शाहरुख खान की वेब सीरीज ‘द बार्ड आफ ब्लड’ में इमरान हाशमी

फिल्म ‘जीरो’ की असफलता से एक तरफ शाहरुख खान का अभिनय करियर सवालों के घेरे में है, तो वहीं इस असफलता से उनका आर्थिक नुकसान भी बहुत ज्यादा हुआ है. क्योंकि वो फिल्म जीरो के निर्माता भी हैं. फिलहाल बतौर अभिनेता उनके पास कोई काम नहीं है और बतौर निर्माता जल्दबाजी में वह किसी फीचर फिल्म का निर्माण करना नहीं चाहते. इसी के चलते वह इन दिनों एक वेब सीरीज ‘द बार्ड आफ ब्लड’ का निर्माण अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘रेड चिल्ली इंटरटेनमेंट’ के तहत कर रहे हैं.

सूत्रों के अनुसार वेब सीरीज ‘द बार्ड आफ ब्लड’ में इमरान हाशमी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. इसके 45 मिनट के सात एपीसोड प्रसारित होंगे. इसे लेह लद्दाख, मुंबई, गुजरात राजस्थान के अलग अलग शहरों में फिल्माया जा रहा है. उम्मीद की जा रही है कि अगस्त के आखिर तक इसे रिलीज  किया जाएगा.

इंटरनेट पर छाया खेसारीलाल और काजल राघवानी का गाना

भोजपुरी एक्टर खेसारीलाल यादव का वीडियो आए दिन इंटरनेट पर वायरल होता रहता है. ऐसे में उनका एक और वीडियो काफी तेजी से यूट्यूब देखा जा रहा है. यह वीडियो उनकी फिल्म ‘बलम जी लव यू’ के एक गाने ‘डाल दे केवाड़ी में खिल्ली’ का है, जिसमें उनके साथ भोजपुरी एक्ट्रेस काजल राघवानी भी नजर आ रही हैं.

आपको बता दें, खेसारीलाल और आदाकारा काजल राघवानी की जोड़ी काफी मशहूर है. इनकी जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद है और यही वजह है कि कई भोजपुरी फिल्मों में ये दोनों एक साथ काम कर चुके हैं. इसी महीने 18 जनवरी को यूट्यूब पर रिलीज किए गए इस गाने को अब तक 44 लाख से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है.


इन दिनों खेसारीलाल भोजपुरी एक्ट्रेस काजल राघवानी के साथ फिल्म ‘कुली नंबर वन’ की शूटिंग में व्यस्त हैं. कभी वे बाइक पर काजल को लेकर राइडिंग करते नजर आ रहे हैं, तो कभी वे उनके साथ इश्क फरमाते. मामला लालबाबू पंडित की भोजपुरी फिल्‍म ‘कुली नंबर वन’ का है, जिसकी शूटिंग इन दिनों रांची में जोर-शोर से चल रही है.

मीत ब्रदर्स ने सपना चौधरी के गाने पर मचाया धमाल

सपना चौधरी का हिट डांस ‘तेरी आंख्या का यो काजल’  किसी भी पार्टीज में खूब रंग जमाता है. अक्सर इस गाने पर सपना चौधरी भी परफौर्मेंस देती नजर आती हैं. सपना चौधरी के इस मशहूर गाने को अब पंजाबी सिंगर्स मीत ब्रदर्स ने अपने इवेंट के दौरान गाकर वायरल कर दिया है.

सपना ने इस इवेंट का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें मीतब्रदर्स के साथ पंजाबी सिंगर खुश्बू ग्रेवाल भी नजर आ रही हैं. सपना ने गाना शेयर करते हुए लिखा कि इससे ज्यादा अच्छा कुछ नहीं हो सकता कि आपके गाने को एक नई फील मिल जाए. सपना ने इसी के साथ सिंगर्स को थैंक्स भी बोला है.

 

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आपको बता दें, डांस शोज के अलावा सपना चौधरी अपनी डेब्यू फिल्म को लेकर चर्चा में हैं. सपना चौधरी की फिल्म ‘दोस्ती के साइड इफेक्ट्स’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है. इस फिल्म में सपना और उनके दोस्तों की कहानी को दिखाया जाएगा.

