सरकार जागी पर देर से

विपक्षी पार्टियों द्वारा जीएसटी पर जोरदार हमले का नतीजा यह हुआ है कि अविश्वास प्रस्ताव के अगले ही दिन सरकार ने बहुत सी चीजों पर जीएसटी की दरें कम कर दीं. रैफ्रीजरेटर, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, मिक्सर ग्राइंडर, हेयर ड्रायर, छोटे टीवी आदि.

28% से घट कर 18% पर आ गए. हैंडबैग, पर्स, फोटो फ्रेम, जिप आदि 18% से घट कर 12% हो गए. हैंडलूम, दरी, सस्ते कारपेट पर दरें 12% से कम कर के 5% कर दी गईं. सैनेटरी नैपकिन, फूल झाड़ू, राखी तो जीएसटी से बाहर ही हो गए.

ये सब घरेलू इस्तेमाल की चीजें हैं. अरुण जेटली इन पर शुरू से टैक्स घटाने को तैयार नहीं थे पर अब जब चौतरफा हमला होने लगा और विपक्षी पार्टियां एकसाथ बैठने लगीं तो भाजपा को एहसास हुआ कि फूट डालो और राज करो की नीति के अनुसार वह भारीभरकम टैक्सों को थोप नहीं सकती. औरतों को राहत देना जरूरी समझा गया और अब आमराय कर रहे वित्तमंत्री अरुण जेटली के अब तक के विरोध के बावजूद टैक्स छूट दे दी गई.

बात साफ है, सरकार सही फैसले तभी लेती है जब उसे लगता है कि उस की जान पर बात आ गई है. व्यापारी और घर इस टैक्स के खिलाफ शुरू से ही थे पर सरकार सुन ही नहीं रही थी. सरकार औरतों के बलात्कारों पर भी नहीं सुन रही, देश में डर के माहौल के बारे में नहीं सुन रही, जिस में भगवा दुपट्टा डाले 8-10 लोग सैकड़ों को हड़काने की हिम्मत रखते हैं क्योंकि उन्हें हर राज्य में सरकार से अभयदान मिला हुआ है.

देश में बाबाओं का राज चल रहा है. पाखंड फलफूल रहा है. बात नई तकनीक की की जाती है पर असल में दिल तो पूजापाठ में लगा है, क्योंकि प्रधानमंत्री से ले कर महल्ले तक की सरकारी पार्टी, नेता यज्ञहवन ही करा रहे हैं. उस में पिसती औरतें हैं. उन्हें ही ठेला जाता है कि सोलह शृंगार कर के लंबी लाइनों में लग कर कल्याण के लिए धूर्तों से आशीर्वाद मांगो. जो न करेगा उस की खैर नहीं.

औरतों के लिए विपक्षी पार्टियां कुछ खास चाहे नहीं कर रही हैं पर सरकारी पार्टी पर अब उन का हौआ बैठने लगा है. इस से औरतों को लाभ हो सकता है. जैसे मुसलिम औरतों को 3 तलाक से राहत मिली है शायद हिंदू औरतों को सप्ताह में 3-4 व्रतों, महीने में 3-4 हवनों के सामने बैठने और साल में 3-4 उबाऊ तीर्थयात्राओं से भी मुक्ति मिल जाए.

लोकसभा चुनाव में सिर्फ 100 सीटों पर लड़ेगी ‘आप’

आम आदमी पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ उन्हीं सीटों पर प्रत्याशी उतारने का फैसला लिया है, जहां संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत है. ‘आप’ के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की मानें तो पार्टी की योजना फिलहाल 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की है.

सिंह के मुताबिक, पार्टी जिन 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है उनमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा की सीटें प्रमुख हैं. इसके अलावा, पार्टी राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश पर फोकस कर रही है क्योंकि इनमें से अधिकतर राज्यों में जल्द ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं.

इससे पूर्व ‘आप’ ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 430 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से मैदान में उतरे थे. इसके अलावा, पार्टी के सभी बड़े नेताओं को चुनाव में उतारा गया था. तब पार्टी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर देशव्यापी समर्थन को चनाव में भुनाने की कोशिश की थी. मगर, पार्टी का प्रदर्शन बेहद फीका रहा था. खुद अरविंद केजरीवाल बुरी तरह से चुनाव हार गए थे.

इसी वजह से पार्टी के रणनीतिकार पूरे देश में लोकसभा चुनाव में उतरने को तैयार नहीं है. सिर्फ उन्हीं 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है जहां संगठन मजबूत है. इसके तहत दिल्ली में सभी सीटों पर चुनाव लड़ना तय है. सात सीटों में से पांच पर लोकसभा प्रभारी जोकि भविष्य के प्रत्याशी होंगे, पार्टी तय कर चुकी है.

आठ करोड़ का गेहूं घोटाला

बीती 16 मई की बात है. सुबह के करीब 10-साढ़े 10 बज रहे थे. राजस्थान की सूर्यनगरी जोधपुर में सूरज अपना रौद्र रूप दिखा रहा था, भीषण गरमी थी. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी के एसपी अजयपाल लांबा कुछ देर पहले ही अपने औफिस आए थे और अपने चैंबर में बैठे एक फाइल पर सरसरी नजर डाल रहे थे. इसी बीच उन के पीए ने टेलीफोन पर घंटी दे कर कहा, ‘‘सर, एक वकील साहब आप से मिलना चाहते हैं.’’

लांबा ने एक पल सोचा फिर पीए से कह दिया, ‘‘मेरे पास भेज दो.’’

2 मिनट बाद ही एक सज्जन एसपी साहब के चैंबर का गेट खोल कर अंदर आए और एसपी साहब की ओर मुखातिब हो कर बोले, ‘‘सर, मैं आईएएस औफिसर निर्मला मीणा का वकील हूं.’’

‘‘हां वकील साहब, बैठिए.’’ एसपी साहब ने बैठने के लिए इशारा किया.

वकील साहब कुरसी पर बैठते हुए बोले, ‘‘सर, निर्मलाजी आज 2-3 घंटे बाद सरेंडर कर देंगी.’’

‘‘वकील साहब, उन्होंने एसीबी की गिरफ्त से बचने के तो सारे जतन किए थे. लेकिन अब उन के पास इस के अलावा कोई और रास्ता बचा ही नहीं था.’’ एसपी लांबा ने कहा, ‘‘चलो, देर आए दुरुस्त आए.’’

इधरउधर की कुछ और बातें करने के बाद वकील साहब एसपी अजयपाल लांबा से विदा ले कर चले गए तो एसपी ने अपने पीए से कहा कि निर्मला मीणा केस के जांच अधिकारी मुकेश सोनी से बात कराओ.

पीए ने एक मिनट बाद ही लाइन मिला कर फोन की घंटी दे कर कहा, ‘‘सर, सोनीजी लाइन पर हैं.’’

एसपी साहब ने फोन रिसीव करते हुए कहा, ‘‘सोनी, तुम जिस आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा को कई महीने से ढूंढ रहे हो, वह आज सरेंडर कर रही हैं. अभी उन के वकील साहब आए थे, वही बता कर गए हैं.’’

‘‘सर, यह तो अच्छी बात है.’’ दूसरी ओर से सोनी ने कहा.

‘‘हां, ठीक तो है. तुम फटाफट एक काम करो. निर्मला मीणा से पूछे जाने वाले सवालों की एक लंबी लिस्ट बना लो, ताकि पूछताछ में आसानी रहे.’’ एसपी ने सोनी को फोन पर निर्देश देते हुए कहा, ‘‘ध्यान रखना, उन से 8 करोड़ रुपए के गेहूं घोटाले मामले से जुड़ी हर बात पूछनी है ताकि हमारा केस पूरी तरह मजबूत रहे.’’

