Hindi Story: बदलाव

सबे की उस पुरानी सड़क पररामू जनरल स्टोरसिर्फ एक दुकान का नाम नहीं था, बल्कि यह लोगों की एक आदत बन चुका था. सुबह की पहली चाय से ले कर रात के आखिरी दूध तक, हर जरूरत का एक ही ठिकाना. किराना, दूध, छोटीमोटी दवा, कौस्मैटिक्स, आलूप्याज, लहसुन से कौपी, पैंसिलपैन तक सभी कुछ यहां मिलता था. तीनों भाई, बूढ़े पिता और बीच में खड़ा रामूतेज आवाज, तेज हिसाब और उस से भी तेज दिमाग. पर उस का दिल उतना बड़ा नहीं था, जितनी उस की दुकान. वह मनमाने दाम लगाता.
खराब सामान लौटाने से साफ मना कर देता. कंपनी के मुफ्त औफर दबा जाता और जब कोई कहता, ‘‘भैया,

यह तो गलत है,’’ तो रामू ठंडी मुसकान के साथ जवाब देता, ‘‘नहीं लेना तो
मत लो.’’
लोग चुप रह जाते. मजबूरी थी. कसबे में और औप्शन था भी तो नहीं.
समय धीरेधीरे करवट ले रहा था और बदलाव की बयार गांवकसबे में भी आई. स्मार्टफोन हर हाथ में गया. अब लोग गांवकसबे में इंटरनैट इस्तेमाल करने लगे थे.
स्मार्ट फोन और हर किसी का बैंक में खाता होने से क्रडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, पेटीएम का इस्तेमाल सीख रहे थे कसबे के लोग.
इंटरनैट ने गांव और शहर के
बीच की दूरी मिटा दी. लोग अब
घर बैठे सामान मंगाने लगेएमेजौन, फ्लिपकार्ट, ब्लिंकेट, मिंत्रा, मीशो सबकुछ सस्ता, साफ दाम और खराब हो तो बिना बहस सामान की वापसी.
पहलेपहल रामू हंसा, ‘‘मोबाइल से राशन आएगा? अरे, यह भी कोई
बात हुई…’’
लेकिन यह हंसी धीरेधीरे सूख गई. दुकान की भीड़ कम होने लगी. पुराने ग्राहक दिखना बंद हो गए. रोज का हिसाब घटने लगा.
पिता की आंखों में चिंता उतर आई. एक रात उन्होंने धीमे से कहा, ‘‘बेटा, कारोबार में पैसा नहीं, भरोसा कमाया जाता है. हम ने देर कर दी शायद.’’
रामू चुप रहा. उस ने पहली बार महसूस किया कि शायद गलती उस की भी थी.
पर तब तक बहुत देर हो चुकी थीऔर फिर कसबे में एक और नाम गूंज… ‘ब्लिंकेट’… मिनटों में सब्जी, दूध, दाल, आटाघर बैठे
अब लोग घर से निकलना भी कम करने लगे. एक दिन रामू की दुकान का शटर हमेशा के लिए गिर गया.
कुछ महीनों बाद वही रामू, पीठ पर बैग लटकाए, डिलीवरी की यूनिफार्म में, दरवाजे खटखटाता दिखाई दिया, ‘‘ब्लिंकेट डिलीवरी.’’

दरवाजा खुला. सामने वही बुजुर्ग अम्मां थीं, जिन की खराब दाल उस ने कभी बदलने से मना कर दिया था.
अम्मां ने उसे पहचान लिया. एक पल को दोनों की आंखें मिलीं. रामू की आंखें ?ाक गईं.
अम्मां ने सामान लिया और धीरे से बोलीं, ‘‘बेटा, जिंदगी सिखा देती है ?’’
रामू की आवाज भर्रा गई, ‘‘हां, अम्मां, अब सम? आया है.’’
सीढि़यां उतरते हुए रामू की आंखों में नमी थी. उसे याद आया कि कैसे लोग उस से हाथ जोड़ कर कहते थे, ‘‘भैया, बदल दीजिए,’’ और वह कठोर बना रहता था.
आज वही हाथ, दरवाजे की घंटी दबाने से पहले हलका सा कांप रहे थे.
घर लौट कर रामू ने पिता के पास बैठते हुए कहा, ‘‘बाबूजी, अगर फिर कभी दुकान खोली, तो सब से पहले भरोसा बेचेंगे.’’
पिता की बूढ़ी आंखों में आंसू थे. उन्होंने सिर्फ इतना कहा, ‘‘अब तू बड़ा हो गया है बेटा.’’
कभी ग्राहक रामू के सामने खड़े होते थे, आज वह ग्राहकों के दरवाजे पर खड़ा था.
यह समय का मजाक नहीं था. यह समय का आईना था, जिस में रामू पहली बार खुद को साफ देख पा रहा था