 

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सपना इस फिल्म में एक पुलिस औफिसर का रोल अदा कर रही हैं. सपना चौधरी की ये फिल्म हरियाणा और पंजाब के अलावा बौलीवुड फैंस के बीच भी धमाल मचाने को तैयार है. ‘दोस्ती के साइड इफेक्ट्स’ 8 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. इस फिल्म में जी म्यूजिक ने संगीत दिया है.

मेरा यौन उत्पीड़न एक डायरेक्टर ने किया : स्वरा भास्कर

बौलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर का कहना है कि एक डायरेक्टर ने उनका यौन उत्पीड़न किया और इस बात को समझने में उन्हें 6-8 साल लग गए. एक्ट्रेस ने बिना किसी का नाम लिए हुए कहा कि कार्यस्थल पर उनके साथ गलत हरकत हुई थी और उनका शोषण करने वाला व्यक्ति एक डायरेक्टर था.

स्वरा ने ये भी कहा कि मुझे यह महसूस करने में 6-8 साल लग गए. जब मैंने किसी और को इस इस तरह के खराब अनुभव के बारे में एक पैनल में बात करते हुए सुना तब जाकर मुझे इसका अहसास हुआ कि मेरे साथ तीन साल पहले जो हुआ था वह यौन उत्पीड़न था.’

इससे पहले स्वरा भास्कर ने कहा था कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न महामारी की तरह है और वह फिल्म और टेलीविजन उद्योग के जरिए इस संबंध में जागरूकता लाने की उम्मीद करती हैं. अभिनेत्री शुरू से भारत के हैशटैगमीटू मूवमेंट की समर्थक रही हैं.

‘सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन’ (सिंटा) ने हाल ही में ऐलान किया कि वह मनोरंजन उद्योग में यौन उत्पीड़न जैसे मामलों से निपटने के लिए समिति गठित करेगा और स्वरा भास्कर, रेणुका शहाणे और रवीना टंडन जैसी अभिनेत्रियां इसकी सदस्य होंगी.

समिति में अपनी भूमिका के बारे में स्वरा ने कहा, “मैं सिंटा द्वारा गठित सह-समिति का हिस्सा हूं जो कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ इसके सदस्यों द्वारा जागरूकता वर्कशौप आयोजित करेगा. हमारे मनोरंजन उद्योग में कुल 24 यूनियन हैं और इसके पांच लाख से ज्यादा सदस्य हैं, तो हम इस मुद्दे पर इन यूनियनों के साथ काम करने की कोशिश करेंगे.”

फिल्म ‘लकी’ के गाने पर अभिनेता जीतेंद्र कपूर के थिरके कदम !

बी-लाइव प्रस्तुत फिल्म लकी के ट्रेलर लौन्च पर दिग्गज अभिनेता जीतेंद्र कपूर, बौलीवुड अभिनेता तुषार कपूर और डिस्को किंग बप्पी लहरी मौजुद थे. इस समारोह में बौलीवुड में ‘जंपिंग जैक’ के नाम से जाने जाते प्रसिद्ध अभिनेता जीतेंद्र कपूर ने अपने खास अंदाज में समा बांधा. फिल्म लकी की गीत कोपचा पर फिल्म के मुख्य अभिनेता अभय महाजन के साथ मिलकर अपने खास अंदाज में डान्स स्टेप की. कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए ये समारोह यादगार बन गया.

फिल्म लकी में कोपचा गीत बप्पी लाहिरी और वैशाली सामंत ने गाया हैं. यह गाना 80 के दशक को और अभिनेता जीतेंद्र कपूर की फिल्म हिम्मतवाला को ट्रिब्यूट देने वाला गाना है. हिंदी और बंगाली सिनेमा में कई गीत गाये बप्पी दा ने इस गीत के साथ मराठी पार्श्वगायन में डेब्यू किया हैं.

फिल्म लकी के ट्रेलर लौंच के लिए आयें अभिनेता जीतेंद्र कपूर ने जब स्पोन्टेनिअसली स्टेज पर फिल्म के मुख्य अभिनेता अभय महाजन के साथ डान्स स्टेप की तब समारोह में तालियों और सिटीयों की गूंज उठ गई.

