प्रीति की कड़वी गोली : भाग 1

लेखक- रघुनाथ सिंह लोधी 

लौकडाउन से अनलौक की ओर कदम बढ़ते ही महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में यूं तो अपराध की जबरदस्त ताक धिना धिन सुनी जा रही थी. हत्याओं का सिलसिला सा बन गया था. राज्य के गृहमंत्री के गृहनगर की इस हालत पर राजनीतिक तीरतलवार चलाने वाले तरकश कसने लगे थे. पुलिस और प्रशासन पर तोहमत लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे.

कोरोना योद्धा के तौर पर शाबासी लूट चुकी शहर पुलिस ऐसी किसी तोहमत को तवज्जो नहीं देना चाहती थी. दावा यही कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की न जरूरत थी न ही होनी चाहिए.

शहर पुलिस ने बड़ेबड़े अपराधियों के अपराध के आशियानों को कुछ समय में ही बड़े स्तर पर ध्वस्त कर दिया था. ऐसे में एक मामला अचानक चर्चा में हौट हुआ. यह मामला चार सौ बीसी के खेल में पकड़ी गई प्रीति का.

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राजनीति के गलियारे में चहलकदमी के साथ समाजसेवा का नया मौडल बनी घूमती उस महिला के बारे में बड़ी चर्चा ये थी कि कई पुलिस वाले साहब उस के दबेल यानी उस के दबाव में थे. लिहाजा उस ने शहर व शहर के आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर दबावतंत्र बना कर कइयों की जिंदगी में जहर घोल दिया. पुलिस कभी उस का सत्कार करती थी तो कभी उस से सत्कार कराती थी.

समाजसेवा के चोले में हनी ट्रैपर

घटना 5 जून, 2020 की है. एक शिकायतकर्ता पांचपावली पुलिस स्टेशन में बेबस मुद्रा में मदद की याचना ले कर पहुंचा. शिकायतकर्ता का नाम था उमेश उर्फ गुड्डू तिवारी. पांचपावली क्षेत्र में ही रहने वाले गुड्डू ने बताया कि उस का जीवन एकदम सामान्य था. वह एक स्कूल का कर्मचारी है. हर माह मिलने वाले वेतन से उस के परिवार का हंसीखुशी गुजारा हो रहा था. लेकिन जब से वह प्रीति की सोहबत में आया, उस की दुनिया लुटने लगी.

उमेश उर्फ गुड्डू ने उस वक्त को कोसा है, जब वह फेसबुक पर प्रीति से जुड़ा था. प्रीति का आकर्षक फोटो देख गुड्डू ने उस पर सहज कमेंट किया था. उस कमेंट के जवाब में प्रीति ने फेसबुक पर ही गुड्डू को पर्सनल मैसेज भेज कर मोबाइल फोन नंबर का आदानप्रदान कर लिया. गुड्डू इस बात को ले कर भी खुद को दोष देता है कि एकदो बार फोन पर बात के बाद वह उस अनजानी महिला के सामने पूरी तरह से खुल गया.

उस ने अपने घरपरिवार की बातें साझा कर दीं. यहां तक कि वैवाहिक जीवन में भी उस ने अरमानों के सूखे कंठ की वेदना को स्वर दे दिया.

प्रीति ने गुड्डू को बताया कि नागपुर के जिस इलाके में वह रहता है, उस के पास ही वह भी रहती है. उस ने अपनी पहचान के दायरे के ट्रेलर के तौर पर कुछ लोगों के नाम गिनाए.

कुछ दिनों बाद दोनों के मिलने का सिलसिला मोहब्बत की परवाज भरने लगा. कभी प्रीति मिलने पहुंचती तो कभी गुड्डू को बुला लेती थी.

एक दिन प्रीति ने गुड्डू से साफ कह दिया कि वह उस के साथ जीवन गुजारने को तैयार है. बशर्ते उसे अपनी पत्नी को तलाक देना होगा. भविष्य की योजना भी उस ने गुड्डू से साझा की. 50 वर्षीय गुड्डू जिंदगी के नए सफर पर चलने के लिए न केवल राजी हुआ बल्कि अति उत्साहित भी था.

माल मिलते ही बदला रंग

गुड्डू की शिकायत का लब्बोलुआब यह था कि प्रीति मनचाहा धन मिलते ही तेवर बदलने लगती थी. बतौर गुड्डू प्रीति ने उस से फ्लैट खरीदने के लिए रुपयों की मांग की थी. उस का कहना था कि जब तक गुड्डू की पत्नी का तलाक नहीं हो जाता, तब तक दोनों उस फ्लैट में मिलतेजुलते रहेंगे.

गुड्डू ने अग्रिम के तौर पर प्रीति को फ्लैट के लिए 2.60 लाख रुपए दे दिए. तय समय पर फ्लैट नहीं लिया गया तो गुड्डू ने रुपए वापस मांगे. बस यहीं से गुड्डू पर दबाव का नया सिलसिला चल पड़ा. फ्लैट के नाम पर लिए गए रुपए वापस लौटाना तो दूर प्रीति ने रुपयों की नई पेशकश रख दी.

उस ने कहा कि सोशल मीडिया पर जितनी भी हौट बातें हुई हैं और फोन पर लाइव चैटिंग हुई है, उन का सारा हिसाब उस के पास है. अगर वह उस रिकौर्डिंग को पुलिस को सौंप दे तो कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा.

प्रीति की सीधी धमकी यह भी थी कि ज्यादा चूंचपड़ मत करना. मेरे हाथ काफी लंबे हैं. चुटकी बजा कर ऐसी जगह पर घुसेड़वा दूंगी, जहां से जीवन भर नहीं निकल पाएगा. और हां, अपनी इज्जत बचानी हो तो 5 लाख रुपए तैयार रखना.

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प्रीति के ठग अंदाज का जिक्र करते हुए गुड्डू ने बताया कि उस ने डर के मारे प्रीति को 2.42 लाख रुपए और दिए, जिस से वह कहीं मुंह न खोले. लेकिन माल पाने के बाद तो वह और भी रंग बदलने लगी. रुपए और गिफ्ट ले कर यहांवहां बुलाने लगी.

उस से दूर होने का प्रयास किया तो वह घर में आ कर पिटवा देने की धमकी देने लगी. कुछ ही दिनों में उस ने नकदी और गिफ्ट के रूप में 14.87 लाख रुपए ऐंठ लिए. आखिरकार उसे अपने बचाव में पुलिस की शरण लेनी पड़ी.

पुलिस ने उस की शिकायत की शुरुआती पड़ताल करने के बाद प्रीति के खिलाफ भादंवि की धारा 420 व धारा 384 हफ्तावसूली के तहत केस दर्ज कर लिया.

मामला दर्ज करने के बाद पुलिस ने प्रीति के कामठी रोड स्थित प्रियदर्शिनी अपार्टमेंट के घर पर छापेमारी की. प्रीति वहां से चंपत हो गई थी. पुलिस ने उस के घर से काफी सामान और दस्तावेज बरामद किए.

खुला भेद तो पुलिस भी रह गई दंग

जिस पांचपावली पुलिस स्टेशन में प्रीति का आनाजाना लगा रहता था, उसी थाने की पुलिस उस के कारनामों की फेहरिस्त देख कर दंग रह गई. रिकौर्ड खंगालने पर पता चला कि प्रीति धोखाधड़ी के मामले में जेल की यात्रा कर चुकी है. उस के आपराधिक क्षेत्र के छोटेबड़े लोगों से भी करीबी संबंध है. उस के खिलाफ शहर के सीताबर्डी पुलिस स्टेशन में भादंवि की धारा 420, 406, 468, 467, 506, 507, 34 के  तहत प्रकरण दर्ज है.

धोखाधड़ी का वह प्रकरण शहर में काफी चर्चित हुआ था. इस के अलावा भंडारा के पुलिस स्टेशन में भी भादंवि की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज था. शहर पुलिस के बड़े अधिकारियों के लिए यह जानकारी काफी चौंकाने वाली थी कि जिस महिला को वे केवल सामाजिक कार्यकर्ता समझ रहे थे वह ब्लैकमैलर है. यही नहीं वह पुलिस से संबंधों का नाजायज फायदा उठाती रहती है.