‘‘सर, मुझे पूरे मामले की एकएक बात पता है.’’ सोनी ने एसपी साहब को आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘मैं निर्मला मीणा से पौइंट टू पौइंट सीधे सवाल करूंगा.’’

‘‘ठीक है,’’ कहते हुए एसपी साहब ने लाइन काट दी.

इस बातचीत के करीब ढाई घंटे बाद दोपहर करीब एक बजे आईएएस औफिसर निर्मला मीणा एक गाड़ी से एसीबी की स्पैशल यूनिट के औफिस पहुंचीं. वे अपने वकील के साथ आई थीं. सलवारकुरता पहने हुए आई निर्मला ने अपना मुंह दुपट्टे से ढक रखा था. उन की केवल आंखें नजर आ रही थीं.

निर्मला मीणा ने वहां मौजूद एसीबी कर्मचारियों को अपना नाम बताया तो वे उन्हें सीधे जांच अधिकारी मुकेश सोनी के कमरे में ले गए. एसीबी के औफिस में मामले के जांच अधिकारी मुकेश सोनी पहले से तैयार बैठे थे. उन्होंने निर्मला मीणा को कुरसी पर बैठने को कहा. कुछ ही देर में एसीबी के एसपी अजयपाल लांबा भी वहां पहुंच गए.

एसपी लांबा और जांच अधिकारी सोनी ने निर्मला मीणा से अपने चेहरे पर ढका दुपट्टा हटाने को कहा तो उन्होंने इनकार कर दिया. एसीबी अधिकारियों ने उन से साफ कहा कि अगर वह जांच में सहयोग नहीं करेंगी तो सख्ती करनी पड़ेगी.

एसीबी अधिकारियों के सख्त रवैए को देख कर निर्मला मीणा ने कुछ देर नानुकुर के बाद आखिर अपने चेहरे से दुपट्टा हटा दिया. इस के बाद अधिकारियों ने उन पर सवालों की बौछार शुरू की तो उन्होंने तबीयत खराब होने की बात कह कर किसी सवाल का जवाब नहीं दिया. एसीबी अधिकारियों को अच्छी तरह पता था कि निर्मला मीणा सीनियर आईएएस औफिसर हैं. वे पुलिस की कार्यप्रणाली के साथ पुलिस की मजबूरियों को भी बखूबी जानती हैं.

अधिकारियों ने निर्मला मीणा से घुमाफिरा कर कई तरह के सवाल पूछे लेकिन वह तबीयत ठीक नहीं होने और गेहूं घोटाले के मामले में कोई बात याद नहीं होने की बात कहती रहीं.

मीणा से उन के पति पवन मित्तल के बारे में भी सवाल पूछे गए. मीणा के साथ उन के पति भी इस मामले में आरोपी थे. मीणा ने पति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही.

लगभग 3 घंटे तक एसीबी अधिकारियों ने निर्मला मीणा से पूछताछ की, लेकिन मीणा ने ऐसी कोई खास बात नहीं बताई, जिस से गेहूं घोटाले के मामले में कोई नए तथ्य सामने आते. मीणा के बारबार तबीयत खराब होने की बात कहने पर एसपी लांबा ने अधिकारियों को उन का मैडिकल चैकअप कराने के निर्देश दिए.

एसीबी अधिकारियों ने पावटा सेटेलाइट हौस्पिटल ले जा कर निर्मला मीणा का चैकअप कराया. जांच में वह पूरी तरह सामान्य पाई गईं.

आईएएस औफिसर निर्मला मीणा कौन थीं और उन्होंने एसीबी के सामने क्यों सरेंडर किया, यह जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे चलना पड़ेगा.

उदयपुर की रहने वाली आईएएस औफिसर निर्मला मीणा को सब से पहली पोस्टिंग 9 अप्रैल, 1990 को अजमेर में सहायक कलेक्टर एवं कार्यपालक मजिस्ट्रैट के पद पर मिली थी. अपनी 29 साल की नौकरी में 24 साल तक वह जोधपुर में रहीं.

इस दौरान वह सहायक कलेक्टर एवं कार्यपालक मजिस्ट्रैट, सहायक निदेशक भूमि एवं भवन कर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, उपनिदेशक स्थानीय विभाग, जिला रसद अधिकारी, रजिस्ट्रार जोधपुर यूनिवर्सिटी, रजिस्ट्रार पुलिस यूनिवर्सिटी जोधपुर, संगीत नाटक अकादमी आदि विभाग में तैनात रहीं. वह 6 बार जोधपुर की जिला रसद अधिकारी रहीं.

जोधपुर में जिला रसद अधिकारी के पद पर रहते हुए फरवरी, 2016 में निर्मला मीणा ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मुख्यालय जयपुर को शासकीय पत्र लिख कर कहा कि जोधपुर में लाभान्वित किए जाने वाले परिवारों की संख्या 33 हजार बढ़ गई है, इसलिए खाद्य सुरक्षा योजना के तहत जोधपुर के लिए राशन का 35 हजार क्विंटल गेहूं ज्यादा आवंटित किया जाए.

जिला रसद अधिकारी के पत्र के आधार पर जयपुर से जोधपुर के लिए 35 हजार क्विंटल राशन के गेहूं का ज्यादा आवंटन कर दिया गया. इस मामले में लापरवाही यह रही कि जयपुर मुख्यालय के किसी अधिकारी ने इस बात की सच्चाई का पता नहीं लगाया कि जोधपुर में अचानक 33 हजार परिवारों की संख्या कैसे बढ़ गई?

बाद में शिकायत मिलने पर राजस्थान सरकार ने इस मामले की जांच कराई. जांच में खुलासा हुआ कि परिवार बढ़ने के नाम पर राशन का जो अतिरिक्त गेहूं मंगाया गया, वह आटा मिलों को बेच दिया गया. जो गरीब परिवार बढ़े हुए बताए गए, वे सब फरजी निकले.

व्यापक जांचपड़ताल के बाद राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी निर्मला मीणा को 11 अक्तूबर, 2017 को निलंबित कर दिया. निलंबन के समय मीणा जोधपुर में जिला रसद अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं. निलंबन काल में निर्मला मीणा का तबादला मुख्यालय जयपुर में शासन सचिवालय के कार्मिक विभाग में कर दिया गया.

इस के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 2 नवंबर, 2017 को निर्मला मीणा एवं अन्य लोगों के खिलाफ अपने पदों का दुरुपयोग कर फरजी रिकौर्ड तैयार करने और गेहूं का घोटाला करने का मुकदमा दर्ज कर लिया. मुकदमा दर्ज होने पर एसीबी के जोधपुर एसपी अजयपाल लांबा के निर्देशन में इस मामले की जांच मुकेश सोनी को सौंपी गई.

सोनी ने मामले की जांच शुरू कर दी. इस बीच एक जोरदार वाकया हुआ. फरवरी के पहले सप्ताह में एक युवक निलंबित आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा के पति पवन मित्तल से मिला. मित्तल सेवानिवृत्त एकाउंट अफसर हैं. युवक ने खुद को एसीबी के एसपी अजयपाल लांबा का गनमैन बता कर कहा कि 45 लाख रुपए में गेहूं घोटाले का पूरा मामला सैटल करवा देगा.

