मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बने ‘नीरो कोरोना’ : रिपोर्ट पॉजिटिव भी नेगेटिव भी!

कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को लेकर, आपने लापरवाही का ऐसा घटनाक्रम कहीं नहीं देखा होगा. आइए! आपको ले चलते हैं आज छत्तीसगढ़ – जहां भूपेश बघेल की सरकार है. जहां कोरोना नाम मात्र को नहीं था और आज कोरोना जयपुर, इंदौर, भोपाल रांची से भी आगे निकल रहा है.

जी हां! यह कमाल यहां डॉक्टरों ने दिखाया है की एक पेशेंट की दो रिपोर्ट आ गई – एक में बताया कोरोना नेगेटिव और दूसरे में कोरोना पॉजिटिव. है ना कमाल की बात.

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यहां छत्तीसगढ़ में सब कुछ संभव है.क्योंकि यहां मुखिया भूपेश बघेल का प्रशासनिक अश्व कहे जाने वाली व्यवस्था पर जरा भी अंकुश नहीं है. एक समय में जब छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता था. तब की हुई लापरवाही ने आज छत्तीसगढ़ को कोरोना वायरस की खंदक की लड़ाई के बीच ला खड़ा किया है. इसका खामियाजा यहां की आवाम झेल रही है. और सरकार केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर के रुपए पैसों की मदद मांग रही है. यह दृश्य देखकर बेहद कोफ्त होती है कि छत्तीसगढ़ किस तरह लूज पुंज हाथों में आकर तबाही की ओर बढ़ रहा है. जिसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है यह एक मामला -जब एक युवक की कोरोना पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों रिपोर्ट आज सार्वजनिक हो करके सुर्खियों में है. और आम जनता सवाल पूछ रही है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी! छत्तीसगढ़ में यह क्या हो रहा है और आप इस पर क्या एक्शन करने जा रहे हैं?

बेवजह मारा गया युवक!

सबसे दुखद स्थिति यह है कि बिलासपुर के “अपोलो अस्पताल” ने पॉजिटिव बताकर उसी के मुताबिक़  उपचार  किया और युवा मरीज की अंततः  तड़प-तड़प कर मौत हो गई.

दूसरी तरफ उसी युवक को-

“सिम्स” ने बताया निगेटिव. संपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार है कि अपोलो अस्पताल बिलासपुर में मनेंद्रगढ़ निवासी शुभम कुमार यादव नामक जिस युवक का कोविड-19 के पॉजिटिव मरीज के रूप में इलाज किया जा रहा था. उसी मरीज के कोरोना वायरस कोविड-19 की कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट को सिम्स द्वारा नेगेटिव बताया  है . अब, किस रिपोर्ट को सही मानें और किसे गलत…यह सवाल मनेंद्रगढ़ के मृतक शुभम कुमार यादव के परिजनों को हैरान कर रहा है. और हैरानी की बात ही है की अपोलो जैसा प्रतिष्ठित अस्पताल उस मरीज को कोविड-19 का पॉजिटिव बताकर इलाज कर रहा था जिसकी टेस्ट रिपोर्ट को छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (सिम्स) अपनी रिपोर्ट में नेगेटिव बता रहा है.

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यह एक उदाहरण है जो साफ बता रहा है कि  छत्तीसगढ़ में कोरोनावायरस कोविड-19 के नाम पर मरीजों के साथ इस तरह का जानलेवा खिलवाड़ किया जा रहा है. चिंता की स्थिति यह है कि सिम्स के द्वारा नेगेटिव बताए गए जिस शुभम यादव  को पॉजिटिव बता कर अपोलो अस्पताल के द्वारा पता नहीं कौन सा उपचार किया जा रहा था? जिससे उसकी मौत हो गई. प्रदेश शासन और जिला प्रशासन तथा सीएमएचओ बिलासपुर को इस मामले को गंभीरता से लेकर पूरी जांच करनी चाहिए मगर सभी विभाग मौन है, अगर जांच की जाती है तो  दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है.  क्या  प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग इसे भी गंभीर आपराधिक चूक का मामला नहीं मानता..?

