Hindi Story. केसर खाने का डब्बा उठाए झोपड़ी से बाहर आ गया. आंगन में खड़ी पुरानी साइकिल को आगे धकेलते हुए वह थोड़ी दूर चला था. पता नहीं क्यों आज उस के कदम आगे नहीं बढ़ रहे थे. उस ने साइकिल को वहीं खड़ा किया और झोपड़ी के अंदर आ गया.

केसर कच्चे फर्श को बुहारती अपनी पत्नी चमेली को बांहों में भर कर चूमने लगा. वह हैरान था कि आज उसे घरवाली पर इतना प्यार क्यों आ रहा है?

‘‘अरेअरे, यह क्या पागलपन है? चलो, काम पर जाओ. शाम को घर का राशन भी लाना है,’’ इतना कह कर चमेली ने रोमांटिक हुए केसर को झोपड़ी से बाहर धकेल दिया.

‘‘चमेली, आज मुझे घर पर रहने दो. मेरा काम पर जाने का कतई मन नहीं हो रहा है. अच्छा, मैं आज के बाद कभी छुट्टी नहीं करूंगा,’’ केसर चमेली की साड़ी का पल्लू थाम कर गिड़गिड़ाया. आज उसे चमेली बेहद खूबसूरत लग रही थी.

‘‘मैं ने कह दिया न कि अब तुम काम पर जाओ. तुम्हारी भलाई इसी में है. दो पैसे कमाओ, जिस से घर चले,’’ कहते हुए चमेली गुस्से के मारे झुंझला उठी थी.

चमेली के खूबसूरत चेहरे पर बेरुखी के भाव गहरे हो गए थे. केसर जितना भी कमाता था, शराब में उड़ा देता था. घर में हमेशा तंगी रहती थी.

पति के साथ वह भी ईंटों के भट्ठे पर काम करती थी. आजकल भट्ठे पर काम नहीं था, सो चमेली घर में ही रहती थी.

गांव के पास के जंगल में पेड़ों की कटाई चल रही थी. केसर वहां काम पर जाता था.

जब ईंटों के भट्ठे पर काम शुरू हो जाएगा, तब चमेली भी केसर के साथ काम पर जाया करेगी.

चमेली की खरीखोटी सुन कर केसर मन मार कर खटारा साइकिल धकेलते हुए काम पर चला गया. चमेली भी अपने काम में लग गई.

तभी एक नौजवान झोपड़ी में आया. उस ने भी चमेली को बांहों में कस लिया. चमेली ने उसे भी दूर धकेला और मुंह फुला कर खड़ी हो गई.

‘‘अरे, बहुत नाराज हो मुझ  से?’’ उस आदमी ने बड़े प्यार से पूछा.

‘‘नाराज होने की तो बात है. 2 दिन की कह कर गए थे, पूरे 10 दिन लगा कर आए हो,’’ चमेली ने उस आदमी को उलाहना दिया.

‘‘मेरी जान, 10 दिन तो लगने थे. तेरे लिए पक्का मकान खरीद कर आया हूं. अब तू उस बंगले में मेरे साथ रहेगी,’’ बताते हुए उस नौजवान ने चमेली को अपनी बांहों में कस लिया. चमेली भी उस से लिपट गई, मानो उसी की घरवाली हो.

चमेली ने खुश होते हुए पूछा, ‘‘तुम सच कह रहे हो न?’’

‘‘हां…हां, मेरी जान. हम आज ही इस गांव से चले जाएंगे. कुछ रुपएगहने साथ ले चलना. सीधे रेलवे स्टेशन आ जाना. मैं वहीं पर मिलूंगा,’’ उस नौजवान ने समझाया, तो चमेली बोली, ‘‘तब तो मैं अपने मुन्ने को भी साथ ले चलूंगी.’’

‘‘तुम यह गलती क्यों कर रही हो? पहले अपनेआप को बसा लें, फिर मुन्ने की सोचेंगे. हां, गहनेरुपए जरूर लेती आना,’’ कहते हुए वह नौजवान चला गया.

दरअसल, वह नौजवान मोहन कई महीनों से जाल बुन रहा था. उसे यकीन हो गया था कि अगर वह खूबसूरत चमेली को 4-5 महीने अपने पास रख कर किसी कोठे वाली को बेचेगा, तो 25-50 हजार रुपए कमा ही लेगा.

