खुशफहमी की गलतफहमी ही सफल वैवाहिक जीवन का आधार है. वरना विवाह तो लोकल एनेस्थेसिया की तरह होता है. सब सुन्नसुन्न में गुजर जाता है और जब होश आता है तो ओ माई गौड की चीत्कार निकल आती है. थैंक्स टू गौड.