उस दिन विष्णु को सुखबीर से ज्यादा गुस्सा अपने जीजा ब्रह्मजीत पर आया. उस ने अपने जीजा को खूब लानत दी और धिक्कारा कि पत्नी के इतने बड़े अपमान के बाद भी किस तरह उस का खून ठंडा पड़ा है.
‘‘ऐसा नही है विष्णु कि मेरा खून ठंडा पड़ा है. मेरा मन तो चाहता है कि उस कमीने को अभी जा कर खत्म कर दूं लेकिन फिर सोचता हूं कि अगर मैं ने जोश में ये काम कर दिया तो मुझे पुलिस पकड़ लेगी.
‘‘फिर उषा का क्या होगा. क्योंकि सब जानते हैं कि वह मेरा जीजा है…कितनी भी सफाई से काम करूं लेकिन भेद तो देरसबेर खुल ही जाएगा.’’
बात विष्णु की भी समझ में आ गई. उस ने जीजा से कहा, ‘‘तुम कहो तो मैं ऐसे लोगों का इंतजाम कर दूं कि वे इस हरामजादे का काम तमाम कर दें.’’
‘‘कोई है तुम्हारी नजर में तो देखो.क्योंकि उषा की इस बेइज्जती के बाद से मेरी रातों की नींद उड़ी हुई है.’’ ब्रह्मजीत ने कहा.
लेकिन साथ ही उस ने यह भी कहा कि उस के पास इस काम को करने वाले लोगों को देने के लिए पैसा नहीं है. लेकिन उन्हें सुखबीर के घर में इतना माल तो मिल ही जाएगा कि उन्हें काम करने का मलाल नहीं होगा. क्योंकि उस के पास पैसे की कोई कमी नहीं है.
उस दिन ब्रह्मजीत और विष्णु ने सुखबीर की हत्या का पूरा मन बना लिया और विष्णु दिल्ली आने के बाद इस काम के लिए भाडे़ के हत्यारे जुटाने में लग गया. सब से पहले उस ने हत्या के लिए 2 तंमचे व कारतूस खरीदे तथा उन्हें ला कर अपने जीजा को दे गया.
इस के बाद उस ने अपने 3 पुराने जानकारों मेरठ के परीक्षितगढ़ निवासी सोनू, यतिन उर्फ छोटू व कुलदीप कुमार उर्फ कैलाश सिंह से इस बारे में बात की.
दरअसल, विष्णु अवैध शराब की तस्करी के धंधे से जुडा था. मेरठ के उस के तीनों दोस्त भी इसी धंधे में थे और कभीकभी उस से माल खरीदते थे. विष्णु ने उन से बताया कि उस की बहन को उस का ननदोई कुछ गलत फोटो और वीडियो दिखा कर ब्लैकमेल कर रहा है. वह चाहता है कि वे तीनों बहन के ननदोई की हत्या करने में उस की मदद करें. उन्हें घर से इतना माल मिल जाएगा कि इस काम के लिए उन्हें पछताना नहीं पडे़गा.
माल मिलने और बहन की खातिर दोस्त की मदद करने के नाम पर सोनू, छोटू व कुलदीप इस काम को करने के लिए तैयार हो गए. बस इस के बाद विष्णु ने जीजा ब्रह्मजीत के साथ मिल कर सुखबीर की हत्या का पूरा तानाबाना बुन लिया.
वारदात को अंजाम देने से पहले एक दिन शाम के वक्त तीनों ने विष्णु के साथ आ कर सुखबीर के घर का निरीक्षण भी कर लिया. उस के बाद उन्होंने परतापुर इलाके से 2 मोटरसाइकिल चुराईं. जन्माष्टमी के दिन वारदात करने के लिए चुना और उस दिन चोरी की दोनों मोटरसाइकिलों पर सवार हो कर विष्णु अपने तीनों दोस्तों के साथ जसाना गांव पहुंच गया.
गांव के बाहर ब्रह्मजीत से उन की मुलाकात हुई. उस ने चारों को पहले से खरीदे गए तमंचे और एक पिस्टल दिया. इस के बाद ब्रह्मजीत अपने घर चला गया और बाकी चारों लोग अपना काम करने के लिए सुखबीर के घर पहुंच गए.
संयोग यह था कि सुखबीर जहां रहता था, वह गली सुनसान रहती थी. इसलिए उन्हें वहां आते किसी ने नहीं देखा. उन्होंने घर में घुसते ही सुखबीर तथा मोनिका को बंधक बना लिया. बड़ी सर्जिकल टेप से दोनों के हाथपांव बांध दिए. फिर घर में लूटपाट की. घर में जो भी गहना व नकदी मिली उसे एक बैग में भर लिया और बाद में सुखबीर तथा मोनिका को गोली मार दी.
