Office Humor. रामभरोसे ने जब डिफैंस अकाउंट्स डिपार्टमैंट में जौइन किया तब औफिस वालों को लगा कि चलो एक नया ऊर्जा से भरपूर मुलाजिम और मिला, तो अब काम फटाफट निकलेगा. पर यह किसे पता था कि थोड़े समय में ही रामभरोसे अपने सीनियर रहमतलाल को जम कर पीट देंगे.

हुआ यों कि रामभरोसे के बारे में पूरी जानकारी नहीं होने के बावजूद रहमतलाल अकसर सीनियर होने का रोब झाड़ते, ऊलजुलूल सवाल पूछते, जबकि रामभरोसे को फुजूल बात करने की आदत तो थी नहीं.

रहमतलाल की बातों को सुन कर  बेचारे रामभरोसे रो दिए. नतीजा यह हुआ कि अपने सीनियर रहमतलाल को बढि़या से धो दिए, क्योंकि नौकरी में आने से पहले से ही उन का उसूल था, जबजब रोते उस को दम भर धोते. उन का रोना मतलब किसी को धोना. रहमतलाल को धो कर अपनी पुरानी परंपरा को दोबारा जिंदा कर दिया.

औफिस के इतिहास में यह एक नायाब घटना थी, जो किसी नए मुलाजिम द्वारा पुराने घाघ मुलाजिम को धोया गया हो. अब पता चला सब को कि रामभरोसे किसी को धोने में पहले से ही एक्सपर्ट हैं. सामने वाले को चाह कर भी बदले में इन को पीटने के लिए कोई राह नहीं सूझती. वजह यह कि उन की बौडी लाखों में एक है. 10 लोगों पर अकेले भारी पड़ते हैं. विशालकाय शरीर के स्वामी हैं.

इस घटना के घटते ही रामभरोसे को पूरा औफिस जान गया, इसलिए अब औफिस में जिस किसी मुद्दे पर बात होती, तो इन से एक बार जरूर सलाह ले ली जाती.

हालांकि, रामभरोसे दिल के बहुत बढि़या आदमी थे. वे किसी से बात करते तो कभीकभार ही. वे काम से काम रखते थे. काम खूब करते थे. उन का मानना था जब इस के लिए ही नौकरी पाई है, तो काम से परहेज क्या करना. उन के साथ काम करने वालों ने यह अंदाजा लगाया कि कमबख्त काम तो करता है, लेकिन इस को नौकरी मिली कैसे?

औफिस बड़ा था. तकरीबन हजार से ऊपर लोग वहां काम करते थे. पर किसी को जौइन करने के बाद इतने कम समय में इतनी लोकप्रियता नहीं मिली जितना कि रामभरोसे को मिली. लोकप्रियता अच्छी बातों से मिली हो या बुरी बातों से, लोकप्रियता, लोकप्रियता होती है.

औफिस में शुरू के दिनों में रामभरोसे को उन के हावभाव, बात करने के लहजे के चलते अनेक नामों से नवाजा गया था, जैसे सुमो, समुराय, गूंग, लंगूर आदिआदि… पर जिस वजह से उन को लोकप्रियता मिली उस का तो अभी तक जिक्र ही नहीं किया.

रामभरोसे कुछ ही दिनों के बाद काम सीख कर ऐसे खुर्राट हो गए कि पुराने महारथियों ने उन के सामने घुटने टेक दिए. काम निबटाने में अच्छेअच्छों को पछाड़ दिया.

यों तो औफिस में कैंटीन भी थी, पर चाय के सिवा खाने का कुछ और सामान नहीं बनता था. चाय पीना तो मजबूरी में होता था. पहले चाय नहीं पीते थे, लेकिन जब से औफिस के आदमी हुए तब से समयसमय पर चाय भी भरपूर मात्रा में लेने लगे थे. वजह यह कि औफिस में चाय के लिए 2 बार ब्रेक मिलता था, फिर रामभरोसे यह मौका क्यों गंवाएं?

एक दिन बातों ही बातों में रामभरोसे के अफसर जहमतलाल उन से बोले, ‘‘रामभरोसेजी, आप चाय भी धुआंधार पीते हैं.’’

‘‘जी… जी सर, हम चाय बहुत ज्यादा पीते हैं.

जहमतलाल समझाने के स्वर में बोले, ‘‘जैसा कि चाय के बारे में सभी जानते हैं. चाय के ज्यादा सेवन से भूख मरती है.’’

‘‘क्या करूं सर, एक कप से संतोष ही नहीं होता.’’

‘‘तो यह आप की बहुत बड़ी कमजोरी है रामभरोसेजी.’’

‘‘सर, हर इनसान में कोई न कोई कमजोरी छिपी रहती है.’’ ‘‘खानेपीने के मामले में और क्याक्या कमजोरियां हैं आप की?’’

‘‘सर, आप यह क्यों पूछ रहे हैं?’’

‘‘इसलिए कि कैंटीन में चाय के साथसाथ कुछ खानेपीने वाले सामान  रखने की बात चल रही है…’’ अफसर महोदय कुछ और कहते इस के पहले ही रामभरोसे यह मौका हाथ से कैसे जाने देते… उन्होंने तपाक से कहा, ‘‘ऐसे तो खाने में किसी से परहेज नहीं है, पर समोसा खाने में जो मजा आता है वह किसी और चीज में नहीं आता. समोसा बनना चाहिए सर.’’

‘‘बनेगा…’’ जहमतलाल ने कहा, ‘‘क्योंकि तुम्हारा यह नेक विचार दूसरे मुलाजिमों से मैच कर रहा है रामभरोसेजी.’’

इतना सुनते ही रामभरोसे जड़ से खुश हो गए. औफिस 5 दिन का होता था, सो 5 दिनों में कैंटीन में अलगअलग आइटम बनता था. जिस दिन समोसा बनता रामभरोसे का ज्यादातर समय उस दिन कैंटीन में बीतता. ऐसा लगता रामभरोसे और समोसे का जन्मजन्मांतर का रिश्ता हो.

रामभरोसे उस दिन खूब समोसा खाते. भोजन में भी उस दिन समोसा ही लेते. भरपेट खा कर जब डकार लेते तो लगता डकार नहीं, बल्कि सिंह की दहाड़ हो. फिर तो उन के नामों की सूची में एक और नाम जुड़ गया समोसा पांडे यानी रामभरोसे उर्फ समोसे.

यह नाम रामभरोसे पर इतना चस्पां कि पिछले दिए गए के सारे नाम फीके पड़ गए या यों कहें कि काल के ग्रास में समा गए. रामभरोसे अब समोसे हो गए. यह नाम इतना मशहूर हुआ कि उन का असली नाम समोसे में ही खो गया. Office Humor

–राजेंद्र कुमार सिंह

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