Hindi Kahani

पहले बांझ होने और शौहर की मौत के बाद मनहूस का कलंक सहने वाली सायरा ने कुछ ऐसा किया कि...

ईदू की मौत को आज 2 साल पूरे हो गए थे. इस बीच सायरा ने जिस तरह एक बेवा की जिंदगी गुजारी, वह अपनेआप में मिसाल थी.

सायरा ने कभी घर वालों को शिकायत का मौका नहीं दिया, मगर गरीब घरों में समाज और मजहब का कुछ ज्यादा ही खयाल रखा जाता है. खासतौर पर औरतों को गुलाम बना कर रखने में बारबार धर्म को जंजीरों के सहारे जकड़ने की कोशिश की जाती है.

इद्दत के 3 महीने, 10 दिन पूरे होने के बाद भी सायरा ने अपनेआप को एक कैदी समझ कर जिंदगी गुजारी थी. घर के कामकाज के बाद वह अपने छोटे से कमरे में आ कर ईदू की यादों में खो जाती.

शादीशुदा जिंदगी का एक साल कब शुरू हुआ और कब खत्म हो गया, इस को याद करने में बहुत समय नहीं लगता था, लेकिन सायरा के पास पुरानी यादों को दोहराने के अलावा कोई दूसरा काम भी तो नहीं था.

12वीं जमात तक पढ़ी सायरा के लिए जब हाईस्कूल फेल ईदू का रिश्ता आया था, तो वह बहुत देर तक रोती रही थी. हर लड़की की तरह उस ने भी कुछ सपने संजोए थे. बहुत शानदार नहीं, तो छोटीमोटी नौकरी करने वाले दूल्हे की तमन्ना कर के उस ने कोई गुनाह नहीं किया था.

चौक में एक पान की दुकान के मालिक ईदू को जब अपना सरताज बना लेने को उस के अब्बू ने कहा, तो उस ने अब्बू के चेहरे पर फैली बेबसी को बहुत गौर से देखा था. सायरा ने बस इतना कहा था, ‘जो आप की मरजी.’

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