हालांकि ब्रह्मजीत ने कहा था कि उन्हें मुंह पर कपड़ा बांध कर केवल सुखबीर की हत्या करनी है. लेकिन मोनिका ने वारदात के दौरान विष्णु का चेहरा देख लिया और पहचान लिया था. इसलिए उन्होंने पकड़े जाने के डर से मोनिका की भी हत्या कर दी थी.
चूंकि सुखवीर जिस जगह पर मकान बना कर रहता था, वहां पर आसपास और पीछे के एरिया में सभी प्लौट खाली थे. जबकि सामने पड़ोस में रहने वाले मकान मालिक घटना के समय घर पर नहीं थे. यह परिवार किसी काम से बाहर गया हुआ था.
किसी ने भी गोली चलने की आवाज नहीं सुनी. लेकिन उन के घर के बाहर बनी एक दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में बदमाशों के आने की सारी रिकार्डिंग हो गई.
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वारदात को अंजाम देने के बाद उन्होंने घर में रखा एक लैपटौप, सुखबीर व मोनिका के मोबाइल फोन तथा सीसीटीवी का डीवीआर भी उखाड़ कर बैग में भर लिया और सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए.
क्योंकि ब्रह्मजीत ने उन्हें पहले ही बता दिया था कि सुखबीर के घर में सीसीटीवी लगा है. इस से उन्हें लगा कि अब उन्हें कोई नहीं पकड़ पाएगा. लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि पड़ोस के मकान में लगा सीसीटीवी उन के अपराध की चुगली कर देगा.
13 अगस्त को जरूरी पूछताछ के बाद पुलिस ने पांचों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 3 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.
हिरासत में पूछताछ के बाद पुलिस ने उन की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किए गए 2 देसी तमंचे, 1 पिस्तौल, एक जिंदा कारतूस और एक चोरी की मोटरसाइकिल मेरठ शहर के पास मेन रोड पर झाड़ी से बरामद कर ली.
दूसरी मोटरसाइकिल पास ही दूसरी झाड़ी में मिली जो उन्होंने मेरठ के थाना परतापुर एरिया से चोरी की थी. आरोपी विष्णु के घर से सैमसंग फोन, सोने की एक चेन और 1200 रुपए नकद बरामद किए गए. आरोपी कुलदीप से एक हजार रुपए नकद, सोने के एक जोड़ी झुमके, चांदी की एक चेन उस की बहन की ससुराल से बरामद की.
आरोपी सोनू से एक लूटा हुआ लैपटौप एक मोबाइल फोन सिम कार्ड के साथ 2 हजार रुपए नकद बरामद किए गए. आरोपी जतिन से सोने के एक जोड़ी झुमके, डकैती के 2 हजार रुपए और वारदात में पहने हुए कपड़े बरामद किए गए. इस के साथ ही उस का खुद का एक मोबाइल और सिम भी बरामद किया गया.
पूछताछ में विष्णु ने बताया कि हत्या के बाद सुखबीर का मोबाइल वह अनलौक नहीं कर पा रहा था. सुखवीर के मोबाइल और लैपटौप में उस की बहन की अश्लील तसवीरें थीं. इसी वजह से हत्या के बाद विष्णु उसे साथ ले गया था. पुलिस ने दोनों मोबाइल और लैपटौप उस के पास से ही बरामद किए.
सुखबीर की हत्या उस के ही घर में करने की प्लानिंग ब्रह्मजीत ने इसीलिए रची थी कि भाड़े पर लाए गए शूटरों को पैसे न देने पड़ें. उन्होंने लूटा हुआ माल सुपारी के तौर पर शूटरों को ही रखने का लालच दिया था. लेकिन बदमाशों को दुर्भाग्य से वहां से ज्यादा नकदी और गहने नहीं मिले. ब्रह्मजीत ने ही उस दिन विष्णु को सुखबीर के घर पर होने की जानकारी दी थी.
पुलिस ने 16 अगस्त, 2020 को मुकदमे में शस्त्र अधिनियम तथा साजिश की धारा जोड़ कर पांचों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें नीमका जेल भेज दिया गया है. दूसरी तरफ मृतक सुखबीर के बड़े भाई सतबीर चंदीला ने मीडिया के सामने खुलासा किया है कि उन के भाई पर साले की पत्नी से ब्लैकमेलिंग का झूठा आरोप लगा कर जानबूझ कर बदनाम किया है. उन्होंने बताया कि सुखबीर ने खुद अपनी पत्नी और ससुराल वालों से भाभी की शिकायत की थी कि वह उसे अश्लील तसवीरें भेजती है.
इस बात को ले कर रक्षाबंधन से पहले सुखबीर के ससुराल में तीखी नोंकझोंक भी हुई थी.
– कथा पुलिस की जांच व आरोपियों के बयानों पर आधारित