ट्रेलर लौंच के बाद अभिनेता जीतेन्द्र ने कहा, “ट्रेलर इतना आकर्षक है कि निश्चित रूप से लकी फिल्म को बम्पर ओपनिंग मिलने वाली हैं. लकी की पूरी टिम को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं. ”

डिस्को किंग बप्पी लहरी इस साल फिल्म उद्योग में अपने 50 साल पूरे कर रहे हैं. इस समारोह में, लकी की टीम ने  गोल्डन जुबली केक काटकर सेलिब्रेट किया. इस जश्न के बाद बप्पी लहरी ने कहा, “मैंने मुंबई में एक सफल करियर बनाया है और मुझे इस बात की खुशी है कि गोल्डन ज्युबली इयर में ही मैने मुंबई की भाषा मराठी में गाना गाया. और मेरा मराठी फिल्मों के पार्श्वगायन में डेब्यू हुआ हैं. मैं अपने फैन्स का शुक्रगुजार हूं की उन्होंने मुझे इतना प्यार दिया.

ट्रेलर लौन्च समारोह में अभिनेता जीतेन्द्र के बेटे और बौलीवुड अभिनेता तुषार कपूर भी मौजूद थे.  तुषार ने कहा, “मैंने कोपचा गाना देखा.  फिल्म निर्माताओं ने कोपचा गाने से मेरे पिता को अलग अंदाज में दिया ट्रिब्युट मुझे पसंद आया. मैने गोलमाल फिल्म सीरीज की हैं. जिसमें मेरा नाम लकी था. इसी वजह से लकी फिल्म से मेरा एक खास नाता हैं. निर्माता सूरज सिंह 16 सालों तक बालाजी फिल्म्स के साथ जुडे थे. इसीलिए ऐसा लग रहा हैं, जैसे मेरी होम प्रोडक्शन की फिल्म रिलीज हो रही हो.”

निर्माता सूरज सिंह ने कहा, “यह ट्रेलर लौन्च हम सभी के लिए एक यादगार क्षण था. बप्पीदा और जीतू सर इन दो लीवींग लिजेंड्स ने एक साथ हमारे फिल्म का ट्रेलर लौंच करना हमारे लिए निश्चित ही सौभाग्य की बात हैं.”

संजय कुकरेजा, सूरज सिंह, और दीपक पांडुरंग राणे द्वारा निर्मित, संजय जाधव द्वारा निर्देशित, बी लाइव प्रोडक्शंस के सहयोग से बनी ड्रिमींग ट्वेंटी फोर सेवन की फिल्म लकी में अभय महाजन और दीप्ती सती मुख्य भूमिका में नजर आयेंगें. यह फिल्म 7 फरवरी, 2019 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली हैं.

अंकिता लोखंडे का सपना, इस एक्टर संग करना चाहती हैं फिल्म

अंकिता लोखंडे इन दिनों अपनी डेब्यू फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ को लेकर चर्चा में हैं. फिल्म रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित है. इसमें अंकिता ने ‘झलकारीबाई’ का किरदार निभाया है. एक्ट्रेस कंगना रनौत, लक्ष्मीबाई की भूमिका में हैं. यह फिल्म 25 जनवरी को रिलीज हो रही है. एक इंटरव्यू में अंकिता ने बताया कि वो भविष्य में किस एक्टर के साथ काम करना चाहती हैं.

 

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जब अंकिता से पूछा गया कि वो किस एक्टर के साथ काम करना चाहेंगी, उन्होंने कहा, “मेरे लिए कंटेंट ही हीरो है और किसी के भी अपोजिट काम करने के लिए तैयार हूं. लेकिन मैं डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की फिल्म में जरूर काम करना चाहूंगी. उन्हें सिनेमा की बहुत अच्छी जानकारी है, बहुत सेंस है. एक बार मैं संजय लीला भंसाली की फिल्म में सलमान खान के साथ अपोजिट काम करना चाहती हूं.”

अंकिता ने ये भी कहा कि मैंने मेरी लाइफ के 6 साल टीवी के लिए दिए हैं. लोग मुझे अंकिता से पवित्र रिश्ता की अर्चना के रूप में ज्यादा जानते हैं. मैं टीवी में भी आगे काम करती रहूंगी. टीवी के लिए काम करना बंद नहीं करूंगी.”

पर्सनल लाइफ की बात करें तो इन दिनों अंकिता बिजनेसमैन विकी जैन के साथ रिलेशलनशिप में हैं. एक्ट्रेस ने खुद इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो रिलेशनशिप में हैं. लेकिन अभी शादी के बारे में नहीं सोच रही हैं.

