहसील में कोषागार यानी ट्रेजरी होने की वजह से वहां सिपाहियों की ड्यूटी लगती है. उस रात कोषागार की सुरक्षा के लिए सिपाही रामकिशोर और रामप्रकाश वर्मा की ड्यूटी थी.

रात ढाई बजे के करीब सिपाही रामकिशोर की नींद खुली तो वह लघुशंका के लिए बाहर निकला. उस की नजर तहसील परिसर में बने कुएं की ओर गई तो उस ने देखा कि कुएं के ऊपर लगे लोहे के जाल पर उस का साथी सिपाही रामप्रकाश वर्मा लटक रहा है.

यह देख रामकिशोर स्तब्ध रह गया. उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. रामप्रकाश वर्मा बहुत ही खुशदिल युवा सिपाही था. उस से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी. रामकिशोर कुएं के नजदीक पहुंचा तो पता चला कि मफलर का फंदा बना कर रामप्रकाश वर्मा ने आत्महत्या कर ली है.

कोतवाली परिसर में सिपाही द्वारा आत्महत्या करने की घटना ने उसे परेशान कर दिया. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. उस ने यह बात कोतवाली जा कर सभी को बताई. घटना के बारे में पता चलते ही इंसपेक्टर धीरेंद्र प्रताप कुशवाहा और सीओ राजकुमार शुक्ला वहां पहुंच गए.

सिपाही की लाश देख कर हंगामा मच चुका था. तरहतरह की बातें होने लगी थीं. लोगों को लगा कि किसी दुश्मन ने सिपाही को मार कर इस तरह लटका दिया है. पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका. इस के बाद पुलिस रामप्रकाश के बारे में व्यक्तिगत जानकारी जुटाने में लग गई.

रामप्रकाश वर्मा उत्तर प्रदेश के जिला प्रतापगढ़ के भोगापुर गांव का रहने वाला था. वह मध्यमवर्गीय परिवार का था. घर वालों को उस से बहुत उम्मीदें थीं. सन 2015 में 21 साल की उम्र में रामप्रकाश वर्मा की भरती उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के रूप में हुई थी. वह उपासना नाम की एक लड़की (बदला हुआ नाम) से प्यार करता था. उस ने उपासना से वादा किया था कि नौकरी लगते ही वह उस से शादी कर लेगा.

उपासना और रामप्रकाश वर्मा की शादी में परेशानी यह थी कि दोनों अलगअलग जाति के थे, जिस की वजह से उपासना के घर वाले रामप्रकाश वर्मा से उस की शादी के लिए तैयार नहीं थे. शादी को ले कर दोनों के बीच कभीकभी झगड़ा भी हो जाता था.

रामप्रकाश की मौत के बाद आसपास रहने वालों ने बताया कि पिछली रात वह बारबार किसी को फोन कर रहा था और बेचैन सा इधरउधर घूम रहा था. पुलिस ने रामप्रकाश वर्मा का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले कर जांच की तो पता चला कि उपासना के नंबर से शाम 8 बज कर 38 मिनट से ले कर रात 11 बज कर 51 मिनट तक 130 बार काल की गई थीं. मोबाइल से साफ पता चल रहा था कि रामप्रकाश वर्मा ने उस से बात नहीं की थी. उपासना के नंबर से 7 मैसेज भी आए और रामप्रकाश ने भी 17 मैसेज किए.

पुलिस को रामप्रकाश के फोन में एक रिकौर्डिड मैसेज भी मिला. यह रात को 11 बज कर 33 मिनट पर रिकौर्ड हुआ था. मैसेज में कहा गया था, ‘तुम मुझे भूल जाना. हम मर जाएंगे, जो होगा वह तुम्हें सुबह पता चल जाएगा.’

सिपाही रामप्रकाश वर्मा की जेब से पुलिस को एक लवलेटर भी मिला. यह उपासना का लिखा हुआ था, जिस में कहा गया था, ‘तुम मुझे भूल जाना.’ जानकारों के मुताबिक रामप्रकाश वर्मा और उपासना को यह पता चल चुका था कि परिवार वालों की मरजी से उन की शादी नहीं हो सकती. इसलिए वे एकदूसरे को भूल जाने की सलाह दे रहे थे. रामप्रकाश को जब उपासना का पत्र मिला तो वह दुखी हो गया. इस के बाद उस ने तय किया कि अब वह उस से बात नहीं करेगा.