वैसे, चमेली 10-12 हजार रुपए नकद और 10 हजार के गहने भी साथ ले आएगी. कुल मिला कर 70 हजार का फायदा होगा… साथ में जवानी के मजे भी.

मोहन मन ही मन हिसाब लगाता हुआ अपनी कामयाब योजना पर खुश हो रहा था.

चमेली ने संदूक से अपने जमा किए रुपए और गहने निकाले. 3-4 जोड़ी कपड़े भी निकाल कर गठरी में बांध लिए. आज उसे नशेड़ी पति केसर को छोड़ कर प्रेमी मोहन के साथ शहर जो जाना था.

दरअसल, सालभर पहले एक शाम केसर अपने साथ मोहन को लाया था. केसर के हाथ में शराब की बोतल थी और साथ में प्याजटमाटर के अलावा नमकीन का एक पैकेट था.

केसर चमेली को प्याज और टमाटर पकड़ाते हुए बोला, ‘अरे चमेली, मैं अपने ठेकेदार के चचेरे भाई मोहन को साथ लाया हूं. यह रात को हमारे साथ रहेगा. तू पहले सलाद काट दे, फिर हमारे लिए रोटी बना देना. हम जरा लालपरी का मजा लेते हैं.’

केसर शराब की बोतल उठाए झोपड़ी के अंदर चला गया. मोहन ने चमेली को देखा, तो ठगा सा रह गया.

चमेली का गदराया बदन, तीखे नैननक्श और बलखाती कमर देख कर पहली नजर में ही वह उस का दीवाना हो गया.

मोहन को प्यासी निगाहों से अपनी ओर ताकते देख कर चमेली भी रोमांचित हो उठी थी.

केसर के साथ बैठा मोहन बातें तो कर रहा था, मगर उस की निगाहें चमेली पर थीं. उस ने आधी से ज्यादा शराब केसर को पिला दी.

मोहन लड्डू लाया था. चमेली को लड्डू बहुत पसंद थे. उस ने खाना बनाया और अपने साथ मुन्ने को खिला कर झोपड़ी के अंदर ही एक कोने में घासफूस के बिस्तर पर चादर ओढ़ कर सो गई.

रात काफी गुजर चुकी थी. केसर इतनी ज्यादा शराब पी गया था कि उसे रोटी खाने का होश नहीं था.

मोहन ने खाना खाया और झोपड़ी का दरवाजा बंद किया.

झोपड़ी में उस के सोने के लिए बिस्तर का कोई बंदोबस्त नहीं था. वह चुपके से रोशनी बु?ा कर चमेली के पास सो गया. अंधेरे में नींद की खुमारी में चमेली पहचान नहीं पाई कि साथ सोया केसर है या कोई और.

उस रात का एहसास अजीब था. चमेली सुबह उठी, तो उजाले में देखा कि केसर कोने में बेसुध पड़ा था.

मोहन बाहर आंगन में टहल रहा था. चमेली को देख कर वह मुसकराया. चमेली भी हौले से मुसकरा दी. मोहन केसर से अच्छा मर्द था.

इस तरह दोनों में जिस्मानी संबंध बना, जो धीरेधीरे गहरे प्यार में तबदील हो गया.

उन दोनों के ताल्लुकात पर केसर का ध्यान तो नहीं गया, मगर आसपास के लोगों में चमेली की बदनामी होने लगी. तब मोहन ने गांव से शहर भाग चलने की सलाह दी.

चमेली ने शर्त रखी थी कि शहर में पक्का मकान ले कर दे. साथ ही, शादी करे. यह शर्त मोहन मान गया था.

चमेली भरी दोपहरी में मुन्ना के स्कूल से आने से पहले अपनी गठरी बगल में दबाए घर से निकल आई. वह शाम 5 बजे रेलवे स्टेशन पहुंच गई. वहां पर मोहन कहीं नजर नहीं आया.

चमेली की आंखें भीड़ में मोहन को तलाश रही थीं. कुछ देर इंतजार के बाद वह थक गई, तो भीड़ से दूर खड़ी हो कर हर आनेजाने वाले को देख रही थी, तभी एक बूढ़ी भिखारिन ने चमेली से पूछा, ‘‘बेटी, अपने घर वाले को ढूंढ़ रही हो?’’