पत्नी निर्मला मीणा के गेहूं घोटाले में फंसने से मित्तल वैसे ही परेशान थे. उन्हें लगा कि अगर पैसे दे कर यह मामला रफादफा हो सकता है तो झंझट खत्म हो जाएगा. लेकिन सवाल यह था कि गनमैन 45 लाख रुपए मांग रहा था. इतनी बड़ी रकम मित्तल के पास नहीं थी.

वे कई दिनों तक उस युवक से टालमटोल कर सोचविचार करते रहे. इस बीच युवक ने मित्तल को भरोसा दिलाने के लिए एक नंबर से वाट्सऐप मैसेज भी किए. इस वाट्सऐप मैसेज की डीपी में आईपीएस औफिसर की यूनिफौर्म पहने हुए अजयपाल लांबा की फोटो लगी हुई थी.

मित्तल ने सोचा कि जब एसपी साहब का गनमैन मामला सैटल करवाने की बात कर रहा है तो क्यों न खुद जा कर एसपी साहब से मिल लिया जाए. यही सोच कर मित्तल एक दिन एसीबी औफिस जा कर एसपी लांबा से मिले.

मित्तल ने उन्हें सारी बात बता कर 45 लाख रुपए देने में असमर्थता जताई. मित्तल की बातें सुन कर एसपी साहब आश्चर्य में पड़ गए. आश्चर्य की बात थी भी, कोई बदमाश उन के नाम पर आरोपी के पति से मोटी रकम मांग रहा था.

लांबा साहब ने बदमाश का पता लगाने के लिए डिप्टी एसपी जगदीश सोनी के नेतृत्व में तुरंत इंटेलीजेंस की टीम लगाई. टीम ने जांचपड़ताल की और मित्तल के रानाताड़ा स्थित मकान पर निगरानी रखी.

पुलिस ने 13 फरवरी को उस बदमाश को पकड़ लिया. यह बदमाश गुड़ा विश्नोइयान का रहने वाला सुनील विश्नोई था. सुनील विश्नोई के खिलाफ जोधपुर के रातानाड़ा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया.

सुनील से पूछताछ में पता चला कि गरीबों को बांटे जाने वाले 35 हजार क्विंटल गेहूं की कालाबाजारी कर के 8 करोड़ रुपए का घोटाला करने की खबरें अखबारों में छपने व न्यूज चैनलों पर देखने के बाद उस ने आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा को ही शिकार बनाने की योजना बनाई थी.

इसी के लिए उस ने मीणा के पति पवन मित्तल से संपर्क किया था. वह लोगों को इसी तरह ठग कर या ब्लैकमेल कर के ऐश करता था.

इधर निर्मला मीणा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी. वह अपनी अग्रिम जमानत कराने के प्रयास में जुटी हुई थीं. सब से पहले उन्होंने सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की अरजी दाखिल की.

एसीबी ने जनवरी में सेशन कोर्ट से मीणा की अर्जी खारिज करवा दी. इस के बाद निर्मला मीणा भूमिगत हो गईर्ं. कुछ दिनों बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई. हाईकोट्र ने मीणा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी.

इस बीच एसीबी ने मार्च के पहले पखवाड़े में मीणा के जोधपुर में सरकारी आवास सहित जयपुर व उदयपुर स्थित ठिकानों पर छापे मारे. इन छापों में मीणा के पास 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की प्रौपर्टी होने का पता चला.

इन में जोधपुर में एक बंगला, फ्लैट व कई प्लौट के अलावा कई बीघा जमीन, एक पैट्रोलपंप, बाड़मेर के पचपदरा में 2 करोड़ रुपए कीमत की 15 बीघा जमीन और जयपुर में मानसरोवर व गोपालपुरा बाइपास पर 2 बंगलों के कागजात मिले. एसीबी अधिकारियों ने छापे के दौरान निर्मला मीणा से पूछताछ भी की.

उसी दिन एसीबी ने गेहूं घोटाले के अन्य आरोपियों ठेकेदार सुरेश उपाध्याय और रसद विभाग के लिपिक अशोक पालीवाल के मकानों पर भी छापे मार कर तलाशी ली. इन 2 आरोपियों के मकानों से गेहूं घोटाले से संबंधित कुछ दस्तावेज मिले.

निर्मला मीणा के ठिकानों पर छापे की काररवाई दूसरे दिन भी चली. इस दौरान माउंट आबू के एक रिसोर्ट में उन की कौटेज होने का पता चला. मीणा ने यह कौटेज 2013 में पति के नाम से जोधपुर के एक आदमी से खरीदा था.

मीणा के 2 नाबालिग बेटों के नाम जोधपुर में 300-300 वर्गगज के 2 भूखंडों का भी पता चला. इस के अलावा निर्मला मीणा, उन के पति पवन मित्तल और उन के 2 बच्चों के नाम 17 बैंक खाते तथा 3 लौकर मिले. इन बैंक खातों व लौकरों को एसीबी ने सीज करवा दिया.

एसीबी को इन छापों में मीणा परिवार की कुल 18 संपत्तियों का पता चला. निर्मला मीणा ने आईएएस अधिकारी के तौर पर हर साल की जाने वाली अपनी चलअचल संपत्तियों की घोषणा में इन में से केवल 4 संपत्तियां ही सरकार को बता रखी थीं.

निर्मला मीणा ने 20 फरवरी, 2017 को सरकार को पेश अपने अचल संपत्ति विवरण में जयपुर में 26 लाख का मकान, जोधपुर में 16 लाख का मकान और 18 लाख रुपए का भूखंड तथा बाड़मेर के पचपदरा में 14 लाख रुपए की 15 बीघा जमीन बताई थी. बाद में एसीबी ने इस मामले में निर्मला मीणा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एक अलग केस दर्ज किया.

एक तरफ एसीबी निर्मला मीणा पर शिकंजा कसती जा रही थी और दूसरी तरफ मीणा अपनी गिरफ्तारी से रोक हटवाने की कोशिश में जुटी हुई थीं.

इस के लिए एसीबी सुप्रीम कोर्ट भी गई. सुप्रीम कोर्ट ने 14 मार्च को एसीबी को बैरंग लौटा दिया और कहा कि हाईकोर्ट ही इस का फैसला करेगा. फैसला होने के बाद आप सुप्रीम कोर्ट आएं. हाईकोर्ट में 2 महीने तक सुनवाई हुई. इस के बाद हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को निर्मला मीणा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया.

हाईकोर्ट के जस्टिस विजय विश्नोई ने मीणा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि वे जांच एजेंसी के इस तर्क से सहमत हैं कि इस घोटाले की गहन जांच की आवश्यकता है. इस मामले में कई और उच्चाधिकारी शामिल हो सकते हैं.

इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि गेहूं के गबन का लगाया गया आरोप झूठा है. आवंटित गेहूं अगर जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचा तो इस के लिए जिला रसद अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने पर मीणा की मुश्किलें बढ़ गईं. एसीबी ने उन की गिरफ्तारी के लिए छापे मारने शुरू कर दिए. एसीबी की टीम 17 अप्रैल को ही मीणा के सरकारी आवास पर पहुंची लेकिन मीणा और उन के पति नहीं मिले.

इस पर एसीबी अधिकारियों ने उन के घर पर नोटिस चस्पा कर दिया. इस नोटिस में मीणा और उन के पति को अगले दिन एसीबी की चौकी में उपस्थित होने की बात लिखी थी.

दूसरे दिन न तो निर्मला मीणा एसीबी के सामने हाजिर हुईं और न ही उन के पति. इस पर एसीबी ने फिर मीणा के सरकारी आवास पर दबिश दी लेकिन वह नहीं मिलीं. एसीबी को यह आशंका थी कि निर्मला मीणा फरार हो गई हैं. इसलिए एसीबी ने मीणा के गिरफ्तारी वारंट जारी कराए.

