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Honor Killing : लड़की ने वीडियो बनाया, घर वालों को रास न आया

Honor Killing : गुजरात के अहमदाबाद के सरखेज इलाके में 22 साल की सोफिया फारूक की हत्या की गई, जिसे हादसा दिखाने के लिए रची गई एक खतरनाक साजिश.

सोफिया जुहापुरा इलाके में बने एक अस्पताल में रिसैप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी. पुलिस के मुताबिक, 12 अगस्त की रात वह अपने भाई हाबिल के साथ बाइक पर जा रही थी. कुछ देर बाद दावा किया गया कि किसी अज्ञात वाहन ने उन की बाइक को पीछे से टक्कर मार दी.

घटना के बाद सोफिया को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया. उस के सिर के पिछले हिस्से और पैरों में गंभीर चोटें लगी थीं. पर 13 अगस्त को डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

हाबिल की शिकायत पर पुलिस ने इस हादसे की जांच शुरू की, लेकिन बाद में पुलिस को हाबिल की बताई कहानी में कई कमजोर कड़ियां नजर आईं. सीसीटीवी फुटेज की जांच में भी ऐसा कोई दूसरा अज्ञात वाहन नजर नहीं आया, जिस से बाइक को टक्कर लगने की बात साबित हो सके.

इस के बाद पुलिस ने हाबिल से सख्ती से पूछताछ की तो पता चला कि सोफिया को उस के पिता और भाई ने पहले ही रास्ते से अलग एक सुनसान जगह ले जाने की योजना बनाई थी. आरोप है कि दोनों उसे सरखेज के घेलजीपुरा गांव के पास एक सुनसान इलाके में ले कर पहुंचे थे. पुलिस के मुताबिक, हाबिल ने अपनी पैंट में लोहे का हथौड़ा छिपा रखा था.

पुलिस का आरोप है कि सुनसान जगह पहुंचने के बाद हाबिल ने सोफिया के सिर पर हथौड़े से 3 बार वार किया. इस दौरान उस के पिता फारूक ने भी कथिततौर पर उस का साथ दिया. सोफिया के बेहोश होने के बाद भी उस पर दोबारा हथौड़े से हमला किए जाने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, दोनों तब तक वहां रुके रहे जब तक सोफिया की सांसें थम नहीं गईं.

पुलिस जांच में हत्या की कथित वजह भी सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, तकरीबन 3 महीने पहले सोफिया का एक नौजवान के साथ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस के बाद उसके पिता और भाई उस से नाराज हो गए थे. दोनों ने सोफिया को दूसरे लड़कों से बातचीत करने पर भी कथिततौर एतराज जताया था.

पुलिस का कहना है कि परिवार को सामाजिक बदनामी का डर था और इसी वजह से बापबेटे ने परिवार की इज्जत बचाने के नाम पर उस की हत्या की योजना बनाई, जिसे 12 अगस्त को अंजाम देने का फैसला किया गया.

पुलिस के मुताबिक, सोफिया की मौत के बाद भी पिता और भाई ने कथिततौर पर वारदात को छिपाने की कोशिश जारी रखी. दोनों उस की लाश को बाइक पर ले कर आगे बढ़े और बाद में उसे सड़क किनारे रख दिया. इस के बाद हाबिल ने खुद को घायल किया और बाइक को भी नुकसान पहुंचाया, ताकि पूरी घटना किसी सड़क हादसे जैसी दिखाई दे.

पुलिस ने मोहम्मद फारूक नवाब खान और मोहम्मद हाबिल फारूक को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का कहना है कि दोनों ने कथिततौर पर सोफिया की हत्या कर उसे सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की. मामला अभी तो लड़कियों को दबा कर रखने की जिद का लग रहा है जिसमें लगभग हर धर्म के लोग बराबर का रोल प्ले कर रहे हैं. आज जब देशभर की जेन जी और जेन एल्फा हकों के लिए उबल रहे हैं और तानाशाह सरकार की से भी नहीं डर रहे, ऐसी लड़कियां भी हैं जिन्हें सिर्फ प्रेम या दोस्ती की वजह से जान देनी पड़ रही है. ज्यादातर ऐसे मामले डाक्टरों से मिलकर अनायास हुई मौत कह कर दबा दिए जाते हैं.Honor Killing

Honor Killing : प्रेम की नगरी में झूठी शान और कत्ल

Honor Killing:  उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार का दावा इतना ज्यादा खोखला होता जा रहा है कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा अपना रंग फीका करता जा रहा है. जब बेटियां ही नहीं बच रही हैं, तो क्या खाक पढ़ेंगी. उन के अपने ही उन की जान के दुश्मन बने हुए हैं.

वैसे तो आगरा में ताजमहल होने से से इसे प्रेम की नगरी भी कहा जाता है, पर अब यहां झूठी शान के नाम पर बेटियों की हत्या के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. ऐसे ही एक मामले ने सितंबर के शुरू में लोगों को डर के मारे थर्रा दिया. वहां के थाना एकता क्षेत्र के पचगाई खेड़ा में गुरुवार, 3 सितंबर को एक बार फिर औनर किलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया.

हुआ यों की 17 साल की एक किशोरी की गांव के ही एक लड़के से दोस्ती थी. मंगलवार, 1 सितंबर की शाम को वह बिना बताए घर से चली गई थी और रात के तकरीबन 1 बजे वापस लौटी. इसी दौरान पिता चंद्रवीर को उस की लड़के के साथ दोस्ती होने की जानकारी हो गई.

बताया जा रहा है कि इस के बाद से चंद्रवीर अपनी बेटी से नाराज था. 3 सितंबर को वह किशोरी घर में अकेली थी. उस का भाई लवकुश, जो गुरुग्राम में नौकरी करता है, दोपहर में वहां चला गया था, जबकि मां रजनी किसी काम से घर से बाहर गई थी.

इसी दौरान बेटी को अकेले घर में देख कर पिता चंद्रवीर का पारा चढ़ गया और उस ने अपनी बेटी पर हमला कर दिया. आरोप है कि बांक (गन्ना छीलने का औजार) से पहले उस के सिर पर वार किया और फिर गला काट दिया.

इतना ही नहीं, हत्या के बाद चंद्रवीर ने खुद पुलिस को वारदात की जानकारी दी और बाद में बताया कि घर की इज्जत मिट्टी में न मिल जाए, इसलिए उस ने अपनी बेटी को मार डाला.

