Hindi Kahani. नांदेड़ महानगर की आदर्श कालोनी में महेश राव का अपना एक छोटा सा बंगला था. उन को सुशीला नाम की एक लड़की थी, जो शादी के बाद अपने ससुराल पूना चली गई थी.
2 साल पहले महेश की बीवी एक बीमारी में चल बसी थीं. अब उस बंगले में वह अकेले रह गए थे.
महेश एक बीज कंपनी में खेतीबारी के अफसर थे. काम के सिलसिले में उन्हें कभीकभी दौरे पर भी जाना पड़ता था, इसलिए बंगले की देखभाल ठीक ढंग से नहीं हो पाती थी.
कभीकभी महेश के यारदोस्त कहते कि कब तक अकेले रहोगे? बीमारी का कोई भरोसा नहीं. सेवा करने के लिए तो किसी की जरूरत पड़ेगी?
महेश कहते, ‘‘मैं 50 साल का हो चुका हूं. वैसे भी समाज के लोग क्या कहेंगे?’’
‘‘उन के कहने से क्या होता है? तुम्हारी सेवा के लिए समाज थोड़े ही न आगे आएगा. तुम्हें अपनी चिंता खुद करनी चाहिए, समाज की नहीं,’’ दोस्त समझाते थे.
काफी सोचविचार के बाद महेश शादी करने के लिए राजी हो गए. उन के दूर के एक रिश्तेदार थे, जो एक रिश्ता ले कर आए. लड़की का नाम सविता था. वह तलाकशुदा थी. उस का एक लड़का नंदू अपने पिता के पास था.
महेश ने सविता को देखा. उस की उम्र 35-40 की होगी. नाकनक्श अच्छे, रंग गोरा, भरापूरा बदन. वह हसीन औरत उन्हें भा गई. एक मंदिर में उन की शादी करा दी गई.
महेश हर तरह से सविता का ध्यान रखने लगे. सविता भी कम नहीं थी. वह भी उन की सेवा में जुट गई.
एक साल के अंदर ही सविता ने महेश को अपने काबू में कर लिया था. पिता की शादी के बाद जब सुशीला अपने मायके आई थी, तब उस की सौतेली मां सविता ने उस के साथ में बहुत अच्छा बरताव किया था. वह भी अपनी सौतेली मां से बहुत खुश हुई थी.
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