Editorial. जेनजी के जंतरमंतर प्रोटैस्ट पर सरकार ने एकएक कर के उन की सारी मांगें मान लीं जो अपनेआप में नामुमकिन लगता है. यह सरकार सिर्फ डंडे की बात करती है, सिर्फ शाप देती है, सिर्फ धनुष उठा कर अपनों को ही मारने में भरोसा करती है ताकि खुद की राज करने की और चंदा वसूलने की ताकत को कोई छेड़े नहीं.
जेनजी प्रोटैस्ट के बाद नीट परीक्षा में पेपर लीक होने के जिम्मेदार ठहराए गए धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा ले लिया गया. राहुल गांधी के अड़ जाने पर छात्रों पर लाठीचार्ज करने की एफआईआर दर्ज कर ली गई कि किस पुलिस वाले ने किस के कहने पर ऐसा किया. पैलेट गन को इस्तेमाल करने का मामला अदालत में पहुंच गया. जिन स्टूडैंट्स पर देशभर में एफआईआर दर्ज हुई थीं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट से कह कर वापस ले लिया गया.
क्या सरकार कमजोर पड़ गई है? हां, पर इसलिए कि सरकार के अंदर अब धड़े बनने लगे हैं. राम मंदिर की चोरी के मामले ने भक्तों को नाराज कर दिया. जेनजी प्रोटैस्ट में यह मुद्दा नहीं था पर अगर राम मंदिर का चंदा चोरी का मामला सामने नहीं आया होता तो पुलिस, सादे कपड़ों में पुलिस और श्रीराम के नारे लगाने वाले भक्तों की भीड़ मिल कर जंतरमंतर पर धावा बोल देते और हरेक को लहूलुहान कर देते.
ऊंचे घरों के ये लड़केलड़कियां हिम्मत में चाहे कैसे भी हों पेरेंट्स के लाड़ले हैं, प्यार से पले हैं, ये आसानी से डर जाते और दुबक जाते. चूंकि सारा मामला ऊंची जातियां का था, एक अनजाना अभिजीत दीपके गैर सवर्ण हो कर भी सहज नेता बन गया क्योंकि पढ़ाई ही ऊंची जातियों का हथियार है जिस से वे इस देश के किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों, गरीबों और साथ ही अपने ही घरों की सवर्ण औरतों पर राज कर सकते हैं. पौराणिक संस्कृत में लिखे गए ग्रंथों का हवाला देदे कर उन्होंने 2,000 वर्ष से ज्यादा इस देश के समाज पर राज किया जबकि देश के राजा वे थे जो उन के राम, विष्णु, शिव को नहीं मानते थे.
किसानों, मजदूरों को देश के बाहर भेज कर पैसा कमा कर भारत के खजाने को भरने वाले जेनजी से घबरा गए क्योंकि इस जेनजी के तार तो उन के घरों से जुड़े हैं, ये तो अपने खास हैं. इन्हें कैसे धरना दिए किसानों के बराबर माना जा सकता है? इन्हें कैसे हिंदूमुसलिम के नारों से बहकाया जा सकता है? इन पर धमकी भीकाम नहीं करती डंडे, गोली की बात तो दूसरी. तभी सरकारी अफसरों ने नेता की बात मानने से इनकार कर दिया कि उन्हें पीटपीट कर जंतरमंतर से खदेड़ दिया जाए.
यह जीत सच की तो है पर इसलिए झूठ के पैर अब उस दलदल में फंस गए जो उन्होंने खुद गोबर, गोमूत्र, गंदगी, गंदे पानी से तैयार की है. अब पछताओ. पर आम आदमी कोई उम्मीद न रखे कि सरकार सुधरने वाली है. वह तो राम मंदिरों में लगी है.Editorial