शहर पुलिस की ओर से प्रीति के अपराधों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी गई. बाकायदा प्रैस नोट जारी कर आह्वान किया गया कि इस महिला ने किसी से धोखाधड़ी की हो, तो तत्काल पुलिस से संपर्क करे.

इस बीच प्रीति फरार हो गई थी. पुलिस उसे ढूंढती रही. करीब हफ्ते भर प्रीति बचाव का रास्ता खोजती रही. उस ने वकील के माध्यम से जिला सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. कोशिश यही थी कि पुलिस गिरफ्तारी से बचते हुए उसे न्यायालय से जमानत मिल जाए. लेकिन उस की कोशिशों पर पानी फिर गया. न्यायालय ने उस की अरजी खारिज कर दी.

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लिहाजा उस ने 13 जून को पांचपावली पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण किया. उसे पुलिस तक पहुंचाने वालों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अलावा पुलिस के कुछ नुमाइंदे भी शामिल थे.

जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

प्रीति की कड़वी गोली

मौत के आगोश में समाया ‘फूल’

मौत के आगोश में समाया ‘फूल’ : भाग 2

लगभग एक घंटे बाद अनुपम लौटा तो मिठाई, मटन के अलावा शराब की बोतल थी. पहले सब ने मिठाई खाई. फिर मुन्नी ने अपने हाथ से मीट और चावल पकाए. खाना तैयार हो गया तो अनुपम शराब की बोतल खोल कर पीने बैठ गया. जानबूझ कर वह धीरेधीरे चुस्कियां ले रहा था ताकि बच्चे खापी कर सो जाएं. रही मुन्नी तो अनुपम ने उसे रसीली बातों से जगा रखा था.

मुन्नी जानती थी कि अनुपम के मन में क्या है. लिहाजा रतजगा के लिए उस ने खुद को मानसिक तौर पर तैयार कर लिया था और अनुपम की बातों का खूब आनंद ले रही थी.

मुन्नी ने की पहल

बच्चे सो गए, लेकिन अनुपम शराब की चुस्कियां लेते हुए मुन्नी से गपशप करता रहा. मुन्नी को उम्मीद थी कि अनुपम उस पर हाथ डालेगा, लेकिन जब उस ने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया तो उस ने ही पहल की, ‘‘बस करो, शराब बहुत हो गई है.’’

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‘‘एक पैग और पी लूं,’’ अनुपम उस के हसीन बदन को लालच से देखने लगा, ‘‘उस के बाद गोश्त खाऊंगा.’’

मुन्नी भी कम नहीं थी. आंखें नचाते हुए उस ने पूछा, ‘‘कैसा गोश्त, कच्चा या पका हुआ.’’

अनुपम रोमांच से भर गया, ‘‘आदमी जब भूखा हो, तब कच्चा गोश्त भी हलाल होता है.’’

‘‘गोश्त खाना है तो सामने से शराब की बोतल हटा दो.’’ मुन्नी ने बड़े मदमाते अंदाज में कहा, ‘‘कहीं ऐसा न हो कि शराब ज्यादा हो जाए और तुम बोटियां चबाने लायक ही न रहो.’’

अनुपम ने ढक्कन बंद कर के बोतल सामने से हटा दी और मुन्नी की कलाई पकड़ कर उसे अपनी ओर खींचा. मुन्नी झट से उस की गोद में आ गिरी और अनुपम के गले में बांहों का हार डाल दिया.

कुछ देर आंखों से आंखें मिलीं, फिर होंठों से होंठ मिल गए. शराब अनुपम ने पी थी, गंध मुन्नी की सांसों में आने लगी. इस के बाद उन के बीच कोई दीवार न रही. वे दोनों एकदूसरे में समा गए. आनंद की मंजिल पर पहुंचने के बाद ही दोनों अलग हुए. कम उम्र के कुंवारे युवा जोश को अपने अंदर महसूस कर के मुन्नी निहाल हो गई.

इस के बाद तो उन के बीच बेरोकटोक संबंधों का यह सिलसिला चलता रहा.

देश में लौकडाउन हुआ तो सब काम रुक गए. इस वजह से फूलचंद्र भी होशियारपुर से अपने गांव आ गया.

27 मई की रात अचानक फूलचंद्र गायब हो गया. उस का पता न लगने पर रात करीब साढ़े 9 बजे मुन्नी ने गांव में ही रहने वाले अपने देवर हुकुमचंद्र को फोन कर के बताया कि उन के भाई कहीं चले गए हैं उन का पता नहीं चल रहा है. इस पर हुकुमचंद्र चौंक गए. उस की गांव में तलाश की लेकिन कुछ पता नहीं चला.

अगले दिन सुबह गांव के लोगों ने बीरबल कुट्टी में हनुमान मंदिर के प्रांगण में फूलचंद्र की लाश पड़ी देखी तो परिजनों को सूचना दी. घटनास्थल से फूलचंद्र के मकान की दूरी लगभग 500 मीटर थी. पता चलते ही मुन्नी बच्चों के साथ वहां पहुंच गई. फूलचंद्र के तीनों भाई भी मौके पर पहुंच गए. मुन्नी अपने पति की लाश देख कर रोनेबिलखने लगी.

इसी बीच किसी ने मल्हीपुर थाने में घटना की सूचना दे दी थी. सूचना मिलने पर थाने के इंसपेक्टर देवेंद्र पांडेय ने घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दी. फिर अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

घटनास्थल पर पहुंच कर उन्होंने लाश का निरीक्षण किया. मृतक फूलचंद्र के सिर व गले पर किसी तेज धारदार हथियार से प्रहार किए गए थे, जिन के गहरे घाव हो गए थे और काफी खून बह गया था. लाश के आसपास काफी मात्रा में खून पड़ा था.

लाश का निरीक्षण करने के बाद इंसपेक्टर देवेंद्र पांडेय ने मृतक की पत्नी मुन्नी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस के पति शाम घर से निकले थे, लेकिन देर रात होने पर भी वापस नहीं लौटे तो उसे चिंता हुई. उस ने अपने देवर हुकुमचंद्र को यह बात बताई. रात में ही उन्होंने खोजा लेकिन कुछ पता नहीं चला, सुबह लाश मिल गई.

मुन्नी ने अपना शक गांव के भुजौली, अलखराम, कब्बे और मंशाराम पर जताया कि इन चारों ने ही उस के पति की हत्या की है. उन से साल भर पहले छप्पर डालने को ले कर विवाद हुआ था. पूछताछ के बाद इंसपेक्टर पांडेय ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया.

फिर थाने आ कर मुन्नी की तहरीर पर भुजौली, अलखराम, कब्बे और मंशाराम के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. प्रारंभिक जांच में इंसपेक्टर देवेंद्र पांडेय को गांव के लोगों से मुन्नी के अवैध संबंध अनुपम वर्मा नाम के युवक से होने की बात पता चली.

इस लाइन पर उन्होंने अपनी जांच आगे बढ़ाई. उन्होंने मुन्नी के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस की एक नंबर पर घंटों बात होने का पता चला. वह नंबर अनुपम वर्मा का था.

दोनों के फोन नंबरों की लोकेशन ट्रेस की गई तो घटना की रात एक साथ मिली. इस का मतलब यह था कि फूलचंद्र की हत्या में मुन्नी और उस के प्रेमी अनुपम का हाथ है.

30 मई, 2020 को इंसपेक्टर देवेंद्र पांडेय ने गौहनिया गांव से अनुपम वर्मा को गिरफ्तार कर लिया. उस के बाद मुन्नी को घर से गिरफ्तार कर लिया. थाने में कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. पूछताछ के बाद दोनों का साथ देने वाले श्रीराम को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

लौकडाउन के कारण फूलचंद्र घर लौट आया तो मुन्नी और अनुपम की मौजमस्ती पर ब्रेक लग गए थे. फूलचंद्र की मौजूदगी उन्हें खलने लगी. अब उन के संबंधों के बीच में फूलचंद्र नाम की दीवार खड़ी थी. इस दीवार को हटाए बिना उन का मिलन संभव नहीं था. ऐसे में मुन्नी और अनुपम ने फूलचंद्र को मौत के आगोश में सुलाने का फैसला कर लिया.