इस से पहले आगरा के ही जैतपुर थाना क्षेत्र में परिवार की मरजी के खिलाफ आईटीबीपी जवान से कोर्टमैरिज करने वाली 22 साल की अंकिता शर्मा की हत्या का मामला सामने आया था, जिस में आरोपी पिता बेटी की शादी से नाराज था और उस ने बेटी का गला घोंट दिया था.

इसी तरह आगरा के बासौनी क्षेत्र में दिल्ली की 18 साल की एक लड़की की औनर किलिंग का मामला सामने आया था, जिस में पुलिस जांच में आरोप लगा था कि उस लड़की के प्रेम संबंध और पेट से होने की जानकारी के बाद उस के पिता ने उसे आगरा ला कर चंबल नदी में डुबो कर मार दिया था. Honor Killing

Honor Killing : नाबालिग को दी मौत

Honor Killing. देश की राजधानी दिल्ली के उत्तरी इलाके में बुराड़ी नाम बस्ती बसी हुई है, जिस में ज्यादातर ऐसे लोग रहते हैं, जो दिल्ली से बाहर के हैं और सस्ते मकान के चक्कर में यहां रहते हैं. इन की माली हालत ठीकठाक है, पर  झूठी शान की खातिर ये अपनों का कत्ल करने की वारदात को भी अंजाम दे देते हैं.

मतलब, नाक का सवाल इन के लिए सब से ऊपर है. इस में बड़ेबूढ़े ही नहीं, बल्कि नौजवान भी बराबरी से हिस्सा लेते हैं, तभी तो अपनी चचेरी बहन की हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए 26 साल के अविनाश से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उस ने कई अहम राज खोले.

मामला कुछ यों है कि मरने वाली 17 साल की एक नाबालिग लड़की मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली थी. वहां उस का एक लड़के से प्रेम संबंध था और वह उस लड़के के साथ 2 बार घर से जा चुकी थी. लड़की के परिवार वाले इस रिश्ते से नाखुश थे और लड़की सुधर जाएगी, यह सोच कर उन्होंने उसे दिल्ली भेजने का फैसला किया.

उस लड़की का नाम रोशनी था जो 13 अगस्त को बिहार से दिल्ली आई थी. पुलिस के मुताबिक, दिल्ली आने के बाद भी उस ने अपने प्रेमी से मेलजोल बनाए रखा और उसे दिल्ली बुलाने की बात कर रही थी. इस बात से अविनाश नाराज था. उस ने रोशनी को समझाया था कि अपने प्रेमी से दूरी बना कर रखे, पर वह नहीं मानी. इस के बाद अविनाश ने रोशनी का खून करने की साजिश रची.

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपित अविनाश ने रोशनी की हत्या की योजना पहले ही बना ली थी और लाश को ठिकाने लगाने के लिए बाकायदा 1,500 रुपए का सूटकेस भी खरीदा था.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अविनाश ने रविवार, 16 अगस्त की सुबह वह सूटकेस खरीदा था और उसे अपने एक दोस्त की बुराड़ी में बनी दुकान में रख दिया था.

इस के बाद वह बहाना बना कर अपनी चचेरी बहन को अपने साथ दुकान पर ले गया था.

हत्या करने से पहले अविनाश ने पहले अपने दोस्त को किसी बहाने से घर भेज दिया. दोस्त के जाने के बाद आरोपित ने दुकान के अंदर ही गला दबा कर अपनी चचेरी बहन की हत्या कर दी. इस के बाद लाश को सूटकेस में रखा और अजीत विहार इलाके में ले जा कर झाडि़यों में फेंक दिया और मौके से फरार हो गया. Honor Killing

Honor Killing : ग्वालियर में बेटी को मारा

Honor Killing. नंदिनी यादव अपने सपनों को पूरा करने के लिए कर्नाटक गई थी. वह राखी के मौके पर ग्वालियर के पिछोर थाना क्षेत्र के पथरियापुरा गांव में लौटी थी, पर उस की अचानक हुई मौत के बाद इलाके में सनसनी फैल गई.

हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में नंदिनी यादव के ही परिवार के सदस्यों ने उस के पिता भगवान सिंह यादव और चाचा संतोष यादव पर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है.

साथ ही यह भी कहा गया कि नंदिनी कर्नाटक में एक मौल में काम करती थी. वह राखी के मौके पर अपने घर आई थी. घर लौटने के बाद कर्नाटक में नौकरी करने को ले कर परिवार में झगड़े के हालात बने. पर साथ ही दबी जबान में यह भी सामने आया कि नंदिनी किसी लड़के से फोन पर बातचीत करती थी, जिसे ले कर घर में नाराजगी का माहौल था.

इतना ही नहीं, परिवार के लोगों को उस का रहनसहन और पहनावा भी पसंद नहीं था. वह बौयकट हेयर रखती थी और अपनी पसंद के मुताबिक कपड़े पहनती थी. बताया जा रहा कि उस के बाहर जा कर नौकरी करने को ले कर भी परिवार में नाराजगी थी.

परिवार वाले यह भी बोले कि देर रात झगड़े के बाद नंदिनी के पिता भगवान सिंह यादव और उस के चाचा संतोष यादव ने कथिततौर पर उस की साफी से गला दबा दिया और नंदिनी की मौत हो गई.

मामले में सब से चौंकाने वाली बात यह है कि नंदिनी यादव के भाई, बहन और मां ने ही उस की मौत के लिए उस के पिता और चाचा को जिम्मेदार ठहराया है. उन सब का कहना है कि नंदिनी की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि उस की हत्या की गई है.

पुलिस ने पिता भगवान सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि चाचा संतोष यादव की तलाश जारी थी.  Honor Killing

Honor Killing :  दिल दहलाने  वाली वारदात

Honor Killing. एक 6 साल के बच्चे के दिमाग में एक ऐसी बात घर कर चुकी थी, जो समय के साथसाथ नासूर बन चुकी थी. फिर एक दिन उस ने इतना बड़ा और कड़ा फैसला लिया कि किसी की दुनिया ही उजड़ गई.

32 साल की वसीमा अपने पति इरशाद और 3 बच्चों के साथ गौतमपुरी इलाके में रहती थी. इरशाद फल बेचता था. वसीमा के मायके वाले दिल्ली के ही जाफराबाद इलाके में रहते थे. वैसे, वे उत्तर प्रदेश के मेरठ इलाके से थे.

शुक्रवार, 17 जुलाई को पुलिस ने बताया कि रात के तकरीबन सवा 8 बजे सूचना मिली कि गौतमपुरी की गली नंबर-17 में एक लड़के मोहम्मद अनस ने वसीमा को गोली मार दी है.

