Story In Hindi: मेरी दोस्त बनोगी – एक अनहोनी का शिकार बनी दिव्या

Story In Hindi: शामका समय था. ठंडीठंडी हवा चल रही थी. दिव्या अपने बगीचे में बैठी थी. चाय की चुसकियों के साथ दिव्या एक उपन्यास पढ़ रही थी. तभी उस के फोन पर सोशल साइट पर फ्रैंड रिक्वेस्ट का नोटिफिकेशन आया. दिव्या ने उपन्यास एक तरफ रखा और मोबाइल देखने लगी.

रोहित नाम के किसी व्यक्ति की रिक्वैस्ट थी. दिव्या ने रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट कर ली. जैसे ही उस ने रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट कर के मोबाइल रखा. तभी उस व्यक्ति यानी रोहित का मैसेज आया, ‘‘हाय.’’

दिव्या ने मैसेज देखा और फिर अपना उपन्यास उठा लिया. उस ने उपन्यास पढ़ना शुरू किया. दोबारा फिर रोहित का मैसेज आया. दिव्या ने अब मैसेज नहीं देखा.

वह उपन्यास पढ़ने में तल्लीन हो गई. तब तक फिर मैसेज का नोटिफिकेशन आया तो उस ने मोबाइल उठा लिया. दिव्या ने देखा रोहित के ही 3 मैसेज थे. पहला मैसेज था, ‘‘मैडम रिप्लाई तो कर दो.’’

उस के बाद फिर उस का मैसेज था, ‘‘मैं अपने मैसेज के रिप्लाई का इंतजार कर रहा हूं.’’

अब दिव्या ने रिप्लाई किया, ‘‘हाय.’’

‘‘मैं चंडीगढ़ से रोहित हूं. मैं एक बिजनैस मैन हूं,’’ रोहित ने मैसेज किया.

‘‘ओके नाइस,’’ दिव्या ने बेमन से उस का जवाब दिया.

‘‘दिव्याजी, क्या आप मेरी फ्रैंड बनेंगी,’’ रोहित ने पूछा.

दिव्या ने कोई रिप्लाई नहीं किया और मोबाइल का नैट औफ कर के उपन्यास पढ़ने लगी. दिव्या एक शादीशुदा महिला थी. वह एक स्कूल में शिक्षिका थी. उस के पति पुणे में एक कंपनी में मैनेजर थे. दिव्या चंडीगढ़ में अकेली रहती थी.

रात को जैसे ही दिव्या ने अपने मोबाइल का नैट औन किया तो उस ने देखा कि रोहित के बहुत सारे मैसेज थे. दिव्या के औनलाइन होते ही उस के मैसेज फिर आने शुरू हो गए.

‘कैसा पागल है यह, इसे कोई काम नहीं है क्या?’ दिव्या सोचने लगी.

‘‘आप को कोई काम नहीं है क्या?’’ दिव्या ने रिप्लाई किया.

‘‘जी काम तो बहुत हैं पर आप के मैसेज के इंतजार में सारे काम रह गए,’’ रोहित ने लिखा.

‘‘कहिए क्या कहना है आप को?’’ दिव्या ने मैसेज किया.

‘‘क्या आप मेरी दोस्त बनेंगी?’’ रोहित ने पूछा.

‘‘बन तो गई हूं तभी तो आप बात कर रहे हैं,’’ दिव्या ने लिखा.

‘‘ऐसे नहीं, आप वादा करो कि आप रोज मु झ से बात किया करेंगी,’’ रोहित ने मैसेज किया.

‘‘ठीक है,’’ दिव्या ने मैसेज किया.

‘‘धन्यवादजी,’’ रोहित ने मैसेज किया.

फिर उस ने दिव्या को एक चुटकुला भेजा. दिव्या चुटकुला पढ़ कर हंसने लगी और उस ने हंसी की इमोजी भेजी. अब रोहित ने उस को और 2-3 चुटकुले भेजे.

उस के चुटकुले पढ़ कर दिव्या को हंसी आ रही थी. अब दिव्या भी रोहित को चुटकुले भेजने लगी. इस तरह उन दोनों के बीच बातों का सिलसिला बन गया. दिव्या को अब रोहित से बात करना अच्छा लगने लगा था. उन दोनों ने एकदूसरे से अपने मोबाइल नंबर भी शेयर कर लिए थे.

जब भी दिव्या को फुरसत मिलती वह रोहित से बात करती रहती. बातों का यह सिलसिला इतना बढ़ा कि दोनों मिलने भी लगे. अब बात सिर्फ दोस्ती तक नहीं थी. दोस्ती से बहुत आगे बढ़ चुकी थी. रोहित दिव्या के घर आनेजाने लगा था और जो उन दोनों के बीच एक सीमा रेखा थी वह भी टूट चुकी थी. रोहित को दिव्या के बारे में सब पता था.

कुछ दिन बाद दिव्या का पति विदेश से आने वाला था. लेकिन रोहित हर दिन उस से मिलने आता था.

एक दिन दिव्या आदित्य से फोन पर बात कर रही थी. उस को एहसास हुआ कि वह

आदित्य से कितना बड़ा विश्वासघात कर रही है. उसे स्वयं से घृणा होने लगी. उस ने सोचा कि अब वह रोहित से मिलना बंद कर देगी.

अगले दिन उस ने रोहित को घर पर आने से यह कह कर मना कर दिया कि कुछ दिनों के लिए उस की रिश्तेदार रहने आ रही है. उस ने रोहित से बात करना भी कम कर दिया. रोहित उसे कौल करता तो वह नहीं उठाती. उस के मैसेज का भी रिप्लाई नहीं करती.

एक दिन अचानक रोहित ने उसे एक वीडियो भेजा. दिव्या वीडियो देख कर अवाक रह गई. रोहित ने उस का और अपना वीडियो उसे भेजा था.

‘‘तुम ने यह वीडियो कब बनाया और क्यों बनाया,’’ दिव्या ने तुरंत उसे कौल कर पूछा.

‘‘क्यों तुम्हें पसंद नहीं आया? देखो हम दोनों कितने अच्छे लग रहे हैं,’’ रोहित बोला, ‘‘और हां वह तुम्हारी रिश्तेदार कहां हैं? उन को भी दिखाओ न यह वीडियो,’’ रोहित हंसते हुए बोला.

‘‘तुम क्या चाहते हो?’’ दिव्या बोली.

‘‘मैं बस तुम्हें चाहता हूं. तुम रोज मु झ से मिलो और मेरे कुछ दोस्त भी तुम से मिलना चाहते हैं,’’ रोहित हंसते हुए बोला.

‘‘रोज तो मिलती हूं अभी 3 दिन से ही तो नहीं मिली हूं,’’ दिव्या ने गुस्से में कहा.

‘‘मैं एक दिन भी तुम्हारे बिना नहीं रह पाता. मु झे तुम्हारी आदत हो गई है,’’ रोहित बोला.

‘‘हां तो किसी पब्लिक प्लेस में मिल लूंगी. पर यह वीडियो डिलीट करो,’’ दिव्या गुस्से में बोली.

‘‘कितने वीडियो डिलीट करूं बेबी? बहुत सारे हैं मेरे दोस्तों ने भी देखे हैं.’’

‘‘तुम्हे शर्म नहीं आई अपना और मेरा वीडियो अपने दोस्तों को दिखाते हुए?’’ दिव्या गुस्से में बोली.

‘‘शर्म आती तो वीडियो क्यों बनाता? छोड़ो ये सब. कल तुम मु झ से मिलने आओ,’’ रोहित एक कड़वी हंसी हंसते हुए बोला, ‘‘एक कौफी शौप में मिलते हैं.’’

दिव्या को गुस्सा तो बहुत आ रहा था, लेकिन उस ने यह सोच कर मिलने को कह दिया कि एक बार वह रोहित से मिल कर उस के मोबाइल से अपनी सारे वीडियो डिलिट कर देगी.

‘‘नहीं कौफी शौप में नहीं मैं तुम्हारे घर आऊंगा,’’ रोहित बोला.

‘‘नहीं मैं अब घर नहीं मिल सकती,’’ दिव्या ने कहा.

‘‘तो किसी होटल में मिलते हैं. मैं शाम को तुम्हें लेने आ जाऊंगा,’’ रोहित बोला.

‘‘क्यों होटल में क्यों?’’ दिव्या बोली.

‘‘तुम्हें पता नहीं है क्या कि मैं होटल में क्यों बुला रहा हूं?’’ रोहित बोला.

‘‘नहीं, मैं होटल में नहीं आ सकती,’’ दिव्या ने कहा.

‘‘आना तो पड़ेगा मेरी जान नहीं तो तुम्हारे ये वीडियो नैट पर अपलोड हो सकते हैं,’’ रोहित बोला.

‘‘तुम इतने गिरे हुए हो. यदि मु झे यह पता होता तो तुम से बात भी नहीं करती,’’ दिव्या गुस्से में चिल्ला कर बोली.

‘‘नहीं जान, मैं बिलकुल गिरा हुआ नहीं हूं. वह तो मेरे दोस्त ऐसा बोल रहे हैं. अगर तुम कल नहीं आई तो मेरे दोस्त ये वीडियो नैट पर अपलोड कर देंगे,’’ रोहित ठहाका लगाते हुए बोला.

दिव्या ने फोन काट दिया. अब वह सोचने लगी कि वाकई उस से बहुत बड़ी गलती हो गई. वह थरथर कांप रही रही थी कि रोहित के पास उस के वीडियो हैं.

अगर वह रोहित से नहीं मिलेगी तो वह वीडियो नैट पर अपलोड कर देगा. उस का दिमाग काम नहीं कर रहा था. वह फूटफूट कर रोने लगी.

उस ने अपनी एक दोस्त अर्पिता को फोन किया और उसे सारी बात बताई. अर्पिता ने उसे सम झाया कि तू सुबह ही मेरे घर आ जा, फिर कुछ सोचते हैं. दिव्या ने रात में ही अपने कपड़े और जरूरी सामान पैक किया और सुबह अपनी दोस्त अर्पिता के घर पहुंच गई.

उस ने अर्पिता के घर की डोरबैल बजाई. जैसे ही अर्पिता ने डोर खोला, दिव्या उस से गले लग कर रोने लगी. अर्पिता ने उसे चुप कराया. दिव्या को रोते देख अर्पिता के पति शिवम ने अर्पिता से इशारे में पूछा कि दिव्या क्यों रो रही है? शिवम को दिव्या के बारे में कुछ पता न था.

यह 2 सहेलियों की आपस की बात थी. अर्पिता ने शिवम को कुछ नहीं बताया था. अर्पिता दिव्या को अपने कमरे में ले गई और दोनों बातें करने लगीं.

‘‘दिव्या, तू फोन पर बहुत घबराई हुई थी इसलिए मैं ने यहां बुला लिया. मु झे डर था कि कहीं तू कोई गलत कदम न उठा ले,’’ अर्पिता बोलीप्त

‘‘हां मु झे कुछ सम झ नहीं आ रहा था. मैं सोच रही थी कि मैं कुछ खा कर मर जाऊं,’’ दिव्या रोते हुए बोली.

‘‘ऐसी कायरों वाली बातें मत कर. मरना तु झे नहीं उसे चाहिए और तू ऐसे किसी भी अनजान आदमी से बात मत किया कर, अब फंस गई न,’’ अर्पिता दिव्या को डांटते हुए बोली.

‘‘बस इस बार मु झे इस मुसीबत से निकाल ले. फिर कभी किसी से बात नहीं करूंगी,’’ दिव्या अपने आंसू पोंछते हुए बोली.

‘‘लेकिन तेरे यहां आने से मुसीबत टली नहीं है वह तेरा वीडियो कभी भी अपलोड कर सकता है,’’ अर्पिता ने कहा.

‘‘फिर क्या करूं मैं?’’ दिव्या डरते हुए बोली.

‘‘हमें पुलिस में शिकायत दर्ज करानी पड़ेगी,’’ अर्पिता ने कहा.

‘‘पुलिस? नहींनहीं पुलिस से बात सब जगह फैल जाएगी,’’ दिव्या बोली.

‘‘वह तो वीडियो अपलोड होने के बाद वैसे भी तू कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेगी. इस से तो पुलिस में शिकायत करवा दे तो वह पकड़ा जाएगा और किसी को नहीं फंसा पाएगा,’’ अर्पिता ने दिव्या को सम झाया.

‘‘ठीक है पर शिवम को तूने बता दिया क्या?’’ दिव्या ने पूछा.

‘‘नहीं अभी मैं ने कुछ नहीं बताया. लेकिन बताना पडे़गा,’’ अर्पिता ने कहा.

‘‘तू नहा के आ जल्दी. खाना तैयार है. खाना खा कर फिर बात करते है,’’ अर्पिता ने दिव्या से कहा.

दिव्या नहाने चली गई. अर्पिता ने शिवम को दिव्या के बारे में सब बताया. तब तक दिव्या नहा के आ गई थी. सब ने खाना खाया और फिर तीनों पुलिस स्टेशन चल दिए. पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इधर दिव्या के फोन पर रोहित के फोन बारबार आ रहे थे.

इंस्पैक्टर के कहने पर दिव्या ने रोहित से बात की. पुलिस ने उस का नंबर ट्रैक कर लिया. जल्द ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. रोहित के लैपटौप में पुलिस को लड़कियों के कई वीडियो मिले. पुलिस ने दिव्या का वीडियो डिलीट कर दिया. दिव्या वापस अपने घर आ गई.

दिव्या अब किसी भी अनजान की रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट नहीं करती. कुछ दिनों बाद उस का पति आदित्य घर आ गया.

‘‘आदित्य, अब मैं अकेली नहीं रह सकती,’’ दिव्या ने कहा.

‘‘अब मैं तुम्हें अकेले रहने भी नहीं दूंगा,’’ आदित्य बोला.

‘‘क्यों? क्या मु झे अब अपने साथ ले जाओगे?’’ दिव्या ने खुश होते हुए कहा.