23 मई को अनुपम अपने एक साथी के साथ फूलचंद्र के घर आया. तीनों ने साथ बैठ कर शराब पी. तभी अनुपम ने चाकू से उस का गला रेतने के लिए फूलचंद्र के गले पर हलका चलाया ही था कि मुन्नी ने उसे यह कह कर रोक दिया कि घर के अंदर ऐसा करना ठीक नहीं.

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फूलचंद्र के गले में घाव हो गया था, जिस से खून बहने लगा. इस पर मुन्नी उसे गांव के ही एक झोलाछाप डाक्टर के पास ले गई और उस के जख्म की मरहमपट्टी कराई. फिर उसे ले कर वापस घर आ गई. अनुपम उस दिन चला गया.

मुन्नी के साथ मिल कर उस ने फिर फूलचंद्र की हत्या की योजना बनाई. अनुपम ने इस योजना में अपने दोस्त श्रीराम को भी शामिल कर लिया. श्रीराम भिनगा कोतवाली के इटवरिया गांव का रहने वाला था. अनुपम के गौहनिया गांव में मोबाइल की दुकान चलाता था. अनुपम उस का विवाह अपनी ममेरी बहन से करा रहा था. दोस्ती को रिश्तेदारी में बदलने की पूरी तैयारी थी. अनुपम ने उस से फूलचंद्र की हत्या में साथ देने को कहा तो वह मना न कर सका.

27 मई, 2020 को अनुपम श्रीराम के साथ घर से निकला. उस ने 3 बीयर की केन खरीदीं और एक मैडिकल शौप से उस ने नशीला इंजेक्शन और सीरिंज खरीदी. सीरिंज के जरिए उस ने वह नशीली दवाई एक बीयर की केन में डाल दी. वह बीयर की केन अनुपम ने खुद अपने पास रख ली और बाकी दोनों केन श्रीराम ने रख लीं. इस के अलावा एक कुल्हाड़ी भी ले ली.

फूलचंद्र के मकान से करीब 500 मीटर की दूरी पर बीरबल कुट्टी में हनुमान मंदिर के प्रांगण में पहुंच कर अनुपम ने रात 9 बजे फूलचंद्र को फोन कर के बीयर पीने के लिए बुलाया. उस के बुलावे पर फूलचंद्र घर से निकल लिया. उस के पीछेपीछे मुन्नी भी चली गई.

फूलचंद्र के पहुंचने पर अनुपम ने उसे नशीली दवा मिली हुई बीयर की केन पीने को दी. बाकी दोनों बीयर अनुपम और श्रीराम उस के साथ बैठ कर पीने लगे. बीयर पीतेपीते नशीली दवा ने अपना असर दिखाना शुरू किया तो बेहोश हो कर फूलचंद्र एक ओर लुढ़क गया. इस के बाद मुन्नी भी वहां आ गई. तीनों ने मिल कर कुल्हाड़ी से फूलचंद्र के सिर व गले पर कई प्रहार किए, जिस से उस की मौत हो गई. इस के बाद अनुपम श्रीराम के साथ वापस घर लौट गया.

मुन्नी ने घर लौट कर अपने देवर हुकुमचंद्र को फूलचंद्र के लापता होने की झूठी बात फोन पर बताई. फिर अपने विरोधियों को फंसा कर मुन्नी साफ बच निकलना चाहती थी, लेकिन उस की चाल किसी काम न आई. वह प्रेमी और उस के दोस्त के साथ पकड़ी गई.

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इंसपेक्टर देवेंद्र पांडेय ने अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त रक्तरंजित कुल्हाड़ी, एक खाली सीरिंज, बीयर की 3 खाली केन और घटना के समय अनुपम द्वारा पहनी गई खून से सनी शर्ट बरामद कर ली. इस के बाद कानूनी लिखापढ़ी कर के तीनों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मौत के आगोश में समाया ‘फूल’ : भाग 1

आदमी को जब कोई मुसीबत अचानक आ घेरे तो उसे ऐसे में किसी अपने की याद आती है जो उस का मददगार या सहारा बन सके. फूलचंद्र की पत्नी मुन्नी अचानक बीमार हुई तो उसे अनुपम की याद आई. अनुपम और फूलचंद्र की उम्र में दोगुने का अंतर था. फूलचंद्र 40 वर्ष का था तो अनुपम 20 वर्ष का. पहले दोनों में जानपहचान हुई, फिर गहरी दोस्ती हो गई.

फूलचंद्र ने तुरंत अनुपम को फोन किया, ‘‘अनुपम, तुम्हारी भाभी मुन्नी की तबियत बहुत खराब है, अस्पताल ले जाना पड़ेगा. मैं बच्चों को संभालूं या मुन्नी को. इस वक्त मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है, आ जाओ.’’

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‘‘मुसीबत हो या परेशानी, दोस्त ही दोस्त के काम आता है. तुम चिंता न करो, मैं आ रहा हूं.’’ अनुपम बोला.

अनुपम से जितना जल्दी संभव हो सकता था, फूलचंद्र के घर पहुंच गया. वे दोनों मुन्नी को अस्पताल ले गए. मुन्नी के उपचार के लिए जिन दवाओं व संसाधनों की जरूरत थी, वे उस अस्पताल में नहीं थे. उसे समुचित इलाज के लिए शहर जाने को कहा.

मुन्नी की जिंदगी और मौत का सवाल था, इसलिए वे दोनों उसे शहर ले गए. शहर के अस्पताल में मुन्नी का सही एवं बेहतर इलाज हुआ. समय तो लगा, पर पैसा काफी खर्च हो गया.

मुन्नी ठीक हो कर घर आ गई, मगर फूलचंद्र को आर्थिक अभावों ने घेर लिया. जो पैसा था, उस ने मुन्नी के इलाज में लगा दिया था. इस के अलावा भी उस ने कुछ लोगों से पैसा उधार लिया था. फूलचंद्र तनाव में रहने लगा कि कैसे वह घर का खर्च उठाएगा और उधार लिया पैसा कैसे वापस करेगा.

मुन्नी की खैरखबर लेने और फूलचंद्र से मिलने के लिए रोज शाम को अनुपम उस के घर आता था. फूलचंद्र उसे अपने दुखड़े में शामिल कर लेता, ‘‘अनुपम, मुझे चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा दिखाई देता है. समझ में नहीं आता कि कहां से पैसा आए और देनदारी चुकता करूं. गांव में मेहनतमशक्कत के अलावा ऐसा कोई काम भी तो नहीं है, जिस से चार पैसे ज्यादा कमा सकूं.’’

यह सुन कर शातिर अनुपम के होंठों पर मुसकान आ गई. दरअसल वह मुन्नी के रूपलावण्य पर फिदा था और उस का उपभोग करना चाहता था. फूलचंद्र से दोस्ती भी उस ने अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए की थी. अनुपम ने मुन्नी पर डोरे डालने शुरू ही किए थे कि वह बीमार पड़ गई. अब मुन्नी पहले जैसी स्वस्थ हो गई थी तो फूलचंद्र उसे घेरे बैठा रहता था.

अनुपम ने लगाई तिकड़म

अनुपम के मन में खुद यह बात थी कि किसी तिकड़म से फूलचंद्र को घर से दूर भेज दिया जाए, तभी मुन्नी को हासिल किया जा सकता है. मुन्नी उस के अहसानों तले दबी है, इसलिए उसे पटाने में अधिक मेहनत नहीं करनी पडे़गी. अत: फूलचंद्र से सुहानुभूति जताते हुए वह बोला, ‘‘तुम सही कहते हो, तुम गांव रहोगे तो कुछ नहीं कर पाओगे. कुछ करना है तो तुम्हें गांव छोड़ना पडे़गा.’’

‘‘अनुपम, मैं गांव तो छोड़ दूं, पर यह समझ नहीं आ रहा कि जाऊं कहां और क्या करूं?’’ फूलचंद्र बोला.

‘‘मेरे गांव के कुछ लोग पंजाब के होशियारपुर में रह कर छोटेमोटे काम कर रहे हैं. उन के काम जरूर छोटे हैं, पर आमदनी अच्छी है.’’ अनुपम ने ऐसी तरकीब सुझाई कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे, ‘‘अगर तुम होशियारपुर जा कर काम करना चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं.’’