‘‘हां माई…’’ चमेली ने जवाब दिया.

‘‘गांव से पहली बार आई हो?’’ बुढि़या ने हमदर्दी से पूछा.

‘‘हां,’’ चमेली ने जवाब दिया.

‘‘कौन सा गांव है तुम्हारा?’’ बुढि़या ने प्यार से पूछा.

‘‘धौलपुर,’’ चमेली ने बताया, तो बुढि़या के झुर्रियों वाले उदास चेहरे पर घायल सी मुसकान उभरी और जल्दी ही गायब हो गई.

‘‘घबराओ नहीं. जब तक तुम्हारा मर्द नहीं आ जाता, तुम मेरे पास बैठो. मैं भी कभी धौलपुर में रहती थी,’’ उस बुढि़या की आवाज में दर्द था.

‘‘पर मैं ने तुम्हें कभी गांव में नहीं देखा?’’

‘‘तू कैसे देखती बेटी? जब मैं तुम्हारी उम्र की गांव में ब्याह कर आई थी, उस समय तू पैदा भी नहीं हुई होगी. बड़ी दुखभरी कहानी है मेरी,’’ बुढि़या ने कराहते हुए बताया.

‘‘कैसा दुख माई? मुझे सुनाओ न,’’ चमेली ने अपनापन जताते हुए पूछा.

‘‘तू कहती है, तो सुन बेटी. शायद मेरी गलतियों की कहानी सुन कर कोई बहकने से बच जाए,’’ कहते हुए बुढि़या ने अपनी कहानी सुनानी शुरू कर दी, ‘‘आज से 25-30 साल पहले मेरी यानी मेवा की शादी गांव के ही एक छबीला नामक नौजवान के साथ हुई थी. छबीला जमींदार के खेतों में काम करता था. उस ने मुझे भी जमींदार की हवेली में काम पर लगा दिया.

‘‘उन्हीं दिनों शहर से एक पटवारी जमीनों के सिलसिले में गांव आता और जमींदार की हवेली में ठहरता था. उस की सेवा करने का जिम्मा मुझ पर रहता था. वह पटवारी ऐयाश था. उस ने बहलाफुसला कर मुझे अपने जाल में फांस लिया.

‘‘एक दिन मैं लोकलाज छोड़ कर पटवारी के साथ शहर आ गई.

‘‘पटवारी ने वादा किया था कि शादी कर के वह मुझे पत्नी बना कर रखेगा, मगर उस ने तो रखैल बना दिया.

‘‘जब मैं ने एतराज किया, तो मुझे एक कोठे वाली के पास बेच दिया.’’

अपनी आपबीती सुनाते हुए बुढि़या की आंखों से आंसू बहने लगे थे.

चमेली को लगा, कहीं न कहीं उस की कहानी भी बुढि़या से मिलतीजुलती है. कहीं मोहन भी पटवारी वाला खेल तो नहीं खेल रहा, वरना रुपएगहने साथ लाने को क्यों कहा?

तभी उसे एक जानीपहचानी आवाज सुनाई दी, ‘‘अरे चमेली, तू यहां बैठी क्या कर रही है? मैं तुझे  कब से खोज रहा हूं? ला, यह गठरी मुझे दे दे,’’ मोहन ने आते ही गठरी ले ली, तो चमेली चौंक उठी. उसे लगा कि मोहन उस की जवानी के साथसाथ उस के रुपएगहने भी चाहता है.

‘‘खबरदार, जो मेरी गठरी को हाथ लगाया. धोखेबाज कहीं के, हट मेरे रास्ते से,’’ दहाड़ते हुए चमेली ने अपनी गठरी छीन कर बगल में दबा ली.

‘‘चमेली, यह गठरी मुझे दे दे. मैं कोई चोर…’’ मोहन ने इतना ही कहा था कि चमेली ने 3-4 थप्पड़ उस के गाल पर जड़ दिए.

चमेली के अचानक बदले तेवर देख कर मोहन सकते में आ गया था.

यह देख कर भिखारिन बुढि़या के चेहरे पर संतोष के भाव तैर गए.

शाम का धुंधलका बढ़ने लगा था. चमेली के कदम वापस गांव की तरफ बढ़ रहे थे.  Hindi Story

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