बौम्बैरिया : यातनादायक फिल्म

रेटिंग : एक स्टार

गवाह की सुरक्षा के अहम मुद्दे पर अति कमजोर पटकथा व घटिया दृष्यों के संयोजन के चलते ‘बौम्बैरिया’ एक घटिया फिल्म बनकर उभरती है. बिखरी हुई कहानी, कहानी का कोई ठोस प्लौट न होना व कमजोर पटकथा के चलते ढेर सारे किरदार और कई प्रतिभाशाली कलाकार भी फिल्म ‘‘बौम्बैरिया को बेहतर फिल्म नहीं बना पाए.

फिल्म की शुरूआत होती है टीवी पर आ रहे समाचारनुमा चर्चा से होती है. चर्चा पुलिस अफसर डिमैलो के गवाह को सुरक्षा मुहैया कराने और अदालत में महत्वपूर्ण गवाह के पहुंचने की हो रही है.फिर सड़क पर मेघना (राधिका आप्टे) एक रिक्शे से जाते हुए नजर आती हैं. सड़के के एक चौराहे पर एक स्कूटर की उनके रिक्शे से टक्कर होती है और झगड़ा शुरू हो जाता है. इसी झगड़े के दौरान एक अपराधी मेघना का मोबाइल फोन लेकर भाग जाता है. और फिर एक साथ कई किरदार आते हैं. पता चलता है कि मेघना मशहूर फिल्म अभिनेता करण (रवि किशन) की पीआर हैं. उधर जेल में वीआईपी सुविधा भोग रहा एक नेता (आदिल हुसैन )अपने मोबाइल फोन के माध्यम से कई लोगों के संपर्क में बना हुआ है. वह नहीं चाहता कि महत्वपूर्ण गवाह अदालत पहुंचे. पुलिस विभाग में उसके कुछ लोग हैं, जिन्होने कुछ लोगों के फोन टेप करने रिक्शे किए है और इन सभी मोबाइल फोन के बीच आपस में होने वाली बात नेता जी को अपने मोबाइल पर साफ सुनाई देती रहती है. पुलिस कमिश्नर रमेश वाड़िया (अजिंक्य देव) को ही नहीं पता कि फेन टेप करने की इजाजत किसने दे दी. नेता ने अपनी तरफ से गुजराल (अमित सियाल) को सीआईडी आफिसर बनाकर मेघना व अन्य लेगों के खिलाफ लगा रखा है. अचानक पता चलता है कि फिल्म अभिनेता  करण की पत्नी मंत्री ईरा (शिल्पा शुक्ला) हैं और वह पुनः चुनाव लड़ने जा रही हैं, तो वहीं एक प्लास्टिक में लिपटा हुआ पार्सल की तलाश नेता व गुजराल सहित कईयों को है, यह पार्सल स्कूटर वाले भ्रमित कूरियर प्रेम (सिद्धांत कपूर) के पास है.तो वहीं एक रेडियो स्टेशन पर दो विजेता अभिनेता करण कपूर से मिलने के लिए बैठे है, पर अभिनेता करण कपूर झील में नाव की सैर कर रहे हैं. तो एक पात्र अभिषेक (अक्षय ओबेराय) का है, वह मेघना के साथ क्यों रहना चाहता है, समझ से परे हैं. कहानी इतनी बेतरीब तरीके से चलती है कि पूरी फिल्म खत्म होने के बाद भी फिल्म की कहानी समझ से परे ही रह जाती है. यह सभी पात्र मुंबई की चमत्कारिक सड़क पर चमत्कारिक ढंग से मिलते रहते हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है,तो नेता के किरदार में आदिल हुसैन को छोड़कर बाकी सभी कलाकार खुद को देहराते हुए नजर आए हैं.

पिया सुकन्या निर्देशित फिल्म ‘बौम्बैरिया’ में संवाद है कि : ‘मुंबई शहर संपत्ति के बढ़ते दामों और बेवकूफों की सबसे  बड़ी तादात वाला शहर है.’’शायद इसी सोच के साथ उन्होने एक अति बोर करने वाली फिल्म का निर्माण कर डाला. पिया सुकन्या की सोच यह है कि मुंबई शहर के लोगां के दिलां में अराजकता बसती है. पिया सुकन्या ने दर्शकों को एक थकाउ व डरावने खेल यानी कि ‘पजल’ को हल करने के लिए छोड़कर अपने फिल्मकार कर्म की इतिश्री समझ ली है.