फूलचंद्र ऐसा काम करना ही चाहता था, जिस में ज्यादा कमा सके. अत: वह राजी हो गया. वह बोला, ‘‘होशियारपुर तो मैं चला जाऊंगा, लेकिन यहां पर मुन्नी और तीनों बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी तुम्हें उठानी पडे़गी.’’

अनुपम के लिए यह बात मलाई भरी कटोरी की रखवाली बिल्ले से कराने जैसी थी, लेकिन फूलचंद्र को अनुपम की नीयत पता नहीं थी, इसलिए उस ने हां कह दी. अनुपम ने भी यह जिम्मेदारी फौरन लपक ली, ‘‘तुम बेफिक्र हो कर होशियारपुर जाओ, भाभी और बच्चों की देखभाल मैं करता रहूंगा.’’

अनुपम ने होशियारपुर में रह कर कमाने वाले एक परिचित का नामपता और मोबाइल नंबर फूलचंद्र को लिखवा दिया. इतना ही नहीं, फूलचंद्र की उस परिचित से बात भी करा दी.

दूसरे ही दिन फूलचंद्र होशियारपुर के लिए रवाना हो गया. इधर मलाई भरी कटोरी पर झपटने के लिए बिल्ला तैयार था.

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उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के मल्हीपुर थाना क्षेत्र में एक गांव है— ओरीपुरवा. इसी गांव में रहता था 40 वर्षीय फूलचंद्र वर्मा. उस के परिवार में पत्नी मुन्नी के अलावा 3 बच्चे थे, बेटे प्रदीप (11) व सूरज (9) और बेटी लक्ष्मी (7).

दूसरी युवतियों की तरह मुन्नी ने भी विवाह से पहले फिल्मी हीरो जैसे पति की कल्पना की थी. तमन्ना करने मात्र से चांद मिल तो नहीं जाता. मुन्नी को जो पति मिला, वह उस की अपेक्षाओं के वितरीत था. अनपढ़, न बोलने का सलीका, न पहननेओढ़ने का.

कुछ ही दिनों में मुन्नी समझ गई कि फूलचंद्र जिंदा है तो केवल खाने के लिए और कमाता इसलिए है ताकि दोनों टाइम भर पेट भोजन मिलता रहे. न सिनेमा में रुचि, न सैरसपाटे में. मुन्नी उस से सिनेमा देखने या घूमने की फरमाइश करती तो वह उसे झिड़क देता, ‘‘ये सब उन के चोंचले हैं, जिन के पास अनापशनाप पैसा होता है. मैं ठहरा गरीब मजदूर, इसलिए यह सब मेरे भाग्य में कहां. तुम भी हैसियत की चादर देख कर पांव पसारना सीखो.’’

पति के मुंह से इस तरह की बातें सुनसुन कर मुन्नी ऊब गई और शादी के चंद हफ्तों में ही मुन्नी को पति से अरुचि हो गई. लेकिन शादी हुई थी, इसलिए निभाना ही था. मुन्नी फूलचंद्र का साथ निभातेनिभाते 3 बच्चों की मां बन गई. फूलचंद्र को उस ने बदलने की बहुत कोशिश की लेकिन बदल न सकी.

हां, मुन्नी ने अपने शौक नहीं मारे. सीमित साधनों में वह पहले की ही तरह अपने शौकशृंगार करती रही. 3 बच्चों की मां बनने के बाद भी उस ने अपना फिगर खराब नहीं होने दिया था.

इसी बीच फूलचंद्र की दोस्ती अनुपम वर्मा उर्फ अन्नू से हो गई. वह उस के घर आनेजाने लगा. 20 वर्षीय अनुपम वर्मा भिनगा थाना कोतवाली अंतर्गत गौहनिया राजगांव निवासी सुभाषचंद्र पटेल का बेटा था. सुभाषचंद्र खेतीकिसानी करते थे. अनुपम के हाईस्कूल तक पढ़ने के बाद उस का मन पढ़ाई में नहीं लगा तो सुभाषचंद्र ने उसे अपने साथ खेती के कामों में रमा लिया. वह अविवाहित था.

एक दिन किसी काम से अनुपम ओरीपुरवा आया तो मुन्नी को देख कर उस का मन डोल गया. उस ने अपने स्तर से मुन्नी के बारे में पता किया तो जाना कि मुन्नी चरित्र की कमजोर नहीं है, इसलिए आसानी से हाथ आने वाली नहीं है. अनुपम भी जल्दी निराश होने वाला शख्स नहीं था. मुन्नी को सेट करने के लिए उस ने उस के पति फूलचंद्र को सीढ़ी बनाने का फैसला किया और उस से दोस्ती कर ली.

अनुपम जब भी आता, मुन्नी और बच्चों के लिए कुछ न कुछ खानेपीने की चीजें ले आता था. कुछ ही दिनों में मुन्नी समझ गई कि फूलचंद्र से तो दोस्ती एक आड़ है, असल में अनुपम उस के यौवन का फल चखना चाहता है, तभी उन पर मेहरबानियां कर रहा है.

अनुपम सुंदर, सजीला, पढ़ालिखा और मौजमस्ती में यकीन रखने वाला शख्स था. हंसमुख और जिंदादिल. मुन्नी ने बिलकुल ऐसे ही जीवनसाथी की तमन्ना की थी. वैसे भी फूलचंद्र उम्र के ढलान पर था तो अनुपम नई चढ़ती उम्र का था युवा जोश से भरपूर. फूलचंद्र उस के सामने कुछ भी नहीं था. तमाम बातों पर गौर करने के बाद मुन्नी भी अनुपम की ओर आकर्षित होने लगी.

मुन्नी हो या अनुपम दोनों के दिलों में चाहत की आग बराबर लगी थी. तय था कि जल्द ही चाहत का इजहार हो जाएगा, लेकिन तभी मुन्नी बीमार हो गई. मुन्नी पर प्रभाव जमाने के लिए वह बराबर उस के इलाज के लिए साथ लगा रहा. फूलचंद्र को होशियारपुर भेज कर काम पर लगवा दिया.

काम पर लगने के बाद फूलचंद्र ने फोन कर के मुन्नी को यह बात बताई तो वह खुश हो गई. शाम को अनुपम आया तो मुन्नी ने उसे बताया, ‘‘तुम्हारी मेहरबानी से वह काम पर लग गए हैं.’’

‘‘इस खुशी में तो आज जश्न होना चाहिए.’’ अनुपम बोला.

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मुन्नी के चेहरे पर उदासी छा गई, ‘‘अभी तो मेरे हाथ खाली हैं. ‘वह’ जब कमा कर लौटेंगे या पैसे भेजेंगे, तब मैं तुम्हारी दावत करूंगी.’’

‘‘दावत के लिए फूलचंद्र की वापसी का इंतजार क्या करना,’’ अनुपम ने मौके का लाभ उठाने का मन बना लिया, ‘‘वह नहीं है, मैं तो हूं और मेरे रहते हुए किसी चीज के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है,’’ उस ने फौरन 200 रुपए जेब से निकाल कर मुन्नी के हाथ पर रखे, ‘‘इसे तुम अपने पास रखो. जश्न का सामान ले कर मैं अभी आया.’’ कह कर वह बाहर चला गया.

जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

ऑनलाइन ठगी का संजाल: सतर्कता परमो धर्म

पहला मामला- सेवानिवृत्त हो चुके पुलिस अधिकारी रघुनंदन प्रसाद कि मोबाइल में कॉल आता है- हम पुलिस मुख्यालय से बोल रहे हैं फलां फलां जानकारी दीजिए. रघुनंदन प्रसाद पुलिस मुख्यालय से जानकारी मांगने पर सब कुछ बताते चले जाते हैं और लूट जाते हैं.

दूसरा मामला- सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी के पास कॉल आता है और कहां जाता है आपको कुछ जानकारी देनी है। हम  आपके विभाग से ही बोल रहे हैं.कर्मचारी जैसे ही जानकारी देता है उसके बैंक खाते से लाखों रुपए उड़ा लिया जाता है.