पुलिस मौके पर पहुंची तो वसीमा खून से लथपथ पड़ी थी. उस के सीने में गोली लगी थी. उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, पर वहां डाक्टरों ने उसे मरा हुआ बता दिया.

इधर, इस वारदात के कुछ ही देर बाद जाफराबाद थाने के हैड कांस्टेबल नफीस गश्त पर थे. चौहान बांगर की गली नंबर-10 में उन्हें एक लड़का भागता हुआ दिखाई दिया. रोक कर तलाशी लेने पर उस के पास से एक देशी पिस्टल और 6 कारतूस बरामद हुए.

पूछताछ में उस लड़के की पहचान मोहम्मद अनस निवासी सरधना गांव मेरठ के रूप में हुई. उस ने स्वीकार किया कि उस ने अपनी बहन वसीमा की गौतम पुरी के घर में गोली मार कर हत्या की है.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि वसीमा पहले भी एक बार प्रेम प्रसंग के चलते घर छोड़ कर चली गई थी, लेकिन कुछ समय बाद लौट आई थी. इस के बाद वह दूसरी बार घर से चली गई और इरशाद नामक लड़के से लव मैरिज कर ली.

वसीमा के इस कदम से अनस बेहद नाराज था. इसी वजह से उस ने बहन की हत्या की साजिश रची. वह मेरठ से देशी पिस्तौल और कारतूस ले कर दिल्ली आया और मौका मिलते ही बहन को गोली मार दी.

पुलिस हैरान है कि जिस समय वसीमा ने लव मैरिज की थी, उस समय आरोपित अनस सिर्फ 6 साल का था. अनस ने पुलिस को बताया कि बचपन से ही वह यह सुनता आया था कि बहन के लव मैरिज करने से परिवार को गांव में बेइज्जती का सामना करना पड़ा.

इस के चलते उस ने इस वारदात को अंजाम दिया. Honor Killing

Honor Killing : भाई और मां ने मौत के घाट उतारा

Honor Killing. मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को बड़ा ही साफसुथरा माना जाता है, पर वहां जातिवाद का गंद अभी भी लोगों के दिमाग में भरा हुआ है, तभी तो औनर किलिंग का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है.

मिली जानकारी के मुताबिक, यह वारदात इंदौर के बजरंग नगर की है. वहां ज्योति अग्रवाल नाम की एक 26 साल लड़की रहती थी. उस के पिता हींग कारोबारी हैं. ज्योति भी अपना औनलाइन बिजनैस करती थी.

दरअसल, ज्योति का अपने साथ काम करने वाले एक लड़के से प्यार का रिश्ता था. लेकिन वह दूसरी जाति का था. ज्योति के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था. इस बात पर घर में तनाव बना रहता था. अकसर उन के बीच झगड़े होते थे.

इस सब के बावजूद ज्योति पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा था. उस पर प्यार हावी था और वह किसी भी सूरत में उस लड़के से अलग नहीं होना चाहती थी. यही बात घर वालों को खल रही थी, पर वे कुछ कर नहीं पा रहे थे.

2 अप्रैल, 2026 को ज्योति अपने प्रेमी से मिलने जा रही थी. उस का भाई विकास अग्रवाल और मां शीतल अग्रवाल घर पर मौजूद थे.

प्रेमी से मिलने जाने वाली बात को ले कर ज्योति की भाई से कहासुनी होने लगी, जिस के बाद उस ने ज्योति को बुरी तरह पीट दिया. इतना ही नहीं, उस ने ज्योति का सिर दीवार पर दे मारा. इस से उस के कान के पीछे गंभीर चोट आई और वह बेसुध हो गई.

इस के बाद गंभीर रूप से घायल ज्योति को अस्पताल में भरती कराया गया. भाई ने इस कांड को खुदकुशी साबित करने के लिए अधमरी हालत में अपनी बहन के मुंह में जहर डाल दिया. नतीजतन 3 अप्रैल को उस की मौत हो गई.

शुरुआत में यह मामला खुदकुशी का माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ज्योति के कान के पीछे गंभीर चोट से मौत होने की पुष्टि हुई. वहीं शरीर पर चोटों के 14 निशान मिले, जिस के बाद पुलिस की जांच की दिशा ही बदल गई, क्योंकि अभी तक परिवार उस के आत्महत्या करने की बात कह रहा था.

पुलिस ने 3 महीने तक सुबूत जमा किए. ज्योति के भाई और मां से सख्ती से पूछताछ की गई, जिस में वे दोनों टूट गए और हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. Honor Killing

Society : राजनीति प्यार की दुश्मन

Society. सैकड़ों साल से जाति के नाम पर प्रेमी जोड़ों की हत्याएं होती रहीं. कहीं खाप पंचायतों ने पहरे बिठाए तो कहीं जाति के मुस्टंडों ने प्रेमी जोड़ों का जीना हराम किया और आज इस में एक नया अध्याय और जुड़ गया है. वह है लव जिहाद का नैरेटिव. लेकिन प्यार पर पहरा क्यों?

पिछले कुछ सालों में लव जिहाद जैसे शब्दों ने प्यार के माहौल को और जहरीला बना दिया है. हर हिंदू लड़की और मुसलिम लड़के की दोस्ती या प्रेम कहानी को शक की नजर से देखा जाने लगा है. कई राज्यों में ऐसे मामलों को ले कर कानून भी बनाए गए. नतीजा यह हुआ कि बालिग लोगों के निजी फैसलों में राजनीति घुस आई.

दिलचस्प बात यह है कि यह सारा शोरशराबा सिर्फ आम लोगों के लिए है. अगर कोई गरीब या मिडिल क्लास हिंदू लड़की किसी मुसलिम लड़के से प्यार कर ले तो राजनीति शुरू हो जाती है. परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी, संगठन और नेता सब इस प्यार के खिलाफ खड़े हो जाते हैं, लेकिन जब बड़े उद्योगपतियों, फिल्म सितारों या राजनीतिक परिवारों के बच्चे अपने धर्म से बाहर जा कर शादी करते हैं तो वहां लव जिहाद के ठेकेदार नजर नहीं आते.

मुसलिम लड़के को औफिस की हिंदू कलीग लड़की से प्यार हो जाए और दोनों आपसी सहमति से इस रिश्ते को शादी में बदलना चाहें तो आज के समय भूचाल आ जाएगा. प्राइम टाइम की खबर बन जाएगी. कोर्ट में दोनों के खिलाफ वकील खड़े हो जाएंगे और कई नेताओं को मुफ्त का मुद्दा मिल जाएगा.

