Women Courage Story. नगमा अपने नाम की तरह खूबसूरत थी. वह जब भी चौराहे के नल पर पानी भरने जाती, कल्लू और उस के गुरगे उस पर फब्तियां कसे बिना नहीं रहते थे.
कल्लू की बेहूदा हरकतों से नगमा का दिल गुस्से से भर जाता. उस का जी चाहता कि जूडोकराटे का इस्तेमाल कर के उन के होश ठिकाने लगा दे, लेकिन अपने पति आजाद का मासूम चेहरा याद आते ही उस का सारा गुस्सा काफूर हो जाता था.
6 महीने पुरानी बात थी. मुंबई में उत्तर भारतीयों पर हुए हमलों के बाद से दंगाइयों का मन सातवें आसमान पर था. वे बाहर से आए लोगों पर जोरजुल्म तो करते ही थे, औरतों और लड़कियों को भी परेशान करते थे.
इस तरह के दंगाइयों से शरीफ मराठी परिवार परेशान थे. नगमा भी मराठी थी. उस ने एक झारखंडी लड़के आजाद से शादी कर ली थी, जो दंगाइयों के हमले में अपाहिज हो गया था.
नगमा के पिता आफताब अली मुंबई में डाक्टर थे. उस की मां नादिरा बेगम लड़कियों के कालेज में प्रोफैसर थीं. दोनों के लाड़प्यार ने एकलौती बेटी को जिद्दी बना दिया था.
नगमा अपनी मोटरसाइकिल से पूरे मुंबई शहर में घूमा करती थी. उस ने जूडोकराटे की ट्रेनिंग भी ले रखी थी.
एक दिन नगमा अपने पिता के अस्पताल गई हुई थी. वह आजाद नाम के एक शख्स के बिस्तर के सामने खड़ी हो गई. 20 साला उस नौजवान के मासूम चेहरे पर दुख के भावों और कटे पैरों का दर्द महसूस कर नगमा का बदन भी सिहर उठा.
पूछताछ के बाद नगमा के पिता ने बताया कि आजाद गोरेगांव जाने के लिए बस का इंतजार कर रहा था, तभी दंगाइयों का दल वहां पहुंच गया. पहले उस के प्रदेश का नाम पूछा गया, उस के बाद उसे दौड़ादौड़ा कर पीटा गया.
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