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वस्तुतः आज हर एक इंसान की मजबूरी है सोशल मीडिया का इस्तेमाल. और इस मजबूरी का फायदा लेते हैं चतुर ठग. जिनसे आपको बचना होगा. आज जिस तरह से ठगी का कारोबार उजागर हो रहा है उसे देखकर यही कहा जा सकता है की ऑनलाइन परमो धर्मा बन चुका है तो सतर्कता भी आपके लिए परमो धर्मा: है.

अब आपको यह तय करना है कि कैसे आप  चतुर ठगों से अपनी रात दिन की कमाई गाढ़ी कमाई को बचा सकते हैं.यह सच है कि आज के दौर में अपराध के तरीके भी आधुनिक हो गए हैं जहां तक सोशल मीडिया और ऑनलाइन ठगी के मामले की बात करें तो यह लगातार बढ़ते जा रहे हैं. ऑनलाइन ठग नए-नए तरीकों से लोगों को ठगने का  एक तरह से रिकॉर्ड बना रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में  ऑनलाइन ठगों ने सेवानिवृत पुलिसकर्मियों को अपना निशाना बनाया है. लेकिन कहते हैं ना  कानून के हाथ लंबे होते हैं  तो यह एक बार फिर  सिद्ध हो गया . इन शातिर ठगों को  पुलिस ने ढूंढ निकाला और अपनी गिरफ्त में ले, जेल के सिखचों के पीछे  पहुंचा दिया है.

और पुलिस फंस गई फेर में

हमारी इस रिपोर्ट  के केंद्र में है पुलिस .वह पुलिस जो  लोगों को सतर्क रहने का आह्वान करती है. लोगों को  ठगों से बचाती है,  लुटेरों से बचाती है.  मगर छत्तीसगढ़ में  पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी भी  शातिर ठगों के फेर में फंस गए. ऐसे में यह समझा जा सकता है कि  जब पढ़े-लिखे पुलिस अधिकारी  जो  24 घंटे  अपराधिक लोगों से दो-चार होते हैं.  लोगों को राहत देते हैं… बचाते हैं  इन सोशल मीडिया के ठगों के संजाल में फंस गए तो आम आदमी  कि  बखत क्या है.

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छत्तीसगढ़ के महासमुंद, कांकेर, राजनांदगांव, दंतेवाड़ा, रायपुर, सरगुजा, बिलासपुर सहित कुछ नगरों में सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों को शातिर ठगों ने कुछ  दिनों में  तकरीबन  40 लाख रुपए की ठगी की. इसी  माह 16 जुलाई को राजनांदगांव जिले के अंबागढ़ चौकी थाने में सेवनिवृत्त पुलिसकर्मी भगवान सिंह सलामे ने रपट  दर्ज कराई कि एक फोन कॉल में अपने आप को पेंशन अधिकारी बताकर उनसे एक शख्स  ने एटीएम कार्ड की संपूर्ण जानकारी  ली और उनके खाते में जमा 18 लाख 33 हजार रूपये  देखते ही देखते उड़ा लिए .

छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव सहित  अन्य जिलों से भी इसी तरह  के  प्रकरण  सामने आये। राजनांदगांव  पुलिस अधीक्षक जितेंद्र शुक्ला के  तत्परता से  शातिर आरोपियों की  तलाशी की जाने लगी .

छत्तीसगढ़ राजधानी पुलिस मुख्यालय भी इन प्रकरणों को लेकर सतर्क हुआ. जांच तेजी से होने लगी. महासमुंद और दंतेवाड़ा पुलिस की एक संयुक्त टीम बनाकर आरोपियों की तलाश में लग गई.

इस  दरमियान पुलिस को कुछ सुराग मिले और पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई. पुलिस ने सेवा निवृत्त  पुलिसकर्मियों के साथ ठगी करने वाले बिहार के लीलावरण थाना बंधवापुरूवा निवासी आरोपी बाबर अली हेम्ब्राम, मनोज कुमार, रोहित कुमार यादव, पिंटू कुमार मंडल, जितेंद्र चौधरी को गिरफ्तार किया है। राजनांदगांव पुलिस ने इस मामले का  खुलासा कर दिया.

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पुलिस की गिरफ्त में आए ये शातिर ठग सेवा निवृत्त  पुलिसकर्मियों से पेंशन अधिकारी बनकर उन्हें पेंशन राशि, पीएफ सहित अन्य मामलों में उलझाते  थे और एटीएम कार्ड पर अंकित नंबर पुछकर उनके बैंक खाते से सारे रुपए निकाल लेते थे. मजे की बात यह है कि ठगी करने वाले आज के तेजी से प्रचलन में आई सोशल मीडिया का दुरुपयोग करते रहे. यह  सेवानिवृत्ति पुलिस कर्मियों के बारे में ऑनलाइन ही जानकारी इकट्ठा करते थे.पुलिस ने सभी आरोपियों को झारखंड और बिहार के अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया है. पकड़े गए आरोपियों के पास से दर्जनों मोबाइल सिम, वहीं 2 दर्जन से अधिक मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड,  लैपटॉप, कलर प्रिंटर सहित कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं. इस तरह छत्तीसगढ़ में पुलिस ने एक अंतर राज्य ऑनलाइन शातिर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है.

मनीत का आत्मघाती कदम : भाग 3

जिस कमरे में वे बैठे थे, वह उन की बैठक थी. एकएक सामान औसत दर्जे वाले कमरे में अपनीअपनी जगह बड़े कायदे से सजा कर रखा हुआ था, जहां उसे होना चाहिए था.

घर में कोई हलचल होती न देख मनीत से रहा नहीं गया. उस ने संध्या से पूछा, ‘‘घर में सन्नाटा फैला है. अंकलआंटी या कोई और नहीं है क्या?’’

‘‘फिलहाल, घर में सभी हैं लेकिन इस वक्त मम्मी किसी काम से बाहर गई हैं. उन्हीं के साथ भाईबहन भी गए हैं. और मैं आप के सामने बैठी हूं.’’ संध्या ने बिंदास हो कर जवाब दी.

‘‘ओह, तभी तो घर सूनासूना लग रहा है वरना हलचल तो जरूर रहती यहां.’’

‘‘जी, हलचल की बात कर रहे हैं. घर में भूचाल मची रहती है जब छोटी बहन यहां होती है.’’

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‘‘वो कोई अफलातून है क्या?’’

‘‘नहीं, पर उस से कम भी नहीं है.’’

कुछ देर तक दोनों इधरउधर की बातें करते रहे. फिर वे अपने मुद्दे पर आ गए. संध्या ने ही बात आगे बढ़ाई, ‘‘जिंदगी के दोराहे पर ला कर मुझे तुम अकेला छोड़ तो नहीं दोगे?’’

‘‘ऐसे क्यों कह रही हो संध्या. क्या मैं तुम्हें छिछोरा दिखता हूं?’’

‘‘नहीं, बात छिछोरेपन वाली नहीं है मनीत. जमाना बहुत खराब चल रहा है और फिर किसी के चेहरे पर तो कुछ लिखा नहीं है.’’ संध्या ने आशंका जताई.

‘‘ऐसी बात नहीं है संध्या. मुझे ऐसा ही करना होता तो मैं तुम्हारा इतना इंतजार नहीं करता. और न मैं ऐसावैसा हूं. मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं संध्या. तुम्हारे बिना जी नहीं सकता. तुम्हारे लिए जमाने से लड़ना भी पड़ा तो मैं उस में पीछे हटने वालों में से नहीं हूं. तुम्हारे लिए जमाने से भी लड़ जाऊंगा. लेकिन मुझे गलत मत समझना, प्लीज.’’ मनीत ने सफाई दी.

‘‘तुम तो बुरा मान गए.’’

‘‘इस में बुरा मानने वाली क्या बात है. जो सवाल तुम ने किया, उस क ा जवाब मैं ने दिया.’’

‘‘मेरी बातों को दिल पर मत लेना प्लीज. मेरे मन में जो आया, सो मैं ने कह दिया.’’

‘‘अब मुझे चलना चाहिए.’’ कलाई पर नजर डालते मनीत ने आगे कहा, ‘‘काफी देर हो गई है मुझे आए हुए.’’