प्रज्ञा पांडे मनु

Press Release: पटना में सजेगा भोजपुरी सिनेमा का महोत्सव

Press Release: 7वां सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स समारोह का 15 मार्च, 2026 को पटना के बापू सभागार में*

पटना: भोजपुरी सिनेमा के प्रतिष्ठित और बहुप्रतीक्षित 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स शो का आयोजन 15 मार्च को सायं 6 बजे से बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में किया जाएगा। यह समारोह भोजपुरी फिल्म उद्योग के लिए एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सिनेमा जगत की नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी।

इस संबंध में पटना स्थित आई.एम. ए. हाल में आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए दिल्ली प्रेस में सरस सलिल के इंचार्ज भानु प्रकाश राणा ने बताया कि यह अवॉर्ड शो अब बिहार की राजधानी पटना में हो रहा है, जो एक नए अध्याय की शुरुआत है. इस बार इसे और भव्य और बड़े स्तर पर किया जाएगा और दर्शकों के लिए यह मनोरंजन का शानदार अनुभव रहेगा।

भानु प्रकाश राणा ने बताया कि इस अवॉर्ड शो में नामांकित फिल्मों और कलाकारों को जूरी द्वारा चयनित कर विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लाइव म्यूजिकल परफॉर्मेंस और स्टार नाइट मुख्य आकर्षण रहेंगे।

*डिजिटल युग के साथ बदला अवॉर्ड शो का स्वरूप*
भोजपुरी सिनेमा में अपनी जबरदस्त कॉमेडी के जरिए हंसाने वाले अभिनेता रोहित सिंह मटरू ने बताया इस वर्ष के आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका परिवर्तित फॉर्मेट है। बदलते समय और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार को ध्यान में रखते हुए इस बार अवॉर्ड शो को तीन प्रमुख वर्गों में बांटा गया है—सिनेमा (थिएटर रिलीज फिल्में), ओटीटी प्लेटफॉर्म और यूट्यूब/टीवी कंटेंट के आधार पर बेस्ट अवॉर्ड्स दिए जाएंगे। आयोजन समिति से जुड़े बृहस्पति कुमार पांडेय ने बताया कि भोजपुरी कंटेंट अब केवल सिनेमाघरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ओटीटी और डिजिटल माध्यमों के जरिए विश्वभर में देखा जा रहा है। ऐसे में इन प्लेटफॉर्म पर कार्य करने वाले कलाकारों और तकनीशियनों को समान मंच देना समय की आवश्यकता है।

*2020 से शुरू हुआ सम्मान का यह सिलसिला*

सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स शो की शुरुआत वर्ष 2020 में बस्ती जिले से हुई थी जिसका उद्देश्य था भोजपुरी सिनेमा को एक व्यवस्थित और प्रतिष्ठित मंच प्रदान करना। लोकप्रिय पत्रिका सरस सलिल द्वारा शुरू की गई इस पहल ने कुछ ही वर्षों में भोजपुरी फिल्म उद्योग में अपनी विशेष पहचान बना ली।
इसके बाद अयोध्या में 3 बार, बस्ती में 2 बार, इसका आयोजन हुआ था। लगातार इस आयोजन की भव्यता और सहभागिता में वृद्धि होती गई।

*लखनऊ में हुआ था छठा भव्य आयोजन*
पिछले वर्ष ‘छठा सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स’ शो का आयोजन लखनऊ के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुआ था। यह अब तक का सबसे बड़ा और व्यवस्थित समारोह माना गया।
उस समारोह में 50 से अधिक श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। बेस्ट फिल्म, बेस्ट अभिनेता, बेस्ट अभिनेत्री, बेस्ट निर्देशक, बेस्ट सिंगर, बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर और लाइफटाइम अचीवमेंट जैसी प्रमुख श्रेणियों में कलाकारों को सम्मानित किया गया।

अब तक हुए अवॉर्ड समारोह में यह अवॉर्ड दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’, अरविंद अकेला ‘कल्लू’, प्रदीप पांडे ‘चिंटू’, अंजना सिंह, आम्रपाली दुबे, ऋचा दीक्षित, संजय पांडेय, देव सिंह, अवधेश मिश्रा, रक्षा गुप्ता, मनोज टाइगर, प्रियंका सिंह, सीपी भट्ट, संजय कुमार श्रीवास्तव,विजय खरे, केके गोस्वामी, शुभम तिवारी, माही खान, मनोज भावुक, प्रसून यादव, कविता यादव, अनुपमा यादव, अंतरा सिंह ‘प्रियंका’, समर सिंह, सहित कई नामचीन एक्टरों को मिल चुका है।