‘‘नहीं. अब मैं यहीं तुम्हारे साथ रहूंगा. अब जब भी कभी जाऊंगा तो तुम्हें साथ ले जाऊंगा,’’ आदित्य ने कहा.

‘‘अच्छा आज अचानक इतना प्यार कैसे आ गया?’’ दिव्या आदित्य को छेड़ते हुए बोली.

‘‘हां अब बहुत दिन हो गए अकेले रहते रहते. अगर ऐसे ही अलगअलग रहे तो हमारे बीच तीसरा कैसे आएगा,’’ आदित्य ने दिव्या को बांहों में भरते हुए कहा.

‘‘मतलब?’’ दिव्या आश्चर्य से बोली.

‘‘अरे मैं हम दोनों के बेबी की बात कर रहा हूं,’’ आदित्य ने बोला और लाइट बंद कर दी. दिव्या आदित्य के साथ थी, लेकिन उस के दिमाग में उथलपुथल हो रही थी. वह रोहित के बारे में आदित्य को सबकुछ बता देना चाहती थी. लेकिन उसे डर था कि कहीं आदित्य और उस के रिश्ते में दरार न पड़ जाए.

अगले दिन सुबहसुबह ही दिव्या आदित्य से बोली, ‘‘आदित्य मु झे तुम से

कोई जरूरी बात करनी है.’’

‘‘क्या बात करनी है बोलो,’’ आदित्य ने कहा.

‘‘आदित्य…’’ दिव्या कहतेकहते रुक गई.

‘‘बोलो न क्या कहना है,’’ आदित्य बोला.

‘‘मु झ से एक गलती हो गई,’’ दिव्या ने कहा और रोहित वाली सारी बात उसे बता दी.

पूरी बात सुनते ही आदित्य गुस्से में चिल्लाया, ‘‘तुम सम झती क्या हो अपनेआप को? तुम कुछ भी करोगी मैं सब सह कर लूंगा. अब जाओ उसी रोहित के पास. मेरी जिंदगी में अब तुम्हारी कोई जरूरत नहीं.’’

‘‘आदित्य मु झ से गलती हो गई. प्लीज मु झे माफ कर दो,’’ दिव्या रोतेरोते बोली.

‘‘यह गलती माफी के लायक नहीं है दिव्या,’’ कह कर आदित्य कमरे से बाहर चला गया.

‘‘आदित्यआदित्य प्लीज,’’ दिव्या आवाज देती रही, लेकिन आदित्य ने नहीं सुना और वह बाहर चला गया. दिव्य रोती रही.

देर रात आदित्य घर आया. दिव्या खाना ले कर उस के पास आई. उस को देखते ही आदित्य ने अपना मुंह मोड़ लिया.

‘‘आदित्य खाना खा लो,’’ दिव्या बोली.

‘‘मु झे नहीं खाना कुछ भी और तुम मु झ

से बात करने की कोशिश भी मत करो,’’

आदित्य बोला.

‘‘आदित्य मु झ से बहुत बड़ी गलती हो गई. एक बार मु झे माफ कर दो प्लीज,’’ दिव्या ने रोते हुए कहा.

‘‘नहीं, अब मु झे तुम से कोई मतलब नहीं रखना है. मैं तुम्हें तलाक दे दूंगा,’’ रोहित गुस्से

में बोला.

‘‘मैं जानती हूं कि मु झ से बहुत बड़ी गलती हुई है, लेकिन तुम्हें तलाक देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मैं खुद ही तुम्हारी जिंदगी से दूर चली जाऊंगी,’’ दिव्या रोतेरोते दूसरे रूम में चली गई. उस ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. वह सोचने लगी कि अब उस के जीवन का कोई मतलब ही नहीं है. उसे अपना जीवन खत्म कर लेना चाहिए.

इधर कमरे में बैठ कर आदित्य सोच रहा था कि इतनी बड़ी बात हो गई. दिव्या चाहती तो उसे कुछ नहीं बताती. लेकिन उस ने उसे सबकुछ बता दिया. अगर ऐसी गलती आदित्य से हो जाती तो क्या दिव्या उसे छोड़ देती. वह उठा और दिव्या के कमरे की तरफ बढ़ा. उस ने आवाज दी, ‘‘दिव्यादिव्या दरवाजा खोलो.’’

दिव्या कुछ न बोली. आदित्य के बारबार आवाज देने पर भी जब दिव्या की आवाज नहीं आई तो आदित्य ने खिड़की से अंदर  झांक कर देखा तो हैरान रह गया. दिव्या एक साड़ी को पंखे पर डालने की कोशिश कर रही थी.

‘‘दिव्या, दरवाजा खोल, अगर तुम ने ऐसा कुछ किया तो मैं भी मर जाऊंगा,’’ आदित्य बोला.

‘‘दिव्या फिर भी कुछ नहीं बोली और पंखे पर साड़ी डालने की कोशिश करने में लगी रही. उस की आंखों से आंसू बहे जा रहे थे.

‘‘दिव्या रुको…’’ आदित्य जल्दी से कमरे से दूसरी चाबी ले कर आया. वह कमरा खोल कर अंदर गया और दिव्या को अपने गले से लगा लिया.

‘‘तुम क्या करने जा रही थी. मैं ने गुस्से में तुम्हें तलाक देने को कह दिया था.

लेकिन मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता,’’ आदित्य भी रोते हुए बोला.

‘‘आदित्य मु झे माफ कर दो,’’ दिव्या रोतेरोते बस यही कहे जा रही थी.

‘‘चुप वह सब भूल जाओ कि तुम्हारे साथ ऐसा कुछ हुआ था. तुम मेरी हो और हमेशा मेरी ही रहोगी,’’ कहतेकहते आदित्य भी रो पड़ा.

आदित्य और दिव्या सबकुछ भूल कर अब एक नई जिंदगी की तरफ बढ़ गए थे. एक गलती ने एक हंसताखेलता परिवार तबाही के रास्ते पर ला दिया था. हमें किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए. जहां तक हो सके अनजान लोगों से बात करने से भी बचना चाहिए. Story In Hindi

Hindi Family Story: ब्रह्मराक्षस – रिश्ते पर लगा कलंक

Hindi Family Story: ‘‘आज से हमारा पतिपत्नी का रिश्ता खत्म हो गया.’’

‘‘क्यों? उस में मेरा क्या कुसूर था?’’

‘‘कुसूर नहीं था, पर तुम्हारे दामन पर कलंक तो लग ही गया है.’’

‘‘तुम मेरे पति थे. तुम्हारे सामने ही मेरी इज्जत लुटती रही और तुम चुपचाप देखते रहे.’’

‘‘उस समय तुम्हारे पिता भी तो थे.’’

‘‘उन्होंने तो मु झे तुम्हें सौंप दिया था.’’

‘‘मैं अकेला क्या कर सकता था? वे लोग गिरोह में थे और सब के पास हथियार थे.’’

‘‘तो तुम मर तो सकते थे.’’

‘‘मेरे मरने से क्या होता?’’

‘‘तुम अमर हो जाते.’’

‘‘नहीं, यह खुदकुशी कहलाती.’’

‘‘अब मेरा क्या होगा?’’

‘‘मुझे 10 हजार रुपए तनख्वाह मिलती है. हर महीने 5 हजार रुपए तुम्हें दे दिया करूंगा. इस के लिए तुम्हें कोई कानूनी लड़ाई नहीं लड़नी पड़ेगी. तुम चाहो तो दूसरी शादी भी कर सकती हो.’’

‘‘क्या तुम करोगे दूसरी शादी?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘तो फिर तुम मु झे दूसरी शादी करने की क्यों सलाह दे रहे हो?’’

‘‘यह मेरा अपना विचार है.’’

‘‘मैं जाऊंगी कहां?’’

‘‘तुम अपने पिता के साथ मायके चली जाओ.’’

‘‘और तुम?’’

‘‘मैं अकेला रह लूंगा.’’

‘‘क्या, मेरा कलंक अब कभी नहीं मिटेगा?’’

‘‘मिटेगा, जरूर मिटेगा. लेकिन कैसे और कब, नहीं बता सकता.’’

‘‘फिर क्या तुम मु झे अपना लोगे?’’

‘‘यह मेरे जिंदा रहने पर निर्भर करता है. अब तुम मायके जाने की तैयारी करो. बाबूजी तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं.’’

तारा अपने पिता के साथ मायके चली गई.

उस के पति विक्रम ने उस के जाने के बाद अंदर से दरवाजा बंद कर लिया. वह गहरी सोच में पड़ गया.

घर की हर चीज तारा की यादों को ताजा करने लगी थी. तारा की जब इज्जत लूटी जा रही थी, तब विक्रम हथियारों के घेरे में बिलकुल कमजोर खड़ा था.

वह नजर उस के दिलोदिमाग को बो िझल बना रही थी. उसे अपने ठंडे खून पर गुस्सा आ रहा था.

तारा ने ठीक ही कहा था, ‘कम से कम मर तो सकते थे.’

क्यों नहीं मरा? वह मौत से क्यों डर गया था?

बहुत से लोगों को उस ने मरते देखा था, फिर भी मौत के डर से छूट नहीं सका. बलात्कारी परशुराम का अट्टहास करता चेहरा बारबार उस की आंखों के सामने घूम रहा था.

डर की एक तेज लहर विक्रम के भीतर से उठी. वह कांप उठा था. सारा शरीर पसीने से गीला हो गया. उसे ऐसा लगने लगा था कि परशुराम का खौफनाक चेहरा उसे जीने नहीं देगा.

बहुत कोशिशों के बावजूद भी विक्रम की आंखों के सामने से उस का चेहरा हट नहीं रहा था. वह चेहरा जैसे हर जगह उस का पीछा करने लगा था, बलात्कार का वह घिनौना नजारा भी उस के साथ ही उभरने लगा था.

तारा का डर और शर्म से भरा चेहरा भी परशुराम के खौफनाक चेहरे के साथ उभरता रहा. उसे याद आया कि किस तरह तारा मदद के लिए बारबार उस की तरफ देखती और वह हर बार उस से अपनी आंखें चुरा लेता था. परशुराम और उस के साथियों की हंसी अब भी उस के कानों से टकरा रही थी.

तकरीबन एक घंटे बाद बदमाश जा चुके थे. इस के बाद 1-1 कर के धीरेधीरे भीड़ जमा होने लगी थी. सब लोग डरेसहमे बेजान से लग रहे थे. विक्रम पहले की तरह खड़ा रहा, मानो उस के पैर जमीन से चिपक गए हों.

अचानक बाहर शोर सुनाई दिया, तो विक्रम धीरे से उठा. उस ने देखा कि बलात्कारी परशुराम अपने साथियों के साथ फूलमालाओं से लदा मस्ती में जा रहा है.

विक्रम चुपचाप उस भीड़ में शामिल हो गया. कुछ लोगों ने उसे पहचान लिया. उन के चेहरों पर कुटिल हंसी दिखाई दे रही थी.

भीड़ में से एक आदमी बोला, ‘‘इसी की बीवी के साथ बलात्कार हुआ था, इस की आंखों के सामने. और इस के ससुर भी वहीं थे. इस ने अपनी बीवी से संबंध तोड़ लिया है. अब मौज से दूसरी शादी करेगा. इस की बीवी जिंदगीभर अपना कलंक ढोती रहेगी.’’

‘‘पैसे में बड़ी ताकत होती है. पैसे के बल पर ही तो परशुराम को जमानत मिली है.’’

‘‘तारा से ऐसेऐसे सवाल पूछे जाएंगे, जो दूसरे बलात्कार जैसे ही होंगे. एक बार परशुराम ने तारा के पति और पिता के सामने उस के साथ बलात्कार किया, दूसरी बार बचाव पक्ष के वकील भरी अदालत में जज की मौजूदगी में तारा से उलटेसीधे सवाल पूछेंगे, जिस से उसे दूसरे बलात्कार का एहसास होगा.’’

‘‘गवाही देने की भी हिम्मत कौन करेगा? समाज ही तो पालता है परशुराम जैसे लोगों को.’’

जितने मुंह उतनी बातें.

धीरेधीरे भीड़ छंटने लगी थी. परशुराम के घर पहुंचतेपहुंचते थोड़े ही लोग रह गए थे. विक्रम अभी भी सिर  झुकाए उसी भीड़ में चल रहा था. परशुराम को उस के घर पहुंचा कर भीड़ वापस चली गई थी. विक्रम वहीं डरासहमा खड़ा रहा.

परशुराम जैसे ही अंदर जाने लगा, विक्रम ने धीरे से कहा, ‘‘कुछ मेरी भी सुन लो परशुराम दादा.’’

आवाज सुन कर परशुराम पीछे मुड़ा, ‘‘क्या कहना चाहते हो?’’

‘‘यहां नहीं दादा, उस बाग में चलो,’’ विक्रम बोला.

परशुराम ने उसे घूरते हुए कहा, ‘‘वहां क्यों?’’

‘‘दादा, बात ही कुछ ऐसी है.’’

‘‘अच्छा चलो,’’ घमंड से भरा परशुराम विक्रम के साथ बाग तक गया. उस ने सोचा कि यह डरासहमा आदमी उस का क्या कर लेगा.

उस ने अंदर की जेब में रखे अपने कट्टे को टटोला. वहां पहुंच कर उस ने पूछा, ‘‘हां, अब बताओ?’’

‘‘दादा, मैं ने अपनी बीवी को छोड़ दिया है.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘वह दागी हो गई थी न दादा.’’

परशुराम के होंठों पर मुसकान उभर आई. वह बोला, ‘‘मु झे तुम से हमदर्दी

है विक्रम, पर क्या करता तुम्हारी बीवी चीज ही ऐसी थी.’’

उस का इतना ही कहना था कि विक्रम गुस्से से तमतमा गया, मानो उस के जिस्म में कई हाथियों की ताकत आ गई हो. उस ने परशुराम को अपने हाथों में उठा लिया और उसे जमीन पर तब तक उठाउठा कर पटकता रहा, जब तक कि वह मर नहीं गया.