‘‘अरे अभी तो आए हो और अभी जाने के लिए कह रहे हो. मैं अपने दिल के शहजादे को जाने के लिए कैसे कह दूं. अभी तो नजर भर आप को देखा तक नहीं.

कुछ देर और बैठो, तो मेरे दिल को सुकून मिल जाए. फिर चले जाइएगा.’’ ऐसी अनोखी अदा से संध्या ने मनीत के सामने बातों को परोसा कि मनीत चाह कर भी अपनी जगह से हिल नहीं सका.

प्यार के निवेदन पर मनीत कुछ देर और बैठा रहा. थोड़ी देर दोनों प्यार भरी बातें करते रहे फिर मनीत अपने कमरे पर लौट आया.

संध्या से विदा लेते वक्त उस ने उसे भी अपने कमरे पर आने के लिए कहा. मनीत के आग्रह पर एक दिन शाम के समय संध्या मनीत के कमरे पर उस के साथ पहुंची. उस समय कमरे पर उस के दोनों दोस्त अनिल और जमील थे. दोनों उन के प्यार के बारे में जानते थे.

कुछ देर रुकने के बाद संध्या घर लौट गई थी. इस के बाद संध्या को जब भी मौका मिलता था, वह मनीत से मिलने उस के किराए के कमरे पर आ जाती थी. इसी दौरान दोनों सामाजिक मर्यादा तोड़ कर एक हो गए थे. उन के बीच में जिस्मानी संबंध बन चुके थे.

धीरेधीरे उन का प्यार दोनों के घर वालों तक पहुंच चुका था. संध्या और मनीत दोनों के घर वालों ने उन्हें चेतावनी दे दी थी कि वे एकदूसरे से मिलना बंद कर दें.

मनीत के घर वालों ने साफ शब्दों में कह दिया था उस की शादी वहीं होगी, जहां वे लोग चाहेंगे. संध्या हरगिज इस घर की बहू नहीं बन सकती है. वह न तो हमारी जातिबिरादरी की है और न ही हमारे हैसियत की.

मनीत और संध्या के बीच के रिश्ते इतने आगे बढ़ चुके थे कि वहां से वापस लौटना नामुमकिन था. संध्या मनीत से कह चुकी थी कि वह उसे धोखा नहीं देगा. अगर उस ने धोखा देने की कोशिश की तो इस का परिणाम भयानक हो सकता है, क्योंकि वह आज की नारी है. अपने हक के लिए वह कुछ भी कर सकती है.

मनीत रिश्तों के मकड़जाल में बुरी तरह उलझ कर रह गया था. वह समझ नहीं पा रहा था कि किस ओर जाए. संध्या को अपनाता है तो उस के घर वाले नाराज होते हैं और संध्या को छोड़ता है तो वह नाराज होती है.

मनीत न तो घर वालों को नाराज करना चाहता था और न ही संध्या को. कई दिनों से वह इसी उलझन में जकड़ा हुआ था. मोहब्बत करना कोई गुनाह नहीं होता है, मोहब्बत में मर्यादा लांघना गुनाह होता है जो दोनों कर चुके थे.

संध्या मनीत पर जल्द से जल्द शादी करने के लिए दबाव बनाने लगी थी. दोनों ने जो गुनाह किया था उस का बीज संध्या की कोख में पल रहा था. सामाजिक मर्यादा को बचाने के लिए उस के पास एक ही विकल्प था जल्द से जल्द शादी कर के गुनाह को छिपा लेना.

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घर वालों के दबाव में आ कर मनीत संध्या से पीछा छुड़ाने के लिए उस से कट कर रहने लगा. संध्या मनीत के भाव समझ गई थी. संध्या ने मनीत को समझा दिया कि आसानी से पीछा छूटने वाला नहीं है.

फिर क्या था 3 जून, 2020 को संध्या ने कटघर थाने में प्रेमी मनीत के खिलाफ शादी का झांसा दे कर दुष्कर्म करने की शिकायत दर्ज करा दी. मनीत के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज होते ही हड़कंप मच गया.

संध्या के उठाए कदम से मनीत डर गया था. उस ने जैसेतैसे कर के संध्या को मना लिया. उस ने उस से अपनी शिकायत वापस लेने को कहा. वह जानता था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है. जिस से उस के कैरियर पर एक बड़ा धब्बा लग जाएगा.

काफी मानमनौव्वल के बाद संध्या अपनी शिकायत वापस लेने के लिए तैयार हो गई. मनीत ने उस से वादा किया कि अगले 5 जून को दोनों कोर्टमैरिज कर लेंगे.

शादी की बात सुन कर संध्या की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. वह बहुत खुश थी. 4 जून की शाम मनीत ने फोन कर के संध्या को अपने कमरे पर बुला लिया. संध्या घर वालों से यह झूठ बोल कर आई थी कि वह अपनी एक सहेली के घर जा रही है. रात वहीं रुकेगी, अगली सुबह घर वापस लौटेगी.

शाम को जब संध्या कमरे पर आई तो दोनों शहर घूमने गए. रात को घर लौटे और मैगी बना कर खाई और कोल्डड्रिंक पी. पूरी रात बातें करते रहे. रात 2 बजे के करीब मनीत ने शादी के सिलसिले में बात करने के लिए घर फोन किया था. घर वालों ने शादी करने से साफ मना कर दिया. इस बात को ले क र मनीत बुरी तरह नरवस हो गया और सरकारी कारबाइन से गोली मार कर आत्महत्या कर ली.

बहरहाल, जांचपड़ताल में यह बात सिद्ध हो गई थी कि पारिवारिक दबाव और प्रेम उलझन में परेशान हो कर मनीत प्रताप सिंह ने सरकारी कारबाइन से गोली मार कर आत्महत्या की है.

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कटघर थाने में पुलिस ने आत्महत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच की काररवाई बंद कर दी थी. संध्या की जिंदगी एक चक्रव्यूह में उलझ कर रह गई है, जिसे सुलझाने की कोशिश में वह जुटी हुई है.

– कथा में संध्या नाम और स्थान परिवर्तित किया गया है. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मनीत का आत्मघाती कदम

मनीत का आत्मघाती कदम : भाग 2

मौके पर पहुंचे एसपी (सिटी) अमित आनंद और सीओ पूनम सिरोही ने दोनों सिपाहियों जमील खान, अनिल कुमार गौतम और युवती संध्या से पूछताछ करना शुरू किया.

दोनों सिपाहियों जमील और अनिल ने अधिकारियों को बताया कि रात खाना खाने के बाद दोनों छत पर सोने चले गए थे. कमरे में रात भर मनीत और संध्या ही थे. गोलियों की आवाज सुन क र नींद खुली तो उठ कर बैठ गए. मोबाइल औन किया तो उस समय रात के 2 बज रहे थे.  हम दोनों भागेभागे नीचे कमरे में आए तो देखा मनीत खून में डूबा नीचे फर्श पर पड़ा था. उस की कारबाइन बिस्तर पर पड़ी हुई थी. उस पर खून लगा था. एक किनारे दूर खड़ी बदहवास सी संध्या मनीत को देखे जा रही थी.

उस के बाद अधिकारियों ने संध्या से पूछताछ की तो उस ने भी वही बताया जो दोनों सिपाहियों ने कुछ देर पहले पुलिस अधिकारियों को बताया था.

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पूछताछ करने के बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. खून से सनी कारबाइन बिस्तर पर एक ओर पड़ी थी. प्रथमदृष्टया यह मामला आत्महत्या का लग रहा था. मामला हत्या का होता तो मौके पर संघर्ष के निशान जरूर मिलते, लेकिन ऐसा नहीं था.

फिर क्या था, पुलिस अधिकारियों ने मनीत के घर वालों को बुलंदशहर फोन कर के घटना की जानकारी दी. सूचना मिलते ही उस के घर में कोहराम मच गया. घर में रोनापीटना जारी था. परिवार का कमाऊ बेटा था मनीत. मौत की खबर से उस की मां और भाई बुरी तरह टूट गए.

