Emotional Story in Hindi-

‘‘कैसा लगा लड़का तुम्हें?’’ नंदराम ने अपनी बीवी प्रभावती से पूछा.

‘‘और तो सब ठीक है, पर…’’ प्रभावती हिचक गईं.

‘‘तो अपनी संगीता ही कहां की…’’ यह कहते हुए नंदराम भी हिचके. प्रभावती कुछ सोचती हुई सी चुप ही रहीं.

नंदराम प्रभावती के साथ सुबह पैसेंजर रेलगाड़ी से ही गए थे और लड़का देख कर शाम तक वापस इसलिए आ जाना चाहते थे कि वे लड़की को घर पर अकेली नहीं छोड़ना चाहते थे.

एक बार वे दोनों गलती कर चुके थे. बात तब की है, जब उन्होंने मकान के बाहर की बैठक इंटर कालेज में नए आए अंगरेजी के टीचर कीर्ति बाबू को किराए पर दे दी थी. संगीता प्राइवेट बीए कर रही थी. अंगरेजी पूछने वह उस एमए पास टीचर कीर्ति से बैठक में जाने लगी थी.

एक दिन प्रभावती ने संगीता और उस टीचर के बीच बैठक के एकांत में कुछ ऐसावैसा देख लिया था.

नंदराम को सावधान करती हुई वे बोली थीं, ‘मास्टर कीर्ति की आदतें अच्छी नहीं हैं. लालच छोड़ो और उसे किराए की बैठक से निकाल बाहर करो.’

प्रभावती की बात को नंदराम समझ गए. लिहाजा, दूसरे दिन ही उन्होंने उस टीचर को निकाल बाहर किया.

बुरा यह हुआ कि नंदराम के पुश्तैनी दुश्मन जयकिशन बाबू, जिन का घर गली में ठीक नंदराम के घर के सामने था, ने अपना बाहर का कमरा उस टीचर को किराए पर दे दिया.

किराए पर देते हुए जयकिशन बाबू ने टीचर कीर्ति बाबू से कहा, ‘हमारा होनहार लड़का हाईस्कूल में है. कसबे के सभी लड़कों की तरह वह भी अंगरेजी में कमजोर है. उसे अपनी तरह फर्राटेदार अंगरेजी सिखा दें.’’

एक दिन प्रभावती ने पति नंदराम को बताया, ‘कीर्ति बाबू पड़ोसी के चबूतरे पर लगे हैंडपंप से जब पानी भरते हैं, तो संगीता ऊपर छत पर चढ़ कर मुंडेर से उन्हें देखने के लिए झांकती है.’

यह सुनते ही नंदराम परेशान हो गए. नातेरिश्तेदारों के यहां उस के रिश्ते के लिए दौड़ लगाने लगे. जल्दीजल्दी में जो भी लड़का जहां भी मिले, वे संगीता को ब्याह कर कसबे से बाहर कर बदनामी से बचने की कोशिश में जुट गए.

वे मन ही मन सोचा करते, ‘आदमी किसी से नहीं हारता, पर अपनी औलाद से हार जाता है.’

एक दिन संगीता को प्रभावती के सामने नंदराम ने समझाने और जिंदगी की ऊंचनीच बताने की कोशिश की, तो संगीता समझ गई कि पापा यह सब उस से क्यों कह रहे हैं.

पिता से तो उस ने कुछ नहीं कहा, पर बाद में वह मां से बोली, ‘किसी से तो करेंगे हमारी शादी. कीर्ति बाबू क्या बुरे हैं? नौकरी से लगे हैं, देखनेसुनने में भी अच्छे हैं. फर्राटेदार अंगरेजी बोलते हैं.

‘बड़े घर के लड़के हैं. पिता की खासी जमीनजायदाद है. घर पर मोटरसाइकिल है. खुद के पास मोबाइल फोन रहता है. वे होनहार हैं. जल्दी अच्छी जगह पहुंच जाएंगे.’

‘पर वे तो पहले से ही शादीशुदा हैं. सुना है, बीवी बहुत पढ़ीलिखी और किसी अच्छी नौकरी से लगी है. कीर्ति बाबू से ज्यादा कमाती है, पर कीर्ति बाबू के साथ रह कर वह अपनी नौकरी नहीं कर सकती थी और वह नौकरी छोड़ने को राजी नहीं है.