यह शादी लव जिहाद में गिनी जाएगी लेकिन वहीं अगर मामला सैलिब्रिटीज, बिजनैस घराने या हाई प्रोफाइल लोगों का हो तो यह आसानी से हजम कर ली जाएगी.

उत्तर प्रदेश में पिछले 2-3 साल में जो भी हिंदू लड़की मुसलिम लड़के की शादी की खबर आई, उस में 99 फीसदी केस में लव जिहाद का टैग लग गया.

हाल ही में मेरठ का आकांक्षा गौतम और शाहवेज राणा का केस चर्चा में आया था. लड़की प्राइवेट बैंक में, लड़का हौस्पिटल में मैनेजर था. दोनों मिडिल क्लास से थे. दोनों के परिवार वाले इस शादी के लिए राजी थे. शादी का कार्ड छप गया, मंडप बुक हो गया लेकिन किसी ने नाम छिपा कर शादी का आरोप लगा कर एफआईआर दर्ज करवा दी गई.

और फिर क्या था… प्यार में राजनीति घुस आई और हिंदू संगठन विरोध करने पहुंच गए. शादी टल गई. यहां लड़की के घर वाले राजी थे, फिर भी केस बन गया.

चंदौली चकिया में एक मुसलिम लड़का और हिंदू लड़की कचहरी में शादी करने पहुंचे. हिंदू संगठनों ने लव जिहाद बोल कर हंगामा किया और पुलिस ने लड़के को हिरासत में ले लिया.

गाजियाबाद में सोनिका चौहान और अकबर खान का मामला भी सुर्खियों में आया. दोनों बालिग थे. दोनों ने वीडियो बना कर कहा कि वे मरजी से शादी करने जा रहे हैं फिर भी एफआईआर हुई. दुकान में तोड़फोड़ की गई.

उत्तर प्रदेश में 2020 के अवैध धर्मांतरण रोकथाम कानून के बाद अगर लड़की का परिवार या कोई हिंदू संगठन शिकायत कर दे तो पुलिस केस दर्ज कर लेती है.

अमीर करे तो वाहवाही गरीब करे तो आफत

फैजान करीम ने भाजपा महासचिव रामलाल की भतीजी से शादी की. फैजान डाक्टर हैं और कांग्रेस नेता डाक्टर सुर्हिता चटर्जी करीम के बेटे हैं, इसलिए इस शादी को लव जिहाद की लिस्ट से बाहर रखा गया. कई बड़े भाजपा नेता इस शादी में शामिल हुए थे. शाहरुख खान और गौरी खान, सैफ अली खान और करीना कपूर का उदाहरण सामने है.

हाल ही में सोनाक्षी सिन्हा ने भी मुसलिम लड़के जहीर इकबाल से शादी की. इन रिश्तों को ले कर कुछ विवाद जरूर हुए लेकिन जिस तरह आम लोगों को पुलिस और सामाजिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, वैसा दबाव या उत्पीड़न अपर क्लास को नहीं झेलना पड़ता.

यही बात जाति के मामले में भी लागू होती है. गांवकसबों में आज भी अलगअलग जातियों के बीच प्रेम संबंध उत्पीड़न का कारण बनते हैं. कई जगहों पर प्यार करने वाले जोड़ों को धमकियां दी जाती हैं, उन का सामाजिक बहिष्कार किया जाता है और कभीकभी औनर किलिंग तक हो जाती है. दूसरी ओर अमीर वर्ग में जाति और धर्म की दीवारें कमजोर दिखाई देती हैं. पैसा और सामाजिक हैसियत के कारण ऐसे रिश्ते उन बाधाओं को पार कर लेते हैं जो आम लोगों के लिए पत्थर की लकीर होती हैं.

असल में राजनीति को प्यार करने वाले लोगों से नहीं, बल्कि समाज के बंटे रहने से फायदा मिलता है. जब लोग धर्म और जाति के आधार पर एकदूसरे से कटे रहते हैं, तब राजनीतिक धु्रवीकरण आसान हो जाता है. ऐसे माहौल में नफरत हावी रहती है, लेकिन प्यार मुश्किल हो जाता है, जबकि प्यार हमेशा से जाति और धर्म से ऊपर रहा है.

2 बालिग लोग अगर अपनी मरजी से साथ रहना चाहें तो लोकतांत्रिक समाज में दोनों के फैसले का सम्मान होना चाहिए, लेकिन हालात उलट हैं. प्यार करने वालों को अपनी हैसियत जाति और धर्म से साबित करनी पड़ती है, जबकि नफरत फैलाने वाले सवालों से परे हो जाते हैं. इस देश में आज सब से आसान काम किसी दूसरे धर्म या जाति के इनसान से नफरत करना है. सोशल मीडिया से ले कर चुनावी मंचों तक यह नफरत बेची जा रही है.

जाति व्यवस्था को तोड़ता है प्यार

पिछले कुछ सालों में भाजपा के राज वाले कई राज्यों में ऐसे कानून बनाए गए जिस का असली मकसद धर्म के बाहर शादी को रोकना था. सरकार ने कहा कि यह कानून लड़कियों को धोखे से धर्म परिवर्तन कराने से बचाने के लिए है, जबकि सच्चाई सभी जानते हैं. इन कानूनों का असली मकसद धर्म से बाहर प्यार और शादी करने वाले जोड़ों खासकर मुसलिम लड़कों को परेशान करना ही है, ताकि सैकुलरिज्म की स्पिरिट को ही मारा जा सके.

बात सिर्फ धर्म से बाहर शादी की नहीं है, जाति को ले कर भी यही सोच है लेकिन यहां कानून नहीं, बल्कि समाज जोड़ों के खिलाफ खड़ा है. जाति से बाहर शादी करने वाले जोड़ों को भी सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ता है.

हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दूसरे कई राज्यों में लगातार औनर किलिंग की घटनाएं सामने आती रहती हैं जिस से प्यार को ले कर समाज की सोच और मामले की गंभीरता का पता चलता है.

सदियों से प्यार या शादी जाति व्यवस्था की सब से मजबूत दीवार है. अगर एक ब्राह्मण लड़की किसी एससी लड़के से शादी कर ले या एक जाट लड़का किसी एससी लड़की से प्यार कर ले तो जाति की दीवारें ढहने लगती हैं. यही वजह है कि प्यार और शादी पर कंट्रोल हमेशा से जाति व्यवस्था का खास हिस्सा रहा है.