क्या दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ताकि आगामी समय में कोरोना वायरस जैसे महामारी को लेकर के चिकित्सा प्रबंधन स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी मुस्तैद रहें. यहां ऐसी अफरा-तफरी मची हुई है जिसे देखकर शर्म आती है क्योंकि शासन प्रशासन की नाक के नीचे किसी  एक की लाश, किसी को दे दी जाती है यहां कोरोना मरीज के मरने के बाद “शव” अदला बदली का खेल भी आंखें बंद करके जारी है. और शासन किसी पर कोई एक्शन नहीं ले रहा था गाज नहीं गिरा रहा.

नामी राजधानियां  पीछे हुईं

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कोरोना का जबरदस्त विस्फोट हुआ है.यहां हालात देश के गंभीर संक्रमण वाले शहरों से कहीं आगे निकल चुकी है राजधानी‌ रायपुर में कोरोना संक्रमण के वर्तमान के आंकड़ों को देखा जाए तो  रायपुर में जितने मरीज प्रतिदिन सामने आ रहे हैं और जितने अस्पतालों में भर्ती हैं, उतने कभी कोरोना संक्रमण के लिए चर्चित जयपुर, जोधपुर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रांची, लखनऊ और कानपुर में नहीं है.जबकि रांची को छोड़कर बाकी सभी शहर आबादी के लिहाज से रायपुर से दो और तीन गुना ज्यादा बड़े हैं.

यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि भोपाल, जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े महानगरों के साथ-साथ बड़े राज्यों की राजधानी भी है. हां राहत  की खबर यह है कि है कि रायपुर में मौतों का आंकड़ा कम है, इस मामले में भोपाल, इंदौर और जयपुर से रायपुर पीछे है.

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साथ ही यह भी सच है कि राजधानी रायपुर में मरीजों के स्वस्थ होने की दर यानी रिकवरी रेट भी इन शहरों से कम है.

विशेषज्ञों के अनुसार रायपुर में लगातार बढ़ रहे मरीजों में वे लोग ज्यादातर हैं जो प्राइमरी कांटेक्ट में आए हैं, इस कारण एक मोहल्ला या एक घर से बड़ी संख्या में लोग कोरोना से संक्रमित निकल रहे हैं.

छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल

सरकार अपने सिस्टम को दुरूस्त करने में लगातार  फ्लॉप सिद्ध  हुई है, यही कारण है कि रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण नगरों के के हालात लगातार बदतर होते जा रहे है.

जानकारी के अनुसार रायपुर में संक्रमण की जांच के लिए  जांच सेंटरों में कलेक्ट किए गए प्रभावितों के सैम्पल भी “गुम” हो रहे हैं.जिसके कारण भी सिर्फ चक्कर काटते पीड़ितों का संक्रमण बढ़ रहा है. वहीं उनकी जान जाने का खतरा बढ़ता जा रहा है.

रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम गुप्ता के अनुसार सरकार  से अपेक्षा है कि सिर्फ चापलूस अधिकारियों के द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के बाद खुश हो जाने वाले प्लान से वे बाहर आएं वहीं

राजस्थान के “भीलवाड़ा” या मध्यप्रदेश के “इंदौर मॉडल” को अपनाते हुए, कोरोना संक्रमण की रोकथाम में विफल रायपुर के प्रशासनिक सिस्टम पर अपनी तीव्र प्रखर दृष्टि डालें.

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‘KBC-12’ और ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ के सेट पर क्रू मेंबर्स निकले कोरोना पॉजिटिव

बॉलीवुड इंडस्ट्री के ‘महानायक’ कहे जाने वाले एक्टर अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने अपने काम से लोगों के दिलों में अपनी ऐसी जगह बना ली है कि उनके फैंस उनकी एक झलक पाने के लिए पागल हुए रहते हैं. इस समय लोग बिग बी के रिएलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति के के 12वें सीजन (Kaun Banega Crorepati 12) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि कोरोना वायरस (Corona Virus) को देखते हुए सभी शोज की शूटिंग गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए शुरू कर दी गई है.

