Society . हिंदी फिल्मों में बतौर हीरोइन काम करने वाली कीर्ति कुल्हारी ‘इंदु सरकार’, ‘पिंक’, ‘मिशन मंगल’ और ‘उरी’ जैसी हिट फिल्मों में दिखाई दी थीं. पर हाल ही में वे अपने एक बयान से चर्चा में हैं, जो उन्होंने एक इंटरव्यू में दिया है.
इस इंटरव्यू में कीर्ति कुल्हारी ने मुंबई के यारी रोड इलाके में अपने नए घर में शिफ्ट होने का एक्सपीरियंस शेयर किया. इस दौरान उन्होंने वहां मेड घरेलू नौकरानी और कुक के रेट्स पर हैरानी जताते हुए कहा, ‘मैं हाल ही में यारी रोड में एक नए घर में शिफ्ट हुई हूं. वहां जब मैं ने कुक और मेड से बात की, तो उन्होंने जो रेट बताए, वे मुझे बिलकुल समझ नहीं आए.
‘वह मुझ से 2 घंटे के काम के लिए 10,000 मांग रही थी. मैं चाहती थी कि उन 2 घंटों में झाड़ू, पोछा और बरतन के अलावा डस्टिंग और कपड़े धोने जैसे बाकी काम भी हो जाएं…
‘उस वक्त हमें लगा कि क्या सैलिब्रिटी होने के नाते हमारी शक्ल देख कर इतने पैसे मांगे जा रहे हैं? शायद वे सोचते हैं कि इन के पास तो बहुत पैसा होगा, चलो थोड़ा और मांग लेते हैं.’
कीर्ति कुल्हारी के इस इंटरव्यू पर सोशल मीडिया पर लोगों ने उन के इस बयान पर अलगअलग राय रखी. किसी ने कीर्ति की इस बात से इत्तिफाक रखा, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल किया.
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी मिनी माथुर ने कीर्ति कुल्हारी के बयान के खिलाफ अपनी राय रखी और लिखा, ‘जरा सोचिए कि उन के वे 2 घंटे, हमें अपने 2 घंटों में कितना कमा कर देते हैं. यह रकम दुनिया के किसी भी कोने में तय की गई न्यूनतम मजदूरी (मिनिमम वेज) से भी बेहद कम है.’
यहां सवाल उठता है कि कीर्ति कुल्हारी ने अपने इंटरव्यू में यह बात उठाई ही क्यों? आप अपनी घरेलू नौकरानी से महीने में रोजाना कितने घंटे काम कराती हैं यह आप को तय करना है. अगर आप को लगता है कि जम नहीं रहा तो यह जरूरी नहीं है कि आप उसी नौकरानी को काम पर रखें.
नौकरानी के बढ़ते नखरे
दिक्कत यह है कि जब हम किसी को अपने घर पर घरेलू नौकर के तौर पर काम देते हैं, तो समस्याएं हमेशा दोतरफा होती हैं. यहां पर यह जरूरी हो जाता है कि घरेलू नौकर या नौकरानी क्या जितना मेहनताना पा रहे हैं, वे उस के काबिल हैं भी या नहीं या सिर्फ उन्हें घर की आर्थिक स्थिति कैसी है, इस हिसाब से मुंह खोलना चाहिए?
एक उदाहरण से समझाते हैं. सड़क किनारे ठेले पर कोई केले बेच रहा है. मान लो वह हर दर्जन केले 70 रुपए में बेच कर 10-12 रुपए कमा रहा है. यह मुनाफा वह हर खरीदार से वसूलता है. हां, यह हो सकता है कि वह किसी ग्राहक को ज्यादा दर्जन केले बेचने में अपना मुनाफा थोड़ा कम कर दे.
पर असली समस्या वहां होती है जब कोई ग्राहक कार से उतरता है. उस ग्राहक की रईसी भांप कर वह एक दर्जन केले का भाव 80 रुपए कर देता है और सोचता है कि इसे क्या ही फर्क पड़ेगा.
पर उस दुकानदार की सोच यहीं गलत हो जाती है, क्योंकि यहां मुनाफे में लालच मिल गया है. बहुत बार तो वह नजर बचा कर कुछ गले केले भी साहब की पन्नी में भर देता है.
ऐसा ही कुछ घरेलू नौकरानी की मानसिकता के साथ भी होता है. सवाल यह उठता है कि आप 10,000 रुपए महीना मांगने की हकदार हो भी या नहीं? पर चूंकि इलाका थोड़ा अच्छा खासा है, तो आप का मुंह खुल जाता है, पर आप की काबिलीयत नहीं है, यह भी आप जानते हैं.
एक उदाहरण देखते हैं. 18 साल की एक लड़की फरीदाबाद के पौश इलाके में घरेलू नौकरानी थी. मेमसाहब सुबह जल्दी औफिस चली जाती थीं, साहब वर्क फ्रौम होम के सिलसिले में बैडरूम में काम करते थे.
उस नौकरानी की गंदी आदत बन गई कि वह अपने किसी लवर से फोन पर बात करतेकरते काम करती थी. ईयरफोन कान में लगा होता, फुसफुसाहट में बात होती, फिर कहां झाड़ू लग रही है और कहां पोंछा लग रहा है, यह न नौकरानी को पता चलता और न ही साहब को. यह अपने काम और ईमानदारी के प्रति सरासर चोरी थी.
कामचोर होना तो कोई भी झेल ले पर अगर घरेलू नौकरानी को चोरी करने की आदत ही पड़ जाए तो? ऐसे बहुत सी खबरें आती हैं जहां नईनई नौकरानी घर की सफाई के बदले सफाया ही कर देती है.
