दुपट्टा न होने से उस के उभरे अंग दिख रहे थे. पारो की आंखों में एक अनोखी मस्ती थी. उसे देख कर अमर को ऐसा लगा, जैसे उस के आगे कोई जन्नत की हूर खड़ी हो.

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