उपासना को लग रहा था कि पत्र पा कर उस को दुख होगा, क्योंकि वह बहुत ही सीधा सरल और भावुक था. ऐसे में वह कोई भी फैसला ले सकता था. इसी डर से वह रामप्रकाश को बारबार फोन कर रही थी. रामप्रकाश को लग रहा था कि अगर अब उस ने बात की तो वह अपने मन के भावों को छिपा नहीं पाएगा. ऐसे में उस के सामने एक ही रास्ता था कि वह आत्महत्या कर ले.

गुस्से में उसे यह भी नहीं सूझ रहा था कि इस बात को कैसे बताए. अंतत: उस ने रिकौर्डिड मैसेज में उपासना को यह बात बताई. अपनी बात कहने के बाद रामप्रकाश ने गले में मफलर का फंदा डाल कर आत्महत्या कर ली.

रामप्रकाश की मौत की जिम्मेदार जातिवादी सोच है. आज भी समाज में ऊंचीनीची जाति का फर्क बना हुआ है. इस के साथ ही जिन परिवारों के बच्चे सरकारी नौकरी में आ जाते हैं, उन की प्रतिष्ठा बढ़ जाती है. उन के परिवार वाले दिल में दहेज की चाहत ले कर बैठ जाते हैं. सामाजिक प्रतिष्ठा, दहेज और जातिवाद जैसी सोच हमारे समाज में अभी भी दिलों में गहरे तक बैठी है.

यही वजह है कि युवा अपनी पसंद की शादी नहीं कर पाते. कुछ मामलों में जब लड़के या लड़की की मनपसंद शादी नहीं हो पाती तो वे भावुक हो कर आत्महत्या जैसे फैसले कर लेते हैं. रामप्रकाश वर्मा के सामने यही परेशानी थी. वह योग्य था, उपासना को पसंद था, पर उपासना के घर वाले रुढि़वादी सोच का शिकार थे. ऐसे में वह उस से अपनी लड़की की शादी करने को तैयार नहीं थे.

रामप्रकाश अपनी इस सोच के आगे खुद को मजबूर पा रहा था. ऐसे में वह न तो उपासना को कुछ कह पा रहा था और न ही खुद कुछ कर पा रहा था. आखिर उस ने परेशान हो कर खुद की जान देने का फैसला कर लिया.

रामप्रकाश वर्मा की मौत ने एक बार फिर से यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि योग्य लड़के भी मानसिक दबाव का शिकार हो कर मौत को गले लगा रहे हैं. जबकि आमतौर पर यह समझा जाता है कि केवल टीनएज लड़के ही प्रेम संबंधों के दबाव में आ कर आत्महत्या जैसे फैसले कर लेते हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कुछ पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं.

बिकिनी पोस्ट की वजह से ट्रोल की शिकार हुईं मलाइका अरोड़ा

मलाइका अरोड़ा ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ बिकिनी की तस्वीरें शेयर की हैं, जिसके लिए उन्हें ट्रोल किया जा रहा है. ये तस्वीरे समर वेकेशन की है. जिसमें वो बिकनी में स्विमिंग करती नजर आ रही हैं. इन फोटोज को जहां 1.15 लाख लोगों ने लाइक किया. वहीं कुछ यूजर्स ऐसे भी थे जो मलाइका की बिकनी तस्वीर देख नाराज हुए और उन्हें ट्रोल करना भी शुरू कर दिया.

तुलिका नाम की एक यूजर ने लिखा- एक मां बिकिनी में ऐसी फोटो कैसे पोस्ट कर सकती है. वहीं फैजल नाम के एक दूसरे यूजर ने लिखा- थोड़ी तो शर्म कर लो, बच्चा क्या सोचेगा. उनकी तस्वीर पर एक यूजर ने कमेंट किया- शक्ल देख अपनी. किसी यूजर ने चीप तो किसी ने लिखा कि टीनएजर की तरह बर्ताव न करें. और किसी ने सही से कपड़े पहनने की सलाह दे डाली. हालांकि इस पर अब तक मलाइका का कोई रिएक्शन नहीं आया है.

बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब मलाइका अपने कपड़ो को लेकर ट्रोल हुई हों, इससे पहले भी वह कई बार अपनी बोल्ड ड्रेस को लेकर ट्रोल हो चुकी हैं. इससे पहले, जनवरी, 2018 में मलाइका ने इंस्टाग्राम पर गोल्डन गाउन पहने एक फोटो शेयर की थी. तब भी लोगों उन्हें जमकर ट्रोल किया था. एक यूजर ने लिखा था- इस उम्र में न्यूडिटी दिखाने के लिए तुमने पति को तलाक दे दिया.

हौलीवुड फिल्म में काम करने जा रही हैं दीपिका पादुकोण?

बौलीवुड की देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा ने हौलीवुड फिल्मों में अपनी जबर्दस्त परफौर्मेंस देकर वहां अपनी एक खास जगह बना ली है. अब दीपिका पादुकोण भी प्रियंका को फौलो कर रही हैं. गौरतलब है कि दीपिका ने हौलीवुड में अपना ऐक्टिंग डेब्यू विन डीजल के साथ फिल्म ‘ट्रिपल एक्स: द रिटर्न औफ जेंडर केज’ से किया था. अब खबरें आ रही हैं कि दीपिका जल्द ही एक और हौलीवुड फिल्म साइन कर सकती हैं.

पद्मावत के बाद दीपिका अपने कोस्टार इरफान के साथ डायरेक्टर विशाल भारद्वाज की फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाली थीं लेकिन इरफान की तबीयत खराब होने के बाद इस फिल्म की शूटिंग कैंसल कर दी गई. इसके बाद दीपिका ने अभी तक कोई भी फिल्म साइन नहीं की है. लेकिन खबरों के मुताबिक दीपिका बौलीवुड के बजाय हौलीवुड के कुछ प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रही हैं. दीपिका पहले भी कह चुकी हैं कि वह अलग माहौल में अलग-अलग लोगों के साथ काम करना चाहती हैं.

सूत्र ने बताया कि दीपिका और प्रियंका हौलीवुड फिल्म में भी बौलीवुड की तरह बड़े रोल निभाना चाहती हैं. इसके लिए इन ऐक्ट्रेसेज के एजेंट फिल्मों की स्क्रीनिंग और स्क्रिप्ट मैनेजिंग का काम कर रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हौलीवुड की बड़ी फिल्मों में काम करने के लिए दीपिका और प्रियंका को कई स्क्रीन टेस्ट और औडिशंस से भी गुजरना होगा.

अपने अगले प्रोजेक्ट के बारे में मीडिया से बात करते हुए दीपिका ने बताया कि कई स्क्रिप्ट देखने के बाद उन्होंने एक सुपरहीरो वाली फिल्म फाइनल की है जिसमें उनके कई ऐक्शन सीन्स होंगे. इस फिल्म को फौक्स स्टार प्रड्यूस करेगा और दीपिका इसे लेकर काफी उत्साहित हैं.

‘पद्मावत’ के बाद अब सलमान की फिल्म का विरोध

बौलीवुड के दबंग खान कई बार नए लोगों को इंडस्ट्री में मौका दे चुके हैं. उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए कई स्टार किड्स और इंडस्ट्री से बाहर के लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया है. कुछ वक्त पहले ही सलमान खान ने अपने जीजा आयुष शर्मा को फिल्म ‘लवरात्रि’ से लौन्च करने की घोषणा की थी. इस फिल्म को सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस सलमान खान फिल्म के बैनर तले बनाया जा रहा है. लेकिन लगता है कि आयुष की पहली फिल्म इतनी आसानी से बड़े परदे पर नहीं आ पाएगी. दरअसल, बात यह है कि पद्मावत के बाद इस फिल्म को लेकर भी विरोध किया जा रहा है. विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) इस फिल्म का विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि चाहे जो हो जाए वो इस फिल्म को रिलीज नहीं होने देंगे.

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कहा कि वह सलमान खान की आने वाली फिल्म लवरात्रि का प्रदर्शन नहीं होने देंगे. इसकी वजह इस फिल्म का नाम है. उनका कहना है कि फिल्म का नाम हिंदू त्योहार के नाम से मिलता जुलता है, इसलिए यह हिंदू त्योहार के मायने को विकृत करता है. विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, हम देश के सिनेमाघरों में इसका प्रदर्शन नहीं होने देंगे. हम नहीं चाहते कि हिंदुओं की भावनाएं आहत हों.