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और तो और कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati) शो के होस्ट अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने खुद हाल ही में कोरोना वायरस से लड़ाई जीती थी और एक बार फिर बिल्कुल स्वस्थ होकर लौटे थे. ऐसे में कुछ ऐसी चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं जिसे सुन सभी हैरान हो गए हैं. खबरों की माने तो कौन बनेगा करोड़पति के 12वें सीजन की शूटिंग के दौरान सेट पर 2 क्रू मेंबर्स की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है.

कुछ समय पहले अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने अपने सोशस मीडिया अकाउंट पर सेट की कुछ फोटोज शेयर की थी जिसमें वे कोरोना वायरस से बचने के लिए सभी गाइडलाइंस का पूरा ध्यान रख रहे थे मगर फिर भी इस सब के बावजूद सेट के क्रू मेंबर्स कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. ना सिर्फ कौन बनेगा करोड़पति बल्कि सोनी टीवी (Sony TV) का पौपुलर डांस रिएलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ (India’s Best Dancer) के क्रू मेंबर्स की भी कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आई हैं.

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जी हां खबरों की माने तो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ (India’s Best Dancer) की टीम में काम करने वाले 7-8 क्रू मेंबर्स कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ में मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora), गीता कपूर (Geeta Kapoor) और टेरेंस लूइस (Terence Lewis) बतौर जज की भुमिका में नजर आते हैं लेकिन ऐसे हालातों में काम करना सभी के लिए काफी मुश्किल हो गया है.

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सरकार भी कोरोना की गिरफ्त में

मध्यप्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने धार्मिक आडंबरों के बहाने कभी नर्मदा यात्रा, तो कभी आदि शंकराचार्य की पादुका पूजन करके भगवा ब्रिगेड की कमान संभालते रहे हैं. यही बजह है कि अब उनके कोविड 19 से प्रभावित होने पर उनके भक्तों द्वारा भी हवन ,पूजन,पाठ का सिलसिला शुरू कर दिया गया है.

देश की भोली भाली जनता को भावनाओं में बहलाकर कभी हिन्दू मुस्लिम रंग देकर, तो कभी कश्मीर में धारा 370 और अयोध्या में राम मंदिर बनाने की दुहाई देने वाले भगवा ब्रिगेड के लोग असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाना बखूबी जानते हैं.

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जब कोरोना ने भारत में कदम रखा ,तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार को गिराने के चक्कर में इसकी परवाह किसी ने नहीं की.22 मार्च को कोरोना वायरस की चैन तोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ने जनता कर्फू का ऐलान कर जनता को यह दकियानूसी संदेश दिया  कि अपने घरों की बालकनी में खड़े होकर ताली और थाली पीटने से कोरोना भाग जायेगा. इतने ढोंग करने के बाद भी जब कोरोना का संक्रमण नहीं थमा ,तो  घरो की लाईट बुझा कर दिया जलाने का टोटका भी कर डाला.  भगवा ब्रिगेड ने तर्क दिया कि दिये की लौ से कोविड19 समाप्त हो जाएगा. मुख्यमंत्री के कोरोना से प्रभावित होने के बाद भोपाल की सांसद साध्वी  प्रज्ञा ठाकुर  हनुमान चालीसा के पाठ से वायरस भगाने की सलाह भक्तो को देती नजर आईं. कोरोना वायरस   यदि किसी धर्म,जाति, संप्रदाय में आस्था रखने वाला होता,तो इन टोने टोटकों से कभी का भाग गया होता.

कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बचने के लिए दी गई डब्लूएचओ की गाइडलाइंस और डाक्टरी सलाह मानने की बजाय सरकार में बैठे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि रोज नये नये जुमले उछालते रहे हैं , जबकि यह एक यैसी संक्रामक बीमारी है जो नेताओं के जुमलों से दूर होने वाली नहीं है.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी रोज टीवी चैनलों पर किसी पंडे पुजारी की तरह कोरोना से सावधान रहने के प्रवचन तो देते रहे , लेकिन खुद उन पर अमल करना भूल गए.इसी बजह से वे 25 जुलाई को आई रिपोर्ट में  कोविड 19 पाज़ीटिव पाये गए हैं. हालांकि यह अप्रत्याशित खबर  नहीं है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जिस तरह कोरोना के बचाव की गाइडलाइंस को दरकिनार कर रोज ‌क‌ई विधायकों और मंत्रियों से मिलते रहे हैं.

