मुट्ठी में जो था वह राख थी, दूसरों के लिए चमकते सितारे थे, झिलमिलाते, दमकते. पहले मन में कितनी साध थी कि दूर गगन में दमकते इन सितारों को झट से झपट कर मुट्ठी में भर लें. ज्यादा कोशिश न करनी पड़ी, न ही पंजों के बल ज्यादा उचकना पड़ा. आसमान ही इतना झुक आया कि हाथ भी न बढ़ाने पड़े और झोली सितारों से भर गई.

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