खैर, सूचना मिलते ही मां और बड़ा भाई बीरू सिंह बुलंदशहर से मुरादाबाद के लिए रवाना हो गए थे. करीब 2 घंटे बाद वे मुरादाबाद की आदर्श कालोनी पहुंच गए, जहां घटना घटी थी. तब तक सुबह का उजाला फैल चुका था.

घटना की सूचना पा कर पासपड़ोस के लोग धीरेधीरे वहां एकत्र होने लगे थे. बेटे की लाश देख कर मांबेटे का कलेजा मुंह को आ गया था. मनीत द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम के बारे में जिस ने भी सुना अवाक रह गया. वह अपने उत्तम व्यवहार और शानदार व्यक्तित्व के लिए कालोनी में मशहूर था. अपने काम से काम रखने वाला युवक था वह.

बहरहाल, पुलिस ने लाश का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजवा दिया.

बीरू सिंह भाई की आत्महत्या के लिए संध्या को दोषी ठहराने लगा कि उस ने शादी के लिए उस पर दबाव बना रखा था. वह उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रही थी. इसी के दबाव में आ कर भाई ने आत्महत्या की है.

बीरू के बयान को पुलिस ने गंभीरता से लिया और पूछताछ के लिए संध्या को हिरासत में ले लिया. संध्या से की गई पूछताछ के आधार पर कहानी कुछ इस तरह सामने आई—

24 वर्षीय मनीत प्रताप सिंह मूलरूप से बुलंदशहर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के रसूलपुर का रहने वाला था. उस के परिवार में मांबाप, 2 भाई और एक बहन थी. बहन बड़ी थी. उस की शादी हो चुकी थी. दूसरे नंबर पर बीरू सिंह और सब से छोटा मनीत प्रताप सिंह था. अमूमन परिवार के सब से छोटे बच्चे मांबाप और भाईबहनों के दुलारे होते हैं, मनीत भी पूरे परिवार का दुलारा था.

कहते हैं पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं. ऐसा ही कुछ मनीत के साथ भी हुआ था. छरहरे बदन वाले मनीत को बचपन से ही खाकी वर्दी से बेहद प्रेम था. बालपन से ही वह मांबाप से पुलिस में जाने को कहता था. वह कहता था बड़ा हो कर पुलिस बनेगा और पीडि़तों के साथ न्याय करेगा.

ईश्वर ने उस के दिल की बात सुन ली थी. 22 साल की उम्र में पहुंचते ही मनीत की मुराद पूरी हो गई थी. साल 2018 में उस ने अपनी मेहनत और काबिलियत के चलते पुलिस की नौकरी हासिल कर ली. खुली आंखों से उस ने अपने लिए जो सपने देखे थे, वह पूरे हो गए थे. वह बेहद खुश था.

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद मनीत की पहली पोस्टिंग मुरादाबाद में हुई थी. मनीत मुरादाबाद के कटघर थाने की आदर्श नगर कालोनी में कमल गुलशन के यहां किराए का कमरा ले कर रहता था. उस के साथ कटघर थाने के 2 और सिपाही जमील खान और अनिल कुमार गौतम भी रहते थे. तीनों एक ही कमरे में रहते थे. इन दिनों मनीत की ड्यूटी पुलिस लाइन में चल रही थी. वहीं से उस की तैनाती मुरादाबाद देहात के विधायक हाजी इकराम कुरैशी की सुरक्षा में लगाई थी.

बात घटना से करीब डेढ़ साल पहले की है. रात का खाना खा कर मनीत बिस्तर पर गया तो उसे नींद नहीं आ रही थी. सोचा थोड़ा मोबाइल चला लूं और फेसबुक वाले दोस्तों को मैसेज कर दूं. हो सकता है, नींद आ जाए.

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यही सोच कर वह फोन ले कर बिस्तर पर लेट गया और फेसबुक औन कर लिया. उस के कई दोस्तों के मैसेज आए थे. उस में कई लोगों के फ्रैंड रिक्वेस्ट भी थे. उन रिक्वेस्ट में एक नाम संध्या का भी था.

संध्या की खूबसूरत तसवीर पर मनीत की नजर पड़ी तो कुछ पल के लिए उस की नजर ठहर गई. उस की तसवीर पर से नजर हट ही नहीं रही थी. फिर क्या था. मनीत ने संध्या के रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लिया. एकदो दिनों बाद उस ने ‘हाय’ लिख कर मैसेज किया तो मनीत ने भी उस के मैसेज का जवाब दे दिया.

धीरेधीरे दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया. बातचीत के जरिए मनीत ने संध्या का पता और मोबाइल नंबर लिया और अपना पता तथा मोबाइल नंबर उसे दे दिया. संध्या पुत्री सुरेंद्र कुमार मुरादाबाद के गलशहीद इलाके के रुद्रपुर में रहती थी. मध्यमवर्गीय परिवार की संध्या 3 भाईबहनों में सब से बड़ी थी.

उस के पिता दिल्ली में रह कर एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करते थे. बीचबीच में वह घर आ कर परिवार को देख जाते. वैसे भी पिता सुरेंद्र ने परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी संध्या के कंधों पर डाल दी थी ताकि वह अपनी जिम्मेदारियों को निभा सके.

संध्या पिता के विश्वास पर पूरी तरह से खरी उतर रही थी. घर के राशन से ले कर भाईबहन के स्कूल की फीस, किताब तक का वह हिसाब रखती थी. मतलब संध्या समय से पहले समझदार और सयानी हो चुकी थी. उस के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है, सब समझती थी.

बातचीत के जरिए संध्या और मनीत के बीच दोस्ती हुई और फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई थी. दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे थे. आगे चल कर दोनों ने एकदूसरे से शादी करने का फैसला कर लिया था.

चूंकि संध्या और मनीत एक ही शहर में रहते थे. एक दिन संध्या ने मनीत को मिलने के लिए अपने घर बुलाया. इत्तफाक की बात यह थी कि उस दिन न तो उस की मां घर पर थी और न ही भाईबहन.

मनीत सादे कपड़ों में अनिल को साथ ले कर संध्या के घर रुद्रपुर पहुंचा. दोपहर का समय हो रहा था. प्यार होने के बाद पहली बार दोनों आमनेसामने बैठे थे.

संध्या ने दोनों का स्वागत किया. फिर बातों का सिलसिला शुरू हुआ. सामने बैठी संध्या को देख कर मनीत का दिल जोरजोर से धड़क रहा था. वह आधुनिक विचारों वाली स्वच्छंद युवती थी. उस ने मनीत के साथ आए दूसरे युवक के बारे में पूछा तो मनीत ने उस का परिचय अपने रूम पार्टनर के रूप में दिया. फिर मनीत ने नजर उठा कर कमरे के चारों ओर दौड़ाया.

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जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

मनीत का आत्मघाती कदम : भाग 1

4 जून, 2020 की शाम 7 बजे 24 वर्षीय सिपाही मनीत प्रताप सिंह ड्यूटी कर के जब वापस अपने कमरे पर लौटा तो वह अकेला नहीं था, बल्कि उस के साथ उस की खूबसूरत और कमसिन प्रेमिका संध्या भी थी.

उस के साथ संध्या को देख कर मनीत के दोनों दोस्त सिपाही जमील खान और सिपाही अनिल कुमार गौतम हौले से मुस्कराए तो वह भी मुसकरा दिया और संध्या को ले कर कमरे में चला गया.

वे तीनों दोस्त मुरादाबाद के कटघर थाने की आदर्श नगर कालोनी में स्थित कमल गुलशन के मकान में किराए पर रहते थे. वे तीनों रूम पार्टनर थे और एक ही कमरे में रहते थे. जिन में जमील खान और अनिल गौतम कटघर थाने में तैनात थे और मनीत पुलिस लाइन में आमद था. वैसे मनीत सिंह मूलरूप से बुलंदशहर के कोतवाली थाने के रसूलपुर का रहने वाला था. उस की जौइनिंग 2018 बैच की थी. हालफिलहाल उस की ड्यूटी मुरादाबाद (देहात) विधानसभा से विधायक हाजी इकराम कुरैशी की सुरक्षा में चल रही थी.