मंत्री अरविंद भदौरिया , भाजपा अध्यक्ष बीडी शर्मा के साथ मुख्यमंत्री 21 जुलाई को प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन को श्रृद्धांजलि देने लखनऊ गये थे. 21 से 24 जुलाई तक मुख्यमंत्री प्रदेश के 33 मंत्रियों से वन टू वन चर्चा में शामिल रहे .जिस तरह से मुख्यमंत्री और उनके करीबियों द्वारा गाइड लाइन का खुला उल्लंघन किया जा रहा था,उससे यह पहले ही तय हो गया था कि कोरोना के संक्रमण को सीएम हाउस तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी.  अब हालात ये हैं कि दर्जनों विधायक और मंत्री भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं.

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25 जुलाई को  शिवराज सिंह चौहान भोपाल के प्राइवेट हास्पिटल चिरायु में एडमिट हुए तो सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल भी हुए. वजह साफ थी कि प्रदेश में कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का गुणगान तो करते रहे,मगर खुद के कोरोना पाज़ीटिव होने पर कोई सरकारी अस्पताल उन्हें इलाज के लिए उपयुक्त नहीं लगा.

जमीनी हकीकत यही है कि चार महिने से भी अधिक समय बीतने के बाद पूरे प्रदेश में कोरोना की जंग सुबिधाओं की बजाय भाषणों से लड़ी जा रही है. आज भी कोविड टेस्ट के लिए पर्याप्त संख्या में किट या मशीन और‌ वेंटिलेटर की कमी से अस्पताल जूझ रहे हैं.

डब्लूएचओ की नई एडवायजरी में कोरोना के लक्षण पाये गए व्यक्ति को कम से कम 10 दिन की गहन चिकित्सकीय देखभाल में रखा जाता है. इस पीरियड में कोविड पाज़ीटिव को किसी से मिलने और छूने की इजाजत नहीं होती है. यैसे में सियासी हलकों में यह चर्चा भी  जोरों पर थी कि आगामी दिनों तक मध्यप्रदेश के शासन प्रशासन की जिम्मेदारी  कौन संभालेगा?वह भी जब प्रदेश में पूर्णकालिक राज्यपाल भी नहीं है.मुख्यमंत्री को कई अहम् दस्तावेजी फैसलों पर दस्तखत करने होते हैं.कई गोपनीय प्रतिवेदनों पर  टीप लिखनी होती है,साथ ही कानून व्यवस्था के मामले पर हस्तक्षेप करना होता है.

कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनने के सपने टूटे

कोरोना बीमारी से संक्रमित हुए शिवराज सिंह चौहान देश के पहले मुख्यमंत्री हैं,लिहाजा प्रदेश में भाजपा के कुछ नेता कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनने के सपने भी देखने लगे थे.  सत्ता के खेल के चतुर खिलाड़ी और अपने आपको जनता का मामा कहने वाले शिवराज सिंह चौहान ने पिछले 13 वर्षों के दौरान भी देश से बाहर रहने पर भी किसी भी अपने सहयोगियों को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाने की मुसीबत मोल नही ली थी. कांग्रेस के हाथों से सत्ता छीनने वाले शिवराज को इस वार मुख्यमंत्री बनने से लेकर , मंत्री मंडल के गठन और विभागों के बंटवारे में  भारी अंतर्विरोध और सिंधिया खेमे का दबाव झेलना पड़ा  है.