पिछले वर्ष लखनऊ में हुए अवॉर्ड शो में लोकप्रिय अभिनेता अरविंद अकेला ‘कल्लू’, अभिनेत्री अंजना सिंह, निर्देशक रजनीश मिश्रा सहित कई चर्चित हस्तियों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान मिला। समारोह में बड़ी संख्या में दर्शकों और मीडिया की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया।

*इस बार पटना में और भी भव्य तैयारी*
अभिनेता और गायक विवेक पांडेय ने पटना में आयोजित हो रहे सातवें संस्करण को और भी भव्य और आकर्षक बनाने की तैयारी की गई है। रेड कार्पेट एंट्री, सेलिब्रिटी इंटरैक्शन, लाइव डांस परफॉर्मेंस और विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए इसे यादगार बनाने की योजना है।
भोजपुरी सिनेमा के चर्चित सितारे, निर्माता-निर्देशक, संगीतकार, गायक और तकनीकी विशेषज्ञ इस समारोह में भाग लेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह मंच केवल सितारों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे काम करने वाले तकनीकी कलाकारों को भी बराबर की पहचान देता है।

*क्षेत्रीय सिनेमा को नई ऊंचाई*
आयोजकों ने बताया कि सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स शो का मुख्य उद्देश्य भोजपुरी फिल्म उद्योग के प्रतिभाशाली कलाकारों और तकनीशियनों को प्रोत्साहित करना तथा क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
भोजपुरी सिनेमा ने पिछले कुछ वर्षों में कंटेंट, तकनीक और प्रस्तुति के स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति की है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ इसकी पहुंच देश-विदेश तक बढ़ी है। ऐसे में यह अवॉर्ड समारोह उद्योग को एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता की दिशा में प्रेरित करता है।

*सिने प्रेमियों से अपील*
आयोजन समिति ने पटना और आसपास के जिलों के सिने प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस भव्य समारोह की शोभा बढ़ाने की अपील की है। जब बापू सभागार में रोशनी, कैमरा और तालियों की गूंज होगी, तब यह केवल कलाकारों का सम्मान नहीं बल्कि पूरी भोजपुरी संस्कृति का उत्सव होगा।

7वां सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स शो एक बार फिर यह साबित करने जा रहा है कि भोजपुरी सिनेमा अब क्षेत्रीय दायरे से निकलकर राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

दिल्ली प्रेस पिछले 86 वर्षों से भारत का एक अग्रणी प्रकाशन समूह रहा है और इसकी 9 भाषाओं में प्रकाशित होने वाली 30 पत्रिकाओं के जरिए देश-भर के पाठकों तक सीधी पहुंच है। हमारे यहां देश की सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली हिंदी पत्रिकाओं ‘सरिता’, ‘गृहशोभा’, ‘चंपक’, ‘सरस सलिल’, ‘मुक्ता’, मनोहर कहानियां’, ‘सत्यकथा’ का निरंतर सफल प्रकाशन किया जा रहा है, जिन्हें करोड़ों पाठक बड़े चाव से पढ़ते हैं।

दिल्ली प्रेस समूह की ‘सरस सलिल’ पत्रिका वर्ष 1993 से निरंतर प्रकाशित हो रही है और आमजन को जानकारी देने के साथ-साथ उनका मनोरंजन भी कर रही है।

Hindi Story: अपना खयाल रखना अब्बू

Hindi Story: लखनऊ छोड़ कर गाजियाबाद में नौकरी करने आई सना का सामना मिस्टर कुमार से हुआ जो उस का बौस था. एक दिन कुमार ने उसे अपने घर बुला कर धोखे से उस की इज्जत लूट ली. सबा को अपने बीमार अब्बू का खयाल आया. क्या वह हालात को संभाल पाई?

जिंदगी में चाहे जितनी बार भी इंटरव्यू दिया जाए, हर बार घबराहट होना लाजिमी ही है. यही हाल सना का भी था. आज गाजियाबाद केओरियन मौलमें उस का इंटरव्यू था.
सना ने हलके आसमानी रंग का सूट पहना था और अपने बालों को खुला रहने दिया था. होंठों पर नैचुरल कलर की लिपस्टिक लगा कर उस ने अपनेआप को देखा, तो अपनी खूबसूरती पर रश्क किए बिना रह सकी.


कैब में बैठने के ठीक 30 मिनट के बाद ही सनाओरियन मौलके सामने थी. कैब का भुगतान करने के बाद सना उस मौल के मौडर्न गेट से अंदर दाखिल हुई. अभी सुबह के 10 ही बज रहे थे. मौल में भीड़भाड़ का आना अभी शुरू नहीं हुआ था. भीतर चारों तरफ रूम फ्रैशनर की खुशबू फैली हुई थी. सना ने अपनी नजरें दौड़ाईं, तो पाया कि इस मौल की विशालता और खूबसूरती के आगे वे सब मौल और शोरूम फीके हैं, जिन में वह पहले काम कर चुकी है. सना ने 5वें फ्लोर पर जाने के लिए लिफ्ट का बटन दबाया. कुछ ही सैकंड्स के बाद लिफ्ट खुल गई. ट्रांसपेरेंट लिफ्ट ऊपर जा रही थी और सना अपनी उत्सुकता भरी नजरों से चारों तरफ मौल की भव्यता को देख रही थी.