आसपास के सभी लोग यह नजारा देखते रहे, मगर कोई भी उसे बचाने नहीं आया.

परशुराम की चीखें चारों तरफ गूंजती रहीं, मगर किसी पर उस का असर नहीं हुआ.

परशुराम की हत्या कर विक्रम सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचा, जहां उस ने सारी बातें दोहरा दीं. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

तारा को जब इस बात का पता चला, तो वह उस से मिलने जेल आई. विक्रम ने उसे बड़े ही गौर से देखा और मुसकरा कर कहा, ‘‘तारा, तुम्हारा कलंक मिट गया है. जेल से छूटने के बाद तुम्हें आ कर ले जाऊंगा. मेरा इंतजार करना. करोगी न?’’

‘‘हां, जिंदगीभर,’’ कहतेकहते तारा रो पड़ी. Hindi Family Story

Hindi Story: छुटकी नहीं… बड़की

 Hindi Story: फजल और हिना की शादी को 7 साल हो गए थे, पर उन्हें अभी तक एक भी औलाद नहीं हो सकी थी. लखनऊ के नामीगिरामी डाक्टरों का इलाज करवाया जा चुका था. हजारों रुपए के टैस्ट करवाए गए, पर सब फुजूलडाक्टरों ने हिना और फजल दोनों के टैस्ट की रिपोर्ट आने के बाद यही बताया था कि दोनों की जिस्मानी हालत बिलकुल ठीक नहीं है. हालांकि वे दोनों बच्चा पैदा करने में पूरी तरह से काबिल हैं, पर अगर फिर भी बच्चा नहीं हो रहा है तो सही समय का इंतजार करें. फजल के घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं थी. वह घर में मंझला भाई था. बड़े भाई के 3 बच्चे थे, 2 बेटे और एक बेटी. फजल का एक छोटा भाई हैदर था, जिस का हाल ही में निकाह हुआ था.

फजल की कमाई का जरीया उस की आरा मशीन थी, जो घर से कुछ ही दूरी पर लगी हुई थी. उस पर इतना काम आता कि काम बंद करतेकरते ही रात के 9 भी बज जाते थे. तकरीबन 15 आरा मशीन पर नौकर लगे हुए थे, जो बड़ी ईमानदारी से काम करते थे. पुराने लखनऊ में तिमंजिला मकान होना अपनेआप में बहुत बड़ी बात थी और चारपहियों की 2 गाडि़यां भी फजल के दरवाजे पर खड़ी रह कर शान बढ़ाती थीं. फजल के पास तो काम की कमी थी और ही पैसे कीउस की और हिना की जिंदगी में एक औलाद की कमी जरूर थी और यह कमी फजल को अब और भी खलने लगी, जब छोटे भाई हैदर के निकाह के साल के अंदर ही वह भी एक चांद जैसी बेटी का बाप बन गया.

‘‘जीशादी के 2 सालों तक औलाद नहीं हुई तो अब हमें औलाद क्या होगी, इसीलिए मैं चाहती हूं कि हम कोई बच्चा गोद ले लें,’’ एक दिन हिना ने कहा. ‘‘तुम भी क्या बेकार की बात करती होडाक्टर ने कहा है कि मेरी मर्दानगी में कोई कमी नहीं है और ही तुम में कोई कमी है और फिर 2 सालों में तुम्हें 2 बार बच्चा ठहर भी तो चुका है‘‘अब यह अलग बात है कि तुम उन्हें संभाल नहीं पाई और तुम को 2 महीने
पर ही गर्भपात हो गयाहम फिर से कोशिश करेंगे और हमें औलाद जरूर होगी,’’ फजल ने हिना को समझाया. हिना की बच्चे को गोद लेने वाली बात से शायद फजल के आत्मसम्मान को ठेस लग गई थी, इसीलिए वह हिना पर झल्ला उठा था. हिना उस समय तो फजल की बात का कोई जवाब नहीं दे पाई, पर एक औलाद होने के गम में वह अंदर ही अंदर घुटने लगी और परेशान रहने लगी.

2 साल का समय और गुजर गया. अब भी हिना मां नहीं बन पाई थी और एक दिन अचानक वह बहुत बीमार पड़ गई. उसे डाक्टरों को दिखाया गया. ‘‘देखिए, इन्हें अंदरूनी कमजोरी है और ब्लड प्रैशर बढ़ा हुआ हैआप लोग इन्हें ज्यादा से ज्यादा खुश रखने की कोशिश कीजिएइन की बीमारी अपनेआप ठीक हो जाएगी,’’ डाक्टर कह कर चला गया. फजल को पता था कि हिना खुश क्यों नहीं रह पा रही है. शादी के इतने साल बाद भी वह मां नहीं बन पाई है. परेशान हालत में वह अपनी आरा मशीन पर बैठा हुआ लकडि़यों के एक ठूंठ को देख रहा था. ‘‘सब खैरियत तो है फजल बाबू,’’ आरा मशीन पर काम करने वाले सज्जाद मुंशी ने पूछा. ‘‘अरे कहां सज्जाद भाईमेरी दिक्कतें तो आप को पता ही हैंपर, अब हिना ने मां बन पाने की बात को अपने जेहन की गहराइयों में बिठा लिया हैलिहाजा, बीमार हो कर वह बिस्तर पर पड़ी है

‘‘हां, एक बार उस ने एक बच्चा गोद लेने की फरमाइश जरूर की थी, पर मैं ने उसे मना कर दिया, क्योंकि मुझे लगता है कि मेरे भाइयों के बच्चे भी तो मेरे बच्चे हैंतो भला बच्चा गोद लेने की जरूरत है?’’ फजल उसे बता रहा था. ‘‘तो इस में परेशानी क्या हैआप किसी बच्चे को गोद ले सकते हैं,’’ सज्जाद मुंशी ने कहा. ‘‘ऐसे हर किसी राह चलते का बच्चा तो गोद नहीं लिया जा सकता सज्जाद भाईकोई ऐसा हो, जिसे हम जानते होंउस के परिवार को जानते होंउन के परिवार में कोई ऐब हो तो ही ठीक हैवरना हम बेऔलाद ही मर जाएं तो बेहतर होगा,’’ फजल ने लंबी सांस भरते हुए कहा.

‘‘ऐसी बात मत कहिए हुजूरवैसे, अगर आप चाहें तो इस नाचीज का बच्चा गोद ले सकते हैं. अभी मेरी बीवी ने कोई 10 दिन पहले ही एक बेटी को जन्म दिया है. आप तो जानते ही हैं कि मेरे पहले से ही 3 लड़कियां हैंएक लड़के की चाह में मेरा परिवार बड़ा होता गया‘‘अब इतनी महंगाई के दौर में 4 लड़कियों को पालनामेरे लिए भी मुश्किल होगा शुरुआत से आप बच्ची को साथ रखेंगे, तो वह आप को अब्बू और हिना को अम्मी ही समझेगी,’’ सज्जाद मुंशी ने कहा. ‘‘तुम्हारी बेटी को मैं गोद ले लूं, पर क्या तुम्हारी बीवी इस के लिए राजी हो जाएगी?’’ फजल ने पूछा.

‘‘मेरी अपनी बीवी को तो मैं मना लूंगाऔर फिर मेरा बच्चा आप जैसे शरीफ आदमी के घर पलेगा तो इस से बड़ी सुकून देने वाली बात मेरे लिए और क्या होगीयह हम 2 लोगों की जबान का मामला है इस में किसी कोर्ट की जरूरत होगी और ही किसी कागजी कार्यवाही की‘‘मैं कसम खाता हूं कि इस बच्चे को आप को सौंपने के बाद उस पर कभी हक नहीं जताऊंगा,’’ सज्जाद ने कहा. सज्जाद मुंशी की बातों में फजल को सचाई नजर रही थी और उस की बातों से एक नया हौसला भी मिल रहा था. उसे यों सोच में पड़ा देख सज्जाद मुंशी बोला, ‘‘इतनी भी कोई जल्दी नहीं हैआप घर जा कर अच्छी तरह सोच लेनाघर पर सलाह कर लेना, तब मुझे बताना.’’ घर कर फजल ने एक बच्ची को गोद लेने वाली बात हिना से कही.

फजल की बातें सुन कर हिना की सूनी आंखों में मानो रोशनी गई. वह बिस्तर पर से उठ कर बैठ गई और बोली, ‘‘तो क्या मुझे भी कोई अम्मी कह कर पुकारेगा? मैं भी किसी को गोद में ले सकूंगी,’’ हिना की आंखों से आंसू छलक पड़े थे. काफी अच्छी तरह सोचविचार करने के बाद फजल सज्जाद मुंशी के घर जा कर उस की दुधमुंही बच्ची को अपने घर ले आया. दुनिया की कोई भी मां अपने दुधमुंहे बच्चे को अपने से अलग नहीं करना चाहती है, पर जब सज्जाद मुंशी ने अपनी बीवी को यह बात समझाई कि उस की बेटी इतने बड़े घर में जाएगी और वे लोग भी तुम्हारी बेटी को कितना लाड़ करेंगे, तब जा कर कहीं हामी भरी थी सज्जाद की बीवी ने. हिना बच्ची को देखदेख कर जीने लगी. उसे बोतल से दूध पिलाती और प्यार से छुटकी कह कर बुलाती. घर के और बच्चे भी इस छुटकी के जाने से बहुत खुश थे.

वे सब दिनभर हिना के कमरे में ही बने रहते और छुटकी को गोद में लेने के लिए आपस में झगड़ते भी रहते. ‘‘देखो, जरा हौले से छूना. छोटे बच्चे बहुत नाजुक होते हैंबिना हाथ धोए इन्हें हाथ लगाने से भी नुकसान हो सकता है,’’ हिना बच्चों को हिदायत देती. उस की इस हिदायत में भले ही एक मां का प्यार छिपा था, पर बड़ी भाभी निकहत और हैदर की बीवी रजिया को उस का एक गोद ली हुई लड़की के लिए इतना प्यार दिखलाना कतई नहीं सुहाता था. उन लोगों ने अपने बच्चों को भी हिना के कमरे में जाने से रोकने की कोशिश की, पर भला बच्चे कब मानने वाले थे. सालभर बाद सज्जाद मुंशी फजल के घर आए, तो उन की नजरें इधरउधर घूम रही थीं. फजल ने उन की इस बेचैनी को भांप लिया. वे अंदर जा कर छुटकी को ले आए और सज्जाद मुंशी की गोद में दे दिया.

‘‘लो सज्जाद भाई, जीभर कर प्यार कर लो इसे. तुम्हारी नजरें इसे ही तो देखना चाह रही थीं ?’’ उसे देख सज्जाद मुंशी की आंखें छलछला आई थीं. वे कुछ देर तक तो छुटकी को देखते ही रहे, फिर बोले, ‘‘जीफजल साहबमेरी नहीं यह आप की बेटी हैऔर आप के घर में कर इस की जिंदगी भी संवर जाएगीआप इसे पाल कर मुझ गरीब पर अहसान कर रहे?हैं.’’ ‘‘नहींनहीं सज्जाद भाईआप ये कैसी बातें कर रहे हैंअहसान तो आप का है, जो अपने घर की रौनक को हमें सौंपा है,’’ फजल ने सज्जाद को गले लगाते हुए कहा. फजल का मन भी आरा मशीन के काम में लगने लगा था और हिना भी दिनभर घर के काम के साथसाथ छुटकी का ध्यान भी खूब रखती. जब तक फजल ने छुटकी को गोद नहीं लिया था, तो हिना तनाव के चलते रात में सैक्स के मामले में फजल का बिस्तर पर बिलकुल भी साथ नहीं देती, पर अब हालात बेहतर हो गए थे.

रात में हिना रूमानी हो जाती और बिस्तर पर कभी नखरे नहीं करती और खुल कर फजल का साथ देती.
एक दिन जब हिना छुटकी के साथ खेल रही थी, तभी हिना को अचानक चक्कर गया और वह गिरतेगिरते बची, पर आम घरेलू औरतों की तरह उस ने भी एक सामान्य बात समझी, पर उसी शाम को जब हिना फजल को दूध का गिलास देने जा रही थी, तब एक बार फिर से हिना को चक्कर गया और दूध फर्श पर फैल गया. ‘‘अरे, यह क्या हुआ तुम्हें हिनाक्या बात है? तुम्हारी तबीयत तो ठीक?है ?’’ फजल ने हिना को सहारा दे कर उठाते हुए कहा. ‘‘नहींबस ऐसे हीजरा सा सिर घूम गया था,’’ हिना ने कहा. ‘‘सिर घूमने के भी कई कारण हो सकते हैंबेवजह तो कभी किसी को चक्कर नहीं आतामैं कल सुबह ही तुम्हें डाक्टर के पास ले कर जाऊंगा,’’ फजल ने कहा.

अगली सुबह फजल और हिना डाक्टर के पास पहुंचे और डाक्टर ने हिना का पूरा चैकअप किया. ‘‘मुबारक हो, आप मां बनने वाली हैं,’’ यह सुन कर हिना बुरी तरह चौंक गई थी. डाक्टर के शब्द चाशनी की तरह हिना के कानों में उतरते हुए चले गए. हिना ने जब यह खुशखबरी फजल को सुनाई, तो वह भी खुशी से झूम उठा. उस ने अपने भाइयों को भी फोन पर यह खुशखबरी सुना दी. जहां पहले हिना घर का सारा काम करती थी, वहीं अब उसे पूरा आराम दिया गया. हिना शान से पूरा दिन आराम करती और खानेपीने के लिए काजू, बादाम, दूध दही आदि किसी चीज की कमी नहीं थी. घर के कामकाज का जिम्मा निकहत भाभी और रजिया ने उठा लिया और छुटकी की भी जिम्मेदारी अब उन लोगों के सिर पर ही गई थी.

