Story in Hindi.
अस्पताल लाने के घंटेभर बाद ही उस ने दम तोड़ दिया था. उसे बेहोश हालत में वहां लाया गया था. डाक्टर मनोज वाधवानी ने उसे होश में लाने की भरसक कोशिश की, मगर बेकार ही गई. उसे मरा बता दिया गया.
वह रामलाल की 2 साल की बच्ची फुला थी, जो खेलखेल में गिर गई और माथे पर जो चोट लगी, वह शायद गहरी थी, इसलिए फिर उसे होश में न लाया जा सका.
रामलाल अपनी मरी बेटी को ले कर अस्पताल से बाहर निकला. वह अकेला ही था. उस की बीवी सावित्री को भी पता नहीं था, क्योंकि वह शहर के पूर्वी हिस्से में काम करती थी.
जिस फैक्टरी में रामलाल काम करता था, आज वहां छुट्टी थी, इसलिए फुला को उस के भरोसे छोड़ कर सावित्री काम पर चली गई थी.
सावित्री पूछेगी, तो वह क्या जवाब देगा? इसी उधेड़बुन में रामलाल अभी अस्पताल से कुछ दूर पहुंचा होगा कि एक अनजान आदमी उस के पास आ कर बोला, ‘‘तुम्हारी बच्ची को उस डाक्टर ने मार दिया.’’
रामलाल वहीं खड़ा हो गया. वह कभी उस आदमी को देखता, तो कभी अपनी मरी हुई फुला को.
वह आदमी दोबारा बोला, ‘‘यों आंखें फाड़फाड़ कर क्या देख रहे हो? मैं तुम्हारी भलाई की बात कहना चाहता हूं.’’
‘‘भलाई और मेरी... तुम कौन हो? मैं तुम्हें नहीं जानता,’’ रामलाल ने जब यह बात कही, तब हमदर्दी जताते हुए वह आदमी बोला, ‘‘हम एकदूसरे को नहीं जानते हैं, मगर मैं तुम्हारे दुख को समझता हूं. तुम बहुत दुखी हो. बेटी के गम ने तुम्हें भीतर से मार दिया है. अगर मेरा कहना मानोगे, तो मैं तुम्हें मालामाल करवा सकता हूं.’’
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