5वें फ्लोर पर लिफ्ट खुली तो सना ने देखा कि फ्लोर के एक कोने पर मार्बल का बड़ा सा काउंटर बना हुआ है जिस के पीछे एक दुबलीपतली सी खूबसूरत रिसैप्शनिस्ट बैठी हुई है. सना ने आत्मविश्वास भरे लहजे में उस से बात शुरू की, ‘‘गुड मौर्निंग मैम, आज मु? अकाउंट औफिसर के इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है.’’ सना की बात आगे सुनने से पहले ही वह रिसैप्शनिस्ट मुसकराई और उस ने एक बटन दबा कर चपरासी को बुलाया और सना के लिए कौफी लाने को कहा. थोड़ी देर में ही कौफी भी गई.
दिव्या नाम की उस रिसैप्शनिस्ट ने सना को एक ओर रखे सोफे पर बैठने और कौफी पीने का इशारा किया, तो सना  ‘थैंक्सकह कर कौफी पीने लगी.


कौफी खत्म करते ही सना तेजी से उठ कर रिसैप्शनिस्ट के पास पहुंची तो रिसैप्शनिस्ट ने सना को बताया कि उस का इंटरव्यू आज नहीं हो पाएगा, क्योंकि अकाउंट मैनेजर कुमार सर बाहर गए हुए हैं और उन की गैरमौजूदगी में किसी का भी इंटरव्यू नहीं हो सकता. सना को पूरे 2 दिन का इंतजार करना होगा. सना बु? मन से अपने होटल में लौट गई और अपनी खिसियाहट और थकान मिटाने के लिए एक शावर लिया और कमरे में ही पिज्जा मंगवा कर खाया और मोबाइल साइलैंट मोड पर लगा कर सो गई. जब सना जागी तो मोबाइल में अब्बू की 3 मिस कौल्स थीं. सना ने ?ाट से अब्बू को फोन मिलाया. अब्बू सना का हालचाल और खैरियत जानना चाह रहे थे.


सना ने अपनी बातों से अब्बू को निश्चिंत कर दिया था कि वह ठीक है और अपना ध्यान खुद रख सकती है.
अब्बू ने फोन अम्मी को पकड़ा दिया तो अम्मी की वही पुरानी नसीहतें फिर से शुरू हो गई थीं, ‘‘जमाना बहुत खराब है. आदमी की जात पर कभी भरोसा मत करना और देर रात तक घर के बाहर रहना बिलकुल ठीक नहीं.’’ सना मुसकरा रही थी और अम्मी की हर बात का जवाब देते जा रही थी. बातचीत के बाद सना ने फोन रखा और खाना खाने के लिए बाहर गई और अगले 2 दिन उस ने घूमनेफिरने में बिताए और वह सुबह भी ही गई जब सना को अपना इंटरव्यू देने जाना था. अगली सुबह सना रिसैप्शनिस्ट दिव्या से जा कर मिली.


दिव्या ने एक मुसकराहट से सना का स्वागत किया और उसे बताया कि आज सना को निराश नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि कुमार सर गए हैं और थोड़ी देर में अपने औफिस में जाएंगे, तब तक सना को उन का इंतजार करना होगा. सना एक ओर रखे सोफे में धंस गई थी. थोड़ी देर बाद दिव्या ने सना को कर बताया कि कुमार सर अपने छठी मंजिल पर बने औफिस में चुके हैं और सना अब जा कर इंटरव्यू दे सकती है. सना लिफ्ट ले कर छठे फ्लोर पर पहुंची. लिफ्ट से बाहर निकल कर बाईं तरफ एक शानदार केबिन बना हुआ था जिस के बाहर कुमार के नाम की नेम प्लेट लगी हुई थी. सना ने धड़कते दिल से दरवाजा खोला और बोली, ‘‘सर, क्या मैं अंदर सकती हूं?’’


सना के सामने एक 30-32 साल का आदमी बैठा हुआ था, जो अपनेआप को काफी बिजी दिखा रहा था. उस की टेबल पर 2 लैपटौप रखे हुए थे, जिन पर वह बारबार नजरें गड़ा रहा था. ‘‘मैं ने आप का बायोडाटा देखा, काफी अच्छी परफौर्मैंस रही है आप की,’’ मिस्टर कुमार के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर सना खुश हुई. ‘‘पर एक बात नहीं सम? आई?’’ सना मिस्टर कुमार के इस सवाल से थोड़ा ठिठक गई. मिस्टर कुमार ने सना से यह जानना चाहा कि वह तो रहने वाली लखनऊ की है और लखनऊ में तो शौपिंग मौल्स की कमी है और तो अकाउंट से रिलेटेड किसी भी काम की, तो फिर उसे लखनऊ छोड़ कर गाजियाबाद क्यों आना पड़ा?