समय पूरा होने पर हिना ने एक बेटे को जन्म दिया. फजल की आंखों में खुशी के आंसू थे. मुबारकबाद देने वालों के फोन लगातार रहे थे, पर अब भला फजल को अपना होश ही कहां था. खूब मिठाइयां बांटी गईं और बेटे के पैदा होने की खुशी में आरा मशीन पर काम करने वाले मजदूरों को एक दिन की छुट्टी दे दी गई. हिना ने अपना पूरा ध्यान बेटे पर ही केंद्रित कर रखा था, पर खुशियों के इस माहौल में बेचारी छुटकी कहीं अकेली पड़ गई थी. हिना के पास जाती तो वह उसे अपने बेटे को छूने देती और कहती कि तुम अभी बाहर से खेल कर आई हो, बिना नहाए या बिना हाथ धोए छोटे बच्चे को हाथ मत लगाओ. छुटकी तो हिना को ही अपनी अम्मी समझे हुई थी, पर अब तक हिना ने भी उस के पालनपोषण में कोई कमी नहीं रखी थी. कोई इन कान भरने वालों से बचे भी तो कैसेये लोग तो कान भरने के हजार बहाने खोज ही लेते हैं और ऐसा ही बहाना हैदर की बीवी रजिया ने खोज लिया था.

‘‘देख हिनाअब तक तेरे औलाद नहीं हो रही थी, इसलिए तेरे उस छुटकी को गोद लेने पर मैं ने कोई एतराज नहीं जताया. पर अब तो तेरा अपना बेटा पैदा हो गया है और आगे तेरी कोख और भी फलेगीफूलेगीअब उस मुंशी की लड़की को भला घर में रखने की क्या जरूरत‘‘कल को उस की सारी जिम्मेदारियां तुम लोगों को ही तो उठानी पड़ेंगीवैसे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. तुम लोगों को ज्यादा लाड़ आता हो तो रखे रहो उस मुंशी की लड़की को अपने साथ,’’ जहर का बीज बो कर हैदर की बीवी रजिया वहां से चली गई. उसी समय छुटकी वहां आई और हिना से बिसकुट मांगने लगी. हिना अपने बेटे के पैरों में मालिश करने में मशगूल थी. ऐसे समय उसे छुटकी का यों जिद करना अखर सा रहा था, पर छुटकी ने फिर भी जिद बंद नहीं की तो हिना झल्ला उठी और एक जोरदार तमाचा उस ने छुटकी के गाल पर रसीद कर दिया.

फिर तो यह आएदिन होता ही रहता. छुटकी की हर बात पर उसे मारना और डांटना आम बात बन गई थी और फिर वह दिन भी गया, जब हिना ने फजल से कहा, ‘‘सुनो, अब तो हमारा बेटा जुनैद हमारी गोद में हैऔर फिर अब तो हम दोबारा भी मां बन सकते हैं. ऐसे में हमें छुटकी को उस के असली मांबाप को सौंप देना चाहिएउस के बड़े होने के साथ ही उस की जिम्मेदारी भी तो हमें लेनी पड़ेगी.’’
‘‘क्या बकवास बात हैहमारे आड़े वक्त में सज्जाद मुंशी ने अपनी बेटी हम बेऔलादों को सौंप कर हमें मुसकराने का मौका दिया और वह भी सिर्फ एक जबान परउन्होंने इस बात की कोई कागजी कार्यवाही भी नहीं कराईऔर आज जब हमारा खुद का बच्चा इस दुनिया में गया है, तो हम उन की बेटी को उन्हें वापस कर देंयह हमारी मौकापरस्ती नहीं कहलाएगी?’’ फजल नाराजगी दिखा रहा था.
उस समय तो हिना ने खामोश रहना ही सही समझा, पर उस के मन में अब छुटकी के लिए वह प्यार नहीं रहा था.

कहते हैं कि अच्छा समय बीतते ज्यादा वक्त नहीं लगता. ऐसा ही कुछ यहां भी हुआ. हिना और फजल के दोनों बच्चे जुनैद और छुटकी साथसाथ बड़े होने लगे और 10 साल कब चले गए, पता ही नहीं चला.
बच्चे तो बच्चे होते हैं, पर इनसान अपना जहर उगलने से कभी बाज नहीं आता. ऐसा ही जहर उगला था हिना की भाभियों, निकहत और रजिया ने. दोनों ने जुनैद को बताया कि छुटकी उस की सगी बहन नहीं है, बल्कि उसे तो सज्जाद मुंशी से गोद लिया गया था. ऐसा कर के जुनैद के मन में लोगों ने छुटकी के प्रति नफरत और अलगाव डालने की कोशिश की, पर जुनैद के मन में तो अपनी बहन छुटकी के लिए बेशुमार प्यार था और छुटकी भी उस पर जान न्योछावर करती थी. ‘‘अरे, मैं तो तुझे इसलिए पैसे देती हूं कि तू बाहर जा कर अपनी पसंद का जूस पी लिया कर. और तू है कि छुटकी के लिए उन पैसों को बचाबचा कर मिठाई ले आता?है,’’ हिना ने जुनैद को डांटते हुए कहा.

‘‘पर अम्मीदोनों साथ मिल कर खाते हैं, तो मजा दोगुना हो जाता हैहै ?’’ कह कर हिना के गालों को चूम लिया था जुनैद ने. जुनैद का छुटकी की तरफ झुकाव हिना को फूटी आंख सुहाता था. उस का बस चलता तो छुटकी को अब यहां रहने देती, पर फजल और जुनैद के आगे वह कुछ कह नहीं पाती थी, बस मन मसोस कर रह जाती. शहर में अचानक पीलिया फैल गया था. जाने कहां से हिना को भी इस बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था. वह कमजोर होने लगी थी. डाक्टर को दिखाया गया, तो उन्होंने दवा के साथसाथ पूरी तरह से उसे आराम करने की हिदायत दी. हिना को ऐसे समय पर सब से ज्यादा खानेपीने में एहतियात की जरूरत थी, पर निकहत और रजिया ने ऐसे मुश्किल समय में अपने हाथ खींच लिए और अपने बच्चों को भी हिना के कमरे में जाने से रोक दिया, क्योंकि उन का मानना था कि पीलिया छूत की बीमारी है और उन्हें और उन के बच्चों में भी फैल सकती है.

हिना अकेली पड़ गई थी, पर छुटकी अपनी अम्मी की हर छोटीबड़ी जरूरत का ध्यान रखती. डाक्टर की दी हुई कौन सी दवा कब देनी है, यह जिम्मा छुटकी ने अपने हाथों में ले रखा था. यहां तक कि अम्मी को उठानेबिठाने का काम भी छुटकी ने बखूबी किया, साथ ही फजल और जुनैद को भी खानेपीने और किसी भी तरह की कोई तकलीफ होने दी. दवा के असर से और छुटकी की देखरेख में हिना जल्दी ही ठीक होने लगी. हिना की शरीर की बीमारी के साथसाथ उस के मन की बीमारी भी जाने लगी. हिना के मन में छुटकी के लिए प्यार उमड़ आया और मन ही मन उसे पछतावा हो रहा था.

मैं कितनी खुदगर्ज हो गई थी और छुटकी को पराई लड़की समझ कर पिंड छुड़ा रही थी, पर छुटकी ने अपनी सेवा और प्यार से मेरा मन ही नहीं जीता, बल्कि मुझे एक नई सीख भी दी है, हिना ने सोचा और बोली, ‘‘अरे सुनअब तू छुटकी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी हो गई हैबड़की हैतू बड़की,’’ हिना ने प्यार से छुटकी को गले लगा लिया था. जुनैद भी दौड़ कर हिना और छुटकी से लिपट गया. पास में ही फजल खड़ा हुआ मुसकरा रहा था.           

Hindi Family Story: मजुरिया – मजदूर मां का सपना जीती उस की लाड़ली

Hindi Family Story: ‘‘बहनजी, इन का भी दाखिला कर लो. सुना है कि यहां रोज खाना मिलता है और वजीफा भी,’’ 3 बच्चों के हाथ पकड़े, एक बच्चा गोद में लिए एक औरत गांव के प्राइमरी स्कूल में बच्चों का दाखिला कराने आई थी.

‘‘हांहां, हो जाएगा. तुम परेशान मत हो,’’ मैडम बोली.

‘‘बहनजी, फीस तो नहीं लगती?’’ उस औरत ने पूछा.

‘‘नहीं. फीस नहीं लगती. अच्छा, नाम बताओ और उम्र बताओ बच्चों की. कौन सी जमात में दाखिला कराओगी?’’

‘‘अब बहनजी, लिख लो जिस में ठीक समझो.

‘‘बड़ी बेटी का नाम मजुरिया है. इस की उम्र 10 साल है. ये दोनों दिबुआ और शिबुआ हैं. छोटे हैं मजुरिया से,’’ बच्चों की मां ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘नाम मंजरी. उम्र 8 साल. देव. उम्र 7 साल और शिव. उम्र 6 साल. मजुरिया जमात 2 में और देव व शिव का जमात एक में दाखिला कर लिया है. अब मैं तुम्हें मजुरिया नहीं मंजरी कह कर बुलाऊंगी,’’ मैडम ने कहा.

मजुरिया तो मानो खुशी से कूद पड़ी, ‘‘मंजरी… कितना प्यारा नाम है. अम्मां, अब मुझे मंजरी कहना.’’

‘‘अरे बहनजी, मजुरिया को मंजरी बना देने से वह कोई रानी न बन जाएगी. रहेगी तो मजदूर की बेटी ही,’’ मजुरिया की अम्मां ने दुखी हो कर कहा.

‘‘नहीं अम्मां, मैं अब स्कूल आ गई हूं, अब मैं भी मैडम की तरह बनूंगी. फिर तू खेत में मजदूरी नहीं करेगी,’’ मंजरी बनते ही मजुरिया अपने सपनों को बुनने लगी थी.

मजुरिया बड़े ध्यान से पढ़ती और अम्मां के काम में भी हाथ बंटाती.

मजुरिया पास होती गई. उस के भाई धक्का लगालगा कर थोड़ाबहुत पढ़े, पर मजुरिया को रोकना अब मुश्किल था. वह किसी को भी शिकायत का मौका नहीं देती थी और अपनी मैडम की चहेती बन गई थी.

‘‘मंजरी, यह लो चाबी. स्कूटी की डिक्की में से मेरा लंच बौक्स निकाल कर लाना तो. पानी की बोतल भी है,’’ एक दिन मैडम ने उस से कहा.

मजुरिया ने आड़ीतिरछी कर के डिक्की खोल ही ली. उस ने बोतल और लंच बौक्स निकाला. वह सोचने लगी, ‘जब मैं पढ़लिख कर मैडम बनूंगी, तो मैं भी ऐसा ही डब्बा लूंगी. उस में रोज पूरी रख कर लाया करूंगी.

‘मैं अम्मां के लिए साड़ी लाऊंगी और बापू के लिए धोतीकुरता.’

मजुरिया मैडम की बोतल और डब्बा हाथ में लिए सोच ही रही थी कि मैडम ने आवाज लगाई, ‘‘मंजरी, क्या हुआ? इतनी देर कैसे लगा दी?’’

‘‘आई मैडम,’’ कह कर मजुरिया ने मैडम को डब्बा और बोतल दी और किताब खोल कर पढ़ने बैठ गई.

अब मजुरिया 8वीं जमात में आ गई थी. वह पढ़ने में होशियार थी. उस के मन में लगन थी. वह पढ़लिख कर अपने घर की गरीबी दूर करना चाहती थी.

उस की मां मजुरिया को जब नए कपड़े नहीं दिला पाती, तो वह हंस कर कहती, ‘‘तू चिंता मत कर अम्मां. एक बार मैं नौकरी पर लग जाऊं, फिर सब लोग नएनए कपड़े पहनेंगे.’’

‘‘अरे, खुली आंख से सपना न देख. अब तक तो तेरी फीस नहीं जाती है. कौपीकिताबें मिल जाती हैं. सो, तू पढ़ रही है. इस से आगे फीस देनी पड़ेगी.’’

अम्मां मजुरिया की आंखों में पल रहे सपनों को तोड़ना नहीं चाहती थी, पर उस के मजबूत इरादों को थोड़ा कम जरूर करना चाहती थी. वह जानती थी कि अगर सपने कमजोर होंगे, तो टूटने पर ज्यादा दर्द नहीं देंगे.

और यही हुआ. मजुरिया की 9वीं जमात की फीस उस की मैडम ने अपने ही स्कूल के सामने चल रहे सरकारी स्कूल में भर दी.

मजुरिया तो खुश हो गई, लेकिन कोई भी मजुरिया आज तक इस स्कूल में पढ़ने नहीं आई थी. एक दिन जब मजुरिया स्कूल पढ़ने गई और वहां के टीचरों ने उस की पढ़ाई की तारीफ की, तो वहां के ठाकुर बौखला गए.

‘‘ऐ मजुरिया की अम्मां, उधार बहुत बढ़ गया है. कैसे चुकाएगी?’’

‘‘मालिक, हम दिनरात आप के खेत पर काम कर के चुका देंगे.’’

‘‘वह तो ठीक है, पर अकेले तू कितना पैसा जमा कर लेगी? मजुरिया को क्यों पढ़ने भेज रही है? वह तुम्हारे काम में हाथ क्यों नहीं बंटाती है?’’ इतना कह कर ठाकुर चले गए.

मजुरिया की अम्मां समझ गई कि निशाना कहां था. लेकिन इन सब से बेखबर मजुरिया अपनी पढ़ाई में खुश थी. पर कोई और भी था, जो उस के इस ख्वाब से खुश था.

पल्लव, बड़े ठाकुर का बेटा, जो मजुरिया से एक जमात आगे गांव से बाहर के पब्लिक स्कूल में पढ़ता था. वह मजुरिया को उस के स्कूल तक छोड़ कर आगे अपने स्कूल जाता था.

