Story in Hindi. सना को बीवी के रूप में पा कर हकीम बहुत खुश था. 2 महीने तो सब सही रहा, पर उस के बाद सना ने अपने तेवर दिखा दिए. हकीम को कुछ समझ नहीं आया कि माजरा क्या है. क्या वह यह राज जान पाया?

हकीम की शादी पास के गांव में ही हुई थी. अभी उस की उम्र 21 साल और उस की बीवी की उम्र महज 19 साल थी.

सना जैसी बीवी पा कर हकीम की खुशी का ठिकाना न था और खुशी हो भी क्यों न, सना थी ही इतनी खूबसूरत. गोरा रंग, बड़ीबड़ी आंखें, सुर्ख गाल, गुलाबी पतले होंठ, सुनहरे बाल, पतली कमर ऐसी कि जब वह चलती थी, ऐसा लगता था मानो कोई हिरनी लहरा कर चल रही हो. उस की इस अदा पर हकीम तो क्या, जो भी उसे देखता उस पर मरमिटता था.

हकीम अपने बाप का एकलौता बेटा था पर जब से सना उस की जिंदगी में आई वह रातदिन सना के आगेपीछे रहता. घर के हर काम में उस की मदद करता. यहां तक कि उसे कोई काम नहीं करने देता. हर समय सना को अपनी बांहों में भरे रहने के लिए बेताब रहता. यही वजह थी कि हमीद ने कामकाज भी छोड़ दिया था. जमीन काफी थी तो रुपएपैसे की कोई कमी नहीं थी.

वैसे हमीद मुंबई में काम करता था. शादी से पहले वह कईकई महीनों में घर वापस आता था और मेहनत और लगन से काफी पैसा भी कमा कर लाता था. पर जब से सना से उस की शादी हुई, वह एक बार ही मुंबई गया पर सना की मोहब्बत में उस का वहां मन नहीं लगा और 2-3 दिन में ही वापस आ गया.

अभी हकीम और सना की शादी को 2 महीने ही गुजरे थे कि अचानक सना हकीम से कतराने लगी और बातबात पर उसे डांटने लगी. हकीम जब भी उसे बांहों मे भरने की कोशिश करता सना उसे  िझड़क देती और धक्का दे कर उस से अलग हो जाती.

सना की यह बेरुखी हकीम की सम झ में नहीं आ रही थी. सना जितना उस से बेरुखी से पेश आती, हकीम उतना ही उस के करीब होने की कोशिश करता और दीवानों की तरह उस से चिपकता और प्यार करता.

सना की बेरुखी की वजह कोई और नहीं, बल्कि उस के गांव का उस का आशिक था जिसे सना दिलोजान से चाहती थी. सना तो हकीम से शादी करना ही नहीं चाहती थी.

सना गांव के एक मजदूर जो काफ़ी गरीब था, से प्यार करती थी. सना उस की ऐसी दीवानी थी कि उस के बिना सना के लिए एक पल भी रहना मुश्किल था.

दरअसल, एक बार सना अपने अब्बा के साथ खेत पर घूमने गई थी. वहां काफी मजदूर काम कर रहे थे. उन में एक मजदूर मोनू अच्छे डीलडौल का खूबसूरत जवान था जिस की ताकत की पूरे इलाके में काफी चर्चा थी.

भले ही मोनू गरीब था पर उस के चाहने वालों की कोई कमी न थी और गांव की कई लड़कियां उस पर मरती थीं, पर मोनू किसी को भाव न देता और अपने काम से काम रखता.

सना ने जब मोनू को खेत में काम करते देखा तो उस के मजबूत शरीर की दीवानी हो गई और मन ही मन उसे पाने की तमन्ना करने लगी. अब सना किसी न किसी बहाने मोनू को देखने के लिए खेत पर जाने लगी और उस के आसपास मंडराने लगी.

एक दिन की बात है. शाम का समय था. सब मजदूर जा चुके थे. खेत पर सना और मोनू के अलावा कोई न था. सोनू तालाब के किनारे खड़ा था. पीछे से सना उसे पानी में धक्का देने के इरादे से जैसे ही उस पर  झपटी, अचानक मोनू मिट्टी का डला फोड़ने के लिए नीचे  झुका और सना पानी में गिर गई.

मोनू फौरन पानी में कूदा और सना को बाहर निकालने लगा. सना ने मोनू को अपनी बांहों में कस कर पकड़ लिया और उस के जिस्म से किसी बेल की तरह लिपट गई.

मोनू उसे पानी से निकाल कर पास की  झोंपड़ी में ले गया और उसे एक चारपाई पर लिटा दिया. लेकिन सना ने उसे न छोड़ा और अपनी बांहों से चिपकाए रखा.

हलकाहलका अंधेरा हो चुका था. भीगे होने के कारण सना का गदराया बदन संगमरमर की तरह चमक रहा था. सारे कपड़े भीगे हुए थे. सना के बदन का हर हिस्सा साफसाफ दिखाई दे रहा था. ऊपर से सना की पकड़ ने मोनू की दिल में हलचल मचा रखी थी.