अगर इस समस्या के बारे में किसी नौकरानी से पूछो तो कहेगी कि कोई भी आदतन चोरी नहीं करता. कोई मजबूरी रही होगी, मालिक इज्जत नहीं करता होगा, कम तनख्वाह मिलती होगी.
तो क्या हम चोरी करने के हकदार हो गए? यहां पर नौकरानी रखने वाले की भी गलती होती है. वे पुलिस वैरिफिकेशन नहीं कराते हैं. अपना कीमती सामान ताले में नहीं रखते हैं. अपने घरेलू नौकर पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं.
घरेलू नौकरानी से जुड़ी और भी समस्याएं होती हैं, जैसे बिना बताए छुट्टी ले लेना, काम में लापरवाही, बच्चों से बदतमीजी… ये सब बातें कभी भी घरेलू नौकरानी के हक में नहीं जाती हैं, पर इन का हल क्या है? हल यही है कि आप अपनी काबिलीयत के हिसाब से काम के दाम रखें.
किसी भी घरेलू नौकरानी का सब से खास गुण उस का नियमित होना है. अगर वह हमेशा समय पर आती है, तो उस का और काम कराने वाले का दिन आसान हो जाता है. इस से जिम्मेदारी लेनी की गंभीरता बढ़ जाती है.
इस के अलावा एक अच्छी घरेलू नौकरानी वह होती है जो परिवार की प्राइवेसी को समझे. फालतू की ताकझांक न करे और अपने काम से काम रखे. इस से काम की जगह पर एक अच्छा माहौल बनता है जहां नौकरानी और काम कराने वाला परिवार एकदूसरे के साथ सहज महसूस करते हैं.
साथ ही, किसी भी घरेलू नौकरानी के लिए खुद की साफसफाई और ईमानदारी बहुत जरूरी गुण माने जाते हैं. जो नौकरानी अच्छी तरह तैयार हो कर किसी के घर काम करने जाती है, तो वहां पौजिटिव फीलिंग का अहसास होता है.
नौकरानी के साथ भी नाइंसाफी न हो
हर किसी के घर में घरेलू नौकरानी बनना कोई हंसीखेल नहीं है. हम बहुत बार खबरों में सुनते हैं कि ऐसे लोगों के साथ जोरजुल्म होता है. कभी चोरी करने का इलजाम लगा दिया जाता है, तो कभी किसी कीमती चीज को तोड़ने की बात कह कर तनख्वाह काट ली जाती है. चूंकि ये लोग ज्यादातर निचली जाति के होते हैं, तो इन के साथ जातिगत भेदभाव भी किया जाता है.
अमूमन कोई घरेलू नौकरानी बरतन साफ करना, पोंछा लगाना, झाड़ू लगाना, धूल झाड़ना, खाना बनाना, छोटे के बच्चे की देखभाल करना, कपड़े धोना, बिस्तर लगाना, पौधों में पानी देना या बाजार से कोई छोटामोटा सामान खरीदने जैसा काम करती है.
चूंकि हर घरेलू नौकरानी को एक ही घर में ये सारे काम नहीं मिलते हैं, तो घंटे के हिसाब से कई घर पकड़ लेती हैं, पर सब की यही समस्या होती है कि जितना काम कराया जाता है, उस हिसाब से पैसे नहीं मिलते हैं.
यहां पर भी स्किल का ही पचड़ा होता है. ऐसी ज्यादातर महिलाएं तकरीबन अनपढ़ होती हैं, तो उन्हें आज के गैजेट के जमाने में इलैक्ट्रोनिक चीजों को आपरेट करने की समझ ही नहीं होती है. रसोईघर में मौड्यूलर किचन में इलैक्ट्रोनिक सामान होता है, जो सिरदर्दी की वजह बनता है, क्योंकि ऐसे गैजेट्स को चलाने की ट्रेनिंग ही नहीं दी गई है.
बहुत बार यह भी सुनने में आता है कि फलां जगह किसी घरेलू नौकरानी को बुरी तरह पीटा गया. 9 फरवरी, 2023 को गुरुग्राम, हरियाणा की एक घटना का जिक्र करते हैं, जहां पुलिस ने घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने वाली 17 साल की एक किशोरी पर जुल्म करने, उस के शरीर को गरम चिमटे से दागने, बेरहमी से डंडे से पिटाई करने और कईकई दिनों तक भूखा रखने के आरोप में एक कपल को गिरफ्तार किया था.
इलाज के लिए गंभीर हालत में अस्पताल में भरती करवाई गई वह किशोरी डस्टबिन से खाना उठा कर अपनी भूख मिटाती थी. उस के हाथपैर और चेहरे पर चोटों के कई निशान पाए गए थे. झारखंड की रांची की रहने वाली इस किशोरी को एक प्लेसमैंट एजेंसी के जरीए नौकरी पर रखा गया था.
यौन शोषण भी एक बहुत बड़ी समस्या है. कमउम्र की ही नहीं, बल्कि अधेड़ औरतें भी बहुत बार इस दर्द को झेलती हैं. चूंकि उन्हें अपना रोजगार बचाना होता है, तो ये अमूमन चुप्पी साध लेती हैं. उस के ऊपर ‘कौन पुलिस के चक्कर काटे’ या ‘अपने कानूनी अधिकार’ के बारे में अनजान होना भी इन्हें इस तरह के जुल्म सहने पर मजबूर करता है. Society




