Real Influencer. सोशल मीडिया पर लोग ऊटपटांग हरकतें कर के फेमस होते हैं. इसी बीच सिद्धेश लोकारे सोशल मीडिया का ऐसा चेहरा हैं जिन्हें सामाजिक बदलावोें के लिए जाना जाता है. इन के काम को देख कर कहा जा सकता है कि यही है असली इन्फ्लुएंसर.

महाराष्ट्र के सिद्धेश लोकारे का घर मुंबई में एक कमरे की  झोंपड़ी हुआ करती थी. जहां वह 20 लोगों के साथ पलाबढ़ा. उसी समय से सिद्धेश के लिए आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता शिक्षा ही था. सिद्धेश ने खूब पढ़ाई की, मेहनत की, इंजीनियर और एमबीए की डिग्री हासिल करने के बाद उस ने कई कंपनियों में काम किया और काफी परिश्रम के बाद एक स्टार्टअप शुरू किया.

सिद्धेश ने बचपन से चौल में रहने वाले लोगों की कठिनाइयों, उन के बच्चों की शिक्षा की स्थिति, नशे की लत से तबाह परिवारों, घर की सारी जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उपेक्षित महिलाओं, बेसहारा अनाथों, दिव्यांग लोगों के दैनिक संघर्षों, ट्रांसजैंडर लोगों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और बहुत सीमित साधन वाले लोगों के संघर्षपूर्ण जीवन को देखा है. वह उन लोगों की सच्चाई, उन का दर्द दुनिया को दिखाना चाहता था ताकि अपने प्रयासों और जनता की मदद से उन के जीवन में वह बदलाव ला सके. इस की शुरुआत उस ने कंटैंट के माध्यम से की. अपने कंटैंट द्वारा सिद्धेश लोगों को जागरूक और साथ जोड़ने की पहल कर रहा है.

समाज की वास्तविकता दर्शाते वीडियो

सिद्धेश सोशल मीडिया प्लेटफौर्म पर Sidiously नाम से जाना जाता है. साथ ही, उस के इंस्टा अकाउंट @sidiously_ पर 1.5 मिलियन फौलोअर्स हैं. सिद्धेश ने वंचित वर्ग, वरिष्ठ नागरिक, आवारा और असहाय जानवर, दूरदराज के गांवों और आदिवासी गांवों के लोग, कामकाजी महिलाएं, युवाओं के निजी मुद्दे, स्कूलों और कालेजों में यौनशिक्षा जैसे विषयों पर वीडियोज बनाए हैं, जो समाज की वास्तविकता दर्शाते हैं.

Change Maker

उस का कंटैंट, उस की लगन और एक अनोखी चेंजमेकर पहल ‘मिशन 30303’ सब का ध्यान खींचती है. उस में सिद्धेश 30 दिन, 30 स्कूल, 3 करोड़ की बात कर रहा है. और यह हुआ भी. सिद्धेश ने 30 दिनों तक महाराष्ट्र के उन दूरदराज ग्रामीण इलाकों के 30 स्कूलों का दौरा अपनी स्कूटी पर किया जो स्कूल बहुत पिछड़े इलाकों और शिक्षा सुविधाओं के बिना सालों से चल रहे हैं. कुछ स्कूलों में तो छत ही नहीं है. कहीं बच्चे नाव से स्कूल तक पहुंचते हैं. कहीं सड़क ही नहीं. स्कूल पहुंचने के लिए बच्चे जंगल और पथरीला रास्ता घंटों तक पैदल चल तय करते हैं. उन में से कुछ बच्चों के पैर स्वस्थ भी नहीं और कहीं बच्चों के पास खाने को खाना तक नहीं है. सिद्धेश उन स्कूलों में गया, बच्चों की परेशानी जानी और उन्हें दूर करने के लिए फंड इकट्ठा करता रहा.

सराहनीय कार्य

साथ ही, इस में लोगों या संगठनों की सीधे मदद करने के लिए उस ने kindly.club नामक एक वैबसाइट बनाई है ताकि वित्तीय लेनदेन पारदर्शी हों और लोग उत्साहपूर्वक मदद करें. इस वैबसाइट पर आप किसी गांव में शौचालय बनवाने में मदद कर सकते हैं, लड़कियों को सैनिटरी पैड की मदद, वंचित समुदाय की किसी महिला को व्यवसाय शुरू करने में मदद, जरूरतमंदों के एक दिन के भोजन का खर्च और गरीब बच्चों को लैपटाप दे सकते हैं, किसी छात्र की शिक्षा का खर्च भी उठा सकते हैं.

सिद्धेश के पिता सब्जी बेचते थे, माता क्लर्क थी. बहुत कठिन परिस्थितियों से लड़ सिद्धेश ने सफलता हासिल की है और इसीलिए वह चाहता है कि हर बच्चा यह सफलता हासिल करे. इस के लिए बच्चों का पढ़ना बहुत जरूरी है. अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सिद्धेश ने यह पहल शुरू की है, जिस की आज हरकोई सराहना करता है. तभी तो, सिद्धेश की तारीफ करने से उद्योगपति आनंद महिंद्रा भी खुद को नहीं रोक पाए.

आनंद महिंद्रा ने अपने मंडे मोटिवेशन पोस्ट के रूप में सिद्धेश को चुना और उस की घोर कठिनाइयों से भरे जीवन व उद्देश्यपूर्ण कार्यों की यात्रा को सा झा करते अपने एक्स हैंडल पर मंडे पोस्ट में लिखा, ‘‘उस ने अपनी साधारण शुरुआत से अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की लेकिन जिस कक्षा से वह निकला, उसे कभी नहीं छोड़ा. मैं उस के प्रोजैक्ट से जुड़ूंगा और उस का समर्थन करूंगा.’’

सिद्धेश की सोच इतनी सच्ची थी कि वह 3 करोड़ जुटाने में सफल रहा लेकिन सिद्धेश का बच्चों को अच्छी शिक्षा से जोड़ने का यह सफर रुका नहीं. उस का मानना है कि शिक्षा भारत के हर बच्चे को मिलनी चाहिए और इस प्रयास में वह आज भी लगा हुआ है. Change Maker

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