Just for Fun. अभी जेनजी का उदय हुए कुछ ही दिन हुए हैं, पर इस के नतीजे बेहद असरदार तरीके में सामने आने लगे हैं. तानाशाही के साथ में रहने वाला हर शख्स जानता है कि वहां ‘आह’ निकलती है, ‘वाहवाह’ नहीं, क्योंकि तानाशाही का आखिरी नतीजा हमेशा तबाही ही होता है.
आज देश में तानाशाही की फसल जिस तेजी से लहलहा रही है, उस की तपिश में न जाने कितने लोग मजबूरी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं. वे सुविधाओं से केवल कटे ही नहीं, बल्कि उन से बहुत दूर धकेल दिए गए हैं.
आज शायद ही कोई ऐसा फील्ड बचा हो, जहां तानाशाही का परचम न लहरा रहा हो. देश कभी भाईचारे और सदाचार की राह पर आगे बढ़ रहा था, लेकिन अब वही समाज किनारे बैठा बेचारगी का दर्द झेल रहा है. दूसरी ओर कदाचार फलाहार की तरह परोसा जा रहा है और खुलेआम उल्लास के साथ नाच रहा है.
सरकार ने अपने विस्तार के लिए जिन पिछवाड़े के रास्तों और हथकंडों का सहारा लिया, उन्होंने कदाचार को ही फलनेफूलने का मौका दिया है. नतीजतन, देश का सिर शर्म से झुक गया है. सरकार की करतूतें जबजब सामने आती हैं, तबतब दुनियाभर में देश की बदनामी का नया अध्याय जुड़ जाता है. यह बदनामी अब कोढ़ की तरह साफसुथरे सामाजिक माहौल को खराब कर रही है.
सबसे दुखद यह है कि धर्म के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति ने इनसान को इतना जहरीला बना दिया है कि कभी जो चेहरे आपस में मिल कर मुसकान से खिल उठते थे, आज वही चेहरे नफरत की आग में झुलसते दिखाई देते हैं. भाईचारे की वह खुशबू अब कहीं खोती हुई महसूस होती है.
ऐसे दौर में देश का एक तबके यानी नौजवान पीढ़ी, जिसे ‘जेनजी’ कहा जा रहा है, मजबूत रोल निभा रही है. हालांकि इस का दूसरा पक्ष अंधभक्ति में डूबा हुआ तमाशबीन बना बैठा है, जबकि देश रसातल की ओर बढ़ता जा रहा है.
इतिहास गवाह है कि जब भी कोई सरकार तानाशाही का रूप धारण करती है, वह आमजन की भावनाओं को रौंदते हुए बेरहमी के साथ आगे बढ़ती है. ऐसे समय में उस के असर को उजागर करने और कम करने का काम नौजवान पीढ़ी ही करती है.
इसी सिलसिले में पेपर लीक जैसे मामलों को ले कर ‘कौकरोच जनता पार्टी’ यानी ‘सीजेपी’ जैसी संस्थाएं भी तेजी से उभर रही हैं.
उन का फैलाव मानो हवा से भी तेज रफ्तार से हो रहा है. शायद यही वजह है कि अब सरकार भी कुछ सहमीसहमी सी दिखाई देने लगी है.
यह दौर केवल सत्ता और विपक्ष का नहीं, बल्कि चेतना और चुप्पी के बीच की लड़ाई का दौर है और इस लड़ाई में ‘जेनजी’ का बुलंद हौसला आने वाले समय की नई पटकथा लिखने को तैयार दिखाई देता है.
- राजेंद्र कुमार सिंह