‘‘तू रोज इस रास्ते से क्यों स्कूल जाता है? तुझे तो यह रास्ता लंबा पड़ता होगा न?’’ मजुरिया ने पूछा.

‘‘हां, सो तो है, पर उस रास्ते पर तू नहीं होती न. तू उस रास्ते से आने लगे, तो मैं भी उसी से आऊंगा,’’ पल्लव ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘न बाबा न, वहां तो सारे ठाकुर रहते हैं. बड़ीबड़ी मूंछें, बाहर निकली हुई आंखें,’’ मजुरिया ने हंस कर कहा.

‘‘अच्छा, तो तू ठाकुरों से डरती है?’’ पल्लव ने पूछा.

‘‘हां, पर मुझे ठकुराइन अच्छी

लगती हैं.’’

‘‘तू ठकुराइन बनेगी?’’

‘‘मैं कैसे बनूंगी?’’

‘‘मुझसे शादी कर के,’’ पल्लव ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘तू पागल है. जा, अपने स्कूल. मेरा स्कूल आ गया है,’’ मजुरिया ने पल्लव को धकेलते हुए कहा और हंस कर स्कूल भाग गई.

उस दिन मजुरिया के घर आने पर उस की अम्मां ने कह दिया, ‘‘आज से स्कूल जाने की जरूरत नहीं है. ठाकुर का कर्ज बढ़ता जा रहा है. अब तो तुझे स्कूल में खाना भी नहीं मिलता है. कल से मेरे साथ काम करने खेत पर चलना.’’

मजुरिया टूटे दिल से अम्मां के साथ खेत पर जाने लगी.

वह 2 दिन से स्कूल नहीं गई, तो पल्लव ने खेत पर आ कर पूछा, ‘‘मंजरी, तू स्कूल क्यों नहीं जा रही है? क्या मु?ा से नाराज है?’’

‘‘नहीं रे, ठाकुर का कर्ज बढ़ गया है. अम्मां ने कहा है कि दिनरात काम करना पड़ेगा,’’ कहते हुए मजुरिया की आंखों में आंसू आ गए.

‘‘तू परेशान मत हो. मैं तुझे घर आ कर पढ़ा दिया करूंगा,’’ पल्लव ने कहा, तो मजुरिया खुश हो उठी.

अम्मां जानती थी कि ठाकुर का बेटा उन के घर आ कर पढ़ाएगा, तो हंगामा होगा. पर वह छोटे ठाकुर की यह बात काट नहीं सकी.

पल्लव मजुरिया को पढ़ाने घर आने लगा. लेकिन उन के बीच बढ़ती नजदीकियों से अम्मां घबरा गई. अम्मां ने अगले दिन पल्लव से घर आ कर पढ़ाने से मना कर दिया.

मजुरिया कभीकभी समय मिलने पर स्कूल जाती थी. पल्लव रास्ते में उसे मिलता और ढेर सारी बातें करता. कब 2 साल गुजर गए, पता ही नहीं चला. आज मजुरिया का 10वीं जमात का रिजल्ट आएगा. उसे डर लग रहा था.

पल्लव तेजी से साइकिल चलाता हुआ गांव में घुसा, ‘‘मजुरिया… मजुरिया… तू फर्स्ट आई है.’’

मजुरिया हाथ में खुरपी लिए दौड़ी, उस का दुपट्टा उस के कंधे से उड़ कर दूर जा गिरा. उस ने पल्लव के हाथ से अखबार पकड़ा और भागते हुए अम्मां के पास आई, ‘‘अम्मां, मैं फर्स्ट आई हूं.’’

अम्मां ने उस के हाथ से अखबार छीना और हाथ पकड़ कर घर ले गई. पर उस की आवाज बड़े ठाकुर के कानों तक पहुंच ही गई.

‘‘मजुरिया की मां, तेरी लड़की जवान हो गई है. अब इस से खेत पर काम मत करवा. मेरे घर भेज दिया कर…’’ ठाकुर की बात पूरी नहीं हो पाई थी, उस से पहले ही अम्मां ने उसे घूर कर देखा, ‘‘मालिक, हम खेतिहर मजदूर हैं. किसी के घर नहीं जाते,’’ इतना कह कर अम्मां घर चली गई.

घर पर अम्मां मजुरिया को कमरे में बंद कर प्रधान के घर गई. उन की पत्नी अच्छी औरत थीं और उसे अकसर बिना सूद के पैसा देती रहती थीं.

‘‘मालकिन, मजुरिया के लायक कोई लड़का है, तो बताओ. हम उस के हाथ पीले करना चाहते हैं.’’

प्रधानजी की पत्नी हालात भांप गईं.

‘‘हां मजुरिया की अम्मां, मेरे मायके में रामदास नौकर है. पुरखों से हमारे यहां काम कर रहे हैं. उस का लड़का है. एक टांग में थोड़ी लचक है, उस से शादी करवा देते हैं. छठी जमात पास है.

‘‘अगर तू कहे, तो आज ही फोन कर देती हूं. मेरे पास 2-3 कोरी धोती रखी हैं. तू परेशान मत हो, बाकी का इंतजाम भी मैं कर दूंगी.’’

मजुरिया की अम्मां हां कह कर घर आ गई. 7वें दिन बैलगाड़ी में दूल्हे समेत 3 लोग मजुरिया को ब्याहने आ गए. बिना बाजे और शहनाई के मजुरिया को साड़ी पहना कर बैलगाड़ी में बैठा दिया गया.

मजुरिया कुछ समझ पाती, तब तक बैलगाड़ी गांव से बाहर आ गई. उस ने इधरउधर नजर दौड़ाई और बैलगाड़ी से कूद कर गांव के थाने में पहुंच गई.

‘‘कुछ लोग मुझे पकड़ कर ले जा रहे हैं,’’ मजुरिया ने थानेदार को बताया.

पुलिस ने मौके पर आ कर उन्हें बंद कर दिया. मजुरिया गांव वापस आ गई. जब सब को पता चला, तो उसे बुराभला कहने लगे. मां ने उसे पीट कर घर में बंद कर दिया.

मजुरिया के घर पर 2 दिन से न तो चूल्हा जला और न ही वे लोग घर से बाहर निकले.

पल्लव छिप कर उस के लिए खाना लाया. उस ने समझाया, ‘‘देखो मंजरी, तुम्हें ख्वाब पूरे करने के लिए थोड़ी हिम्मत दिखानी पड़ेगी. बुजदिल हो कर, रो कर तुम अपने सपने पूरे नहीं कर सकोगी…’’

पल्लव के इन शब्दों ने मजुरिया को ताकत दी. वह अगले दिन अपनी मैडम के घर गई. उन्होंने उसे 12वीं जमात का फार्म भरवाया. इस के बाद पल्लव मंजरी को रास्ता दिखाता रहा और उस ने बीए कर लिया. पल्लव की नौकरी लग गई.

‘‘मंजरी, मैं अहमदाबाद जा रहा हूं. क्या तुम मु?ा से शादी कर के मेरी ठकुराइन बनोगी?’’ पल्लव ने मंजरी का हाथ पकड़ कर कहा.

‘‘अगर मैं ने दिल की आवाज सुनी और तुम्हारे साथ चल दी, तो फिर कभी कोई मजुरिया दोबारा मंजरी बनने का ख्वाब नहीं देख पाएगी. फिर कभी कोई टीचर किसी मजुरिया को मंजरी बनाने की कोशिश नहीं करेगी.

‘‘एक मंजरी का दिल टूटने से अगर हजार मजुरियों के सपने पूरे होते हैं, तो मुझे यह मंजूर है,’’ मजुरिया ने कड़े मन से अपनी बात कही.

पल्लव समझ गया और उसे जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे कर वहां से चला गया. Hindi Family Story

Hindi Short Story: जात – एक पेंटर का दर्द

Hindi Short Story: गांव में एक शानदार मंदिर बनाया गया. मंदिर समिति ने एक बैठक कर के मंदिर में रंगरोगन और चित्र सज्जा के लिए एक अच्छे पेंटर को बुलाना तय किया. सब ने शहर के नामचीन पेंटर को बुला कर काम करने की सहमति दी.दूसरे दिन मंदिर समिति द्वारा चुने गए 2 लोग शहर के नामचीन पेंटर की दुकान पर पहुंचे, जिस ने कई मंदिरों और दूसरी जगहों को अपनी कला से निखारा था.

मंदिर समिति के लोगों ने उस पेंटर को बताया कि मंदिर में कौनकौन सी मूर्तियां लगेंगी और उन देवीदेवताओं की लीलाओं से संबंधित चित्र बनाने हैं और रंगरोगन करना है.उस पेंटर ने हामी भरी, तो मंदिर समिति के सदस्यों ने उसे 2,000 रुपए एडवांस दे दिए.दूसरे दिन वह पेंटर अपने रंगों व ब्रश के अलावा दूसरे तामझाम के साथ गांव पहुंच गया.

मंदिर में सामान रख कर वह एक दीवार को चित्रकारी के लिए तैयार कर ही रहा था कि मंदिर समिति का एक सदस्य वहां आया और चित्रकार से बोला, ‘‘पेंटर साहब, बापू साहब ने कहा है कि अभी कुछ दिन काम नहीं करना है, इसलिए आप अभी जाओ. काम कराना होगा तो बुला लेंगे.’’वह पेंटर अपना काम रोक कर सामान को समेटते हुए वापस शहर अपनी दुकान पर लौट आया.

4-5 दिन बाद गांव के कुछ खास लोग उस की दुकान पर पहुंचे और उन में से एक बोला, ‘‘पेंटर साहब, अभी काम बंद रखना है, इसलिए मंदिर की तरफ से जो पेशगी दी थी, वह वापस दे दो.’’पेंटर ने उन्हें वह राशि लौटा दी. सब चले गए. दूसरे दिन शहर में मंदिर समिति का एक सदस्य दिखाई दिया,

तो उस पेंटर ने इज्जत के साथ बुला कर उस से काम न कराने की वजह जाननी चाही, तो उस सदस्य ने समिति में हुई चर्चा बताते हुए कहा, ‘‘आप छोटी जाति के हो और मंदिर में उन का घुसना मना है, इसलिए आप को मना किया व दूसरे पेंटर को काम दे दिया.’’यह सुन कर वह पेंटर बोला,

‘‘पर, मैं न तो शराब पीता हूं, न मांस खाता हूं और न ही बीड़ीसिगरेट पीता हूं… मैं तो दोनों समय मंदिर जाता हूं.’’इस पर वह आदमी बोला, ‘‘वह सब तो ठीक है और बहुत सारे मंदिरों में आप ने बहुत अच्छा काम भी किया है, पर हमारे यहां बापू साहब ने मना किया, तो किस की हिम्मत जो आप के लिए बोले.’’ Hindi Short Story

Hindi Funny Story: पटनिया एडवैंचर, कुसूरवार कौन

Hindi Funny Story: पटनिया एडवैंचर आटोरिकशा ट्रिप बचपन से ही मुझे एडवैंचर ट्रिप पर जाने का शौक रहा है. जान हथेली पर रख कर स्टंट द्वारा लाइफ के साथ लाइफ से खेलने या मजा लेने की इच्छाएं मेरे खून, दिल, गुरदे, फेफड़े वगैरह में उफान मारा करती थीं, लेकिन कमजोर दिल और कमजोर अर्थव्यवस्था के चलते अपने इस शौक को मैं डिस्कवरी चैनल, ऐक्शन हौलीवुड मूवी या रोहित शेट्टी की फिल्में देख कर पूरा कर लिया करता था.कहते हैं कि जिस चीज की तमन्ना शिद्दत से की जाए तो सारी कायनात उसे मिलाने की साजिश करने लगती है. कुछ इसी तरह की घटना मेरे साथ भी हुई.

कुदरत ने मेरी सुन ली और मुझे भी कम खर्च में नैचुरल एडवैंचर जर्नी का सुनहरा मौका मिल ही गया.पहली बार बिहार की राजधानी पटना जाना हुआ. फिर क्या था, साधारण टिकट ले कर रेलवे के साधारण डब्बे में सेंध लगा कर घुस गया.

सेंध लगाना मजबूरी थी, क्योंकि 103 सीट वाली अनारक्षित हर बोगी में तकरीबन 300 पैसेंजर भेड़बकरियों की तरह सीट, लगेज सीट, फर्श, टौयलैट और गेट पर बैठेखड़े, लटके या फिर टिके हुए थे.  मैं भी इमर्जैंसी विंडो के सहारे किसी तरह डब्बे में घुस कर अपने आयतन के अनुसार खड़ा रहने की जगह पर कब्जा कर बैठा. स्टेशनों पर चढ़नेउतरने वाले मुसाफिरों की धक्कामुक्की और गैरकानूनी वैंडरों की ठेलमठेल के बीच खुद को बैलेंस करते हुए 6 घंटे की रोमांचक यात्रा के बाद मैं आखिरकार पटना जंक्शन पहुंच ही गया.

इस के बाद मैं पटना जंक्शन से पटना सिटी के लिए आटोरिकशा की तलाश में बाहर निकला.पटना सिटी के लिए बड़ी आसानी आटोरिकशा मिल गया. ड्राइवर ने उस के पीछे वाली चौड़ी सीट पर 3 लोगों को बैठाया, जबकि आगे की ड्राइवर सीट वाली कम जगह पर अपने अलावा 3 दूसरे पैसेंजर को बड़ी ही कुशलता से एडजस्ट कर लिया.कमोबेश सभी आटोरिकशा ड्राइवर तीनों पैसेंजर के साथ खुद को सैट कर  टेकऔफ करने के हालात में नजर आ रहे थे.