डाक्टर भीमराव अंबेडकर ने जाति व्यवस्था की आलोचना करते हुए जाति से बाहर शादी को सामाजिक बराबरी के लिए सब से जरूरी कदम बताया था. उन का मानना था कि जब तक जातियों के बीच वैवाहिक संबंध नहीं बढ़ेंगे तब तक जाति व्यवस्था पूरी तरह कमजोर नहीं होगी.

हालांकि, भारत में हजारों ऐसी शादियां हर साल होती हैं, लेकिन कई मामलों में प्रेमी जोड़ों को पुलिस सिक्योरिटी तक लेनी पड़ती है और कई बार अदालतों को बीच में आ कर बालिग जोड़ों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करनी पड़ती है.

सब से दिलचस्प बात यह है कि प्यार पर लगने वाली सामाजिक और राजनीतिक पाबंदियां सिर्फ आम लोगों पर ही लागू होती हैं. इस का कारण यह है कि आर्थिक और सामाजिक रुतबा उन दीवारों के परे होता है, जिन्हें आम आदमी पार नहीं कर पाता.

नफरत की राजनीति बनाम प्यार की जद्दोजेहद

आज की राजनीति लोगों को जाति और धर्म के आधार बांटने को उतावली है. समाज बंटा रहे यह सत्ता पाने या सत्ता में बने रहने की मजबूरी है. चुनावी नजरिए से यह सामाजिक बंटवारा बेहद जरूरी चाल है लेकिन प्यार इन सीमाओं को तोड़ देता है. एक हिंदू और मुसलिम का प्यार, एक निचली और ऊंची जाति वाले के बीच शादी या 2 अलगअलग समुदायों का रिश्ता उस बंटवारे को तोड़ देता जिस पर राजनीति खड़ी होती है.

ऐसे में प्यार केवल 2 दिलों का भावनात्मक रिश्ता नहीं रह जाता, बल्कि राजनीति का अटूट अंग बन जाता है. भारत का संविधान बालिग नागरिकों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है. सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि 2 जवान लोगों का विवाह उन का मौलिक अधिकार है और परिवार या समाज को उस में दखलअंदाज नहीं करना चाहिए, लेकिन प्यार के मामले में समाज और राजनीति संविधान के खिलाफ नजर आते हैं.

किसी भी लोकतांत्रिक समाज की कामयाबी का पैमाना इस बात से तय नहीं होता कि वहां कितने अलगअलग जाति और धर्म के लोग रहते हैं, बल्कि इस बात से तय होता है कि इस विविधता में सद्भाव कितना है. लोग बिना डर के प्यार कर सकें अलगअलग जाति और धर्मों के लोहों के बीच शादियां हों और किसी को अपनी जाति या धर्म बताने की जरूरत न पड़े, उस दिन शायद प्यार और आजादी दोनों की जीत होगी और डैमोक्रेसी कामयाब मानी जाएगी.

समाज को जोड़ने का प्यार ही एकमात्र जरीया है

हर जमाने में 2 दिलों के प्यार ने धर्म, जाति, भाषा और भी कई दीवारों को तोड़ने का काम किया. यही वजह है कि साहित्य, संगीत, फिल्मों और लोककथाओं में प्यार इनसानी आजादी का निशान बन गया, लेकिन आज के भारत में राजनीति धीरेधीरे प्यार की सब से बड़ी दुश्मन बनती जा रही है.

पिछले कुछ सालों में लव जिहाद के नाम पर अंतर्धार्मिक शादियां राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई हैं. प्यार करने वाले 2 बालिगों के निजी फैसले को भी राजनीतिक विवाद का मुद्दा बना दिया गया है. सामाजिक बंटवारा और जाति व्यवस्था को बनाए रखने का सब से कारगर तरीका शादी पर कंट्रोल है. अगर लोग अपनी पसंद से शादी करने लगें तो सामाजिक बंटावारा कमजोर पड़ जाएगा.

यह कहना गलत होगा कि केवल एक धर्म या एक जाति के लोग इस समस्या के लिए जिम्मेदार हैं. अंतर्जातीय और अंतर्धार्मिक रिश्तों का विरोध लगभग हर समुदाय में किसी न किसी रूप में मौजूद है. फर्क सिर्फ इतना है कि अलगअलग समय पर अलगअलग राजनीतिक ताकतें इन भावनाओं का इस्तेमाल अपने हितों के लिए करती हैं. पाकिस्तान में ऐसे कानून बने हैं जिस से कोई मुसलिम लड़की किसी गैरमुसलिम से शादी न कर पाए.

सब से बड़ी विडंबना यह है कि बच्चों को बचपन से प्यार, भाईचारे और इनसानियत का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन जब वही बच्चे बड़े हो कर जाति और धर्म की सीमाओं से बाहर दोस्ती या प्यार करते हैं तो समाज उन्हें अपराधी की तरह देखने लगता है. नफरत संस्कृति का हिस्सा बन जाती है और प्यार अपराध बन जाता है.

प्रेम के बीच दीवारें खड़ी करने वाली राजनीति ज्यादा समय तक नहीं चलती, वहीं इनसानों को जोड़ने वाली भावनाएं हमेशा जिंदा रहती हैं, इसलिए सवाल यह नहीं है कि कौन किस से प्यार करता है, बल्कि यह है कि क्या हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहां इनसानों को उन की पसंद से जीने की आजादी मिले या फिर हम ऐसा समाज बना रहे हैं जहां प्यार भी राजनीतिक इजाजत का मुहताज हो जाए? एक अच्छा समाज वह नहीं होता जहां रहने वाले सभी लोग एकजैसे हों, बल्कि वह होता है जहां अलगअलग पहचान वाले लोग बिना डर के साथ रह सकें, दोस्ती कर सकें और प्यार कर सकें.

जहां राजनीति लोगों को बांटने का काम करेगी वहां प्यार करना अपराध ही होगा. प्यार को अपराध और नफरत को राजनीति का हथियार बनाने की सोच लोकतंत्र और सामाजिक एकता दोनों के लिए नुकसानदायक है.