‘‘जी ,दरअसल, गाजियाबाद में मेरे कुछ दोस्त और कई रिश्तेदार रहते हैं. वे बता रहे थे कि बड़ी जगह काम करने से एक्सपोजर ज्यादा मिलता है और फिर जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए बहुत सी बातों को छोड़ना पड़ता हैं. और फिर मेरे अब्बू की किडनी में इंफैक्शन है, जिस के कारण उन का इलाज काफी महंगा है. पैसे की जरूरत भी मेरे यहां आने की एक वजह है,’’ सना ने जवाब दिया. कुछ और औपचारिक सवाल पूछने के बाद मिस्टर कुमार ने सना से बाहर इंतजार करने को कहा. सना बाहर कर बैठ गई, पर अब उसे अच्छा नहीं लग रहा था. पता नहीं उसे यह नौकरी मिले भी या मिले, पर सना की यह सोच जल्द ही खत्म हो गई जब मिस्टर कुमार ने सना को अंदर बुलाया और उस को बधाई देते हुए कहा कि उसे अकाउंट औफिसर की जौब के लिए रख लिया गया है और वह कल से ही काम पर सकती है. सना ने कैब बुला ली और होटल में वापस गई. आते ही उस ने एक पीजी रूम खोजना शुरू कर दिया. औफिस से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर पीजी रूम मिला.


सना ने अगले दिन से ही औफिस जौइन कर लिया. कुमार सर के ठीक बगल में सना का केबिन था. वह मेहनत और लगन से काम करती थी और सारे खर्चे और पैसों के लेनदेन का पूरा हिसाब रखती थी.
उस दिन जब सना औफिस से घर जाने के लिए निकली तभी कुमार भी अपनी कार पार्किंग से निकाल कर रहा था. सना को देख कर उस ने कार रोकी और अंदर आने का इशारा किया. सना पहले तो हिचकिचाई पर फिर कार के अंदर बैठ गई. कुमार ने सना से उस के पीजी रूम का पता पूछा तो सना ने पता बताया. कुमार सना से कहने लगा कि उस का पीजी तो औफिस से बहुत दूर पड़ता है.
‘‘जी सर, औफिस के आसपास तो पीजी रूम मैं अफोर्ड नहीं कर सकती.’’ बदले में कुमार मुसकरा दिया था. इस के बाद कुमार सना को कार से उस के पीजी पर छोड़ने लगा. एक दिन कुमार ने सना से पास ही बनी सिविल लाइंस कालोनी के उस के फ्लैट में चल कर एक कप कौफी पीने को कहा, तो सना को तनिक
भी हिचकिचाहट नहीं हुई.


सिविल लाइंस एक बेहद शानदार कालोनी थी, जिस के अंदर मौल, जिम, स्विमिंग पूल जैसी कई सुविधाएं
मुहैया थीं. कुमार का 3 कमरों का फ्लैट देख कर सना को अजीब सा जरूर लगा कि अकेले आदमी के लिए तो एक कमरे का फ्लैट ही काफी होगा, फिर 3 कमरे का खासा बड़ा फ्लैट क्यों ले रखा है?
इतने में कुमार खुद ही कौफी बना कर ले आया था और सना से कौफी पीने को कहा और खुद मोबाइल पर दूसरे कमरे में जा कर बात करने लगा. जब तक कुमार आया, तब तक सना कौफी पी चुकी थी. कुमार सना को देख कर मुसकराए जा रहा था. सना ने कुछ देर बाद ही महसूस किया कि उस का सिर भारी हो रहा है और आंखों के सामने धुंधलापन छा रहा है. सना को तेज़ी से नींद रही थी.


सना की बेहोशी कब टूटी उसे पता नहीं था. उसे इतना जरूर सम? गया था कि उस के बदन से उस के कपड़े गायब हैं और पास में ही कुमार भी बिना कपड़ों के बेशर्मी से लेटा हुआ था. ‘‘तुम भी और लोगों की तरह नीच और कमीने निकले. मैं चुप नही बैठूंगी, बल्कि पुलिस में तुम्हारी रिपोर्ट करूंगी,’’ सना चीख रही थी. कुमार ने मुसकराते हुए सना की तरफ मोबाइल की स्क्रीन घुमा दी, जिस में एक वीडियो क्लिपिंग चल रही थी जिस में कुमार सना के नंगे जिस्म से खेल रहा था. सना अचकचा कर रह गई, ‘‘नहींइसे डिलीट करो.’’ कुमार पर सना की बात का कोई असर नहीं हुआ क्योंकि अब तो उस के हाथ में तुरुप का पत्ता लग गया था, जिसे वह इस्तेमाल कर के सना को जब चाहे तब मजबूर कर सकता था.