बहरहाल, संध्या को ले कर पहुंचे मनीत ने वर्दी बदल कर सादे कपड़े पहन लिए और दोनों दोस्तों से कहा कि वह संध्या को ले कर शहर घूमने जा रहा है. लौटने में उसे देर हो सकती है. आप दोनों अपना खाना बना कर खा लेना. हम घूम कर वापस लौटने के बाद अपना खाना बना लेंगे.

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इतना कह कर उस ने बरामदे में खड़ी बाइक बाहर निकाली और संध्या को पीछे बिठा कर निकल गया.

करीब 3 घंटे दोनों बाहर घूमे और रात 10 बजे के करीब कमरे पर लौटे. चूंकि कमरा एक ही था. वहां संध्या रुकी हुई थी इसलिए मनीत के दोनों दोस्त उन्हें कमरे में छोड़ कर छत पर सोने चले गए.

मनीत घर आ कर दुकान से 2 बड़े पैकेट मैगी और 1 लीटर वाली कोल्डड्रिंक की एक बोतल ले आया. संध्या ने मैगी बनाई और 2 कटोरियों में मैगी ले कर कमरे में आई, जहां मनीत उस का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. फिर मनीत ने पहले से ला कर रखी कोल्डड्रिंक स्टील के 2 खाली गिलासों में भर कर एक गिलास संध्या की ओर बढ़ा दिया और दूसरा गिलास खुद लिया.

दोनों ने मैगी खा कर कोल्डड्रिंक पी. थोड़ी भूख शांत हुई. मनीत और संध्या दोनों एकदूसरे के हाथों को थामे और आंखों में आंखें डाले नीचे फर्श पर चादर बिछा कर बैठे थे. एकदूसरे को करीब पा कर वे दोनों बेहद खुश थे. खुश होते भी क्यों नहीं, एक होने में उन के बीच में बस एक रात की दूरी थी.

अगले दिन यानी 5 जून, 2020 को दोनों कोर्टमैरिज करने वाले थे. मैरिज के बाद दोनों जनमजनम के लिए एकदूसरे के हो जाने वाले थे.

कहते हैं, आग और फूस पासपास हो, तो वहां अकसर आग लग ही जाती है. मनीत और संध्या सामाजिक मानमर्यादाओं की सीमाएं लांघते हुए जिस्मानी रिश्तों से एक हो चुके थे, इसीलिए संध्या प्रेमी मनीत पर शादी के लिए दबाव बनाए हुए थी.

दबाव में आ कर ही उस ने संध्या से शादी के लिए हामी भरी थी और उसे कमरे पर बुलाया था. खानेपीने के बाद नीचे फर्श पर बिछे चादर पर दोनों बैठे हुए थे. मनीत संध्या की हथेली थामे उस की झील सी गहरी आंखों में डूबता जा रहा था.

संध्या के मखमली स्पर्श से मनीत का रोमरोम खिल उठा था. वे दोनों मर्यादाओं में बंधे थे, भविष्य के सपनों को ले कर दोनों देर तक बातें करते रहे. इस बीच मनीत फोन पर अपने घर वालों से अपनी शादी के सिलसिले में बात भी करता रहा.

फोन पर बात करतेकरते मनीत अचानक से गंभीर हो गया और नीचे फर्श से उठ कर बैड पर बैठ गया. तो संध्या भी नीचे से उठ कर बैड पर बैठ गई और उस की गोद में अपना सिर रख कर बिस्तर पर पसर गई.

‘‘क्या हुआ? अचानक से गंभीर क्यों हो गए?’’ संध्या ने मनीत की आंखो में आंखें डाल कर सवाल किया.

‘‘कुछ नहीं, बस ऐसे ही…’’ कहतेकहते मनीत रुक गया.

‘‘मुझ से कोई भूल हो गई है क्या या मैं ने कुछ ऐसावैसा कह दिया, जिस से तुम्हें बुरा लग गया. अगर ऐसा है तो मुझे माफ कर दो. सौरी बाबा आइ एम वैरी सौरी.’’ दोनों कान पकड़ते हुए संध्या बोली.

‘‘तुम क्यों सौरी कह रही हो?’’ कान से संध्या का हाथ हटाते हुए उस ने आगे कहा, ‘‘मुझे तुम से कोई शिकायत नहीं है और न ही तुम ने कुछ कहा है. सौरी तो उन्हें बोलना चाहिए जो हमारे प्यार के दुश्मन हैं. माफी तो उन्हें मांगनी चाहिए, जो हमें एक होने से रोकते हैं. लेकिन संध्या तुम चिंता मत करना, हमें एक होने से कोई नहीं रोक सकता. चाहे हमें जमाने से ही क्यों न लड़ना पडे. हम लड़ेंगे और एक भी होंगे. मनीत ने कभी हारना नहीं सीखा है. दुश्मन चाहे हमारे अपने ही क्यों न हों, मोहब्बत की जंग हम उन से जीत के रहेंगे.’’

‘‘घर वालों से तुम्हारी बात हुई है क्या? उन्होंने तुम्हें कुछ कहा है?’’

‘‘वे हमारी शादी के खिलाफ हैं. कहते हैं ये शादी नहीं होने देंगे.’’

‘‘तो फिर क्या होगा?’’

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‘‘होगा क्या, मैं ने जो निश्चय किया है, वही होगा. मेरा निश्चय पत्थर पर खींची लकीर जैसा है, उसे कोई भी नहीं मिटा सकता.’’

कहते हुए मनीत ने बैड पर पड़ी कारबाइन दोनों हाथों से उठाई, उसे देखा. संध्या कुछ समझ पाती इस से पहले मनीत ने कारबाइन अपने सीने से सटा कर उस का ट्रिगर दबा दिया. कारबाइन से निकली गोली मनीत के दिल और फेफड़े को चीरती हुई शरीर के पार निकल गई. मनीत बिस्तर से नीचे फर्श पर धड़ाम से जा गिरा.

मनीत ने आत्महत्या कर ली थी. गोलियों की तड़तड़ाहट सुन कर मकान की छत पर सो रहे जमील और अनिल दौड़ेभागे नीचे कमरे में पहुंचे. कमरे का दृश्य देख कर दोनों हैरान रह गए. मनीत खून में डूबा बिलकुल शांत पड़ा था. उस से 2 कदम दूर खड़ी संध्या थरथर कांप रही थी. उस के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था.

उस के मुंह से कोई बोल नहीं फूट रहा था. जिस यार की बांहों में थोड़ी देर पहले वह झूल रही थी. जिन हाथों से अपने मांग में सिंदूर भरने के ख्वाब देख रही थी, वह सब रेत के मकान की तरह भरभरा कर ढह गया था.

बदहवास संध्या मनीत को देखे जा रही थी. जमील और अनिल कमरे के अंदर दाखिल हुए तो संध्या डर गई, ‘‘मैं ने नहीं मारा इन्हें…मैं ने नहीं मारा.’’ कहती चली गई.

‘‘ये सब कैसे हुआ संध्या?’’ अनिल ने सवाल किया.

‘‘थोड़ी देर पहले मनीत ने फोन पर अपने घर वालों से बात की. उस के बाद न जाने ऐसा क्या हुआ, वह एकदम से गंभीर हो गया. जब मैं ने पूछा कि क्या बात है, तुम अचानक से क्यों गंभीर हो गए तो उस ने बताया उस के घर वाले शादी के खिलाफ हैं, वे शादी करने पर ऐतराज जता रहे हैं. उस के बाद मैं कुछ समझ पाती कि मनीत ने खुद को गोली मार ली.’’ कह कर संध्या बिलखबिलख कर रोने लगी.

संध्या के कथनानुसार, मनीत ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी. उसी वक्त जमील ने फोन कर के थानेदार (कटघर) विकास कुमार, सीओ (कटघर) पूनम सिरोही, एसपी (सिटी) अमित कुमार आनंद, एसएसपी अमित पाठक और आईजी रमित शर्मा को घटना की सूचना दी थी.

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चूंकि मामला विभाग से जुड़ा हुआ था, इसलिए सूचना मिलते ही कुछ ही देर में एसओ (कटघर) विकास कुमार, सीओ (कटघर) पूनम सिरोही और एसपी (सिटी) अमित कुमार आनंद घटनास्थल पहुंच गए थे.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

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