2 धर्मों के बीच होने वाली शादी में सब से बड़ा नुकसान दोनों तरफ के धर्म के दुकानदारों यानी पंडों और मौलवियों को होता है क्योंकि उन की फीस मारी जाती है. हर शादी में पंडों और मुल्लाओं को मोटे पैसे मिलते हैं लेकिन जब लड़कालड़की खुद शादी करते हैं तो शादी स्पैशल मैरिज एक्ट में होती है जहां वकील पैसे बनाते हैं, धर्म के ठेकेदार नहीं. ये ठेकेदार ही भीड़ जमा करते हैं, उसे उकसाते हैं और ?ागड़े कराते हैं. Society

दिल्ली में ऑनर किलिंग, घर में घुसकर बेरहमी से ली शादीशुदा जोड़े की जान

लेखक- रोहित

राजधानी दिल्ली के द्वारका सेक्टर 19 में ऑनर किलिंग का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. जहां कुछ गुंडों ने घर के भीतर घुस कर किराए पर रह रहे नवविवाहित शादीशुदा जोड़े पर धुंआधार गोलियां चला दीं. जिस में 24 वर्षीय विनय दहिया की पेट और छाती पर4 गोलियां लगने से मौत हो गई और उस की 19 वर्षीय पत्नी किरण दहिया बुरी तरह घायल हो गई. पुलिस के अनुसार किरण को मौके पर 1गोली लगी थीं. दोनों को आननफानन में द्वारका के वैंकेटेश्वर अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने विनय को मृत पाया. वहीं किरण बेहद गंभीर हालत में पाई गई. जिस के बाद किरण को आईसीयू में भरती कर उस का इलाज किया जा रहा है. किरण अभी भी गंभीर हालत में अस्पताल में भरती है.

दरअसल, यह पूरा मामला ब्रहस्पतिवार 24 जून की रात लगभग 9 बजे का है. जब घर के अंदर 3 गुंडे घुसे और फायरिंग कर वहां से फरार हो गए. इन तीनों के हाथ में पिस्तौल थी और ये शादीशुदा जोड़े को मारने के उद्देश्य से ही घर में घुसे थे.पुलिस को इस मामले की सीसीटीवी फुटेज मिली है जिसमें हत्यारे जोरदार गोलीबारी करते नजर आ रहे हैं.पुलिस की शुरूआती जांच से पता चला है कि यह मामला ऑनर किलिंग का है. पुलिस इसे ऑनर किलिंग इसलिए भी कह रही है क्योंकि लगभग 1 साल पहले 13 अगस्त को विनय और किरण ने घरवालों की इच्छा के विरुद्ध भाग कर मंदिर में शादी कर ली थी, जिस के बाद से ही दोनों के घर वाले इस शादी से नाराज चल रहे थे. खासकर किरण के परिवार से नाराजगी का आलम यह था कि लगातार उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही थी. दोनों परिवारों की नाराजगी का बड़ा कारण उन का ‘एक गांव एक गौत्र’ होना था.घर वालों को यह रिश्ता बिलकुल भी मंजूर नहीं था और वे इसे सामजिक रीतियों के खिलाफ मान रहे थे.

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घटनास्थल का जायजा

राजधानी दिल्ली में इस तरह का मामला हैरान करता है. गांव में ऐसी घटनाएं यहांवहां से सुनाई जरुर दी जाती हैं लेकिन अपराधियों का ऐसे दिल्ली तक खोजबीन कर भरे बाजार में गोलियां चलाना दिल दहला देने वाला है. खासकर तब जब घटनास्थल से डीसीपी औफिस महज 1 किलोमीटर की दूरी पर है. इस घटना को ले कर ‘सरस सलिल पत्रिका’ ने अपने स्तर पर तह तक मामले को खंगालने की कोशिश की.

दिल्ली के भीतर ‘अंबराही गांव’ नाम से यह इलाका द्वारका सेक्टर 19 में पड़ता है. नाम में सिर्फ गांव रह गया है बाकि भीतर से यह काफी पौश है. गांव नाम का वजूद भी शायद इसलिए हो क्योंकी यहां आधुनिकता के साधन तो लोग हासिल कर चुके हैं लेकिन गांव की जड़ व्यवस्था को कायम ही रखना चाहते हों. दिल्ली के द्वारका सेक्टर 10 मेट्रो स्टेशन से घटनास्थल की दूरी तकरीबन डेढ़ किलोमीटर से भी कम होगी. वारदात वाले इलाके में लगभग सभी मकान 4-5 मंजिला रिहाईशी हैं, जिन के बाहर कार भी खड़ी दिख जाती हैं. ब्रांडेड शोरूम की दुकानें 50 मीटर दूर चमचमाती दिखाई पड़ती हैं. इलाका योजनाबद्ध तरीके से स्थापित किया गया सा लगता है. मुख्य रोड की 20-22 फुट चौड़ाई ही काफी कुछ इलाके के बारे में बता देती है.बाहर मेन रोड के लिए निकलने का रास्ता डीसीपी के औफिस से होते ही निकलता है.इस से यह समझा जा सकता है कि किस आत्मविश्वास से भर कर यहां ये अपराधी आए थे.

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हमारी टीम जैसे ही घटनाशटल पर पहंची, तो वहां 4-5 अधेड़बुजुर्ग लोग चौपालनुमा स्टाइल में कुर्सी लगा कर बैठे थे. मानो वे इस चर्चा को अपने अनुसार बताना चाहते हों. युवाओं की पेचीदगियों से जुड़ा यह मामला इन लोगों की जुबानी सुनना अनौखा था. खासकर तब जब हमारी टीम ने वहां युवाओं से बात करने की कोशिश की और वे मुह चुराते पाए गए. खैर, घटना को ले कर हमारी बात वहां पड़ोस में रह रहे 54 वर्षीय सुखबीर सिंह पोकस से हुई. सुखवीर सिंह खुद को अंबहारी एक्सटेंशन पार्ट 2 गांवका प्रधान बताते हैं.

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वे बताते हैं कि एक हफ्ते पहले यह जोड़ा यहां किराए पर आयाथा. यहजोड़ा सोनीपत, गोपालपुर गांव से भाग कर आया था. यहां आने से पहले ये लोग अंबराही गांव में 8 महीने करीब रुके हुए थे. वे कहते हैं,“उस रात इन के ही कोई रिश्तेदार आए थे, भीतर कुछ देर रहे भी थे. फिर उन्होने तकरीबन 8.30 बजे गोली चलानी शुरू कर दी. ये जोड़ा मकान के सेकेंड फ्लोर पर रहताथा. लड़की कोगोली लगी तो वो जैसेतैसे खुद को बचाते हुए छत की तरफ भाग गई, वह पूरा मकान 5 तल्लों का है. लड़की ने देखा की छत से वह नीचे कूद नहीं सकती, कूदेगी तो मर जाएगी इसलिए वह उस छत से सटे दूसरे छत पर कूद गई. वहां जो किराएदार थे उन्होंने पुलिस को फोन किया फिर 15-20 मिनट के भीतर पुलिस और एम्बुलेंस आई और उन्हेंहौस्पिटल ले गई.”