कुछ ड्राइवर ड्राइविंग सीट पर बीच में बैठ कर तो कुछ साइड में शिफ्ट हो कर बैठे थे. समझ लो कि अपनी तशरीफ को 45 डिगरी के कोण पर सैट कर के आटोरिकशा हुड़हुड़ाने को तैयार था.ड्राइवर समेत कुल 4 सीट वाले आटोरिकशा में 7 लोगों के सफर करने का हुनर देख कर मुझे समझते देर न लगी कि पटनिया आटोरिकशा ड्राइवर बेहतरीन मैनेजर होते हैं. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इस तरह का रोमांचक सीन आल इंडिया लैवल पर सिर्फ और सिर्फ पटना की सड़कों पर ही देखा जा सकता है.

पटना की सड़कों पर दोपहिया और चारपहिया के बीच तिपहिया की धूम के आगे रितिक रौशन और उदय चोपड़ा की ‘धूम’ भी फेल है.पटनिया आटोरिकशा ड्राइवर समय का पक्का होता है. बसस्टैंड से पैसेंजर को बैठाने के चक्कर में ड्राइवर ने भले ही जितनी देरी की हो, पर पैसेंजर सीट फुल होने के बाद वह बाएंदाएं, राइट साइड, रौंग साइड, आटोरिकशा की मैक्सिमम स्पीड और तेज शोर के साथ राकेट की रफ्तार से मंजिल की ओर कूच कर गया.

भले ही इन लोगों के चलते सड़क पर जाम लग जाए, पर लाइन में रह कर समय बरबाद करने मे ये आटोरिकशा वाले यकीन नहीं रखते और अमिताभ बच्चन की तरह अपनी लाइन खुद तैयार कर लेते हैं.शायद आगे सड़क पर जाम था या पेपर चैकिंग मुहिम चल रही थी, पता नहीं, पर इस बात का ड्राइवर को जैसे ही अंदाजा हुआ, फिर क्या था… उस ने हम सब को पटना की ऐसी टेढ़ीमेढ़ी गलियों में गोलगोल घुमाया, जिन गलियों को ढूंढ़ पाना कोलंबस के वंशज के वश से बाहर था. मुझे समझते देर न लगी कि यहां के आटोरिकशा ड्राइवर आविष्कारक या खोजी सोच के होते हैं.

हम राकेट की रफ्तार से सफर का मजा ले ही रहे थे कि फ्लाईओवर पर पीछे से हुड़हुड़ाता हुआ एक आटोरिकशा काफी तेजी से हमारे आगे निकल गया. शायद सवारियों से ज्यादा मंजिल तक पहुंचने की जल्दी ड्राइवर को थी. इसी मकसद को पूरा करने के लिए वह तीखे मोड़ पर टर्न लेने के दौरान तेज रफ्तार से बिना ब्रेक लिए पलटीमार सीन का लाइव प्रसारण कर बैठा.हमारे खुद के आटोरिकशा की बेहिसाब स्पीड और रेस में आगे निकल रहे दूसरे आटोरिकशा का हश्र देख कर मेरे कलेजे के अंदर डीजे बजने लगा. समझते देर न लगी कि पटनिया सड़कों पर ड्राइवर के रूप में यमराज के दूत भी मौजूद हैं, जो अपनी हवाहवाई स्पीड और रेस से सवारियों को परिवार या परिचित तक पहुंचाने के साथसाथ अस्पताल से ऊपर वाले के दर्शन तक कराने में भी मास्टर होते हैं.

ऐसा नहीं है कि बिना सैंसर बोर्ड वाले वाहियात भोजपुरी गीत इंडस्ट्री की तरह पटनिया परिवहन बिना ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम वाली है.

सौ से सवा सौ मीटर पर यातायात पुलिस वाले मौजूद रहते हैं. ये पटनिया आटोरिकशा ड्राइवर की औकात से ज्यादा सवारी ढोने और जिगजैग ड्राइविंग जैसे साहसिक कारनामे के दौरान धृतराष्ट्र मोड में, जबकि हैलमैट, सीट बैल्ट, कागजात वगैरह चैक करने के दौरान संजय मोड में अपनी जिम्मेदारी पूरी करते नजर आते हैं.बातोंबातों में एक बात बताना भूल ही गया कि यहां के आटोरिकशा ड्राइवर किराया मीटर या दूरी के बजाय पैसेंजर की मजबूरी के मुताबिक तय कर लेते हैं.

घटतेबढ़ते पैट्रोल के कीमत की तरह समय, स्टैंड पर आटोरिकशा की तादाद और मुसाफिरों के मंजिल तक पहुंचने की जरूरत के हिसाब से ड्राइवर को किराया तय करते देख और सफर के दौरान ब्लूटूथ स्पीकर से सवारियों को भोंड़े भोजपुरी गीत सुनवाने की इन की आदत से मुझे समझते देर न लगी कि यहां के आटोरिकशा ड्राइवर कुशल अर्थशास्त्री और संगीत प्रेमी भी हैं.

अगर आप भी रोहित शेट्टी के प्रोग्राम ‘खतरों के खिलाड़ी’ में नहीं जा सके हों और महंगाई के आलम में जान हथेली पर वाले एडवैंचर ट्रिप के शौक को पूरा करने से चूक गए हैं, तो महज 10 से 20 रुपए में पटनिया टैंपू ट्रैवल एडवैंचर ट्रिप का मजा किसी भी सीजन में ले सकते हैं. मेरी गारंटी है कि इस शानदार ट्रिप में आप को हर पल यादगार रोमांच हासिल होगा. Hindi Funny Story

Story In Hindi: 9 महीने की उमर

Story In Hindi: इदा चाहती कुछ थी, कहती कुछ थी और करती कुछ थी. वह मजबूर थी अपने हालात से, अपने माहौल से. दिखने में तो वह खुद एक बच्ची लगती थी, मगर उस का अपना एक 5 साल का बच्चा था.वह करीम से कहती थी, ‘‘तुम्हें शर्म नहीं आती? किसी और की बीवी को इस तरह परेशान करते हो? वह भी तब, जब वह तुम से 5 साल बड़ी है? उस का अपना एक बच्चा है, वह भी 5 साल का?’’

ये सारी बातें वह एक सांस में कह जाती थी, बिना रुके.करीम उस की बातें सुन कर कहता था, ‘‘क्या करूं… किसी और की बीवी इतनी खूबसूरत हो और मु?ा से प्यार करती हो, तो शर्म कहां से आए?’’करीम की बातें सुन कर इदा हंस देती थी और कहती थी, ‘‘तुम बहुत अच्छे हो करीम.’’करीम को यह सुन कर बड़ी तसल्ली मिलती थी.

वह अपनी बातें कहने में मगन रहता था. इदा उस की कुछ बातों को यों ही हंसी में उड़ा देती थी, मगर जब करीम उस से मिलने की बात करता था, तब उस के चेहरे की हंसी गायब हो जाती थी.वह कहती थी, ‘‘करीम, मैं भी तुम से मिलना चाहती हूूं. तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं.

मगर ऐसा हो नहीं सकता है न. मैं किसी और की हूं.’’फिर इदा रोने लगती थी. करीम उसे अपने हिसाब से हौसला देता था. उसे सम?ाता था. दूर से ही सही, उस के आंसू पोंछने की कोशिश करता था.करीम को यह बात सम?ा में नहीं आती थी कि यह दुनिया ऐसी क्यों है? यह समाज ऐसा क्यों है? उसे इदा बहुत पसंद थी. इदा को भी वह बहुत पसंद था. मगर वह किसी और की थी.

वह चाह कर भी करीम की नहीं हो सकती थी. करीम इदा के बिना नहीं रह सकता था. अब किया क्या जाए? किसी को कोई रास्ता नहीं सू?ाता था. न इदा को और न करीम को.इदा तो रो कर अपना गम आंसुओं में बहा देती थी और शांत हो जाती थी.

वह उस से मिलने नहीं आ सकती, यह सुन कर करीम जिद करना छोड़ देता था. मगर बारबार अपने दिल को सम?ाना इतना आसान काम नहीं होता. करीम का दिल रहरह कर इदा के लिए बेचैन हो उठता था और फिर से उसे बुलाना शुरू कर देता था.इदा ने कई बार कोशिश भी की कि वह करीम से मिल ले, मगर ये मुलाकातें बस कुछ पलों की ही हो सकी थीं, जैसे सड़क पर, अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने के रास्ते में या फिर किसी किताब की दुकान में.

यह कुछ पलों का मिलना करीम को और बेचैन कर देता था. एक बार तो जब इदा ने जाने के लिए हाथ मिलाया, तो सड़क पर ही करीम ने उस का हाथ इस तरह पकड़ लिया, जैसे अब छोड़ेगा ही नहीं.इदा अब परेशान होने लगी थी. वह कहने लगी, ‘‘करीम, तुम अब मु?ो बहका रहे हो.’’करीम का ऐसा कोई इरादा नहीं था. वह तो बस उस का हाथ नहीं छोड़ना चाहता था.

उसे समाज के बनाए नियम सम?ा नहीं आते थे. वह तो बस अपनी इदा को जाने नहीं देना चाहता था. मगर इदा जिस समाज में रहती थी, वहां इस मुहब्बत को कभी नहीं सम?ा जा सकता था. यह बात इदा अच्छी तरह जानती थी और इसी बात की वजह से वह करीम से दूर रहना चाहती थी. लेकिन करीम बारबार उस के रास्ते में आ जाता था.

एक बार इदा अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने गई थी. करीम भी वहीं था.अपने बच्चे को स्कूल में छोड़ कर इदा करीम से मिली और उस से पूछा, ‘‘करीम, इस वक्त यहां किसलिए?’’करीम ने कहा, ‘‘बस, तुम्हें देखने का मन किया, तो चला आया.’’इदा करीम की इस दीवानगी से बहुत घबराती थी, मगर वह उस के रास्ते में बारबार आ ही जाता था.इदा सोचती थी कि ये मर्द ऐसे ही होते हैं.

मगर करीम ऐसा नहीं था. इदा उस की नसों में बस चुकी थी. खून बन कर जिस्म में बह रही थी. करीम के लिए और कुछ नहीं था, सिर्फ इदा और बस इदा. उस की पूरी दुनिया इदा थी और इदा की दुनिया में करीम के लिए कोई जगह नहीं थी.करीम बस इदा की सांसों में रह सकता था. उस के ख्वाबों में रह सकता था, मगर हकीकत में इदा अपने घर में करीम का नाम भी नहीं ले सकती थी. यह बात करीम को खाए जा रही थी.करीम की हालत इदा के लिए दिनोंदिन बिगड़ती जा रही थी.

इदा भी परेशान थी कि क्या करे? करीम इदा के ख्वाब देखता था, फिर इदा से कहता था कि यह ख्वाब पूरा कर दो…. मगर करीम के ख्वाबों में इदा होती थी… और हकीकत में इदा नहीं होती थी. इदा बस करीम से बातें करती थी. बातें हर तरह की. बातें ऐसी कि मियांबीवी भी क्या करें. मगर यह सब करीम की वजह से था. इदा बहुत खूबसूरत थी. यह करीम की परेशानी थी. करीम को इदा के अलावा कुछ सू?ाता ही नहीं था.इदा स्कूटी चलाती थी. करीम को इस बात पर यकीन नहीं हुआ था.

इस बात का उसे तब पता चला था, जब वह इदा के पीछे स्कूटी पर बैठा था. तब हवा के एक ?ोंके ने इदा का दुपट्टा थोड़ा सा सरका दिया था और उस के दाएं कंधे के पास एक तिल है, जो करीम को दिख गया था.फिर करीम से रहा नहीं गया. उस ने आंखें बंद कीं और दुनिया की परवाह किए बगैर अपने होंठ इदा के तिल पर रख दिए. यह पहली बार था,

जब करीम ने इदा को इस तरह छुआ था. इदा घबरा गई. उस ने कहा, ‘‘करीम, मैं गिर जाऊंगी…’’करीम ने दूसरी बार उस तिल को उसी तरह छू लिया. अब इदा को लगा कि रुकना पड़ेगा और वह रुक गई.अब करीम को स्कूटी से उतरना था. उतरते हुए उस ने इदा की कमर पर हाथ रख दिया था. इदा को यह बात भूली नहीं.इदा चाहती थी कि करीम खुद को संभाले, मगर करीम चाहता था कि अब इदा उसे संभाले. करीम उस वक्त चाहता था कि इदा के खूबसूरत होंठों को छू ले, मगर इदा ने कहा,

‘‘यहां नहीं करीम…’’करीम को लगा कि इदा फिर किसी मौके की बात कर रही है और उस ने खुद को सम?ा लिया और इदा चली गई.उस रात इदा की नींद उड़ गई थी और करीम को पहली बार ठीक से नींद आई थी. मगर इदा ने खुद को संभाल लिया और दोबारा ऐसा न हो, इस की पुरजोर कोशिश करने लगी. उस ने करीम से मिलने की बात पर हां कहना छोड़ दिया और करीम, जो यह सोच कर खुश हो रहा था कि इदा ने कहा है कि यहां नहीं… इस का मतलब वह किसी और जगह मिलेगी, के सपने चूरचूर हो गए, जब इदा ने कहा, ‘‘अब मैं तुम्हें अपनी स्कूटी पर नहीं बैठने दूंगी.