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प्रदेश के एक कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा, नरेंद्र सिंह तोमर ने भी मुख्यमंत्री बनने लाबिंग की थी. यही कारण है कि शिवराज अपने इसी डर की वजह से ही किसी को कार्यवाहक मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहते.वैसे भी उमा  भारती की गद्दी को बाबूलाल गौर  को सौंपने के बाद हुए राजनैतिक बदलाव के घटनाक्रम से शिवराज भी वाकिफ हैं,शायद इसी नियति को टालने वे चूकने के मूड में दिखाई नहीं दिखाई दे रहे. तभी तो चिरायु हास्पिटल से भी अपना कामकाज संभाल रहे हैं. उन्होंने  अस्पताल से ही आला अधिकारियों के साथ न‌ई शिक्षा नीति की समीक्षा भी  कर ली .मौजूदा दौर में मध्यप्रदेश में जिस तरह की राजनीतिक उठा-पटक और विधायकों की अदला-बदली हो रही है,यैसे में  सत्ता के लोभी नेताओं से घिरे शिवराज को कोविड 19 से बड़ा खतरा अपनों से ही लग रहा है.इसलिए कोरोना को भूलकर वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर गड़ाए अपने को फिटफाट साबित करने में लगे हुए हैं.

कोरोना: उलझती भूपेश बघेल सरकार!

छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस धीरे धीरे बढ़ता चला जा रहा है. और जब स्थिति काबू में थी उसे छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने किस तरह अपनी अविवेक पूर्ण सोच के कारण बद से बदतर बना दिया है उसका देश भर में शायद इससे हटकर दूसरा कोई उदाहरण आपको नहीं मिलेगा. कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार कोरोना संक्रमण के मामले में फिसड्डी और बेहद गैर जिम्मेदार सरकार सिद्ध हुई है. जिसने अपने ही हाथों अपना ही मानो सब कुछ लुटाने, बर्बाद करने का निश्चय कर लिया हो.

प्रारंभ में 2 माह जब सारा देश कोरोना संक्रमण से त्राहि-त्राहि कर रहा था. छत्तीसगढ़ इससे आश्चर्यजनक ढंग से अछूता था. कोरबा और राजनांदगांव जिला को छोड़कर संपूर्ण छत्तीसगढ़ इससे पूरी तरह बचा हुआ था. मगर भूपेश बघेल की अकर्मण्यता और अविवेकपूर्ण फैसलों के कारण छत्तीसगढ़ धीरे-धीरे अगस्त महीना आते आते बेहद खतरनाक स्थिति की मोड़ पर पहुंच चुका है.

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अब इस स्थिति में बघेल सरकार के हाथ पांव फूले हुए दिखाई देते हैं. उसे कुछ समझ नहीं आता कि वह क्या करें, अब बस एक ही काम बचा है, वह है लॉकडाउन.

छत्तीसगढ़ की स्थिति धीरे-धीरे हाथ से निकलती चली जा रही है. आज राजधानी रायपुर में सबसे बुरा हाल है. यहां के लोगों का जीना मुहाल हो चुका है. लोग घरों में कैद हैं. लोगों को न तो चिकित्सा की सुविधा मिल रही है ना दैनिक जीवन में काम आने वाले सामानों की आपूर्ति हो पा रही है.हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि सरकारी दफ्तर में ताले लगे हुए हैं और शासन-प्रशासन घर से चल रहा है. सरकार सिर्फ डंडा चला रही है मानो लॉकडाउन से सब कुछ ठीक हो जाएगा.

कोरोना विस्फोटक हालात

छत्तीसगढ़ प्रदेश में कोरोना का कहर लगातार जारी है. सोमवार को 178 नए मरीजों की पहचान की गई  वहीं इलाज के दरम्यान 3 लोगों ने दम तोड़ दिया. और हां सरकार यह भी बता रही है कि 265 मरीजों के स्वस्थ होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया है.

साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा बढ़कर 9800 हो गया है.जिनमें अब तक कुल 7256 मरीज स्वस्थ्य होने के उपरांत डिस्चार्ज किए गए तथा 2483 मरीज सक्रिय हैं.  प्रदेश में मौत का आंकड़ा बढ़कर अब 61 हो चुका है.