एक घंटा अड़तालिस मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘बौम्बेरिया’ का निर्माण माइकल ई वार्ड ने किया है. फिल्म की निर्देशक पिया सुकन्या, पटकथा लेखक पिया सुकन्या, माइकल ईवार्ड और आरती बागड़ी, संगीतकार अमजद नदीम व अरको प्रावो मुखर्जी,कैमरामैन कार्तिक गणेश तथा इसे अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं- राधिका आप्टे, आदिल हुसैन, सिद्धांत कपूर, अक्षय ओबेराय, अजिंक्य देव, शिल्पा शुक्ला,रवि किशन व अन्य.

व्हाय चीट इंडिया : आत्मा विहीन फिल्म

रेटिंग : डेढ़ स्टार

भारतीय शिक्षा प्रणाली को लेकर अब तक कई फिल्में बन चुकी हैं, जिनमें बच्चों को किस तरह की शिक्षा दी जानी चाहिए, इस पर बातें की जा चुकी हैं. फिर चाहे ‘थ्री इडीयट्स’हो या ‘तारे जमीन पर हो’ या ‘निल बटे सन्नाटा’. मगर शिक्षा तंत्र को चीटिंग माफिया किस तरह से खोखला कर रहा है, इस मुद्दे पर अभिनेता से निर्माता बने इमरान हाशमी फिल्म ‘‘व्हाय चीट इंडिया’’ लेकर आए हैं. कहानी के स्तर पर फिल्म में कुछ भी नया नही है. फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है, उससे हर आम इंसान परिचित है. माना कि फिल्म हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में व्याप्त कुप्रथा, घोटाले, भ्रष्टाचार आदि को उजागर करती है, इमरान हाशमी ने इस अहम मुद्दे पर एक असरहीन फिल्म बनाई है. यह व्यंगात्मक फिल्म पूरे सिस्टम व शिक्षा प्रणाली के दांत खट्टे कर सकती थी. यह फिल्म शिक्षा संस्थानों को चलाने वालो के परखच्चे उड़ा सकती थी, मगर फिल्म ऐसा करने में पूरी तरह से असफल रही है.

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फिल्म की कहानी झांसी निवासी राकेश सिंह उर्फ रौकी (इमरान हाशमी) के इर्द गिर्द घूमती है. रौकी का अपना एक शालीन व सभ्य परिवार है. मगर रौकी अपने पिता व परिवार के सपनों के बोझ तले दबकर झांसी से जौनपुर आकर कोचिंग क्लास खोलकर शिक्षा तंत्र में चीटिंग के ऐसे व्यवसाय पर चल पड़ता है, जिसे वह सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी सही मानता है. रौकी पूरे उत्तर प्रदेश का बहुत बड़ा चीटिंग माफिया बन चुका है. उसने शिक्षा तंत्र में अपनी अंदर तक गहरी पैठ बना ली है और अब शिक्षा तंत्र की खामियों का भरपूर फायदा उठा रहा है. उसके संबंध विधायकों से लेकर मंत्रियों तक हैं. अपने चीटिंग के व्यवसाय में वह गरीब और मेधावी छात्रों का उपयोग करता है. इन छात्रों को एक धनराशि देकर खुद को अपराधमुक्त मान लेता है. फिर यह गरीब मेधावी छात्र अपनी बुद्धि व अपनी पढ़ाई के आधार पर नकारा व अमीर छात्रों के बदले परीक्षा देते हैं. रौकी इन्ही नकारा व अमीर बच्चों के माता पिता से एक मोटी रकम वसूलता रहता है.