इस बीच निर्मला मीणा के खिलाफ एसीबी ने केरोसिन की कालाबाजारी का परिवाद और दर्ज कर लिया. इस से पहले मीणा पर गेहूं घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मुकदमे दर्ज किए गए थे.

एसीबी की गिरफ्तारी से बचती हुई निर्मला मीणा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं. सुप्रीम कोर्ट ने मीणा की ओर से सीनियर एडवोकेट के.टी.एस. तुलसी ने दलीलें पेश कीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को मीणा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी.

सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलने पर मीणा के सामने सरेंडर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था. एसीबी से लुकाछिपी के खेल में मीणा जयपुर के कार्मिक विभाग में भी उपस्थिति दर्ज नहीं करा रही थीं. इस दौरान वह करीब 2 महीने तक बिना सूचना के अनुपस्थित रहीं.

निर्मला मीणा 8 करोड़ के गेहूं घोटाले के मामले में खुद को बचाना चाहती थीं. लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए वह इतनी भागदौड़ करती रहीं कि एसीबी को उन के नित नए मामलों और संपत्तियों का पता लगता रहा. इस में उन के पति भी फंस गए.

एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मीणा के पति को भी आरोपी बनाया. इस मामले में मीणा के पति ने अगर सही जवाब और सबूत नहीं दिए तो उन की गिरफ्तारी भी हो सकती है.

एसीबी ने सरेंडर करने वाली आईएएस औफिसर निर्मला मीणा को 17 मई को अदालत में पेश कर के 7 दिन का रिमांड मांगा. अदालत ने 2 दिन का रिमांड दिया.

अदालत से स्पैशल यूनिट में ला कर एसीबी ने निर्मला मीणा से पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि मेरा गुरुवार का उपवास है, तबीयत भी ठीक नहीं है. 6 घंटे की पूछताछ में निर्मला मीणा ने किसी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दिया.

रिमांड अवधि के दौरान दूसरे दिन भी एसीबी अधिकारियों ने निर्मला मीणा से 8 घंटे तक पूछताछ की लेकिन उन्होंने बीमार होने, सिर चकराने और मुझे नहीं पता कह कर सारे सवालों को टाल दिया.

मीणा से पूछताछ में गेहूं घोटाले में सुरेश उपाध्याय, स्वरूप सिंह राजपुरोहित और अशोक पालीवाल का नाम उभर कर सामने आया था. इन में आटा मिल संचालक स्वरूप सिंह राजपुरोहित को एसीबी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था.

2 दिन का रिमांड पूरा होने पर एसीबी ने 19 मई को निर्मला मीणा को फिर अदालत में पेश किया. इस बार अदालत ने मीणा की रिमांड अवधि 22 मई तक बढ़ा दी.

इस के अगले ही दिन गेहूं घोटाले में फरार परिवहन ठेकेदार सुरेश उपाध्याय ने एसीबी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. जिला रसद विभाग में गेहूं का परिवहन ठेका सुरेश के पास था. उस का काम भारतीय खाद्य निगम के गोदाम से गेहूं उठा कर राशन डीलरों तक पहुंचाना था.

आरोप है कि सुरेश उपाध्याय ने भी निर्मला मीणा और अन्य आरोपियों के साथ मिल कर राशन के गेहूं की कालाबाजारी कर के आटा मिलों को बेच दिया था.

गेहूं घोटाले की कडि़यां जोड़ने के लिए एसीबी ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग जयपुर के तत्कालीन उपायुक्त राजस्थान प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी मुकेश मीणा को जोधपुर तलब किया. मुकेश मीणा 2 दिन बाद हाजिर हुए तो एसीबी अधिकारियों ने मुकेश मीणा और निर्मला मीणा को आमनेसामने बैठा कर पूछताछ की.

निर्मला मीणा के सरकारी पत्र पर 35 हजार क्विंटल गेहूं आवंटित करने की फाइल तत्कालीन उपायुक्त मुकेश मीणा के हाथ से ही निकली थी. उन की सहमति से ही गेहूं आवंटित किया गया था. एसीबी ने मुकेश मीणा के बयान दर्ज कर लिए.

रिमांड अवधि पूरी होने पर 22 मई को एसीबी ने निर्मला मीणा को अदालत में पेश किया. अदालत ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया. निर्मला मीणा जोधपुर सेंट्रल जेल में बतौर आरोपी जाने वाली पहली महिला आईएएस अधिकारी बन गई हैं.

24 मई को अदालत ने निर्मला मीणा और परिवहन ठेकेदार सुरेश उपाध्याय की जमानत याचिका खारिज कर दी. सुरेश उपाध्याय भी जेल में है.

एसीबी अभी तक इस मामले की जांच में जुटी है. हो सकता है कि कुछ अन्य अफसर भी इस घोटाले में पकड़े जाएं. निर्मला मीणा के पति पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है. कथा लिखे जाने तक एसीबी इस मामले में रसद विभाग के तत्कालीन क्लर्क अशोक पालीवाल की तलाश कर रही थी.

राइस पुलर : मोटी ठगी का नया तरीका

नरेंद्र कुमार बड़े बिजनैसमैन थे. अप्रैल 2015 में उन्हें एक शख्स ने फोन कर के बताया कि उस के पास राइस पुलर है, जिसे वह बेचना चाहता है. नरेंद्र कुमार ने राइस पुलर के बारे में सुन रखा था कि इस के अंदर अद्भुत शक्ति होती है. जिस के पास भी यह होता है, वह दुनिया का शक्तिशाली इंसान बन जाता है. फिर भी नरेंद्र कुमार ने इस जानकारी से अनभिज्ञ बनते हुए उस आदमी से पूछा, ‘‘ये राइस पुलर क्या होता है?’’

‘‘सर, आप राइस पुलर के बारे में नहीं जानते, यकीन नहीं हो रहा. दुनिया के अधिकांश बड़े बिजनैसमैन इस के बारे में अच्छी तरह जानते हैं. इतना ही नहीं, वे इसे हासिल करने की चाहत भी रखते हैं. क्योंकि यह होता ही इतना प्रभावी है.’’ उस शख्स ने कहा.

‘‘मुझे इस के बारे में नहीं मालूम. यह भी बता दीजिए कि इस का उपयोग क्या है?’’ नरेंद्र कुमार ने पूछा.

‘‘सर, इस के चमत्कार के बारे में आप गूगल पर या यूट्यूब पर सर्च कर सकते हैं. राइस पुलर कोई भी बरतन, बोल या सिक्का आदि के रूप में हो सकता है. पर मेरे पास राइस पुलर बौल है.

‘‘दरअसल राइस पुलर एक खास तरह की धातु इरीडियम का बना होता है, इस पर आसमानी बिजली गिरने के बाद एक विशेष चमत्कारिक ऊर्जा पैदा होती है, जो इसे अलौकिक बनाती है.

‘‘राइस पुलर की ऊर्जा का इस्तेमाल सैटेलाइट जैसी चीजें बनाने में होता है. इस के अंदर इतनी जबरदस्त चुंबकीय पावर होती है कि यह चावलों को भी अपनी तरफ खींच लेता है.’’ उस शख्स ने जानकारी दी, ‘‘सर, इस की एक और पावर के बारे में जब बताऊंगा तो आप चौंके बिना नहीं रहेंगे. यह जिस के पास भी आ जाता है, उस व्यक्ति की किस्मत ही चमक जाती है.’’

