Hindi Story. हटवा गांव. शाम का समय. गजाधर काका के घर में चौपाल लगी थी. ‘पटवारी पुराण’ पर बात हो रही थी. दरअसल, उस गांव के पटवारी भोलाराम ने गरीबों को तंग कर रखा था. वे उसे हटाने की हर मुमकिन कोशिश कर चुके थे, लेकिन गांव के कई दबंगों तक पहुंच के चलते उस का बाल भी बांका नहीं हो रहा था. गरीब लोग अकसर पटवारी को कोस कर अपनी भड़ास निकाल लिया करते थे.

उस शाम चौपाल में कई भुक्तभोगी अपनाअपना तजरबा सुना रहे थे. रघुआ ने कहा, ‘‘इस पटवारी के चलते मैं आईटीआई नहीं कर सका. मेरा परिवार गरीबी रेखा से नीचे जी रहा है, यह आप सभी लोग जानते हैं, लेकिन पटवारी ने मेरा इनकम सर्टिफिकेट ऐसा नहीं बनाया कि मु?ो वजीफा मिल सके. घर से न के बराबर पैसे मिल पाते थे. शहर में मकान का किराया, पढ़ाईलिखाई और सब्जीभाजी का खर्च मैं कैसे उठा पाता? इस वजह से मैं ने आईटीआई बीच में ही छोड़ दी. जी में आता है कि इस के हाथपैर तोड़ कर रख दूं.’’

‘‘ऐसा मत करना. भोलाराम पटवारी ठीक नहीं है. उसे उस के बुरे कामों की सजा कभी न कभी जरूर मिलेगी,’’ यह कह कर चौपाल में बैठे अधेड़ उम्र के रामसजीवन ने बताया, ‘‘जिन लोगों ने उसे 2-3 हजार रुपए दे दिए, उन के उस ने ऐसे प्रमाणपत्र बना दिए कि वे वजीफा का फायदा ले रहे हैं, जबकि वे जमींदार हैं. पटवारी के शरीर में कीड़े पड़ेंगे. वह सड़सड़ कर मरेगा.’’

‘‘सही कह रहे हो रामसजीवन भाई,’’ मुकंदी ने कहा, ‘‘पटवारी की मिट्टी पलीद हो जाएगी. लेकिन अभी तो वह हम लोगों को खून के आंसू रुला रहा है.

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