नवरात्रि देवी दुर्गा के नौ अवतारों की पूजा के लिए नौ रातों तक चलने वाला उत्सव है. इस दौरान देशभर में उत्सवों का आयोजन होता है, खास तौर पर गुजरात इसके लिए प्रसिद्ध है. लवरात्रि गुजरात पर केंद्रित बताई जा रही है और फिल्म इस साल पांच अक्टूबर को रिलीज हो सकती है और देशभर में लगभग इसी समय नवरात्रि मनाई जाएगी.

ऋषि कपूर का ट्वीट और आलिया रणबीर का रिश्ता

ऋषि कपूर अक्‍सर अपने ट्वीट्स के चलते सुर्खियों में आते रहे हैं. कभी ट्विटर पर अपना गुस्‍सा जाहिर करने के लिए तो कभी, किसी का मजाक उड़ाने के लिए, ऋषि कपूर अक्‍सर इस माइक्रो ब्‍लौगिंग साइट पर काफी बिंदास अंदाज में रहते हैं. लेकिन मंगलवार को ऋषि कपूर ने एक ऐसा ट्वीट किया, जिसने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी. उन्‍होंने ‘भट्ट परिवार’ की तारीफ करते हुए एक ऐसा ट्वीट किया, जिसे ट्विटर यूजर्स ने तुरंत आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के बीच उड़ रही अफेयर की खबरों से जोड़ दिया. इतना ही नहीं कई यूजर्स ने इस ट्वीट को आलिया-रणबीर के रिश्‍ते के लिए ऋषि कपूर की हांमी ही मान लिया.

दरअसल ऋषि कपूर ने मंगलवार दोपहर को ट्वीट किया, ‘मैं भट्ट परिवार के ज्‍यादातार हुनरमंद लोगों के साथ काम किया है. महेश भट्ट, मुकेश भट्ट, रोबिन भट्ट, पूर्णिमा जी, सोनी भट्ट, पूजा भट्ट, इमरान हाशमी, आलिया भट्ट. आप सब का शुक्रिया.’

ऋषि कपूर द्वारा बिना किसी जानकारी या विषय के अचानक यूं भट्ट परिवार की तारीफ करना ट्विटर यूजर्स को कुछ और ही लग गया. कई यूजर्स ने ऋषि कपूर के इस ट्वीट को आलिया भट्ट के अपने परिवार में आने का कंफर्मेशन मान लिया, तो कई लोगों ने उन्‍हें बधाई भी दे दी. दरअसल आलिया भट्ट और रणबीर कपूर इन दिनों अयान मुखर्जी की फिल्‍म ‘ब्रह्मास्‍त्र’ की शूटिंग कर रहे हैं. इसी बीच इन दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने की खबरें काफी जोरों पर हैं. यहां तक की यह दोनों अलग-अलग इंटरव्‍यू में एक-दूसरे पर क्रश होने की बात भी कह चुके हैं.

लेकिन अगर आप भी ऐसा ही कुछ समय रहे हैं तो यहां एक और बात बताना जरूरी है. दरअसल ऋषि कपूर ने कुछ दिन पहले से ही इमरान हाशमी के साथ अपनी नई फिल्‍म ‘द बॉडी’ की शूटिंग शुरू की है. इस फिल्‍म में ऋषि कूपर और इमरान हाशमी पहली बार साथ काम करने जा रहे हैं. अब यह तो ऋषि कपूर ही बताएंगे कि उनका यह ट्वीट महज इमरान हाशमी के साथ नई फिल्‍म की शुरुआत से पहले किया गया ट्वीट है या कुछ और…

जब 15 साल के लड़के ने सुष्मिता से की छेड़खानी

बौलीवुड अदाकारा सुष्मिता सेन हाल ही में एक इवेंट में पहुंची थीं. वहां मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपने साथ हुए बदसलूकी का किस्सा शेयर करते हुए बताया कि किस तरह से लगभग 6 महिने पहले एक 15 साल के लड़के ने उनके साथ सैकड़ों की भीड़ में बदतमीजी की थी. सुष्मिता ने खुद के साथ हुई छेड़खानी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों को लगता है कि सेलेब्रिटीज के साथ बार्डीगार्ड रहते हैं इसलिए उन्हें इन सब का शिकार नहीं होना पड़ता, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है.