नरेंद्र कुमार को उस की बातों पर विश्वास हो गया कि वह जो कुछ कह रहा है, सही कह रहा है. क्योंकि उन्होंने राइस पुलर के बारे में काफी कुछ सुन रखा था. अब वह यह जानना चाहते थे कि यह है कितने का. उन्होंने उस शख्स से पूछा, ‘‘आप के पास जो राइस पुलर गेंद है, वो है कितने की?’’

‘‘सरजी, वैसे तो इंटरनैशनल मार्केट में इस की कीमत 10 करोड़ रुपए है, पर आप मुझे कम दे देना. मुझे अचानक पैसों की जरूरत पड़ गई, जिस की वजह से मुझे यह बेचनी पड़ रही है. यदि आप इसे अब ले लेंगे तो कुछ दिनों बाद मैं 10 करोड़ में इंटरनैशनल मार्केट में बिकवा दूंगा.

‘‘सर, एक बात और बताता हूं कि इस का इस्तेमाल नासा वाले सैटेलाइट बनाने में करते हैं. इसलिए इस बहुमूल्य चीज को पाने के लिए तमाम देश भी लगे रहते हैं. तभी तो इस की मोटी बोली लगती है. जो मोटी बोली लगाता है, वही इसे हासिल कर लेता है, बाकी लोग तो हाथ मलते रह जाते हैं.’’

अब नरेंद्र कुमार की दिलचस्पी इस राइस पुलर को खरीदने में बढ़ने लगी. उन्होंने कहा, ‘‘भई, 10 करोड़ तो बहुत ज्यादा हैं.’’

‘‘सर, पैसे की बात तो बाद में फाइनल हो जाएगी, उस से पहले आप उस की असलियत की जांच कर लें. यदि वह असली हो तभी उस के सौदे की बात करें.’’ उस शख्स ने कहा.

उस की यह बात नरेंद्र कुमार को ठीक लगी. वह इस के लिए तैयार हो गए. अब उन के सामने समस्या यह थी कि वह राइस पुलर का परीक्षण कैसे कराएं. उन्हें ऐसी किसी लैब या चैक करने वाले स्पैशलिस्ट के बारे में जानकारी नहीं थी.

नरेंद्र कुमार ने उस व्यक्ति से फिर बात की जो उन्हें राइस पुलर बेचने की बात कर रहा था. उस व्यक्ति ने नरेंद्र कुमार से कहा कि वह ऐसे वैज्ञानिक को जानता है जो नासा वगैरह को राइस पुलर उपलब्ध कराते हैं. उन का दिल्ली के मोतीनगर इलाके में औफिस है. लेकिन इस की टेस्टिंग का सारा खर्च आप को ही उठाना पड़ेगा.

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‘‘टेस्टिंग में कितना खर्च आ जाएगा?’’ नरेंद्र कुमार ने पूछा.

‘‘मैं आप की उन से मुलाकात करा दूंगा. इस बारे में आप उन से सीधे ही बात कर लेना.’’ उस शख्स ने कहा.

फिर एक दिन वह शख्स नरेंद्र कुमार को पश्चिमी दिल्ली के मोतीनगर स्थित एक कंपनी रेहान मेटल यूएसए में ले गया. उस ने उस कंपनी के एमडी वीरेंद्र मोहन बरार से उन की मुलाकात कराई. वहां पर कंपनी के एमडी का बेटा नितिन मोहन बरार भी मौजूद था.

दोनों बापबेटों ने खुद को वैज्ञानिक बताते हुए कहा कि वह राइस पुलर के काम से बहुत दिनों से जुड़े हुए हैं. उन की कंपनी नासा को राइस पुलर उपलब्ध कराती है. जब कीमत की बात आई तो उन्होंने यह भी बताया कि इस की कीमत निश्चित नहीं है. मांग के अनुसार इस की कीमत बढ़ भी जाती है और 37,500 करोड़ रुपए तक भी हो सकती है.

वीरेंद्र मोहन की बात से नरेंद्र इतना तो समझ ही गए कि राइस पुलर वास्तव में अद्भुत चीज है, जिस की कीमत करोड़ों में होती है. यानी उन से राइस पुलर के जो 10 करोड़ रुपए मांगे जा रहे थे, वह इस की विशेषता को देखते हुए कोई ज्यादा नहीं थे.

नरेंद्र कुमार ने उन से राइस पुलर की जांच के बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि राइस पुलर बहुत ही पौवरफुल होता है. इस की जांच के लिए बाहर से कैमिकल और किट मंगानी होती है, जिसे पहन कर वैज्ञानिक इसे अपनी तरह से चैक करते हैं और यह सब बहुत ज्यादा महंगी होती है.

उन्होंने कहा कि इस की कई स्तर की टेस्टिंग होगी. इस के बाद ही पता लग सकेगा कि वह राइस पुलर कितना पावरफुल है. इस में रेडिएशन इतना जबरदस्त होता है कि इसे कार्बन में रखा जाता है.

‘‘यह सब मिला कर कुल कितना खर्च आएगा?’’ नरेंद्र कुमार ने पूछा.

‘‘देखो, खर्चे के बारे में सटीक तो नहीं बता सकते, लेकिन आप 20 से 70 लाख रुपए के बीच मान कर चलें.’’ वीरेंद्र मोहन बरार ने कहा.

कुछ सोचने के बाद नरेंद्र कुमार ने कहा, ‘‘ठीक है, आप उस की टेस्टिंग की तैयारी कीजिए, तब तक मैं भी पैसों का इंतजाम करता हूं.’’

‘‘ठीक है, आप कुछ पैसे जमा करा दीजिए.’’

तब 2 दिन बाद नरेंद्र ने वीरेंद्र मोहन बरार को 5-6 लाख रुपए दे दिए. पैसे लेने के बाद बरार ने कहा कि इस की पहली  टेस्टिंग दिल्ली से दूर हापुड़ इलाके में करेंगे. तब एक दिन वीरेंद्र मोहन बरार और नितिन मोहन बरार अपनी औडी कार से नरेंद्र कुमार के साथ हापुड़ पहुंच गए.

जो शख्स नरेंद्र कुमार को राइस पुलर बौल बेच रहा था, वह भी उन के साथ गया. हापुड़ में उन्होंने एंटी रेडिएशन सूट पहन कर उस राइस पुलर बौल की जांच शुरू कर दी.

इस के लिए उन्होंने एक जगह पर वह राइस पुलर बौल रख दी और उस बौल से कुछ दूरी पर चावल के कुछ दाने रख दिए. कोई भी चुंबक लोहे को ही अपनी तरफ खींचती है, लेकिन तांबे जैसी दिखने वाली वह गेंद उन चावलों को अपनी तरफ खींच रही थी.

खुद को वैज्ञानिक बताने वाले वीरेंद्र मोहन बरार और नितिन मोहन बरार ने नरेंद्र कुमार से कहा कि प्रारंभिक जांच में यह राइस पुलर खरा उतरा है. क्योंकि इस ने इन चावलों को अपने गुण की वजह से ही अपनी तरफ खींचा है.

नरेंद्र कुमार खुश हो गए कि इस की जो 2-3 जांच होनी हैं, वह भी सही निकलें तो बहुत अच्छा होगा. पहली जांच पूरी होने के बाद वीरेंद्र मोहन बरार ने नरेंद्र कुमार से 81.6 लाख रुपए मांगे. नरेंद्र के पास उस समय इतने पैसे नहीं थे तो उन्होंने बरार को किस्तों में 19 लाख, 24.6 लाख और 38 लाख रुपए दे दिए. पैसे लेने के बाद बरार ने उन से कहा कि क्वालिटी की जांच के लिए इस राइस पुलर बौल की 2 जांच होनी और जरूरी हैं. जब आप को यह जांच करानी हों तो मुझे एक दिन पहले बता देना.