‘कीर्ति बाबू को ससुराल में घरजंवाई बन कर रहना पसंद नहीं, इसलिए नौकरी पर यहां चले आए. लाख अच्छे हों वे, पर हैं तो शादीशुदा…’ प्रभावती बोलीं.

‘क्या फर्क पड़ता है इस से?’ संगीता ने मुंहफट हो कर कहा, ‘बीवी बहुत नकचढ़ी है. अपनी नौकरी और बाप के पैसे का घमंड है उसे. सीधेसच्चे कीर्ति बाबू उस से ब्याह कर के बुरे फंस गए हैं. आजकल शहरों में ऐसे तमाम लोग हैं, जो नौकरी की जगह अलग औरत रखते हैं और शहर में दूसरी औरत…’

‘पागल हुई है क्या? दिमाग खराब है तेरा?’ मां ने फटकारा, ‘ऐसी ऊलजलूल बातें कहीं सोची जाती हैं? कल को बीवी के बच्चे होंगे, तब तू क्या करेगी? बीवी दबंग हुई, तो जूतमपैजार करेगी तुझ से. पुलिस में जा धमकेगी. इतनी बात तू नहीं समझ पा रही?’

अब जब लौट कर वे दोनों स्टेशन पर उतरे, तो नंदराम ने बीवी से फिर बात छेड़ी, ‘‘संगीता जरूर पूछेगी. क्या कहोगी?’’

‘‘कुछ भी कहें, पर संगीता इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होगी,’’ प्रभावती बोलीं, ‘‘लड़का ज्यादा पढ़ालिखा नहीं है. शहर में बरतनों की दुकान करता है.’’

‘‘पर कमाता ठीकठाक है. संगीता को सारे सुख मिलेंगे,’’ नंदराम बोले.

प्रभावती बोलीं, ‘‘ऐसे लड़के को वह कभी भी पसंद नहीं करेगी.’’

‘‘जिस लड़के को देखा था, वह 2 भाई थे. बड़े भाई को बदमाशों ने पैसे के लालच में अपहरण कर लिया था. यह लड़का पुलिस में रिपोर्ट कर आया. बदमाशों ने पैसे की मांग रखी. पुलिस भी बदमाशों से मिली हुई थी. इस लड़के के मन में लालच आ गया. पैसा नहीं दिया. नतीजा यह हुआ कि उन्होंने बड़े भाई की हत्या कर दी. अब पूरी दुकान और मकान का खुद मालिक है.’’

‘‘जो भाई अपने सगे भाई को दगा दे सकता है, वह तुम्हारी संगीता को दगा नहीं देगा, इस बात का क्या भरोसा है?’’ प्रभावती ने शक जाहिर किया.

‘‘तो क्या हम उसे कीर्ति बाबू को सौंप दें?’’ नंदराम बुरी तरह झल्लाए, ‘‘उस की पहले से बीवी है. कल को मार कर भगा देगी वह, फिर खिलाना बेटी को अपने घर बैठा कर जिंदगीभर.’’

‘‘और भी 2-4 लड़के सुने हैं हम लोगों ने. उन्हें क्यों न देखा जाए?’’ प्रभावती ने कहा.

‘‘और तब तक अपनी संगीता के पैर डगमगा गए तो? वह कीर्ति बाबू के साथ ज्यादा उलझ गई तो? कुछ ऊंचनीच हो गई, तो कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे. कसबे को तो देख ही रही हो. बात फैलते देर नहीं लगेगी,’’ कुछ सोच कर वे बोले, ‘‘हम तो कहते हैं, लंगड़ा है तो क्या हुआ, बरतनों की चलती दुकान है. खासा कमा लेता है. अब सारी जायदाद का अकेला मालिक है.

‘‘शक्लोसूरत और पहननाओढ़ना क्या मतलब रखता है आजकल? संगीता को इस शादी के लिए तैयार करना ही चाहिए.’’

हालांकि वे खुद समझ रहे थे, संगीता कैसे भी राजी नहीं होगी इस संबंध के लिए. कहीं कुछ उलटासीधा कर बैठी, तो लड़की से भी हाथ धो बैठेंगे.

