‘‘श्याम मेरे भाई, हमारा प्लान तो यही था कि उसे कार में इधरउधर घुमाते रहेंगे और अपना मतलब साध लेंगे. पर मांगी हुई कार ससुरी बीच रास्ते में टें बोल गई और लाचारी में हमें टैक्सी करनी पड़ी. अब टैक्सी में तो ये सब संभव नहीं था. लिहाजा हमें मीरा को अपने घर लाना पड़ा.’’
‘‘अब मैं मीरा को कैसे मनाऊं, कैसे समझाऊं. वह भरी बैठी है, पुलिस में जाने पर तुली है. अगर उसने थाने में रपट लिखाई तो पुलिस फौरन यहां आ धमकेगी और तुम सब को हथकड़ी लग जाएगी.’’
‘‘पुलिस?’’ वे घबरा कर बोले, ‘‘अरे यार इतना अंधेर तो न कर. अगर पुलिस ने हमें धर लिया तो हम सब बेमौत मर जाएंगे. हमारी जिंदगी तबाह हो जाएगी, नौकरी चली जाएगी, जेल में सड़ना पड़ेगा. और बदनामी होगी अलग से. हम तेरे पैर पकड़ते हैं. हमें इतनी बड़ी सजा न दिलवा. किसी भी तरह हमें पुलिस से बचा ले.’’
‘‘मैं भरसक कोशिश करूंगा कि वह पुलिस में न जाए पर पता नहीं वह मेरी बात मानेगी या नहीं. वह भोलीभाली गांव की गोरी तो है नहीं, जो रोधो कर, इस सब को अपनी किस्मत का खेल मान कर चुप हो जाएगी. खैर, मैं जरा जल्दी में हूं. तुम लोग जल्दी से मेरे पैसे निकालो.’’
‘‘ले भाई,’’ उन्होंने उस के हाथ में कुछ नोट थमा दिए.
‘‘ये क्या,’’ वह आग बबूला हुआ, ‘‘सिर्फ 4 हजार? मेरे तो 4 लाख रुपए बनते हैं. तुम सब ने 1-1 लाख देने का वादा किया था.’’
‘‘श्याम मेरे भाई, हम पर रहम कर. एक लाख बहुत बड़़ी रकम होती है. हमारे पास एक लाख न कभी हुए थे और न होंगे. हम सब छोटीमोटी नौकरी वाले हैं, रोज कुंआ खोदना और रोज पानी पीना.’’
‘‘तुम लोग पैदाइशी कमीने हो,’’ श्याम ने दांत पीस कर कहा, ‘‘जब देने की औकात नहीं थी तो वादा क्यों किया? बेकार में ये सब ड्रामा करना पड़ा. मेरी फजीहत करवाई. अगर मेरी पत्नी को असलियत मालूम हो गई तो वह मुझे कभी माफ नहीं करेगी. उम्र भर मुझे कोसती रहेगी. मुझे तो माया मिली न राम. और हां, तुम लोग अपनी खैरियत चाहते हो तो कुछ दिनों के लिए इधरउधर कहीं खिसक जाओ. मीरा गुस्से से उबल रही है. अगर उस ने पुलिस में जाने की जिद की तो मैं कुछ नहीं कर सकूंगा.’’
‘‘लेकिन यार सारा कुसूर हमारा थोड़े ही न है. हम ने तुझ से करार लिया था कि हम चारों एक बार तेरी पत्नी से सहवास करेंगे और इस के एवज में हर एक तुझे एकएक लाख रुपए देगा. ये सब तेरी मरजी से ही तो हुआ है. तुझ से इजाजत न मिलती तो क्या हम ऐसा कदम उठाने की जुर्रत करते? इस मामले में तू भी उतना ही दोषी है, जितना कि हम.’’
श्याम का चेहरा उतर गया. वह उस शाम की याद कर के मन ही मन तिलमिला उठा. श्याम अतीत में खो गया. नाम श्याम पर काम किया उस ने विनाश का शादी की शाम वह अपने दोस्तों के साथ बैठा शराब पी रहा था. सब के सब सुरूर में थे, नशे में झूम रहे थे.