नरेंद्र कुमार 85 लाख से ज्यादा खर्च कर चुके थे. इसलिए वह दूसरी टेस्टिंग के लिए भी तैयार हो गए. उस राइस पुलर की दूसरी टेस्टिंग उन्होंने दिल्ली के ईस्ट औफ कैलाश में की. इस टेस्टिंग के बाद नरेंद्र कुमार ने वीरेंद्र मोहन बरार को किस्तों में क्रमश: 5.6 लाख, 3.5 लाख और 42 लाख रुपए दिए. इस टेस्टिंग में भी वह राइस पुलर गेंद खरी उतरी.

अब उस की आखिरी टेस्टिंग होनी बाकी थी. तीसरी जांच के लिए हिमाचल प्रदेश का धर्मशाला क्षेत्र निश्चित किया गया. ये सभी लोग धर्मशाला पहुंचे लेकिन उस दिन मौसम खराब होने की वजह से जांच नहीं की जा सकी, जिस से सभी लोग वापस आ गए.

घर लौटने के बाद नरेंद्र कुमार ने अपने एक दोस्त से राइस पुलर के बारे में बात की तो उस दोस्त ने बताया कि आजकल राइस पुलर के नाम पर कुछ लोग ठगी भी कर रहे हैं.

तुम ऐसे लोगों से संभल कर रहना. इतना ही नहीं, उस दोस्त ने यूट्यूब पर कुछ वीडियो भी दिखाए, जिस में लोगों ने राइस पुलर सिक्के, बरतनों आदि के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी की थी.

दोस्त की बात सुन कर नरेंद्र कुमार का दिमाग घूम गया. उन्होंने उस शख्स से संपर्क किया जो उन्हें राइस पुलर बेच रहा था. उस से उन्होंने कहा कि वह अब इसे नहीं खरीद रहे, उन के जो पैसे खर्च हुए हैं, वह वापस दिलवा दें. उस शख्स ने कह दिया कि जो पैसे टेस्टिंग में खर्च हुए हैं, वे तो वैज्ञानिकों ने लिए हैं.

वापस करने के बारे में उन्हीं से बात करो. तब नरेंद्र कुमार ने वीरेंद्र मोहन बरार से बात की. बरार ने कहा कि जांच के लिए जो कैमिकल आया था, वह बहुत महंगा था, इसलिए किसी भी हालत में पैसे वापस नहीं हो सकते.

इन लोगों से बात करने के बाद नरेंद्र कुमार को अपने ठगे जाने का अहसास हुआ. उन्होंने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के डीसीपी भीष्म सिंह से मुलाकात कर इस मामले में कानूनी काररवाई करने की मांग की.

डीसीपी ने इस मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच के इंटर बौर्डर गैंग इंट्रोगेशन स्क्वायड के एसीपी आदित्य गौतम की देखरेख में एक टीम बनाई. इस टीम में इंसपेक्टर सुनील जैन आदि को शामिल किया गया.

टीम ने इस मामले की जांच शुरू कर दी और ठगी करने वाले वीरेंद्र मोहन बरार, उस के बेटे नितिन मोहन बरार को 8 मई, 2018 को गिरफ्तार कर लिया.

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जांच में पता चला कि ये दोनों फरजी वैज्ञानिक बन कर लोगों को ठगते थे. इन की निशानदेही पर पुलिस ने वैज्ञानिकों द्वारा पहने जाने वाला एंटी रेडिएशन सूट, एंटी रेडिएशन स्टीकर, लैपटौप, प्रिंटर, ब्लैंक लैटरहैड, फरजी आईडी कार्ड व औडी कार बरामद की.

आरोपियों ने बताया कि इन्होंने तांबे की गेंद पर मैग्नेट की कोटिंग करा ली थी. चावलों को भी खास तरह से तैयार किया गया था. चावलों पर इन्होंने लोहे की कोटिंग करा रखी थी. जब खरीदार को कौपर की बौल चावलों को अपनी तरफ खींचते दिखती तो उन्हें यकीन हो जाता कि यह असली राइस पुलर है. इस से लोग आसानी से जाल में फंस जाते थे.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के अलावा उत्तराखंड पुलिस ने भी राइस पुलर सिक्के बेचने वाले 12 लोगों को हरिद्वार के एक होटल से गिरफ्तार किया था. गैंग के सदस्यों ने मुंबई के व्यापारी परवेज को फोन कर के जादुई सिक्का बेचने की बात कही थी.

गैंग के सदस्य ने उन से कहा था कि इस जादुई सिक्के में इतनी शक्ति है कि इस के प्रभाव से चलती ट्रेन, बस भी रुक जाएगी. हवाईजहाज को भी इमरजेंसी लैंडिंग को बाध्य होना पड़ेगा. इतना ही नहीं, इस सिक्के में मौसम बदलने तक की शक्ति है. यह राइस पुलर कौइन जिस किसी के पास होगा, वह विश्व का शक्तिशाली व्यक्ति बन जाएगा.

परवेज नाम के उस व्यापारी ने जब उस राइस पुलर कौइन की कीमत पूछी तो उस जालसाज ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस की कीमत 21 सौ करोड़ रुपए है. लेकिन वह उन्हें सस्ते में ही दे देगा.

जालसाज ने यह भी बताया कि उसे यह सिक्का हरिद्वार के एक साधु ने बेचा था. जालसाज ने व्यापारी को भरोसा दिया कि पहले वह हरिद्वार आ कर उस सिक्के की जादुई शक्ति को देखे, इस के बाद ही पसंद आने पर सौदा करें.

व्यापारी को यह बात पसंद आ गई और वह अपने एक साथी के साथ मुंबई से फ्लाइट द्वारा दिल्ली पहुंच गया और दिल्ली से टैक्सी कर के हरिद्वार के उस होटल में पहुंच गया, जहां जालसाज ने बुलाया था. होटल में व्यापारियों को जालसाज ने वह तथाकथित जादुई सिक्का दिखाया और फिर एक करोड़ रुपए में उस का सौदा तय हो गया.

इसी बीच उस होटल के मैनेजर को किसी तरह यह बात पता चल गई कि होटल में किसी जादुई सिक्के की डील हो रही है. फिर क्या था, उस ने उसी समय पुलिस को फोन कर दिया. पुलिस ने दबिश दे कर वहां से 12 लोगों को गिरफ्तार कर उन के पास से तांबे का एक सिक्का, 11 मोबाइल फोन और 2 कारें बरामद कीं.

इसी तरह महाराष्ट्र के नासिक में एक रिटायर्ड आर्मी अफसर को भी चमत्कारिक बरतन (राइस पुलर) के नाम पर 70 लाख का चूना लगाया था. हैदराबाद पुलिस ने भी राइस पुलर लोटा के नाम पर मोटी रकम ठगने वाले 4 ठगों को गिरफ्तार किया था. इस के पास से 4 तांबे के लोटों के अलावा 38 लाख रुपए भी बरामद किए थे. मुंबई में ऐसे अनेक लोग हैं जो राइस पुलर (सिक्के, बरतन, बौल इत्यादि) बेचने के धंधे से जुड़े हुए हैं.