एक दिन उसे पता चलता है कि उसके शहर का एक लड़का सत्येंद्र दुबे उर्फ सत्तू (स्निग्धादीप चटर्जी) कोटा से पढ़ाई करके इंजीनियिंरंग प्रवेश परीक्षा में काफी बेहतरीन नंबर लाता है. अब पूरे शहर में उसका जलवा हो जाता है. रौकी तुरंत सत्तू से मिलता है और उसे सुनहरे सपने दिखाते हुए एक लड़के के लिए इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा देने के लिए उसे पचास हजार रूपए देने की बात करता है. परिवार की आर्थिक हालत देखते हुए सत्तू उसकी बातों में फंस जाता है. धीरे धीर सत्तू की बहन नुपुर (श्रेया धनवंतरी) भी राकेश सिंह से प्रभावित हो जाती है और उसे अपने भावी पति के रूप में देखने लगती है. उधर रौकी धीरे धीरे सत्तू में ड्रग्स व लड़की सहित हर बुरी आदत का शिकार बना देता है. एक दिन कुछ अमीर लोगों की शिकायत पर पुलिस अफसर कुरैशी उसे पकड़ते हैं, मगर विधायक जी उसे छुड़ा लेते हैं. इसी बीच ड्रग्स लेने के चक्कर में सत्तू को कौलेज से निकाल दिया जाता है, तब रौकी उसे फर्जी डिग्री देकर भारत से बाहर कतार में नौकरी करने के लिए भेजकर सत्तू व उसके परिवार से संबंध खत्म कर लेता है. कतार में सत्तू की डिग्री फर्जी है यह राज खुल जाता है. सत्तू किसी तरह अपने घर वापस आकर घर के अंदर ही आत्महत्या कर लेता है. इसी बीच पुलिस अफसर कुरैशी की मुलाकात नुपुर से होती है. दोनों राकेश सिंह को सबक सिखाने की ठान लेते हैं. इधर राकेश सिंह ने अपने चीटिंग के व्यवसाय का जाल मुंबई में फैला लिया है. अब वह एमबीए का पर्चा लीक कर करोड़ो कमा रहा है. नुपर नौकरी करने के लिए मुंबई पहुंचती है और राकेश के संपर्क में आती है, दोनों के बीच प्रेम संबंध शुरू होते हैं. पर एक दिन नुपुर की ही मदद से कुरैशी, राकेश सिंह उर्फ रौकी को सबूत के साथ गिरफ्तार करता है. अदालत में रौकी खुद को रौबिनहुड साबित करने का प्रयास करते हुए शिक्षा तंत्र की बुराइयों पर भाषणबाजी करता है. रौकी को सजा हो जाती है. जेल में विधायक जी मिलते हैं. अंत में पता चलता है कि रौकी ने अपने पिता के नाम पर बहुत बड़ा इंजीनियरिंग कौलेज खोल दिया है. अब उसके पिता खुश हैं. तथा रौकी का धंधा उसी गति से चल रहा है.

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कमजोर पटकथा व विषय के घटिया सिनेमाई कारण के चलते पूरी फिल्म मूल मुद्दे को सही परिप्रेक्ष्य में पेश नहीं कर पाती है. निर्देशक सौमिक सेन ने फिल्म के हीरो इमरान हाशमी की एंट्री एक सिनेमाघर में गुंडों से मारपीट के साथ दिखायी है, जो कि बहुत ही घटिया है और यह काम उसके व्यवसाय से भी परे है. जबकि बिना मारपीट के भी इस दृश्य में एक धूर्त ,कमीने, चालाक व विधायकों से संबंध रखने वाले इंसान रौकी का परिचय दिया जा सकता था. पर सिनेमा की सही समझ न रखने वाले सौमिक सेन से इस तरह की उम्मीद करना ही गलत है. बतौर लेखक सौमिक सेन पुलिस औफिसर कुरैशी के किरदार को भी ठीक से चित्रित नहीं कर पाए. कितनी अजीब सी बात है कि फिल्म हर इंसान को चालाक होने यानी कि गलत काम करने की प्रेरणा देती है. फिल्म के अंत में जिस तरह रौकी अपने पिता के नाम पर कौलेज खोलकर अपना काम करता हुआ दिखाया गया है, उससे यही बात उभरती है कि बुरे काम का बुरा नतीजा नहीं होता. फिल्म में लालच व लालची होने का महिमा मंडन किया गया है. फिल्मकार इस बात के लिए अपनी पीठ थपथपा सकते हैं कि उन्होंने आम फिल्मों की तरह अपनी फिल्म ‘‘व्हाय चीट इंडिया’’ में गलत इंसान का मानवीयकरण करते हुए उसे प्रायश्चित करते नहीं दिखाया.

फिल्मकार चीटिंग करने वालों के पकड़े जाने पर उनकी मानसिकता को गहराई से पकड़ने में बुरी तरह से नाकाम रहे हैं.