‘‘मान गए यार श्याम,’’ उस के दोस्त बोले, ‘‘तेरी ससुराल वाले बड़े दरियादिल हैं. हम बारातियों की क्या खातिरदारी की है उन्होंने. तबीयत बागबाग हो गई.’’
‘‘ऊंह, कोरी खातिरदारी अपने किस काम की,’’ श्याम ने मुंह बना कर कहा, ‘‘मेरे पिताजी ने मुझसे कहा था कि वे मेरे ससुर से बात कर चुके हैं, उन्होंने मुझे शादी में कार देने का वादा किया है. लेकिन ससुर जी ने शादी में दिया ठेंगा, कहने लगे कि इतना पैसा खर्च करने की उन की सामर्थ्य नहीं है. वे मुझे एक स्कूटर दे कर टरकाना चाहते थे, पर मैं ने मना कर दिया. मुझे तो इतना गुस्सा आया कि उन से कह दूं, अपनी बेटी को भी अपने ही पास सहेज कर रखें.’’
‘‘पागल न बन यार. तेरी पत्नी तो रूप की खान है. वह एक बेशकीमती हीरा है, जिसे पा कर कोई भी अपना भाग सराहेगा. हम ने तो जब से उसे देखा है, तब से तेरी खुशकिस्मती पर रश्क कर रहे हैं. आहें भर रहे हैं कि हमें ऐसी परी क्यों नहीं मिली.’’
‘‘परी है सो ठीक है. लेकिन मुझे कार न मिलने का बहुत मलाल है.’’ श्याम कुढ़ कर बोला, ‘‘मैं ने तो मौडल और रंग भी पसंद कर रखा था. सोच रहा था कि शादी के बाद शान से कार चलाता हुआ घर पहुंचूंगा तो मोहल्ले वालों पर धाक जम जाएगी. अपने दिन तो तंगी और फाकामस्ती में गुजरते हैं. कार खरीदने की सामर्थ्य अपने में नहीं है.’’
‘‘मेरे दिमाग में एक बात आई है,’’ अनंत बोला, ‘‘अगर तू बुरा न माने तो कहूं.’’
‘‘बोल न. बेधड़क बोल.’’
‘‘एक तरीका है, जिस से तू कार के दाम हासिल कर सकता है. बाप ने न दिया न सही, उस की बेटी से वसूल ले.’’
‘‘क्या मतलब.’’
फिर नशे में धुत सब ने वह विनाशकारी प्लान बनाया था. अपने ही बुने जाल में फंस गया . श्याम उल्टे पांव घर लौटा. रास्ते भर वह अपने आप को धिक्कारता रहा. कैसी भयानक भूल कर दी थी उस ने. कैसा बचकाना काम किया था. अब वह अपने ही बुने जाल में कैसे निकलेगा? बिगड़ी बात कैसे बनाएगा? उसेबारबार अपनीपत्नी का आंसुओं से भीगा चेहरा याद आ रहा था.
उसे पश्चाताप हो रहा था कि क्या मीरा अपने इस कटु अनुभव से कभी उबर सकेगी या उन दोनों के विवाहित जीवन को ग्रहण लग जाएगा?
उस ने खुद अपने सुखी संसार में आग लगा दी थी. अपने विवाहित जीवन में जहर घोल दिया था. उस का लालच उसे ले डूबा. अब वह कैसे इस भूल का सुधार करेगा. क्या मीरा उसे क्षमा कर देगी?
घर पहुंच कर उस ने मोटरसाइकिल पार्क की. उसे देख कर चौकीदार दौड़ा आया, ‘‘साहब, मेमसाहब बाहर गई हैं. बोलीं कि साहब आएं तो बता देना.’’
‘‘कहां गई हैं?’’
‘‘वे बोलीं कि साहब से कह देना, पुलिस स्टेशन गई हैं.’’
श्याम को काटो तो खून नहीं. वह वहीं जमीन पर धम से बैठ गया.