कहा जाता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने सन 1835 से 1845 के बीच किंग विलियम चतुर्थ के कार्यकाल में हाफ आना के सिक्के जारी किए थे. ये सिक्के बौंबे, कलकत्ता और मद्रास में बने थे. तांबे के बने इस सिक्के का वजन 12.35 ग्राम था.

इन सिक्कों में कुछ चुंबकीय शक्ति बताई जाती थी. सन 1835 में बने वह हाफ आना सिक्के बाजार में 5 से 8 हजार रुपए में बेचे जा रहे हैं, लेकिन सन 1845 में मद्रास में बने सिक्के रेयर हैं. यदि किसी के पास वह सिक्का है तो बाजार में उस की कीमत 15-20 हजार रुपए है.

अब बात करते हैं राइस पुलर की. कहा जाता है कि आसमान से उल्का पिंड गिरे थे. एक उल्का पिंड राजस्थान में भी गिरा था, जो इतना शक्तिशाली था कि जमीन में धंस गया. जिस जगह पर वह गिरा था, बाद में वह जगह सरकार ने अपने कब्जे में ले ली थी. जांच में पता चला कि उल्का पिंड के साथ वह इरीडियम धातु थी. वैज्ञानिकों ने इरीडियम की जांच की तो पता चला कि वह बहुत कठोर धातु है, जिस में परमाणु संख्या 77 है और यह 2,04,500 डिग्री सेल्यिस पर पिघलती है.

इस धातु में यदि तांबे को पिघला कर इरीडियम कौपर बनाया जाए तो उस में विशेष प्रकार का चुंबकीय गुण आ जाता है. राइस पुलर बेचने वालों का दावा है कि राइस पुलर बनाने के लिए तांबे से बनी वस्तु को किसी ऐसे ऊंचे पहाड़ की चोटी पर रखा जाता है, जहां पर बादल नीचे हों.

फिर जब आसमानी बिजली उस पात्र या सिक्के पर गिरती है तो उस पात्र या सिक्के में अद्भुत शक्ति आ जाती है. वह राइस पुलर बन जाता है. धंधेबाज लोग ऐसे पहाड़ों पर अनेक जगह तांबे के पात्र या सिक्के रख देते हैं और वहीं आसपास रुक कर निगाह रखते हैं कि उस पहाड़ पर बिजली गिरी है या नहीं.

अब कुछ लोगों ने राइस पुलर बेचने का एक तरह का धंधा बना रखा है. ये लोग सन 1616, 1717, 1816, 1818 आदि के पुराने तांबे के सिक्के बाजार से तलाश कर उस पर मैग्नेट की कोटिंग करा लेते हैं. फिर वे इन सिक्कों को राइस पुलर का नाम दे कर करोड़ों रुपए की ठगी करते हैं.

दिल्ली के वीरेंद्र मोहन बरार ने अपने बेटे नितिन मोहन बरार के साथ मिल कर यही धंधा शुरू किया था. उन्होंने नरेंद्र से करीब डेढ़ करोड़ रुपए की ठगी की थी. राइस पुलर के नाम पर मोटी ठगी का धंधा अनूठा है. लोगों को ऐसे ठगों से सतर्क रहना होगा.

जब इन दो सितारों को ना चाहते हुए भी करना पड़ा साथ काम

बौलीवुड में सुपरस्टार्स के बीच अनबन की खबरें तो हमेशा आती ही रहती हैं. बीते दौर में भी दो ऐसे सुपरस्टार्स ऐसे थे जिनके बीच तकरार की खबरें हमेशा ही सुर्खियां बटोरने का काम करती थी. हम बात कर रहे हैं दिलीप कुमार और राज कुमार की.

सन 1959 में आई फिल्म ‘ पैगाम’ में इन दोनों स्टार्स की जोड़ी पहली बार बड़े पर्दे पर नजर आई थी. इस फिल्म को लोगों ने काफी पसंद किया और साथ ही इनकी जोड़ी को भी लेकिन इस फिल्म के बाद ही दोनों के रिश्तों में कड़वाहट ने जन्म ले लिया और दोनों ने एक दूसरे के साथ कभी काम ना करने का मन बना लिया. लेकिन डायरेक्टर सुभाष घई एक बार फिर इन दोनों साथ लाने में कामयाब रहें.

1991 में आई फिल्म ‘सौदागर’ में एक बार फिर दिलीप कुमार और राज कुमार एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आए. फिल्म भी सुपरहिट साबित हुई और इनकी दमदार एक्टिंग को भी लोगों ने खूब एन्जौय किया.

लेकिन सुभाष घई ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि इन दोनों को एक साथ फिल्म करने के लिए राजी करना बिल्कुल भी आसान काम नहीं था.

सुभाष घई की सौदागर से पहले विधाता और कर्मा जैसी फिल्मों में दिलीप कुमार नजर आ चुके थे. यही वजह थी कि सुभाष घई से दिलीप कुमार के बीच अच्छी तालमेल थी. सुभाष ने इसी का फायदा उठाते हुए ‘सौदागर’ में काम करने के लिए दिलीप कुमार को मना लिया. अब बारी थी राज कुमार की हां की, सुभाष सीधे राजकुमार के घर ड्रिंक पर पहुंच गए. उन्होंने राज कुमार को स्क्रिप्ट सुनाई और पूछा कि वे फिल्म में काम करेंगे या नहीं.

राजकुमार को स्क्रिप्ट पसंद आई और उन्होंने फिल्म में काम करने के लिए मंजूरी दे दी. जब राजकुमार ने फिल्म में अपने दोस्त के किरदार को करने वाले के बारे में पूछा तो सुभाष ने चालाकी से कहा कि अगर आप कहो तो दिलीप से बात करूं. इस पर राज कुमार बोले कि कर लो जानी.

फिर क्या सुभाष घई की फिल्म सौदागर की शूटिंग शुरू हो गई. ये फिल्म फिल्म बौक्स औफिस पर काफी सफल रही जिसके लिए निर्देशक सुभाष घई को फिल्मफेयर बेस्ट डायरेक्टर का अवौर्ड भी दिया गया.

आम्रपाली दुबे के सेक्सी बेली डांस ने तोड़ा रिकार्ड

भोजपुरी की फैमस अभिनेत्री आम्रपाली दुबे जितनी अच्छी अभिनेत्री हैं उससे कही ज्यादा बेहतरीन उनका डांस होता है. फिलहाल उनकी फिल्म लव के लिए कुछ भी करेगा का गाना ‘आम्रपाली तोहरा खातिर’ यू ट्यूब पर धमाल मचा रहा है. इस गाने में आम्रपाली गजब का बेली डांस करती नजर आ रही हैं. ‘आम्रपाली तोहरा खातिर’ को यू-ट्यूब पर 63 करोड़ बार देखा जा चुका है.

आम्रपाली दुबे की फिल्म लव साल 2019 को रिलीज होगी. इस फिल्म में आपको एक्शन और रोमांस दोनों का तड़ा साथ देखने को मिलेगा. बता दें कि इस फिल्म में आम्रपाली अभिनय के साथ ही साथ आईटम नंबर भी करती नजर आएंगी. फिल्म की रिलीज से पहले उनके गाने ने दर्शकों का ध्यान खींच लिया है और फिल्म देखने की बेताबी को और बढ़ा दिया है. इस फिल्म में आम्रपाली दुबे के अलावा विशाल सिंह, राजू सिंह माही, सूर्या शर्मा, नीलू सिंह, स्नेहा मिश्रा जैसे कलाकार नजर आएंगे.

