Paper Leak. जिन लोगों ने बाद में खुद एग्जाम लेने हैं, पढ़ाना है, पेपर सैट करने हैं, पेपर की सीक्रेसी रखनी है, आंसर बुक्स जांचनी हैं, एग्जाम का रिजल्ट तैयार करना है उन्हीं की महाराष्ट्र में टीचर्स एलिजिबिलिटी टैस्ट परीक्षा का पेपर ठीक एक दिन पहले लीक हो गया और 4.25 लाख कैंडिडेट जो एग्जाम सैंटरों की ओर चल पड़े थे, अब फिर मुंह लटका कर बैठ गए हैं.
यह उस देश में हो रहा है जहां बारबार गुरु की महिमा का गाना गाया जाता है. गुरु को ब्रह्मा, पिता, माता, ईश्वर से बड़ा माना जाता है. गुरु को अंगूठा तक काट कर देने की कहानी सुनाई जाती है जबकि उस एकलव्य ने उस द्रोणाचार्य से कोई शिक्षा भी नहीं ली थी जिस ने अंगूठा मांगा था.
नरेंद्र मोदी से ले कर मोहन भागवत तक गुरु पर्व को महानता से मनवाते हैं, उन गुरुओं को क्या जरूरत थी कि पेपर लीक करवाते? वे तो समाज के गाइड हैं, वे तो महान हैं, वे तो पैर पुजवाते हैं, वे तो हमेशा सही होते हैं. वे ही टैस्ट के लिए पैसे दे कर पेपर लीक करवाते हैं ताकि टैस्ट पास कर के टीचर की नौकरी के एक जरूरी कदम को पूरा कर सकें.
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जो गुरु बनना चाहते हैं उन का कैरेक्टर इतना गिरा हुआ है कि वे स्टूडैंट्स की तरह पैसे देदे कर पेपर लीक करवाते हैं. यह कैसा समाज है जो हमारी भगवा सरकारें जो भारत को विश्वगुरु कहते नहीं थकतीं को सहज आम बात मानना है? यह तो गुरुओं पर गंभीर ब्लेम है. यह उन की रहीसही इज्जत को मटियामेट करने वाला काम है.
देशभर में टीचर्स की नौकरियों की आपाधापी मची हुई है क्योंकि लोग जानते हैं कि सरकारी स्कूल में टीचर बन जाना असल में मंदिर में पुजारी बन जाने के बराबर है जहां पैसा ही पैसा टपकता है, काम न के बराबर होता है. यह जानते हुए भी कि सरकारी स्कूलों में सिर्फ दलितों और पिछड़ों के बच्चे आते हैं, ऊंची जातियां के लोग जम कर नौकरी के लिए हाथपैर मारते हैं. एकदो राज्यों में तो मुख्यमंत्रियों पर टीचर्स की अपौइंटमैंट को रिश्वतखोरी की तरह माना गया है.
जब उन के पेपर लीक होंगे तो साधारण सी बात है कि अगर जिन्हें नौकरी मिलेगी वे भी स्टूडैंट्स के पेपर लीक करा बहती गंगा में हाथ धोएंगे, क्योंकि उन्हें नौकरी भी तो शायद उसी रिश्वत की गंगा में 4-6 डुबकियां लगाने पर मिली है.
महाराष्ट्र का मामला पहला नहीं है. उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में भी टीचर्स की नौकरी के सिलसिले में होने वाले टीईटी, बीएड, एमएड जैसे कितने एग्जामों के पेपर लीक हो चुके हैं. यह बीमारी उस देश में हो रही है जहां मंदिर धड़ाधड़ बन रहे हैं, जहां गुरुओं के आश्रमों में भारी भीड़ जमा हो रही है, जहां कोचिंग बिजनैस ही 2 लाख करोड़ का ही गया है. वहां ट्रेन किए हुए टीचर बेईमानी वाले हों तो देश की जनता किस तरह के विश्वगुरु की चेली है अंदाजा आप लगा सकते हैं. Paper Leak