कुमार पर भरोसा करना सना को बहुत भारी पड़ गया था और अब तो उस क्लिपिंग के बल पर कुमार उसे ब्लैकमेल करेगा और सना का अंदाजा सही था. आने वाले दिनों में कुमार लगातार सना को वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर उस से शारीरिक संबंध बनाता रहा. करीब 2 महीने हो चुके थे. इस बीच कुमार ने कई बार सना को ब्लैकमेल किया. पर उस दिन सना को पता नहीं क्या हुआ कि वह कुमार के औफिस में जा कर रोने और गिड़गिड़ाने लगी, ‘‘प्लीज, आप को जो करना था आप मेरे साथ कर चुके हैं अब तो वह क्लिप डिलीट कर दीजिए, नहीं तो खुदकुशी करना ही मेरे लिए आखिरी उपाय रह जाएगा.’’ सना को इस तरह रोता देख कर कुमार का मन भर आया और उस ने अपने मोबाइल से वह क्लिप सना को सैंड कर दी और तुरंत ही अपने मोबाइल से डिलीट भी कर दी.


सना के मन से मानो बहुत भारी बो? उतर गया था. उस की न्यूड क्लिप डिलीट हो चुकी थी और अब कुमार उसे ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा, पर ऐसा सोचना सना की गलतफहमी थी. 2 दिन के बाद कुमार का फोन फिर आया और उस ने सना को अपने फ्लैट पर बुलाया और आने पर क्लिप को वायरल करने और औफिस में सब को उन के नाजायज रिश्ते की बात बता देने की धमकी देने लगा. ‘‘पर अब तुम मु? ब्लैकमेल नहीं कर सकते. वह क्लिप तो तुम ने डिलीट कर दी थी,’’ सना ने तीखी आवाज में कहा तो कुमार ठहाके मार कर हंसने लगा और कुटिल अंदाज में उस ने बताया कि सना जैसी खूबसूरत लड़की के नंगे जिस्म के साथ गुजारे हुए पलों की वीडियो की एक नहीं, बल्कि कई कौपी रखी जाती हैं और इतना कह कर कुमार ने सना की एक और वीडियो क्लिप उसे सैंड कर दी.


सना यह देख कर हैरान थी कि यह वीडियो क्लिप उस की बेहोशी वाले दिन की नहीं है, बल्कि बाद के किसी दिन ही है, जो कमरे में छिपे हुए कैमरे से शूट की गई है और ऐसी जाने कितनी वीडियो क्लिप उस के पास होंगी और उन के बल पर वह जाने कितने दिनों तक उस का शोषण करता रहेगा
अब तो सना को नौकरी छोड़ कर लखनऊ वापस चले ही जाना चाहिए. पर तब भी तो कुमार उस का पीछा नहीं छोड़ेगातो क्या खुदकुशी करना ही आखिरी उपाय है? पर तब अम्मीअब्बू क्या सोचेंगे? और फिर उन के बुढ़ापे में उन का साथ कौन देगा? सना परेशान होती जा रही थी   और कुमार के लगातार आते फोन और मैसेज उसे और भी परेशान कर रहे थे. सना पिछले 4 दिन से औफिस भी नहीं गई थी और मन ही मन उस ने यह फैसला ले लिया था कि अब कुमार उसे लगातार ब्लैकमेल करता रहेगा, इसलिए उस के लिए इस्तीफा दे कर वापस जाना ही ठीक रहेगा, बाद में जो होगा वह देखा जाएगा.


सना ने तुरंत ही अपने लैपटौप पर इस्तीफा टाइप किया और अपना सामान पैक करने लगी. उस ने आननफानन में  कैब बुला कर गाजियाबाद छोड़ने की तैयारी कर ली थी. कैब में बैठ कर सना ने राहत की सांस ली. वह सोच रही थी कि स्टेशन पर पहुंच कर अपना इस्तीफा कंपनी को सैंड कर देगी. सना की कैब सिविल लाइंस वाले इलाके से निकल रही थी. वह एक अजीब सी उल?ान से भर उठी थी. उस ने नजरें नीची कर लीं और जल्दी से स्टेशन पहुंच जाने के बारे में सोचने लगी, पर लाल बत्ती के चलते कैब रुकी, तो सना ने अपने अगलबगल की गाडि़यों पर नजर डाली. सना ने तभी देखा कि बगल वाली गाड़ी में कुमार अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ बैठा हुआ था. कुमार अपने बीवीबच्चे के साथ बहुत खुश नजर रहा था, पर यह कुमार की पत्नी है या कोई और, सना सम? नहीं पाई.