बता दें आम्रपाली दुबे इन दिनों भोजपुरी की बेहतरीन एक्ट्रेस में से एक हैं. इस साल उनके हाथ में कई फिल्में हैं. सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली आम्रपाली दुबे आए दिन अपना सेक्सी वीडियो और फोटो शेयर करती रहती हैं. भोजपुरी इंडृस्ट्री में उनकी जोड़ी निरहुआ के साथ काफी पसंद की जाती है. कहा तो ये भी जाता है कि जिस फिल्म में उनकी जोड़ी नजर आती है वो फिल्म हिट जरूर होती है. हाल ही में दोनों फिल्म बॉर्डर में नजर आए थे जोकि हिट रही और इसके अलावा इनकी जोड़ी निरहुआ चलल लंडन में भी नजर आएगी.

दिल्ली को बचाओ इन दुकानदारों से

यह ठीक है कि व्यापारी और दुकानदार अंतत: घरों की सेवा करते हैं और उन्हें रोजमर्रा का सामान दिलाते हैं पर इस का मतलब यह नहीं कि इस चक्कर में वे अपने ग्राहकों की बस्तियों को ही उजाड़ दें. पेड़ छांव देते हैं पर जब घर की दीवारों में घुस कर घर को गिराने लगें तो उन्हें काटना ही होता है चाहे पेड़ कितने ही उपयोगी क्यों न हों.

दिल्ली एक उदाहरण बन रहा है कि शहरों का प्रबंध और शहरों के नियम दुकानदारों के इशारों पर हों या घरों के, सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी नियुक्त कर रखी है जो घरों के इलाकों में घुस रहे दुकानदारों, दफ्तरों, रेस्तराओं और यहां तक कि डांस बारों पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है. दुकानदारों की मजबूत लौबी जो पौलिटिकल पार्टियों को पैसा देती है, उन नियमों को बदलवाना चाहती है जिन के सहारे मौनीटरिंग कमेटी काम कर रही है.

ये नियम भी दिल्ली प्राधिकरण यानी डीडीए ने ही बना रखे हैं पर इन का उद्देश्य शुरू से किसी तरह हर जने को सरकारी अंगूठे के नीचे रखना रहा है. इस चक्कर में इन्होंने सरकारी अफसरों को अरबों बनाने के

अवसर दे रखे हैं. वे कागज पर बनी घुंडी और लगी मुहर से पूरी बिल्डिंग को नियमित भी कर सकते हैं और ढहाने लायक भी घोषित कर सकते हैं.

अगर वे पैसा ले कर मंजूर कर दें तो नागरिकों के पास बहुत थोड़े अधिकार हैं कि दखलंदाजी कर सकें. सुप्रीम कोर्ट नागरिकों और घरों के लिए दिल्ली को बचाने की कोशिश कर रहा है पर यह फल नहीं दे पा रहा क्योंकि नौकरशाही दुकानदारों के साथ है.

नौकरशाही ने शहरी नियमों के लिए बने मास्टर प्लान में भारी हेरफेर कर के छूट दे दी है ताकि उन दुकानदारों को अभयदान मिल जाए, जिन्होंने घरों के बीच व्यवसाय शुरू कर रखे हैं. दिल्ली के 80% इलाके इस के शिकार हैं.

दिल्ली में बाजारों की कमी नहीं है. वहां आसानी से बहुमंजिला पार्किंग वाली बहुमंजिला दुकानें बनाई जा सकती हैं. लोगों को आज जरूरत से ज्यादा दुकानें मिल रही हैं, जो सुविधा नहीं क्योंकि दुकानदार अति मोटा मुनाफा वसूल कर अपना निकम्मापन छिपाते हैं.

दिल्ली के ज्यादातर दुकानदार घमंडी हैं और ग्राहकों को गुलामों की तरह समझते हैं. शौपिंग किसी भी तरह आनंद की बात नहीं है.

अगर सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में सफल होता है तो ही देश भर के शहरों को संदेश मिलेगा.

हमारी कमर्शियल राजधानी तो पहले ही पानी के सैलाब में डूबी है. दिल्ली दुकानदारों के सैलाब में डूब रही है.

चिकने चेहरे की चाहत

लालू प्रसाद यादव अपने सियासी दांवपेंचों के अलावा अनोखे मजाकिया अंदाज के लिए भी मशहूर रहे हैं. एक बार उन्होंने कहा था कि वे बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गालों की तरह चिकना बना देंगे. हालांकि, उन के इस बयान पर तब काफी बवाल मचा था, पर हकीकत तो यही है कि हर कोई हेमा मालिनी के गालों की तरह अपने चेहरे को चिकना बनाए रखने की चाहत दिल में दबाए रखता है.

इस के लिए बाजार में तरहतरह की क्रीम और लोशन मिलते हैं. चूंकि तकनीक के दौर में अब मोबाइल क्रांति से गांवों और शहरों में ज्यादा दूरियां नहीं बची हैं, इसलिए जो क्रीम और लोशन पहले अमीर तबके की पहुंच तक होते थे या माने जाते थे, अब वे गांव में रहने वाले नौजवानों को भी रिझाने लगे हैं. छोटे गांवों की दुकानों में?भी साजसिंगार के सामान में चेहरा चमकाने की क्रीमें, लोशन और पाउडर दिखाई दे जाते?हैं.

इस तरह के सामान को इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं?है, लेकिन इन के बारे में जानकारी हो तो सोने पे सुहागा हो जाता?है. हमारे चेहरे की स्किन कैसी है, यह हमें पता होना चाहिए. जैसे हमारी स्किन नौर्मल है या ड्राई यानी सूखी. कुछ लोगों की स्किन औयली यानी तैलीय भी होती है. उन के लिए अलगअलग तरह की क्रीमें या दूसरे सामान भी बाजार में मुहैया हैं.

इस के अलावा जब हम घर से बाहर जाते?हैं तो सूरज की तेज किरणें, नमी की कमी और धूलमिट्टी चेहरे को खराब कर देती हैं. इस के लिए अच्छा साबुन या क्रीम वगैरह लगाने के साथसाथ कुछ दूसरे उपाय भी अपनाने चाहिए, जो इस तरह?हैं:

* चेहरे पर चमक लाने के लिए दिनभर में खूब पानी पीना चाहिए, चाहे कोई भी मौसम हो.

* चेहरे को पानी से अच्छे से धोएं. बाद में अच्छी क्वालिटी की क्रीम लगा लें.

* चेहरे पर साबुन का इस्तेमाल कम ही करें क्योंकि इस से स्किन सूखी होने का डर बना रहता?है.

* तेज गरमी में घर से बाहर निकलने से बचें. अगर जाना पड़े तो छाते का इस्तेमाल करें.

* ज्यादा तेल और मसाले वाला भोजन न करें. फलों व सलाद का सेवन ज्यादा करें.

* हफ्ते में एक बार किसी अच्छी क्रीम वगैरह से चेहरे की मसाज कर लें. यह मसाज घर के किसी सदस्य से कराई जा सकती है, जिस से?ब्यूटी सैलून का खर्च बच जाता है.

* रात को सोने से पहले भी चेहरे को अच्छे से धोएं और थोड़ी सी क्रीम लगा लें.

* चूंकि आजकल बाजार में नकली क्रीम, लोशन या पाउडर भी मिलते हैं. लिहाजा, ऐसा सामान लेने से बचें?क्योंकि कभीकभार घटिया सामान इस्तेमाल करने के चक्कर में चेहरा चिकना तो बनता नहीं, एलर्जी होने से बिगड़ जरूर जाता?है. इस से आप का डाक्टरी खर्च बढ़ जाएगा और चिकने चेहरे की चाहत भी बुरे ख्वाब में बदल जाएगी.

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