अभिनेत्री ने कहा,’ एक अवार्ड फंक्‍शन के दौरान 15 साल के एक लड़के ने मेरे साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की. उसे लगा आसपास भीड़ है तो मुझे इस बात का पता नहीं चलेगा, पर वो गलत था. मैंने अपने पीछे से उसका हाथ पकड़ लिया. मैं यह देखकर हैरान थी कि वो सिर्फ 15 साल का है.’

मैंने उसे थोड़ी दूर ले जाकर कहा- अगर मैं चिल्‍लाकर सबको तुम्हारी इस हरकत के बारे में बता दूं तो तुम्‍हारी लाईफ तो खत्‍म हो जायेगी. अभिनेत्री ने बताया कि, पहले तो वो लड़का इस बात को मानने से इंकार करता रहा कि उसने मेरे साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की है पर जब मैंने उससे जोर देकर कहा तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. उसने मुझे सौरी बोलते हुए कहा कि आगे कभी ऐसा नहीं करूंगा. मैंने उस लड़के के खिलाफ कोई एक्‍शन नहीं लिया क्‍योंकि मैं जानती थी वो एक 15 साल का लड़का है, जिसे यह नहीं सिखाया गया कि ऐसी हरकत करना कोई अपराध है, मनोरंजन नहीं.’

मीडिया से बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि आम महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनायें तो हम देखते-सुनते हैं लेकिन कई बार सेलीब्रिटीज को भी इसका सामना करना पड़ता है. लोग कहते हैं कि हमें क्या पता होगा कि देश में महिलाओं के साथ क्या हो रहा है. हमारे साथ तो बार्डीगार्ड होते हैं और साथ ही हमारे पास कई सुविधाएं भी होती हैं, लेकिन मैं बता दूं कि 10 बार्डीगार्ड्स होने के बावजूद हम दिन भर में ऐसे 100 लोगों के साथ डील करते हैं, जो बदतमीजी करते हैं. हमें पता है कि कैसा लगता है और हम जानते हैं कि इस देश में क्या हो रहा है. इस दौरान यह वाकया बयां करते करते वे खुद भी इमोशनल हो गईं.

फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ का नया गाना हुआ रिलीज

बौलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर, सोनम कपूर, शिखा तल्सानिया और स्वरा भास्कर की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ 1 जून को रिलीज होने वाली है और फिल्म की टीम जमकर अपनी फिल्म के प्रमोशन में लगी हुई है. हाल ही में फिल्म के नए गाने ‘लाज शरम’ को रिलीज किया गया है. फिल्म के इस गाने को लड़कियां काफी पसंद करने वाली हैं और इस गाने को मुख्य रूप से करीना कपूर पर फिल्माया गया है. गाने में करीना जबरदस्ती अपनी शादी की शौपिंग करते हुए नजर आ रही हैं.

हालांकि, अक्सर ही ऐसा होता है कि लड़कियां अपनी शादी की शौपिंग करते वक्त सबसे ज्यादा खुश होती हैं लेकिन इस गाने में आपको कुछ अलग ही देखने को मिलेगा. कालिंदी उर्फ करीना अपनी शादी की शौपिंग करते वक्त काफी फ्रस्टेटिड लग रही हैं. गाने में वह इस वजह से परेशान दिख रही हैं क्योंकि वह इस सोच में है कि शादी के बाद वह जैसी अब है वैसी रह पाएंगी कि नहीं. फिल्म के इस गाने को दिव्या कुमार और जसलीन रौयल ने गाया है. वहीं इसके लिरिक्स व्हाइट नोइस ने लिखे हैं और गाने का म्यूजिक भी व्हाइट नोइस द्वारा दिया गया है.

फिल्म का ट्रेलर मई में रिलीज किया गया था. ट्रेलर में करीना, सोनम, शिखा और स्वरा की फ्रेंडशिप बोन्ड को दिखाया गया है और किस तरह से चारों दोस्तों के बीच मस्ती मजाक होता है, लड़ाई होती है लेकिन आखिर में सब साथ ही रहते हैं यह सब दिखाया गया है. जिसे देखने के बाद कहा जा सकता है कि यह फिल्म किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं होगी जिसमें आपको कई सारे इमोशन्स देखने को मिलेंगे. इस फिल्म का निर्माण सोनम की बहन रिया कपूर और एकता कपूर द्वारा किया गया है.

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