मोनू सना जैसी खूबसूरत लड़की की बांहों में अपनेआप को देख कर और उस के हां के इशारे को भांप चुका था. उस ने भी सना को अपनी बांहों में कस कर पकड़ लिया. मोनू की पकड़ मजबूत होती देख सना सिहर उठी और मोनू पर चुम्मों की बौछार करने लगी.

मोनू के भी जज्बात जाग उठे थे. उस ने सना के बदन के हर हिस्से पर चुम्मों की बौछार कर के उसे वह सब करने के लिए मजबूर कर दिया जो शादी क़े बाद होता है. देखते ही देखते दोनों ने अपनेअपने कपड़े तन से जुदा किए और एकदूसरे में समा गए.

इस के बाद वे दोनों एकदूसरे से बहुत मोहब्बत करने लगे और खेतों में मिलने लगे. सना मोनू के प्यार की इतनी दीवानी हो चुकी थी कि उसे जब भी मौका मिलता वह उस से मिलने खेत में चली जाती और दोनों अपने जिस्म की जरूरत को एकदूसरे से पूरा करते.

सना के अब्बू को जब इस बात का पता चला तो वे आगबबूला हो गए. उन्होंने सना का घर से बाहर निकलना बंद कर दिया और मोनू को भी काम से निकाल दिया. साथ ही, जोरजबरदस्ती कर के आननफानन में सना की शादी हकीम से कर दी.

हकीम से सना की शादी हुए अभी 2 महीने ही गुजरे थे कि एक दिन सना की मुलाकात मोनू से हो गई. दोनों का प्यार फिर से जाग गया और वे चोरीछिपे एकदूसरे से मिलने लगे.

सना को जो शारीरिक सूख मोनू से मिलता था वह उसे हकीम से बिलकुल नहीं मिल रहा था. यही वजह थी कि सना मोनू की तरफ खिंचती जा रही थी और हकीम को नजरअंदाज कर रही थी.

अब सना हकीम को टैंशन दे कर उस से छुटकारा पाना चाहती थी. वह यही चाहती थी कि हकीम गुस्से में आ कर उसे छोड़ दे ताकि वह मोनू के पास जा सके. इस सब में हकीम अब सना पर शक करने लगा था.

एक दिन सना किसी काम का बहाना बना कर घर से बाहर निकली तो हकीम भी उस के पीछेपीछे चल दिया सना बस्ती से दूर खेत की तरफ जा रही थी. हलकाहलका अंधेरा हो रहा था. तभी सना खेत में इंतजार कर रहे मोनू के पास पहुंची और दोनों पास ही ईख के खेत में जा कर एकदूसरे से लिपट गए.

हकीम उन दोनों से बचता हुआ उन के करीब ही एक पेड़ की आड़ में खड़ा हो कर उन की बातें सुनने लगा.

सना मोनू से बोली, ‘‘मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती. उस पागल को मैं इतना टौर्चर करती हूं, फिर भी वह मेरा दीवाना बना हुआ है. मैं ने उसे  झूठे ही नामर्द कहा पर उसे गुस्सा न ही आया, न उस ने मुझे मारा और न ही नाराज हुआ. समझ में नहीं आ रहा कि उस से कैसे पीछा छुड़ाया जाए?

‘‘मैं सिर्फ तुमसे प्यार करती हूं. तुम से जो सुख मु झे मिलता है वह हकीम से नहीं. मैं तुम्हें अपना सबकुछ मानती हूं. तुम कहीं चले गए थे तो अब्बा ने जबरदस्ती हकीम से मेरी शादी कर दी. मैं ने उन्हें बहुत मना किया और कहा कि मैं मोनू से प्यार करती हूं, उस के सिवा मेरे दिल में कोई दूसरा नहीं बस सकता, पर उन्होंने मेरी एक न सुनी और

हकीम से मेरी शादी कर के उस की भी और मेरी भी जिंदगी बरबाद कर दी. अब मैं उस से पीछा छुड़ाना चाहती हूं,’’ इतना कहतेकहते दोनों ने अपने कपड़े उतारे और एकदूसरे की बांहों में समा गए.

इधर हकीम गहरी सोच में डूबा रहा. इस घटना से उस के ऊपर गहरा असर हुआ. जिस बीवी को वह अपनी जान से भी ज्यादा चाहता था वह उसे धोखा दे रही थी.

इस उधेड़बुन में हकीम ने सना को खुश रखने के लिए जो कदम उठाया वह उस की मौत का सबब बना. उस ने जंगल में फांसी के फंदे पर लटक कर अपनी जान दे दी.

सुबह जब गांव वालों की नजर पेड़ पर लटकी हकीम की लाश पर पड़ी तो सब हैरान रह गए.

हकीम के मरने के कुछ महीने बाद ही सना ने मोनू से शादी कर ली. इस बार उस के अब्बा ने भी उसे नहीं रोका, क्योंकि अब वह एक विधवा थी और उस का रिश्ता होना मुश्किल था. Story in Hindi

-अंसारी जीशान अहमद

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