Inspirational Hindi Story . बगीचे में बैठी रचना काफी देर से निर्मल का इंतजार कर रही थी. वह बीते दिनों की मीठी यादों में खोई हुई थी, तभी एक मदहोश कर देने वाली धुन ने उस का ध्यान खींचा.
एक पेड़ के तने से सट कर खड़ा निर्मल अपने मोबाइल फोन से यह मीठी धुन बजा रहा था.
नजरें मिलने पर उन दोनों में खूब हंसीठिठोली हुई और वे एक बैंच पर बैठ गए.
‘‘पुणे में तो तुम्हारे कई दोस्त होंगे और गर्लफ्रैंड्स भी होंगी,’’ रचना ने हंसते हुए कहा.
‘‘पुणे की लड़कियां काफी होशियार होती हैं. मेरी एक साथी है सुमेधा, जिस ने पहली कंपनी को मेरे साथ ही छोड़ा था. वह मेरे सामने वाले अपार्टमैंट्स में ही रहती है. वैसे, वह मेरी गर्लफ्रैंड नहीं है,’’ निर्मल अपने मोबाइल फोन से खेलता हुआ बोला.
‘‘फिर तो अच्छी छनती होगी तुम दोनों में,’’ रचना ने बुझे मन से कहा.
‘‘तुम बिलकुल नहीं बदली,’’ निर्मल ने रचना को बहलाने के इरादे से कहा.
‘‘तुम भी तो कहां बदले हो. कौन कह सकता है कि तुम ने इंजीनियरिंग की डिगरी ली है. भला कोई इंजीनियर पुणे से सिर्फ अपने तरुण दल के साथ ढोल बजाने के लिए इतनी दूर चुरू आ सकता है?’’
‘‘हां रचना, ढोल बजाने का खयाल मुझ में जोश भर देता है. शायद इसलिए, क्योंकि इस की गूंज दूर तक सुनाई देती है. और मेरे तरुण दल की कमी पुणे के दोस्त कहां पूरी कर सकते हैं,’’ निर्मल ने मुसकराते हुए कहा.
निर्मल पढ़ाई के साथसाथ एक सौफ्टवेयर कंपनी में काम कर रहा था. इस बार पंचायत ने बस्ती में ‘समाज समृद्धि यज्ञ’ कराया था. उस में शिरकत करने के लिए ही वह यहां आया था.
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