यह रपट लिखे जाने के दिन नए 178 कोरोना पॉजीटिव मरीजों की पहचान की गई . उनमें जिला रायपुर से 66, दुर्ग से 32, जांजगीर-चांपा से 27, जशपुर से 25, रायगढ़ से 15, कोरबा से 04, महासमुंद से 03, सूरजपुर व धमतरी से 02-02, राजनांदगांव व कांकेर से 01-01 शामिल हैं. यानी कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ के लगभग आधे जिलों की स्थिति दयनीय हो चुकी है जहां लॉकडाउन का डंडा चल रहा है वही संपूर्ण छत्तीसगढ़ में कोरोना का भूत लोगों को भयभीत कर रहा है. क्योंकि साफ दिखाई देता है भूपेश बघेल सरकार इस भयावह संक्रमणकारी आपदा से बचाओ करने में नाकाम है वहीं अपनी प्रशासनिक दक्षता के मामले में भी शुन्य सिद्ध हो रही है.

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राजभवन तक पहुंचा कोरोना

छत्तीसगढ़ में राज्यपाल हैं सुश्री अनुसुइया उईके. कोरोना वायरस का संक्रमण छत्तीसगढ़ के राजधानी स्थित राजभवन तक पहुंच चुका है. हालात यह है कि राजभवन को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है .अगर बात नेताओं की करें तो कांग्रेस के सदर मोहन मरकाम के परिजन इसके शिकार हो चुके हैं. डोंगरगढ़ के विधायक कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए. छत्तीसगढ़ के कई थाने कोरोना वायरस के कारण बंद हो गए. यहां तक की न्यायधानी कहे जाने वाले बिलासपुर के सेंट्रल जेल में कोरोनावायरस पहुंच गया और त्राहि-त्राहि मच गई. धीरे-धीरे हालात सरकार के हाथ से निकलते चले जा रहे हैं. बाबा साहब अंबेडकर हॉस्पिटल के वीडियो वायरल हो रहे हैं जहां के हालात पूरी जनता देख रही है. जिसमें कोरोना मरीज आरोप लगा रहे हैं कि ना कोई डॉक्टर आ रहा है और ना ही सफाई कर्मचारी. इन हालातों को देखकर कि कहा जा सकता है कि सचमुच भूपेश बघेल सरकार कोरोना संक्रमणकालीन बीमारी के सामने लाचार सिद्ध हो रही है. फिसड्डी सिद्ध हो चुकी है.

कोरोना के नाम पर प्राइवेट पार्ट का भी टैस्ट

पूरे देश में कोरोना महामारी पूरी तरह से फैल चुकी है. सब से ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र इस से बुरी तरह जूझ रहा है, क्योंकि यहां कोरोना के 4 लाख से ज्यादा मरीज हैं और डेढ़ लाख ऐक्टिव हैं. ऐसे में कोरोना योद्धा कहलाए जाने वाले कर्मी जिन का हम ने थाली बजा कर सम्मान किया था, की करतूतें शर्मसार करने वाली हैं. जैसे कि महाराष्ट्र के अमरावती जिले में हुआ, जहां नाक और मुंह से सैंपल लेने के बाद एक महिला को कोरोना पौजिटिव रिपोर्ट बता कर दोबारा बुलाया और उस के प्राइवेट पार्ट का जबरन टैस्ट कर डाला.

भले ही जगहजगह कोरोना को ले कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, मुहिम चलाई जा रही है, घर पर रहने को कहा जा रहा है और कहा यह भी जा रहा है जब तक जरूरी न हो, घर से बाहर न निकलें. फिर भी ऐसी घटनाएं दिल को झकझोर जाती हैं.

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राज्य सरकार द्वारा लौकडाउन में ढील मिलने पर लोग अपने काम पर जा रहे हैं, सामाजिक दूरी जैसे नियमों का पालन कर रहे हैं, पर कोरोना मरीज मिलने पर सभी की टैस्टिंग की जा रही है. जरूरी हिदायतें दी जा रही हैं और घर पर ही क्वारंटीन होने को कहा जा रहा है जब तक स्थिति गंभीर न हो.

