15 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर-25 के फ्लैट संख्या एल-32 में एक पिता के विश्वास, मां की ममता, नौकर की विश्वसनीयता के साथ 14 साल की आरुषि का कत्ल हुआ था. यह कैसे और क्यों हुआ, ये बातें नौ साल के बाद डॉ. राजेश और डॉ. नुपुर तलवार के इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा बरी किये जाने के बाद फिर पहेली बन गई हैं. एक बार फिर से यह सवाल खड़ा हुआ कि आखिर आरुषि को किसने मारा.

हाईकोर्ट के फैसले से एक तरफ देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली सवाल के घेरे में है तो दूसरी तरफ हर मां-पिता और स्कूली बच्चे आज भी आरुषि के हत्यारों का सच सामने आने का इंतजार कर रहे हैं. 15 मई 2008 की रात सेक्टर-25 स्थित जलवायु विहार के एल-32 के अंदर ऐसी हलचल हुई कि सारी दुनिया की निगाहें लग गईं. घर के अंदर मां, पिता, आरुषि और उस घर का नौकर हेमराज था.

एक फ्लैट के अंदर चार लोग थे और रात के 12 से 1 बजे के बीच इनमें से दो की हत्या हो जाती है- आरुषि और हेमराज. आरुषि की एक की कमरे में तो हेमराज की लाश छत पर मिलती है. आरुषि की लाश हत्या के अगले दिन दोपहर के आस-पास तो हेमराज की लाश दूसरे दिन बरामद की जाती है. कातिल ने तेज वार किये, गले पर वार के बावजूद आवाज नहीं निकली और भी बहुत कुछ. हत्या के बाद आरुषि के कमरे में रखा मोबाइल और कंप्यूटर रात 1 से 4 बजे के बीच कई बार इस्तेमाल किया गया. दो लोग ही घर के अंदर थे.

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