कुछ सोच कर सना ने रिसैप्शनिस्ट दिव्या को फोन लगाया और बातोंबातों में कुमार के शादीशुदा होने के बारे में जानकारी मांगी, तो उसे पता चला कि कुमार ने उस से अविवाहित होने का ?ाठ बोला था. सच तो यह था कि उस का एक बच्चा भी है और उस की पत्नी सरकारी नौकरी में है और उस के पास गाजियाबाद आती रहती है. सना के चेहरे पर कई रंग आते और जाते रहे. इस दौरान ड्राइवर ने स्टेशन पर जा कर कैब रोक दी, पर सना उतरी नहीं, बल्कि उस ने कैब वापस ले चलने को कहा और कुछ देर बाद एक बार फिर से सना पीजी रूम में वापस चुकी थी. सना अगले 2-3 दिन तक औफिस नहीं गई. इस बीच कुमार ने भी उसे कोई फोन नहीं किया.


उस दिन कुमार बहुत खुश था, क्योंकि उस के बेटे का बर्थडे था. कुमार शाम को जल्दी घर वापस गया था. घर को उस की पत्नी ने पूरी तरह से सजा दिया था, पर कुमार यह देख कर बुरी तरह चौंक गया था कि उस की पत्नी के साथ सना भी उस के काम में हाथ बंटा रही थी. कुमार सवालिया नजरों से सना की तरफ देखे जा रहा था. बदले में सना सिर्फ मुसकराए जा रही थी. ‘‘इन से मिलो, ये सना हैं. मार्केट में मिली तो दोस्ती हो गई. अभी थोड़ी परेशान हैं, क्योंकि इन का बौस इन्हें तंग कर रहा है. मेरे हिसाब से ऐसे बौस को तो जेल में होना चाहिएआप बैठिए, मैं चाय ले कर आती हूं,’’ कुमार की पत्नी एक सांस में कह गई थी.
कुमार को सना पर बहुत गुस्सा रहा था, लेकिन वह नौर्मल रहने का दिखावा करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता था. सना बच्चे के केक कटने तक वहां रुकी रही थी. कुमार ने देखा कि उस का बेटा भी सना से बहुत लगाव दिखा रहा था.


अगले दिन सना औफिस भी गई थी और अपना काम कर रही थी. कुमार ने उसे फोन कर के बुलाया.
‘‘मेरे घर क्यों गई थी?’’ गुस्से से कुमार ने पूछा. ‘‘मैं तो इस से पहले भी कई बार आप के घर जा चुकी हूं और आप के बिस्तर पर सो भी चुकी हूंभूल गए क्या आप?’’ सना ने यह बात कुछ इस ढंग से कही थी कि कुमार को मिर्ची सी लग गई थी. सना अपनी कुरसी से उठ कर बात करने लगी थी, ‘‘अगर आप यह सोचते हैं कि मेरा न्यूड वीडियो वायरल कर के आप मु? अब भी ब्लैकमेल कर सकते हैं, तो ऐसा सोचना छोड़ दें, क्योंकि अब वे वीडियो मेरे मोबाइल पर भी आप मु? भेज चुके हैं,’’ सना ने कहा तो कुमार को याद आया कि उस के मोबाइल पर कुमार ने ही तो वीडियो क्लिप भेजी थी, ताकि सना डर जाए.


सना ने आगे यह भी कहा कि कुमार ने अगर उसे ब्लैकमेल किया, तो वह खुद औफिस में सब को वह न्यूड वीडियो दिखा देगी क्योंकि उस वीडियो में कुमार भी तो न्यूड ही नजर रहा है और अगर बेइज्जती सना की होगी तो कुमार की भी तो बेइज्जती होगी और यह भी शक किया जाएगा कि इस तरह जाने कितनी लड़कियों का यौन शोषण किया होगा कुमार ने. इस के बाद सना यह वीडियो मीडिया में दे देगी और कुमार पर नशा दे कर रेप करने का आरोप लगाएगी. और तो और अब तो कुमार की पत्नी भी यहां पर है. सोचो जरा जब कुमार की पत्नी अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ ऐसी हालत में देखेगी, तो उस पर क्या गुजरेगी? ‘‘इसलिए मिस्टर कुमार, अब यह सना तुम्हारी धमकियों से नहीं डरेगी, बल्कि अब तुम्हें मु? से डरना होगा, क्योंकि यह वीडियो में तुम्हारी पत्नी को सैंड करने जा रही हूं,’’ मोबाइल हाथ में घुमाते हुए सना ने कहा.