कथानक के स्तर पर काफी विरोधाभास है. रौकी के पिता का किरदार भी आत्मविरोधाभासी बनकर उभरता है, पूरी फिल्म में वह अपने बेटे के खिलाफ हैं, पर अंत में उनके नाम पर कौलेज के खुलते ही वह रौकी के सबसे बड़े प्रशंसक बन जाते हैं. कम से कम भारत जैसे देश में पुराने समय के लोगों की सोच इस तरह नही बदलती है. कुल मिलाकर पटकथा के स्तर पर इतनी कमियां हैं कि उन्हें गिनाने में कई पन्ने भर जाएंगे. फिल्मकार ने शिक्षा जगत की खामियों व चीटिंग माफिया जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को बहुत ही गलत ढंग से पेशकर इस मुद्दे की अहमियत को ही खत्म कर दिया.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो सत्तू के किरदार में स्निग्धदीप चटर्जी ने काफी अच्छा अभिनय किया है और उससे काफी उम्मीदें जगती हैं.. इमरान हाशमी बहुत प्रभावित नहीं करते, इसके लिए कुछ हद तक लेखक व निर्देशक भी जिम्मेदार हैं. वेब सीरीज ‘‘लेडीज रूम’’से अपनी प्रतिभा को साबित कर चुकीं अभिनेत्री श्रेया धनवंतरी को इस फिल्म में सिर्फ मुस्कुराने के अलावा कुछ करने का अवसर ही नहीं दिया गया, यह भी लेखक व निर्देशक की कमजोरियों के चलते ही हुआ. फिल्म खत्म होने के बाद सवाल उठता है कि फिल्मों में करियर शुरू करने के लिए श्रेया धनवंतरी ने ‘व्हाय चीट इंडिया’को क्या सोचकर चुना. छोटे किरदारों में कुछ कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय किया है.

दो घंटे एक मिनट की अवधि वाली फिल्म  ‘‘व्हाय चीट इंडिया’’ का निर्माण इमरान हाशमी, भूषण कुमार, किशन कुमार, तनुज गर्ग, अतुल कस्बेकर और प्रवीण हाशमी ने किया है. फिल्म के लेखक व निर्देशक सौमिक सेन, संगीतकार रोचक कोहली, गुरू रंधावा, अग्नि सौमिक सेन, कुणाल रंगून, कैमरामैन वाय अल्फांसो रौय तथा फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं- इमरान हाशमी, श्रेया धनवंतरी, स्निग्धदीप चटर्जी.

वो जो था एक मसीहा-मौलाना आजाद : महज एक डाक्यूमेंट्री

रेटिंगः डेढ़ स्टार

इन दिनों बौलीवुड में बायोपिक फिल्मों का दौर चल रहा है. ऐसे ही दौर में लेखक, निर्माता, अभिनेता व सहनिर्देशक डा. राजेंद्र संजय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व देश के प्रथम शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की बायोपिक फिल्म लेकर आए हैं. फिल्म में उनके बचपन से मृत्यु तक की कथा का समावेश है, मगर मनोरंजन विहीन इस फिल्म में मौलाना आजाद का व्यक्तित्व उभरकर नही आ पाता. उनके जीवन की कई घटनाओं को बहुत ही सतही अंदाज में चित्रित किया गया है.

फिल्म पूर्ण रूपेण डाक्यूड्रामा नुमा है. मौलाना आजाद का पूरा नाम अबुल कलाम मुहियुद्दीन अहमद था. फिल्म की कहानी एक शिक्षक द्वारा कुछ छात्रों के साथ मौलाना आजाद की कब्र पर पहुंचने से शुरू होती है, पर चंद मिनटों में ही वह शिक्षक (लिनेश फणसे) स्वयं मौलाना आजाद (लिनेश फणसे) के रूप में अपनी कहानी बयां करने लगते हैं. फिर पूरी फिल्म में मौलाना आजाद स्वयं अपने बचपन से मौत तक की कहानी उन्ही छात्रों को सुनाते हैं.