’’यहां एक नया सिलसिला शुरू हुआ. दोनों में बातें कम हो गईं, मगर दोनों ने एकदूसरे के बारे में सोचना और ज्यादा कर दिया. अब इदा को रात में अचानक ?ाटके आते थे. वह चौंक कर उठ जाती थी. करीम सपने देखता था, जिन में इदा बिना कपड़ों के होती थी. अगले दिन जब करीम किसी तरह कोशिश कर के इदा को बात करने के लिए मना लेता था,

तब इदा प्यार से उस के ख्वाब सुनती थी. जब करीम कहता कि ‘इदा, इस ख्वाब को सच कर दो,’ तब दोनों में बहस हो जाती थी. ?ागड़ा हो जाता था. फिर कईकई दिन बातें नहीं हो पाती थीं. करीम परेशान हो जाता था. इदा से बात करने के लिए वह अजीबअजीब तरकीबें निकालता था. अपने दफ्तर से फोन करता था. पीसीओ से फोन करता था और इदा जब फोन उठाती थी, तब कहता था,

‘‘फोन मत रखना…’’फिर वही सिलसिला शुरू होता था. इदा का रूठना, करीम का मनाना. इदा का आंसू बहाना और फिर करीम का अपने दिल को सम?ाना. इस तरह दोनों का रिश्ता एक अजीब दौर से गुजरने लगा. ?ां?ालाहट और ?ाल्लाहट से भर गया था करीम का दिल. उधर इदा खुद को सम?ाती रहती थी कि यह गलत है. वह करीम को भी सम?ाती थी.करीम को यह नहीं सम?ा में आता था कि इदा फिर उन बातों पर क्यों बात करती थी,

जो बातें उसे गलत लगती हैं?करीम इदा को चाहता था, मगर इस कीमत पर नहीं कि इदा की जिंदगी उस की वजह से किसी मुसीबत में पड़ जाए. करीम इस बात का हमेशा खयाल रखता था. वह इदा को दूर से देख कर तसल्ली कर लेता था, मगर अब यह सब भारी होता जा रहा था. दिल बो?िल होता जा रहा था.इदा बारबार करीम से कहती थी,

‘‘तुम क्यों आए मेरी जिंदगी में करीम? तुम दूर चले जाओ मेरी जिंदगी से… दूर, बहुत दूर.’’यह करीम का ही कलेजा था, जो यह सब बरदाश्त करता था. फिर एक दिन करीम ने एक ख्वाब देखा और इदा से कहा, ‘‘यह मेरी आखिरी ख्वाहिश है. इसे पूरी कर दो, फिर मैं तुम्हारी जिंदगी से हमेशा के लिए चला जाऊंगा.’’तब इदा को जैसे धक्का सा लगा…उस दिन इदा खूब रोई थी, क्योंकि करीम का ख्वाब ही ऐसा था. उस ने देखा था कि इदा और वह मिलते हैं… उन के जिस्म मिलते हैं.

फिर एक बच्चा होता है. इदा उसे बड़े प्यार से पालती है.इतना ख्वाब सुन कर इदा को हंसी आई थी. उस ने कहा था, ‘‘करीम… तुम भी न… पागल हो तुम… अच्छा, फिर क्या हुआ?’’‘‘फिर मैं चला गया,’’ करीम ने कहा.अब इदा ने पूछा, ‘‘चला गया मतलब?’’करीम ने कहा, ‘‘मैं चला गया. हमेशा के लिए. मगर एक बच्चे की शक्ल में फिर से तुम्हारे पास आ गया तुम्हारे बेटे के रूप में…’’इदा को यह बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी थी.मगर करीम ने उसे ठीक से सम?ाया,

‘‘देखो इदा, तुम मेरे पास नहीं आ सकती. मैं तुम्हारी जिंदगी में नहीं आ सकता. मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता. तुम अपनी बसीबसाई दुनिया छोड़ नहीं सकती और तुम्हें छोड़ना भी नहीं चाहिए. लेकिन एक काम हो सकता है. हमें मिले हुए आज 9 महीने हुए हैं. 9 महीने में तो कुछ होता है न? वही कर दो… मु?ो 9 महीने की उमर दे दो. ‘‘मैं 9 महीने और जिंदा रहना चाहता हूं.

फिर चला जाऊंगा तुम्हारी जिंदगी से… हमेशा के लिए. यही चाहती हो न तुम? यही एक रास्ता निकाला है मैं ने. ‘‘तुम मु?ा से एक बार तसल्ली से मिल लो. फिर तुम एक बच्चा पैदा करो, जो मेरी निशानी हो. मैं तुम से दूर नहीं रह सकता. मैं तुम्हारे पास रहना चाहता हूं और नियमकानून वाली इस दुनिया में एक बच्चे के ऊपर कोई शक नहीं करता. ‘‘मैं एक बच्चे की शक्ल में तुम्हारे पास रहूंगा. एकदम पास. तुम्हारे सीने से लिपट कर सोऊंगा. यही तो मैं चाहता था हमेशा.’’इदा करीम की बात बड़े ध्यान से सुन रही थी. उस का चेहरा पीला पड़ गया था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि करीम के इस ख्वाब को कैसे सच करे? वह करीम को अब क्या जवाब दे? Story In Hindi

Story In Hindi: जय बाबा सैम की

Story In Hindi: अंकिता ने अमित को अपने खास दोस्तों से मिलवाने के लिए अपनी सहेली महक के घर लंच पर बुलाया था. उन दोनों को वहां पहुंचे चंद मिनट ही हुए होंगे कि अंकिता की दूसरी प्रिय सहेली रिया भी अपने पति राजीव के साथ आ पहुंची.

महक के पति मोहित ने रिया पर नजर पड़ते ही उस की तारीफ की, ‘‘रिया, आज तो तुम्हें देख रास्ते में न जाने कितने लड़के गश खा कर गिरे होंगे.’’

‘‘एक भी नहीं गिरा,’’ रिया ने उदास दिखने का अभिनय किया.

‘‘मैं नहीं मान सकता. देखो, संसार की सब से खूबसूरत स्त्री को सामने देख कर मेरा दिल कितना तेज धड़क रहा है,’’ अपनी छाती पर रखने के लिए मोहित ने अचानक रिया का हाथ पकड़ लिया.

‘‘जय बाबा सैम की…’’ रिया ने अपना हाथ छुड़ाने का प्रयास करने के बजाय शरारती अंदाज में नारा लगाया.

‘‘जय…’’ अंकिता और महक ने हाथ उठा कर जोशीली आवाज में नारा पूरा किया तो मोहित ने झेंपते हुए रिया का हाथ छोड़ दिया.

अमित को इन तीनों सहेलियों का व्यवहार अटपटा लगा.

‘‘यार, इस नए बंदे के सामने तो अपने बाबा सैम का गुणगान इतनी जल्दी शुरू मत करो,’’ मोहित ने बुरा सा मुंह बना कर टिप्पणी की.

‘‘हम मरते दम तक भी बाबा का गुणगान करना बंद नहीं करेंगे,’’ महक ने अपने पति के गाल पर प्यार से चिकोटी काटी.

‘‘उन्होंने हमें जो ज्ञान दिया है, उसे हम तीनों ने हमेशा के लिए गांठ बांध लिया है,’’ अंकिता ने महक की बात का समर्थन किया.

‘‘यह बाबा सैम कौन हैं?’’ अमित ने उत्सुकता दर्शाते हुए अंकिता से सवाल पूछा.

‘‘सैम का किस्सा तुम्हें जरा फुरसत में सुनाऊंगी अमित, पहले यह बताओ कि चाय पियोगे या कौफी?’’ महक ने टालते हुए कहा.

‘‘मैं चाय पिऊंगा.’’

सालभर पहले अंकिता अपनी इन दोनों करीबी सहेलियों महक और रिया से परिचित नहीं थी. एक रविवार की सुबह ये दोनों बिना कोई सूचना दिए पहली बार उस से मिलने कामकाजी महिलाओं के होस्टल में आ पहुंची थीं. महक ने अपना परिचय दिया तो पता चला कि वह मेरठ की रहने वाली है और वहां कालेज में समीर के साथ पढ़ा करती थी. समीर जौब करने दिल्ली आ गया था जबकि महक मेरठ में एक पब्लिक स्कूल में पढ़ा रही थी.

उस दिन महक ने गंभीर लहजे में अंकिता को बताया था, ‘‘किसी जानकार ने मुझे महीनाभर पहले बताया कि उस ने समीर को एक सुंदर लड़की के साथ फिल्म देख कर बाहर निकलते देखा था. यह सुन कर मेरा माथा ठनका, क्योंकि समीर ने मुझ से शादी करने का वादा कर रखा है. हम दोनों के बीच प्रेम का रिश्ता करीब 4 साल से चल रहा है. कहीं वह मुझे धोखा तो नहीं दे रहा, यह जानने के लिए मैं ने जब उस के पीछे एक प्राइवेट डिटैक्टिव लगाया तो पता चला कि जनाब दिल्ली में एक नहीं बल्कि 2-2 लड़कियों से चक्कर चला रहे हैं.’’

उस का इशारा अंकिता और रिया की तरफ था. अंकिता समीर की कंपनी में जौब कर रही थी जबकि रिया से उस का परिचय किसी दोस्त के माध्यम से एक विवाह समारोह में हुआ था.

उन तीनों ने आपस में खुल कर बातें कीं तो समीर की बेवफाई सामने आ गई. वह अंकिता और रिया के साथ भी प्यार का खेल खेल रहा था.

बहुत ज्यादा परेशान और गुस्से में नजर आ रही महक बोली, ‘‘हमारे लिए सब से पहले यह जानना जरूरी है कि समीर हम में से किसी का जीवनसाथी बनने लायक है भी या नहीं. अगर वह हम तीनों को बेवकूफ बना कर हमारी भावनाओं से खेल रहा है तो हिसाब बराबर करने के लिए हमें उसे तगड़ा सबक सिखाना चाहिए.’’

उन तीनों ने साथ बैठ कर समीर की असलियत उजागर करने के लिए योजना बनाई. फिर योजनानुसार पहले अंकिता ने फोन कर के समीर से कहा कि वह आज शाम उस के साथ गुजारना चाहती है. उस ने 6 बजे नेहरू पार्क में उसे मिलने के लिए बुलाया.

रिया ने भी उसी शाम समीर को अपने घर में 6 बजे चाय पीने के लिए बुलाया. बातोंबातों में वह उसे यह बताना नहीं भूली कि उस शाम उस के मातापिता भी घर पर नहीं होंगे.

आखिर में महक ने समीर को फोन कर के जानकारी दी कि वह एक रिश्तेदार को देखने आज दिल्ली आ रही है और रात 8 बजे के करीब वापस मेरठ लौट जाएगी. अत: उस ने 6 बजे उसे अपने मामा के घर मिलने के लिए बुलाया.

समीर ने उन तीनों से ही शाम 6 बजे मिलने का वादा कर लिया.

अमित ने चाय का पहला घूंट भरने के बाद जायकेदार चाय बनाने के लिए महक की दिल खोल कर तारीफ की.

महक ने प्रसन्न अंदाज में अमित से पूछा, ‘‘अब तुम यह बताओ कि हमारी अंकिता के साथ तुम ने इश्क का चक्कर कब, कहां और कैसे चलाया?’’

‘‘यह मेरे दोस्त नीरज की शादी में आई हुई थी. मैं तो पहली ही नजर में इसे अपना दिल दे बैठा था,’’ अमित ने कुछ शरमाते हुए सब को जानकारी दी.

‘‘पहली बार अंकिता को देख कर मुझ पर भी कुछ ऐसा ही प्रभाव पड़ा था, पर अफसोस कि तब तक मेरी बरात रिया के फार्म हाउस तक पहुंच चुकी थी,’’ राजीव के इस मजाक पर सब दिल खोल कर हंसे तो रिया ने चिढ़ाने वाले अंदाज में अपनी जीभ निकाली.

‘‘अच्छा, एक बात बताओ. क्या तुम किसी भी सुंदर लड़की को देख कर लाइन मारना शुरू कर देते हो?’’ महक ने एक ही झटके से यह टेढ़ा सवाल अमित से पूछा.

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है,’’ अमित की आवाज में लड़खड़ाहट थी.

‘‘ऐसी बात हो भी तो फिक्र नहीं,’’ महक ने उस की टांग खींचना जारी रखा, ‘‘किसी भी सुंदर लड़की को देखते ही अगर तुम्हारे सिर पर लाइन मारने का भूत सवार हो जाता हो तो अपना यह शौक तुम रिया और मेरे साथ फ्लर्ट कर के पूरा कर लेना. हम दोनों ऐसी किसी छेड़छाड़ का बिलकुल बुरा नहीं मानेंगी.’’

‘‘वाह, क्या खुलेआम झूठ बोला जा रहा है यहां,’’ मोहित ने हंसते हुए अपनी पत्नी की बात का विरोध किया, ‘‘बहुत अच्छी हैं ये सालियां, हंसीमजाक करो और खाओ इन से गालियां… कितनी शानदार और बढि़या तुकबंदी की है न मैं ने, राजीव?’’ मोहित ने खुद ही अपनी तारीफ कर डाली.

राजीव के बोलने से पहले ही रिया ने उस की बात को खारिज करते हुए कहा, ‘‘बिलकुल झूठी बात है यह. सहेलियो, हम स्वस्थ हंसीमजाक का जवाब गालियों से बिलकुल नहीं देतीं लेकिन जब मामला शालीनता की सीमा तोड़ता नजर आए तो ही मजबूर हो कर यह नारा लगाती हैं, ‘‘बोलो, बाबा सैम की…’’

‘‘जय…’’ तीनों सहेलियों ने एकसाथ जोशीले अंदाज में ‘जय’ कहा, तो राजीव और मोहित से आगे कुछ कहते नहीं बना.

समीर के मन में खोट था और वह शाम को 6 बजे रिया या महक के बजाय अंकिता से मिलने पहुंच गया. घर में किसी और के न होने का फायदा उठाते हुए जब वह जबरदस्ती उस के कपड़े उतारने की कोशिश करने लगा तो बैडरूम में छिपी महक और रिया वहां से निकल कर उस के सामने ड्राइंगरूम में आ गईं. उन तीनों को एकसाथ सामने देख समीर की हालत एकदम से बेहद खस्ता हो गई. उस ने महक को सफाई देने की कोशिश की, पर उस का झूठ चला नहीं.

उन तीनों के तेज गुस्से को भांप उस ने अपनी जान बचा कर वहां से भागने की कोशिश की, पर तीनों गुस्साई शेरनियों के चंगुल से वह कैसे बच सकता था. तीनों ने उस चालबाज इंसान की पहले जम कर चप्पल व सैंडिलों से धुनाई की और फिर उसे एक झटके में अपनीअपनी जिंदगियों से निकाल कर फेंका.