वहां उसी गली के कोर्नर पर एक बड़ा सा मकान है जिस के दोनों कोर्नर पर 4 कैमरे लगे हुए हैं. 4 में से 2 दिल्ली सरकार के हैं जो पता चला काम नहीं करते. बाकी 2 निजी कैमरे में जो रिकौर्ड हुआ वीडियोके अनुसारजिस समय लड़की ऊपर की तरफ भागी होगी, लड़का नीचे बाहर की तरफ भागा. गुंडे उस के पीछे नीचे को भागे, तीनों के हाथ में पिस्तौल थी. करीब घर से 50 मीटर दूर उन्होंने लड़के को एक किराना कीदुकान के पास घेर लिया और उसे 3 गोली मारी.

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खैर, यह जानकारी वहां सब की जुबानी थी. नया था तो वह वाक्य जो अपना नाम ना बताने की शर्त पर एक युवक कह गया. दरअसल जिस समय गोलियां चल रही थीं उस दौरान सभी लोगों ने अपने घरों के किवाड़ और दरवाजे बंद कर लिए थे. सुने को अनसुना कर दिया था. किसी ने पटाखे का शोर बताया तो किसी ने टीन का शोर.लेकिन चीखपुकार के मचे शोर को किसी ने नहीं सुना. लड़के को जैसे ही 50 मीटर दूर गुंडों ने दुकान के पास घेरा वहां भरे बाजार में उसे कोई बचाने वाला नहीं था. विनय ने दुकानों में घुस कर मदद भी मांगी थी लेकिन उसे वहां से धकेल बाहर कर लिया था.

जिस जगह युवक घायल पड़ा था उस के ठीक सामने किराने की दुकान चलाने वाले 65 वर्षीय शेष कुमार से हमारी बात हुई. शेष कुमार विनय इस घटना के लिए विवाहित जोड़े को ही जिम्मेदार ठहराते हैं. वे औफ रिकौर्ड कहते हैं, “जैसा करोगे वैसा भुगतोगे. इन दोनों ने इस तरह से शादी कर के गलत किया था. अपने ही गौत्र में शादी करना तो पाप है. ऐसे तो ये दोनों भाईबहन ही हुए न, इन्होने अपनी मौत बुलाई थी.” जब उन से पूछा कि उन की हत्या करना क्या सही था, इस पर वे बचते हुए कहते हैं, “इस पर मैं क्या कहूं, यह तो उन के परिवार वाले ही जाने. उन्होंने जैसा समझा वैसा किया.” यह जवाब इसी समाज की हकीकत है जो सिर्फ डरपोक ही नहीं है,बल्कि उसे पता ही नहीं है क्या सही है क्या गलत.

विनय के बारे में बताया जा रहा है कि वह एअरपोर्ट में ग्राउंड स्टाफ का काम करता था. जिस मकान में यह जोड़ा किराए पर रह रहा था.विनय के पास एक स्विफ्ट गाड़ी थी जो हरियाणा से ही रजिस्टर्ड थी.

कानूनी पड़ताल

दरअसल, विनय और किरण ने पिछले साल 13 अगस्त को घर से भाग कर त्रिदेव सनातन धर्म प्राचीन मंदिर, पंचकुला हरियाणा में शादी कर ली थी. जिस के बाद उन्हें घरसमाज से अपनी जान के खतरे का अंदेशा लग गया था. इसलिए उन्होंने कानून से मदद मांगने का फैसला किया था. ऐसे में उन की मुलाकात सोनीपत में कार्यरत वकील मनोज पलवल के माध्यम से वकील अभिमन्यु कलसी से हुई. अभिमन्यु कलसी वही वकील हैं जिन्होंने पिछले वर्ष कोर्ट में प्रोटेक्शन पेटीशन दायर की थी.

इस मामले में 34 वर्षीय अभिमन्यु कलसी ने सरस सलिल को बताया कि, “हम ने 13 अगस्त को इन की रिप्रजेंटेशन भेज दी थी एसएसपी सोनीपत डिवीज़न को. वैसे तो दोनों परिवार की तरफ से इन्हें डेथ थ्रेट थी लेकिन लड़की के परिवार की तरफ से ज्यादा था. लड़के के परिवार की तरफ से विरोध तो था लेकिन यह नहीं था कि मार देंगे. इसलिए हम ने हाई कोर्ट में प्रोटेक्शन लगाई थी.

“जब प्रोटेक्शन लगाई थी उस के बाद हम ने इन की दोबारे कुएशन पेटीशन लगाई थी. सोनीपत पुलिस ने सुरक्षा तो क्या दी उलटा विनय दहिया के खिलाफ ही एफआईआर कर दी थी. यह एफआईआर लड़की की मां के कहने पर की थी. यह एफआईआर उन्होंने 13 अगस्त को पहले किसी अज्ञात आदमी के खिलाफ की थी फिर इस में विनय का नाम जोड़ दिया था. उन्होंने एफआईआर में कहा था कि लड़की नाबालिक है, वह 18 साल से कम की है. लेकिन आधार कार्ड था उस में साफ पता चल रहा था कि लड़की बालिग है. दरअसल उम्र का कोई मसला था ही नहीं. यह तो हम ने जब प्रोटेक्शन पेटीशन लगाई थी तभी साफ था क्योंकि शादी के लिए आधार कार्ड देना अनिवार्य था.

“हम ने 14 अक्टूबर को भी यह कोर्ट में सबमिशन कियाथा कि इस कपल को अब भी धमकियां आ रही हैं. इन की आजादी और जान को बहुत ज्यादा खतरा है. ये लोग उस समय भी डरे हुए थे. कोर्ट में 19 अगस्त को जस्टिस राजमोहन ने पुलिस को आर्डर किया था की वे देखें कि इन का थ्रेट परसेप्शन कितना है, उस हिसाब से उन्हें प्रोटेक्शन दिया जाए. लेकिन मुझे पता चल रहा है कि सोनीपत पुलिस कह रही है कि उन्हें कुछ नहीं पता इस मामले में क्या है. दरअसल यह पूरा मामला हम सबका फैलियर है. अगर सब कुछ ठीक से होता तो यह नौबत नहीं आती.”

“पेटीशन में हमने चचेरे भाई विक्की और उस के सगे भाई अमन का नाम डाला हुआ था, जिस का जिक्र किरण ने भी हादसे के बाद अपने स्टेटमेंट में दिया है. अब देखिए सब कुछ पता होने के बाद भी घटना घट ही गई. यह तो व्यवस्था की असफलता का मसला है.”