कुमार थूक निगल रहा था. उसे सना की आंखों में चिनगारियां और आवाज में कठोरता सम? में गई थी. वह सम? गया था कि सना की उंगली की एक थिरकन उस के बसेबसाए घर को उजाड़ सकती है और उस के औफिस में बनी इमेज को मिट्टी में मिला सकती है. और हो सकता है कि सना इस वीडियो के सहारे उसे जेल की हवा भी खिला दे. कुमार एकदम से सना के पैरों में गिर गया था, ‘‘मु? माफ कर दो. मु? से गलती हो गई. मैं अभी तुम्हारी सारी वीडियो डिलीट करता हूं, बस तुम मेरी पत्नी से यह सब मत बताना,’’ कहते हुए कुमार ने अपने मोबाइल और लैपटौप से सना के सारे न्यूड वीडियो डिलीट कर दिए थे.
सना की मांग पर कुमार ने उसे नौकरी में प्रमोशन और डबल इंक्रीमैंट भी दे दिया था.

सना मुसकरा रही थी. उस ने मजबूरी में कुमार के आगे घुटने तो टेक दिए थे, मगर ठंडे दिमाग और शातिराना चाल चल कर उस ने अपनेआप को दलदल में गिरने से बचा लिया था. सना का फोन बजा तो उस ने देखा कि अब्बू की वीडियो काल थी. सना रिलैक्स हो कर अब्बूअम्मी से बात कर रही थी, ‘‘यहां सब ठीक है अब्बू. आप की बेटी अपना ध्यान रख सकती है. आप लोग अपना खयाल रखना.’’ सना अब सच में अपना ध्यान रख सकती थी.  Hindi Story                 

Politics: तेजप्रताप यादव की ‘घर वापसी’ की अटकलें तेज

Politics:  राजद ने हाल ही बिहार विधानसभा चुनाव में मुंह की खाई है. इस की एक बड़ी वजह लालू  यादव के परिवार में टूट होना भी थी. पर अब उन के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने पार्टी और परिवार से निकाले जाने के 8 महीने बाद  दिल्ली में अपने पिता लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की. यह मुलाकात तेजप्रताप यादव की बड़ी बहन और सांसद मीसा भारती के आवास पर हुई. उन्होंने अपने पिता और बहन को भोज में आने का निमंत्रण भी दिया था.

इस दौरान तेजप्रताप यादव का सामना अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव से भी हुआ था. दरअसल, तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव दोनों रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले मामले में हो रही सुनवाई के दौरान दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई.

आप को बता दें कि तेजप्रताप यादव ने 1 जनवरी, 2026 को अपनी माता राबड़ी देवी के 67वें जन्मदिन पर 10, सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी निवास पहुंच कर सब को चौंका दिया था.

तेजप्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया पर 2 तसवीरें शेयर की थीं. पहली पोस्ट में वे अपनी मां के साथ केक काटते दिखे और दूसरी तस् वीर पुरानी है जिस में पूरा परिवार एकसाथ दिख रहा है. उन्होंने इस के साथ एक बहुत ही भावुक करने वाला पोस्ट लिखा था.

तेजप्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘मां, आप मेरी सब से बड़ी प्रेरणा हैं. जन्मदिन की बधाई. मां, आप हमारे परिवार की आत्मा हैं. हर हंसी, हर प्रार्थना, हर उस पल के पीछे आप ही हैं जो घर जैसा लगता है. यह जिंदगी जो हम जीते हैं – गर्मजोशी भरी, अधूरी, प्यार से भरी हुई, यह सब आप की वजह से है. आप ने इसे तब संभाला जब हमें पता भी नहीं था कि संभालना क्या होता है. आप मेरी सब से बड़ी प्रेरणा हैं. आप ने बिना कुछ गिने दिया, बिना किसी शर्त के प्यार किया, और तब भी मजबूत बनी रहीं जब किसी ने नहीं देखा कि यह कितना मुश्किल था…’

इन तमाम घटनाक्रमों से राजनीतिक गलियारों में तेजप्रताप यादव की ‘घर वापसी’ की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. बता दें कि पिछले साल से ही तेजप्रताप यादव का परिवार से अलगाव जगजाहिर है. 2025 में कथित प्रेमिका अनुष्का यादव के साथ की तसवीर वायरल हुई तो लालू प्रसाद यादव ने उन्हें पार्टी और परिवार से बेदखल कर दिया था. लालू प्रसाद यादव ने अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को कथिततौर पर पार्टी और परिवार का मुखिया चुन लिया है. इस से राजनीतिक मतभेद बढ़े और व्यक्तिगत मुद्दों ने परिवार को बांट दिया. सियासी विरासत की लड़ाई भी सार्वजनिक तौर पर दिखी, मगर अब इन नई तसवीरों ने फिर से नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या लालू परिवार एक होने जा रहा है.Politics

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