सुनने में तो यही आया है कि अभी तक कोरोना का टैस्ट मुंह और नाक से ही लिया जाता रहा है, पर कोरोना टैस्ट के नाम पर जबरन प्राइवेट पार्ट का टैस्ट करना लैब वाले को भारी पड़ गया. वजह, युवती ने थाने में शिकायत जो कर दी थी और वह पकड़ में आ गया.

28 जुलाई, 2020 को यह अजीबोगरीब मामला महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ. यहां लैब में कोरोना टैस्ट के नाम पर लैब टैक्नीशियन ने करतूत ही कुछ ऐसी कर दी कि हर कोई सुन कर हैरान है. साथ ही, इनसानियत को शर्मसार करने वाली है कि कोरोना टैस्ट के नाम पर लैब वाला इतनी नीचता की हद तक भी जा सकता है.

कोरोना जांच कराने आई युवती की नाक से नहीं, बल्कि जबरन उस के प्राइवेट पार्ट से सेंपल लिया गया और उस में छेड़छाड़ की गई. पहले तो युवती समझ ही नहीं पाई कि क्या हो रहा है और टैस्ट का विरोध नहीं कर पाई. पर बाद में जानकारी मिलने पर वह समझ गई कि लैब कर्मी ने उसे झांसे में लिया है.

पीड़िता ने बताया कि स्वाब  लेने के बाद आरोपी ने उसे फिर से बुलाया और कहा कि तुम्हारी कोरोना रिपोर्ट पौजिटिव आई है, इसलिए उन्हें यूरिनल टैस्ट भी कराना होगा.

इस घटना की जानकारी पीड़िता ने सब से पहले अपने भाई को दी. शक होने पर भाई ने इस बारे में डाक्टरों से बातचीत की. डाक्टरों ने बताया कि कोरोना टैस्ट के लिए ऐसा कोई परीक्षण नहीं होता है. इस के बाद महिला ने बडनेरा पुलिस को सारी बात बताई. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.

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पुलिस ने आरोपी टैक्नीशियन का नाम अल्पेश अशोक देशमुख बताया. उस के खिलाफ बलात्कार, एट्रोसिटी और आईटी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी ने इस से पहले कितनी महिलाओं के साथ ऐसी हरकत की.

जानकारी के मुताबिक, 24 साला लड़की अमरावती में अपने भाई के साथ रहती है और एक मौल में जौब करती है. मौल में काम करने वाला एक मुलाजिम 24 जुलाई को कोरोना पौजिटिव पाया गया. उस कर्मचारी के कोरोना पौजिटिव पाए जाने के बाद 28 जुलाई को उस के साथ काम करने वाले सभी 20-25 कर्मचारियों को अमरावती के ट्रामा केयर टेस्टिंग लैब में कोरोना टेस्ट के लिए बुलाया गया था, जिस में यह महिला भी गई थी. लैब के टैक्नीशियन ने मौके का फायदा उठाते हुए महिला के साथ शर्मनाक घटना को अंजाम दिया.

राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री यशोमति ठाकुर ने इस घटना पर हैरानी जताई और कहा कि टैक्नीशियन के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी.

आरोपी अल्पेश देशमुख की सोच वाकई शर्मसार करने वाली है. फिलहाल तो वह पुलिस के शिकंजे में है, पर अब तक न जाने कितनी औरतों व लड़कियों के साथ कोरोना टैस्ट के नाम पर ऐसा किया होगा, यह भी जांच का विषय है. वहीं उस के साथ काम करने वाले और भी लैब टैक्नीशियन होंगे, जो ऐसी घटनाओं को अंजाम देते होंगे.

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यह तो समय ही बताएगा कि अल्पेश के साथ कोर्ट क्या फैसला लेता है, पर सभी को ऐसी घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है. ऐसा जानकारी की कमी के चलते हुआ. अगर जानकारी होती तो ऐसी घटना को अंजाम नहीं दिया जा सकता.
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फोटो सलाह – 1.कोरोना टैस्टिंग लैब में लड़की का टैस्ट
2. मुंह छिपाती लड़की

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