महक और रिया उस रात अंकिता के घर में ही रुकीं. उस रात साथसाथ हंस और आंसू बहा कर सुबह तक वे तीनों अच्छी सहेलियां बन गई थीं. महक ने वार्त्तालाप को फिर से रास्ते पर लौटाते हुए इस बार अंकिता से पूछा, ‘‘क्या तू ने भी अमित को अपना भावी जीवनसाथी बनाने का फैसला उसी रात कर लिया था?’’

अंकिता ने प्यार से अमित का हाथ पकड़ कर जवाब दिया, ‘‘नहीं, मुझे तो इन जनाब को अपना भावी जीवनसाथी स्वीकार करने में महीना लग गया. वैसे मुझे नहीं लगता कि अमित दिलफेंक इंसान है. इसलिए तुम दोनों इसे ज्यादा तंग मत करो.’’

‘‘क्या हम तुम्हें तंग कर रही हैं?’’ महक ने अमित का हाथ थाम कर बड़ी अदा से पूछा.

‘‘नहीं तो,’’ उस के खुले व्यवहार ने अमित को शरमाने पर मजबूर कर दिया था.

‘‘शरमाओ मत, अमित. मौका मिलते ही अपनी इन दोनों सालियों से फ्लर्ट किया करो, क्योंकि किसी और लड़की के साथ फ्लर्ट करना तुम्हारे लिए अब ख्वाब बन कर रह जाएगा,’’ मोहित ने शरारती अंदाज में मुसकराते हुए अमित को सलाह दी.

‘‘लगे हाथ तुम्हें एक किस्सा और सुना देती हूं,’’ महक ने एकाएक संजीदा हो कर बोलना शुरू किया, ‘‘तुम्हें नेक सलाह देने वाले मेरे पति पर भी मात्र 6 महीने पहले शिखा नाम की एक खूबसूरत तितली से रोमांस करने का भूत चढ़ा था. जब हम तीनों को इन के रोमांस के बारे में पता चला…’’

मोहित ने अपनी पत्नी को टोकते हुए सफाई दी, ‘‘मुझ पर उस से इश्क लड़ाने का भूत नहीं चढ़ा था बल्कि शिखा ही इस स्मार्ट बंदे के पीछे हाथ धो कर पड़ गई थी.’’

उस के कहे कोअनसुना कर महक ने बोलना जारी रखा, ‘‘…तो हम तीनों शिखा से मिलने उस के फ्लैट पर पहुंच गईं. तुम अंदाजा लगा सकते हो कि हम तीनों गुस्साई शेरनियों ने शिखा का क्या हाल किया होगा. हम से उस ने थप्पड़ भी खाए और कुछ कीमती सामान भी हमारे हाथों तुड़वाया. मुझे विश्वास है कि हमारी शक्लें याद कर उसे महीनों ढंग से नींद नहीं आई होगी,’’ रिया अमित को यह बताते हुए काफी खुश लग रही थी.

मोहित ने झेंपे से अंदाज में मुसकराते हुए अमित को सफाईर् दी, ‘‘मेरे मन में कोई खोट नहीं था, पर इन्हें कौन समझाए. तुम ही बताओ कि किसी से मारपीट करना अच्छी बात है क्या?’’

‘‘बाबा सैम के साथ हुए अनुभव ने हमें उस मामले में बिलकुल सही राह दिखाई थी. बोलो, बाबा सैम की…’’

‘‘जय…’’ महक की आवाज में अपनी आवाज मिलाते हुए तीनों सहेलियों ने नारा लगाया और फिर जोर से हंसने लगीं.

समीर वाली घटना से सबक ले कर उस रात वे तीनों इस नतीजे पर पहुंचीं कि अधिकतर स्मार्ट, सुंदर और सफल युवक शादी होने के बाद भी अन्य खूबसूरत लड़कियों के साथ फ्लर्ट करेंगे. समस्या यह थी कि वे तीनों अपने भावी जीवनसाथी के रूप में ऐसे ही स्मार्ट, सुंदर और सफल  युवकों के सपने देखती थीं.

‘‘हमारे जीवनसाथी हमें अंधेरे में रख कर समीर की तरह मूर्ख बनाएं, हम ऐसी नौबत कभी आने ही नहीं देंगी. हम अपने पतियों की किसी गलत हरकत को कभी एकदूसरे से नहीं छिपाएंगी. उन्होंने अगर किसी अन्य लड़की से गलत रिश्ता बनाने की कोशिश की तो हम तीनों मिल कर उस अवैध प्रेम संबंध का समूल नाश करेंगी. चालाक और चरित्रहीन समीर आज से हमारे लिए ‘बाबा सैम’ हुआ और उस से मिले सबक को हम तीनों कभी नहीं भूलेंगी,’’ तीनों सहेलियों ने उस दिन से एकदूसरे के हितों का हमेशा ध्यान रखने की कसम खाई थी.

हंसी का दौर थम जाने के बाद महक ने अमित को बताया, ‘‘शिखा का हम ने जो बुरा हाल किया था, उस की खबर इश्क लड़ाने की शौकीन अन्य खूबसूरत तितलियों तक हम ने ही पहुंचाई. आज की तारीख में वे सब इन दोनों कामदेव के अवतारों से फ्लर्ट करने से डरती हैं.’’

राजीव ने अमित को भावुक लहजे में समझाने का नाटक करना शुरू किया, ‘‘अमित, मेरी मानो तो अंकिता के साथ शादी करने से बचो. शादी के बाद तुम्हें मन मार कर जीना पड़ेगा. जब भी कोई सुंदर लड़की तुम से हंसनाबोलना शुरू करेगी तो इन तीनों की सैम बाबा का नारा लगाती सूरतें आंखों के सामने आ कर तुम्हारी जबान को लकवा मार देंगी.’’

‘‘मेरे दिल में न अब खोट है, न कभी आएगा. अंकिता से शादी कर के मैं खुशीखुशी इन तीनों शेरनियों के साथ रिश्ता जोड़ने को तैयार हूं,’’ खुल कर मुसकराते अमित ने उस की सलाह को नजरअंदाज करते हुए अंकिता का हाथ चूम लिया.

अमित की आंखों में अपने लिए प्यार का सागर लहराते देख अंकिता खुश हो कर उस के गले लग गई.

‘‘मैं ने गाजर का हलवा बनाया है. हमारे गु्रप में एक समझदार इंसान के शामिल होने की खुशी में मैं सब का मुंह मीठा कराती हूं,’’ महक किचन की तरफ चली गई थी.

‘‘अमित, हमारे इतना समझाने के बावजूद तुम ने ‘आ बैल मुझे मार’ वाली कहावत सच साबित कर दी है,’’ मोहित ने यों अपना चेहरा लटका लिया मानो सचमुच बहुत दुखी हो, तो बाकी सब ने उस के इस बढि़या अभिनय पर जोरदार ठहाका लगाया.

कुछ देर बाद गाजर के हलवे का स्वाद चखते ही राजीव ने महक से कहा, ‘‘महक, जरा अपना हाथ इधर करो, मैं उसे चूमना चाहता हूं.’’

‘‘किस खुशी में?’’

‘‘बहुत स्वादिष्ठ हलवा बनाया है तुम ने.’’

‘‘मुंह से मेरी तारीफ कर देने से काम चल जाएगा.’’

‘‘पर हाथ चूम कर तारीफ करने का मजा ही कुछ और है,’’ कहते हुए राजीव ने महक का हाथ पकड़ लिया.

‘‘बोलो, बाबा सैम की…’’ महक ने हाथ छुड़ाने की कोशिश किए बिना नारा लगाने की शुरुआत की.

‘‘जय…’’ रिया और अंकिता नाटकीय अंदाज में आंखें तरेरती हुईं अपनी सहेली की सहायता करने को उठ खड़ी हुईं.

राजीव ने महक का हाथ छोड़ा और मोहित की तरफ देख कर मरे से स्वर में बोला, ‘‘बाबा सैम…’’

‘‘हाय… हाय…’’ मोहित ने बेहद दुखी इंसान की तरह अपना माथा ठोंकते हुए नारा पूरा करने में उस का साथ दिया तो बाकी सभी हंसतेहंसते लोटपोट हो गए. Story In Hindi

Hindi Kahani: मोबाइल गरम हो गया – सोनू और रेखा की चुहलबाजी

Hindi Kahani: सोनू एक गरीब घर का बेरोजगार नौजवान था. वह थोड़ाबहुत पढ़ालिखा था. काफी कोशिशों के बाद भी उसे सरकारी नौकरी नहीं मिली, तो मजबूरन अपना गांव छोड़ कर एक शहर में आ गया और प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगा.

शहर में सोनू किराए के मकान में रहता था. कुछ दिन बाद वहां मकान मालिक की एक रिश्तेदार रेखा रहने के लिए आई. वह बहुत खूबसूरत थी. गोरा रंग, कसा बदन, काले व घुंघराले बाल, बड़ीबड़ी आंखें, कोई भी देखे तो देखता ही रह जाए.

सोनू सुबह उठ कर खाना बनाता, बरतन मांजता और काम पर चला जाता. यह उस का रोज का काम था.

यह देख कर रेखा को बहुत तकलीफ होती थी. कुछ दिन बीत जाने के बाद रेखा ने उस से कहा, ‘‘सोनू, मैं तुम्हारे लिए खाना बना देती हूं.’’

यह बात सोनू को बहुत अच्छी लगी और अब वह रेखा के साथ खाना खाने लगा.

रेखा सोनू से खूब बतियाती थी और मस्ती भी करती थी, लेकिन सोनू कुछ नहीं कहता था. वह सिर्फ हंस कर रह जाता था.

अब सोनू को रेखा बहुत अच्छी लगने लगी थी. एक दिन उस ने हिम्मत कर के रेखा के गाल को छू दिया.

रेखा हंस कर रह गई और कुछ नहीं बोली. सोनू को यह देख कर बहुत अच्छा लगा.

एक दिन जब सोनू काम से वापस आया, तो रेखा ने उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया और खूब जोर से उस के गाल पर काट लिया.

सोनू सिहर कर रह गया और बाहर चला गया. धीरेधीरे दोनों में नजदीकियां बढ़ती गईं.

एक दिन की बात है. सोनू काम से लौटा, तो उस ने देखा कि रेखा दरवाजे पर खूब सजधज कर खड़ी थी. वह सोनू को अंदर नहीं जाने दे रही थी.

सोनू ने भी सोचा कि जो होगा देखा जाएगा. उस ने रेखा को अपनी बांहों में भर कर उस के गाल पर ऐसा काटा कि दांत के निशान बन गए.

रेखा का गाल इतना लाल हो गया कि उस से खून निकल आएगा. उस की आंखों से आंसू निकलने लगे.

रेखा ने सोनू को बहुत डांटा, ‘‘मैं तो तुम्हें दोस्त सम?ाती थी और तुम एकदम निर्दयी निकले.’’

यह सुन कर सोनू शर्मिंदा हो गया. उस ने अपना बिस्तर उठाया और सोने के लिए छत पर जाने लगा.

जातेजाते उस ने रेखा से कहा, ‘‘मुझे माफ कर दो. मैं अब दोबारा तुम्हें कभी नहीं छुऊंगा.’’

छत पर लेटे सोनू की आंखों से नींद कोसों दूर थी. यह कहावत भी सच है कि आग और फूस जब नजदीक होंगे, तो कभी न कभी आग जरूर लगेगी.

रात बीत रही थी. रात के तकरीबन 11 बज रहे थे. रेखा ने अपना मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए स्विच बोर्ड में लगाया.

थोड़ी देर बाद रेखा ने सोचा कि क्यों न वह मोबाइल चार्जर से निकाल कर अपने पास रख कर सो जाए. जब वह मोबाइल फोन निकालने लगी, तो उस ने देखा कि वह गरम हो गया था.

रेखा अंदर से दरवाजा धीरेधीरे पीटने लगी. छत पर लेटा सोनू जाग रहा था. वह सीढि़यों से उतर कर दरवाजे के पास आया और बोला, ‘‘रेखा, क्या बात है? इतनी रात को तुम जोरजोर से दरवाजा क्यों पीट रही हो?’’

रेखा ने कहा, ‘‘तुम अंदर आओ, तो बताऊं कि क्या बात है.’’

सोनू अंदर गया, तो रेखा ने कहा, ‘‘सोनू, मेरा मोबाइल फोन बहुत गरम हो गया है.’’

सोनू ने मोबाइल फोन को चार्जर से निकाल कर मेज पर रख दिया और कहा, ‘‘मोबाइल तो ज्यादा गरम नहीं है. थोड़े समय में ठंडा हो जाएगा.’’

फिर वे दोनों एकदूसरे को देखते रहे. सोनू बोला, ‘‘क्या अब मैं छत पर सोने जाऊं?’’

रेखा ने अंगड़ाई ली और कहने लगी, ‘‘अगर तुम नामर्द हो, तो जाओ. अगर मर्द हो, तो मेरा मोबाइल ठंडा कर के जाओ.’’

यह सुन कर सोनू ने दरवाजा अंदर से बंद किया और रेखा को बांहों में भर कर बिस्तर पर ले गया. फिर वे दोनों प्यार के सागर में इतनी बार डूबे कि सुबह कब हुई, पता ही नहीं चला. रेखा का बदन इतना टूट गया था कि उस में उठने की ताकत भी नहीं रही थी.

कुछ दिनों के बाद रेखा अपने गांव चली गई और सोनू को उसी मोबाइल फोन से फोन किया, जो उस रात गरम हो गया था.

फोन पर ही रेखा ने शादी करने का इरादा जताया. उस ने कहा, ‘‘प्यारे सोनू, अब तुम घर चले आओ.’’

सोनू उस के गांव गया और दोनों ने एक मंदिर में जा कर शादी कर ली. इस के बाद वे हंसीखुशी अपनी जिंदगी बिताने लगे. Hindi Kahani

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