वही हुआ. प्रभावती ने संगीता को हंसते हुए सबकुछ सामान्य ढंग से बताया. देखे हुए लड़के की तमाम खूबियां गिनाईं, पर कमियों को भी छिपाया नहीं. आखिर रिश्ते का सवाल था. लड़की बरात आने पर बिदक गई, तो कसबे में बड़ी बदनामी होगी. 2-3 बरातें ऐसे अनमेल संबंधों के चलते लड़कियां दरवाजे से लौटा चुकी हैं. संगीता ने भी ऐसा किया, तो क्या होगा?

संगीता सहेली के घर जाने के बहाने कसबे के कालेज में चली गई और कीर्ति बाबू को जा कर सबकुछ बता दिया.

यह सुन कर कीर्ति बाबू मुसकराए और बोले, ‘‘जिंदगी में चलतेचलते तमाम सवाल हमें ऐसे ही घेर कर खड़े हो जाते हैं संगीता… और अकसर हम परेशानी में पड़ जाते हैं, हम यह तय नहीं कर पाते कि क्या करें, क्या न करें.’’

‘‘लेकिन, हमें जवाब तो तलाशने पड़ेंगे सर… आप बताइए कि हम क्या करें?’’ संगीता ने पूछा.

‘‘यह तुम्हारी जिंदगी है. इस का फैसला तुम्हें करना चाहिए. जिस फैसले पर पहुंचो, उस पर तुम्हें मजबूत रहना चाहिए. तुम क्या सोच रही हो?’’ वे संगीता की आंखों में ताक रहे थे.

संगीता ने सिर झुका लिया और बोली, ‘‘मैं तो आप के अलावा किसी के बारे में कुछ नहीं सोच पा रही.’’

‘‘लेकिन मेरे बारे में तुम्हें सब पता है. तुम मुझे अच्छी लगती हो, इस में शक नहीं. लेकिन हर चीज जो हमें अच्छी लगे, जरूरी नहीं है, वह हासिल भी हो जाए. हासिल करने की हिम्मत भी मुझ में नहीं है… मेरी बीवी झगड़ालू है, यह मैं अच्छी तरह से जानता हूं. वह मेरी और तुम्हारी जिंदगी नरक बना देगी, इस का एहसास मुझे है.’’

‘‘तब? तब क्या मैं आप को पाने के सपने न देखूं?’’ संगीता ने सवाल पूछा.

कीर्ति बाबू काफी देर तक चुप रहे, फिर बोले, ‘‘मांबाप से कहो कि तुम्हारे लिए कोई और अच्छा लड़का देखें, जो तुम्हारे लायक हो… तुम उस के साथ खुश रह सको,’’ मन मार कर कीर्ति बाबू ने संगीता को सलाह दी.

‘‘गांव में आप को ले कर मेरी बदनामी शुरू हो गई है. बात कल को बढ़ जाएगी,’’ संगीता बोली, ‘‘लड़का मिलना आसान तो नहीं है. समय लग सकता है और मैं आप से मिले बिना रह नहीं सकती… ऐसे में क्या होगा?’’

‘‘पिताजी से कहो, तुम्हें पढ़ने के लिए शहर भेज दें,’’ कीर्ति बाबू बोले, ‘‘वहां मन लगा कर पढ़ो. कंप्यूटर सीखो. हुनर बढ़ाओ और जब रिश्ता ठीक सा मिल जाए, ब्याह कर लेना.

‘‘मैं भी नहीं चाहता कि यह नौकरी तुम्हारी वजह से खो बैठूं. नौकरी न रही, तो बीवी मुझ पर और दबाव डालेगी कि उस के साथ रहूं, जो मैं नहीं चाहता.’’

उम्मीद नहीं थी कि कीर्ति बाबू उसे इस तरह टरका देंगे. वह उन्हें साहसी मान रही थी. उन के साथ बिना शादी के ही रहने को तैयार हो रही थी, पर अब तो हालात ही बदल गए थे.

संगीता ने घर आ कर मां से कहा, ‘‘जहां आप लोग लड़का देख आए हैं, उसी से रिश्ता तय कर दीजिए…’’

नंदराम ने सुना, तो उन्हें अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ, पर वे बहुत खुश हो गए और शहर चले गए.  Emotional Story in Hindi

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