वे आगे कहते हैं, “इन का गौत्र एक था उस की वजह से परिवार में विरोध ज्यादा था. हैरानी की बात है ऐसे इन्हें मार दिया. जिस इलाके से वे सम्बन्ध रखते हैं उस इलाके को खाप राज के नाम से जाना जाता है. सोनीपत,झज्जर, रोहतक इन इलाकों में कुछ ज्यादा खाप वाला मामला होता है. यहां लोग इज्जत पर ले लेते हैं. लोगों की सोच पुरानी तरीके की अधिक है.जब वह जोड़ा मुझ से मिला था उन्होंने मुझे बताया था कि 4-5 पीढ़ी पहले इन की कोमन रिश्तेदारी रही होगी. कह सकते हैं, दूर के रिश्ते में रहे होंगे. लेकिन मौत के घाट उतार देना यह खतरनाक है.”

इस वारदात को ले कर हमारी टीम ने पीड़ितों के परिवार जन से उन का पक्ष लेने के लिए संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन बात हो नहीं पाई. घटना के सम्बन्ध में हमारी बात सेक्टर 19 में डीसीपी संतोष कुमार मीना से हुई. वे कहते हैं, “हमारे पास गुरुवार रात 9 बजे की पीसीआर कौल आई थी. यह कौल इस कपल के साथ हुई घटना के सम्बन्ध में थी. हमारी टीम वहां पहुंची और तुरंत उन्हें अस्पताल में भरती कराया. जहां विनय की मौत कन्फर्म हुई और किरण का इलाज चल रहा है.”

वे इस पूरे मामले को ऑनर किलिंग के एंगल से देख रहे हैं. उन्होंने कहा, “हम सस्पेक्ट की पहचान कर रहे हैं. इस मामले पर हमारी इन्वेस्टिगेशन जारी है.” वे बताते हैं अगस्त में इन्होने पंजाब हरियाणा कोर्ट में अप्रोच किया था, जिस में पेटीशन डिस्पोस हो गई थी. लोकल पुलिस को डायरेक्शन दी गई थी.” जब उन से पूछा कि इस मामले के संबंध में क्या उन की बात हरियाणा पुलिस से हो रही है जिस पर उन्होने मना किया. हालाकि जांच में पुलिस इस वारदात के पीछे लड़की के परिवार वालों का हाथ होने का पूरा अंदेशा जता रहे हैं.सूत्रों के अनुसार लड़की के सगे भाई अमन, चचेरे भाई विकी और चाचा शक्ति सिंहके होने की बात है जिन की दबिश में पुलिस लगी भी है और अपराधियों की पहचान पुलिस को खुद किरण से अस्पताल में पूछताछ के दौरान मिली. इस पुरे वारदात में पुलिस के अनुसार 10 से 11 राउंड गोलियां बरसाईं गई थीं. पुलिस को मौके से एक बन्दूक भी मिली है. उन के अनुसार वारदात में 2 बंदूकों का इस्तेमाल हुआ था. हालाकि पुलिस ने इस पूरे वारदात में 3 से अधिक लोगों के होने की आशंका जताई है.

सुनने में आया है कि शादी होने के 20 दिन बाद विनय और किरण को पंचायत ने उन्हें गांव से जाने को कह दिया था. ऐसे में खापों की भूमिका को इस मामले में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. बहुत बार खाप के दबाव में भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है ताकि पुरे समाज के सामने एक नजीर पेश किया जा सके.

ऑनर किलिंग आज भी

हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में ऐसे मामले आम हैं जहां झूठे सम्मान के खातिर प्रेमी जोड़े या शादीशुदा जोड़ों को मौत के घाट उतार दिया जाता है. पीछे समय में तो गांव के बीचोंबीच पेड़ पर फांसी पर लटकाने की भी घटनाएं दर्ज होती रही हैं.

औनर किलिंग के मामले में हरियाणा देश का सबसे बदनाम राज्य है. इसकी एक वजह यह है कि लोकतांत्रिक सरकार के बावजूद राज्य में खाप पंचायतों का समाज पर काफी असर है. किसी दूसरे धर्म, जाति या आर्थिक पृष्ठभूमि में प्रेम या प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों को अमूमन अपने इस अपराध की कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है. ऐसे मामलों में पंचायतों का फैसला ही सर्वोपरि होता है और सरकार व पुलिस प्रशासन भी इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाता. भले दंभ में भरे रिश्तेदार कातिल को “सजा” मिल जाए किन्तु जिस जगह से गांवदेहातों में इस जड़ मानसिकता को सह मिल रही है वह अपने फैसलों की चौड़ में हमेशा फूला रहता है.

यह भी देखने में आता है कि यह खाप पंचायतें सीधे सरकार को टक्कर देती हैं इसलिए इन के सह में रहने और इन के नियम मानने के लिए सरकारे बाध्य भी होती हैं, वरना अगली बार सत्ता का रास्ता दरक जाएगा. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से लेकर हुड्डा तक इन के आगे सर झुकाते रहे हैं. खट्टर जैसे नेता आधिकारिक पद पर खुलेआम इन पंचायतों की वकालत करते हुए उनको समाज सुधार का एक अहम हथियार बता चुके हैं. जबकि यह हकीकत है कि गांव में सुखसाधनों में आधुनिकता भले आ जाए किन्तु पौराणिक और रुढ़िवादी सोच को बनाए रखने में इन्ही पंचायतों की विशेष भूमिका है. दिल्ली में घटी यह वारदात इस बात का संकेत भी था कि हमने सम्मान के खातिर ने शहर में आ कर खुलेआम गोलियां चला कर अपने इज्जत की लाज बचाई है.

आज ऐसे ही ऑनर किलिंग के मामले उत्तर भारत से दक्षिण भारत के राज्यों में पटे पड़े हैं. यह राजस्थान में भी हैं और उत्तरप्रदेश में भी, बिहार में भी है और बौधिक स्तर पर मजबूत कहे जाने वाले बंगाल में भी. स्थिति यह है किऔनर किलिंग को कम ही रिपोर्ट किया जाता है इसे न तो मीडिया द्वारा तवज्जो दिया जाता है न ही सरकार द्वारा.2018 में एनसीआरबी के आए रिपोर्ट के अनुसार 3 सालों में 300 ऑनर किलिंग के मामले आए. शीर्ष अदालत ने ऑनर किलिंग के मामलों में देखा है कि कुल मामलों में 3 प्रतिशत मामले गौत्र से सम्बंधित होते हैं. अब विनय और किरण का यह मामला इन्ही 3 प्रतिशत मामलों में शरीक हो जाएगा.

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