मौलाना आजाद का बचपन बड़े भाई यासीन, तीन बड़ी बहनों जैनब, फातिमा और हनीफा के साथ कलकत्ता (कोलकाता) में गुजरा. महज 12 साल की उम्र में उन्होंने हस्तलिखित पत्रिका ‘नैरंग ए आलम’ निकाली, जिसे अदबी दुनिया ने खूब सराहा. हिंदुस्तान से अंग्रेजों को भगाने के लिए वे मशहूर क्रांतिकारी अरबिंदो घोष के संगठन के सक्रिय सदस्य बनकर, उनके प्रिय पात्र बन गए. जब तक उनके पिता जिंदा रहे, तब तक वह अंग्रेजी नही सीख पाए, मगर पिता के देहांत के बाद उन्होंने अंग्रेजी भी सीखी. उन्होंने एक के बाद एक दो पत्रिकाओं ‘अल हिलाल’और ‘अल बलाह’का प्रकाशन किया, जिनकी लोकप्रियता से डरकर अंग्रेजी हुकूमत ने दोनों पत्रिकाओं का प्रकाशन बंद करा उन्हें कलकत्ता से तड़ीपार कर रांची में नजरबंद कर दिया. चार साल बाद 1920 में नजरबंदी से रिहा होकर वह दिल्ली में पहली बार महात्मा गांधी (डा. राजेंद्र संजय) से मिले और उनके सबसे करीबी सहयोगी बन गए.

उनकी प्रतिभा और ओज से प्रभावित जवाहरलाल नेहरू (शरद शाह) उन्हें अपना बड़ा भाई मानते थे. पैंतीस साल की उम्र में आजाद कांग्रेस के सबसे कम उम्र वाले अध्यक्ष चुने गए. गांधीजी की लंबी जेल यात्रा के दौरान आजाद ने दो दलों में बंट चुकी कांग्रेस को फिर से एक करके अंग्रेजों के तोडू नीति को नाकाम कर दिया. उन्होंने सायमन कमीशन का विरोध किया. 1944 व 1945 के दौरान जब वह कई दूसरे नेताओ के साथ जेल में बंद थे, तभी उनकी पत्नी जुमेला का निधन हुआ. देश को आजादी मिलने के बाद केंद्रीय शिक्षामंत्री के रूप में उन्होंने विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में क्रांति पैदा करके उसे पश्चिमी देशों की पंक्ति में ला बैठाया. वह आजीवन हिंदू मुस्लिम एकता के लिए संघर्ष करते रहे.

सुशांत सिंह राजपूत करेंगे इस फाइटर का किरदार

बौलीवुड में मौलिक काम करने की बजाय सभी नकल करने पर आमादा रहते हैं. अब लगातार असफलता का दंश झेल रहे अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी उसी श्रेणी में आ गए हैं. वह पौढ़ी गढ़वाल के शहीद जसवंत सिंह रावत के जीवन पर फिल्म ‘राइफलमैन’ में राइफल मैन जसवंतसिंह रावत का किरदार निभाने जा रहे हैं. सवाल यह है कि सुशांत सिंह राजपूत को अब यह ख्याल क्यों आया?

ज्ञातव्य है कि 18 जनवरी को जसवंत सिंह रावत के जीवन व कृतित्व पर आधारित लेखक, निर्माता व निर्देशक अविनाश धानी की फिल्म ‘72 आवर्सः द मार्टीयर हू नेवर डाइड’ प्रदर्शित हो चुकी है. इस फिल्म में अविनाश धानी ने ही जसवंत सिंह रावत का किरदार निभाया है. मजेदार बात यह है कि यह फिल्म पिछले एक साल से सुर्खियों में रही है, मगर अब जब यह फिल्म सिनेमा घरों में पहुंची, तो सुशांत सिंह राजपूत ने इस किरदार को निभाने की घोषणा की.

सुशांत सिंह राजपूत का दावा है कि वह काफी लंबे समय से राइफलमैन जसवंत सिंह रावत पर शोधकार्य कर रहे थे.

कौन थे शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह रावत

1962 में भारत-चीन युद्ध के समय अरूणाचल प्रदेश के नाफा बौर्डर पर तीन सौ चीनी सैनिकों के साथ लगातर 72 घंटे तक युद्ध करते हुए राइफलमैन जसवंत सिंह रावत ने शहादत पायी थी. पौढ़ी गढ़वाल निवासी राइफलमैन/सैनिक जसवंत सिंह रावत ने चीनी सैनिकों के खिलाफ जंग पर जाते समय कहा था-‘‘हम लोग लौटें ना लौटें, ये बक्से लौटें न लौटें, लेकिन हमारी कहानियां लौटती रहेंगी…’ उन्हे महावीर चक्र से भी नवाजा गया था.

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